Practise with cards
One card at a time. Think of the answer, turn the card, and say whether you knew it. A card you did not know comes back in this round; one you knew returns a few days later.
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प्रयोग: दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 83 कार्ड। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है; शक हो तो किताब का वही पृष्ठ खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
तारों का मतलब: ★वाले कार्ड ज़्यादा ज़रूरी हैं · ★★सबसे ज़रूरी; समय कम हो तो पहले इन्हें दोहराइए।
सेट 1 — बहुराष्ट्रीय कंपनी और निवेश (कार्ड 1–9)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★1 | बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं? | “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” (पृष्ठ 56) |
| 2 | बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन कहाँ होता था, और दूर के देशों को कौन जोड़ता था? | उत्पादन मुख्यतः देशों की सीमाओं के अंदर होता था; सीमा पार केवल कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद जाते थे, और देशों को जोड़ने का मुख्य ज़रिया व्यापार था (पृष्ठ 56) |
| ★3 | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपने कार्यालय और कारखाने कहाँ लगाती हैं, और क्यों? | जहाँ उन्हें सस्ता श्रम और दूसरे संसाधन मिल सकें; ताकि उत्पादन लागत कम हो और लाभ अधिक हो (पृष्ठ 56) |
| ★4 | किताब की औद्योगिक उपकरण बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी का काम किन देशों में बँटा है? | संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुसंधान केन्द्र में डिज़ाइन, चीन में पुर्ज़े, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में पुर्ज़ों को जोड़ना, बिक्री पूरे विश्व में, और ग्राहक सेवा भारत के कॉल सेंटरों से (पृष्ठ 56) |
| 5 | औद्योगिक उपकरण वाली उस कंपनी को चीन, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप, और भारत से क्या लाभ मिलता है? | चीन: सस्ता विनिर्माण केन्द्र; मेक्सिको और पूर्वी यूरोप: अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से निकटता; भारत: अत्यंत कुशल इंजीनियर, और ग्राहक देखभाल सेवा दे सकने वाले अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक (पृष्ठ 57) |
| ★6 | उत्पादन को इस तरह कई देशों में बाँटने से बहुराष्ट्रीय कंपनी की लागत में कितनी बचत हो सकती है? | लगभग 50–60 प्रतिशत (पृष्ठ 57) |
| ★★7 | बहुराष्ट्रीय कंपनी उत्पादन इकाई लगाने के लिए जगह चुनते समय किन बातों को देखती है? | जगह बाज़ार के नज़दीक हो; वहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले; उत्पादन के दूसरे कारक उपलब्ध हों; और सरकारी नीतियाँ उसके हितों का ध्यान रखें (पृष्ठ 57) |
| ★★8 | निवेश किसे कहते हैं, और कोई भी निवेश किस आशा से किया जाता है? | भूमि, भवन, मशीन और दूसरे उपकरण जैसी परिसंपत्तियाँ ख़रीदने में खर्च किया गया पैसा; इस आशा से कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ कमाएँगी (पृष्ठ 57) |
| ★★9 | विदेशी निवेश किसे कहते हैं? | “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।” (पृष्ठ 57) |
सेट 2 — उत्पादन फैलाने के तरीके और फोर्ड मोटर्स (कार्ड 10–23)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| 10 | संयुक्त उत्पादन किसे कहते हैं? | जब बहुराष्ट्रीय कंपनी किसी देश की स्थानीय कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन करती है (पृष्ठ 57) |
| ★★11 | संयुक्त उत्पादन से स्थानीय कंपनी को कौन-से दो लाभ होते हैं? | (1) बहुराष्ट्रीय कंपनी अतिरिक्त निवेश के लिए धन दे सकती है, जैसे तेज़ उत्पादन के लिए मशीनें ख़रीदने के लिए; (2) वह उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी साथ ला सकती है (पृष्ठ 57) |
| ★★12 | ! बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता क्या है? | “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” (पृष्ठ 58) |
| ★13 | अमेरिकी कंपनी कारगिल फूड्स ने भारत में क्या ख़रीदा, और उससे उसे क्या मिला? | परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियाँ; परख फूड्स का बड़ा विपणन तंत्र था, और उसके चार तेल शोधक केन्द्रों पर अब कारगिल का नियंत्रण है (पृष्ठ 58) |
| 14 | किताब के अनुसार कारगिल अब भारत में किस स्थान पर है? | 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी (पृष्ठ 58) |
| ★15 | कई शीर्ष बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कितनी बड़ी हैं? किताब उनकी संपत्ति की तुलना किससे करती है? | उनकी संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के पूरे बजट से भी अधिक है (पृष्ठ 58) |
| ★★16 | विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किन उद्योगों में छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं? | वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल का सामान; छोटे उत्पादक माल बनाकर कंपनी को देते हैं, और कंपनी उसे अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती है (पृष्ठ 58) |
| ★17 | दूर के छोटे उत्पादकों पर बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की पकड़ कितनी है? | उनमें उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तों का निर्धारण करने की “प्रचण्ड क्षमता” होती है (पृष्ठ 58) |
| 18 | छोटे उत्पादकों से माल बनवाने के कौन-से दो उदाहरण किताब तस्वीरों में दिखाती है? | लुधियाना के एक घर में एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए फुटबॉल बनते हुए; और विकासशील देशों में बनी जीन्स, जो अमेरिका में 6500 रु. में बिक रही है (पृष्ठ 58) |
| ★★19 | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूर के स्थानों के उत्पादन पर किन तरीकों से प्रभाव जमाती हैं? | स्थानीय कंपनियों से साझेदारी, आपूर्ति के लिए स्थानीय कंपनियों का इस्तेमाल, स्थानीय कंपनियों से निकट प्रतिस्पर्धा, या उन्हें ख़रीदकर; नतीजा यह कि दूर-दूर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है (पृष्ठ 58) |
| ★20 | फोर्ड मोटर्स को बहुराष्ट्रीय कंपनी क्यों कहेंगे? | यह अमेरिकी कंपनी विश्व के 26 देशों में फैली है, और इसने भारत में भी संयंत्र लगाया; यानी यह एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती है। किताब इसे विश्व की सबसे बड़ी मोटरगाड़ी निर्माता कंपनी बताती है (पृष्ठ 59) |
| ★★21 | फोर्ड मोटर्स भारत कब आई, और उसने कहाँ, कितना निवेश किया? | 1995 में; चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश करके विशाल संयंत्र लगाया, भारत में जीपों और ट्रकों की प्रमुख निर्माता महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से (पृष्ठ 59) |
| ★22 | वर्ष 2017 तक फोर्ड मोटर्स भारत में कितनी कारें बेच रही थी, और भारत से कितनी कारें किन देशों को निर्यात हुईं? | भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें; 1,81,000 कारें दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को (पृष्ठ 59) |
| 23 | किताब के अनुसार हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में क्या बदला है? | भारत में बेचने के लिए कारों का उत्पादन बंद कर दिया है, पर कारों और कार के इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है (पृष्ठ 59) |
सेट 3 — विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण (कार्ड 24–29)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★24 | लंबे समय से देशों को आपस में जोड़ने का मुख्य माध्यम क्या रहा है? | विदेश व्यापार; व्यापारिक हितों के कारण ही ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी व्यापारिक कंपनियाँ भारत की ओर आकर्षित हुईं (पृष्ठ 59) |
| ★★25 | विदेश व्यापार से उत्पादकों और ख़रीदारों को क्या मिलता है? | उत्पादकों को अपने देश से बाहर के बाज़ारों तक पहुँचने और वहाँ प्रतिस्पर्धा करने का अवसर; ख़रीदारों को अपने देश में बनी वस्तुओं से आगे अधिक विकल्प (पृष्ठ 59) |
| ★26 | ! विदेश व्यापार और विदेशी निवेश में क्या अंतर है? | विदेश व्यापार: उत्पादक अपनी वस्तुएँ अपने देश से बाहर के बाज़ारों में बेचते हैं, और दूसरे देशों में बनी वस्तुओं का आयात होता है (पृष्ठ 59); विदेशी निवेश: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देश में ही भूमि, भवन, मशीन और अन्य उपकरणों जैसी परिसंपत्तियों की ख़रीद में पैसा लगाती हैं (पृष्ठ 57) |
| ★27 | चीन के खिलौने भारत में क्यों आए, और एक वर्ष में क्या हुआ? | चीनी विनिर्माताओं ने देखा कि भारत में खिलौने अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं, और निर्यात शुरू किया; सस्ते दाम और नये डिज़ाइनों के कारण एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली (पृष्ठ 60) |
| ★★28 | चीनी खिलौनों के आने से भारतीय ख़रीदारों, चीनी निर्माताओं और भारतीय निर्माताओं पर क्या असर पड़ा? | ख़रीदार: कम कीमत पर अधिक विकल्प; चीनी निर्माता: व्यवसाय फैलाने का अवसर; भारतीय निर्माता: हानि, क्योंकि उनके खिलौने कम बिकते हैं (पृष्ठ 60) |
| ★★29 | व्यापार खुलने पर दो देशों के बाज़ार कैसे जुड़ते हैं? | वस्तुएँ एक बाज़ार से दूसरे में जाती हैं, विकल्प बढ़ते हैं, दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है, और हज़ारों मील दूर के उत्पादक भी आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं: “इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।” (पृष्ठ 61) |
सेट 4 — वैश्वीकरण और प्रौद्योगिकी (कार्ड 30–39)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★30 | वैश्वीकरण किसे कहते हैं? | “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” (पृष्ठ 62) |
| ★★31 | वैश्वीकरण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका कौन निभा रहा है? | बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (पृष्ठ 62) |
| ★32 | विगत दो-तीन दशकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कारण विदेशी निवेश और विदेश व्यापार में क्या बदला? | कंपनियाँ उत्पादन के लिए सस्ती जगहें खोज रही हैं, वहाँ उनका निवेश बढ़ रहा है, देशों के बीच विदेश व्यापार में तीव्र वृद्धि हो रही है, और विदेश व्यापार का बड़ा भाग बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नियंत्रण में है। किताब का उदाहरण: भारत में फोर्ड का कार संयंत्र दूसरे विकासशील देशों को कारें और विश्व भर में अपने कारखानों के लिए कार-पुर्ज़े भी निर्यात करता है (पृष्ठ 61) |
| ★★33 | ! वैश्वीकरण में देशों के बीच किन चीज़ों का आदान-प्रदान बढ़ रहा है, और किसका ज़्यादा नहीं बढ़ा? | वस्तुओं और सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का; लोग बेहतर आय, रोज़गार और शिक्षा के लिए दूसरे देश जाते तो हैं, पर अनेक प्रतिबंधों के कारण लोगों के आवागमन में ज़्यादा वृद्धि नहीं हुई (पृष्ठ 62) |
| ★★34 | वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तेज़ करने वाला मुख्य कारक कौन-सा है? | प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति (पृष्ठ 62) |
| ★35 | विगत पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी की उन्नति से क्या संभव हुआ? | लंबी दूरियों तक वस्तुओं की तेज़ आपूर्ति, कम लागत पर (पृष्ठ 62) |
| ★36 | माल ढुलाई में कंटेनरों से क्या फ़ायदा हुआ? | वस्तुएँ जहाज़, रेल, वायुयान और ट्रक पर बिना क्षति के लादी जा सकती हैं; ढुलाई-लागत में भारी बचत हुई और माल बाज़ार तक जल्दी पहुँचता है (पृष्ठ 62) |
| ★37 | सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में किताब कौन-सी सुविधाएँ गिनाती है? | दूरसंचार (टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स), जिन्हें संचार उपग्रहों ने सुगम बनाया; कंप्यूटर; और इंटरनेट, जिससे ई-मेल भेजी जाती है और वॉयस मेल से बात होती है (पृष्ठ 63) |
| ★38 | लंदन के पाठकों की पत्रिका वाले किताब के उदाहरण में प्रौद्योगिकी कहाँ-कहाँ काम आती है? | पाठ इंटरनेट से दिल्ली आता है; डिज़ाइन के निर्देश दूरसंचार से; डिज़ाइन कंप्यूटर पर; छपी पत्रिकाएँ वायुमार्ग से लंदन; और भुगतान इंटरनेट (ई-बैंकिंग) से लंदन के बैंक से दिल्ली के बैंक को तुरंत (पृष्ठ 63) |
| ★39 | वैश्वीकरण से सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों को कौन-से नये अवसर मिले? | लंदन की कंपनी के लिए भारतीय कंपनी का पत्रिका छापना और कॉल सेंटर इसके उदाहरण हैं; इसके अलावा आँकड़ा प्रविष्टि (डाटा एन्ट्री), लेखाकरण, प्रशासनिक कार्य, इंजीनियरिंग जैसी कई सेवाएँ भारत जैसे देशों में अब सस्ते में मिलती हैं और विकसित देशों को निर्यात होती हैं (पृष्ठ 67) |
सेट 5 — उदारीकरण: व्यापार अवरोधक हटाना (कार्ड 40–50)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★40 | व्यापार अवरोधक किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए। | विदेश व्यापार पर लगाया गया प्रतिबंध; जैसे आयात पर कर (पृष्ठ 64) |
| ★41 | सरकार व्यापार अवरोधकों का प्रयोग किसलिए कर सकती है? | विदेश व्यापार बढ़ाने या घटाने (नियमित करने) के लिए, और यह तय करने के लिए कि देश में कौन-सी वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयात हों (पृष्ठ 64) |
| ★42 | सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगा दे, तो क्या होगा? | ख़रीदारों को आयातित खिलौनों की अधिक कीमत चुकानी होगी; चीनी खिलौने सस्ते नहीं रहेंगे, उनका आयात अपने आप घटेगा, और भारत के खिलौना-निर्माता अधिक समृद्ध होंगे (पृष्ठ 64) |
| ★★43 | ! कोटा किसे कहते हैं? | सरकार द्वारा आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित करना; यह आयात पर कर से अलग एक व्यापार अवरोधक है (पृष्ठ 64) |
| ★★44 | स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर प्रतिबंध क्यों लगाए? | देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण देने के लिए; 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे, और आयात से प्रतिस्पर्धा उन्हें बढ़ने नहीं देती (पृष्ठ 64) |
| ★45 | उस दौर में भारत ने किन ज़रूरी चीज़ों के आयात की ही अनुमति दी? | केवल अनिवार्य चीज़ें, जैसे मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम (पृष्ठ 64) |
| 46 | ! क्या विकसित देशों ने भी कभी अपने उत्पादकों को संरक्षण दिया? | हाँ; सभी विकसित देशों ने विकास के प्रारंभिक चरणों में घरेलू उत्पादकों को अलग-अलग तरीकों से संरक्षण दिया है (पृष्ठ 64) |
| ★★47 | भारत में नीतियों में दूरगामी परिवर्तन कब से हुए, और सरकार ने ऐसा क्यों किया? | करीब सन् 1991 के प्रारंभ से; सरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा का समय आ गया है; प्रतिस्पर्धा में उन्हें गुणवत्ता सुधारनी होगी, तो उनका प्रदर्शन सुधरेगा। प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इस निर्णय का समर्थन किया (पृष्ठ 64) |
| ★★48 | उदारीकरण किसे कहते हैं? | “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।” (पृष्ठ 64) |
| ★49 | ! व्यापार के उदारीकरण से व्यवसायियों को क्या छूट मिली, और सरकार को “अधिक उदार” क्यों कहा जाता है? | व्यवसायी मुक्त रूप से तय कर सकते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें; सरकार पहले की तुलना में कम नियंत्रण करती है, सारा नियंत्रण नहीं छोड़ती (पृष्ठ 64) |
| ★★50 | व्यापार और निवेश के उदारीकरण ने वैश्वीकरण में कैसे मदद की? | अवरोध हटने से वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगम हुआ और विदेशी कंपनियाँ यहाँ अपने कार्यालय और कारखाने लगा सकीं; किताब के सारांश में, उदारीकरण ने व्यापार और निवेश अवरोधकों को हटाकर वैश्वीकरण को सुगम बनाया (पृष्ठ 64, 71) |
सेट 6 — विश्व व्यापार संगठन (कार्ड 51–56)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★51 | कुछ बहुत प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठन विदेश व्यापार और विदेशी निवेश के अवरोधकों के बारे में क्या मानते हैं? | सभी अवरोधक हानिकारक हैं, कोई अवरोधक नहीं होना चाहिए; देशों के बीच मुक्त व्यापार हो, और विश्व के सभी देश अपनी नीतियाँ उदार बनाएँ (पृष्ठ 65) |
| ★★52 | विश्व व्यापार संगठन का ध्येय क्या है, और वह क्या काम करता है? | अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना; वह अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम तय करता है और देखता है कि उनका पालन हो (पृष्ठ 65) |
| ★★53 | ! विश्व व्यापार संगठन किसकी पहल पर शुरू हुआ, और किताब के अनुसार इसके कितने सदस्य हैं? | विकसित देशों की पहल पर; विश्व के लगभग 160 देश इसके सदस्य हैं (पृष्ठ 65) |
| ★★54 | व्यवहार में विश्व व्यापार संगठन के नियम विकसित और विकासशील देशों पर कैसे लागू हुए? | विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे, जबकि नियमों ने विकासशील देशों को अवरोधक हटाने के लिए विवश किया (पृष्ठ 65) |
| ★55 | किताब के अनुसार अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद और कुल रोज़गार में कृषि का हिस्सा कितना है? | जी.डी.पी. में मात्र एक प्रतिशत, कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत; जबकि भारत में अधिकांश रोज़गार और जी.डी.पी. का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि से आता है (पृष्ठ 65) |
| ★★56 | अमेरिकी सरकार की भारी धन राशि से दूसरे देशों के किसानों पर क्या असर पड़ता है, और विकासशील देश क्या पूछते हैं? | अमेरिकी किसान अपनी उपज असाधारण रूप से कम कीमत पर बेच पाते हैं; अधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में कम कीमत पर बिककर वहाँ के किसानों को बुरी तरह प्रभावित करती है। विकासशील देश पूछते हैं: “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?” (पृष्ठ 65) |
सेट 7 — भारत पर असर: किसे लाभ मिला (कार्ड 57–65)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★57 | वैश्वीकरण से किन उपभोक्ताओं को लाभ हुआ, और कैसे? | उपभोक्ताओं को, विशेषकर शहरों के धनी वर्ग को: पहले से अधिक विकल्प, अनेक उत्पादों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत, और पहले से ऊँचा जीवन स्तर (पृष्ठ 66) |
| ★★58 | क्या उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का असर एक जैसा पड़ा? | नहीं: “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।” (पृष्ठ 66) |
| ★59 | विगत 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश क्यों बढ़ाया, और किन क्षेत्रों में? | क्योंकि भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है; शहरी इलाकों के उद्योगों में: सेलफोन, मोटर गाड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ठंडे पेय पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ, और बैंकिंग जैसी सेवाएँ (पृष्ठ 66) |
| ★60 | बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इन उत्पादों के ख़रीदार कौन हैं, और इन उद्योगों से और किसे फ़ायदा हुआ? | ज़्यादातर ख़रीदार संपन्न वर्ग के लोग हैं; इन उद्योगों और सेवाओं में नये रोज़गार बने, और इन्हें कच्चा माल आदि देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं (पृष्ठ 66) |
| ★61 | शीर्ष भारतीय कंपनियों को बढ़ी प्रतिस्पर्धा से कैसे लाभ हुआ? | उन्होंने नवीनतम प्रौद्योगिकी और उत्पादन प्रणाली में निवेश किया और अपने उत्पादन-मानक ऊँचे किए; कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करके लाभ कमाया (पृष्ठ 67) |
| ★★62 | वैश्वीकरण से बहुराष्ट्रीय बनी किन भारतीय कंपनियों के नाम किताब देती है? | टाटा मोटर्स (मोटरगाड़ियाँ), इंफोसिस (आई.टी.), रैनबैक्सी (दवाइयाँ), एशियन पेंट्स (पेंट), सुंदरम फास्टनर्स (नट और बोल्ट) (पृष्ठ 67) |
| ★★63 | विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए बनाए जा रहे विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) क्या हैं? | केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा बनाए जा रहे औद्योगिक क्षेत्र, जिनमें विश्व स्तरीय सुविधाएँ होनी चाहिए: बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक सुविधाएँ (पृष्ठ 67) |
| ★★64 | ! विशेष आर्थिक क्षेत्र में उत्पादन इकाई लगाने वाली कंपनियों को कर में क्या छूट है? | आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता (पृष्ठ 67) |
| ★★65 | श्रम कानूनों में लचीलेपन से कंपनियों को क्या छूट मिली, और क्यों? | नियमित आधार पर रखने के बजाय, काम का दबाव अधिक होने पर छोटी अवधि के लिए श्रमिक रखना: “कंपनी की श्रम लागत में कटौती करने के लिए ऐसा किया जाता है।” फिर भी विदेशी कंपनियाँ और अधिक लचीलापन माँग रही हैं (पृष्ठ 67) |
सेट 8 — छोटे उत्पादक और श्रमिक: रवि और सुशीला (कार्ड 66–79)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★66 | रवि ने अपनी कंपनी कब, कहाँ और क्या बनाने के लिए शुरू की? | सन् 1992 में, तमिलनाडु के औद्योगिक शहर होसुर में, संधारित्र बनाने के लिए, बैंक से ऋण लेकर; संधारित्र ट्यूबलाइट, टेलीविज़न समेत अनेक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगते हैं (पृष्ठ 68) |
| 67 | तीन वर्षों में होसुर के रवि की कंपनी कितनी बढ़ी? | उत्पादन बढ़ा, और कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे (पृष्ठ 68) |
| ★★68 | होसुर के रवि का संघर्ष कब और किस फ़ैसले से शुरू हुआ? | सन् 2001 में, जब सरकार ने विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटा दिए (पृष्ठ 68) |
| ★69 | रवि की ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ आयातित संधारित्र क्यों ख़रीदने लगीं? | बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा ने इन कंपनियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने को विवश कर दिया था; उनमें से कुछ संधारित्र आयात करना पसंद करती थीं, क्योंकि आयातित माल की कीमत रवि जैसे लोगों की कीमत से आधी होती थी (पृष्ठ 68) |
| ★★70 | होसुर के रवि की कंपनी की अब क्या हालत है? | वह वर्ष 2000 के आधे से भी कम संधारित्र बनाता है, और उसके पास केवल सात श्रमिक हैं; हैदराबाद और चेन्नई में इसी व्यवसाय वाले उसके कई दोस्तों ने अपनी इकाइयाँ बंद कर दीं (पृष्ठ 68) |
| ★★71 | किन उद्योगों के छोटे विनिर्माताओं पर प्रतिस्पर्धा की कड़ी मार पड़ी? | बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल; कई इकाइयाँ बंद हुईं और अनेक श्रमिक बेरोज़गार हुए (पृष्ठ 68) |
| ★72 | भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक कहाँ काम करते हैं, और कितने? | लघु और मध्यम उद्योगों में, 11 करोड़ (पृष्ठ 68) |
| ★★73 | बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण नियोक्ता श्रमिकों को रोज़गार देने में क्या पसंद करते हैं, और श्रमिक के लिए इसका क्या मतलब है? | लचीलापन: “इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” (पृष्ठ 69) |
| ★74 | भारतीय वस्त्र निर्यातक अपनी लागत कैसे घटाते हैं, और क्यों? | अमेरिका और यूरोप की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सबसे सस्ती वस्तुएँ खोजती हैं; उनके बड़े ऑर्डर पाने के लिए निर्यातक लागत घटाते हैं। कच्चे माल की लागत नहीं घट सकती, इसलिए श्रम-लागत घटाते हैं: स्थायी के बजाय अस्थायी रोज़गार, ताकि वर्ष भर वेतन न देना पड़े (पृष्ठ 69) |
| ★75 | वस्त्र निर्यात उद्योग में श्रमिकों के काम की हालत कैसी है? | बहुत लंबे कार्य-घंटे, ज़्यादा माँग के समय नियमित रूप से रात में भी काम, और काफ़ी कम मज़दूरी; प्रतिस्पर्धा से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का लाभ बढ़ा, पर श्रमिकों को लाभ में न्यायसंगत हिस्सा नहीं मिला (पृष्ठ 69) |
| 76 | दिल्ली के वस्त्र निर्यातक उद्योग में स्थायी श्रमिक के रूप में सुशीला को कौन-से लाभ मिलते थे? | स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि, और अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी (पृष्ठ 69) |
| ★77 | दिल्ली की श्रमिक सुशीला की फैक्ट्री बंद होने के बाद उसका रोज़गार कैसे बदला? | फैक्ट्री 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में बंद हुई; छह माह खोजने के बाद घर से 30 कि.मी. दूर काम मिला; वहाँ कई वर्षों तक काम करने के बाद भी वह अस्थायी श्रमिक है और पहले से आधे से भी कम कमाती है (पृष्ठ 69) |
| 78 | 35 वर्ष की श्रमिक सुशीला का आज एक दिन कैसा होता है? | सप्ताह के सातों दिन, सुबह 7.30 बजे घर से निकलकर शाम 10 बजे लौटती है; एक दिन काम नहीं, तो उस दिन की मज़दूरी नहीं; पहले वाले लाभ अब नहीं मिलते (पृष्ठ 69) |
| ★79 | आज भारत में अधिकतर श्रमिक किस क्षेत्र में हैं, और संगठित क्षेत्र में क्या हो रहा है? | अधिकतर असंगठित क्षेत्र में; संगठित क्षेत्र में भी काम की परिस्थितियाँ धीरे-धीरे असंगठित क्षेत्र जैसी होती जा रही हैं, और सुशीला जैसे श्रमिकों को अब पहले वाला संरक्षण और लाभ नहीं मिलता (पृष्ठ 70) |
सेट 9 — न्यायसंगत वैश्वीकरण (कार्ड 80–83)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★80 | ! क्या वैश्वीकरण सबके लिए लाभप्रद रहा है? किसे लाभ मिला, और कौन प्रभावित हुआ? | नहीं: “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।” किताब के सारांश में: बढ़ती प्रतिस्पर्धा से अनेक छोटे उत्पादक और श्रमिक प्रभावित हुए (पृष्ठ 70, 71) |
| ★★81 | न्यायसंगत वैश्वीकरण क्या करेगा? | “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।” (पृष्ठ 70) |
| ★★82 | न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए सरकार क्या-क्या कर सकती है? | उसकी नीतियाँ केवल धनी और प्रभावशाली लोगों की नहीं, देश के सभी लोगों के हितों की रक्षा करें; श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को उनके अधिकार मिलें; छोटे उत्पादकों की मदद, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ; ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग; और न्यायसंगत नियमों के लिए विश्व व्यापार संगठन से समझौते। विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा (पृष्ठ 70) |
| ★★83 | न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में जनता की क्या भूमिका हो सकती है? | महत्त्वपूर्ण: विगत कुछ वर्षों में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है; किताब में हांगकांग में विश्व व्यापार संगठन के ख़िलाफ़ 2005 के प्रदर्शन की तस्वीर है (पृष्ठ 70, 71) |
अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए
बहुराष्ट्रीय कंपनी: एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व · निवेश का सबसे आम रास्ता: स्थानीय कंपनियाँ ख़रीदना (कारगिल ने परख फूड्स को) फोर्ड मोटर्स: 26 देश · 1995 में भारत · चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ · वर्ष 2017 तक भारत में 88,000 बिक रही थीं, 1,81,000 निर्यात हुईं बाज़ारों का एकीकरण: विदेश व्यापार से विकल्प बढ़ते हैं, दाम एक समान होने लगते हैं · चीनी खिलौने: एक वर्ष में 70–80 प्रतिशत दुकानें वैश्वीकरण: देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण · वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश, प्रौद्योगिकी तेज़ी से; लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा · मुख्य कारक: प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति उदारीकरण: अवरोध और प्रतिबंध हटाना · करीब सन् 1991 के प्रारंभ से · कोटा = आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा विश्व व्यापार संगठन: विकसित देशों की पहल · लगभग 160 सदस्य · व्यवहार में विकसित देशों ने अपने अवरोधक बनाए रखे विदेशी निवेश के लिए: सेज़ (आरंभिक पाँच वर्ष कोई कर नहीं) · श्रम कानूनों में लचीलापन (श्रम लागत घटाने के लिए) असर एक समान नहीं: रवि (1992, होसुर; 20 से सात श्रमिक) · सुशीला (स्थायी से अस्थायी) · लघु और मध्यम उद्योग: 11 करोड़ श्रमिक · रास्ता: न्यायसंगत वैश्वीकरण