Practise with cards
One card at a time. Think of the answer, turn the card, and say whether you knew it. A card you did not know comes back in this round; one you knew returns a few days later.
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प्रयोग: दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 72 कार्ड। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है; शक हो तो किताब का वही पृष्ठ खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
तारों का मतलब: ★वाले कार्ड ज़्यादा ज़रूरी हैं · ★★सबसे ज़रूरी; समय कम हो तो पहले इन्हें दोहराइए।
सेट 1 — बाज़ार में उपभोक्ता: नियम क्यों चाहिए (कार्ड 1–9)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★1 | बाज़ार में हमारी भागीदारी किन दो रूपों में होती है? | उत्पादक और उपभोक्ता, दोनों रूपों में; उपभोक्ता के रूप में हम तब भागीदार होते हैं, जब अपनी ज़रूरत की वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदते हैं (पृष्ठ 76) |
| ★★2 | किताब के अनुसार बाज़ार में उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम क्यों चाहिए? | “बाज़ार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमजोर स्थिति में पाता है।” (पृष्ठ 76) |
| ★3 | खरीदी गई वस्तु की शिकायत करने पर विक्रेता का आम जवाब क्या होता है? | वह सारी ज़िम्मेदारी खरीदने वाले पर डालने की कोशिश करता है: “आपने जो खरीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” मानो बिक्री के बाद उसकी कोई ज़िम्मेदारी ही नहीं रही (पृष्ठ 76) |
| ★★4 | बाज़ार में व्यापारी अनुचित व्यापार किन तरीकों से करते हैं? | दुकानदार उचित वज़न से कम तौलते हैं, व्यापारी ऐसे शुल्क जोड़ देते हैं जो पहले बताए नहीं गए, या मिलावटी और दोषपूर्ण वस्तुएँ बेची जाती हैं (पृष्ठ 76) |
| ★★5 | बाज़ार कब उचित तरीके से काम नहीं करता? | जब उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली हों, और उपभोक्ता कम मात्रा में खरीदते हों और बिखरे हुए हों; ख़ासकर तब, जब उत्पादन बड़ी कंपनियाँ कर रही हों (पृष्ठ 76) |
| ★6 | बड़ी कंपनियाँ उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए क्या करती हैं? | अधिक पूँजी वाली, शक्तिशाली कंपनियाँ चालाकी से बाज़ार को प्रभावित करती हैं और समय-समय पर मीडिया और दूसरे स्रोतों से गलत सूचना देती हैं (पृष्ठ 76) |
| ★7 | शिशुओं के दूध के पाउडर के बारे में एक कंपनी ने क्या दावा किया, और अंत में क्या हुआ? | कंपनी ने इसे माँ के दूध से बेहतर, सबसे वैज्ञानिक उत्पाद बताकर कई वर्षों तक पूरे विश्व में बेचा; कई वर्षों के लगातार संघर्ष के बाद उसे मानना पड़ा कि वह झूठे दावे कर रही थी (पृष्ठ 76, 77) |
| 8 | सिगरेट बनाने वाली कंपनियों से क्या मनवाने के लिए न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी? | यह कि उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है (पृष्ठ 77) |
| 9 | पृष्ठ 76 के कार्टून में लड़का अपने सामान के बारे में क्या शिकायत करता है? | कि उसे जानबूझकर ऐसा बनाया गया कि कुछ महीनों में बेकार हो जाए, ताकि उसे नया खरीदना पड़े (पृष्ठ 76) |
सेट 2 — उपभोक्ता आंदोलन और कोपरा (कार्ड 10–18)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★10 | भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत क्यों हुई? | उपभोक्ताओं के असंतोष से, क्योंकि विक्रेता कई अनुचित व्यावसायिक व्यवहारों में शामिल थे और “बाज़ार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।” (पृष्ठ 77) |
| 11 | उपभोक्ता आंदोलन से पहले कोई उपभोक्ता किसी ब्रांड या दुकान से असंतुष्ट होता, तो आम तौर पर क्या करता था? | वह उस ब्रांड का उत्पाद खरीदना या उस दुकान से खरीदारी करना बंद कर देता था; माना जाता था कि वस्तु या सेवा खरीदते वक्त सावधानी बरतना उपभोक्ता की ज़िम्मेदारी है (पृष्ठ 77) |
| ★12 | उपभोक्ता आंदोलन ने वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता की ज़िम्मेदारी के बारे में क्या बदला? | गुणवत्ता पक्की करने की ज़िम्मेदारी विक्रेताओं पर भी डाल दी; लोगों में यह जागरूकता लाने में भारत और पूरे विश्व की संस्थाओं को कई वर्ष लगे (पृष्ठ 77) |
| ★13 | भारत में उपभोक्ता आंदोलन का जन्म किस रूप में हुआ? | एक ‘सामाजिक बल’ के रूप में, ताकि उपभोक्ताओं के हितों को अनैतिक और अनुचित व्यवसाय कार्यों से बचाया जा सके और बढ़ावा दिया जा सके (पृष्ठ 77) |
| ★★14 | ! भारत में उपभोक्ता आंदोलन व्यवस्थित रूप में किस दशक में उभरा, और किन कारणों से? | “अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट की वजह से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ।” आंदोलन 1986 में शुरू नहीं हुआ; 1986 में उसके दबाव से कानून बना (पृष्ठ 77, 78) |
| ★15 | 1970 के दशक तक उपभोक्ता संस्थाएँ क्या करने लगी थीं? | बड़े स्तर पर उपभोक्ता अधिकार से जुड़े लेख लिखने और प्रदर्शनी लगाने लगीं; सड़क यात्री परिवहन में भीड़-भाड़ और राशन दुकानों के अनुचित कामों पर नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल बनाए (पृष्ठ 77) |
| ★16 | 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ताओं के लिए क्या किया, और उसका क्या असर हुआ? | उपभोक्ता सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश अपनाए; ये राष्ट्रों और उपभोक्ता की वकालत करने वाले समूहों के लिए अपनी सरकारों पर दबाव डालने का हथियार बने, और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आंदोलन का आधार बने (पृष्ठ 78) |
| ★17 | उपभोक्ता इंटरनेशनल क्या है? | उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था; यह 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाओं की संरक्षक संस्था है (पृष्ठ 78, 87) |
| ★★18 | उपभोक्ता आंदोलन के दबाव से भारत सरकार ने 1986 में कौन-सा कानून बनाया? | उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986, जो कोपरा (COPRA) के नाम से प्रसिद्ध है; आंदोलन ने व्यावसायिक कंपनियों और सरकार, दोनों पर अनुचित व्यवसाय शैली बदलने का दबाव डाला था। इस अधिनियम का संशोधन 2019 में हुआ (पृष्ठ 78) |
सेट 3 — सुरक्षा का अधिकार: रेजी का मामला (कार्ड 19–24)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★19 | रेजी मेथ्यू कौन था, और अस्पताल में उसके साथ क्या हुआ? | कक्षा 9 का एक स्वस्थ लड़का, जो केरल के एक निजी अस्पताल में टॉन्सिल निकलवाने के लिए भर्ती हुआ; ई.एन.टी. सर्जन ने सामान्य बेहोशी की दवा देकर ऑपरेशन किया, और अनुचित बेहोशी से उसमें दिमागी असामान्यता के लक्षण आ गए; वह जीवन भर के लिए अपंग हो गया (पृष्ठ 79) |
| ★★20 | रेजी के पिता ने किस बात के लिए कितना मुआवज़ा माँगा, और राज्य आयोग ने क्या किया? | सेवा में चिकित्सा की गलती और लापरवाही के लिए 5,00,000 रुपये; राज्य आयोग ने यह कहकर मामला खारिज कर दिया कि सबूत पर्याप्त नहीं है (पृष्ठ 79; किताब के इस बॉक्स में “राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण समिति” छपा है, सही नाम आयोग है) |
| ★★21 | राज्य आयोग में मामला खारिज होने के बाद रेजी के पिता कहाँ गए, और क्या फ़ैसला मिला? | दिल्ली में राष्ट्रीय आयोग में अपील की; जाँच के बाद आयोग ने अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और हर्जाना देने का निर्देश दिया (पृष्ठ 79) |
| ★★22 | सुरक्षा का अधिकार क्या है? | कई वस्तुएँ और सेवाएँ जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक हो सकती हैं; उपभोक्ता को इनसे सुरक्षित रहने का अधिकार है, और उत्पादकों के लिए सुरक्षा नियमों और विनियमों का पालन ज़रूरी है (पृष्ठ 79) |
| ★23 | सुरक्षा के अधिकार के लिए किताब प्रेशर कूकर का उदाहरण क्यों देती है? | प्रेशर कूकर का सेफ्टी वॉल्व खराब हो तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है, इसलिए निर्माता को इसकी उच्च गुणवत्ता पक्की करनी चाहिए (पृष्ठ 79) |
| ★24 | सुरक्षा के नियम होने पर भी बाज़ार में निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद क्यों मिलते हैं? | क्योंकि इन नियमों का पर्यवेक्षण ठीक से नहीं हो रहा, और उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज़्यादा मज़बूत नहीं है (पृष्ठ 79) |
सेट 4 — सूचना का अधिकार, MRP और RTI (कार्ड 25–32)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★25 | किसी वस्तु के पैकेट पर कौन-सी जानकारी छपी होती है? | वस्तु के अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, खराब होने की अंतिम तिथि और बनाने वाले का पता (पृष्ठ 80) |
| 26 | दवाओं और कपड़ों पर अलग से कौन-सी जानकारी दी जाती है? | दवा पर उचित प्रयोग के निर्देश और उसके दूसरे प्रभावों और खतरों की जानकारी; कपड़ों पर धुलाई के निर्देश (पृष्ठ 80) |
| ★★27 | पैकेट पर इतनी जानकारी छापने के नियम क्यों बने हैं? | क्योंकि उपभोक्ता को खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं के बारे में सूचना पाने का अधिकार है; जानकारी हो तो वह खराबी पर शिकायत कर सकता है और मुआवज़े या वस्तु बदलने की माँग कर सकता है (पृष्ठ 80) |
| ★28 | पैकेट पर खराब होने की अंतिम तिथि छपी होने से उपभोक्ता को क्या फ़ायदा होता है? | वस्तु अंतिम तिथि से पहले खराब हो जाए तो उसे बदलने के लिए कह सकता है; तिथि छपी न हो तो विनिर्माता दुकानदार पर आरोप लगाकर ज़िम्मेदारी नहीं मानेगा; अंतिम तिथि निकल चुकी दवाएँ बेचने वालों के ख़िलाफ़ कार्यवाही हो सकती है (पृष्ठ 80) |
| ★★29 | ! MRP क्या है, और क्या उपभोक्ता MRP से कम दाम के लिए मोल-भाव कर सकता है? | पैकेट पर छपा अधिकतम खुदरा मूल्य; इससे अधिक लिया जाए तो कोई भी विरोध और शिकायत कर सकता है। हाँ, उपभोक्ता विक्रेता से MRP से कम दाम पर वस्तु देने के लिए मोल-भाव कर सकते हैं (पृष्ठ 80) |
| ★★30 | RTI कानून कब लागू हुआ, और यह नागरिकों को क्या अधिकार देता है? | सन् 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने RTI (राइट टू इनफॉरमेशन) यानी सूचना पाने का अधिकार कानून लागू किया; यह नागरिकों को सरकारी विभागों के कामकाज की सभी सूचनाएँ पाने का अधिकार देता है (पृष्ठ 80) |
| ★31 | इंजीनियरिंग स्नातक अमृता को RTI कानून से क्या मदद मिली? | सरकारी नौकरी के इंटरव्यू के बाद कोई परिणाम नहीं मिला और कर्मचारी जवाब नहीं दे रहे थे; उसने इस कानून के तहत प्रार्थना-पत्र दिया, तो उसे देरी के कारण बताए गए और नियुक्ति के लिए बुलावे का पत्र भी मिला (पृष्ठ 80) |
| 32 | ! क्या RTI का मतलब पैकेट पर छपी जानकारी है? | नहीं; पैकेट की जानकारी उपभोक्ता के सूचना पाने के अधिकार से जुड़ी है, जबकि RTI कानून (अक्टूबर 2005) सरकारी विभागों के कामकाज की सूचना पाने का कानून है (पृष्ठ 80) |
सेट 5 — चुनने का अधिकार: अबिरामी का मामला (कार्ड 33–38)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★33 | अबिरामी ने कोचिंग संस्थान में कितने पैसे जमा किए थे, और एक साल का पैसा माँगने पर क्या हुआ? | अंसारी नगर की छात्रा अबिरामी ने दिल्ली के एक कोचिंग संस्थान के दो वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए पूरे दो वर्ष के “करीब 61,020 रुपये” जमा किए; पढ़ाई का स्तर ठीक न लगने पर उसने साल के अंत में पाठ्यक्रम छोड़ने का निश्चय किया, पर एक साल का पैसा माँगने पर संस्थान ने मना कर दिया (पृष्ठ 81) |
| ★★34 | अबिरामी के मामले में ज़िला आयोग ने क्या आदेश दिया? | संस्थान को 28,000 रुपये लौटाने का, यह कहते हुए कि छात्रा को चुनने का अधिकार है (पृष्ठ 81) |
| ★35 | अबिरामी के मामले में संस्थान की अपील पर राज्य आयोग ने क्या किया? | ज़िला आयोग का आदेश बनाए रखा, बेकार की अपील के लिए संस्थान पर 25,000 का दंड लगाया, और अबिरामी को मुआवज़े और याचिका खर्च के रूप में “7,000 रूपये” देने को कहा (पृष्ठ 81) |
| 36 | अबिरामी के मामले में राज्य आयोग ने सभी शिक्षा संस्थानों को क्या निर्देश दिया? | विद्यार्थियों से पूरे साल की फ़ीस एडवांस में न लें; आदेश का उल्लंघन करने पर दंड शुल्क और जेल भी हो सकती है (पृष्ठ 81) |
| ★★37 | चुनने का अधिकार क्या है? | कोई भी उपभोक्ता, किसी भी आयु या लिंग का, कोई भी सेवा ले रहा हो, उसे हमेशा चुनने का अधिकार होगा (पृष्ठ 81) |
| ★38 | रोज़ की खरीद में चुनने के अधिकार के उल्लंघन के किताब के दो उदाहरण बताइए। | दुकानदार कहे कि दंतमंजन तभी मिलेगा जब साथ में ब्रश भी खरीदेंगे; नया गैस कनेक्शन देते समय डीलर साथ में चूल्हा लेने का दबाव डाले (पृष्ठ 81) |
सेट 6 — क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार: प्रकाश का मामला (कार्ड 39–44)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★39 | क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार क्या है? | उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाज़ी और शोषण के विरुद्ध यह अधिकार है: “यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।” (पृष्ठ 82) |
| ★★40 | ! क्या उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराने के लिए वकील ज़रूरी है? | नहीं; उपभोक्ता अपनी शिकायत वकील के साथ भी और वकील के बिना भी दर्ज करा सकता है; प्रकाश ने आयोग में ख़ुद बहस की थी (पृष्ठ 82, 83) |
| ★41 | श्री प्रकाश ने किस बात की शिकायत की, और कहाँ? | उन्होंने बेटी की शादी के लिए अपने गाँव मनीऑर्डर भेजा, पर बेटी को ज़रूरत के समय पैसे नहीं मिले, महीनों बाद भी नहीं; उन्होंने नयी दिल्ली के एक ज़िला स्तर के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मुकदमा दर्ज किया (पृष्ठ 82) |
| ★42 | मुकदमा दर्ज करने से पहले श्री प्रकाश ने कौन-से कदम उठाए? | पहले डाकघर में पूछताछ की, पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला; फिर क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् से सलाह ली (पृष्ठ 83) |
| ★43 | श्री प्रकाश का मुकदमा आयोग में कैसे आगे बढ़ा? | नज़दीकी आयोग में मुकदमा दर्ज कर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म लिया और दूसरे पक्ष को नोटिस गया; सुनवाई में प्रकाश ने ख़ुद बहस की, जज ने दस्तावेज़ जाँचे और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, फिर फ़ैसला सुनाया (पृष्ठ 83) |
| ★44 | किताब के अनुसार उपभोक्ता किन-किन तरीकों से शिकायत दर्ज करा सकते हैं? | एक व्यक्ति के रूप में या एक समूह के रूप में (जिसे क्लास एक्शन सूट कहते हैं), ख़ुद जाकर या इंटरनेट से; और अपने मुकदमों की कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करा सकते हैं (पृष्ठ 82) |
सेट 7 — प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय आयोग (कार्ड 45–52)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★45 | उपभोक्ता आंदोलन से बने संगठनों को आम तौर पर किन नामों से जाना जाता है, और वे क्या करते हैं? | उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद्; ये बताते हैं कि उपभोक्ता अदालत में मुकदमा कैसे दर्ज कराएँ, कई बार आयोगों में उपभोक्ता का प्रतिनिधित्व भी करते हैं, और जनता में जागरूकता के लिए सरकार से वित्तीय सहयोग पाते हैं (पृष्ठ 84) |
| 46 | ! उपभोक्ता संरक्षण परिषद् और उपभोक्ता आयोग में क्या अंतर है? | परिषद् स्वयंसेवी संगठन है, जो सलाह देता है और प्रतिनिधित्व करता है; आयोग कोपरा के तहत बना न्यायिक तंत्र है, जहाँ जज फ़ैसला सुनाते हैं (पृष्ठ 83, 84) |
| 47 | आवासीय कॉलोनी का ‘निवासी कल्याण संघ’ उपभोक्ता की कैसे मदद करता है? | कॉलोनी के किसी सदस्य के साथ अनुचित व्यावसायिक कार्रवाई हो, तो उसकी तरफ़ से संस्था मामला देखती है (पृष्ठ 84) |
| ★★48 | कोपरा के अंतर्गत उपभोक्ता विवाद निपटाने के लिए कैसा तंत्र बना है? | ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र (पृष्ठ 84) |
| ★★49 | किताब के अनुसार ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग कितने तक के दावों के मुकदमे देखते हैं? | ज़िला (जिसे उपभोक्ता आयोग विवाद निवारण केन्द्र भी कहते हैं): 1 करोड़ तक; राज्य आयोग: 1 करोड़ से 10 करोड़ तक; राष्ट्रीय आयोग: “10 करोड़ से उपर” (पृष्ठ 84) |
| ★★50 | ज़िला उपभोक्ता आयोग में मुकदमा खारिज हो जाए, तो उपभोक्ता क्या कर सकता है? | राज्य स्तर के आयोग में और उसके बाद राष्ट्रीय स्तर के आयोग में अपील कर सकता है (पृष्ठ 84) |
| ★51 | ! क्या उपभोक्ता आयोग में जाना तभी फ़ायदेमंद है, जब नुकसान बहुत बड़ा हो? | नहीं; किताब के अनुसार ज़िला आयोग 1 करोड़ तक के दावे सुनता है, और अबिरामी को कोचिंग फ़ीस के मामले में ज़िला आयोग से ही 28,000 रुपये लौटाने का आदेश मिला (पृष्ठ 81, 84) |
| ★★52 | कोपरा उपभोक्ता को प्रतिनिधित्व का अधिकार कैसे देता है? | “इस प्रकार, अधिनियम ने उपभोक्ता के रूप में उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार देकर हमें समर्थ बनाया है।” (पृष्ठ 84) |
सेट 8 — जागरूक उपभोक्ता और गुणवत्ता के चिह्न (कार्ड 53–63)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★53 | किताब के अनुसार जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए क्या चाहिए? | निपुणता और ज्ञान; खरीदते समय अपने अधिकारों के प्रति सचेत होंगे, तभी अच्छे और बुरे में फ़र्क कर पाएँगे और श्रेष्ठ चुनाव कर पाएँगे (पृष्ठ 84) |
| 54 | कोपरा से केंद्र और राज्य सरकारों में क्या बदलाव आया? | उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग बने; कोपरा ने इन्हें बनवाने में मुख्य भूमिका निभाई (पृष्ठ 85) |
| 55 | सरकार नागरिकों को उपभोक्ता के लिए कानूनी प्रक्रिया के बारे में कैसे बताती है? | पृष्ठ 84 और 85 के पोस्टर जैसे विज्ञापनों से, जिन पर JAGO GRAHAK JAGO छपा है, और टेलीविज़न चैनलों के विज्ञापनों से (पृष्ठ 84, 85) |
| ★★56 | आई.एस.आई., एगमार्क और हॉलमार्क जैसे शब्दचिह्न (लोगो) किस बात का भरोसा दिलाते हैं? | वस्तु की अच्छी गुणवत्ता का; जाँच करके प्रमाणपत्र देने वाले संगठन, उत्पादक के श्रेष्ठ गुणवत्ता का पालन करने पर ही उसे लोगो लगाने देते हैं (पृष्ठ 85) |
| ★★57 | ! क्या हर उत्पादक के लिए आई.एस.आई. या एगमार्क के मानदंड मानना ज़रूरी है? | नहीं; ये संगठन बहुत से उत्पादों के लिए गुणवत्ता के मानदंड बनाते हैं, पर सभी उत्पादकों के लिए उनका पालन ज़रूरी नहीं। जो उत्पाद उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर असर डालते हैं या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, उनके लिए प्रमाण लेना अनिवार्य है (पृष्ठ 85) |
| ★58 | किन उत्पादों के लिए गुणवत्ता का प्रमाण लेना अनिवार्य है? किताब के उदाहरण बताइए। | एल.पी.जी. सिलिंडर, खाने के रंग और उनमें डाली जाने वाली सामग्री, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल (पृष्ठ 85) |
| ★59 | एगमार्क किसका प्रमाण है? | अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाण (पृष्ठ 87) |
| ★60 | भारतीय मानक ब्यूरो क्या है? | वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक विकसित करने वाली एजेंसी (पृष्ठ 87) |
| 61 | हॉलमार्क किसकी गुणवत्ता का प्रमाण है? | आभूषणों की गुणवत्ता का; पृष्ठ 85 इसे अच्छी गुणवत्ता का भरोसा दिलाने वाले चिह्नों में गिनता है (पृष्ठ 85, 88) |
| ★62 | +F (फूड फोर्टिफिकेशन) का मतलब क्या है? | खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना; इसका +F लोगो पृष्ठ 85 पर छपा है (पृष्ठ 85, 87) |
| ★★63 | किताब उपभोक्ता के कौन-से छह अधिकार गिनाती है? | चयन (चुनने) का अधिकार, सूचना का अधिकार, निवारण का अधिकार, प्रतिनिधित्व का अधिकार, सुरक्षा का अधिकार और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (पृष्ठ 86) |
सेट 9 — उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाना: प्रगति और कमियाँ (कार्ड 64–72)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★64 | 24 दिसंबर को भारत में कौन-सा दिवस मनाया जाता है, और क्यों? | राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस; क्योंकि 1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया था (पृष्ठ 86) |
| ★65 | उपभोक्ता समस्याओं के निवारण के मामले में भारत की क्या ख़ास बात है? | भारत उन देशों में से एक है, जहाँ उपभोक्ता समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट न्यायालय हैं (पृष्ठ 86) |
| ★66 | आज देश में कितने उपभोक्ता संगठन हैं, और उनमें से कितने पूर्ण संगठित हैं? | 2000 से अधिक; इनमें से केवल 50–60 ही अपने कामों के लिए पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं (पृष्ठ 86) |
| ★★67 | किताब के अनुसार उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया की क्या कमियाँ हैं? | प्रक्रिया “जटिल, खर्चीली और समय साध्य” साबित हो रही है; कई बार वकीलों का सहारा लेना पड़ता है, और मुकदमों में काफ़ी समय लगता है (पृष्ठ 86) |
| ★68 | उपभोक्ता के लिए सबूत जुटाना कठिन क्यों होता है? | “अधिकांश खरीददारियों के समय रसीद नहीं दी जाती हैं, ऐसी स्थिति में प्रमाण जुटाना आसान नहीं होता है।” साथ ही बाज़ार में ज़्यादातर खरीद छोटी फुटकर दुकानों से होती है (पृष्ठ 86) |
| ★★69 | 2019 में कोपरा के संशोधन से क्या बदला? | इंटरनेट से खरीद भी इसमें शामिल हुई; सेवा में कमी या दोषपूर्ण उत्पाद होने पर सेवा प्रदाता और निर्माता को भी ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा और दंड मिलेगा, जेल भी हो सकती है; आयोग के बाहर तटस्थ मध्यस्थ की मदद से विवाद निपटाने को आयोग के तीनों स्तरों पर बढ़ावा दिया गया (पृष्ठ 87) |
| ★★70 | ! क्या कोपरा सिर्फ़ वस्तुओं (सामान) पर लागू होता है? | नहीं, सेवाओं पर भी: रेजी का मामला अस्पताल की सेवा का था, अबिरामी का कोचिंग का, प्रकाश का मनीऑर्डर का; 2019 के संशोधन में सेवा प्रदाता भी ज़िम्मेदार ठहराया जाता है (पृष्ठ 79, 81, 82, 87) |
| ★71 | कोपरा बनने के इतने साल बाद भी उपभोक्ता आंदोलन के सामने कौन-सी कमज़ोरियाँ बची हैं? | कोपरा के 35 वर्ष बाद भी भारत में उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे-धीरे फैल रहा है; श्रमिकों की रक्षा के कानून होने पर भी ख़ासकर असंगठित क्षेत्र में वे कमज़ोर हैं, और बाज़ारों के कामकाज के नियमों और विनियमों का अक्सर पालन नहीं होता (पृष्ठ 87) |
| ★★72 | किताब के अनुसार उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी कैसे हो सकता है? | “यह अक्सर कहा जाता है कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की जरूरत है।” (पृष्ठ 87) |
अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए
नियम क्यों: अकेला उपभोक्ता प्राय: कमज़ोर स्थिति में · कम तौल, बिना बताए शुल्क, मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ · बड़ी कंपनियाँ मीडिया से गलत सूचना देती हैं (शिशुओं का दूध पाउडर, सिगरेट) उपभोक्ता आंदोलन: ‘सामाजिक बल’ · 1960 के दशक में व्यवस्थित उदय (खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाज़ारी, मिलावट) · 1970 के दशक तक लेख, प्रदर्शनी, उपभोक्ता दल अंतर्राष्ट्रीय: 1985 में संयुक्त राष्ट्र के दिशा-निर्देश · उपभोक्ता इंटरनेशनल: 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाएँ कोपरा: उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 · संसद ने 24 दिसंबर को पारित किया, इसलिए यह राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस है · 2019 का संशोधन: इंटरनेट से खरीद, सेवा प्रदाता और निर्माता ज़िम्मेदार, तटस्थ मध्यस्थ छह अधिकार: चयन, सूचना, निवारण, प्रतिनिधित्व, सुरक्षा, उपभोक्ता शिक्षा किताब के मामले: रेजी (सुरक्षा; 5,00,000 रुपये का दावा; राष्ट्रीय आयोग ने हर्जाना देने का निर्देश दिया) · अमृता (RTI, अक्टूबर 2005) · अबिरामी (चुनना; ज़िला आयोग: 28,000 रुपये वापस; राज्य आयोग: 25,000 दंड, 7,000 रुपये मुआवज़ा और खर्च) · प्रकाश (निवारण; मनीऑर्डर; बिना वकील ख़ुद बहस) सूचना: पैकेट पर अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण और अंतिम तिथि, पता · MRP से ज़्यादा लेना गलत, कम के लिए मोल-भाव हो सकता है आयोग, किताब के अनुसार: ज़िला 1 करोड़ तक · राज्य 1 करोड़ से 10 करोड़ तक · राष्ट्रीय 10 करोड़ से ऊपर · अपील: ज़िला से राज्य, फिर राष्ट्रीय चिह्न: आई.एस.आई., एगमार्क (अनाज और खाद्य तेल), हॉलमार्क (आभूषण) · +F: खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्व मिलाना · प्रमाण अनिवार्य: एल.पी.जी. सिलिंडर, खाने के रंग, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल कमियाँ और रास्ता: प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समय साध्य · रसीद न मिलने से सबूत जुटाना कठिन · 2000 से अधिक संगठन, पूर्ण संगठित केवल 50–60 · 35 वर्ष बाद भी ज्ञान धीरे फैल रहा · रास्ता: उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी