कार्ड से अभ्यास कीजिए
एक बार में एक कार्ड आएगा। उत्तर मन में सोचिए, फिर कार्ड पलटिए और बताइए कि आपको आता था या नहीं। जो नहीं आता, वह इसी दौर में फिर आएगा; जो आता है, वह कुछ दिन बाद दोहराने के लिए लौटेगा।
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प्रयोग: दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 80 कार्ड। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है; शक हो तो किताब का वही पृष्ठ खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
तारों का मतलब: ★वाले कार्ड ज़्यादा ज़रूरी हैं · ★★सबसे ज़रूरी; समय कम हो तो पहले इन्हें दोहराइए।
सेट 1 — मुद्रा: विनिमय का माध्यम (कार्ड 1–8)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★1 | वस्तु विनिमय प्रणाली किसे कहते हैं? | जहाँ मुद्रा का उपयोग किए बिना वस्तुओं का विनिमय होता है (पृष्ठ 39) |
| ★★2 | आवश्यकताओं का दोहरा संयोग किसे कहते हैं? | जब दोनों पक्ष एक-दूसरे से चीज़ें ख़रीदने और बेचने पर सहमत हों: जो वस्तु एक व्यक्ति बेचना चाहता है, वही वस्तु दूसरा व्यक्ति ख़रीदना चाहे। वस्तु विनिमय प्रणाली में यह होना अनिवार्य है (पृष्ठ 39) |
| 3 | किताब के जूता निर्माता को बिना मुद्रा के गेहूँ लेना हो, तो कैसा किसान ढूँढना पड़ेगा? | ऐसा किसान, जो गेहूँ बेचना भी चाहे और बदले में जूते ख़रीदना भी (पृष्ठ 39) |
| ★★4 | मुद्रा आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की समस्या कैसे सुलझाती है? | बीच की कड़ी बनकर: जूता निर्माता पहले जूते बेचकर मुद्रा लेता है, फिर उसी मुद्रा से गेहूँ ख़रीदता है; उसे बस जूतों का ख़रीदार चाहिए (पृष्ठ 39, 40) |
| ★5 | मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहते हैं? | क्योंकि वह विनिमय प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है (पृष्ठ 40) |
| 6 | हर कोई भुगतान मुद्रा के रूप में क्यों लेना पसंद करता है? | क्योंकि जिसके पास मुद्रा है, वह उससे कोई भी वस्तु या सेवा आसानी से ख़रीद सकता है (पृष्ठ 39) |
| 7 | बहुत प्रारंभिक काल से भारतीय किन चीज़ों को मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे? | अनाज और पशु को (पृष्ठ 40) |
| 8 | अनाज और पशु के बाद मुद्रा के रूप में क्या चला, और कब तक? | सोना, चाँदी और ताँबे जैसी धातुओं के सिक्के; इनका चलन पिछली सदी तक रहा (पृष्ठ 40) |
सेट 2 — मुद्रा के आधुनिक रूप: करेंसी और माँग जमा (कार्ड 9–21)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★9 | आज मुद्रा के आधुनिक रूप कौन-से हैं? | करेंसी (कागज़ के नोट और सिक्के) और बैंकों में माँग जमा (पृष्ठ 40, 41) |
| ★10 | आधुनिक मुद्रा सोने के सिक्कों या अनाज से किस बात में अलग है? | वह सोने, चाँदी या ताँबे की नहीं बनी, और अनाज या पशु की तरह रोज़ के काम की चीज़ भी नहीं; उसका अपना कोई इस्तेमाल नहीं (पृष्ठ 40) |
| ★★11 | जिस करेंसी का अपना कोई इस्तेमाल नहीं, उसे विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है? | क्योंकि देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है (पृष्ठ 40) |
| ★★12 | भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है? | भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ से; कानून के अनुसार किसी और व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं (पृष्ठ 40) |
| ★13 | भारत में क्या कोई व्यक्ति रुपयों में भुगतान लेने से मना कर सकता है? | नहीं; कानून रुपये को विनिमय के माध्यम की वैधता देता है, इसलिए कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी अस्वीकार नहीं कर सकता (पृष्ठ 40) |
| 14 | लोग अपना अतिरिक्त नकद बैंक में क्यों जमा करते हैं? | पैसा सुरक्षित रहता है, बैंक उस पर सूद (ब्याज) देता है, और ज़रूरत पर इसमें से निकाला जा सकता है (पृष्ठ 40) |
| ★★15 | बैंक खाते के जमा को “माँग जमा” क्यों कहते हैं? | क्योंकि इसे माँगने पर निकाला जा सकता है (पृष्ठ 40) |
| ★16 | चैक क्या है? | एक कागज़, जो बैंक को आदेश देता है कि खाताधारक के खाते से चैक पर लिखे नाम वाले व्यक्ति को एक ख़ास रकम दी जाए (पृष्ठ 41) |
| 17 | एम. सलीम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक देता है; पैसा आपूर्तिकर्ता तक कैसे पहुँचता है? | आपूर्तिकर्ता चैक अपने बैंक खाते में जमा करता है, और कुछ दिनों में धन एक खाते से दूसरे में चला जाता है; लेन-देन बिना नकद के पूरा होता है (पृष्ठ 41) |
| 18 | सलीम प्रेम के नाम चैक लिखे, तो दोनों के बैंक खातों में शेष पर क्या असर होगा? | सलीम के खाते में शेष घटता है और प्रेम के खाते में बढ़ता है (पृष्ठ 42) |
| ★19 | माँग जमा को भी मुद्रा क्यों माना जाता है? | उसके बदले चैक लिखकर बिना नकद सीधा भुगतान हो सकता है; करेंसी की तरह उसे भी भुगतान का माध्यम स्वीकार किया जाता है, यानी उसमें मुद्रा के ज़रूरी लक्षण मिलते हैं (पृष्ठ 41) |
| 20 | मुद्रा के आधुनिक रूप बैंक प्रणाली से कैसे जुड़े हैं? | बैंक न हों तो न माँग जमा होगा, न उसके बदले भुगतान; इसलिए करेंसी और जमा, दोनों आधुनिक बैंक प्रणाली से बहुत क़रीब से जुड़े हैं (पृष्ठ 41) |
| ! 21 | क्या लेन-देन में काम आने वाले प्लास्टिक कार्ड मुद्रा हैं? | नहीं; प्लास्टिक कार्ड लेन-देन में काम आते हैं, पर अपने आप में मुद्रा नहीं हैं (पृष्ठ 38) |
सेट 3 — बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ (कार्ड 22–26)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★22 | ! भारत में बैंक अपनी जमा का कितना हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं? | केवल 5 प्रतिशत (पृष्ठ 42) |
| ★23 | बैंक के लिए जमा का इतना छोटा नकद हिस्सा काफ़ी क्यों है? | क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं (पृष्ठ 42) |
| ★24 | नकद हिस्सा रखने के बाद बैंक जमा के बड़े भाग का क्या करते हैं? | उससे ऋण देते हैं; विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण की बहुत माँग रहती है (पृष्ठ 42) |
| ★★25 | बैंक किनके बीच मध्यस्थता करते हैं? | जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) और जिन्हें राशि की ज़रूरत है (कर्ज़दार), उनके बीच (पृष्ठ 42) |
| ★★26 | बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है? | कर्ज़दारों से लिए गए और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज का अंतर; बैंक जमा पर जितना ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ऋण पर लेते हैं (पृष्ठ 42) |
सेट 4 — साख की दो स्थितियाँ: सलीम और स्वप्ना (कार्ड 27–36)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★27 | ऋण (उधार) किसे कहते हैं? | एक सहमति, जिसमें साहूकार (उधार देने वाला) कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ देता है और बदले में भविष्य में भुगतान का वादा लेता है (पृष्ठ 43) |
| 28 | त्यौहार के मौसम में सलीम को कितने जूतों का ऑर्डर मिला, और कितने समय में पूरा करना था? | 3000 जोड़ी जूते, एक महीने में (पृष्ठ 43) |
| ★29 | सलीम ने जूतों का ऑर्डर पूरा करने के लिए किन दो तरह से ऋण लिया? | चमड़ा व्यापारी से चमड़ा अभी लेकर भुगतान बाद में करने का वादा; और बड़े व्यापारी से 1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में नकद (पृष्ठ 43) |
| ★30 | ऋण से सलीम को क्या मिला, और किताब इससे क्या निष्कर्ष निकालती है? | उत्पादन के लिए कार्यशील पूँजी; ऑर्डर समय पर पूरा हुआ, कमाई बढ़ी। “इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।” (पृष्ठ 43) |
| 31 | स्वप्ना ने किस फसल के लिए, किससे ऋण लिया? | 3 एकड़ में मूँगफली की खेती के खर्च के लिए, साहूकार से (पृष्ठ 43) |
| ★★32 | स्वप्ना कर्ज़ में कैसे फँस गई? | कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद हुई; कर्ज़ नहीं चुका और साल भर में बड़ी रकम बन गया; अगले साल फसल सामान्य रही, पर इतनी कमाई नहीं हुई कि कर्ज़ चुक सके, और आख़िर कर्ज़ उतारने के लिए उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा (पृष्ठ 43, 44) |
| ★★33 | कर्ज–ज़ाल किसे कहते हैं? | जब ऋण कमाई बढ़ाने के बजाय स्थिति बदतर कर दे, जैसे स्वप्ना की: “इस मामले में ऋण कर्जदार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना काफी कष्टदायक होता है।” (पृष्ठ 44) |
| ★★34 | ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह किस पर निर्भर करता है? | “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” (पृष्ठ 44) |
| ★35 | ग्रामीण क्षेत्रों में साख की मुख्य माँग किसके लिए होती है? | फसल उगाने के लिए: बीज, खाद, कीटनाशक दवाएँ, पानी, बिजली, उपकरणों की मरम्मत (पृष्ठ 44) |
| ★36 | किसान ऋतु के आरंभ में उधार लेकर फसल के बाद क्यों लौटाते हैं? | क्योंकि आगतें ख़रीदने और फसल बिकने के बीच कम से कम 3–4 महीने का अंतराल होता है; अदायगी मुख्य रूप से फसल की कमाई पर टिकी है (पृष्ठ 44) |
सेट 5 — ऋण की शर्तें (कार्ड 37–44)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★37 | ऋण की शर्तों में कौन-सी चार बातें आती हैं? | ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीके (पृष्ठ 45) |
| ★★38 | समर्थक ऋणाधार किसे कहते हैं? | कर्ज़दार की अपनी संपत्ति, जिसका इस्तेमाल वह ऋण चुकने तक उधारदाता को गारंटी देने के लिए करता है (पृष्ठ 44) |
| ★39 | किताब समर्थक ऋणाधार के कौन-से उदाहरण देती है? | भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में पूँजी (पृष्ठ 44) |
| ★40 | कर्ज़दार उधार न लौटा पाए, तो उधारदाता क्या कर सकता है? | उधारदाता को भुगतान पाने के लिए संपत्ति या समर्थक ऋणाधार बेचने का अधिकार होता है (पृष्ठ 44) |
| 41 | क्या ऋण की शर्तें हर ऋण में एक जैसी होती हैं? | नहीं; एक ऋण व्यवस्था से दूसरी में बहुत बदल जाती हैं, और उधारदाता और कर्ज़दार की प्रकृति पर भी निर्भर करती हैं (पृष्ठ 45) |
| 42 | मेघा का आवास ऋण कितना था, किस ब्याज दर पर, और कितने साल में लौटाना था? | 5 लाख रुपये, 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, 10 साल में मासिक किश्तों में (पृष्ठ 45) |
| ★43 | बैंक ने मेघा से कौन-से कागज़ात माँगे, और ऋणाधार क्या रखा? | नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड; ऋणाधार के रूप में नए घर के सभी कागज़, जो ब्याज समेत कर्ज़ लौटाने पर वापस मिलेंगे (पृष्ठ 45) |
| 44 | कर्ज़दार आसान ऋण शर्तें देखता है; इसका मतलब क्या है? | निम्न ब्याज दर, आसान अदायगी की शर्तें, कम समर्थक ऋणाधार एवं आवश्यक कागज़ात (पृष्ठ 45) |
सेट 6 — सोनपुर: एक गाँव में ऋण के अलग-अलग प्रबंध (कार्ड 45–54)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★45 | सोनपुर के छोटे किसान श्यामल (1.5 एकड़) पहले गाँव के महाजन से किस ब्याज पर ऋण लेते थे? | 5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक (पृष्ठ 46) |
| ★46 | सोनपुर के श्यामल अब किससे, किस ब्याज पर ऋण लेते हैं, और बदले में क्या वादा करना पड़ता है? | गाँव के एक कृषि व्यापारी से, 3 प्रतिशत मासिक पर; फसल उसी व्यापारी को बेचने का वादा (पृष्ठ 46) |
| 47 | सोनपुर में फसल उसी को बेचने के वादे से कृषि व्यापारी को क्या फ़ायदा होता है? | फसल कटते समय कीमतें कम होती हैं; वह सस्ते में ख़रीदकर बाद में कीमत बढ़ने पर बेचता है और भारी मुनाफ़ा कमाता है (पृष्ठ 46) |
| ★48 | सोनपुर के अरूण (7 एकड़) को बैंक से ऋण किन शर्तों पर मिला? | 8.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज; अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकते हैं (पृष्ठ 46) |
| ★49 | सोनपुर की रमा कौन है, और वह ऋण किससे, किस ब्याज पर लेती है? | पास के खेत में कृषि मज़दूर; अपने मालिक, एक मध्यवर्गीय भूस्वामी से, 5 प्रतिशत मासिक पर (पृष्ठ 46) |
| 50 | सोनपुर की रमा अपना कर्ज़ कैसे चुकाती है? | भूस्वामी के यहाँ काम करके; अक्सर पुराना कर्ज़ लौटा भी नहीं पाती और नया लेना पड़ता है, और अभी 5,000 रुपये बाकी हैं (पृष्ठ 46) |
| 51 | सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत कौन है? | भूस्वामी-नियोक्ता (पृष्ठ 46) |
| ★52 | अरूण सोनपुर के उन कुछ लोगों में से है जो बैंक से उधार ले पाते हैं; बाकी लोग क्यों नहीं ले पाते? | क्योंकि बैंक समर्थक ऋणाधार माँगते हैं, जो हर किसी के पास नहीं होता (पृष्ठ 47) |
| ★53 | ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकों के अलावा सस्ते ऋण का एक और स्रोत कौन है? किताब का उदाहरण बताइए। | सहकारी समितियाँ; सोनपुर के पास के एक गाँव की कृषक सहकारी समिति के 2300 किसान सदस्य हैं (पृष्ठ 47) |
| 54 | कृषक सहकारी समिति बैंक से बड़ा ऋण कैसे लेती है? | सदस्यों से जमा लेकर, उसी जमा को ऋणाधार मानकर; उस ऋण से वह सदस्यों को कर्ज़ देती है (पृष्ठ 47) |
सेट 7 — औपचारिक और अनौपचारिक साख (कार्ड 55–69)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★55 | ऋण के औपचारिक स्रोत कौन-से हैं? | बैंक और सहकारी समितियाँ (पृष्ठ 48) |
| ★★56 | ! ऋण के अनौपचारिक स्रोत कौन-से हैं? क्या नियोक्ता (मालिक) औपचारिक स्रोत है? | साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त इत्यादि; मालिक या नियोक्ता अनौपचारिक स्रोत है (पृष्ठ 48) |
| ★57 | आलेख 1 (ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019) में सबसे बड़ा स्रोत कौन है, और उसके बाद कौन? | व्यावसायिक बैंक, 51 प्रतिशत; उसके बाद साहूकार, 23 प्रतिशत (पृष्ठ 48) |
| 58 | आलेख 1 (2019) में सहकारी समितियों/बैंक और रिश्तेदार एवं मित्र का हिस्सा कितना है? | सहकारी समितियाँ/बैंक 10 प्रतिशत, रिश्तेदार एवं मित्र 7 प्रतिशत (पृष्ठ 48) |
| ★59 | आलेख 1 (2019) के औपचारिक और अनौपचारिक टुकड़े जोड़ें, तो कितने प्रतिशत आते हैं? | औपचारिक 51 + 10 + 5 = 66; अनौपचारिक 1 + 23 + 7 + 3 = 34 (पृष्ठ 48) |
| ★★60 | भारतीय रिज़र्व बैंक दूसरे बैंकों पर किस तरह नज़र रखता है? | देखता है कि बैंक जमा का न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच रखें; केवल लाभ कमाने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को नहीं, छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दें; और उसे बताते रहें कि कितना, किनको और किस ब्याज दर पर ऋण दे रहे हैं (पृष्ठ 48) |
| ★★61 | अनौपचारिक ऋणदाताओं पर कौन नज़र रखता है? | कोई नहीं: “अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।” वे ऐच्छिक (अपनी मर्ज़ी की) दरों पर ऋण दे सकते हैं, और नाजायज़ तरीकों से पैसा वसूलने से उन्हें कोई नहीं रोकता (पृष्ठ 48) |
| ★★62 | अनौपचारिक ऋण की ऊँची लागत कर्ज़दार पर क्या असर डालती है? | आय का अधिकतर हिस्सा ऋण की अदायगी में ख़र्च हो जाता है; कभी चुकाने की रकम आय से भी अधिक हो जाती है, ऋण का बोझ बढ़ता है और व्यक्ति ऋण–जाल में फँस जाता है (पृष्ठ 49) |
| ★63 | ऋण की ऊँची लागत नया उद्यम शुरू करने वालों पर क्या असर डालती है? | कर्ज़ लेकर उद्यम शुरू करना चाहने वाले ऋण की अधिक लागत देखकर पीछे हट सकते हैं (पृष्ठ 49) |
| ★★64 | देश के विकास के लिए किताब किस तरह के कर्ज़ को ज़रूरी बताती है? | “सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।” (पृष्ठ 49) |
| ★65 | आलेख 2 के अनुसार शहरों के गरीब परिवारों के ऋण में औपचारिक और अनौपचारिक हिस्सा कितना है? | औपचारिक 46, अनौपचारिक 54 प्रतिशत (पृष्ठ 49) |
| ★66 | आलेख 2 के अनुसार शहरों के अमीर परिवारों के ऋण में औपचारिक और अनौपचारिक हिस्सा कितना है? | औपचारिक 83, अनौपचारिक 17 प्रतिशत (पृष्ठ 49) |
| 67 | आलेख 2 में शहरों के कम संपत्ति वाले और समृद्ध परिवारों का औपचारिक हिस्सा कितना है? | कम संपत्ति वाले 62 प्रतिशत (अनौपचारिक 38), समृद्ध 73 प्रतिशत (अनौपचारिक 27) (पृष्ठ 49) |
| ★★68 | ! किन परिवारों की ऋण की अधिकांश ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं? | गरीब परिवारों की; अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है (पृष्ठ 49) |
| ★★69 | औपचारिक ऋण के बारे में किताब कौन-से दो कदम ज़रूरी बताती है? | (1) बैंक और सहकारी समितियाँ अपनी गतिविधियाँ, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, बढ़ाएँ; (2) औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें (पृष्ठ 50) |
सेट 8 — स्वयं सहायता समूह और ग्रामीण बैंक (कार्ड 70–80)
| # | प्रश्न | उत्तर |
|---|---|---|
| ★★70 | गरीबों के बैंक से ऋण न ले पाने का एक प्रमुख कारण क्या है? | ऋणाधार की अनुपलब्धता (पृष्ठ 50) |
| 71 | साहूकार गरीबों को बिना ऋणाधार ऋण दे देते हैं; फिर भी उनसे ऋण लेना ठीक क्यों नहीं? | वे ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं (पृष्ठ 50, 51) |
| ★★72 | एक स्वयं सहायता समूह में कितने सदस्य होते हैं, और वे क्या करते हैं? | एक-दूसरे के पड़ोसी 15–20 सदस्य, जो नियमित रूप से मिलते हैं और बचत करते हैं; प्रति व्यक्ति बचत 25 रुपए से 100 रुपए या अधिक (पृष्ठ 51) |
| ★73 | स्वयं सहायता समूह अपने सदस्यों को दिए छोटे कर्ज़ पर कैसा ब्याज लेता है? | ब्याज लेता है, पर साहूकार से कम (पृष्ठ 51) |
| ★★74 | स्वयं सहायता समूह को बैंक से ऋण कब और किसके नाम पर मिलता है? | एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद, समूह के नाम पर (पृष्ठ 51) |
| ★★75 | ! स्वयं सहायता समूह में बचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले कौन लेता है? | समूह के सदस्य स्वयं: ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और लौटाने की अवधि (पृष्ठ 51) |
| ★★76 | बैंक बिना ऋणाधार के भी स्वयं सहायता समूह की गरीब महिलाओं को ऋण देने को क्यों तैयार हो जाते हैं? | ऋण लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है; एक भी सदस्य ऋण न लौटाए, तो बाकी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं (पृष्ठ 51) |
| 77 | स्वयं सहायता समूह के सदस्य किन कामों के लिए छोटे कर्ज़ लेते हैं? | गिरवी ज़मीन छुड़ाने, कार्यशील पूँजी (बीज, खाद, बाँस, कपड़ा), घर बनाने, और सिलाई की मशीन, हथकरघा, पशु जैसी परिसंपत्तियों के लिए (पृष्ठ 51) |
| ★78 | स्वयं सहायता समूह से महिलाओं को और क्या फ़ायदा होता है? | महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी होती हैं, और नियमित बैठकों में स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक विषयों पर चर्चा का एक आम मंच मिलता है (पृष्ठ 51) |
| 79 | बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक से ऋण लेने वाली महिलाओं ने क्या दिखाया? | कि गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं, और तरह-तरह की छोटी आय वाली गतिविधियाँ सफलता से शुरू करके चला सकती हैं; 2018 में इस बैंक के सदस्य बांग्लादेश के 81,600 गाँवों में फैले थे (पृष्ठ 52) |
| ★80 | ग्रामीण बैंक के संस्थापक कौन हैं, और उनके अनुसार गरीबों को सही शर्तों पर ऋण मिले तो क्या हो सकता है? | प्रो. मोहम्मद युनूस (2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार): “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी–छोटी गतिविधियों के ज़रिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।” (पृष्ठ 52) |
अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए
दोहरा संयोग: वस्तु विनिमय में दोनों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए; मुद्रा बीच की कड़ी बनकर यह ज़रूरत ख़त्म करती है, इसलिए वह विनिमय का माध्यम है मुद्रा के आधुनिक रूप: करेंसी (भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ से) और माँग जमा (चैक से बिना नकद भुगतान) बैंक: जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद · बड़े भाग से ऋण · ब्याज का अंतर = आय का प्रमुख स्रोत ऋण की चार शर्तें: ब्याज दर · समर्थक ऋणाधार · आवश्यक कागज़ात · भुगतान के तरीके सलीम और स्वप्ना: ऋण से कमाई बढ़ी · फसल बर्बाद, ज़मीन बिकी (कर्ज–ज़ाल); ऋण उपयोगी है या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि पर मिलने वाले सहयोग पर निर्भर दो तरह के स्रोत: औपचारिक = बैंक, सहकारी समितियाँ (रिज़र्व बैंक की नज़र) · अनौपचारिक = साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त (कोई देखरेख नहीं) आलेख 1 (ग्रामीण, 2019): व्यावसायिक बैंक 51, साहूकार 23; औपचारिक 66, अनौपचारिक 34 · आलेख 2 (शहरी): गरीब 46/54, अमीर 83/17 स्वयं सहायता समूह: 15–20 पड़ोसी · नियमित बचत · एक-दो साल बाद समूह के नाम पर बिना ऋणाधार बैंक ऋण · फ़ैसले सदस्य ख़ुद लेते हैं