अध्याय 3मुद्रा और साख

पाठ योजना20 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3

कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 39 से 53 · कालांश — 9, हर एक 40 मिनट

इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले “एक नज़र में” वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, “तैयारी” वाली तालिका में समझाए गए हैं।

अध्याय का बड़ा विचार — अध्याय मुद्रा से शुरू होकर ऋण तक पहुँचता है। मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं, फिर भी वह इसलिए चलती है कि सरकार उसे प्राधिकृत करती है; और बैंक लोगों की जमा के बड़े भाग से ऋण देते हैं। पर ऋण हर किसी के लिए एक-सा नहीं निकलता। सलीम के लिए वह कमाई बढ़ाता है, स्वप्ना को कर्ज–ज़ाल में धकेल देता है, और किताब इसका कारण एक पंक्ति में देती है: “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” (पृष्ठ 44)। इसके बाद अध्याय ऋण की शर्तें और स्रोत देखता है: बैंक और सहकारी समितियों का ऋण सस्ता है, पर ज़्यादातर अमीर परिवारों तक पहुँचता है; गरीब परिवार महँगे अनौपचारिक ऋण पर टिके हैं, और स्वयं सहायता समूह उनके लिए एक रास्ता खोलते हैं।

हमारी ओर से पूरे अध्याय के लिए एक सवाल: मुद्रा किस भरोसे पर चलती है, और ऋण किसके लिए सीढ़ी बनता है, किसके लिए जाल? पहले दिन बच्चे पर्ची पर लिखेंगे कि अपना छोटा काम शुरू करने के लिए उधार किससे माँगेंगे, और क्यों; कालांश 9 में वही पर्चियाँ ऋण के स्रोत और चार शर्तों पर परखी जाएँगी।


एक नज़र में — नौ कालांश और उनकी सामग्री

पूरा अध्याय एक कहानी की तरह चलता है। हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।

नौ कालांश, एक कहानी

कालांश 1मुद्रा: विनिमय का माध्यमवस्तु विनिमय, और आवश्यकताओं का दोहरा संयोग (पृष्ठ 39–40)
कालांश 2मुद्रा के आधुनिक रूपअनाज और पशु से सिक्के तक, फिर करेंसी, माँग जमा और चैक (पृष्ठ 40–42)
कालांश 3बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँकेवल 5 प्रतिशत नकद, बड़ा भाग ऋण में (पृष्ठ 42)
कालांश 4साख की दो स्थितियाँसलीम और स्वप्ना, और कर्ज–ज़ाल (पृष्ठ 43–44)
कालांश 5ऋण की शर्तेंब्याज दर, ऋणाधार, कागज़ात, भुगतान; मेघा का आवास ऋण (पृष्ठ 44–45)
कालांश 6सोनपुरश्यामल, अरुण, रमा, और कृषक सहकारी समिति (पृष्ठ 46–47)
कालांश 7औपचारिक और अनौपचारिक साखआलेख 1 और 2, और किताब के दो निष्कर्ष (पृष्ठ 48–50)
कालांश 8स्वयं सहायता समूहबचत, समूह के नाम पर ऋण, और ग्रामीण बैंक (पृष्ठ 50–52)
कालांश 9सारांश, प्रश्नावली और समापनप्रश्न 12 और 13, और पहले दिन की पर्चियाँ फिर से
हर कालांश के पृष्ठ, स्लाइड और बाक़ी सामग्री नीचे की तालिका में।

सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय

कालांश और टॉपिकपृष्ठस्लाइडइंटरैक्टिवप्रश्न बैंकफ़्लैशकार्ड
1 · मुद्रा: विनिमय का माध्यम39–40शुरू की तीन स्लाइड, फिर “मुद्रा: विनिमय का माध्यम”शुरुआत, 1. विनिमय का माध्यमक1, क2 · ख1 · घ1 · च11–8
2 · मुद्रा के आधुनिक रूप40–42“मुद्रा के आधुनिक रूप”2. मुद्रा के आधुनिक रूपक3–6 · ख2, ख3 · ग1 · घ2–4 · ङ19–21
3 · बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ42“बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ”3. बैंक क्या करते हैंक7, क8 · ख4 · ग2 · घ5, घ6 · च2 · छ622–26
4 · साख की दो विभिन्न स्थितियाँ43–44“साख की दो विभिन्न स्थितियाँ”4. साख की दो स्थितियाँक9–12 · ख5, ख6 · घ7, घ8 · ङ2 · च327–36
5 · ऋण की शर्तें44–45“ऋण की शर्तें”5. ऋण की शर्तेंक13 · ख7 · छ337–44
6 · विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण46–47“विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण”6. सोनपुर: एक गाँव में साखक14, क15 · ख8 · घ9 · ङ6 · छ445–54
7 · औपचारिक और अनौपचारिक साख48–50“औपचारिक और अनौपचारिक साख”7. औपचारिक और अनौपचारिक साखक16–18 · ख10 · ग3–5 · ङ3, ङ4 · च4, च5 · छ1, छ255–69
8 · निर्धनों के स्वयं सहायता समूह50–52“निर्धनों के स्वयं सहायता समूह”8. स्वयं सहायता समूहक19, क20 · ख9 · ग6 · घ10 · ङ5, ङ7, ङ8 · च6 · छ570–80
9 · सारांश, प्रश्नावली और समापन52–53“सारांश, प्रश्नावली और समापन”9. सार, अभ्यास, परियोजनातीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक“अंतिम पाँच मिनट” वाली सूची, फिर पूरा डेक

प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खण्ड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, और छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं।

पढ़ाने से पहले

तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें

हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।

हिस्सा या औज़ारयह क्या हैकैसे तैयार करें
किताबNCERT की आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10, अध्याय 3 (2026-27 में छपी किताब)। कार्ड में आज के पृष्ठ लिखे हैं।एक दिन पहले वे पृष्ठ ख़ुद पढ़िए। कार्ड में तिरछे अक्षरों वाली पंक्तियाँ किताब के शब्द हैं; कक्षा में यही पढ़वानी हैं।
स्लाइडइस अध्याय की प्रस्तुति का पाठ: हर स्लाइड पर क्या दिखाना और बोलना है। हर कालांश की स्लाइडें कौन-सी हैं, यह “एक नज़र में” वाली तालिका के “स्लाइड” खाने में लिखा है।प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड हो तो स्लाइड बनाने की ज़रूरत नहीं: स्लाइड शो खोलिए और पूरे पर्दे पर चलाइए। इंटरनेट का भरोसा न हो तो उसी पन्ने से PDF पहले ही डाउनलोड कर लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा; कार्ड के चरण बोर्ड और किताब से हैं।
इंटरैक्टिव अध्यायवेबसाइट पर इस अध्याय का पन्ना: छँटाई वाले खेल, छोटे हिसाब और छोटे सवाल। लॉगिन नहीं चाहिए। कार्ड का लिंक सीधे आज वाले हिस्से पर खुलता है।कक्षा से पहले लिंक खोलकर देख लीजिए; कहाँ रुकना है, यह कार्ड में लिखा है। पर्दा न हो तो बच्चे इसे घर पर दोहराने के लिए खोल सकते हैं।
लक्ष्यकालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या बता पाए।पढ़ाने से पहले एक बार पढ़िए। निकास-पर्ची का सवाल इसी लक्ष्य को जाँचता है।
साथ ले जाइएकक्षा में ले जाने वाली चीज़ें, जैसे चार्ट पेपर, पर्चियाँ, आलेखों की छपी प्रतियाँ।एक दिन पहले जुटा लीजिए।
40 मिनटमिनट-दर-मिनट चरण।समय अंदाज़े से है। कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है।
चित्रडिब्बों और तीरों वाला चित्र, जो किसी उलझी बात को एक नज़र में दिखाता है। लहरदार तीर वह कड़ी है जो हमारी ओर से जोड़ी गई है।पहले कागज़ पर एक बार बनाकर देखिए। बोर्ड पर ऊपर से नीचे बनाइए: एक डिब्बा, फिर तीर पर लिखा शब्द बोलिए, फिर अगला डिब्बा। हर चित्र के साथ PNG बटन है; उससे चित्र डाउनलोड करके छाप सकते हैं या पर्दे पर दिखा सकते हैं।
बोर्ड-कार्यकालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना हो। बच्चे इसे कॉपी में उतारते हैं।कार्ड का चित्र देखकर बोर्ड पर जगह का अंदाज़ा पहले से कर लीजिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात अगले दिनों में काम आनी है, वह कॉपी में या चार्ट पर रहे।
यहाँ बच्चे अटकेंगेआम ग़लतफ़हमियाँ, और कमज़ोर व तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव।पढ़ाने से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लतफ़हमी आते ही पहचान सकें।
निकास-पर्चीकालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी जवाब कागज़ की छोटी पर्ची पर लिखता है और कक्षा से जाते समय आपको दे देता है। इससे उसी दिन पता चल जाता है कि आज की बात कितने बच्चों तक पहुँची।कॉपी का आधा पन्ना काफ़ी है; सवाल बोर्ड पर लिख दीजिए। पर्चियाँ उसी दिन देखिए। जो बात ज़्यादा बच्चों ने ग़लत लिखी हो, उसे अगले कालांश की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए। पर्ची पर अंक मत दीजिए; यह जाँच आपके अपने लिए है।
प्रश्न बैंकवेबसाइट पर इस अध्याय के प्रश्न, उत्तर के साथ, सात खंडों में: क वस्तुनिष्ठ, ख रिक्त स्थान, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित। “क3–6” का मतलब है खंड क के प्रश्न 3 से 6।गृहकार्य के प्रश्न-संख्याएँ बोर्ड पर लिखिए। जिनके पास फ़ोन नहीं है, उनके लिए वे प्रश्न बोर्ड पर लिख दीजिए या छपवा लीजिए।
फ़्लैशकार्डदोहराने के लिए छोटे सवाल-जवाब। पन्ने पर हर कार्ड की संख्या (# वाला खाना) लिखी है।बच्चों को कार्ड-संख्याएँ बता दीजिए। पन्ने पर “आता है / नहीं आता” वाला अभ्यास भी है, जो उसी फ़ोन या कंप्यूटर पर याद रखता है कि कौन-सा कार्ड कब दोहराना है।

हर कालांश से पहले:

  1. आज के कार्ड में लिखे किताब के पृष्ठ पढ़िए।
  2. मिनट-दर-मिनट चरण और चित्र पढ़िए; चित्र एक बार कागज़ पर बनाइए।
  3. “साथ ले जाइए” वाली चीज़ें जुटाइए, और स्लाइड या इंटरैक्टिव अध्याय इस्तेमाल करना है तो लिंक खोलकर जाँच लीजिए।
  4. पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए; जो बात कमज़ोर रही, उसे आज की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए।

पढ़ाने का क्रम: पहले कहानियाँ, फिर नाम

यह अध्याय लोगों की कहानियों पर टिका है: सलीम और स्वप्ना (पृष्ठ 43–44), मेघा (पृष्ठ 45), और सोनपुर के श्यामल, अरुण और रमा (पृष्ठ 46–47)। “औपचारिक” और “अनौपचारिक” शब्द किताब कालांश 7 वाले हिस्से में देती है, और आलेख 1 और 2 भी वहीं हैं। हर कहानी में बच्चे पहले ख़ुद देखें कि ऋण किससे मिला, कितने ब्याज पर, किस शर्त पर, और उससे कर्ज़दार का भला हुआ या बुरा। नाम और आँकड़े उसके बाद आएँ।

इस क्रम को मत तोड़िए। अध्याय का सबसे अच्छा सबक़ कालांश 6 में ख़ुद बच्चों के हाथ आता है: सोनपुर में सबसे सस्ता ऋण उसी को मिला, जिसके पास सबसे ज़्यादा ज़मीन है। अगर पहले ही बता दिया कि बैंक ऋणाधार माँगते हैं और गरीब साहूकार पर टिके हैं, तो बच्चे तालिका भरेंगे, पर यह बात ख़ुद नहीं खोजेंगे। कालांश 6 में “बैंक ऋणाधार माँगते हैं” वाली बात तभी बोलिए, जब हर समूह तीनों लोगों की शर्तों की तालिका भर चुका हो। इसी तरह कालांश 7 में आलेख 1 खोलने से पहले बच्चे अंदाज़ा लिखें कि गाँवों में सौ में से कितना ऋण बैंकों और सहकारी समितियों से आता होगा।

सामग्री — यह जुटा लीजिए

#क्याकिस कालांश में
1हर विद्यार्थी के लिए एक छोटी पर्ची, और पर्चियाँ रखने के लिए एक लिफ़ाफ़ा1 (लिफ़ाफ़ा कालांश 9 में खुलेगा)
2वस्तु विनिमय के खेल के लिए पाँच चीज़ें: पेंसिल, रबड़, कॉपी, टिफ़िन, पानी की बोतल; पाँच पर्चियाँ “मुझे … चाहिए”, और पाँच पर्चियाँ जिन पर “मुद्रा” लिखा हो1
3कोई एक असली नोट, हो सके तो 10 रुपये का2
4चार्ट पेपर पर अपना बनाया चैक का ख़ाका: तारीख़, किसे भुगतान करना है, रकम शब्दों में, रकम अंकों में, खाताधारक के हस्ताक्षर2
5“कक्षा का बैंक” खेल के लिए बीस छोटी पर्चियाँ, जिन पर “जमा” लिखा हो3
6एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन: “ऋण की चार शर्तें”, कक्षा की दीवार पर टाँगने के लिए5 (कालांश 9 तक टँगा रहे)
7सोनपुर की तुलना वाली ख़ाली तालिका, एक चार्ट पेपर पर6
8आलेख 1 और 2 की छपी प्रतियाँ, जहाँ हर बच्चे के पास किताब न हो7

कक्षा-व्यवस्था

  • बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह।
  • चार शर्तों का चार्ट। कालांश 5 में चार्ट पेपर पर चार खाने बनाइए: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात, भुगतान के तरीके; चार्ट कक्षा की दीवार पर टाँगिए। आगे हर नया ऋणदाता, जैसे सोनपुर का महाजन, बैंक, भूस्वामी, सहकारी समिति और स्वयं सहायता समूह, इन्हीं चार खानों पर परखा जाए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात कई दिन दिखनी है, वह बोर्ड पर नहीं, चार्ट पर रहे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो उसे मोड़कर पर्चियों के लिफ़ाफ़े के साथ रखिए और ज़रूरत के दिन खोलिए।
  • कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर पाँच कॉलम बनाए: किसका ऋण | किससे | ब्याज | ऋणाधार या कागज़ात | सीढ़ी या जाल? पहली दो पंक्तियाँ, सलीम और स्वप्ना, कालांश 4 में भरेंगी; मेघा कालांश 5 में; श्यामल, अरुण और रमा कालांश 6 में; और स्वयं सहायता समूह की सदस्य कालांश 8 में। आख़िरी कॉलम “सीढ़ी या जाल?” हमारी ओर से है।
  • बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का “बोर्ड-कार्य” उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।

अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1किताब के जूता निर्माता के उदाहरण से आवश्यकताओं का दोहरा संयोग समझा पाएगा, और बता पाएगा कि मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहते हैं1निकास-पर्ची 1, वस्तु विनिमय का खेल
2मुद्रा के बदलते रूप क्रम से बता पाएगा, करेंसी क्यों स्वीकार होती है यह समझा पाएगा, और माँग जमा और चैक का संबंध बता पाएगा2निकास-पर्ची 2, प्रश्न 4 का गृहकार्य
3बता पाएगा कि बैंक जमा का कितना भाग नकद रखते हैं, बाक़ी का क्या करते हैं, और उनकी आय कहाँ से आती है3कक्षा का बैंक, प्रश्न 3 का गृहकार्य
4सलीम और स्वप्ना की तुलना से बता पाएगा कि ऋण कब मदद करता है और कब कर्ज–ज़ाल बनता है4पृष्ठ 44 की गतिविधि की तालिका, प्रश्न 1 का गृहकार्य
5ऋण की चार शर्तें गिना पाएगा और मेघा के आवास ऋण की तालिका भर पाएगा5निकास-पर्ची 5, प्रश्न 7 का गृहकार्य
6सोनपुर के तीन लोगों की ऋण की शर्तों की तुलना कर पाएगा और बता पाएगा कि सस्ता ऋण किसे मिला और क्यों6सोनपुर की तालिका, प्रश्न 11 (ग) का गृहकार्य
7औपचारिक और अनौपचारिक स्रोत अलग कर पाएगा, आलेख 1 का जोड़ और आलेख 2 की तुलना कर पाएगा7आलेख 1 का जोड़, प्रश्न 5, 8 और 10 का गृहकार्य
8स्वयं सहायता समूह कैसे काम करता है, और बैंक उसे बिना ऋणाधार ऋण क्यों देता है, यह बता पाएगा8निकास-पर्ची 8, प्रश्न 6 का गृहकार्य
9पहले दिन की पर्ची वाले ऋण को स्रोत और चार शर्तों पर परख पाएगा9पर्चियों वाली चर्चा, प्रश्न 12 और 13

कालांश-दर-कालांश

कालांश 1 — मुद्रा: विनिमय का माध्यम

किताब — पृष्ठ 39–40 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड और “मुद्रा: विनिमय का माध्यम” वाला भाग · इंटरैक्टिव — शुरुआत, 1. विनिमय का माध्यम

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी किताब के जूता निर्माता के उदाहरण से समझा पाए कि वस्तु विनिमय में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्यों ज़रूरी है, और मुद्रा इस मुश्किल को कैसे हटाती है।

साथ ले जाइए — हर विद्यार्थी के लिए एक पर्ची और एक लिफ़ाफ़ा, और वस्तु विनिमय के खेल की पाँच चीज़ें और दस पर्चियाँ।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पहले दिन की पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: मान लीजिए अपना छोटा काम शुरू करने के लिए पैसे उधार चाहिए: किससे माँगेंगे, और क्यों? नाम नहीं लिखना है। पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में रख दीजिए; यह लिफ़ाफ़ा कालांश 9 में खुलेगा। यह सवाल हमारी ओर से है।
  2. 5–12 मिनट · आज के सौदे। पृष्ठ 39 का पहला सवाल पूछिए: किसी एक दिन में मुद्रा से जुड़े कौन-कौन से सौदे दिखते हैं? बच्चे बोलें, आप बोर्ड पर तीन खानों में लिखिए: मुद्रा देकर वस्तु, मुद्रा देकर सेवा, और ऐसे सौदे जिनमें अभी मुद्रा नहीं दी गई, बस बाद में देने का वादा हुआ। नीचे का चित्र यहीं काम आएगा। तीसरा खाना सँभालकर रखिए; यही आगे ऋण बनेगा।
  3. 12–22 मिनट · वस्तु विनिमय का खेल। पाँच बच्चों को एक-एक चीज़ दीजिए: पेंसिल, रबड़, कॉपी, टिफ़िन, पानी की बोतल। हर एक को एक पर्ची भी दीजिए, “मुझे … चाहिए”, ऐसे कि पेंसिल वाले को रबड़ चाहिए, रबड़ वाले को कॉपी, कॉपी वाले को टिफ़िन, टिफ़िन वाले को बोतल, और बोतल वाले को पेंसिल। अब कहिए: बिना पैसे के अदला-बदली कीजिए, पर सौदा तभी होगा जब दोनों को एक-दूसरे की चीज़ चाहिए। कोई जोड़ी नहीं बनेगी। फिर पृष्ठ 39 पढ़वाइए: जूता निर्माता को गेहूँ चाहिए, पर उसे ऐसा किसान खोजना होगा जो गेहूँ बेचना भी चाहे और बदले में जूते भी ख़रीदना चाहे। इसी को आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं। पृष्ठ 39 के चित्र में भी यही मुश्किल है: गेहूँ वाले को जूते नहीं, कपड़े चाहिए।
  4. 22–30 मिनट · मुद्रा बीच की कड़ी। उन्हीं पाँचों को एक-एक “मुद्रा” पर्ची दीजिए। अब हर कोई जिसे चाहिए, उसकी चीज़ “मुद्रा” देकर ख़रीदे। एक मिनट में पाँचों सौदे हो जाएँगे। पूछिए: अब किस चीज़ की ज़रूरत नहीं रही? (दोहरे संयोग की।) पृष्ठ 39–40 पढ़वाइए: मुद्रा वाली अर्थव्यवस्था में जिसके पास मुद्रा है, वह उससे कोई भी वस्तु या सेवा ख़रीद सकता है, इसलिए हर कोई भुगतान मुद्रा में लेना पसंद करता है। मुद्रा बीच में आती है, इसलिए उसे विनिमय का माध्यम कहते हैं।
  5. 30–36 मिनट · पृष्ठ 40 के दो सवाल। “आओ–इन पर विचार करें” के पहले दो सवाल समूहों में: मुद्रा से विनिमय में सहूलियत कैसे आती है, और आज भी कहाँ वस्तु के बदले वस्तु या मज़दूरी की अदायगी होती दिखती है? दो-तीन समूहों से उत्तर सुनिए। उत्तर नीचे “निकास-पर्ची और गृहकार्य” में हैं।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है? जूता निर्माता के उदाहरण से लिखिए। (2) मुद्रा को विनिमय का माध्यम क्यों कहते हैं?

आज के सौदे, तीन तरह के (चरण 2)

आज के सौदे, तीन तरह के

सौदा 1मुद्रा देकर वस्तुजैसे दूध, सब्ज़ी, कॉपी-पेन ख़रीदना
सौदा 2मुद्रा देकर सेवाजैसे बस का किराया, नाई या दर्ज़ी का भुगतान
सौदा 3अभी मुद्रा नहीं, बाद में देने का वादाजैसे दुकान पर उधार खाता
ऋणभविष्य में भुगतान का वादाइसका पूरा अर्थ कालांश 4 में
NCERT, पृष्ठ 39; उदाहरण और आख़िरी कड़ी हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। बीच का खाना आज के खेल से भरिए।

वस्तु विनिमयमुद्रा से
सौदा कैसे होता हैवस्तु के बदले वस्तुपहले अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा, फिर उस मुद्रा से दूसरी वस्तु
क्या ज़रूरी हैआवश्यकताओं का दोहरा संयोग: दोनों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिएबस अपनी वस्तु का ख़रीदार चाहिए
किताब का उदाहरणजूता निर्माता को ऐसा किसान खोजना पड़ेगा जो गेहूँ बेचे भी और जूते ख़रीदे भीजूते बेचकर मुद्रा, फिर उस मुद्रा से गेहूँ

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • किताब में शब्द की छपाई। पृष्ठ 39 पर मोटे अक्षरों में “आश्यकताओं” छपा है। बोर्ड पर सही रूप लिखिए: आवश्यकताओं का दोहरा संयोग, और बच्चों को बता दीजिए कि यह छपाई की भूल है।
  • “दोहरा” किसका? बच्चे सोचते हैं कि दोहरा मतलब दो चीज़ें। समझाइए कि दोनों पक्षों की इच्छा एक साथ मिलनी चाहिए: मुझे तुम्हारी चीज़ चाहिए, और तुम्हें मेरी। एक तरफ़ की इच्छा काफ़ी नहीं।
  • खेल में कोई बच्चा तीन लोगों की कड़ी बना ले, जैसे रबड़ देकर कॉपी, फिर कॉपी देकर टिफ़िन, तो उसकी तारीफ़ कीजिए और पूछिए: इसमें कितना समय और कितनी खोज लगी? मुद्रा यही खोज बचाती है।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “शुरुआत” और “1. विनिमय का माध्यम” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “2. मुद्रा के आधुनिक रूप” शुरू होने से पहले रुकिए; वह कालांश 2 का है।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: बिना मुद्रा के सौदा तभी होता है, जब दोनों को एक-दूसरे की चीज़ चाहिए।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर किसी गाँव में सब लोग एक ही चीज़ बनाते, तो क्या वस्तु विनिमय चल पाता? (नहीं; किसी को दूसरे की चीज़ चाहिए ही नहीं, तो कोई सौदा नहीं होगा। विनिमय तभी होता है जब लोगों के पास अलग-अलग चीज़ें और अलग-अलग ज़रूरतें हों।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) वस्तु विनिमय में दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए; जूता निर्माता को ऐसा किसान खोजना होगा जो गेहूँ बेचे भी और जूते ख़रीदे भी। (2) मुद्रा बीच की कड़ी है: अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा लीजिए, और उससे कोई भी दूसरी वस्तु ख़रीदिए; इसलिए दोहरे संयोग की ज़रूरत नहीं रहती। जिन बच्चों ने (1) में सिर्फ़ “दो चीज़ों की अदला-बदली” लिखा हो, उनके लिए कालांश 2 की शुरुआत में यह बात एक मिनट दोहराइए। पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा आज नहीं खुलेगा; उसे सँभालकर रखिए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क1, क2, ख1 और घ1; तेज़ विद्यार्थी च1 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 2 कॉपी में, अपने उदाहरण के साथ; कालांश 9 में जाँच होगी।
  • पृष्ठ 39 और 40 के सवालों के उत्तर: पृष्ठ 39: सूची बच्चों की अपनी होगी, जैसे दूध और सब्ज़ी ख़रीदना, बस या ऑटो का किराया, नाई को भुगतान, और दुकान का उधार खाता; उसे ऊपर के तीन खानों में बाँटिए। पृष्ठ 40, सवाल 1: जूता निर्माता को अब ऐसा किसान नहीं ढूँढना पड़ता जो जूते ख़रीदे और गेहूँ भी बेचे; उसे बस जूतों का ख़रीदार चाहिए, और जूतों से मिली मुद्रा से वह गेहूँ या कुछ भी ख़रीद सकता है। सवाल 2: किताब में आगे ही एक उदाहरण है, सोनपुर की रमा, जो भूस्वामी का कर्ज़ नकद से नहीं, उसके यहाँ काम करके चुकाती है (पृष्ठ 46)। बाक़ी उदाहरण बच्चे अपने आसपास से लाएँ, जैसे किसी काम के बदले अनाज देना।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–8।

कालांश 2 — मुद्रा के आधुनिक रूप

किताब — पृष्ठ 40–42 · स्लाइड — “मुद्रा के आधुनिक रूप” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 2. मुद्रा के आधुनिक रूप

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी मुद्रा के रूप क्रम से बता पाए, यह समझा पाए कि जिस करेंसी का अपना कोई इस्तेमाल नहीं, वह फिर भी क्यों चलती है, और बता पाए कि माँग जमा को भी मुद्रा क्यों माना जाता है।

साथ ले जाइए — एक असली नोट, हो सके तो 10 रुपये का, और चार्ट पेपर पर चैक का ख़ाका।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 1 की निकास-पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए। फिर पूछिए: क्या मुद्रा हमेशा से नोट और सिक्के ही थी?
  2. 5–12 मिनट · मुद्रा का सफ़र। पृष्ठ 40 पढ़वाइए और नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। बहुत प्रारंभिक काल से भारतीय अनाज और पशु का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे; इसके बाद पिछली सदी तक सोना, चाँदी और ताँबे जैसी धातुओं के सिक्के चले। पृष्ठ 40 के सिक्कों की तस्वीरें दिखाइए: आहत सिक्के (लगभग 2500 वर्ष पुराने), गुप्तकालीन, तुगलक के, अकबर कालीन मोहर, और आधुनिक सिक्का।
  3. 12–20 मिनट · नोट हाथ में। नोट समूहों में घुमाइए और एक विद्यार्थी से उस पर छपा वचन पढ़वाइए। 10 रुपये के नोट पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर के साथ छपा होता है: “मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हूँ” (रिज़र्व बैंक: भारतीय मुद्रा, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)। फिर पूछिए: इस कागज़ से आप न खा सकते हैं, न पहन सकते हैं; फिर दुकानदार इसे क्यों लेता है? पृष्ठ 40 से उत्तर: करेंसी का अपना कोई इस्तेमाल नहीं; उसे विनिमय का माध्यम इसलिए स्वीकार किया जाता है कि देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है, किसी और व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं, और कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।
  4. 20–28 मिनट · बैंक में जमा। पृष्ठ 40–41 पढ़वाइए। लोगों को रोज़ के खर्च के लिए थोड़ी ही करेंसी चाहिए; बाक़ी वे बैंक में अपने नाम का खाता खोलकर जमा कर देते हैं। बैंक इस पर सूद देता है, पैसा सुरक्षित रहता है, और ज़रूरत पर निकाला जा सकता है। क्योंकि यह जमा माँगने पर निकाला जा सकता है, इसे माँग जमा कहते हैं।
  5. 28–36 मिनट · चैक। चार्ट पेपर वाला चैक का ख़ाका टाँगिए। पृष्ठ 41 पढ़वाइए: चैक बैंक को आदेश है कि खाते से चैक पर लिखे नाम वाले व्यक्ति को वह रकम दी जाए। किताब का उदाहरण: जूता निर्माता एम. सलीम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक देता है, और कुछ दिनों में धन एक खाते से दूसरे में चला जाता है, बिना नकद के। फिर पृष्ठ 42 के “आओ–इन पर विचार करें” के तीनों सवाल जोड़ियों में करवाइए; उत्तर नीचे हैं।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) जिस नोट का अपना कोई इस्तेमाल नहीं, उसे लोग विनिमय का माध्यम क्यों मानते हैं? (2) माँग जमा को मुद्रा क्यों माना जाता है?

मुद्रा का सफ़र (चरण 2–4)

मुद्रा का सफ़र

बहुत प्रारंभिक काल सेअनाज और पशुभारतीय इन्हें मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे
धातु के सिक्केसोना, चाँदी और ताँबाकिताब के चित्रों में आहत सिक्कों से आधुनिक सिक्के तक
करेंसीकागज़ के नोट और सिक्केअपना कोई इस्तेमाल नहीं; सरकार प्राधिकृत करती है
माँग जमाबैंक खाते में जमा पैसाचैक से बिना नकद भुगतान
NCERT, पृष्ठ 40–41

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर चित्र और यह तालिका बने; बच्चे दोनों कॉपी में उतारें।

करेंसीमाँग जमा
रूपकागज़ के नोट और सिक्केबैंक खाते में जमा पैसा
कौन जारी करता है / कहाँ रहता हैभारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ सेबैंक में, खाताधारक के नाम से
भुगतान कैसेनकद देकरचैक से, बिना नकद
क्यों स्वीकार होता हैसरकार प्राधिकृत करती है; रुपये में अदायगी अस्वीकार नहीं की जा सकतीमाँगने पर निकाला जा सकता है, और लोग इसे भुगतान का माध्यम मानते हैं

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “चैक ही मुद्रा है।” नहीं। चैक बैंक को भुगतान का आदेश है; मुद्रा वह माँग जमा है, जिससे भुगतान होता है। बिना जमा के चैक का कोई अर्थ नहीं।
  • “कार्ड से या फ़ोन से भुगतान भी मुद्रा है?” किताब के शिक्षक-निर्देश (पृष्ठ 38) के अनुसार नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपये के नोट अमान्य घोषित हुए, और तब से नकदी की जगह बैंक जमा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया: चैक, ए.टी.एम. कार्ड, मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट से भुगतान। वहीं लिखा है कि प्लास्टिक कार्ड लेन-देन में काम आते हैं, लेकिन अपने आप में मुद्रा नहीं हैं।
  • “नोट सोने के बराबर है, इसलिए चलता है।” यह पुरानी सोच है। किताब साफ़ कहती है कि आधुनिक मुद्रा सोने, चाँदी या ताँबे से नहीं बनी, और उसका अपना कोई इस्तेमाल नहीं; वह सरकार के प्राधिकार से चलती है।
  • पृष्ठ 41 का नमूना चैक सिर्फ़ खाने दिखाने के लिए है। उस पर छपे अंक और हस्ताक्षर बच्चों से मत लिखवाइए; ख़ाका अपना बनाइए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “2. मुद्रा के आधुनिक रूप” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “3. बैंक क्या करते हैं” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए क्रम याद रखने का सहारा: अनाज और पशु, फिर सिक्के, फिर नोट, फिर बैंक की जमा।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर बैंक न हों, तो क्या माँग जमा होगा? (नहीं। बैंक न हों तो न माँग जमा होगा, न उसके बदले चैक से भुगतान; इसलिए किताब कहती है कि मुद्रा के आधुनिक रूप आधुनिक बैंक प्रणाली से बहुत क़रीब से जुड़े हैं।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) सरकार उसे प्राधिकृत करती है; भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से नोट जारी करता है, और रुपयों में अदायगी कानूनी तौर पर अस्वीकार नहीं की जा सकती। (2) माँग जमा माँगने पर निकाला जा सकता है, और उसके बदले चैक से बिना नकद भुगतान हो जाता है; यानी वह भी विनिमय का माध्यम है। जिन बच्चों ने (1) में “नोट क़ीमती है” लिखा हो, उनके लिए कालांश 3 की शुरुआत में करेंसी की तालिका एक बार दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क3–6, ख2, ख3, ग1 और घ2–4; तेज़ विद्यार्थी ङ1 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 4 कॉपी में: घर में कोई नोट देखकर उस पर छपा वचन लिखिए और समझाइए।
  • पृष्ठ 42 की गतिविधि के उत्तर: सवाल 1: सलीम चैक पर तारीख़ लिखेंगे, जिसे भुगतान होना है उसकी जगह अपना नाम, रकम शब्दों में (बीस हज़ार रुपये) और अंकों में (20,000), और खाताधारक के रूप में हस्ताक्षर; फिर अपने बैंक में देकर नकद लेंगे। सवाल 2: (ख), सलीम के खाते में शेष घटता है और प्रेम के खाते में बढ़ता है, क्योंकि चैक प्रेम के नाम है। सवाल 3: माँग जमा माँगने पर निकाला जा सकता है, चैक से उससे सीधा भुगतान होता है, और लोग इसे करेंसी की तरह भुगतान का माध्यम मानते हैं।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 9–21।

कालांश 3 — बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ

किताब — पृष्ठ 42 · स्लाइड — “बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 3. बैंक क्या करते हैं

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद क्यों रखते हैं, बाक़ी का क्या करते हैं, और बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है।

साथ ले जाइए — “जमा” लिखी बीस पर्चियाँ।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 2 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए। फिर पूछिए: आपने बैंक में पैसा जमा किया; क्या बैंक उसे तिजोरी में आपके नाम से अलग रख देता है?
  2. 5–12 मिनट · पृष्ठ 42। पृष्ठ 42 पढ़वाइए: भारत में बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं। जमा के बड़े भाग से बैंक ऋण देते हैं, क्योंकि विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण की बहुत माँग रहती है।
  3. 12–22 मिनट · कक्षा का बैंक। यह खेल हमारी ओर से है। मान लीजिए बीस बच्चे जमाकर्ता हैं; हर एक “बैंक” बने विद्यार्थी को एक “जमा” पर्ची देता है। बैंक बीस में से एक पर्ची नकद के रूप में रखता है (यह 5 प्रतिशत है) और बाक़ी उन्नीस दूसरे समूह के “कर्ज़दारों” को दे देता है। अब एक जमाकर्ता पैसा माँगने आए: बैंक दे देता है। तीन आ जाएँ, तो? बच्चों को ख़ुद देखने दीजिए कि मुश्किल कहाँ शुरू होती है।
  4. 22–28 मिनट · किताब का सवाल। पृष्ठ 42 का सवाल पढ़वाइए: “अगर सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी धन राशि की माँग करने बैंक पहुँच जाएँ तो क्या होगा?” समूह दो मिनट सोचें, फिर उत्तर बोलें। नीचे का चित्र यहीं बनाइए।
  5. 28–36 मिनट · बैंक कमाता कहाँ से है? पृष्ठ 42 से: बैंक जमा पर जितना ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ऋण पर लेते हैं, और कर्ज़दारों से लिए और जमाकर्ताओं को दिए ब्याज का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है। इस तरह बैंक जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के बीच मध्यस्थता करते हैं। प्रश्नावली का प्रश्न 3 यहीं से है; एक विद्यार्थी उसका उत्तर बोलकर बताए।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) बैंक जमा का कितना हिस्सा नकद रखते हैं, और इतना कम क्यों काफ़ी है? (2) बैंक की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?

सब जमाकर्ता एक साथ आ जाएँ तो? (चरण 3–4)

सब जमाकर्ता एक साथ आ जाएँ तो?

आम दिनकुछ ही जमाकर्ता नकद निकालने आते हैंइसलिए बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखता है
ऋणजमा का बड़ा भाग कर्ज़दारों कोऋण पर लिया ब्याज, जमा पर दिए ब्याज से ज़्यादा
किताब का सवालबैंक सबको एक साथ नकद नहीं दे पाएगाबड़ा भाग ऋण में जा चुका है
NCERT, पृष्ठ 42; आख़िरी डिब्बे का उत्तर हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर चित्र और यह छोटी तालिका बने; बच्चे दोनों कॉपी में उतारें।

कौनबैंक से क्या लेता हैबैंक को क्या देता है
जमाकर्ता (जिनके पास अतिरिक्त धन है)जमा पर ब्याज, और ज़रूरत पर अपना पैसाअपनी जमा
कर्ज़दार (जिन्हें धन चाहिए)ऋणऋण की रकम और उस पर ज़्यादा ब्याज
बैंकदोनों ब्याजों का अंतर, यानी अपनी आयजमा का केवल 5 प्रतिशत नकद अपने पास

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “बैंक हमारा पैसा तिजोरी में रखता है।” किताब के अनुसार नहीं: केवल 5 प्रतिशत नकद रहता है, बड़ा भाग ऋण में जाता है। किसी पुरानी गाइड में कोई और प्रतिशत दिखे, तो बच्चों को किताब का पृष्ठ 42 ही दिखाइए।
  • “तो क्या बैंक में पैसा सुरक्षित नहीं?” बच्चे डर सकते हैं। किताब का उत्तर यह है कि बैंक इसी पर चलता है कि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता नकद निकालने आते हैं। कालांश 7 में बच्चे देखेंगे कि भारतीय रिज़र्व बैंक यह भी देखता है कि बैंक न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच अपने पास रखें।
  • पृष्ठ 42 के चित्र पर हिंदी में कोई शीर्षक नहीं छपा। बच्चे चाहें तो अपना शीर्षक दें, जैसे “जमाकर्ता, बैंक और कर्ज़दार”।
  • कक्षा के बैंक का हिसाब किताब का नहीं, हमारा है; बीस में से एक पर्ची सिर्फ़ 5 प्रतिशत को आँख से दिखाने के लिए है।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “3. बैंक क्या करते हैं” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “4. साख की दो स्थितियाँ” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए तीन शब्द काफ़ी हैं: जमा, ऋण, ब्याज का अंतर।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: बैंक जमा पर ब्याज देता है, फिर भी घाटे में क्यों नहीं जाता? (वह ऋण पर उससे ज़्यादा ब्याज लेता है; दोनों का अंतर उसकी आय है।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) केवल 5 प्रतिशत; क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं। (2) ऋण पर लिए और जमा पर दिए ब्याज का अंतर। जिन बच्चों ने (1) में बड़ा प्रतिशत लिखा हो, उनके लिए कालांश 4 की शुरुआत में चित्र का पहला डिब्बा एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क7, क8, ख4, ग2, घ5 और घ6; तेज़ विद्यार्थी च2 और छ6 भी (छ6 का हिसाब “मान लीजिए” वाला है, किताब का आँकड़ा नहीं)। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 3 कॉपी में।
  • किताब के सवाल का उत्तर (पृष्ठ 42): बैंक सबको एक साथ पैसा नहीं दे पाएगा, क्योंकि वह जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखता है और बड़ा भाग ऋण में दे चुका होता है। बैंक का काम इसी भरोसे पर चलता है कि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 22–26।

कालांश 4 — साख की दो विभिन्न स्थितियाँ

किताब — पृष्ठ 43–44 · स्लाइड — “साख की दो विभिन्न स्थितियाँ” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 4. साख की दो स्थितियाँ

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी ऋण की परिभाषा बता पाए, और सलीम और स्वप्ना की तुलना से समझा पाए कि ऋण कब कमाई बढ़ाता है और कब कर्ज–ज़ाल बन जाता है।

साथ ले जाइए — बोर्ड पर पृष्ठ 44 की गतिविधि वाली ख़ाली तालिका बनाने की जगह, और बच्चों की कॉपी का पहला पन्ना।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 3 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए। फिर कालांश 1 का तीसरा खाना याद दिलाइए: अभी मुद्रा नहीं, बाद में देने का वादा।
  2. 5–10 मिनट · ऋण क्या है। पृष्ठ 43 से ऋण (उधार) की परिभाषा पढ़वाइए: यह एक सहमति है, जिसमें उधार देने वाला कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ देता है और बदले में भविष्य में भुगतान का वादा लेता है। बोर्ड पर लिखिए: उधारदाता, कर्ज़दार, वादा।
  3. 10–20 मिनट · सलीम। पृष्ठ 43 पढ़वाइए। त्यौहार के मौसम में सलीम को 3000 जोड़ी जूतों का ऑर्डर एक महीने में पूरा करना है। उसे अतिरिक्त मज़दूर रखने हैं और कच्चा माल ख़रीदना है। इन खर्चों के लिए वह दो जगह से ऋण लेता है: चमड़ा व्यापारी से चमड़ा अभी लेकर भुगतान बाद में करने का वादा, और बड़े व्यापारी से 1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान। ऑर्डर समय पर पूरा होता है, लाभ होता है, उधार चुकता है। किताब का निष्कर्ष पढ़वाइए: “इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।”
  4. 20–28 मिनट · स्वप्ना। पृष्ठ 43–44 पढ़वाइए। स्वप्ना 3 एकड़ में मूँगफली उगाती है और खेती के खर्च के लिए साहूकार से ऋण लेती है। कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद हो जाती है, कर्ज़ नहीं चुकता और साल भर में बड़ी रकम बन जाता है; अगले साल फसल सामान्य रहती है, फिर भी कर्ज़ नहीं चुकता, और उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ता है। किताब पढ़वाइए: “इस मामले में ऋण कर्जदार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना काफी कष्टदायक होता है।” इसे आम भाषा में कर्ज–ज़ाल कहते हैं।
  5. 28–36 मिनट · दोनों की तुलना। आधे समूह सलीम पर, आधे स्वप्ना पर, पृष्ठ 44 की गतिविधि की तालिका भरें: ऋण क्यों चाहिए था, जोखिम क्या था, परिणाम क्या हुआ। फिर नीचे का चित्र बनाइए और पृष्ठ 44 की वह पंक्ति पढ़वाइए जो अध्याय का बड़ा विचार है: “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” बच्चे कॉपी के पहले पन्ने पर सलीम और स्वप्ना की पंक्तियाँ भरें।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) सलीम के लिए ऋण फ़ायदेमंद क्यों रहा? एक कारण लिखिए। (2) कर्ज–ज़ाल क्या है? स्वप्ना के उदाहरण से लिखिए।

फसल का मौसम और ऋण (चरण 4–5)

फसल का मौसम और ऋण

ऋतु का आरंभबीज, खाद, कीटनाशक दवाएँ, पानी, बिजली, उपकरणों की मरम्मतइन आगतों के लिए उधार
फसल की बिक्रीअदायगी फसल की कमाई सेफसल ठीक रही, तो ऋण चुकता
स्वप्नाकर्ज़ बड़ा होता गया, ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ाकर्ज–ज़ाल
NCERT, पृष्ठ 43–44

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 44 की गतिविधि की यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

सलीमस्वप्ना
उन्हें ऋण की आवश्यकता क्यों पड़ी?3000 जोड़ी जूतों का ऑर्डर एक महीने में पूरा करने के लिए अतिरिक्त मज़दूर और कच्चा माल3 एकड़ में मूँगफली की खेती का खर्च
जोखिम क्या था?ऑर्डर समय पर पूरा न होता तो लाभ न होता और उधार चुकाना मुश्किल होताफसल बर्बाद होने का; अदायगी फसल की कमाई पर टिकी थी
परिणाम क्या हुए?समय पर जूते पहुँचाए, लाभ हुआ, उधार चुका दियाफसल बर्बाद, कर्ज़ बढ़ा, ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ा

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “ऋण बुरी चीज़ है।” बच्चे स्वप्ना की कहानी के बाद यही मान लेते हैं। सलीम को साथ रखिए: वही ऋण, पर नतीजा उल्टा। फ़र्क़ ऋण में नहीं, परिस्थिति के जोखिम और हानि होने पर मिलने वाले सहारे में है।
  • “सलीम ने बैंक से ऋण लिया।” नहीं। उसका ऋण चमड़ा व्यापारी (चमड़ा अभी, भुगतान बाद में) और बड़े व्यापारी (1000 जूतों का अग्रिम) से था। यानी ऋण सिर्फ़ नकद नहीं, वस्तुओं के रूप में भी होता है।
  • शब्द की वर्तनी। पृष्ठ 44 पर “कर्ज–ज़ाल” छपा है, और आगे पृष्ठ 49 पर “ऋण–जाल”। दोनों का अर्थ एक है; उद्धरण में वही रूप लिखिए जो उस पृष्ठ पर है।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “4. साख की दो स्थितियाँ” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “5. ऋण की शर्तें” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो पंक्तियाँ काफ़ी हैं: सलीम का ऋण कमाई बढ़ाने में लगा और लौट गया; स्वप्ना का ऋण फसल के साथ डूब गया और बढ़ता गया।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: स्वप्ना के पास फसल बर्बाद होने पर कोई सहारा होता, तो क्या कहानी बदलती? (हाँ; किताब के अनुसार ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह हानि होने पर मिलने वाले सहयोग पर भी निर्भर करता है। सहारा होता तो ज़मीन बेचने की नौबत शायद न आती।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) ऋण से उसकी कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी हुई, ऑर्डर समय पर पूरा हुआ और कमाई बढ़ी। (2) ऋण चुकाने के बजाय और बढ़ जाए, और उससे निकलना कष्टदायक हो; स्वप्ना का कर्ज़ नहीं चुका, बढ़ता गया, और उसे ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ा। जिन बच्चों ने (2) में सिर्फ़ “ऋण नहीं चुका” लिखा हो, उन्हें कालांश 5 की शुरुआत में “ज़मीन बेचनी पड़ी” वाला हिस्सा याद दिलाइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क9–12, ख5, ख6, घ7 और घ8; तेज़ विद्यार्थी ङ2 और च3 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 1 कॉपी में; कालांश 9 में जाँच होगी।
  • पृष्ठ 44 की गतिविधि के उत्तर: सवाल 1 की तालिका ऊपर बोर्ड-कार्य में है। सवाल 2: ऑर्डर मिलते रहें और सलीम उन्हें समय पर पूरा करता रहे, तो हर बार ऋण से कार्यशील पूँजी मिलेगी, लाभ होगा और उधार चुकता रहेगा; 6 साल में उसकी कमाई और बचत बढ़ेगी और वह काम बढ़ा सकता है। सवाल 3: कीटनाशक दवाइयाँ: हमला हुआ, महँगी दवाइयाँ छिड़कने पर भी फ़र्क़ नहीं पड़ा, उल्टे खर्च बढ़ा; साहूकारों की भूमिका: ऋण साहूकार से था, न चुकने पर साल भर में बड़ी रकम बन गया और ज़मीन बेचनी पड़ी; मौसम: कमाई फसल पर टिकी है, फसल ख़राब हुई तो अदायगी नहीं होती, जैसा स्वप्ना के साथ हुआ।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 27–36।

कालांश 5 — ऋण की शर्तें

किताब — पृष्ठ 44–45 · स्लाइड — “ऋण की शर्तें” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 5. ऋण की शर्तें

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी ऋण की चार शर्तें गिना पाए, मेघा के आवास ऋण की तालिका भर पाए, और बता पाए कि उधारदाता समर्थक ऋणाधार क्यों माँगता है।

साथ ले जाइए — “ऋण की चार शर्तें” वाला चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 4 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए। फिर पूछिए: सलीम और स्वप्ना, दोनों ने ऋण लिया; पर क्या दोनों ने एक जैसी शर्तों पर लिया?
  2. 5–14 मिनट · चार शर्तें। पृष्ठ 44–45 पढ़वाइए। हर ऋण समझौते में चार बातें तय होती हैं, और इन्हें मिलाकर ऋण की शर्तें कहते हैं: ब्याज दर, जो कर्ज़दार मूल रकम के साथ चुकाता है; समर्थक ऋणाधार, यानी कर्ज़दार की कोई संपत्ति जो ऋण चुकने तक गारंटी रहती है, जैसे भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में जमा पूँजी; आवश्यक कागज़ात; और भुगतान के तरीके। चारों खाने चार्ट पेपर पर बनाइए और दीवार पर टाँगिए; यह चार्ट कालांश 9 तक रहेगा।
  3. 14–22 मिनट · मेघा का आवास ऋण। पृष्ठ 45 की कहानी पढ़वाइए और समूह तालिका भरें। फिर नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए, और मेघा के ऋण की हर बात को चार्ट के सही खाने में रखवाइए। बच्चे कॉपी के पहले पन्ने पर मेघा की पंक्ति भरें।
  4. 22–30 मिनट · ऋणाधार क्यों? पृष्ठ 45 के “आओ–इन पर विचार करें” के पहले दो सवाल समूहों में: उधारदाता समर्थक ऋणाधार क्यों माँगता है, और हमारे देश की एक बहुत बड़ी आबादी निर्धन है, तो क्या इससे उनकी कर्ज़ लेने की क्षमता प्रभावित होती है? दो समूहों से उत्तर सुनिए।
  5. 30–36 मिनट · आसान शर्तें। पृष्ठ 45 का तीसरा सवाल, रिक्त स्थान वाला, पूरी कक्षा मिलकर करे: आसान ऋण शर्तों का अर्थ है निम्न ब्याज दर, आसान अदायगी की शर्तें, और कम समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात। फिर पूछिए: स्वप्ना की शर्तें आसान थीं या कठिन? चार्ट के चारों खानों से जवाब दिलवाइए।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) ऋण की चार शर्तें कौन-सी हैं? (2) उधारदाता समर्थक ऋणाधार क्यों माँगता है?

मेघा का ऋण, चार शर्तों में (चरण 3)

मेघा का ऋण, चार शर्तों में

ब्याज दर12 प्रतिशत वार्षिक
समर्थक ऋणाधारनए घर के सभी कागज़ब्याज समेत कर्ज़ लौटाने पर वापस मिलेंगे
आवश्यक कागज़ातनौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड
भुगतान के तरीकेमासिक किश्तें
ऋण की शर्तें5 लाख रुपये, 10 साल के लिएशर्तें ऋणदाता और कर्ज़दार की प्रकृति के साथ बदलती हैं
NCERT, पृष्ठ 44–45

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर पृष्ठ 45 की मेघा वाली तालिका भरी हो, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। चार शर्तों का चार्ट दीवार पर रहे।

ऋण की बातमेघा के ऋण में
ऋण राशि (रुपये में)5 लाख रुपये
ऋण–अवधि10 साल
आवश्यक कागज़ातनौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड
ब्याज दर12 प्रतिशत वार्षिक
अदायगी का स्वरूपमासिक किश्तें
समर्थक ऋणाधारनए घर के सभी कागज़

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “ऋणाधार मतलब ऋण की रकम।” नहीं। ऋणाधार कर्ज़दार की अपनी संपत्ति है, जो ऋण चुकने तक गारंटी रहती है। कर्ज़दार न लौटा पाए, तो उधारदाता को उसे बेचकर भुगतान लेने का अधिकार होता है।
  • मेघा ने घर गिरवी कैसे रखा, जब घर अभी ख़रीदा ही है? किताब के अनुसार ऋणाधार नए घर के सभी कागज़ हैं, जो ब्याज समेत कर्ज़ लौटाने पर उसे वापस मिलेंगे।
  • किताब में शब्द की छपाई। पृष्ठ 45 पर “कर्ज़ की शर्ते” छपा है। बोर्ड पर सही रूप लिखिए: शर्तें।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “5. ऋण की शर्तें” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “6. सोनपुर: एक गाँव में साख” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए चार शब्द याद करने का सहारा: ब्याज, गिरवी, कागज़, किश्त।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: मेघा के पास नौकरी और वेतन का रिकार्ड न होता, तो क्या बैंक उसे ऋण देता? (शायद नहीं; बैंक आवश्यक कागज़ात माँगता है, ताकि भरोसा रहे कि ऋण लौटेगा। यह बात कालांश 7 और 8 में फिर आएगी।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात, भुगतान के तरीके। (2) ताकि ऋण लौटने की गारंटी रहे; कर्ज़दार न लौटा पाए, तो उधारदाता ऋणाधार बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है। जिन बच्चों ने चार में से कोई शर्त छोड़ी हो, उन्हें कालांश 6 की शुरुआत में चार्ट दिखाकर एक बार गिनवाइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क13 और ख7; तेज़ विद्यार्थी छ3 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 7 कॉपी में।
  • पृष्ठ 45 की गतिविधि के उत्तर: सवाल 1: ताकि ऋण लौटने की गारंटी रहे; न लौटे तो उधारदाता ऋणाधार (भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में जमा पूँजी) बेचकर वसूल सकता है। सवाल 2: हाँ; गरीबों के पास ऋणाधार लायक संपत्ति और ज़रूरी कागज़ात नहीं होते, इसलिए बैंक उन्हें ऋण नहीं देते, और उन्हें ऊँचे ब्याज वाले अनौपचारिक स्रोतों पर टिकना पड़ता है। सवाल 3: निम्न ब्याज दर, आसान अदायगी की शर्तें, कम समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात। मेघा की तालिका ऊपर बोर्ड-कार्य में है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 37–44।

कालांश 6 — विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण

किताब — पृष्ठ 46–47 · स्लाइड — “विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 6. सोनपुर: एक गाँव में साख

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी सोनपुर के श्यामल, अरुण और रमा की ऋण की शर्तों की तुलना कर पाए, और बता पाए कि सबसे सस्ता ऋण किसे मिला और क्यों।

साथ ले जाइए — सोनपुर की तुलना वाली ख़ाली तालिका का चार्ट पेपर, और चार शर्तों वाला चार्ट।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 5 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए, और चार्ट से चारों शर्तें एक बार गिनवाइए।
  2. 5–10 मिनट · सोनपुर। पृष्ठ 46 की शुरुआत पढ़वाइए: रोहित और रंजन अपने गाँव सोनपुर में लोगों से ऋण के बारे में बात करते हैं। फिर पूछिए: आपके हिसाब से गाँव में सबसे सस्ता ऋण किसे मिलेगा? बच्चे अनुमान कॉपी में लिखें; अभी कोई उत्तर मत बताइए।
  3. 10–20 मिनट · तीन कहानियाँ, तीन समूह। एक समूह श्यामल पढ़े, दूसरा अरुण, तीसरा रमा; बाक़ी समूह इन्हीं में बँट जाएँ। हर समूह अपने व्यक्ति के लिए चार बातें लिखे: ऋण किससे, ब्याज कितना, लौटाना कैसे, और कोई दूसरी शर्त। तीनों के बारे में किताब के आँकड़े नीचे बोर्ड-कार्य की तालिका में हैं।
  4. 20–28 मिनट · तुलना का चार्ट। हर समूह से एक विद्यार्थी आकर चार्ट पेपर की तालिका में अपना कॉलम भरे। फिर पृष्ठ 47 से कृषक सहकारी समिति पढ़वाइए: पास के गाँव की समिति के 2300 किसान सदस्य हैं; वह सदस्यों से जमा लेती है, उसी जमा को ऋणाधार मानकर बैंक से बड़ा ऋण लेती है, और उससे सदस्यों को कर्ज़ देती है। अब अनुमान से मिलाइए: सबसे सस्ता ऋण किसे मिला?
  5. 28–36 मिनट · पैटर्न खोजिए। नीचे का चित्र बनाइए और पूछिए: तीनों में से किसके पास सबसे ज़्यादा ज़मीन है, और ऋण सबसे सस्ता किसका है? बच्चे ख़ुद बोलें, फिर पृष्ठ 47 की गतिविधि 6 (ख) का किताब वाला विकल्प पढ़वाइए: बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जो कि हर किसी के पास नहीं होती। फिर गतिविधि 4, 5 और 6 (क) पर बात कीजिए; उत्तर नीचे हैं। बच्चे कॉपी के पहले पन्ने पर तीनों पंक्तियाँ भरें।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) अरुण को बैंक से ऋण क्यों मिल पाया, और रमा को क्यों नहीं? (2) समय के साथ रमा का ऋण बढ़ेगा, घटेगा या उतना ही रहेगा? क्यों?

सोनपुर: ज़मीन जितनी, ऋण उतना सस्ता? (चरण 5)

सोनपुर: ज़मीन जितनी, ऋण उतना सस्ता?

श्यामल1.5 एकड़कृषि व्यापारी से, 3 प्रतिशत मासिक; फसल उसी व्यापारी को बेचने का वादा
अरुण7 एकड़बैंक से, 8.5 प्रतिशत वार्षिक; अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है
रमाभूमिहीनभूस्वामी-नियोक्ता से, 5 प्रतिशत मासिक; काम करके चुकाती है
क्यों?बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं, जो हर किसी के पास नहीं होतातो ज़मीन ही अकेली वजह है, या कुछ और भी?
NCERT, पृष्ठ 46–47; शीर्षक और सवाल हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक चार्ट पेपर पर पृष्ठ 47 की गतिविधि 3 वाली यह तुलना बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। यह चार्ट कालांश 7 में फिर काम आएगा।

छोटा किसान (श्यामल)मध्यम किसान (अरुण)भूमिहीन मज़दूर (रमा)
ज़मीन1.5 एकड़7 एकड़कोई नहीं
स्रोतकृषि व्यापारी (पहले गाँव का महाजन)बैंकभूस्वामी-नियोक्ता
ब्याज दर3 प्रतिशत मासिक (महाजन का 5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक)8.5 प्रतिशत वार्षिक5 प्रतिशत मासिक
अदायगीफसल तैयार होने परअगले तीन वर्षों में कभी भीभूस्वामी के यहाँ काम करके
और शर्तफसल उसी व्यापारी को बेचने का वादातीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता हैनया ऋण पाने के लिए उसके यहाँ काम करते रहना; अभी 5,000 रुपये बाकी

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • मासिक और वार्षिक का घालमेल। बच्चे देखते हैं “3” और “8.5” और सोचते हैं कि श्यामल का ऋण सस्ता है। पूछिए: यह ब्याज हर महीने लगता है या साल में एक बार? श्यामल का 3 प्रतिशत हर महीने लगता है, इसलिए वह अरुण के 8.5 प्रतिशत वार्षिक से कहीं महँगा है। महाजन के 5 प्रतिशत मासिक के बारे में किताब ख़ुद लिखती है: 60 प्रतिशत वार्षिक। व्यापारी के ब्याज का वार्षिक हिसाब किताब में नहीं है; उसे बोर्ड पर मत लिखिए।
  • “व्यापारी का ऋण तो सस्ता है, फिर नुक़सान कहाँ?” शर्त में। फसल कटते समय कीमतें कम होती हैं; व्यापारी सस्ते में फसल ख़रीदकर बाद में महँगी बेचता है, और श्यामल को फसल उसी को बेचने का वादा करना पड़ता है।
  • रमा भूस्वामी के यहाँ काम क्यों करती रहती है, जब वह अच्छा व्यवहार नहीं करता? किताब के अनुसार सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही है; वह काम करती रहती है, ताकि ज़रूरत पर ऋण मिल सके।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “6. सोनपुर: एक गाँव में साख” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “7. औपचारिक और अनौपचारिक साख” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक पंक्ति काफ़ी है: अरुण के पास ज़मीन है, इसलिए बैंक का सस्ता ऋण; श्यामल और रमा के पास कम या नहीं, इसलिए महँगा ऋण।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: श्यामल के पास भी थोड़ी ज़मीन है; फिर वह कृषक सहकारी समिति से ऋण क्यों न ले? (किताब यह नहीं बताती कि श्यामल समिति का सदस्य है या नहीं। समिति अपने सदस्यों को ऋण देती है; अगर वह सदस्य बने और जमा करे, तो उसे सस्ता ऋण मिल सकता है।) यह उत्तर हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) अरुण के पास 7 एकड़ ज़मीन है, और बैंक समर्थक ऋणाधार माँगते हैं जो हर किसी के पास नहीं होता; रमा भूमिहीन है, उसके पास ऋणाधार नहीं। (2) बढ़ जाएगा; वह पुराना ऋण चुकाने से पहले नया लेती है, और ब्याज 5 प्रतिशत मासिक है। जिन बच्चों ने (2) में “उतना ही रहेगा” लिखा हो, उनके साथ कालांश 7 की शुरुआत में रमा की पंक्ति फिर पढ़िए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क14, क15, ख8 और घ9; तेज़ विद्यार्थी ङ6 और छ4 भी (छ4 का हिसाब “मान लीजिए” वाला है, किताब का आँकड़ा नहीं)। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 11 (ग) कॉपी में। पृष्ठ 47 की गतिविधि 7, अपने क्षेत्र के लोगों से बातचीत, नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि” में पहला प्रोजेक्ट है; इसे आज ही बता दीजिए, ताकि कालांश 9 तक हो जाए।
  • पृष्ठ 47 की गतिविधि के उत्तर: सवाल 1: गाँव का महाजन, कृषि व्यापारी, बैंक, भूस्वामी-नियोक्ता, और पास के गाँव की कृषक सहकारी समिति। सवाल 2: रेखांकित करने वाली बातें: श्यामल का हर मौसम में जुताई के लिए उधार और व्यापारी से आगतें; अरुण का खेती के लिए बैंक ऋण और आलू शीत भंडार गृह में रखकर नया ऋण; रमा का रोज़ के खर्च, बीमारी और समारोह के लिए ऋण; समिति का कृषि उपकरण, खेती और कृषि व्यापार, मछली पकड़ने, घर बनाने और दूसरे खर्चों के लिए ऋण। सवाल 3: तालिका ऊपर बोर्ड-कार्य में है; सबसे आसान शर्तें अरुण की हैं, सबसे कठिन रमा की। सवाल 4: अरुण का ब्याज बहुत कम है और उसे तीन साल का समय मिलता है; वह उपज का कुछ हिस्सा बेचकर ऋण चुकाएगा और बाक़ी आलू शीत भंडार गृह में रखकर नया ऋण ले सकता है, जबकि श्यामल को फसल उसी व्यापारी को कटाई के समय सस्ते में बेचनी पड़ती है; साथ ही अरुण के पास ज़मीन भी ज़्यादा है। सवाल 5: नहीं; अरुण उन कुछ लोगों में से है जिन्हें बैंक से ऋण मिला है, क्योंकि बैंक ऋणाधार माँगते हैं; समिति के सदस्य किसानों को भी सस्ता ऋण मिल सकता है, पर श्यामल और रमा जैसे लोग महँगे अनौपचारिक ऋण पर टिके हैं। सवाल 6: (क) बढ़ जाएगा; (ख) बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जो कि हर किसी के पास नहीं होती।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 45–54।

कालांश 7 — औपचारिक और अनौपचारिक साख

किताब — पृष्ठ 48–50 · स्लाइड — “औपचारिक और अनौपचारिक साख” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 7. औपचारिक और अनौपचारिक साख

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोत अलग कर पाए, बता पाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक किन पर और कैसे नज़र रखता है, आलेख 1 के औपचारिक और अनौपचारिक हिस्से जोड़ पाए, और आलेख 2 से बता पाए कि सस्ता ऋण ज़्यादा किसे मिलता है।

साथ ले जाइए — आलेख 1 और 2 की छपी प्रतियाँ जहाँ ज़रूरत हो, सोनपुर वाला चार्ट, और चार शर्तों वाला चार्ट।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 6 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए। सोनपुर का चार्ट टाँगिए और पूछिए: इनमें से किस ऋणदाता पर कोई बड़ा दफ़्तर नज़र रखता होगा?
  2. 5–12 मिनट · दो तरह के स्रोत। पृष्ठ 48 पढ़वाइए। औपचारिक स्रोत: बैंक और सहकारी समितियाँ; अनौपचारिक: साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त। भारतीय रिज़र्व बैंक औपचारिक स्रोतों पर नज़र रखता है: बैंक न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच अपने पास रखें; सिर्फ़ लाभ कमाने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को नहीं, छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दें; और समय-समय पर बताएँ कि कितना ऋण, किनको, किस ब्याज दर पर दे रहे हैं। फिर पढ़वाइए: “अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।” सोनपुर के चार्ट पर हर स्रोत के आगे “औपचारिक” या “अनौपचारिक” लिखवाइए।
  3. 12–20 मिनट · आलेख 1, पहले अनुमान। हर समूह पहले अनुमान लिखे: गाँवों में सौ में से कितना ऋण बैंकों और सहकारी समितियों से आता होगा? फिर पृष्ठ 48 का आलेख 1 (ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019) खोलिए। समूह औपचारिक टुकड़े जोड़ें: 51 + 10 + 5 = 66; और अनौपचारिक: 1 + 23 + 7 + 3 = 34। अब पृष्ठ 48 का सवाल पूछिए: अधिक ऋण औपचारिक क्षेत्रक से आ रहा है या अनौपचारिक से?
  4. 20–27 मिनट · अनौपचारिक ऋण महँगा क्यों। पृष्ठ 49 पढ़वाइए: ज़्यादातर अनौपचारिक ऋणदाता कहीं अधिक ब्याज लेते हैं; ऊँची लागत से कर्ज़दार की आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में चला जाता है; कभी चुकाने की रकम आय से भी बढ़ जाती है और व्यक्ति ऋण–जाल में फँस जाता है; और उद्यम शुरू करने वाले ऊँची लागत देखकर पीछे हट सकते हैं। फिर किताब की पंक्ति: “सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।”
  5. 27–36 मिनट · आलेख 2 और दो निष्कर्ष। पृष्ठ 49 का आलेख 2 खोलिए: शहर के चार तरह के परिवारों के ऋण में औपचारिक और अनौपचारिक हिस्सा। नीचे का चित्र बनाइए; बच्चे उसे कॉपी में उतार लें। पूछिए: जैसे-जैसे परिवार अमीर होता है, औपचारिक हिस्सा बढ़ता है या घटता है? फिर पृष्ठ 49–50 के किताब के दो निष्कर्ष पढ़वाइए: औपचारिक ऋण बढ़े, ख़ासकर गाँवों में; और उसका अधिक समान वितरण हो, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) औपचारिक स्रोतों पर कौन नज़र रखता है, और अनौपचारिक पर? (2) आलेख 2 में शहर के गरीब परिवारों का कितना प्रतिशत ऋण अनौपचारिक स्रोतों से है, और अमीर परिवारों का?

आलेख 2: शहर के चार तरह के परिवार (चरण 5)

आलेख 2: शहर के चार तरह के परिवार

गरीब परिवारऔपचारिक 46अनौपचारिक 54
कम संपत्ति वालेऔपचारिक 62अनौपचारिक 38
समृद्ध परिवारऔपचारिक 73अनौपचारिक 27
अमीर परिवारऔपचारिक 83अनौपचारिक 17
किताब के दो निष्कर्षऔपचारिक ऋण बढ़े, और सबको मिलेताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें
NCERT, पृष्ठ 49–50; सभी संख्याएँ प्रतिशत में

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर आलेख 1 का जोड़ और नीचे की तुलना बने; बच्चे दोनों कॉपी में उतारें।

आलेख 1 का जोड़ (पृष्ठ 48): औपचारिक 51 + 10 + 5 = 66 प्रतिशत; अनौपचारिक 1 + 23 + 7 + 3 = 34 प्रतिशत।

औपचारिकअनौपचारिक
कौनबैंक, सहकारी समितियाँसाहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त
देखरेखभारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता हैकोई संस्था नहीं
ब्याजतुलना में कमकहीं अधिक
ऋणाधार, कागज़ातचाहिएअक्सर नहीं
किसे ज़्यादा मिलता हैअमीर परिवारों कोगरीब परिवार इन पर टिके हैं

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “सहकारी समिति तो गाँव की है, इसलिए अनौपचारिक।” नहीं; बैंक और सहकारी समितियाँ, दोनों औपचारिक हैं। और मालिक या नियोक्ता से लिया ऋण अनौपचारिक है, जैसे रमा का।
  • पृष्ठ 49 के पाठ और आलेख 1 में अंतर। पृष्ठ 49 के पाठ में “केवल 50 प्रतिशत” छपा है, जो आलेख 1 के जोड़ (51 + 10 + 5 = 66) से मेल नहीं खाता। बच्चों से आलेख 1 के टुकड़े ही जुड़वाइए: 66 और 34।
  • आलेख 1 गाँवों का है, आलेख 2 शहरों का। बच्चे दोनों को मिला देते हैं। हर आलेख-प्रश्न में पहले पूछने की आदत डालिए: यह आलेख गाँव का है या शहर का?
  • पृष्ठ 48 के चित्र का सवाल, “बैंक हमारी उच्च आय क्यों चाहेगा?”, यहीं पूछिए। उत्तर: बैंक को भरोसा चाहिए कि ऋण लौटेगा, इसलिए वह आय का सबूत और ऋणाधार माँगता है, जैसे मेघा से नौकरी और वेतन का रिकार्ड।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “7. औपचारिक और अनौपचारिक साख” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “8. स्वयं सहायता समूह” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो शब्द-जोड़े काफ़ी हैं: बैंक और समिति औपचारिक, देखरेख वाले; साहूकार और बाक़ी अनौपचारिक, बिना देखरेख।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: आलेख 1 में अकेला सबसे बड़ा स्रोत कौन है, और दूसरे नंबर पर कौन? (व्यावसायिक बैंक, 51; फिर साहूकार, 23।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) औपचारिक स्रोतों पर भारतीय रिज़र्व बैंक; अनौपचारिक ऋणदाताओं की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं। (2) गरीब परिवारों का 54 प्रतिशत, अमीर परिवारों का 17 प्रतिशत। जिन बच्चों ने (2) में 46 लिखा हो, उन्होंने औपचारिक हिस्सा पढ़ा है; कालांश 8 की शुरुआत में कॉपी में उतारे चित्र का पहला डिब्बा एक बार साथ पढ़िए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क16–18, ख10, ग3–5, ङ3, ङ4, छ1 और छ2; तेज़ विद्यार्थी च4 और च5 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 5, 8 और 10, और प्रश्न 11 (क) और (ख), कॉपी में।
  • पृष्ठ 50 की गतिविधि के उत्तर: सवाल 1: ऊपर बोर्ड-कार्य की तालिका। सवाल 2: ऊँची दर पर आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में चला जाता है और लोग ऋण–जाल में फँसते हैं; उचित दर पर ऋण मिले तो लोग फसल उगा सकते हैं, कारोबार और छोटे उद्योग लगा सकते हैं और आय बढ़ा सकते हैं। सवाल 3: हाँ, होना चाहिए, क्योंकि अनौपचारिक ऋणदाता मनमानी दरों पर ऋण देते हैं और नाजायज़ तरीकों से वसूली कर सकते हैं; पर यह काम मुश्किल होगा, क्योंकि बहुत-से ऋण निजी पहचान पर दिए जाते हैं और लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं होती। सवाल 4 (बच्चों के उत्तर अलग हो सकते हैं): बैंक ऋणाधार और कागज़ात माँगते हैं, और ऋणाधार का न होना एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते (पृष्ठ 50); इसलिए शहरों में अमीर परिवारों के 83 प्रतिशत ऋण औपचारिक हैं और गरीबों के 46 प्रतिशत।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 55–69।

कालांश 8 — निर्धनों के स्वयं सहायता समूह

किताब — पृष्ठ 50–52 · स्लाइड — “निर्धनों के स्वयं सहायता समूह” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 8. स्वयं सहायता समूह

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि स्वयं सहायता समूह कैसे बनता और चलता है, बैंक उसे बिना ऋणाधार के ऋण क्यों देने को तैयार होता है, और बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक किस बात के लिए जाना जाता है।

साथ ले जाइए — चार शर्तों वाला चार्ट, और बच्चों की कॉपी का पहला पन्ना।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 7 की कमज़ोर बात दो मिनट दोहराइए। फिर पृष्ठ 50 के चित्र का सवाल पढ़िए, जो रजाई सिलता मज़दूर पूछता है: क्या बैंक उसे ऋण देगा? बच्चे चार शर्तों के चार्ट से उत्तर दें।
  2. 5–12 मिनट · गरीब बैंक तक क्यों नहीं पहुँचते। पृष्ठ 50–51 पढ़वाइए: भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक नहीं हैं; जहाँ हैं, वहाँ भी ऋणाधार और कागज़ात चाहिए, और ऋणाधार का न होना गरीबों के बैंक से ऋण न ले पाने का एक प्रमुख कारण है। साहूकार उन्हें निजी तौर पर जानते हैं और अक्सर बिना ऋणाधार भी ऋण दे देते हैं, पर ब्याज बहुत ऊँचा रखते हैं, लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करते, और गरीब कर्ज़दारों को तंग करते हैं।
  3. 12–22 मिनट · समूह कैसे चलता है। पृष्ठ 51 पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए; बच्चे उसे कॉपी में उतार लें। एक समूह में 15–20 सदस्य होते हैं, एक-दूसरे के पड़ोसी, गरीब, विशेषकर महिलाएँ; वे नियमित मिलकर बचत करते हैं, हर व्यक्ति 25 रुपए से 100 रुपए या अधिक। उसी बचत से सदस्य समूह से छोटे कर्ज़ लेते हैं, जिसका ब्याज साहूकार से कम होता है। एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण पाने के योग्य हो जाता है, और ऋण समूह के नाम पर मिलता है। बचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले, जैसे ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और लौटाने की अवधि, सदस्य ख़ुद लेते हैं।
  4. 22–28 मिनट · बैंक क्यों मान जाता है। पृष्ठ 51 से: एक भी सदस्य ऋण न लौटाए, तो बाक़ी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं; लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है। इसी कारण बैंक बिना ऋणाधार के भी संगठित गरीब महिलाओं को ऋण देने को तैयार हो जाते हैं। फिर फ़ायदे गिनवाइए: ऋणाधार की कमी की समस्या दूर होती है, समय पर और उचित ब्याज पर ऋण मिलता है, महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं, और नियमित बैठकों में स्वास्थ्य, पोषण, घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा का मंच मिलता है। चार शर्तों के चार्ट पर समूह का ऋण भी परखवाइए। बच्चे कॉपी के पहले पन्ने पर समूह की सदस्य की पंक्ति भरें।
  5. 28–36 मिनट · ग्रामीण बैंक। पृष्ठ 52 पढ़वाइए। बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक ने गरीबों की ऋण ज़रूरतें उचित ब्याज दरों पर पूरी करने में बड़ी सफलता पाई है; 2018 में वह बांग्लादेश के 81,600 गाँवों में फैला था, और उससे ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ गरीब तबके से हैं। इसके संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस को 2006 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला। उनकी बात पढ़वाइए: “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी–छोटी गतिविधियों के ज़रिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) स्वयं सहायता समूह बैंक से ऋण पाने से पहले क्या करता है, और कितने समय तक? (2) बैंक समूह को बिना ऋणाधार ऋण क्यों दे देता है?

बैंक बिना ऋणाधार के क्यों मान जाता है (चरण 3–4)

बैंक बिना ऋणाधार के क्यों मान जाता है

नियमित बचत15–20 सदस्य, हर व्यक्ति 25 रुपए से 100 रुपए या अधिकएक या दो वर्ष तक
आपसी कर्ज़सदस्य समूह से ही छोटे ऋण लेते हैंब्याज साहूकार से कम
बैंक का ऋणसमूह के नाम परएक भी सदस्य न लौटाए, तो बाक़ी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं
नतीजाबैंक ऋणाधार नहीं माँगताफ़ैसले सदस्य ख़ुद लेते हैं
NCERT, पृष्ठ 51

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। आख़िरी कॉलम चार शर्तों वाले चार्ट से भरिए।

अकेली गरीब महिला, साहूकार सेस्वयं सहायता समूह की सदस्य
ब्याज दरबहुत ऊँचीसाहूकार से कम
समर्थक ऋणाधारअक्सर नहीं, क्योंकि साहूकार उसे निजी तौर पर जानता हैबैंक ऋण के लिए नहीं, ज़िम्मेदारी समूह की
आवश्यक कागज़ातलिखा-पढ़ी पूरी नहींफ़ैसले समूह की बैठक में
भुगतानतंग किए जाने का डरलौटाने की अवधि सदस्य ख़ुद तय करते हैं

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “समूह में फ़ैसले बैंक लेता है।” नहीं; बचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले सदस्य ख़ुद लेते हैं। यह प्रश्नावली के प्रश्न 13 (क) में पूछा गया है।
  • “बैंक ऋण हर सदस्य के नाम पर देता है।” नहीं; ऋण समूह के नाम पर मिलता है, और लौटाने की ज़िम्मेदारी समूह की है।
  • पृष्ठ 52 पर दो संख्याएँ। ग्रामीण बैंक की शुरुआत का साल और 2018 में सदस्यों की संख्या, दोनों हिंदी किताब में अंग्रेज़ी संस्करण से अलग छपे हैं: हिंदी में “1970 में” और “9 लाख सदस्य”, अंग्रेज़ी में शुरुआत 1970 के दशक में है और सदस्य 90 लाख से ज़्यादा। इन दोनों पर कोई प्रश्न मत बनाइए; प्रश्न 81,600 गाँव और 2006 के नोबेल पुरस्कार जैसी बातों पर रखिए। उसी पृष्ठ पर “पुरस्कार” शब्द की छपाई भी बिगड़ी है; बोर्ड पर सही रूप लिखिए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “8. स्वयं सहायता समूह” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “9. सार” शुरू होने से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए क्रम काफ़ी है: पहले बचत, फिर आपस में कर्ज़, फिर समूह के नाम पर बैंक का ऋण।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: रजाई सिलने वाला मज़दूर अकेले बैंक जाए, तो क्या होगा, और समूह में जाए तो? (अकेले शायद ऋण न मिले, क्योंकि उसके पास न ऋणाधार है, न नियमित आय के कागज़; समूह बनाकर एक-दो साल नियमित बचत करे, तो समूह के नाम पर बिना ऋणाधार ऋण मिल सकता है।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) सदस्य नियमित मिलकर बचत करते हैं और उसी बचत से आपस में छोटे कर्ज़ देते हैं; एक या दो वर्ष तक। (2) लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है; एक भी सदस्य न लौटाए, तो बाक़ी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं। जिन बच्चों ने (2) में “बैंक दया करता है” जैसा कुछ लिखा हो, उनके साथ कालांश 9 की शुरुआत में कॉपी में उतारे चित्र का तीसरा डिब्बा एक बार पढ़िए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क19, क20, ख9, ग6, घ10, ङ5, ङ7 और ङ8; तेज़ विद्यार्थी च6 और छ5 भी (छ5 का हिसाब “मान लीजिए” वाला है, किताब का आँकड़ा नहीं)। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 6 और प्रश्न 11 (घ) कॉपी में।
  • पृष्ठ 50 के चित्र के सवाल का उत्तर: अकेले शायद नहीं, क्योंकि उसके पास न ऋणाधार है, न नियमित आय के कागज़; पर अपने जैसे लोगों के साथ स्वयं सहायता समूह बनाकर नियमित बचत करे, तो एक-दो साल बाद समूह के नाम पर बैंक से बिना ऋणाधार ऋण मिल सकता है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 70–80।

कालांश 9 — सारांश, प्रश्नावली और समापन

किताब — पृष्ठ 52–53 · स्लाइड — “सारांश, प्रश्नावली और समापन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 9. सार, अभ्यास, परियोजना

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी प्रश्नावली के प्रश्न 12 और 13 के सही उत्तर किताब के कारण के साथ दे पाए, और पहले दिन की पर्ची वाले ऋण को स्रोत और चार शर्तों पर परख पाए।

साथ ले जाइए — पहले दिन की पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा, चार शर्तों वाला चार्ट, सोनपुर वाला चार्ट, और पिछले कालांशों की गृहकार्य-कॉपियाँ।

40 मिनट

  1. 0–6 मिनट · सारांश। किताब का सारांश पढ़वाइए, फिर नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए: किताब के दो निष्कर्ष, जो कालांश 7 में आए थे। हर समूह देखे कि कॉपी के पहले पन्ने की कौन-सी पंक्ति किस निष्कर्ष से जुड़ती है।
  2. 6–16 मिनट · प्रश्न 12 और 13। जोड़ियाँ हर रिक्त स्थान और हर प्रश्न का विकल्प चुनें; फिर एक जोड़ी उत्तर बोले और दूसरी किताब से कारण दे। सही उत्तर और कारण नीचे बोर्ड-कार्य की तालिका में हैं।
  3. 16–28 मिनट · पहले दिन की पर्चियाँ। लिफ़ाफ़ा खोलिए और आठ-दस पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए, नाम के बिना। हर पर्ची पर दो सवाल रखिए, जो हमारी ओर से हैं: यह स्रोत औपचारिक है या अनौपचारिक? और चार्ट की चारों शर्तें, यानी ब्याज, ऋणाधार, कागज़ात और भुगतान, इस स्रोत में कैसी होंगी? जहाँ कोई शर्त पता न हो, वहाँ बच्चे लिखें: “पता करना होगा”। यही काम प्रश्नावली का प्रश्न 10 मानव से करवाता है।
  4. 28–33 मिनट · अध्याय का सवाल। बोर्ड पर पूरे अध्याय का सवाल लिखिए: मुद्रा किस भरोसे पर चलती है, और ऋण किसके लिए सीढ़ी बनता है, किसके लिए जाल? बच्चे कॉपी के पहले पन्ने का आख़िरी कॉलम देखकर बोलें। फिर पृष्ठ 44 की पंक्ति एक बार फिर पढ़वाइए: “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” प्रश्नावली का प्रश्न 9, विकास में ऋण की भूमिका, इसी बात से शुरू होता है; उसे गृहकार्य में दीजिए।
  5. 33–36 मिनट · परियोजना। पृष्ठ 53 की अतिरिक्त परियोजना समझाइए: शहर के आठ लोगों के व्यवसाय, उन्हें किस काम के लिए ऋण चाहिए हो सकता है, और किसे बैंक से कर्ज़ मिल सकता है, किसे नहीं। यह गृहकार्य है; तरीक़ा नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि” में है।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी लिखे: (1) अपनी पहले दिन वाली पर्ची का ऋण आप अब किस स्रोत से लेंगे, और चार शर्तों में से किन दो की वजह से? (2) इस अध्याय की एक बात, जो अब भी पूरी तरह समझ नहीं आई।

किताब के दो निष्कर्ष (चरण 1 और 3)

किताब के दो निष्कर्ष

निष्कर्ष 1औपचारिक ऋण बढ़ेबैंक और सहकारी समितियाँ अपनी गतिविधियाँ, ख़ासकर गाँवों में, बढ़ाएँ
निष्कर्ष 2औपचारिक ऋण सबको मिलेअधिक समान वितरण, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें
पृष्ठ 49सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़देश के विकास के लिए अति आवश्यक
पर्चीयह ऋण किस स्रोत से है, और उसकी चार शर्तें क्या होंगी?
NCERT, पृष्ठ 49–50; आख़िरी डिब्बा हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

बोर्ड पर प्रश्न 12 और 13 की तालिका भरती चले; बच्चे इसे कॉपी में उतारें। परीक्षा से पहले दोहराने के लिए यही काम आएगी।

प्रश्नसही विकल्पकिताब से कारण
12 (क)गरीबशहरों के गरीब परिवारों की 54 प्रतिशत ऋण ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं (आलेख 2, पृष्ठ 49)।
12 (ख)ऊँचीऋण की ऊँची लागत से आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में जाता है (पृष्ठ 49)।
12 (ग)भारतीय रिज़र्व बैंकवह केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है (पृष्ठ 40)।
12 (घ)जमाबैंक जमा पर जितना ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ऋण पर लेते हैं (पृष्ठ 42)।
12 (ङ)समर्थक ऋणाधारकर्ज़दार की संपत्ति, जो ऋण चुकने तक गारंटी रहती है (पृष्ठ 44)।
13 (क)सदस्यों द्वाराबचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले समूह के सदस्य ख़ुद लेते हैं (पृष्ठ 51)।
13 (ख)नियोक्ताबैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक हैं; पृष्ठ 48 की अनौपचारिक उधारदाताओं की सूची में मालिक है; नियोक्ता वही है, जैसे रमा का भूस्वामी-नियोक्ता (पृष्ठ 46–48)।

बाक़ी प्रश्न गृहकार्य में बँटे हैं। कॉपियाँ जाँचते समय यह सूची काम आएगी; पूरे नमूना उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।

प्रश्नकब दियाउत्तर की मुख्य बात
1कालांश 4ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह जोखिम और हानि पर मिलने वाले सहारे पर टिका है; स्वप्ना की फसल बर्बाद हुई, कर्ज़ बढ़ा और ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ा, यानी कर्ज–ज़ाल।
2कालांश 1वस्तु विनिमय में दोनों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए; मुद्रा बीच की कड़ी है, इसलिए अपनी वस्तु किसी को भी बेचकर उस मुद्रा से कुछ भी ख़रीदा जा सकता है। उदाहरण बच्चे का अपना हो।
3कालांश 3जमाकर्ताओं से जमा, केवल 5 प्रतिशत नकद, बड़ा भाग कर्ज़दारों को ऋण; ब्याज का अंतर बैंक की आय।
4कालांश 2रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर के साथ धारक को रकम अदा करने का वचन; रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से नोट जारी करता है, सरकार उसे प्राधिकृत करती है, और रुपये में अदायगी अस्वीकार नहीं की जा सकती।
5कालांश 7अनौपचारिक ऋण महँगा, ऋण–जाल का ख़तरा, देखरेख की कोई संस्था नहीं; आलेख 1 में ग्रामीण ऋण का एक-तिहाई से ज़्यादा अब भी अनौपचारिक; सस्ता कर्ज़ विकास के लिए अति आवश्यक।
6कालांश 8ऋणाधार न होने का हल: 15–20 सदस्यों की नियमित बचत, आपस में कर्ज़, फिर समूह के नाम पर बिना ऋणाधार बैंक ऋण; फ़ैसले सदस्य लेते हैं; महिलाएँ स्वावलंबी बनती हैं।
7कालांश 5ऋणाधार नहीं, आवश्यक कागज़ात नहीं, और अनिश्चित आय के कारण अदायगी का भरोसा नहीं।
8कालांश 7न्यूनतम नकद हिस्सा, छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण, और कितना, किनको, किस दर पर, इसकी रिपोर्ट; ज़रूरी, ताकि जमाकर्ता पैसा निकाल सकें और छोटे कर्ज़दारों को भी उचित ब्याज पर ऋण मिले।
9आजऋण कार्यशील पूँजी देता है (सलीम); सस्ता कर्ज़ विकास के लिए अति आवश्यक; महँगा ऋण उल्टा असर करता है (स्वप्ना, रमा); गरीबों को उचित शर्तों पर ऋण मिले तो लाखों छोटी गतिविधियों से विकास (प्रो. युनूस)।
10कालांश 7मानव दोनों की चार शर्तें मिलाएगा: बैंक का ब्याज कम, पर ऋणाधार और कागज़ात चाहिए; साहूकार आसान दिखता है, पर ब्याज बहुत ऊँचा और देखरेख कोई नहीं। ऋणाधार और कागज़ात हों, तो बैंक बेहतर।
11कालांश 6 (ग), 7 (क, ख), 8 (घ)(क) थोड़ी ज़मीन, कम कागज़ात, और फसल पर टिकी अदायगी का जोखिम; (ख) साहूकार, व्यापारी, भूस्वामी, रिश्तेदार, दोस्त, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह; (ग) श्यामल और स्वप्ना के उदाहरण; (घ) बैंक और समितियाँ गाँवों में बढ़ें, किसान सहकारी समितियों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ें।

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • प्रश्न 12 (क) में “ग्रामीण” या “अमीर” लिखना। किताब का उत्तर आलेख 2 से है, और वह शहरों के परिवारों का है: गरीब परिवारों की ज़्यादातर ज़रूरतें अनौपचारिक स्रोतों से पूरी होती हैं।
  • प्रश्न 13 (ख) में “सहकारी समिति” चुनना। बच्चे सोचते हैं कि गाँव की समिति अनौपचारिक होगी। चार्ट दिखाइए: बैंक और सहकारी समितियाँ, दोनों औपचारिक।
  • पर्चियों में किसी परिवार की बात का मज़ाक न बने। कोई पर्ची रिश्तेदार या साहूकार की हो, तो वह ग़लत उत्तर नहीं; सवाल सिर्फ़ यह है कि उस ऋण की शर्तें क्या होंगी।
  • प्रश्न 9, 10 और परियोजना का पूरा उत्तर किताब में एक जगह नहीं है। ये बच्चों से अध्याय की बातें जोड़कर ख़ुद सोचने को कहते हैं। जो बच्चा अपनी बात किताब के किसी उदाहरण या शर्त से जोड़े, उसे पूरे अंक दीजिए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो चरण 1 के बाद “9. सार” खोलिए; “अभ्यास” और “परियोजना” बच्चे घर पर देखें।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए प्रश्न 12 सबसे आसान शुरुआत है; चरण 2 में पहले जवाब उन्हीं से लीजिए।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पहले दिन की किसी पर्ची में लिखा स्रोत अनौपचारिक हो, फिर भी वह कर्ज़दार के लिए जाल न बने, ऐसा कब हो सकता है? (जैसे रिश्तेदार बिना ब्याज के दे और लौटाने का समय भी लचीला हो; तब भी किताब के हिसाब से देखरेख की कोई संस्था नहीं। फ़ैसला चारों शर्तें देखकर ही होगा।) यह उत्तर हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) जैसे स्वयं सहायता समूह से, क्योंकि ब्याज कम है और ऋणाधार नहीं चाहिए; या बैंक से, अगर ऋणाधार और कागज़ात हों, क्योंकि ब्याज कम है और भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है। (2) वाला हिस्सा पढ़कर अगले अध्याय से पहले उन बातों को पाँच मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्नावली का प्रश्न 9 कॉपी में, और पृष्ठ 53 की अतिरिक्त परियोजना। साथ में प्रश्न बैंक के तीन नमूना परीक्षा-पत्र। अध्याय की परीक्षा से पहले पूरा प्रश्न बैंक।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड का “अंतिम पाँच मिनट” वाला हिस्सा, फिर पूरा डेक।

पूरे अध्याय के लिए

अलग-अलग बच्चों के लिए

किसके लिएक्या कीजिए
जो बहुत पीछे हैंइनसे तीन ही चीज़ें पक्की करवाइए: (1) मुद्रा विनिमय का माध्यम है, क्योंकि उससे दोहरे संयोग की ज़रूरत नहीं रहती; (2) बैंक जमा लेकर ऋण देते हैं, और केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं; (3) औपचारिक और अनौपचारिक स्रोत, हर एक का एक उदाहरण। सारे आँकड़े मत रटवाइए; 5 प्रतिशत, और आलेख 1 के 66 और 34 काफ़ी हैं।
औसत बच्चेइनसे चार शर्तें पक्की करवाइए, मेघा की तालिका (कालांश 5) और सोनपुर की तुलना (कालांश 6) के साथ, क्योंकि प्रश्नावली के प्रश्न 7, 10 और 11 इन्हीं पर हैं। साथ में सलीम और स्वप्ना की तुलना, प्रश्न 1 के लिए।
तेज़ बच्चे(1) पृष्ठ 53 की अतिरिक्त परियोजना, अपने कारकों के साथ; (2) आलेख 2 से अपने निष्कर्ष, और उन्हें किताब के दो निष्कर्षों से मिलाना; (3) प्रश्न 11 के चारों हिस्से, सोनपुर के उदाहरणों से।
जो बोलने में झिझकते हैंकालांश 1 और 9 की पर्चियाँ बिना नाम की हैं; इनकी बात वहीं से कक्षा तक पहुँचती है। समूह के काम में इन्हें लिखने वाला बनाइए, जैसे सोनपुर के चार्ट पर कॉलम भरना, और बोर्ड पर इनकी पंक्ति आप पढ़कर सुनाइए।

सतत मूल्यांकन

साधनकबक्या देखिए
निकास-पर्चीहर कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनटदिन की एक मुख्य बात पकड़ में आई या नहीं
वस्तु विनिमय का खेलकालांश 1दोहरे संयोग की मुश्किल अपने शब्दों में बता पाता है या नहीं
चैक का ख़ाकाकालांश 2चैक के खाने भरकर बता पाता है कि पैसा किस खाते से किस खाते में गया
कक्षा का बैंककालांश 3समझता है या नहीं कि थोड़ा नकद क्यों काफ़ी है, और सब एक साथ आएँ तो क्या होगा
सलीम और स्वप्ना की तालिकाकालांश 4ऋण के दोनों नतीजे कारण के साथ लिख पाता है या नहीं
चार शर्तों का चार्टकालांश 5 से 9हर नए ऋणदाता को चारों खानों पर परख पाता है या नहीं
सोनपुर की तुलनाकालांश 6मासिक और वार्षिक ब्याज अलग पढ़ पाता है या नहीं
आलेख 1 का जोड़ और आलेख 2कालांश 7औपचारिक और अनौपचारिक टुकड़े सही जोड़ पाता है, और गाँव और शहर के आलेख अलग रखता है या नहीं
कॉपी का पहला पन्नाकालांश 4 से 8हर कहानी की पंक्ति भरता जा रहा है या नहीं, और “सीढ़ी या जाल?” का कारण लिखता है या नहीं
पर्चियों वाली चर्चाकालांश 9अपने ऋण को स्रोत और चार शर्तों पर परख पाता है या नहीं

लिखित मूल्यांकन

अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; अंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल लीजिए।

प्रकारअंकक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ1आवश्यकताओं का दोहरा संयोग, करेंसी नोट कौन जारी करता है, औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों के उदाहरण
अति लघूत्तरीय2माँग जमा, चैक, समर्थक ऋणाधार, कर्ज–ज़ाल
लघूत्तरीय3बैंक की मध्यस्थता, ऋण की चार शर्तें, स्वयं सहायता समूह कैसे काम करता है
संख्यात्मक या तालिका-आधारित3आलेख 1 के औपचारिक और अनौपचारिक हिस्से का जोड़, आलेख 2 की तुलना, सोनपुर की शर्तों की तालिका
दीर्घ उत्तरीय5औपचारिक स्रोत क्यों बढ़ें, विकास में ऋण की भूमिका, भारतीय रिज़र्व बैंक की नज़र
केस-आधारित4मानव जैसा कोई केस देकर पूछिए: छोटे व्यवसाय के लिए ऋण बैंक से लें या साहूकार से, चारों शर्तों के आधार पर

अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए

  1. आलेख 1 के जोड़ में सिर्फ़ उत्तर लिखा, टुकड़े नहीं, तो आधा उत्तर।
  2. तुलना वाले प्रश्न में, जैसे औपचारिक और अनौपचारिक, या सलीम और स्वप्ना, सिर्फ़ एक पक्ष लिखा, तो आधा उत्तर।
  3. मासिक और वार्षिक ब्याज मिला दिए, जैसे श्यामल के 3 प्रतिशत मासिक को अरुण के 8.5 प्रतिशत वार्षिक से सस्ता मान लिया, तो पूरा तर्क उलटी दिशा में जाता है। इसलिए हर ब्याज-प्रश्न में पहले पूछने की आदत डालिए: यह दर मासिक है या वार्षिक?

प्रोजेक्ट और गतिविधि

#प्रोजेक्टकैसे
1हमारे क्षेत्र में ऋण के प्रबंध (किताब की गतिविधि, पृष्ठ 47)कुछ लोगों से बात कीजिए, जैसे किसान, दुकानदार या कोई मज़दूर, और हर एक से ऋण की चारों शर्तें पूछिए: ऋण किससे लिया, ब्याज दर कितनी, कोई ऋणाधार या कागज़ात दिए या नहीं, और लौटाने का तरीक़ा क्या है। फिर सोनपुर की तालिका जैसी अपनी तालिका बनाइए। किसी का नाम मत लिखिए, और किसी से उसकी रकम मत पूछिए।
2शहर के आठ लोग (अतिरिक्त परियोजना, पृष्ठ 53)तालिका के आठ व्यवसायों के आगे लिखिए कि उन्हें किस काम के लिए ऋण चाहिए हो सकता है। फिर उन्हें दो वर्गों में बाँटिए: जिन्हें बैंक से कर्ज़ मिल सकता है, और जिन्हें नहीं। वर्गीकरण के कारक किताब से लीजिए: नियमित आय और उसके कागज़, ऋणाधार लायक संपत्ति, और आय पक्की है या अनिश्चित।
3नोट पर क्या लिखा है (प्रश्नावली का प्रश्न 4)घर में कोई नोट देखिए और उस पर छपा वचन, हस्ताक्षर किसके हैं, और नोट किसकी ओर से जारी हुआ, यह कॉपी में लिखिए। फिर पृष्ठ 40 से समझाइए कि इस कागज़ को हर कोई क्यों स्वीकार करता है।
4मानव का फ़ैसला (प्रश्नावली का प्रश्न 10)एक तालिका बनाइए: चार शर्तें एक ओर, बैंक और साहूकार दो कॉलम में। हर खाने में किताब से एक बात लिखिए, फिर तय कीजिए कि मानव को किससे ऋण लेना चाहिए, और किस हालत में फ़ैसला बदल सकता है।

शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ

  1. किसी बच्चे के घर का कर्ज़, आय या संपत्ति कक्षा में मत पूछिए। पहले दिन की पर्चियाँ इसीलिए बिना नाम की हैं, और उनमें सवाल “मान लीजिए” वाला है। उदाहरण किताब के लीजिए: सलीम, स्वप्ना, मेघा, श्यामल, अरुण, रमा। पृष्ठ 47 वाली बातचीत में भी बच्चे किसी का नाम या रकम न लिखें।

  2. साहूकार को खलनायक मत बनाइए। किताब बताती है कि साहूकार कर्ज़दारों को निजी तौर पर जानते हैं और अक्सर बिना ऋणाधार भी ऋण दे देते हैं; दिक़्क़त बहुत ऊँचे ब्याज, अधूरी लिखा-पढ़ी और देखरेख न होने में है। कई बच्चों के परिवार ऐसे ही ऋण पर टिके होंगे। सवाल ऋण की शर्तों का है, उसे लेने वाले या देने वाले की क़ीमत का नहीं।

  3. इसे किसी मौजूदा राजनीतिक बहस से मत जोड़िए। नवंबर 2016 के विमुद्रीकरण के बारे में उतना ही पढ़ाइए जितना पृष्ठ 38 के शिक्षक-निर्देश में है, और प्रो. मोहम्मद युनूस के बारे में उतना ही जितना पृष्ठ 52 पर है। किसी असली बैंक, ऋण योजना या ऐप की सलाह कक्षा में मत दीजिए; अध्याय ऋण को समझना सिखाता है, किसी से ऋण लेना नहीं।

  4. आँकड़ों में मत उलझिए, पर किताब के छपे हुए अंतर पहचान लीजिए। इस अध्याय में कुछ जगह छपाई में चूक है, या पाठ और आलेख अलग बात कहते हैं: पृष्ठ 39 का “आश्यकताओं” (सही: आवश्यकताओं), पृष्ठ 45 का “कर्ज़ की शर्ते” (सही: शर्तें), पृष्ठ 49 के पाठ का “केवल 50 प्रतिशत”, जो आलेख 1 के जोड़ (66) से मेल नहीं खाता, और पृष्ठ 52 पर ग्रामीण बैंक की शुरुआत का साल, 2018 के सदस्यों की संख्या और “पुरस्कार” शब्द की छपाई। एक ही बात के लिए पृष्ठ 44 पर “कर्ज–ज़ाल” और पृष्ठ 49 पर “ऋण–जाल” छपा है। पृष्ठ 42 के चित्र पर हिंदी में शीर्षक नहीं है, और पृष्ठ 41 का नमूना चैक सिर्फ़ खाने दिखाने के लिए है। हर जगह बच्चों से आलेख 1 और 2 के आँकड़े पढ़वाइए; कार्डों के “यहाँ बच्चे अटकेंगे” में हर अंतर लिखा है।

  5. पहले दिन की पर्चियाँ और चार शर्तों का चार्ट नौ दिन सँभाले रहिए। यही इस अध्याय का सवाल है: मुद्रा किस भरोसे पर चलती है, और ऋण किसके लिए सीढ़ी बनता है, किसके लिए जाल? लिफ़ाफ़ा कालांश 9 तक बंद रहे, और चार्ट कालांश 5 से दीवार पर टँगा रहे, तो हर कहानी में उसी की ओर लौट सकते हैं। कालांश 9 में बच्चे अपनी ही पर्चियों के ऋण को स्रोत और चार शर्तों पर परखें।