कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र · पृष्ठ — 39 से 53
यह पन्ना किसलिए — किताब के उदाहरण और आँकड़े जहाँ रुकते हैं, उसके आगे का हाल कक्षा तक लाने के लिए: UPI, रिज़र्व बैंक का डिजिटल रुपया (e₹), क्रिप्टोकरेंसी, बैंकों पर रिज़र्व बैंक के नियम (CRR और SLR), रेपो दर और ऋण की ब्याज दरें (MCLR और बाहरी मानक), जमा का बीमा, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण, जन धन खाते, गाँवों में क़र्ज़ के स्रोत, स्वयं सहायता समूह, बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक और राजस्थान। हर हिस्से में पहले यह है कि किताब कहाँ रुकती है, फिर आज क्या है (तारीख़ और स्रोत के साथ), और फिर कक्षा में पूछने के सवाल, उनके उत्तर के साथ।
परीक्षा में बच्चे किताब वाले आँकड़े और बातें ही लिखें। यहाँ की नई बातें यह समझाने के लिए हैं कि आज हाल क्या है। आँकड़े बदलते रहते हैं, इसलिए पढ़ाने से पहले स्रोत का लिंक एक बार खोलकर देख लीजिए।
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UPI: चैक के आगे का भुगतान
किताब कहाँ रुकती है। किताब मुद्रा के दो आधुनिक रूप बताती है: करेंसी, यानी नोट और सिक्के, और बैंकों में रखी माँग जमा (पृष्ठ 40–41)। चैक बैंक को यह आदेश देता है कि वह खाते से चैक पर लिखे नाम वाले व्यक्ति को एक ख़ास रक़म दे, और माँग जमा के बदले चैक लिखने की सुविधा से बिना नकद के सीधा भुगतान हो जाता है (पृष्ठ 41)। अध्याय से पहले के “शिक्षक के लिए निर्देश” (पृष्ठ 38) में नवंबर 2016 के विमुद्रीकरण के बाद आए नकदी-रहित तरीक़ों में UPI और QR कोड का नाम है, और यह बात भी कि प्लास्टिक कार्ड अपने आप में मुद्रा नहीं हैं। UPI से आज कितने लेनदेन होते हैं, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- UPI क्या है: PIB की तथ्य-पुस्तिका इसे तुरंत (real-time) भुगतान की ऐसी प्रणाली बताती है जिसमें किसी भी भाग लेने वाले बैंक या भुगतान-सेवा कंपनी के एक ही मोबाइल ऐप से कई बैंक खाते चलाए जा सकते हैं, और भुगतान चौबीसों घंटे हो सकता है। स्रोत: PIB तथ्य-पुस्तिका, 24 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी में)
- दस साल में बढ़त: 2016-17 में साल भर में UPI से 2 करोड़ लेनदेन हुए थे; 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज़्यादा। साल भर के लेनदेन की रक़म 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपए हो गई। स्रोत: PIB तथ्य-पुस्तिका, 24 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी में)
- एक महीने में: जुलाई 2026 में UPI से 2,365.8 करोड़ लेनदेन हुए, कुल 29.87 लाख करोड़ रुपए के। स्रोत: PIB तथ्य-पुस्तिका, 24 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: दुकान पर UPI से पैसे देते समय असल में कौन-सी मुद्रा एक खाते से दूसरे खाते में जाती है? क्या UPI मुद्रा का कोई तीसरा रूप है?
उत्तर: बैंक खाते में रखी माँग जमा। किताब (पृष्ठ 41) कहती है कि माँग जमा में मुद्रा के अनिवार्य लक्षण मिलते हैं और आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है। UPI, चैक की तरह, बैंक तक भुगतान का आदेश पहुँचाने का एक तरीक़ा है; मुद्रा खाते की जमा ही है। किताब का शिक्षक-निर्देश (पृष्ठ 38) प्लास्टिक कार्डों के बारे में कहता है कि वे अपने आप में मुद्रा नहीं हैं; इसी तर्क से UPI ऐप भी मुद्रा नहीं है। परीक्षा में मुद्रा के आधुनिक रूप किताब वाले ही लिखिए: करेंसी और माँग जमा।
सवाल: 2016-17 में 2 करोड़ और 2025-26 में 24,162 करोड़ से ज़्यादा लेनदेन। यह लगभग कितने गुना हुआ? क्या इससे कह सकते हैं कि यह बढ़त विमुद्रीकरण की वजह से हुई?
उत्तर: 24,162 को 2 से भाग दीजिए: लगभग 12 हज़ार गुना। पर बढ़त की वजह यह आँकड़ा नहीं बताता; इसमें सिर्फ़ गिनती है। किताब का शिक्षक-निर्देश (पृष्ठ 38) विमुद्रीकरण और डिजिटलीकरण के असर पर बहस कराने को कहता है। बहस में बच्चे इस बढ़त को एक तथ्य की तरह रखें, किसी एक वजह के सबूत की तरह नहीं।
डिजिटल रुपया (e₹): रिज़र्व बैंक की डिजिटल करेंसी
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 40) बताती है कि करेंसी को विनिमय का माध्यम इसलिए स्वीकार किया जाता है, क्योंकि देश की सरकार इसे प्राधिकृत करती है; भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ से करेंसी नोट जारी करता है; और कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता। किताब में करेंसी के रूप कागज़ के नोट और सिक्के हैं। रिज़र्व बैंक अब करेंसी का एक डिजिटल रूप भी आज़मा रहा है; यह किताब में नहीं है।
आज क्या है
- यह क्या है: रिज़र्व बैंक के अनुसार डिजिटल रुपया, या e₹, भारत की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) है, यानी रुपये का डिजिटल रूप। इसे रिज़र्व बैंक ही जारी करता है, और इसका मूल्य नोट-सिक्कों के बराबर है। e₹ मोबाइल पर e₹ वॉलेट में रहता है, जो बैंक और कुछ गैर-बैंक कंपनियाँ देती हैं, और यह नोट-सिक्कों वाले मूल्यवर्गों में ही आता है। स्रोत: RBI, डिजिटल रुपया: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, 1 अक्टूबर 2026 (हिंदी में)
- वैध मुद्रा: RBI अधिनियम, 1934 की धारा 26 के अनुसार e₹ वैध मुद्रा (legal tender) है, और यह रिज़र्व बैंक की देयता है, यानी इसकी ज़िम्मेदारी रिज़र्व बैंक की है। सरकार ने 30 मार्च 2022 की अधिसूचना से RBI अधिनियम में बदलाव करके डिजिटल रुपये को वैध मुद्रा का दर्जा दिया था। स्रोत: RBI के प्रश्नोत्तर (हिंदी में) · लोकसभा, 23 मार्च 2026 (अंग्रेज़ी में)
- अभी परीक्षण चल रहा है: थोक (wholesale) e₹ का पायलट 1 नवंबर 2022 को और खुदरा (retail) e₹ का 1 दिसंबर 2022 को शुरू हुआ। 16 मार्च 2026 तक खुदरा पायलट में 19 बैंक थे, और शुरुआत से अब तक एक करोड़ उपयोगकर्ता जुड़ चुके थे। लोकसभा के उसी उत्तर के अनुसार e₹ को पूरी तरह शुरू करने का फ़ैसला बाद में होगा, और 1 अक्टूबर 2026 के RBI के प्रश्नोत्तर में भी e₹ पायलट, यानी सीमित परीक्षण, में ही है। स्रोत: लोकसभा, 23 मार्च 2026 (अंग्रेज़ी में) · RBI के प्रश्नोत्तर (हिंदी में)
- कितना चलन में: 9 अक्टूबर 2026 को ख़त्म हुए हफ़्ते में कुल 1,140.26 करोड़ रुपए का e₹ चलन में था, सारा खुदरा; थोक e₹ का आँकड़ा 0.00 करोड़ था। उसी हफ़्ते चलन में बैंक नोट 42,90,114 करोड़ रुपए के थे। स्रोत: RBI, चलन में करेंसी, साप्ताहिक तालिका (अंग्रेज़ी में)
- नकदी जैसा: वॉलेट में रखे e₹ पर ब्याज नहीं मिलता; RBI इसकी वजह e₹ का नकदी जैसा होना बताता है। e₹ को बैंक खाते से वॉलेट में और वॉलेट से वापस खाते में चौबीसों घंटे, सातों दिन भेजा जा सकता है। स्रोत: RBI के प्रश्नोत्तर (हिंदी में)
- UPI से फ़र्क़: रिज़र्व बैंक के शब्दों में, e₹ रुपये का डिजिटल रूप है जबकि UPI भुगतान का एक माध्यम है। e₹ के QR कोड पर किया गया भुगतान एक e₹ वॉलेट से दूसरे e₹ वॉलेट में तुरंत पहुँचता है, बैंक खातों से होकर नहीं। e₹ ऐप से UPI का QR कोड भी स्कैन किया जा सकता है; तब भुगतान UPI की समय-सीमा के हिसाब से निपटता है। स्रोत: RBI के प्रश्नोत्तर (हिंदी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब मुद्रा के दो आधुनिक रूप बताती है: करेंसी और बैंकों में माँग जमा (पृष्ठ 40–41)। e₹ इनमें से किसके ज़्यादा क़रीब है? और e₹ से भुगतान, UPI से भुगतान से कैसे अलग है?
उत्तर: करेंसी के। e₹ को रिज़र्व बैंक जारी करता है, यह वैध मुद्रा है, इस पर ब्याज नहीं मिलता और यह नोट-सिक्कों वाले मूल्यवर्गों में आता है; यानी यह जेब के नोट जैसा है, बस मोबाइल के वॉलेट में। UPI से भुगतान में बैंक खाते की माँग जमा एक खाते से दूसरे खाते में जाती है; UPI ख़ुद मुद्रा नहीं, भुगतान का तरीक़ा है। रिज़र्व बैंक के शब्दों में भी e₹ रुपये का डिजिटल रूप है और UPI भुगतान का एक माध्यम। परीक्षा में मुद्रा के आधुनिक रूप किताब वाले ही लिखिए: करेंसी और माँग जमा।
सवाल: 9 अक्टूबर 2026 के हफ़्ते में 1,140.26 करोड़ रुपए का e₹ और 42,90,114 करोड़ रुपए के बैंक नोट चलन में थे। नोटों के मुक़ाबले e₹ कितना है?
उत्तर: 1,140.26 ÷ 42,90,114 = लगभग 0.0003, यानी लगभग 0.03 प्रतिशत। मोटे तौर पर, हर 10,000 रुपए के नोटों के मुक़ाबले 3 रुपए से कम का e₹। e₹ अभी सीमित परीक्षण में है; यह आँकड़ा आज का हाल बताता है, यह नहीं कि आगे क्या होगा।
क्रिप्टोकरेंसी: क्या यह मुद्रा है?
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 40) कहती है कि कानून के अनुसार किसी व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है, और कानून रुपये को विनिमय के माध्यम के रूप में वैधता देता है। क्रिप्टोकरेंसी का किताब में ज़िक्र नहीं है; बच्चे इसके बारे में पूछें, तो यह हिस्सा काम आएगा।
आज क्या है
- सरकार क्या कहती है: वित्त मंत्रालय ने 2 फ़रवरी 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि क्रिप्टो-एसेट, जिन्हें वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) भी कहा जाता है, भारत में “unregulated” हैं, यानी मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले नियमों (अगला बिंदु) को छोड़कर इन पर कोई नियामक व्यवस्था नहीं है, और सरकार इनके आँकड़े इकट्ठा नहीं करती। उसी उत्तर के अनुसार रिज़र्व बैंक कई सार्वजनिक सूचनाओं में इन्हें रखने और इनका कारोबार करने वालों को आगाह कर चुका है कि इनमें आर्थिक, वित्तीय, कामकाजी, कानूनी, ग्राहक-सुरक्षा और सुरक्षा से जुड़े जोखिम हो सकते हैं। स्रोत: लोकसभा, 2 फ़रवरी 2026 (अंग्रेज़ी में)
- मनी लॉन्ड्रिंग पर निगरानी: 7 मार्च 2023 की अधिसूचना से, दूसरों के लिए कारोबार के तौर पर किए जाने वाले VDA से जुड़े काम, जैसे VDA और सरकारी मुद्राओं के बीच अदला-बदली, एक VDA से दूसरे VDA में अदला-बदली, VDA भेजना और उन्हें सँभालकर रखना, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने वाले कानून (PMLA, 2002) के दायरे में आ गए। 9 मार्च 2026 तक ऐसी 54 कंपनियाँ FIU-IND (फ़ाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट) में पंजीकृत थीं। 30 मार्च 2026 के उत्तर के अनुसार, नियम न मानकर भारत में ग़ैर-क़ानूनी ढंग से काम कर रही 53 कंपनियों के ऐप और वेबसाइट हटाने के निर्देश FIU-IND दे चुका था। स्रोत: भारत का राजपत्र, 7 मार्च 2023 (हिंदी और अंग्रेज़ी में) · लोकसभा, 30 मार्च 2026 (अंग्रेज़ी में)
- कर: 1 अप्रैल 2026 से लागू आयकर अधिनियम, 2025 के अनुसार किसी VDA के हस्तांतरण, जैसे उसे बेचने, से हुई आय पर 30 प्रतिशत कर लगता है, और ख़रीद की लागत के सिवा कोई ख़र्च नहीं घटाया जा सकता। VDA के बदले भुगतान करने वाले को रक़म का 1 प्रतिशत कर काटकर (TDS) जमा करना होता है; साल भर की कुल रक़म एक सीमा से कम हो, तो कुछ मामलों में यह कटौती नहीं होती। स्रोत: आयकर अधिनियम, 2025, भारत का राजपत्र (अंग्रेज़ी में)
- स्टेबलकॉइन पर रिज़र्व बैंक: स्टेबलकॉइन ऐसे क्रिप्टो-टोकन हैं जिनकी क़ीमत पीछे रखी संपत्ति के सहारे स्थिर रखने का दावा किया जाता है। रिज़र्व बैंक की भुगतान प्रणाली रिपोर्ट (दिसंबर 2025, 18 मई 2026 को जारी) कहती है कि स्टेबलकॉइन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए जोखिम बन सकते हैं, और उनका ऐसा कोई काम नहीं जिसे केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा (CBDC) बेहतर ढंग से न कर सके। स्रोत: RBI, भुगतान प्रणाली रिपोर्ट, दिसंबर 2025 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब (पृष्ठ 40) के तर्क से सोचिए: रुपया विनिमय का माध्यम क्यों है? क्या यही तर्क क्रिप्टोकरेंसी पर लागू होता है?
उत्तर: किताब के अनुसार रुपया इसलिए विनिमय का माध्यम है क्योंकि सरकार इसे प्राधिकृत करती है, भारत में रिज़र्व बैंक इसे केंद्रीय सरकार की तरफ से जारी करता है, और कानून इसे वैधता देता है, इसलिए कोई रुपयों में अदायगी को मना नहीं कर सकता। क्रिप्टोकरेंसी को रिज़र्व बैंक जारी नहीं करता, और फ़रवरी 2026 के लोकसभा उत्तर में सरकार ने इसे भारत में “unregulated” बताया; इसलिए किताब का तर्क इस पर लागू नहीं होता। इसके उलट, e₹ रिज़र्व बैंक जारी करता है और यह वैध मुद्रा है। एक बात और: क्रिप्टो की आय पर कर लगता है, पर कर लगने से कोई चीज़ मुद्रा नहीं बन जाती।
सवाल: इन्हें तीन खानों में बाँटिए:
- 1मुद्रा;
- 2भुगतान का तरीक़ा, पर ख़ुद मुद्रा नहीं;
- 3इनमें से कोई नहीं। नोट और सिक्के, बैंक में माँग जमा, e₹, चैक, UPI, डेबिट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी।
उत्तर:
- मुद्रा: नोट और सिक्के (करेंसी) और बैंक में माँग जमा, यानी किताब के दो आधुनिक रूप (पृष्ठ 40–41); साथ में e₹, जिसे रिज़र्व बैंक करेंसी का डिजिटल रूप बताता है।
- भुगतान का तरीक़ा: चैक, जो बैंक को खाते से भुगतान करने का आदेश है (पृष्ठ 41); UPI, जिसे रिज़र्व बैंक भुगतान का माध्यम बताता है; और डेबिट कार्ड: किताब का शिक्षक-निर्देश (पृष्ठ 38) कहता है कि लेन-देन के लिए प्लास्टिक कार्डों का उपयोग होता है, पर वे अपने आप में मुद्रा नहीं हैं, और डेबिट कार्ड ऐसा ही प्लास्टिक कार्ड है।
- इनमें से कोई नहीं: क्रिप्टोकरेंसी। इसे रिज़र्व बैंक जारी नहीं करता, इसलिए यह किताब के अर्थ में मुद्रा नहीं है। चैक और UPI बैंक की माँग जमा को एक खाते से दूसरे में भेजने के तरीक़े हैं; क्रिप्टो ऐसा कोई आदेश नहीं, अपने आप में अलग चीज़ है, जिसे सरकार वर्चुअल डिजिटल एसेट, यानी एक तरह की डिजिटल संपत्ति, कहती है।
परीक्षा में मुद्रा के आधुनिक रूप किताब वाले ही लिखिए: करेंसी और माँग जमा।
CRR और SLR: बैंक जमा का कितना हिस्सा अलग रखते हैं
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 42) बताती है कि बैंक जमा का एक छोटा हिस्सा ही नकद के रूप में अपने पास रखते हैं, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं; उदाहरण के लिए, आजकल भारत में बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं। पृष्ठ 48 पर किताब कहती है कि बैंक अपनी जमा का एक न्यूनतम नकद हिस्सा अपने पास रखते हैं, और रिज़र्व बैंक नज़र रखता है कि बैंक वास्तव में नकद शेष बनाए हुए हैं। रिज़र्व बैंक यह न्यूनतम किस नियम से तय करता है और आज यह कितना है, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR): रिज़र्व बैंक के अनुसार CRR वह औसत दैनिक शेष है जो बैंक को रिज़र्व बैंक के पास रखना होता है, अपनी शुद्ध माँग और सावधि देयताओं (NDTL) के एक तय प्रतिशत के रूप में। NDTL में चालू और बचत खातों की जमा भी गिनी जाती है। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, CRR और SLR निर्देश, 2025, 25 अगस्त 2026 वाला रूप (अंग्रेज़ी में)
- आज कितना: 3 प्रतिशत। रिज़र्व बैंक की वर्तमान दरों में CRR 3.00% है। निर्देशों के अनुसार CRR 6 सितंबर 2025 से शुरू होने वाले पखवाड़े से 3.75 प्रतिशत हुआ, 4 अक्टूबर से 3.5, 1 नवंबर से 3.25 और 29 नवंबर 2025 से 3.0 प्रतिशत। स्रोत: RBI, वर्तमान दरें (हिंदी में) · RBI, CRR और SLR निर्देश, 2025, 25 अगस्त 2026 वाला रूप (अंग्रेज़ी में)
- हर दिन का न्यूनतम: CRR पखवाड़े भर के औसत पर गिना जाता है। 15 दिसंबर 2025 से पखवाड़ा यानी महीने की 1 से 15 तारीख़, या 16 से महीने के आख़िरी दिन तक; इससे पहले पखवाड़ा शनिवार से दूसरे शुक्रवार तक गिना जाता था, इसीलिए ऊपर की 2025 वाली तारीख़ें शनिवार हैं। पर हर दिन भी एक न्यूनतम शेष रखना होता है। 9 अक्टूबर 2026 के परिपत्र के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए पखवाड़े से यह दैनिक न्यूनतम तय CRR के 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत कर दिया गया। परिपत्र बताता है कि यह फ़ैसला नकदी (liquidity) की मौजूदा हालत की समीक्षा के बाद हुआ। स्रोत: RBI परिपत्र, 9 अक्टूबर 2026 (अंग्रेज़ी में) · RBI, CRR और SLR संशोधन निर्देश, 11 दिसंबर 2025 (अंग्रेज़ी में) · RBI, CRR और SLR निर्देश, 2025, 25 अगस्त 2026 वाला रूप (अंग्रेज़ी में)
- सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR): हर बैंक को अपनी कुल NDTL के कम से कम 18 प्रतिशत के बराबर की संपत्ति भारत में रखनी होती है। रिज़र्व बैंक के अनुसार यह संपत्ति आम तौर पर बिना गिरवी रखे सरकारी बॉन्ड (प्रतिभूतियाँ), नकद और सोना होती है। रिज़र्व बैंक की वर्तमान दरों में SLR 18.00% है। फ़र्क़ याद रखिए: CRR रिज़र्व बैंक के पास रखा शेष है, और SLR बैंक की अपनी ऐसी संपत्ति। स्रोत: RBI, CRR और SLR निर्देश, 2025, 25 अगस्त 2026 वाला रूप (अंग्रेज़ी में) · RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, वर्तमान दरें (हिंदी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब (पृष्ठ 42) का उदाहरण है कि बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं, और आज CRR 3 प्रतिशत है। क्या किताब की बात ग़लत हो गई?
उत्तर: इन दोनों संख्याओं को सीधे मिलाना ठीक नहीं, क्योंकि दोनों की परिभाषा अलग है। किताब का 5 प्रतिशत उस नकद का उदाहरण है जो बैंक अपने पास रखते हैं, ताकि किसी दिन पैसा निकालने आए जमाकर्ताओं को दे सकें। CRR, रिज़र्व बैंक की परिभाषा में, वह शेष है जो बैंक को रिज़र्व बैंक के पास रखना होता है, और इसका हिसाब NDTL पर होता है। इसलिए 3 प्रतिशत देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि किताब की बात ग़लत हो गई। किताब (पृष्ठ 48) की यह बात आज भी सही है कि रिज़र्व बैंक नज़र रखता है कि बैंक न्यूनतम नकद शेष रखें; CRR इसी तरह का एक नियम है। परीक्षा में किताब वाली बात लिखिए।
सवाल: मान लीजिए किसी बैंक की NDTL 100 करोड़ रुपए है। CRR 3 प्रतिशत और SLR 18 प्रतिशत हो, तो बैंक को कितना रिज़र्व बैंक के पास रखना होगा, और कितने की SLR वाली संपत्ति? बाकी पैसे का बैंक क्या कर सकता है?
उत्तर: CRR: 100 का 3 प्रतिशत = 3 करोड़ रुपए, रिज़र्व बैंक के पास। SLR: 100 का 18 प्रतिशत = 18 करोड़ रुपए की सरकारी बॉन्ड, नकद या सोने जैसी संपत्ति। दोनों मिलाकर 21 करोड़। बाकी 79 करोड़ का बड़ा हिस्सा बैंक ऋण देने में लगा सकता है; किताब (पृष्ठ 42) भी कहती है कि बैंक जमा के बड़े भाग को ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह मोटा हिसाब है, क्योंकि असल में बैंक अपने पास कुछ नकद और दूसरे निवेश भी रखते हैं।
रेपो दर और ब्याज दरें: रिज़र्व बैंक से आपके ऋण तक
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 42) बताती है कि बैंक जमा पर जो ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ब्याज ऋण पर लेते हैं, और कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है। पृष्ठ 48 पर किताब कहती है कि बैंकों को समय-समय पर रिज़र्व बैंक को बताना पड़ता है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं और उसकी ब्याज दरें क्या हैं। रिज़र्व बैंक की अपनी ब्याज दरें क्या हैं, और बैंक ऋण की ब्याज दर किस आधार पर तय करते हैं, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- रेपो दर: रिज़र्व बैंक के अनुसार यह वह ब्याज दर है जिस पर रिज़र्व बैंक बैंकों (और कुछ दूसरी तय संस्थाओं) को सरकारी और दूसरी मंज़ूरशुदा प्रतिभूतियाँ गिरवी रखकर पैसा देता है। आज यह 5.50 प्रतिशत है। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, वर्तमान दरें (हिंदी में)
- 7 अक्टूबर 2026 का फ़ैसला: मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 5 से 7 अक्टूबर 2026 की बैठक में सर्वसम्मति से रेपो दर 25 आधार अंक, यानी 0.25 प्रतिशत अंक, बढ़ाई: 5.25 से 5.50 प्रतिशत। यह बदलाव तुरंत लागू हुआ। समिति ने बहुमत से अपना रुख़ भी बदलकर “सुविचारित सख्ती” (calibrated tightening) किया; दो सदस्य रुख़ को तटस्थ रखना चाहते थे। समिति के अनुसार इसका मतलब बस इतना है कि मौजूदा हालात में निकट भविष्य में दरें घटाने की गुंजाइश नहीं है; आगे दरें बढ़ भी सकती हैं या जहाँ हैं वहीं ठहर भी सकती हैं, यह बदलते हालात पर निर्भर करेगा। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति समिति का संकल्प, 7 अक्टूबर 2026 (हिंदी में) · RBI परिपत्र, 7 अक्टूबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
- क्यों बढ़ाई: समिति के संकल्प के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित महँगाई जुलाई 2026 के 4.5 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में 4.8 प्रतिशत हो गई, और अगली तीन तिमाहियों में इसके औसतन लगभग 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। केंद्र सरकार ने महँगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा है, 2 से 6 प्रतिशत की सीमा के साथ; 25 मार्च 2026 को यही लक्ष्य 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए बनाए रखा गया। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति समिति का संकल्प, 7 अक्टूबर 2026 (हिंदी में) · RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में)
- मौद्रिक नीति समिति: RBI अधिनियम की धारा 45ZB के तहत बनी छह सदस्यों की समिति, जो महँगाई का लक्ष्य पाने के लिए रेपो दर तय करती है। इसमें रिज़र्व बैंक के गवर्नर (अध्यक्ष), मौद्रिक नीति देखने वाले डिप्टी गवर्नर और रिज़र्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड का नामित एक अधिकारी होते हैं, और तीन बाहर के सदस्य। हर सदस्य का एक वोट होता है; वोट बराबर हों, तो गवर्नर का दूसरा, निर्णायक वोट होता है। समिति को साल में कम से कम चार बार मिलना होता है; अगली बैठक 2 से 4 दिसंबर 2026 को तय है। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, मौद्रिक नीति समिति का संकल्प (हिंदी में)
- स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर, 5.25 प्रतिशत: वह दर जिस पर रिज़र्व बैंक बैंकों का पैसा एक रात के लिए, बिना कुछ गिरवी लिए, जमा के रूप में लेता है। यह रेपो से 0.25 प्रतिशत अंक नीचे रहती है। अप्रैल 2022 में SDF आने के बाद इसने पुरानी स्थिर रिवर्स रेपो दर की जगह ली, सबसे निचली दर के रूप में। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में)
- सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर, 5.75 प्रतिशत: वह दंड-दर जिस पर रिज़र्व बैंक की अनुमति वाले बैंक एक रात के लिए रिज़र्व बैंक से उधार ले सकते हैं, अपनी SLR वाली संपत्ति में से एक तय सीमा तक इस्तेमाल करके। यह रेपो से 0.25 प्रतिशत अंक ऊपर रहती है, और रिज़र्व बैंक इसे नकदी के अचानक झटकों के सामने बैंकों के लिए एक “सेफ़्टी वाल्व” बताता है। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, CRR और SLR निर्देश, 2025, 25 अगस्त 2026 वाला रूप (अंग्रेज़ी में)
- बैंक दर, 5.75 प्रतिशत: रिज़र्व बैंक के अनुसार यह CRR और SLR पूरा न रखने पर बैंकों से लिए जाने वाले दंड की दर का काम करती है, और MSF दर के साथ अपने आप बदलती है। स्रोत: RBI, मौद्रिक नीति का परिचय (अंग्रेज़ी में) · RBI, वर्तमान दरें (हिंदी में)
- बैंक ऋण की दर (MCLR): ऋण दो तरह के होते हैं: स्थिर दर वाले, जिन पर पूरी अवधि में एक ही ब्याज दर रहती है, और फ़्लोटिंग दर वाले, जिन पर ब्याज दर अवधि के दौरान बदल सकती है। 1 अप्रैल 2016 से मंज़ूर या नवीकृत (renewed) फ़्लोटिंग दर वाले रुपया ऋणों की ब्याज दर MCLR के हवाले से तय होती है, यानी बैंक के पैसा जुटाने की सीमांत लागत पर आधारित ऋण दर (Marginal Cost of Funds based Lending Rate); अगले बिंदु वाले ऋण इससे अलग हैं। MCLR बैंक का अपना, आंतरिक मानक है। इन निर्देशों में व्यावसायिक बैंक का मतलब है बैंकिंग कंपनियाँ (लघु वित्त बैंक, पेमेंट्स बैंक और स्थानीय क्षेत्र बैंक छोड़कर), राष्ट्रीयकृत बैंक और भारतीय स्टेट बैंक। स्रोत: RBI, ऋणों पर ब्याज दर निर्देश, 28 नवंबर 2025 (अंग्रेज़ी में)
- बाहरी मानक (EBLR): बैंकों के फ़्लोटिंग दर वाले निजी या खुदरा ऋण, जैसे घर या गाड़ी के ऋण, और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को दिए फ़्लोटिंग दर वाले ऋण किसी बाहरी मानक दर से जुड़े होने चाहिए। कुछ ऋण इन नियमों से छूट में हैं, जैसे बैंक के अपने कर्मचारियों को दिए ऋण। बाहरी मानक हैं: रिज़र्व बैंक की रेपो दर, भारत सरकार के तीन या छह महीने के ट्रेज़री बिल की यील्ड, जो FBIL (फ़ाइनेंशियल बेंचमार्क्स इंडिया) प्रकाशित करती है, या FBIL की प्रकाशित कोई दूसरी मानक दर। जून 2026 के आख़िर में बैंकों के बकाया फ़्लोटिंग दर वाले रुपया ऋणों में 68.2 प्रतिशत बाहरी मानक से और 29.6 प्रतिशत MCLR से जुड़े थे। स्रोत: RBI, ऋणों पर ब्याज दर निर्देश, 28 नवंबर 2025 (अंग्रेज़ी में) · RBI, ऋण और जमा की दरें, 30 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
- ऋण और जमा की औसत दरें: अनुसूचित व्यावसायिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और लघु वित्त बैंक छोड़कर) के नए रुपया ऋणों पर भारित औसत ब्याज दर (WALR), यानी रक़म के हिसाब से निकाला गया औसत, अगस्त 2026 में 8.61 प्रतिशत थी, और सारे बकाया ऋणों पर 8.96 प्रतिशत। नई सावधि जमा पर भारित औसत ब्याज दर (WADTDR) 5.67 प्रतिशत थी, और सारी बकाया सावधि जमा पर 6.56 प्रतिशत। सितंबर 2026 में एक साल की MCLR का माध्यिका (median) मान 8.61 प्रतिशत था। ये आँकड़े अक्टूबर की रेपो बढ़ोतरी से पहले के हैं। स्रोत: RBI, ऋण और जमा की दरें, 30 सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: अगस्त 2026 में नए ऋणों पर औसत ब्याज 8.61 प्रतिशत और नई सावधि जमा पर 5.67 प्रतिशत था। अंतर कितना है? किताब (पृष्ठ 42) के हिसाब से इसका क्या मतलब है?
उत्तर: 8.61 − 5.67 = 2.94 प्रतिशत अंक। किताब के अनुसार कर्ज़दारों से लिए और जमाकर्ताओं को दिए ब्याज का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है; यह आँकड़ा उसी अंतर की एक झलक है। पर यह मोटा हिसाब है: इसमें सिर्फ़ सावधि जमा की दर है, बचत और चालू खातों की नहीं।
सवाल: अक्टूबर 2026 में रेपो दर बढ़ी। किसी परिवार का घर का ऋण फ़्लोटिंग दर पर है और रेपो दर से जुड़ा है। उस पर क्या असर पड़ सकता है? और किसी दुकानदार के साहूकार से लिए ऋण पर?
उत्तर: रेपो से जुड़े ऋण की ब्याज दर रेपो के हिसाब से बदलती है, इसलिए उस परिवार के ऋण की ब्याज दर भी बढ़ सकती है। साहूकार के ऋण पर रिज़र्व बैंक का यह नियम लागू नहीं होता। किताब (पृष्ठ 48) कहती है कि अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है, और वे ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं। यही औपचारिक और अनौपचारिक ऋण का फ़र्क़ है।
जमा का बीमा और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 42) बताती है कि बैंक जमा राशि के एक बड़े भाग को ऋण देने के लिए इस्तेमाल करते हैं, और उसी पन्ने पर एक सवाल पूछती है: “अगर सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी धन राशि की माँग करने बैंक पहुँच जाएँ तो क्या होगा?” पृष्ठ 48 पर किताब कहती है कि रिज़र्व बैंक यह भी देखता है कि बैंक केवल लाभ अर्जित करने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को ही नहीं, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्ज़दारों इत्यादि को भी ऋण दे रहे हैं। बैंक बंद हो जाए तो जमाकर्ता का क्या होगा, और छोटे कर्ज़दारों तक कितना ऋण पहुँचना चाहिए, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- जमा का बीमा (DICGC): डिपॉज़िट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) हर जमाकर्ता की एक बैंक में, एक ही हैसियत में (जैसे अपने अकेले नाम से) रखी जमा का, मूलधन और ब्याज मिलाकर, अधिकतम 5 लाख रुपए तक बीमा करता है, ऐसी हालत के लिए जैसे बैंक बंद हो जाए, उसका लाइसेंस रद्द हो जाए, या रिज़र्व बैंक उस पर ऐसे निर्देश लगा दे जिनसे जमा निकालने पर रोक लगे। यह सीमा 4 फ़रवरी 2020 से लागू है। स्रोत: DICGC, जमा बीमा की जानकारी (अंग्रेज़ी में) · DICGC, वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 (अंग्रेज़ी में)
- किस पर बीमा: बचत, सावधि, चालू और आवर्ती (recurring) जैसी सभी जमा पर, कुछ अपवादों को छोड़कर, जैसे एक बैंक की दूसरे बैंक में रखी जमा। एक ही बैंक की अलग-अलग शाखाओं में, एक ही हैसियत में रखी जमा जोड़कर गिनी जाती है। सभी व्यावसायिक बैंक इसके दायरे में हैं, जिनमें भारत में काम कर रहे विदेशी बैंकों की शाखाएँ, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक भी हैं। DICGC के अनुसार आज सभी सहकारी बैंक भी बीमे में हैं, पर प्राथमिक सहकारी समितियाँ नहीं। स्रोत: DICGC, जमा बीमा की जानकारी (अंग्रेज़ी में)
- प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को ऋण (PSL): रिज़र्व बैंक के निर्देशों के अनुसार देसी व्यावसायिक बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और लघु वित्त बैंक छोड़कर) और 20 या ज़्यादा शाखाओं वाले विदेशी बैंकों को अपने ऋण का कम से कम 40 प्रतिशत प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को देना होता है। यह प्रतिशत पिछले साल की उसी तारीख़ के बैंक के “समायोजित शुद्ध बैंक ऋण” (ANBC) पर, या एक दूसरी गणना (CEOBSE) पर, जो भी ज़्यादा हो, गिना जाता है। इसके भीतर खेती के लिए 18 प्रतिशत है, जिसमें से 14 प्रतिशत ग़ैर-कॉर्पोरेट किसानों (जैसे अलग-अलग किसान) के लिए, और उसमें से भी 10 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसानों के लिए; सूक्ष्म उद्यमों के लिए 7.5 प्रतिशत; और कमज़ोर वर्गों के लिए 12 प्रतिशत। स्रोत: RBI, प्राथमिकता क्षेत्र ऋण निर्देश, 11 सितंबर 2026 तक अद्यतन (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब (पृष्ठ 42) पूछती है: अगर सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपना पैसा माँगने बैंक पहुँच जाएँ, तो क्या होगा? आज के नियमों को जोड़कर इसका जवाब कैसे दें?
उत्तर: बैंक के पास जमा का एक छोटा हिस्सा ही नकद होता है और बड़ा भाग ऋण में लगा होता है (पृष्ठ 42), इसलिए बैंक सबको तुरंत पूरा पैसा नकद नहीं दे पाएगा: यह किताब की बात से निकलता है। आज के नियमों में बैंक को CRR का शेष रिज़र्व बैंक के पास और SLR के बराबर संपत्ति रखनी पड़ती है, और रिज़र्व बैंक की अनुमति वाला बैंक ज़रूरत पड़ने पर MSF से रिज़र्व बैंक से एक रात के लिए उधार भी ले सकता है। फिर भी बैंक बंद हो जाए, तो DICGC हर जमाकर्ता की उस बैंक की जमा का 5 लाख रुपए तक बीमा करता है। परीक्षा में किताब का तर्क लिखिए: बैंक जमा का छोटा हिस्सा ही नकद रखते हैं, क्योंकि किसी एक दिन कुछ ही जमाकर्ता पैसा निकालने आते हैं।
सवाल: किसी व्यक्ति के अपने नाम से एक ही बैंक की दो शाखाओं में 3 लाख और 4 लाख रुपए जमा हैं, ब्याज मिलाकर। बैंक बंद हो जाए, तो जमा बीमा से अधिकतम कितना मिलेगा? और अगर ये दो अलग-अलग बैंकों में हों?
उत्तर: एक ही बैंक की शाखाओं की जमा जोड़ी जाती है: 3 + 4 = 7 लाख, पर बीमा अधिकतम 5 लाख रुपए का है, इसलिए 5 लाख। दो अलग बैंकों में हों, तो हर बैंक की जमा का बीमा अलग होता है, और 3 लाख और 4 लाख, दोनों पूरे बीमे में आ जाते हैं।
सवाल: मान लीजिए पिछले साल की उसी तारीख़ पर किसी बैंक का ANBC 1,000 करोड़ रुपए था, और CEOBSE इससे कम। प्राथमिकता क्षेत्र के नियम से कम से कम कितना ऋण खेती को, और कितना छोटे और सीमांत किसानों को जाना चाहिए? यह किताब के पृष्ठ 48 की किस बात से जुड़ता है?
उत्तर: खेती: 1,000 का 18 प्रतिशत = 180 करोड़ रुपए। छोटे और सीमांत किसान: 1,000 का 10 प्रतिशत = 100 करोड़ रुपए। कुल प्राथमिकता क्षेत्र: 40 प्रतिशत = 400 करोड़ रुपए। किताब (पृष्ठ 48) कहती है कि रिज़र्व बैंक देखता है कि बैंक छोटे किसानों, छोटे उद्योगों, छोटे कर्ज़दारों इत्यादि को भी ऋण दें; प्राथमिकता क्षेत्र के लक्ष्य इसी बात को संख्याओं में तय करते हैं।
जन धन खाते: गाँव में बैंक खाता
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 50) कहती है कि भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं, और बैंक से क़र्ज़ लेने के लिए ऋणाधार और विशेष कागज़ातों की ज़रूरत पड़ती है, जैसा मेघा के मामले में देखा गया। गाँवों में कितने लोगों के बैंक खाते हैं, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY), 7 अक्टूबर 2026 तक: कुल 59.54 करोड़ लाभार्थी। इनमें 46.24 करोड़ ग्रामीण और अर्ध-शहरी केंद्रों की बैंक शाखाओं के हैं और 13.30 करोड़ शहरी और महानगरी शाखाओं के। 33.20 करोड़ लाभार्थी महिलाएँ हैं। इनके खातों में कुल 3,20,947.17 करोड़ रुपए जमा हैं, और 41.75 करोड़ रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड दिए गए हैं। स्रोत: PMJDY (अंग्रेज़ी में)
- 2015 से अब तक: अगस्त 2015 में जन धन के लाभार्थी 17.9 करोड़ थे; 12 अगस्त 2026 तक 58.90 करोड़ हो गए। स्रोत: PIB तथ्य-पुस्तिका, 13 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी में)
- ध्यान रखिए: 58.90 करोड़ (12 अगस्त) और 59.54 करोड़ (7 अक्टूबर) दो अलग तारीख़ों के आँकड़े हैं। कक्षा में नई तारीख़ वाला आँकड़ा बताइए।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: 59.54 करोड़ लाभार्थियों में से 46.24 करोड़ ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं के हैं। क्या अब किताब की यह बात पुरानी हो गई कि सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं?
उत्तर: इन आँकड़ों से यह तय नहीं होता। ये लाभार्थियों की गिनती है, बैंक शाखाओं की नहीं। इनसे इतना पता चलता है कि गाँवों और क़स्बों की शाखाओं से बहुत-से लोग जुड़े हैं; हर गाँव तक बैंक पहुँच गया है, यह इनसे साबित नहीं होता। परीक्षा में किताब की बात ही लिखिए।
सवाल: मान लीजिए किसी परिवार का जन धन खाता खुल गया। क्या अब उसे बैंक से क़र्ज़ आसानी से मिल जाएगा?
उत्तर: ज़रूरी नहीं। खाता पैसा जमा करने और भुगतान के लिए है। किताब (पृष्ठ 50) बताती है कि बैंक से क़र्ज़ के लिए ऋणाधार और कागज़ात चाहिए, और ऋणाधार का न होना एक प्रमुख कारण है जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते। इस कमी का एक हल किताब स्वयं सहायता समूह बताती है (पृष्ठ 51)।
गाँवों में क़र्ज़ के स्रोत: नया सर्वेक्षण
किताब कहाँ रुकती है। आलेख 1 “ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019” (पृष्ठ 48) में व्यावसायिक बैंक 51, सहकारी समितियाँ/बैंक 10 और अन्य औपचारिक एजेंसियाँ 5 प्रतिशत हैं, यानी औपचारिक कुल 66 प्रतिशत; साहूकार 23, रिश्तेदार एवं मित्र 7, जमींदार 1 और अन्य अनौपचारिक एजेंसियाँ 3 प्रतिशत, यानी अनौपचारिक कुल 34 प्रतिशत। ये आँकड़े अखिल भारतीय ऋण तथा निवेश सर्वेक्षण (77वाँ, 2019) से लिए गए हैं (पृष्ठ 38, “जानकारी के स्रोत”)। पृष्ठ 49 के पाठ में “केवल 50 प्रतिशत” छपा है; आलेख 1 के हिसाब से औपचारिक हिस्सा 66 प्रतिशत है, कक्षा में यही बताइए।
आज क्या है
- नाबार्ड का सर्वेक्षण (NAFIS 2021-22): नाबार्ड के अखिल भारतीय ग्रामीण वित्तीय समावेशन सर्वेक्षण में 1 लाख ग्रामीण परिवारों से जानकारी ली गई, कृषि वर्ष 2021-22 (जुलाई 2021 से जून 2022) के लिए। स्रोत: PIB, 10 अक्टूबर 2024 (अंग्रेज़ी में)
- किसने किस तरह के स्रोत से क़र्ज़ लिया: कृषि वर्ष 2021-22 में जिन ग्रामीण परिवारों ने कोई भी क़र्ज़ लिया, उनमें 74.4 प्रतिशत ने सिर्फ़ संस्थागत स्रोतों से लिया, 24.6 प्रतिशत ने सिर्फ़ गैर-संस्थागत स्रोतों से, और 1.0 प्रतिशत ने दोनों से। स्रोत: NAFIS 2021-22 रिपोर्ट, तालिका 8.5 (अंग्रेज़ी में)
- “संस्थागत” में क्या गिना गया: इस सर्वेक्षण में व्यावसायिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी समितियाँ और सहकारी बैंक के साथ स्वयं सहायता समूह और माइक्रोफ़ाइनेंस संस्थाएँ (NBFC) भी संस्थागत स्रोत गिनी गई हैं। रिश्तेदार और मित्र, साहूकार और ज़मींदार गैर-संस्थागत स्रोत हैं। स्रोत: NAFIS 2021-22 रिपोर्ट, तालिका 8.6 (अंग्रेज़ी में)
- ध्यान रखिए: यह किताब वाले सर्वेक्षण से अलग सर्वेक्षण है और अलग चीज़ गिनता है। किताब का आलेख 1 क़र्ज़ों को उनके स्रोत के हिसाब से बाँटता है; NAFIS उन परिवारों को गिनता है जिन्होंने क़र्ज़ लिया, यह देखकर कि उन्होंने किस तरह के स्रोत से लिया।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब में औपचारिक हिस्सा 66 प्रतिशत है, और NAFIS में 74.4 प्रतिशत परिवारों ने सिर्फ़ संस्थागत स्रोतों से क़र्ज़ लिया। क्या कह सकते हैं कि 2019 के बाद औपचारिक क़र्ज़ 8 अंक बढ़ गया?
उत्तर: नहीं। दोनों अलग सर्वेक्षण हैं और अलग चीज़ गिनते हैं: आलेख 1 क़र्ज़ों का बँटवारा है, NAFIS क़र्ज़ लेने वाले परिवारों की गिनती। NAFIS की “संस्थागत” सूची में स्वयं सहायता समूह और माइक्रोफ़ाइनेंस संस्थाएँ भी हैं। दो आँकड़ों की तुलना से पहले बच्चों से यह पूछवाइए: दोनों किसे और कैसे गिनते हैं?
सवाल: NAFIS बैंक से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत स्रोत गिनता है। किताब के हिसाब से यह ठीक क्यों बैठता है?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 51) के अनुसार एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है, और ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है। यानी समूह के ज़रिए सदस्यों तक पहुँचा पैसा बैंक का, यानी औपचारिक स्रोत का, पैसा है।
स्वयं सहायता समूह आज
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 50–51) बताती है कि एक स्वयं सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी 15–20 सदस्य होते हैं, जो नियमित रूप से मिलते हैं और बचत करते हैं; एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है; और बैंक समूहों में संगठित निर्धन महिलाओं को बिना ऋणाधार के भी ऋण दे देते हैं। देश में आज कितने समूह हैं, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- कितने समूह: दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) में 12 अगस्त 2026 तक 10.19 करोड़ परिवार 94.46 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुके थे। स्रोत: PIB तथ्य-पुस्तिका, 13 अगस्त 2026 (अंग्रेज़ी में)
- बैंकों से कितना ऋण: लोकसभा में 28 जुलाई 2026 को दिए गए एक लिखित उत्तर के अनुसार, DAY-NRLM के SHG बैंक लिंकेज पोर्टल पर दर्ज जानकारी में बैंकों से महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया गया कुल ऋण 13,41,852.66 करोड़ रुपए है, यानी लगभग 13.4 लाख करोड़ रुपए। उत्तर में यह नहीं बताया गया कि यह जोड़ कब से कब तक का है, इसलिए इसे एक साल का आँकड़ा मत बताइए। स्रोत: PIB, 28 जुलाई 2026 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: बैंक समूह की महिलाओं को बिना ऋणाधार के ऋण देने को क्यों तैयार हो जाते हैं?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 51) बताती है कि ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है और इसे लौटाने की ज़िम्मेदारी भी समूह की होती है। एक भी सदस्य ऋण न लौटाए, तो समूह के बाकी सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं। इसी कारण बैंक ऋणाधार न होने पर भी ऋण दे देते हैं। इस तरह समूह ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारने में मदद करते हैं।
सवाल: बैंकों से समूहों तक लगभग 13.4 लाख करोड़ रुपए का ऋण पहुँचा है। किताब के अनुसार समूह के सदस्य ऐसे ऋण किन कामों के लिए लेते हैं?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 51) के अनुसार ऋण का मक़सद सदस्यों के लिए स्वरोज़गार के अवसर बनाना है। उदाहरण: गिरवी रखी ज़मीन छुड़ाना; कार्यशील पूँजी, जैसे बीज, खाद, बाँस और कपड़ा ख़रीदना; घर बनाना; और सिलाई मशीन, हथकरघा, पशु जैसी संपत्ति ख़रीदना।
बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक: 2018 के आगे
किताब कहाँ रुकती है। किताब (पृष्ठ 52) बताती है कि ग्रामीण बैंक की शुरुआत 1970 के दशक में छोटे पैमाने पर हुई, 2018 में इसके सदस्य बांग्लादेश के 81,600 गाँवों में फैले थे, और इससे ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ हैं जो समाज के गरीब तबके से हैं। हिंदी किताब में शुरुआत “1970 में” और सदस्य “9 लाख” छपे हैं; अंग्रेज़ी संस्करण में 1970s और “over 9 million”, यानी 90 लाख से ज़्यादा, है। कक्षा में 90 लाख से ज़्यादा बताइए।
आज क्या है
- सितंबर 2026 में: ग्रामीण बैंक के कुल सदस्य 1,06,47,932 (लगभग 1.06 करोड़) हैं, जिनमें 1,02,68,846 महिलाएँ हैं, यानी लगभग 96 प्रतिशत। बैंक 81,678 गाँवों तक पहुँचता है। स्रोत: ग्रामीण बैंक की मासिक रिपोर्ट, सितंबर 2026 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: 2018 और सितंबर 2026 की तुलना कीजिए: सदस्य कितने बढ़े और गाँव कितने बढ़े? इससे क्या पता चलता है?
उत्तर: सदस्य 90 लाख से ज़्यादा से बढ़कर लगभग 1.06 करोड़ हो गए, पर गाँव 81,600 से 81,678 ही हुए, लगभग उतने ही। यानी बैंक लगभग उन्हीं गाँवों में है, पर उसके सदस्य बढ़े हैं।
सवाल: ग्रामीण बैंक के लगभग 96 प्रतिशत सदस्य महिलाएँ हैं। किताब इसके बारे में क्या कहती है?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 52) कहती है कि ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ हैं, और इन कर्ज़दारों ने दिखा दिया कि गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं और छोटी आय वाली कई तरह की गतिविधियाँ सफलता से शुरू करके चला सकती हैं। आज का आँकड़ा किताब की इसी बात से मेल खाता है।
राजस्थान की कड़ी: राजीविका और जन धन
किताब कहाँ रुकती है। किताब के उदाहरण सोनपुर गाँव (पृष्ठ 46–47) और बांग्लादेश (पृष्ठ 52) के हैं। पृष्ठ 47 का सवाल 7 कहता है कि अपने क्षेत्र के लोगों से ऋण प्रबंधों के बारे में बातचीत कीजिए और अलग-अलग लोगों की ऋण की शर्तों का फ़र्क़ लिखिए। राजस्थान के आँकड़े इस बातचीत की शुरुआत बन सकते हैं।
आज क्या है
- राजीविका के स्वयं सहायता समूह, दिसंबर 2025 तक: राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (RGAVP, राजीविका) की मासिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 352 ब्लॉकों में कुल 4,29,525 स्वयं सहायता समूह बने हैं: 3,87,232 परिषद ने और 42,293 स्वयंसेवी संस्थाओं (NGO) और दूसरे विभागों ने। इनसे लगभग 51.01 लाख परिवार जुड़े हैं। परिषद के बनाए समूहों में से 3,70,711 चालू हैं और 16,521 बंद हो चुके हैं। स्रोत: RGAVP मासिक प्रगति रिपोर्ट, दिसंबर 2025 (अंग्रेज़ी में)
- राजस्थान में जन धन खाते, 7 अक्टूबर 2026 तक: 3,89,78,198 लाभार्थी। इनमें 2,97,81,425 ग्रामीण और अर्ध-शहरी शाखाओं के हैं और 91,96,773 शहरी और महानगरी शाखाओं के। इनके खातों में 25,658.64 करोड़ रुपए जमा हैं, और 2,92,64,649 रुपे कार्ड दिए गए हैं। स्रोत: PMJDY, राज्यवार आँकड़े (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: राजस्थान के 4,29,525 समूहों से लगभग 51.01 लाख परिवार जुड़े हैं। एक समूह में औसतन कितने परिवार हुए? किताब के “15–20 सदस्य” से मिलाइए।
उत्तर: 51,01,000 ÷ 4,29,525 = लगभग 12। यह मोटा औसत है, क्योंकि इसमें बंद हो चुके समूह भी गिने गए हैं। फिर भी औसत 15 से कम है, यानी यहाँ के बहुत-से समूह किताब के उदाहरण से छोटे हैं। किताब (पृष्ठ 51) 15–20 सदस्यों को एक आम समूह की तरह बताती है; परीक्षा में वही लिखिए।
सवाल: पृष्ठ 47 के सवाल 7 के लिए बच्चे अपने क्षेत्र के लोगों से बात करें, तो क्या-क्या पूछें?
उत्तर: किताब की “ऋण की शर्तें” ही पूछने की सूची हैं: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीक़े (पृष्ठ 45)। साथ में यह भी कि ऋण किससे लिया: बैंक, सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह, साहूकार या रिश्तेदार। जवाबों को एक-दूसरे के सामने रखकर बच्चे देखें कि औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों की शर्तों में क्या फ़र्क़ है। बच्चों को बताइए कि जिनसे बात की, उनका नाम या रक़म कक्षा में बताना ज़रूरी नहीं।