अध्याय 3मुद्रा और साख

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NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3

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अध्याय 3 — मुद्रा और साख · आर्थिक विकास की समझ · कक्षा 10

कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 39 से 53

यह पन्ना किसलिए — स्लाइड शो कक्षा में चलाने से पहले एक बार पढ़ लेने के लिए। यहाँ सारी स्लाइड एक के नीचे एक हैं। उद्धरण-चिह्नों के भीतर सिर्फ़ किताब के शब्द हैं, और स्लाइड के ऊपर किताब का पृष्ठ लिखा है। जो बात हमारी है, उसके आगे “हमारी ओर से” लिखा है।

बच्चों की आम भूलें शिक्षक संदर्शिका में हैं, और अध्याय की सारी तालिकाएँ रिवीजन नोट्स में। बच्चे ख़ुद पढ़ें, तो उन्हें इंटरैक्टिव अध्याय दीजिए।

कौन-सी स्लाइड किस कालांश में — पाठ योजना के हिसाब से:

  • कालांश 1 — शुरू की तीन स्लाइड, फिर मुद्रा: विनिमय का माध्यम
  • कालांश 2 — मुद्रा के आधुनिक रूप (नोट पर छपे वचन और चैक समेत)
  • कालांश 3 — बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ
  • कालांश 4 — साख की दो विभिन्न स्थितियाँ: सलीम और स्वप्ना
  • कालांश 5 — ऋण की शर्तें (मेघा के आवास ऋण समेत)
  • कालांश 6 — विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण
  • कालांश 7 — औपचारिक और अनौपचारिक साख (आलेख 1 और 2 समेत)
  • कालांश 8 — निर्धनों के स्वयं सहायता समूह
  • कालांश 9 — सारांश, प्रश्नावली और समापन

पहले यह पढ़िए — किताब का पहला सवाल

पृष्ठ 39

?

अपने चारों ओर देखिए: किसी एक दिन में मुद्रा से जुड़े कई सौदे दिखेंगे। क्या आप उनकी सूची बना सकते हैं?

किताब का इशारा: ज़्यादातर सौदों में वस्तुएँ और सेवाएँ मुद्रा से ख़रीदी जाती हैं; कुछ में उस समय मुद्रा नहीं दी जाती, बस बाद में भुगतान का वादा होता है।

मान लीजिए अपना छोटा काम शुरू करने के लिए पैसे उधार चाहिए: किससे माँगेंगे, और क्यों? पर्ची पर लिखिए, नाम मत लिखिए।

अध्याय का नक्शा

पृष्ठ 39 से 53 · पढ़ाने का क्रम हमारी ओर से

  • पहले मुद्रा: वस्तु विनिमय की मुश्किल, और मुद्रा के आधुनिक रूप
  • फिर बैंक: लोगों की जमा, और उसी जमा से दिया गया ऋण
  • फिर ऋण: किसके लिए मदद, किसके लिए कर्ज–ज़ाल, और ऋण की चार शर्तें
  • आख़िर में स्रोत: सोनपुर गाँव, औपचारिक और अनौपचारिक साख, और स्वयं सहायता समूह

हमारी ओर से: पहले दिन की पर्चियाँ सँभालकर रखिए। आख़िरी कालांश में वे फिर काम आएँगी।

1 | मुद्रा: विनिमय का माध्यम

आपके पास पेंसिल है और आपको रबड़ चाहिए। रबड़ वाले को पेंसिल नहीं, कॉपी चाहिए। अब सौदा कैसे होगा?

वस्तु विनिमय की मुश्किल

पृष्ठ 39

2

जूता निर्माता को ऐसा किसान चाहिए जो गेहूँ बेचना भी चाहे और बदले में जूते ख़रीदना भी

दोनों पक्षों की इच्छा एक साथ मिले, इसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं। किताब के मोटे अक्षरों में इस शब्द का एक अक्षर छूट गया है; बोर्ड पर पूरा शब्द लिखिए।

बिना मुद्रा, और मुद्रा के साथ

पृष्ठ 39–40

वस्तु विनिमय

  • वस्तु के बदले वस्तु
  • दोनों को एक-दूसरे की वस्तु चाहिए
  • किताब के चित्र में गेहूँ वाले को जूते नहीं, कपड़े चाहिए

मुद्रा से

  • जूते बेचकर मुद्रा, फिर उस मुद्रा से गेहूँ
  • बस अपनी वस्तु का ख़रीदार चाहिए
  • जिसके पास मुद्रा है, वह उससे कोई भी वस्तु या सेवा ख़रीद सकता है

इसलिए हर कोई भुगतान मुद्रा में लेना पसंद करता है, और मुद्रा को विनिमय का माध्यम कहते हैं।

पृष्ठ 40 के दो सवाल

पृष्ठ 40 की गतिविधि, प्रश्न 1 और 2 · उत्तर हमारी ओर से

  • सहूलियत: दोहरे संयोग की ज़रूरत नहीं रहती; जूता निर्माता को बस जूतों का ख़रीदार चाहिए
  • सोनपुर की रमा: भूस्वामी का कर्ज़ नकद से नहीं, उसके यहाँ काम करके चुकाती है (पृष्ठ 46)
  • आसपास के उदाहरण: जैसे किसी सेवा या मज़दूरी के बदले अनाज देना

हमारी ओर से: जो उदाहरण बच्चे ख़ुद देखें, वही लिखवाइए।

2 | मुद्रा के आधुनिक रूप

इस नोट से आप न खा सकते हैं, न पहन सकते हैं। फिर दुकानदार इसे क्यों लेता है?

मुद्रा के बदलते रूप

पृष्ठ 40

कबमुद्रा का रूप
बहुत प्रारंभिक काल सेअनाज और पशु
इसके बाद, पिछली सदी तकसोना, चाँदी और ताँबा जैसी धातुओं के सिक्के
आजकरेंसी (कागज़ के नोट और सिक्के) और माँग जमा

किताब के चित्रों में सिक्के

पृष्ठ 40

  • आहत सिक्के, लगभग 2500 वर्ष पुराने
  • गुप्तकालीन सिक्के
  • तुगलक के सिक्के
  • अकबर कालीन सोने की मोहर
  • आधुनिक सिक्का

हमारी ओर से: बच्चे बताएँ कि इनमें सबसे पुराना कौन-सा है। (आहत सिक्के।)

नोट पर छपा वचन

प्रश्नावली का प्रश्न 4 · हमारी ओर से

₹10

नोट पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर के साथ छपा होता है कि वे धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देते हैं

हमारी ओर से: एक असली नोट कक्षा में घुमाइए, और एक विद्यार्थी से उस पर छपा वचन पढ़वाइए।

करेंसी क्यों चलती है

पृष्ठ 40

  • आधुनिक मुद्रा सोने, चाँदी या ताँबे से नहीं बनी; उसका अपना कोई इस्तेमाल नहीं
  • देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है
  • भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है
  • किसी और व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं

कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।

बैंक में जमा

पृष्ठ 40–41

लोग क्या करते हैं

  • रोज़ के खर्च के लिए थोड़ी ही करेंसी चाहिए
  • महीने के आख़िर में वेतन पाने वाले मज़दूरों के पास अतिरिक्त नकद होता है
  • वे बैंक में अपने नाम का खाता खोलकर उसे जमा कर देते हैं

बैंक क्या करता है

  • जमा पर सूद देता है, और पैसा सुरक्षित रहता है
  • ज़रूरत पड़ने पर पैसा माँगकर निकाला जा सकता है

इसलिए इस जमा को माँग जमा कहते हैं।

चैक

पृष्ठ 41

  • चैक बैंक को आदेश है कि खाते से, चैक पर लिखे नाम वाले व्यक्ति को, वह रकम दी जाए
  • किताब का उदाहरण: जूता निर्माता एम. सलीम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक से भुगतान करता है
  • धन एक खाते से दूसरे खाते में जाता है, बिना नकद के

माँग जमा से सीधा भुगतान हो जाता है, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में उसे भी मुद्रा माना जाता है।

पृष्ठ 42 के तीन सवाल

पृष्ठ 42 की गतिविधि, प्रश्न 1 से 3 · उत्तर हमारी ओर से

नकद निकालने का चैक (प्रश्न 1)

  • तारीख़
  • भुगतान पाने वाले की जगह अपना नाम
  • रकम शब्दों में बीस हज़ार रुपये, अंकों में 20,000
  • खाताधारक के हस्ताक्षर, फिर अपने बैंक में देकर नकद

सलीम और प्रेम (प्रश्न 2 और 3)

  • सही विकल्प (ख): सलीम के खाते में शेष घटता है, प्रेम के खाते में बढ़ता है
  • माँग जमा माँगने पर निकलता है और चैक से उससे भुगतान होता है, इसलिए उसे भी मुद्रा समझा जाता है

हमारी ओर से: पृष्ठ 41 का नमूना चैक सिर्फ़ उसके खाने दिखाने के लिए है; ख़ाका अपना बनाइए।

कार्ड और फ़ोन से भुगतान

पृष्ठ 38, शिक्षक के लिए निर्देश

  • नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपये के नोट अमान्य घोषित हुए; इसे विमुद्रीकरण कहते हैं
  • तब से नकदी की जगह बैंक जमा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया
  • प्लास्टिक कार्ड लेन-देन में काम आते हैं, लेकिन अपने आप में मुद्रा नहीं हैं

हमारी ओर से: यहाँ उतना ही बताइए जितना किताब के इस पृष्ठ पर है।

3 | बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियाँ

आपने बैंक में पैसा जमा किया। क्या बैंक उसे तिजोरी में आपके नाम से अलग रख देता है?

बैंक कितना नकद रखते हैं

पृष्ठ 42

5%

भारत में बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं

क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।

जमाकर्ता और कर्ज़दार

पृष्ठ 42

जमाकर्ता

  • जिनके पास अतिरिक्त धन है
  • जमा करते हैं, उस पर ब्याज पाते हैं, ज़रूरत पर पैसा निकालते हैं

कर्ज़दार

  • जिन्हें विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए धन चाहिए
  • जमा के बड़े भाग से बैंक इन्हें ऋण देते हैं

बैंक दोनों के बीच मध्यस्थता करते हैं।

किताब का सवाल

“अगर सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी धन राशि की माँग करने बैंक पहुँच जाएँ तो क्या होगा?”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 42

सब एक साथ आ जाएँ तो

पृष्ठ 42 का सवाल · उत्तर हमारी ओर से

  • बैंक सबको एक साथ नकद नहीं दे पाएगा
  • नकद केवल 5 प्रतिशत है; जमा का बड़ा भाग ऋण में जा चुका है

बैंक इसी भरोसे पर चलता है कि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।

बैंक की आय

पृष्ठ 42

  • बैंक जमा पर जितना ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ऋण पर लेते हैं
  • कर्ज़दारों से लिए और जमाकर्ताओं को दिए ब्याज का अंतर

यही अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है। प्रश्नावली का प्रश्न 3 यहीं से है।

4 | साख की दो विभिन्न स्थितियाँ

उधार लेना अच्छा है या बुरा? एक कारण के साथ बताइए।

ऋण क्या है

पृष्ठ 43

वादा

ऋण एक सहमति है: उधार देने वाला कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ देता है, और बदले में भविष्य में भुगतान का वादा लेता है

सलीम और स्वप्ना

पृष्ठ 43–44

सलीम, जूता निर्माता

  • त्यौहार के मौसम में 3000 जोड़ी जूतों का ऑर्डर, एक महीने में
  • चमड़ा व्यापारी से चमड़ा अभी, भुगतान बाद में
  • बड़े व्यापारी से 1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान, नकद
  • ऑर्डर समय पर पूरा, लाभ, उधार चुकता

स्वप्ना, किसान

  • 3 एकड़ में मूँगफली, साहूकार से ऋण
  • कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद
  • कर्ज़ नहीं चुका, साल भर में बड़ी रकम बन गया
  • ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा

सलीम का ऋण

“इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 43

स्वप्ना का ऋण

“इस मामले में ऋण कर्जदार को ऐसी परिस्थिति में धकेल देता है, जहाँ से बाहर निकलना काफी कष्टदायक होता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 44

दोनों की तुलना

पृष्ठ 44 की गतिविधि, प्रश्न 1 · उत्तर हमारी ओर से

सलीमस्वप्ना
ऋण की आवश्यकता क्यों3000 जोड़ी जूतों का ऑर्डर एक महीने में पूरा करने के लिए मज़दूर और कच्चा माल3 एकड़ में मूँगफली की खेती का खर्च
जोखिमऑर्डर समय पर पूरा न होता, तो लाभ न होताफसल बर्बाद होने का; अदायगी फसल की कमाई पर टिकी
परिणामलाभ हुआ, उधार चुका दियाकर्ज़ बढ़ा, ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ा

फसल का मौसम और ऋण

पृष्ठ 44

  • गाँवों में साख की मुख्य माँग फसल उगाने के लिए: बीज, खाद, कीटनाशक दवाएँ, पानी, बिजली, उपकरणों की मरम्मत
  • इन आगतों की ख़रीद और फसल की बिक्री के बीच कम से कम 3–4 महीने
  • अदायगी फसल की कमाई से होती है

फसल बर्बाद हो जाए, तो अदायगी रुक जाती है। स्वप्ना के साथ यही हुआ।

5 | ऋण की शर्तें

सलीम और स्वप्ना, दोनों ने ऋण लिया। क्या दोनों ने एक जैसी शर्तों पर लिया?

ऋण की चार शर्तें

पृष्ठ 44–45

शर्तक्या है
ब्याज दरमूल रकम के साथ कर्ज़दार जो ब्याज चुकाता है
समर्थक ऋणाधारकर्ज़दार की संपत्ति, जैसे भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु, बैंकों में जमा पूँजी; ऋण चुकने तक गारंटी
आवश्यक कागज़ातजैसे नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड
भुगतान के तरीकेजैसे मासिक किश्तें

मेघा का आवास ऋण

पृष्ठ 45

ऋण की बातमेघा के ऋण में
ऋण राशि5 लाख रुपये
ऋण–अवधि10 साल
आवश्यक कागज़ातनौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड
ब्याज दर12 प्रतिशत वार्षिक
अदायगी का स्वरूपमासिक किश्तें
समर्थक ऋणाधारनए घर के सभी कागज़

ऋणाधार क्यों, और किसके पास नहीं

पृष्ठ 45 की गतिविधि, प्रश्न 1 और 2 · उत्तर हमारी ओर से

उधारदाता क्यों माँगता है

  • ताकि ऋण लौटने की गारंटी रहे
  • ऋण न लौटे, तो वह ऋणाधार बेचकर भुगतान ले सकता है

निर्धन आबादी पर असर

  • गरीबों के पास ऋणाधार लायक संपत्ति और ज़रूरी कागज़ात नहीं होते
  • बैंक ऋण नहीं देते, तो ऊँचे ब्याज वाले अनौपचारिक स्रोत ही बचते हैं

आसान ऋण शर्तें

पृष्ठ 45 की गतिविधि, प्रश्न 3

3

निम्न ब्याज दर · आसान अदायगी की शर्तें · कम समर्थक ऋणाधार और आवश्यक कागज़ात

6 | विविध प्रकार के साख प्रबंध: एक गाँव का उदाहरण

सोनपुर गाँव में सिंचाई है और आलू की फसल लगी है। आपके हिसाब से गाँव में सबसे सस्ता ऋण किसे मिलेगा?

सोनपुर के तीन लोग

पृष्ठ 47 की गतिविधि, प्रश्न 3 · उत्तर हमारी ओर से, पृष्ठ 46–47 से

श्यामलअरुणरमा
ज़मीन1.5 एकड़7 एकड़कोई नहीं
स्रोतकृषि व्यापारी (पहले गाँव का महाजन)बैंकभूस्वामी-नियोक्ता
ब्याज दर3 प्रतिशत मासिक8.5 प्रतिशत वार्षिक5 प्रतिशत मासिक
अदायगीफसल तैयार होने परअगले तीन वर्षों में कभी भीभूस्वामी के यहाँ काम करके
और शर्तफसल उसी व्यापारी को बेचने का वादातीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता हैनया ऋण पाने के लिए उसके यहाँ काम करते रहना

मासिक या वार्षिक?

पृष्ठ 46

60%

महाजन का 5 प्रतिशत मासिक ब्याज, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक; अरुण का बैंक ऋण 8.5 प्रतिशत वार्षिक

हमारी ओर से: हर ब्याज के साथ पहले पूछिए, यह दर हर महीने की है या साल की?

व्यापारी का ऋण, और उसकी शर्त

पृष्ठ 46

  • श्यामल अब कृषि व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक पर ऋण लेता है
  • शर्त: फसल उसी व्यापारी को बेचने का वादा
  • फसल कटते समय कीमतें कम होती हैं; व्यापारी सस्ते में ख़रीदकर बाद में कीमत बढ़ने पर बेचता है

हमारी ओर से: ब्याज के साथ शर्त भी ऋण को महँगा बना सकती है।

अरुण और रमा

पृष्ठ 46–47

अरुण, 7 एकड़

  • बैंक से ऋण, 8.5 प्रतिशत वार्षिक
  • अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है
  • आलू शीत भंडार गृह में रखकर बैंक से नया ऋण लेना चाहता है

रमा, भूमिहीन

  • भूस्वामी-नियोक्ता से, 5 प्रतिशत मासिक
  • कर्ज़ उसके यहाँ काम करके चुकाती है; अभी 5,000 रुपये बाकी
  • सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता है

कृषक सहकारी समिति

पृष्ठ 47

  • पास के गाँव की समिति के 2300 किसान सदस्य
  • सदस्यों से जमा लेती है, और उसी जमा को ऋणाधार मानकर बैंक से बड़ा ऋण लेती है
  • उससे सदस्यों को ऋण: कृषि उपकरण, खेती और कृषि व्यापार, मछली पकड़ना, घर बनाना और दूसरे खर्च

ऋण लौटने पर कर्ज़ का अगला दौर शुरू होता है।

पृष्ठ 47 के सवाल

पृष्ठ 47 की गतिविधि, प्रश्न 4 से 6 · उत्तर हमारी ओर से

अरुण की स्थिति (प्रश्न 4 और 5)

  • ब्याज बहुत कम, और तीन साल तक का समय
  • फसल किसी एक व्यापारी को बेचने का वादा नहीं
  • पर सोनपुर में हर किसी को बैंक का ऋण नहीं मिलता

रमा और अरुण (प्रश्न 6)

  • (क) समय के साथ रमा का ऋण बढ़ जाएगा
  • (ख) बैंक समर्थक ऋणाधार की माँग करते हैं जो कि हर किसी के पास नहीं होती

हमारी ओर से: सबसे सस्ता ऋण उसी को मिला, जिसके पास सबसे ज़्यादा ज़मीन है। यह संयोग नहीं: बैंक समर्थक ऋणाधार माँगते हैं, जो हर किसी के पास नहीं होता।

7 | औपचारिक और अनौपचारिक साख

सोनपुर के ऋणदाताओं में से किस पर कोई बड़ा दफ़्तर नज़र रखता होगा?

औपचारिक और अनौपचारिक स्रोत

पृष्ठ 48

औपचारिक

  • बैंक और सहकारी समितियाँ
  • भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है

अनौपचारिक

  • साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त
  • देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं

भारतीय रिज़र्व बैंक क्या देखता है

पृष्ठ 48

  • बैंक जमा का न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच अपने पास रखें
  • सिर्फ़ लाभ कमाने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को नहीं, छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दें
  • समय-समय पर बताएँ कि कितना ऋण, किनको, किस ब्याज दर पर दे रहे हैं

प्रश्नावली का प्रश्न 8 यहीं से है।

अनौपचारिक ऋणदाता

“अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 48

अनुमान लगाइए: गाँवों में सौ में से कितना ऋण बैंकों और सहकारी समितियों से आता होगा?

आलेख 1: ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019 (%)

पृष्ठ 48

स्रोतप्रकारप्रतिशत
व्यावसायिक बैंकऔपचारिक51
सहकारी समितियाँ/बैंकऔपचारिक10
अन्य औपचारिक एजेंसियाँऔपचारिक5
जमींदारअनौपचारिक1
साहूकारअनौपचारिक23
रिश्तेदार एवं मित्रअनौपचारिक7
अन्य अनौपचारिक एजेंसियाँअनौपचारिक3

आलेख 1 का जोड़

पृष्ठ 48 · जोड़ हमारी ओर से

66%

औपचारिक 51 + 10 + 5 = 66 · अनौपचारिक 1 + 23 + 7 + 3 = 34

पृष्ठ 49 के पाठ में “केवल 50 प्रतिशत” छपा है, जो आलेख 1 के जोड़ (51 + 10 + 5 = 66) से मेल नहीं खाता। बच्चों से आलेख के टुकड़े ही जुड़वाइए।

अनौपचारिक ऋण महँगा क्यों

पृष्ठ 49

  • ज़्यादातर अनौपचारिक ऋणदाता कहीं अधिक ब्याज लेते हैं
  • कर्ज़दार की आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में चला जाता है, जैसे श्यामल का
  • चुकाने की रकम आय से भी बढ़ जाए, तो व्यक्ति ऋण–जाल में फँसता है, जैसे रमा
  • ऊँची लागत देखकर लोग उद्यम शुरू करने से पीछे हट सकते हैं

किताब की बात

“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 49

आलेख 2: शहरी परिवारों द्वारा लिए गए कुल ऋण में औपचारिक और अनौपचारिक हिस्सा

पृष्ठ 49

परिवारऔपचारिक (%)अनौपचारिक (%)
गरीब परिवार4654
कम संपत्ति वाले परिवार6238
समृद्ध परिवार7327
अमीर परिवार8317

किताब के दो निष्कर्ष

पृष्ठ 49–50

पहला

  • औपचारिक ऋण बढ़े
  • बैंक और सहकारी समितियाँ अपनी गतिविधियाँ, ख़ासकर गाँवों में, बढ़ाएँ

दूसरा

  • औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो
  • ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें

पृष्ठ 50 के सवाल

पृष्ठ 50 की गतिविधि, प्रश्न 2 से 4 · उत्तर हमारी ओर से

  • ऊँची दर पर आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में जाता है; उचित दर पर लोग फसल उगा सकते हैं, कारोबार और छोटे उद्योग लगा सकते हैं
  • अनौपचारिक ऋणदाताओं की देखरेख होनी चाहिए, पर यह मुश्किल है: बहुत-से ऋण निजी पहचान पर दिए जाते हैं, और लिखा-पढ़ी पूरी नहीं होती
  • अमीर परिवारों के पास ऋणाधार और नियमित आय के कागज़ होते हैं; गरीबों के पास नहीं

हमारी ओर से: इसीलिए शहरों में अमीर परिवारों के 83 प्रतिशत ऋण औपचारिक हैं, और गरीब परिवारों के 46 प्रतिशत।

8 | निर्धनों के स्वयं सहायता समूह

किताब के चित्र में रजाई सिलता मज़दूर पूछता है कि क्या बैंक उसे ऋण देगा। आप क्या कहेंगे?

गरीब बैंक तक क्यों नहीं पहुँचते

पृष्ठ 50–51

  • भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक नहीं हैं
  • जहाँ हैं, वहाँ भी ऋणाधार और कागज़ात चाहिए
  • ऋणाधार का न होना गरीबों के बैंक से ऋण न ले पाने का एक प्रमुख कारण है

साहूकार उन्हें निजी तौर पर जानते हैं और अक्सर बिना ऋणाधार भी ऋण दे देते हैं, पर ब्याज बहुत ऊँचा रखते हैं, लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करते, और कर्ज़दारों को तंग करते हैं।

समूह, बचत और ऋण

पृष्ठ 51

क्या होता है
सदस्य15–20 पड़ोसी, गरीब, विशेषकर महिलाएँ
बचतनियमित; हर व्यक्ति 25 रुपए से 100 रुपए या अधिक
आपस में ऋणउसी बचत से, साहूकार से कम ब्याज पर
बैंक का ऋणएक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद, समूह के नाम पर, बिना ऋणाधार

बैंक क्यों मान जाता है

पृष्ठ 51

समूह

ऋण लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की है; एक भी सदस्य न लौटाए, तो बाक़ी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं

बचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले, जैसे ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और लौटाने की अवधि, सदस्य ख़ुद लेते हैं।

समूह से क्या मिलता है

पृष्ठ 51

  • ऋणाधार की कमी की समस्या दूर होती है
  • समय पर, उचित ब्याज दर पर ऋण
  • ग्रामीण गरीब संगठित होते हैं, और महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनती हैं
  • नियमित बैठकों में स्वास्थ्य, पोषण, घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा का मंच

ग्रामीण बैंक, बांग्लादेश

पृष्ठ 52

81,600

2018 में ग्रामीण बैंक बांग्लादेश के 81,600 गाँवों में फैला था; ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ समाज के गरीब तबके से हैं

इसके संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस को 2006 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला।

प्रो. मोहम्मद युनूस

“अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी–छोटी गतिविधियों के ज़रिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 52

9 | सारांश, प्रश्नावली और समापन

पूरा अध्याय, नौ पंक्तियों में

हमारी ओर से

कालांशएक बात
1मुद्रा बीच की कड़ी है, इसलिए आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की ज़रूरत नहीं रहती
2करेंसी का अपना कोई इस्तेमाल नहीं; वह सरकार के प्राधिकार से चलती है, और माँग जमा भी मुद्रा है
3बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं; बड़ा भाग ऋण में, और ब्याज का अंतर उनकी आय
4ऋण सलीम की कमाई बढ़ाता है, पर स्वप्ना को कर्ज–ज़ाल में धकेल देता है
5हर ऋण की चार शर्तें: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात, भुगतान के तरीके
6सोनपुर में सस्ता बैंक ऋण उसी को मिला, जिसके पास ऋणाधार लायक ज़मीन थी
7आलेख 1 में ग्रामीण ऋण का 66 प्रतिशत औपचारिक, 34 प्रतिशत अनौपचारिक; सस्ता औपचारिक ऋण ज़्यादा अमीरों तक
8स्वयं सहायता समूह बचत के सहारे बिना ऋणाधार ऋण तक पहुँचाते हैं
9औपचारिक ऋण बढ़े, और सबको मिले

अब किताब की प्रश्नावली: प्रश्न 12 के रिक्त स्थान और प्रश्न 13 के विकल्प, जोड़ियों में।

रिक्त स्थान और विकल्प: सही उत्तर

प्रश्नावली, प्रश्न 12 और 13 · कारण हमारी ओर से, किताब के पृष्ठ से

भागसही उत्तरकिताब से कारण
12 (क)गरीबशहरों के गरीब परिवारों के 54 प्रतिशत ऋण अनौपचारिक (आलेख 2, पृष्ठ 49)
12 (ख)ऊँचीऊँची लागत से आय का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में (पृष्ठ 49)
12 (ग)भारतीय रिज़र्व बैंककेंद्रीय सरकार की तरफ़ से नोट जारी करता है (पृष्ठ 40)
12 (घ)जमाजमा पर दिए ब्याज से ज़्यादा ब्याज ऋण पर (पृष्ठ 42)
12 (ङ)समर्थक ऋणाधारऋण चुकने तक कर्ज़दार की संपत्ति गारंटी (पृष्ठ 44)
13 (क)सदस्यों द्वाराबचत और ऋण के ज़्यादातर फ़ैसले सदस्य ख़ुद लेते हैं (पृष्ठ 51)
13 (ख)नियोक्तामालिक (नियोक्ता) अनौपचारिक स्रोत है; बैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक (पृष्ठ 48)

और अब पहले दिन की पर्चियाँ

पहले कालांश की पर्चियाँ, अध्याय के बाद

?

हमारी ओर से: हर पर्ची का स्रोत औपचारिक है या अनौपचारिक? और उसकी चारों शर्तें, यानी ब्याज, ऋणाधार, कागज़ात और भुगतान, कैसी होंगी?

जहाँ कोई शर्त पता न हो, वहाँ लिखिए: पता करना होगा। प्रश्न 10, मानव वाला, यही करवाता है।

अध्याय का बड़ा विचार

“ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 44