अध्याय 5उपभोक्ता अधिकार

पाठ योजना20 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 5

कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 75 से 89 · कालांश — 10, हर एक 40 मिनट

इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले “एक नज़र में” वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, “तैयारी” वाली तालिका में समझाए गए हैं।

अध्याय का बड़ा विचार — अध्याय इस बात से शुरू होता है कि बाज़ार में हम उत्पादक भी हैं और उपभोक्ता भी, और खरीदते समय अकेला आदमी अक्सर कमज़ोर पड़ता है: “बाज़ार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमजोर स्थिति में पाता है।” (पृष्ठ 76)। इसी कमज़ोरी से 1960 के दशक में उपभोक्ता आंदोलन उभरा, और उसके दबाव से 1986 में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, यानी कोपरा, बना। फिर अध्याय रेजी, अमृता, अबिरामी, प्रकाश और अरिता के मामलों से एक-एक अधिकार दिखाता है: सुरक्षा, सूचना, चयन, क्षतिपूर्ति निवारण और प्रतिनिधित्व; और ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के आयोग, जहाँ उपभोक्ता न्याय माँग सकता है। अंत में अध्याय ईमानदारी से बताता है कि प्रगति के साथ कमियाँ भी हैं, और आंदोलन उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही आगे बढ़ेगा।

हमारी ओर से पूरे अध्याय के लिए एक सवाल: बाज़ार में ठगे जाने पर एक आम आदमी क्या कर सकता है? पहले दिन बच्चे पर्ची पर लिखेंगे कि अगर दुकान से लाया पैकेट खराब निकले और दुकानदार कहे “कहीं और जाइए”, तो वे क्या करेंगे; कालांश 10 में वही पर्चियाँ अध्याय के मामलों, अधिकारों और आयोगों पर परखी जाएँगी।


एक नज़र में — दस कालांश और उनकी सामग्री

पूरा अध्याय एक कहानी की तरह चलता है। हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।

दस कालांश, एक कहानी

कालांश 1बाज़ार में उपभोक्ताअकेला उपभोक्ता कमज़ोर, इसलिए नियम (पृष्ठ 75–77)
कालांश 2उपभोक्ता आंदोलन1960 के दशक से 1986 के कोपरा तक (पृष्ठ 77–78)
कालांश 3सुरक्षा सबका अधिकार हैरेजी का मामला (पृष्ठ 79)
कालांश 4वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारीपैकेट, अधिकतम खुदरा मूल्य, अमृता (पृष्ठ 80–81)
कालांश 5चयन के अधिकार का उल्लंघनअबिरामी का मामला (पृष्ठ 81)
कालांश 6न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिएप्रकाश का मनीऑर्डर (पृष्ठ 82–83)
कालांश 7प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्रपरिषद्, तीन आयोग, अरिता (पृष्ठ 84)
कालांश 8जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातेंगुणवत्ता के चिह्न, छह अधिकार (पृष्ठ 84–86)
कालांश 9उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध मेंप्रगति, कमियाँ, 2019 का संशोधन (पृष्ठ 86–87)
कालांश 10प्रश्नावली, परियोजना और समापनप्रश्न 12 और 13, पृष्ठ 89 की प्रश्नावली, और पहले दिन की पर्चियाँ फिर से
हर कालांश के पृष्ठ, स्लाइड और बाक़ी सामग्री नीचे की तालिका में।

सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय

कालांश और टॉपिकपृष्ठस्लाइडइंटरैक्टिवप्रश्न बैंकफ़्लैशकार्ड
1 · बाज़ार में उपभोक्ता75–77शुरू की तीन स्लाइड, फिर “बाज़ार में उपभोक्ता”शुरुआत, 1. बाज़ार में उपभोक्ताघ1 · ङ1 · च21–9
2 · उपभोक्ता आंदोलन77–78“उपभोक्ता आंदोलन”2. उपभोक्ता आंदोलनक1–4 · ख1–3 · ग5 · घ2 · ङ2 · च310–18
3 · सुरक्षा सबका अधिकार है79“सुरक्षा सबका अधिकार है”3. सुरक्षा का अधिकारक5, क6 · ख4 · घ3 · ङ319–24
4 · वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी80–81“वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी”4. सूचना का अधिकारक7, क8 · ख5 · घ4, घ525–32
5 · चयन के अधिकार का उल्लंघन81“चयन के अधिकार का उल्लंघन”5. चयन का अधिकारक9, क10 · ख6 · घ6 · ङ4 · छ133–38
6 · न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए82–83“न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए”6. न्याय कहाँ मिलेक11–13 · ग3, ग6 · घ7 · ङ5 · छ539–44
7 · प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र84“प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र”7. तीन स्तर के आयोगक14, क15 · ख7 · घ8 · ङ6 · छ245–52
8 · जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें84–86“जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें”8. जागरूक उपभोक्ताक16, क19 · ख8, ख10 · घ9, घ10 · ङ8 · च1, च653–63
9 · उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में86–87“उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में”9. आंदोलन आगे कैसे बढ़ेक17, क18, क20 · ख9 · ग1, ग2, ग4 · ङ7 · च4, च5 · छ3, छ464–72
10 · प्रश्नावली, परियोजना और समापन87–89“प्रश्नावली, परियोजना और समापन”सार, अभ्यास, परियोजनातीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक“अंतिम पाँच मिनट” वाली सूची, फिर पूरा डेक

प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खण्ड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, और छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं।

पढ़ाने से पहले

तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें

हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।

हिस्सा या औज़ारयह क्या हैकैसे तैयार करें
किताबNCERT की आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10, अध्याय 5। कार्ड में आज के पृष्ठ लिखे हैं।एक दिन पहले वे पृष्ठ ख़ुद पढ़िए। कार्ड में तिरछे अक्षरों वाली पंक्तियाँ किताब के शब्द हैं; कक्षा में यही पढ़वानी हैं।
स्लाइडइस अध्याय की प्रस्तुति का पाठ: हर स्लाइड पर क्या दिखाना और बोलना है। हर कालांश की स्लाइडें कौन-सी हैं, यह “एक नज़र में” वाली तालिका के “स्लाइड” खाने में लिखा है।प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड हो तो स्लाइड बनाने की ज़रूरत नहीं: स्लाइड शो खोलिए और पूरे पर्दे पर चलाइए। इंटरनेट का भरोसा न हो तो उसी पन्ने से फ़ाइल पहले ही डाउनलोड कर लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा; कार्ड के चरण बोर्ड और किताब से हैं।
इंटरैक्टिव अध्यायवेबसाइट पर इस अध्याय का पन्ना: छँटाई वाले खेल, छोटे हिसाब और छोटे सवाल। लॉगिन नहीं चाहिए। कार्ड का लिंक सीधे आज वाले हिस्से पर खुलता है।कक्षा से पहले लिंक खोलकर देख लीजिए; कहाँ रुकना है, यह कार्ड में लिखा है। पर्दा न हो तो बच्चे इसे घर पर दोहराने के लिए खोल सकते हैं।
लक्ष्यकालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या बता पाए।पढ़ाने से पहले एक बार पढ़िए। निकास-पर्ची का सवाल इसी लक्ष्य को जाँचता है।
साथ ले जाइएकक्षा में ले जाने वाली चीज़ें, जैसे चार्ट पेपर, पर्चियाँ, खाली पैकेट।एक दिन पहले जुटा लीजिए।
40 मिनटमिनट-दर-मिनट चरण।समय अंदाज़े से है। कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है।
चित्रडिब्बों और तीरों वाला चित्र, जो किसी उलझी बात को एक नज़र में दिखाता है। लहरदार तीर वह कड़ी है जो हमारी ओर से जोड़ी गई है।पहले कागज़ पर एक बार बनाकर देखिए। बोर्ड पर ऊपर से नीचे बनाइए: एक डिब्बा, फिर तीर पर लिखा शब्द बोलिए, फिर अगला डिब्बा। हर चित्र के साथ डाउनलोड का बटन है; उससे चित्र छाप सकते हैं या पर्दे पर दिखा सकते हैं।
बोर्ड-कार्यकालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना हो। बच्चे इसे कॉपी में उतारते हैं।कार्ड का चित्र देखकर बोर्ड पर जगह का अंदाज़ा पहले से कर लीजिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात अगले दिनों में काम आनी है, वह कॉपी में या चार्ट पर रहे।
यहाँ बच्चे अटकेंगेआम ग़लतफ़हमियाँ, और कमज़ोर व तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव।पढ़ाने से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लतफ़हमी आते ही पहचान सकें।
निकास-पर्चीकालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी जवाब कागज़ की छोटी पर्ची पर लिखता है और कक्षा से जाते समय आपको दे देता है। इससे उसी दिन पता चल जाता है कि आज की बात कितने बच्चों तक पहुँची।कॉपी का आधा पन्ना काफ़ी है; सवाल बोर्ड पर लिख दीजिए। पर्चियाँ उसी दिन देखिए। जो बात ज़्यादा बच्चों ने ग़लत लिखी हो, उसे अगले कालांश की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए। पर्ची पर अंक मत दीजिए; यह जाँच आपके अपने लिए है।
प्रश्न बैंकवेबसाइट पर इस अध्याय के प्रश्न, उत्तर के साथ, सात खंडों में: क वस्तुनिष्ठ, ख रिक्त स्थान, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित। “क1–4” का मतलब है खंड क के प्रश्न 1 से 4।गृहकार्य के प्रश्न-संख्याएँ बोर्ड पर लिखिए। जिनके पास फ़ोन नहीं है, उनके लिए वे प्रश्न बोर्ड पर लिख दीजिए या छपवा लीजिए।
फ़्लैशकार्डदोहराने के लिए छोटे सवाल-जवाब। पन्ने पर हर कार्ड की संख्या (# वाला खाना) लिखी है।बच्चों को कार्ड-संख्याएँ बता दीजिए। पन्ने पर “आता है / नहीं आता” वाला अभ्यास भी है, जो उसी फ़ोन या कंप्यूटर पर याद रखता है कि कौन-सा कार्ड कब दोहराना है।

हर कालांश से पहले:

  1. आज के कार्ड में लिखे किताब के पृष्ठ पढ़िए।
  2. मिनट-दर-मिनट चरण और चित्र पढ़िए; चित्र एक बार कागज़ पर बनाइए।
  3. “साथ ले जाइए” वाली चीज़ें जुटाइए, और स्लाइड या इंटरैक्टिव अध्याय इस्तेमाल करना है तो लिंक खोलकर जाँच लीजिए।
  4. पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए; जो बात कमज़ोर रही, उसे आज की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए।

पढ़ाने का क्रम: पहले मामला, फिर अधिकार का नाम

यह अध्याय पाँच मामलों पर टिका है: रेजी (पृष्ठ 79), अमृता (पृष्ठ 80), अबिरामी (पृष्ठ 81), प्रकाश (पृष्ठ 82–83) और अरिता (पृष्ठ 84)। हर मामले में बच्चे पहले ख़ुद देखें कि क्या गलत हुआ, वह व्यक्ति कहाँ गया, और उसे क्या मिला। “सुरक्षा का अधिकार”, “चयन का अधिकार” जैसे नाम उसके बाद आएँ।

इस क्रम को मत तोड़िए। अध्याय का सबसे अच्छा पल कालांश 8 में आता है: पृष्ठ 86 पर किताब छह अधिकारों की सूची देती है और छह नए मामले देकर पूछती है कि कौन-सा मामला किस अधिकार का है। अगर कालांश 3 से ही छह अधिकारों की पूरी सूची बोर्ड पर लिख दी, तो यह छँटाई रटी हुई सूची से मिलान भर रह जाएगी। हर दिन चार्ट पर बस एक अधिकार जुड़े, उसी दिन के मामले के साथ; पूरी सूची कालांश 8 में पृष्ठ 86 से ही खुले। इसी तरह कालांश 7 में आयोगों की सीमाएँ बताने से पहले बच्चे अंदाज़ा लगाएँ कि अबिरामी का मामला, जिसमें 28,000 रुपये लौटाने का आदेश मिला, किस आयोग से शुरू हुआ होगा।

सामग्री — यह जुटा लीजिए

#क्याकिस कालांश में
1हर विद्यार्थी के लिए एक छोटी पर्ची, और पर्चियाँ रखने के लिए एक लिफ़ाफ़ा1 (लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा)
2एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन: “अधिकार-चार्ट”, तीन खाने: अधिकार, किताब का मामला, क्या हुआ; कक्षा की दीवार पर टाँगने के लिए3 (कालांश 10 तक टँगा रहे)
3घर से लाए खाली पैकेट और डिब्बियाँ: बिस्कुट, मसाले, दवा की खाली डिब्बी, कपड़े का लेबल; हर समूह के पास दो-तीन4 (कालांश 3 के अंत में बच्चों से कह दीजिए)
4दुकान वाले छोटे नाटक के लिए दो पर्चियाँ: “दुकानदार” और “ग्राहक”5
5विज्ञापनों वाली छह पर्चियाँ, हर एक पर पृष्ठ 82 का एक प्रस्ताव6
6अरिता के आठ कदम, किताब के अक्षरों के साथ, अलग-अलग पर्चियों पर; हर समूह के लिए एक सेट, फेंटकर7
7पृष्ठ 86 के छह मामलों की छह पर्चियाँ: लता, जॉन, मित्र की दवा, इकबाल, केबल ऑपरेटर, खराब कैमरा8

कक्षा-व्यवस्था

  • बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह।
  • “अधिकार-चार्ट”। कालांश 3 में चार्ट पेपर पर तीन खाने बनाइए और कक्षा की दीवार पर टाँगिए: अधिकार | किताब का मामला | क्या हुआ। पहली पंक्ति रेजी से आएगी (सुरक्षा)। फिर कालांश 4 में अमृता (सूचना), कालांश 5 में अबिरामी (चयन), कालांश 6 में प्रकाश (क्षतिपूर्ति निवारण), कालांश 7 में अरिता और तीन आयोग (प्रतिनिधित्व), और कालांश 8 में छठा अधिकार (उपभोक्ता शिक्षा) जुड़ेगा। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात कई दिन दिखनी है, वह बोर्ड पर नहीं, चार्ट पर रहे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो उसे मोड़कर पर्चियों के लिफ़ाफ़े के साथ रखिए और ज़रूरत के दिन खोलिए। चार्ट का यह रूप हमारी ओर से है।
  • कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर “मामलों वाली तालिका” बनाए, चार कॉलम: कौन | क्या गलत हुआ | कहाँ गया | क्या मिला। पंक्तियाँ कालांश 3 से 7 में भरेंगी: रेजी, अमृता, अबिरामी, प्रकाश, अरिता। यह तालिका हमारी ओर से है।
  • बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का “बोर्ड-कार्य” उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।

अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1बता पाएगा कि बाज़ार में अकेला उपभोक्ता कमज़ोर क्यों पड़ता है, और किताब के उदाहरणों से शोषण के तरीके गिना पाएगा1निकास-पर्ची 1, प्रश्न 1 और 4 का गृहकार्य
2उपभोक्ता आंदोलन क्यों उभरा और कोपरा तक कैसे पहुँचा, यह क्रम से बता पाएगा2पृष्ठ 78 की गतिविधि, प्रश्न 2 और 5 का गृहकार्य
3सुरक्षा का अधिकार रेजी के मामले और प्रेशर कूकर के उदाहरण से समझा पाएगा3मामलों वाली तालिका, पृष्ठ 79 की गतिविधि
4पैकेट की जानकारी, अधिकतम खुदरा मूल्य और सूचना पाने के अधिकार कानून का फ़र्क बता पाएगा4पैकेट की जाँच, निकास-पर्ची 4
5चयन का अधिकार रोज़ के उदाहरणों और अबिरामी के मामले से समझा पाएगा5दुकान वाला नाटक, प्रश्न बैंक का छ1
6क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार और शिकायत के रास्ते प्रकाश की कहानी से बता पाएगा, और लुभावने प्रस्ताव परख पाएगा6विज्ञापनों वाली गतिविधि, निकास-पर्ची 6
7उपभोक्ता संरक्षण परिषद् और आयोग का फ़र्क, और तीन स्तरों के आयोग किताब की सीमाओं के साथ बता पाएगा7अरिता के कदमों की छँटाई, प्रश्न बैंक का छ2
8गुणवत्ता के चिह्न, अनिवार्य प्रमाण और कोपरा के छह अधिकार पहचान पाएगा8पृष्ठ 86 की छँटाई, प्रश्न 3, 6, 7 और 9 का गृहकार्य
9आंदोलन की प्रगति और कमियाँ किताब के आँकड़ों के साथ बता पाएगा9प्रगति और कमियों की तालिका, प्रश्न 11 का गृहकार्य
10पहले दिन की पर्ची वाले जवाब को अध्याय के रास्तों पर परख पाएगा, और पृष्ठ 89 की प्रश्नावली से अपनी जागरूकता जाँच पाएगा10पर्चियों वाली चर्चा, प्रश्न 12 और 13

कालांश-दर-कालांश

कालांश 1 — बाज़ार में उपभोक्ता

किताब — पृष्ठ 75–77 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड और “बाज़ार में उपभोक्ता” वाला भाग · इंटरैक्टिव — शुरुआत, 1. बाज़ार में उपभोक्ता

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि बाज़ार में अकेला उपभोक्ता कमज़ोर क्यों पड़ता है, और किताब के उदाहरणों से शोषण के तीन-चार तरीके गिना पाए।

साथ ले जाइए — हर विद्यार्थी के लिए एक पर्ची और एक लिफ़ाफ़ा।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पहले दिन की पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: मान लीजिए आप दुकान से एक पैकेट लाए और घर आकर पता चला कि सामान खराब है, या कम तौला गया है। आप दुकान लौटे, तो दुकानदार ने कहा, “कहीं और जाइए।” अब आप क्या करेंगे? नाम नहीं लिखना है। पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में रख दीजिए; यह लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा। यह सवाल हमारी ओर से है।
  2. 5–12 मिनट · हम उत्पादक भी, उपभोक्ता भी। पृष्ठ 76 पढ़वाइए और बोर्ड पर लिखिए: “बाज़ार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में होती है।” पूछिए: आज सुबह से आपने क्या-क्या खरीदा या इस्तेमाल किया, जिसके लिए किसी को पैसे दिए गए? तीन-चार जवाब बोर्ड के कोने में लिखिए। बताइए कि जब हम ज़रूरत की वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदते हैं, तब हम उपभोक्ता होते हैं।
  3. 12–22 मिनट · नियम क्यों चाहिए। पृष्ठ 76 का अगला हिस्सा पढ़वाइए: पिछले अध्यायों में साहूकारों और असंगठित क्षेत्र के मज़दूरों के लिए नियमों की बात आई थी; बाज़ार में भी उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए नियम चाहिए, क्योंकि अकेला उपभोक्ता कमज़ोर स्थिति में होता है। फिर विक्रेता का आम जवाब पढ़वाइए: “आपने जो खरीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” पूछिए: पहले दिन की पर्ची वाला दुकानदार भी यही कह रहा था; ऐसे में ग्राहक अकेला क्यों पड़ जाता है?
  4. 22–30 मिनट · शोषण के तरीके। पृष्ठ 76–77 से तीन तरीके बोर्ड पर लिखवाइए: उचित वज़न से कम तौलना, पहले न बताए गए शुल्क जोड़ देना, मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना। फिर बड़ी कंपनियों वाले दोनों उदाहरण पढ़वाइए: शिशुओं के दूध का पाउडर, जिसे एक कंपनी ने कई वर्षों तक माँ के दूध से बेहतर बताकर बेचा और लंबे संघर्ष के बाद मानना पड़ा कि उसके दावे झूठे थे; और सिगरेट, जिसके लिए कंपनियों से यह मनवाने में न्यायालय में लंबी लड़ाई लगी कि उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है।
  5. 30–36 मिनट · कमज़ोर क्यों। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। किताब का कारण बोलिए: जब उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली हों, और उपभोक्ता कम मात्रा में खरीदते हों और बिखरे हुए हों, तब बाज़ार उचित तरीके से काम नहीं करता। फिर पृष्ठ 77 की “आओ–इन पर विचार करें” का प्रश्न 2 समूहों में: अपने अनुभव का कोई ‘धोखा’।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) बाज़ार में अकेला उपभोक्ता कमज़ोर क्यों पड़ता है? (2) दुकानदार या व्यापारी शोषण कैसे करते हैं, दो तरीके।

दो भूमिकाएँ, एक कमज़ोरी (चरण 5)

दो भूमिकाएँ, एक कमज़ोरी

उत्पादकबाज़ार में हमारी एक भूमिका
उपभोक्ताज़रूरत की वस्तुएँ या सेवाएँ खरीदते समय
अकेला उपभोक्ताथोड़ा-थोड़ा खरीदता है, बिखरा हुआ हैसामने थोड़े और शक्तिशाली उत्पादक
नियम एवं विनियमउपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए
NCERT, पृष्ठ 76

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

किसकी ओर सेशोषण का तरीकाकिताब का उदाहरण
दुकानदारउचित वज़न से कम तौलना
व्यापारीपहले न बताए गए शुल्क जोड़ देना
विक्रेतामिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना
बड़ी कंपनियाँमीडिया और दूसरे स्रोतों से गलत सूचनाशिशुओं के दूध का पाउडर; सिगरेट

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “उपभोक्ता मतलब सिर्फ़ सामान खरीदने वाला।” सेवा लेने वाला भी उपभोक्ता है। अध्याय के आगे के मामलों में अस्पताल (रेजी), कोचिंग (अबिरामी) और डाकघर का मनीऑर्डर (प्रकाश) सेवाएँ ही हैं; यह बात कालांश 3 से अपने-आप सामने आएगी।
  • “धोखा सिर्फ़ छोटे दुकानदार करते हैं।” किताब के दोनों बड़े उदाहरण, दूध का पाउडर और सिगरेट, बड़ी कंपनियों के हैं।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “शुरुआत” और “1. बाज़ार में उपभोक्ता” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “2. उपभोक्ता आंदोलन” शुरू होने से पहले रुकिए; वह कालांश 2 का है।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: खरीदने वाला अकेला होता है और बेचने वाला ताक़तवर, इसलिए उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए नियम चाहिए।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पृष्ठ 76 के कार्टून में लड़के को लगता है कि उसका सामान जानबूझकर ऐसा बनाया गया कि कुछ महीनों में बेकार हो जाए। यह किस तरह का शोषण है? (यहाँ गलत सूचना या कम तौल नहीं; सामान ही ऐसा बना है कि ग्राहक को जल्दी नया खरीदना पड़े, यानी दोषपूर्ण वस्तु।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) उपभोक्ता कम मात्रा में खरीदते हैं और बिखरे हुए हैं, जबकि उत्पादक थोड़े और शक्तिशाली हैं; शिकायत पर विक्रेता ज़िम्मेदारी खरीदने वाले पर डाल देता है। (2) कम तौलना, बिना बताए शुल्क जोड़ना, मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तु बेचना; इनमें से कोई दो। जिन बच्चों ने (1) में सिर्फ़ “दुकानदार बेईमान है” लिखा हो, उनके लिए कालांश 2 की शुरुआत में अकेले और बिखरे हुए उपभोक्ता वाली बात एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: किताब का प्रश्न 1 और प्रश्न 4; प्रश्न बैंक के घ1 और ङ1; तेज़ विद्यार्थी च2 भी। पृष्ठ 77 की “आओ–इन पर विचार करें” के प्रश्न 1 और 3 भी लिखकर लाएँ।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 77, प्रश्न 1 (शोषण के तरीके): कम तौलना; पहले न बताए गए शुल्क जोड़ना; मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना; बड़ी कंपनियों का मीडिया से गलत सूचना देना और झूठे दावे करना, जैसे शिशुओं का दूध पाउडर; और सामान ऐसा बनाना कि जल्दी बेकार हो जाए (पृष्ठ 76 का कार्टून)।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 77, प्रश्न 2 (अपना अनुभव): हर बच्चे का अनुभव अलग होगा। किताब से मिलते-जुलते उदाहरण: पैकेट पर छपे मूल्य से अधिक लेना, सब्ज़ी वाले का बाट की जगह पत्थर से तौलना, दंतमंजन के साथ ज़बरदस्ती ब्रश बेचना। चर्चा में यह भी पूछिए कि रसीद थी या नहीं, और शिकायत की गई या नहीं।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 77, प्रश्न 3 (सरकार की भूमिका): उपभोक्ता की सुरक्षा के लिए नियम और विनियम बनाना; कोपरा जैसा कानून; शिकायत के लिए तीन स्तर के आयोग; उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग और विज्ञापनों से जागरूकता; कुछ वस्तुओं के लिए प्रमाण अनिवार्य करना; और नियमों का ठीक पर्यवेक्षण, क्योंकि उसकी कमी से निम्न गुणवत्ता के उत्पाद बिकते हैं। इनमें से ज़्यादातर बातें आगे के कालांशों में आएँगी; आज बच्चे जितना सोच पाएँ, उतना काफ़ी है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–9।

कालांश 2 — उपभोक्ता आंदोलन

किताब — पृष्ठ 77–78 · स्लाइड — “उपभोक्ता आंदोलन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 2. उपभोक्ता आंदोलन

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि भारत में उपभोक्ता आंदोलन किन कारणों से उभरा, उसने क्या-क्या किया, और 1986 का कोपरा उसी के दबाव का नतीजा कैसे था।

साथ ले जाइए — कुछ नहीं; किताब और बोर्ड काफ़ी हैं।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 1 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–12 मिनट · पहले क्या होता था। पृष्ठ 77 पढ़वाइए: “बाज़ार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।” असंतुष्ट उपभोक्ता बस उस ब्रांड या दुकान से खरीदना बंद कर देता था, और माना जाता था कि सावधानी बरतना खरीदने वाले की ज़िम्मेदारी है। पूछिए: कल की पर्ची वाला ग्राहक दुकान बदल ले, तो क्या दुकानदार की आदत बदलेगी?
  3. 12–20 मिनट · 1960 का दशक। आंदोलन का कारण किताब के शब्दों में पढ़वाइए: “अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाजारी, खाद्य पदार्थों एवं खाद्य तेल में मिलावट की वजह से 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उपभोक्ता आंदोलन का उदय हुआ।” बताइए कि आंदोलन का जन्म एक ‘सामाजिक बल’ के रूप में हुआ। “जमाखोरी” और “कालाबाजारी” का अर्थ बच्चों से ही निकलवाइए।
  4. 20–28 मिनट · आंदोलन ने क्या किया। 1970 के दशक तक उपभोक्ता संस्थाएँ बड़े स्तर पर उपभोक्ता अधिकार पर लेख लिखने और प्रदर्शनी लगाने लगीं, और सड़क यात्री परिवहन और राशन दुकानों पर नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल बने। आंदोलन ने कंपनियों और सरकार, दोनों पर दबाव डाला, और 1986 में भारत सरकार ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम बनाया, जो कोपरा के नाम से प्रसिद्ध है; इसका संशोधन 2019 में हुआ। फिर पृष्ठ 78 का “उपभोक्ता इंटरनेशनल” वाला बॉक्स: 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के लिए दिशा–निर्देश अपनाए, और आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाओं की संरक्षक संस्था है। बोर्ड-कार्य की तालिका यहीं भरवाइए।
  5. 28–36 मिनट · पृष्ठ 78 की गतिविधि। नीचे का चित्र बनाइए, फिर आधे समूह प्रश्न 1 (उपभोक्ता दल कौन-से उपाय अपना सकते हैं) और आधे प्रश्न 2 (नियम होने पर भी पालन क्यों नहीं होता) पर दो-दो बातें लिखें और बोलें।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) 1960 के दशक में उपभोक्ता आंदोलन किन कारणों से उभरा? (2) उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम किस वर्ष बना, और उसका संशोधन कब हुआ?

सावधानी किसकी ज़िम्मेदारी (चरण 5)

सावधानी किसकी ज़िम्मेदारी

पहलेसावधानी बरतना खरीदने वाले की ज़िम्मेदारीअसंतुष्ट उपभोक्ता बस वह ब्रांड या दुकान छोड़ देता
उपभोक्ता आंदोलनएक 'सामाजिक बल'लेख, प्रदर्शनी, उपभोक्ता दल; कंपनियों और सरकार पर दबाव
बाद मेंगुणवत्ता की ज़िम्मेदारी विक्रेताओं पर भी1986 में कोपरा
NCERT, पृष्ठ 77–78

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

कबक्या हुआपृष्ठ
1960 के दशकखाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाज़ारी, मिलावट के कारण आंदोलन का व्यवस्थित रूप में उदय77
1970 के दशक तकलेख और प्रदर्शनी; सड़क यात्री परिवहन और राशन दुकानों पर नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल77
1985संयुक्त राष्ट्र के उपभोक्ता सुरक्षा के दिशा–निर्देश78
1986उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम (कोपरा)78
2019कोपरा का संशोधन78

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “उपभोक्ता आंदोलन 1986 में शुरू हुआ।” आंदोलन 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उभरा; 1986 में उसके दबाव से कानून बना। तालिका में दोनों अलग पंक्तियाँ हैं, इसलिए यह फ़र्क दिखाते रहिए।
  • “उपभोक्ता इंटरनेशनल भारत की संस्था है।” यह 100 से अधिक देशों की 200 संस्थाओं की संरक्षक संस्था है; संयुक्त राष्ट्र के 1985 के दिशा–निर्देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन का आधार बने।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “2. उपभोक्ता आंदोलन” वाला हिस्सा चलाइए, और “3. सुरक्षा का अधिकार” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: आंदोलन 1960 के दशक में उभरा, और उसके दबाव से 1986 में कोपरा बना।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर हर असंतुष्ट ग्राहक सिर्फ़ दुकान बदलता रहे, तो कम तौलने वाले दुकानदार का क्या बिगड़ेगा? आंदोलन ने इससे अलग क्या किया? (अकेले ग्राहक के जाने से दुकानदार को ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता, वह दूसरे ग्राहकों से वही करता रहता है; आंदोलन ने लोगों को इकट्ठा किया और कंपनियों और सरकार पर दबाव डाला।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाज़ारी, और खाद्य पदार्थों व खाद्य तेल में मिलावट। (2) 1986 में; संशोधन 2019 में। जिन बच्चों ने आंदोलन का साल 1986 लिखा हो, उनके लिए कालांश 3 की शुरुआत में बोर्ड-कार्य वाली तालिका एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: किताब का प्रश्न 2 और प्रश्न 5; प्रश्न बैंक के क1–4, ख1–3, ग5 और घ2; तेज़ विद्यार्थी ङ2 और च3 भी। कल से पहले हर समूह घर से दो-तीन खाली पैकेट या डिब्बियाँ ढूँढकर रखे (कालांश 4 में काम आएँगे)।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 78, प्रश्न 1 (उपभोक्ता दलों के उपाय): उपभोक्ता अधिकार पर लेख लिखना और प्रदर्शनी लगाना; सड़क यात्री परिवहन और राशन दुकानों पर नज़र रखना; कंपनियों और सरकार पर दबाव डालना; और, जैसा कालांश 7 में आएगा, लोगों को मुकदमा दर्ज करने का रास्ता बताना, आयोग में उनका प्रतिनिधित्व करना और जागरूकता फैलाना।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 78, प्रश्न 2 (नियम हैं, पालन क्यों नहीं): किताब के कारण: नियमों का पर्यवेक्षण ठीक से नहीं होता और उपभोक्ता आंदोलन बहुत मज़बूत नहीं है (पृष्ठ 79); शिकायत की प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और लंबी है, रसीद नहीं मिलती, और ज़्यादातर खरीद छोटी दुकानों से होती है (पृष्ठ 86); उपभोक्ता ज्ञान धीरे फैल रहा है (पृष्ठ 87)। आज पहला कारण काफ़ी है; बाक़ी कालांश 9 में आएँगे।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 10–18।

कालांश 3 — सुरक्षा सबका अधिकार है

किताब — पृष्ठ 79 · स्लाइड — “सुरक्षा सबका अधिकार है” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 3. सुरक्षा का अधिकार

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी रेजी के मामले से बता पाए कि सुरक्षा का अधिकार क्या है, मामला किस आयोग से किस आयोग तक गया, और नियम होने पर भी खराब उत्पाद क्यों बिकते हैं।

साथ ले जाइए — चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन (“अधिकार-चार्ट” आज शुरू होगा)।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 2 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–15 मिनट · रेजी का कष्ट। पृष्ठ 79 का बॉक्स धीरे-धीरे पढ़वाइए: कक्षा 9 का स्वस्थ लड़का रेजी मेथ्यू, केरल के एक निजी चिकित्सालय में टॉन्सिल निकलवाने भर्ती हुआ; ई.एन.टी. सर्जन ने सामान्य बेहोशी की दवा देकर ऑपरेशन किया, अनुचित बेहोशी से उसमें दिमागी असामान्यता के लक्षण आ गए और वह जीवन भर के लिए अपंग हो गया। बच्चे कॉपी के पहले पन्ने की “मामलों वाली तालिका” में पहली पंक्ति भरें: कौन, क्या गलत हुआ।
  3. 15–22 मिनट · मामला कहाँ गया। आगे पढ़वाइए: पिता ने सेवा में चिकित्सा की गलती और लापरवाही के लिए 5,00,000 रुपये के मुआवज़े का दावा किया; राज्य आयोग ने यह कहकर मामला खारिज किया कि सबूत पर्याप्त नहीं है; पिता ने दिल्ली के राष्ट्रीय आयोग में अपील की, जिसने अस्पताल को चिकित्सा में लापरवाही का दोषी पाया और हर्जाना देने का निर्देश दिया। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए और तालिका के बाक़ी दो खाने भरवाइए।
  4. 22–28 मिनट · अधिकार का नाम। अब शीर्षक पढ़वाइए, “सुरक्षा सबका अधिकार है”: कई वस्तुएँ और सेवाएँ जीवन और संपत्ति के लिए खतरनाक हो सकती हैं; उपभोक्ता को इनसे सुरक्षित रहने का अधिकार है, और उत्पादकों के लिए सुरक्षा नियम मानना ज़रूरी है। किताब का उदाहरण: प्रेशर कूकर का सेफ्टी वॉल्व खराब हो तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है। फिर पूछिए: नियम हैं, फिर भी खराब सामान क्यों बिकता है? किताब का उत्तर पढ़वाइए: “इन नियमों का पर्यवेक्षण उचित रूप से नहीं हो रहा है और उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है।”
  5. 28–36 मिनट · अधिकार-चार्ट और पृष्ठ 79 की गतिविधि। चार्ट पेपर पर तीन खाने बनाइए और पहली पंक्ति लिखिए: सुरक्षा | रेजी | लापरवाही का दोषी, हर्जाने का निर्देश। फिर पृष्ठ 79 की “आओ–इन पर विचार करें” का प्रश्न 1 समूहों में बाँटिए; हर समूह एक-दो चीज़ें ले, किताब के अक्षरों के साथ।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) सुरक्षा के अधिकार का किताब वाला एक रोज़ का उदाहरण। (2) राज्य आयोग ने रेजी का मामला क्यों खारिज किया, और फिर क्या हुआ?

रेजी का मामला किस रास्ते गया (चरण 3)

रेजी का मामला किस रास्ते गया

निजी चिकित्सालय, केरलटॉन्सिल का ऑपरेशनअनुचित बेहोशी से रेजी जीवन भर के लिए अपंग
राज्य आयोगमामला खारिजसबूत पर्याप्त नहीं
राष्ट्रीय आयोग, दिल्लीअस्पताल चिकित्सा में लापरवाही का दोषीहर्जाना देने का निर्देश
NCERT, पृष्ठ 79

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। यह पृष्ठ 79 की गतिविधि का पहला हिस्सा है।

चीज़ (किताब के अक्षर)उत्पादक किस बात का ध्यान रखेपृष्ठ
(क) एल.पी.जी. सिलेंडरप्रमाण लेना अनिवार्य; वज़न सही हो85, 89
(घ) दवाइयाँप्रयोग के निर्देश, दूसरे प्रभाव और खतरे, अंतिम तिथि छपी हो80
(च) खाद्य तेलमिलावट न हो77
(ख), (ग), (छ), (ज)भीड़ वाली जगहें: आग, बिजली और भीड़ से बचाव के इंतज़ामचर्चा (हमारी ओर से)

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “समिति” या “आयोग”? पृष्ठ 79 के बॉक्स में “राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण समिति” और राष्ट्रीय समिति छपा है; अध्याय में आगे (पृष्ठ 81, 84) यही आयोग कहलाते हैं। बच्चे उत्तर में आयोग लिखें।
  • “अस्पताल तो सेवा है, उस पर उपभोक्ता कानून कैसे?” यही इस मामले की सीख है: सेवा लेने वाला भी उपभोक्ता है, और कोपरा सेवाओं पर भी लागू होता है।
  • “राज्य आयोग ने मना किया तो बात ख़त्म।” नहीं; रेजी के पिता ने अपील की और राष्ट्रीय आयोग से न्याय मिला। अपील का पूरा रास्ता कालांश 7 में आएगा।
  • किताब के अक्षर। पृष्ठ 79 की गतिविधि में (घ) के बाद सीधा (च) छपा है, (ङ) नहीं। उत्तर में किताब वाले अक्षर ही लिखवाइए, ताकि बच्चे किताब से मिला सकें।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “3. सुरक्षा का अधिकार” चलाइए, और “4. सूचना का अधिकार” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: जो चीज़ या सेवा जान या माल के लिए खतरनाक हो, उससे बचाव का अधिकार सुरक्षा का अधिकार है।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: रेजी का मामला राज्य आयोग में सबूत की कमी से खारिज हुआ। आपके हिसाब से ऐसे मामले में कौन-से कागज़ काम आते? (अस्पताल की पर्चियाँ, ऑपरेशन और इलाज के कागज़, बिल; कालांश 7 में अरिता के मामले में आयोग ने भी पहले बिल और वारंटी माँगे।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) प्रेशर कूकर का सेफ्टी वॉल्व: खराब हो तो भयंकर दुर्घटना हो सकती है, इसलिए निर्माता उसकी उच्च गुणवत्ता पक्की करे। (2) सबूत पर्याप्त न होने से; फिर पिता ने राष्ट्रीय आयोग में अपील की, जिसने अस्पताल को लापरवाही का दोषी पाया। जिन बच्चों ने लिखा हो कि मामला राज्य आयोग में ही ख़त्म हो गया, उनके लिए कालांश 4 की शुरुआत में चित्र एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क5, क6, ख4 और घ3; तेज़ विद्यार्थी ङ3 भी। पृष्ठ 79 की गतिविधि का प्रश्न 2 भी। कल हर समूह अपने खाली पैकेट साथ लाए।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 79, प्रश्न 1 (सुरक्षा के नियम): (क) एल.पी.जी. सिलेंडर: प्रमाण लेना अनिवार्य है, और वज़न सही हो। (घ) दवाइयाँ: उचित प्रयोग के निर्देश, दूसरे प्रभावों और खतरों की जानकारी, और अंतिम तिथि छपी हो; अंतिम तिथि निकल चुकी दवा बेचने वालों पर कार्यवाही हो सकती है। (च) खाद्य तेल: मिलावट न हो। (ख) सिनेमा थिएटर, (ग) सर्कस, (छ) विवाह पंडाल और (ज) बहुमंजिली इमारत में एक साथ बहुत लोग होते हैं; वहाँ आग, बिजली और भीड़ से बचाव के इंतज़ाम हों, और प्रेशर कूकर के वॉल्व की तरह यह देखा जाए कि किस हिस्से की खराबी दुर्घटना बन सकती है।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 79, प्रश्न 2 (आसपास की दुर्घटना): उदाहरण बच्चे के आसपास से आएगा। उसे रेजी के मामले की तरह परखिए: गलती किसकी थी, कौन-सा अधिकार टूटा (सुरक्षा का), और पीड़ित किस आयोग में जा सकता था (यह कालांश 7 में दावे की रकम से तय करना सीखेंगे)।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 19–24।

कालांश 4 — वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी

किताब — पृष्ठ 80–81 · स्लाइड — “वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 4. सूचना का अधिकार

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी पैकेट पर छपी जानकारी पढ़कर बता पाए कि वह क्यों ज़रूरी है, अधिकतम खुदरा मूल्य का सही अर्थ बता पाए, और पैकेट की जानकारी और सूचना पाने के अधिकार कानून का फ़र्क समझा पाए।

साथ ले जाइए — बच्चों के लाए खाली पैकेट और डिब्बियाँ, और अपने साथ भी दो-तीन, ताकि कोई समूह ख़ाली हाथ न रहे।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 3 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–14 मिनट · पैकेट पढ़िए। हर समूह अपने पैकेट पर छपी जानकारी की सूची बनाए। फिर पृष्ठ 80 पढ़वाइए और सूची मिलवाइए: वस्तु के अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, खराब होने की अंतिम तिथि और बनाने वाले का पता; दवा पर उचित प्रयोग के निर्देश और दूसरे प्रभावों और खतरों की जानकारी; कपड़ों पर धुलाई संबंधी निर्देश। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए।
  3. 14–22 मिनट · जानकारी किस काम की। किताब के कारण पढ़वाइए: वस्तु अंतिम तिथि से पहले खराब हो जाए तो उसे बदलने के लिए कहा जा सकता है; तिथि छपी न हो तो विनिर्माता दुकानदार पर आरोप लगाकर ज़िम्मेदारी से बच जाएगा; अंतिम तिथि निकल चुकी दवाएँ बेचने वालों पर कार्यवाही हो सकती है। फिर छपा मूल्य: यह अधिकतम खुदरा मूल्य है; इससे अधिक लिया जाए तो कोई भी विरोध और शिकायत कर सकता है, और इससे कम दाम के लिए उपभोक्ता मोल–भाव कर सकता है। बोर्ड-कार्य की तालिका यहीं भरवाइए।
  4. 22–30 मिनट · सूचना पाने का अधिकार कानून और अमृता। पृष्ठ 80 से: सन् 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने सूचना पाने का अधिकार कानून (राइट टू इनफॉरमेशन) लागू किया, जो नागरिकों को सरकारी विभागों के कामकाज की सभी सूचनाएँ पाने का अधिकार देता है। फिर “इंतज़ार …” वाला बॉक्स: इंजीनियरिंग स्नातक अमृता ने सरकारी नौकरी के लिए प्रमाणपत्र जमा किए और इंटरव्यू दिया, पर परिणाम नहीं मिला और कर्मचारी जवाब देने से मना करते रहे; उसने इस कानून के तहत प्रार्थना-पत्र दिया, तो उसे देरी के कारण बताए गए और नियुक्ति के लिए बुलावे का पत्र भी मिला, क्योंकि उसने इंटरव्यू अच्छा दिया था। “मामलों वाली तालिका” में अमृता की पंक्ति, और अधिकार-चार्ट पर दूसरी पंक्ति: सूचना | अमृता | देरी के कारण बताए गए, नियुक्ति का बुलावा मिला।
  5. 30–36 मिनट · पृष्ठ 81 की गतिविधि। प्रश्न 1 (छपे मूल्य से कभी अधिक, कभी कम दाम क्यों) पूरी कक्षा से; प्रश्न 2 के लिए समूह अपने पैकेट देखकर लिखें कि कौन-सी जानकारी काम की है और कौन-सी कम है।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) पैकेट पर छपी तीन जानकारियाँ, और उनमें से किसी एक का काम। (2) सूचना पाने का अधिकार कानून कब लागू हुआ, और यह किसकी सूचना पाने का अधिकार देता है?

पैकेट पर क्या देखें (चरण 2)

पैकेट पर क्या देखें

अवयववस्तु किन चीज़ों से बनी
मूल्यछपा मूल्य, यानी अधिकतम खुदरा मूल्य
तारीखेंनिर्माण की तारीख और खराब होने की अंतिम तिथि
पहचानबैच संख्या और बनाने वाले का पता
सूचना पाने का अधिकारखराबी पर शिकायत, वस्तु बदलने या मुआवज़े की माँगअधिक दाम का विरोध
NCERT, पृष्ठ 80

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

हालतउपभोक्ता क्या कर सकता है
वस्तु अंतिम तिथि से पहले ही खराबउसे बदलने के लिए कह सकता है
अंतिम तिथि छपी ही नहींविनिर्माता ज़िम्मेदारी दुकानदार पर डाल देगा; इसीलिए तिथि छपना ज़रूरी
अंतिम तिथि निकल चुकी दवा बेची गईबेचने वाले पर कार्यवाही हो सकती है
छपे मूल्य से अधिक लिया गयाविरोध और शिकायत कर सकता है
छपे मूल्य से कम दाम चाहिएमोल–भाव कर सकता है

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “अधिकतम खुदरा मूल्य मतलब यही दाम देना पड़ेगा।” यह सबसे अधिक दाम है जो लिया जा सकता है; इससे कम पर मोल–भाव किया जा सकता है, इससे अधिक लेना गलत है।
  • सूचना का अधिकार, दो रूप। पैकेट की जानकारी उपभोक्ता का सूचना पाने का अधिकार है। किताब कहती है कि सरकार की दी हुई सेवाओं को उपयोगी बनाने के लिए इसी अधिकार को बढ़ाया गया, और सन् 2005 के अक्टूबर में सरकारी विभागों के कामकाज की सूचना पाने का कानून आया। अमृता का मामला इस दूसरे रूप का है। बोर्ड पर एक ही शीर्षक के नीचे दोनों को अलग पंक्तियों में लिखिए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “4. सूचना का अधिकार” चलाइए, और “5. चयन का अधिकार” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: खरीदने से पहले पैकेट पर अंतिम तिथि और छपा मूल्य देखिए; छपे मूल्य से अधिक मत दीजिए।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अमृता उपभोक्ता किस अर्थ में थी, जबकि उसने कुछ खरीदा नहीं? (किताब कहती है कि सरकार की दी हुई सेवाओं को उपयोगी बनाने के लिए सूचना पाने के अधिकार को बढ़ाया गया; अमृता सरकारी विभाग की सेवा से जुड़ी सूचना माँग रही थी।) सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, अंतिम तिथि, बनाने वाले का पता; इनमें से कोई तीन। काम का एक उदाहरण: अंतिम तिथि से पहले खराब हो तो वस्तु बदलवा सकते हैं, या छपे मूल्य से अधिक लिया जाए तो शिकायत कर सकते हैं। (2) सन् 2005 के अक्टूबर में; सरकारी विभागों के कामकाज की सूचना। जिन बच्चों ने अमृता के मामले को पैकेट की जानकारी से जोड़ा हो, उनके लिए कालांश 5 की शुरुआत में ऊपर का दूसरा बिंदु एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क7, क8, ख5, घ4 और घ5। पृष्ठ 81 की गतिविधि का प्रश्न 3 लिखकर लाएँ।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 81, प्रश्न 1 (कभी अधिक, कभी कम दाम): छपा मूल्य अधिकतम खुदरा मूल्य है। अधिक दाम तब लिया जाता है जब विक्रेता शोषण करे और खरीदार जागरूक न हो; यह गलत है और कोई भी इसका विरोध और शिकायत कर सकता है। कम दाम इसलिए हो सकता है कि इससे कम पर मोल–भाव किया जा सकता है। उपभोक्ता समूह लोगों को जागरूक कर सकते हैं और शिकायत दर्ज कराने में मदद कर सकते हैं।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 81, प्रश्न 2 (पैकेट की जानकारी): अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख, अंतिम तिथि और बनाने वाले का पता देखिए। ये उपयोगी हैं, क्योंकि इनसे खराब या पुरानी वस्तु पहचानी जा सकती है, वस्तु बदलने या मुआवज़े की माँग की जा सकती है, और छपे मूल्य से अधिक देने से बचा जा सकता है। कौन-सी जानकारी कम है, यह हर समूह अपने पैकेटों से लिखे।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 81, प्रश्न 3 (शिकायत और सूचना का कानून): हाँ। सन् 2005 के अक्टूबर में लागू यह कानून नागरिकों को सरकारी विभागों के कामकाज की सभी सूचनाएँ पाने का अधिकार देता है। अमृता ने इसी कानून से अपने परिणाम की देरी का कारण जाना और नियुक्ति का बुलावा पाया। इसी तरह सड़क या पानी के काम के बारे में भी सूचना माँगी जा सकती है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 25–32।

कालांश 5 — चयन के अधिकार का उल्लंघन

किताब — पृष्ठ 81 · स्लाइड — “चयन के अधिकार का उल्लंघन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 5. चयन का अधिकार

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी चयन के अधिकार का अर्थ रोज़ के दो उदाहरणों से बता पाए, और अबिरामी का मामला ज़िला आयोग से राज्य आयोग तक क्रम से सुना पाए।

साथ ले जाइए — “दुकानदार” और “ग्राहक” वाली दो पर्चियाँ।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 4 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–12 मिनट · दुकान का छोटा नाटक। दो बच्चों को पर्चियाँ दीजिए। “ग्राहक” दंतमंजन माँगे; “दुकानदार” कहे कि दंतमंजन तभी मिलेगा जब साथ में ब्रश भी लेंगे। कक्षा से पूछिए: ग्राहक ब्रश नहीं चाहता, तो उसके साथ क्या गलत हो रहा है? फिर पृष्ठ 81 से किताब का यही उदाहरण, और दूसरा: नया गैस कनेक्शन लेते समय डीलर साथ में चूल्हा लेने का दबाव डालता है। नाटक का यह रूप हमारी ओर से है।
  3. 12–24 मिनट · पैसे लौटाए गए। पृष्ठ 81 का बॉक्स पढ़वाइए: अंसारी नगर की छात्रा अबिरामी ने दिल्ली में एक कोचिंग संस्थान के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में नामांकन कराया और पूरे दो वर्ष के लिए “करीब 61,020 रुपये” जमा किए; पढ़ाई का स्तर ठीक न लगने पर साल के अंत में छोड़ने का निश्चय किया, और एक साल का पैसा माँगा तो मना कर दिया गया। ज़िला आयोग ने 28,000 रुपये लौटाने का आदेश दिया, यह कहते हुए कि छात्रा को चुनने का अधिकार है। संस्थान ने राज्य आयोग में अपील की; राज्य आयोग ने आदेश बनाए रखा, बेकार की अपील के लिए संस्थान पर 25,000 का दंड लगाया, और छात्रा को मुआवज़े और याचिका खर्च के रूप में “7,000 रूपये” देने को कहा। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए।
  4. 24–30 मिनट · सबके लिए आदेश। राज्य आयोग ने सभी शिक्षा संस्थानों और व्यावसायिक संस्थाओं को विद्यार्थियों से पूरे साल की फ़ीस एडवांस में लेने से मना किया; आदेश तोड़ने पर दंड शुल्क और जेल भी हो सकती है। पूछिए: इस आदेश से अबिरामी के बाद आने वाले विद्यार्थियों को क्या फ़ायदा हुआ? फिर अधिकार की परिभाषा: कोई भी उपभोक्ता, किसी भी आयु या लिंग का, कोई भी सेवा ले रहा हो, उसे हमेशा चुनने का अधिकार होगा।
  5. 30–36 मिनट · तालिका और चार्ट। “मामलों वाली तालिका” में अबिरामी की पंक्ति; अधिकार-चार्ट पर तीसरी पंक्ति: चयन | अबिरामी | 28,000 रुपये लौटाने का आदेश, अपील पर दंड। फिर बोर्ड-कार्य की तालिका।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) चयन के अधिकार के उल्लंघन का किताब वाला एक रोज़ का उदाहरण। (2) ज़िला आयोग ने अबिरामी के लिए क्या आदेश दिया, और किस अधिकार के आधार पर?

अबिरामी का मामला किस रास्ते गया (चरण 3)

अबिरामी का मामला किस रास्ते गया

कोचिंग संस्थानदो वर्ष के लिए "करीब 61,020 रुपये" जमाएक साल बाद छोड़ा, पैसा लौटाने से इनकार
ज़िला आयोग28,000 रुपये लौटाने का आदेशछात्रा को चुनने का अधिकार है
राज्य आयोगआदेश बना रहाबेकार की अपील पर 25,000 का दंड; छात्रा को "7,000 रूपये"
सब संस्थानों के लिएपूरे साल की फ़ीस एडवांस में लेना मना
NCERT, पृष्ठ 81

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

कहाँउपभोक्ता क्या चाहता थाउस पर क्या थोपा गया
दुकानसिर्फ़ दंतमंजनसाथ में ब्रश
गैस डीलरनया गैस कनेक्शनसाथ में चूल्हा
कोचिंग संस्थानएक साल बाद पाठ्यक्रम छोड़कर बाक़ी पैसा वापसदूसरे साल की फ़ीस भी रख ली गई

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “चयन का अधिकार मतलब कई ब्रांड में से चुनना।” यहाँ बात यह है कि जो हम नहीं चाहते, वह हम पर थोपा न जाए। किताब के अनुसार, ऐसे में हमें वह खरीदना पड़ता है जिसे खरीदने की हमारी इच्छा नहीं होती।
  • “अपील हारने वाला ग्राहक ही करता है।” रेजी के मामले में अपील पिता ने की थी; अबिरामी के मामले में संस्थान ने, और उसे बेकार की अपील के लिए दंड भी मिला।
  • किताब की छपाई। पृष्ठ 81 पर “7,000 रूपये” इसी वर्तनी में छपा है; बच्चे अपने उत्तर में “रुपये” लिखें।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “5. चयन का अधिकार” चलाइए, और “6. न्याय कहाँ मिले” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: जो चीज़ हम नहीं लेना चाहते, वह हम पर ज़बरदस्ती नहीं थोपी जा सकती।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अबिरामी ने कुल कितने साल की फ़ीस दी थी, कितने साल पढ़ी, और ज़िला आयोग का 28,000 रुपये का आदेश इससे कैसे जुड़ता है? (दो साल की फ़ीस दी, एक साल पढ़ी, और एक साल का पैसा माँगा था; किताब हिसाब नहीं देती, इसलिए बच्चे बस यह जोड़ बोलें, रकम का हिसाब नहीं।) सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) दंतमंजन के साथ ज़बरदस्ती ब्रश, या गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा। (2) संस्थान 28,000 रुपये लौटाए; छात्रा के चुनने के अधिकार के आधार पर। जिन बच्चों ने लिखा हो कि यह आदेश राज्य आयोग का था, उनके लिए कालांश 6 की शुरुआत में चित्र एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क9, क10, ख6 और घ6; तेज़ विद्यार्थी ङ4 और छ1 भी।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 33–38।

कालांश 6 — न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए

किताब — पृष्ठ 82–83 · स्लाइड — “न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 6. न्याय कहाँ मिले

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्षतिपूर्ति निवारण के अधिकार का अर्थ बता पाए, प्रकाश की शिकायत के कदम क्रम से सुना पाए, और किसी लुभावने प्रस्ताव को तीन सवालों से परख पाए।

साथ ले जाइए — विज्ञापनों वाली छह पर्चियाँ और अधिकार-चार्ट।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 5 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–14 मिनट · लुभावने विज्ञापन। हर समूह को पृष्ठ 82 के प्रस्तावों में से एक पर्ची दीजिए: 500 ग्राम के पैक पर 15 ग्राम की अतिरिक्त छूट; अखबार के ग्राहक बनने पर साल के अंत में उपहार; खुरचकर 10 लाख तक का इनाम; 500 ग्राम ग्लूकोज़ के डिब्बे में दूध का चॉकलेट; पैकेट में सोने का सिक्का; 2000 रुपये तक का जूता खरीदने पर 500 रुपये तक की एक जोड़ी मुफ़्त। किताब का सवाल पूछिए: क्या इनमें कोई विज्ञापन सचमुच उपभोक्ता को लाभ पहुँचाता है? नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए, और हर समूह अपना प्रस्ताव उसके तीन सवालों पर परखकर एक वाक्य बोले।
  3. 14–20 मिनट · अधिकार का नाम। पृष्ठ 82 का शीर्षक पढ़वाइए: इन उपभोक्ताओं को न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए? किताब यहाँ रेजी और अबिरामी के मामले फिर से पढ़ने को कहती है। फिर: उपभोक्ताओं को अनुचित सौदेबाज़ी और शोषण के विरुद्ध क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार है, और “यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।” शिकायत “स्वयं किसी वकील के साथ अथवा वकील की सेवा के बिना” दर्ज कराई जा सकती है।
  4. 20–30 मिनट · प्रकाश के नौ चित्र। पृष्ठ 82 पढ़वाइए: प्रकाश ने बेटी की शादी के लिए गाँव मनीऑर्डर भेजा; बेटी को जब पैसों की ज़रूरत थी, तब नहीं मिले, महीनों बाद भी नहीं पहुँचे; प्रकाश ने नयी दिल्ली के एक ज़िला स्तर के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मुकदमा दर्ज किया। फिर किताब में पृष्ठ 82–83 के नौ चित्र खुलवाइए; हर समूह क्रम से चित्रों के नीचे लिखी पंक्तियाँ पढ़े, और आप बोर्ड-कार्य की तालिका भरते जाइए। “मामलों वाली तालिका” में प्रकाश की पंक्ति भरवाइए।
  5. 30–36 मिनट · आजकल की सुविधा और चार्ट। पृष्ठ 82 से: आजकल उपभोक्ता अकेले या समूह में (जिसे क्लास एक्शन सूट कहते हैं), ख़ुद जाकर या इंटरनेट से शिकायत दर्ज करा सकते हैं, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मुकदमे की कार्यवाही करवा सकते हैं। अधिकार-चार्ट पर चौथी पंक्ति: क्षतिपूर्ति निवारण | प्रकाश | सलाह ली, मुकदमा दर्ज किया, ख़ुद बहस की, जज ने फ़ैसला सुनाया।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) क्षतिपूर्ति कितनी मिलेगी, यह किस बात पर निर्भर करता है? (2) आयोग में मुकदमा दर्ज करने से पहले प्रकाश ने कौन-से दो कदम उठाए?

प्रस्ताव परखने के तीन सवाल (चरण 2)

प्रस्ताव परखने के तीन सवाल

प्रस्ताव"अतिरिक्त", "इनाम", "मुफ्त"पृष्ठ 82 के छह विज्ञापन
दामक्या दाम वही है?
इनामपक्का है, या किस्मत पर?
मुफ़्तक्या उसकी कीमत पहले ही दाम में जुड़ी है?
नापा जा सकने वाला लाभजैसे 500 ग्राम पर 15 ग्राम अतिरिक्त, अगर दाम न बढ़ा हो
NCERT, पृष्ठ 82 · तीन सवाल हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

कदमप्रकाश ने क्या कियाचित्र
पैसा भेजाबेटी के लिए मनीऑर्डर भेजने पोस्ट-ऑफ़िस गए1
पता चलारुपये बेटी को नहीं मिले; पोस्ट-ऑफ़िस में पूछताछ की, संतोषजनक जवाब नहीं मिला2–4
सलाहक्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह लेने गए5
मुकदमामुकदमा दर्ज करने नज़दीकी उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग गए, अदालत के ऑफ़िस से रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म लिया; अदालत ने दूसरे पक्ष को नोटिस भेजा6
सुनवाईख़ुद बहस की; जज ने दस्तावेज़ जाँचे और दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं7–8
फ़ैसलाजज ने आयोग का फ़ैसला सुनाया9

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “प्रकाश को कितने पैसे मिले?” किताब फ़ैसले का ब्योरा नहीं देती; चित्र 9 में बस इतना है कि जज फ़ैसला सुनाते हैं। बच्चे अपनी ओर से रकम या नतीजा न जोड़ें।
  • “शिकायत के लिए वकील ज़रूरी है।” किताब कहती है, वकील के साथ या उसके बिना; प्रकाश ने चित्र 7 में ख़ुद बहस की।
  • “परिषद् और आयोग एक ही हैं।” प्रकाश परिषद् में सलाह लेने गए (चित्र 5), मुकदमा आयोग में दर्ज हुआ (चित्र 6)। दोनों का फ़र्क कालांश 7 में खुलेगा।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “6. न्याय कहाँ मिले” चलाइए, और “7. तीन स्तर के आयोग” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: नुकसान हुआ हो तो उपभोक्ता शिकायत करके उतने नुकसान की भरपाई माँग सकता है।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: प्रकाश ने कोई सामान नहीं खरीदा था, फिर भी वह उपभोक्ता कैसे था? (मनीऑर्डर डाकघर की सेवा है, और सेवा लेने वाला भी उपभोक्ता है; रेजी और अबिरामी के मामले भी सेवाओं के थे।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) क्षति की मात्रा पर। (2) पोस्ट-ऑफ़िस में पूछताछ की, और क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह ली। जिन बच्चों ने लिखा हो कि प्रकाश सीधे आयोग गए, उनके लिए कालांश 7 की शुरुआत में बोर्ड-कार्य की तालिका एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क11–13, ग3, ग6 और घ7; तेज़ विद्यार्थी ङ5 और छ5 भी।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 82, विज्ञापनों वाली गतिविधि: ये विज्ञापन लुभाने के लिए हैं। हर एक के बारे में पूछिए: क्या दाम वही है, क्या इनाम पक्का है या किस्मत पर है, और क्या “मुफ्त” चीज़ की कीमत पहले ही दाम में जुड़ी है? 500 ग्राम पर 15 ग्राम अतिरिक्त का लाभ नापा जा सकता है, अगर दाम न बढ़ा हो; इनाम और सिक्के वाले प्रस्ताव किस्मत पर टिके हैं। पृष्ठ 89 की प्रश्नावली में आकर्षक प्रस्तावों पर बेहिचक प्रतिक्रिया करना जागरूकता की कमी माना गया है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 39–44।

कालांश 7 — प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र

किताब — पृष्ठ 84 · स्लाइड — “प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 7. तीन स्तर के आयोग

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी उपभोक्ता संरक्षण परिषद् और आयोग का फ़र्क बता पाए, किताब की सीमाओं के साथ तीन स्तर के आयोग और अपील का रास्ता बता पाए, और अरिता के मामले के कदम सही क्रम में रख पाए।

साथ ले जाइए — अरिता के आठ कदमों की पर्चियाँ (हर समूह के लिए एक सेट, फेंटकर) और अधिकार-चार्ट।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 6 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–12 मिनट · पहले अंदाज़ा। पूछिए: अबिरामी का मामला किस आयोग से शुरू हुआ था? (ज़िला आयोग।) रेजी का? (राज्य आयोग।) प्रकाश का? (ज़िला स्तर का आयोग।) फिर पूछिए: कौन-सा मामला किस आयोग में जाए, यह किस बात से तय होता होगा? दो-तीन अंदाज़े बोर्ड के कोने में लिखिए; उन्हें चरण 4 में मिलाइए।
  3. 12–20 मिनट · उपभोक्ता संरक्षण परिषद्। पृष्ठ 84 का पहला हिस्सा पढ़वाइए: उपभोक्ता आंदोलन ने ऐसे संगठन बनवाए, जिन्हें उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद् कहते हैं। ये बताते हैं कि मुकदमा कैसे दर्ज कराएँ, कई बार आयोगों में उपभोक्ता का प्रतिनिधित्व करते हैं, और जागरूकता के लिए सरकार से वित्तीय सहयोग पाते हैं। आवासीय कॉलोनी का ‘निवासी कल्याण संघ’ भी अपने सदस्य के साथ हुई अनुचित व्यावसायिक कार्रवाई का मामला देखता है। नीचे का चित्र बनाइए: प्रकाश चित्र 5 में परिषद् गए, चित्र 6 में आयोग।
  4. 20–28 मिनट · तीन स्तर, और अपील। पृष्ठ 84 का अगला हिस्सा: कोपरा के अंतर्गत ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र बना। बोर्ड-कार्य की तालिका भरवाइए, और चरण 2 के अंदाज़े मिलाइए: मामला कौन-सा आयोग सुनेगा, यह दावे की रकम से तय होता है। फिर किताब का वाक्य: “इस प्रकार, अधिनियम ने उपभोक्ता के रूप में उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार देकर हमें समर्थ बनाया है।” अधिकार-चार्ट पर पाँचवीं पंक्ति: प्रतिनिधित्व | अरिता, और तीन स्तर के आयोग | उपभोक्ता न्यायालय में अपनी बात रखी।
  5. 28–36 मिनट · अरिता के कदम। हर समूह को फेंटी हुई पर्चियों का सेट दीजिए; पृष्ठ 84 की गतिविधि के आठ कदम सही क्रम में रखने हैं। पहले तीन समूह अपना क्रम बोलें, फिर किताब के अक्षरों में सही क्रम बोर्ड पर लिखिए। “मामलों वाली तालिका” की आख़िरी पंक्ति अरिता की।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) प्रकाश का मुकदमा किस स्तर के आयोग में दर्ज हुआ, और किताब के अनुसार वह आयोग कितने तक के दावे सुनता है? (2) अरिता के मामले में आयोग ने पहले उससे क्या माँगा?

परिषद् और आयोग: कौन क्या करता है (चरण 3)

परिषद् और आयोग: कौन क्या करता है

उपभोक्ता संरक्षण परिषद्स्वयंसेवी संगठनमुकदमा कैसे दर्ज करें, यह बताती है; कई बार आयोग में प्रतिनिधित्व; जागरूकता के लिए सरकार से वित्तीय सहयोग
उपभोक्ता विवाद निवारण आयोगकोपरा के अंतर्गत त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्रमुकदमा दर्ज होता है; जज दस्तावेज़ जाँचते हैं, दोनों पक्ष सुनते हैं, फ़ैसला सुनाते हैं
पहले सलाह, फिर मुकदमाचित्र 5 में परिषद्, चित्र 6 में आयोग
NCERT, पृष्ठ 83–84

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। सीमाएँ किताब की हैं।

आयोगकिस दावे के मुकदमे सुनता हैपृष्ठ
ज़िला आयोग1 करोड़ तक84
राज्य आयोग1 करोड़ से 10 करोड़ तक84
राष्ट्रीय आयोग10 करोड़ से ऊपर84
अपीलज़िला आयोग में मुकदमा खारिज हो, तो राज्य आयोग में, और उसके बाद राष्ट्रीय आयोग में84

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “उपभोक्ता अदालत यानी परिषद्, तो फ़ैसला भी वही देती है।” किताब परिषद् को “उपभोक्ता अदालत” भी कहती है, पर वह स्वयंसेवी संगठन है; फ़ैसला आयोग के जज सुनाते हैं।
  • “आयोग नुकसान से तय होता है, बड़ा नुकसान तो बड़ा आयोग।” किताब के शब्द “दावों” के हैं: आयोग दावे की रकम से तय होता है।
  • “(ड.)” अक्षर। पृष्ठ 84 की गतिविधि में (घ) के बाद “(ड.)” छपा है; पर्चियों और उत्तर में यही अक्षर रखिए, ताकि बच्चे किताब से मिला सकें।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “7. तीन स्तर के आयोग” चलाइए, और “8. जागरूक उपभोक्ता” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: परिषद् सलाह देती है, आयोग फ़ैसला देता है; और आयोग तीन स्तर के हैं: ज़िला, राज्य, राष्ट्रीय।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पृष्ठ 84 का अपील वाला वाक्य उपभोक्ता की अपील की बात करता है। अबिरामी के मामले में अपील किसने की, और किस आयोग में? (हारने वाले कोचिंग संस्थान ने, राज्य आयोग में; रास्ता वही रहा, ज़िला से राज्य।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) ज़िला स्तर का आयोग; किताब के अनुसार 1 करोड़ तक के दावे। (2) बिल और वारंटी, यानी कदम (च)। जिन बच्चों ने परिषद् को फ़ैसला देने वाली जगह लिखा हो, उनके लिए कालांश 8 की शुरुआत में चित्र एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क14, क15, ख7 और घ8; तेज़ विद्यार्थी ङ6 और छ2 भी। पृष्ठ 86 की गतिविधि के प्रश्न 2 और 3 भी।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 84, अरिता के कदम: (छ) दीवार घड़ी खरीदी → (ग) लगा कि दुकानदार ने दोषयुक्त सामान दिया → (ड.) शाखा कार्यालय में डीलर के विरुद्ध शिकायत, कोई असर नहीं → (ख) शिकायत के लिए पेशेवर व्यक्ति से मिली → (क) ज़िला आयोग में मुकदमा दायर किया → (च) आयोग ने पहले बिल और वारंटी माँगे → (घ) आयोग की कार्यवाही में भाग लिया → (ज) कुछ ही महीनों में आयोग ने नई घड़ी देने का आदेश दिया, बिना अतिरिक्त मूल्य के।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 86, प्रश्न 2 (नज़दीकी आयोग): यह आपके ज़िले पर निर्भर है। किताब के अनुसार ज़िला स्तर का आयोग 1 करोड़ तक के दावे सुनता है। उसका पता लिखकर कक्षा में साझा कीजिए।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 86, प्रश्न 3 (परिषद् और आयोग का अंतर): उपभोक्ता संरक्षण परिषद् उपभोक्ता आंदोलन से बना स्वयंसेवी संगठन है; वह बताती है कि मुकदमा कैसे दर्ज करें, कई बार आयोग में उपभोक्ता का प्रतिनिधित्व करती है, और जागरूकता के लिए सरकार से वित्तीय सहयोग पाती है; प्रकाश यहाँ सलाह लेने गए थे। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग कोपरा के तहत बना ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर का न्यायिक तंत्र है; यहाँ मुकदमा दर्ज होता है, जज दस्तावेज़ जाँचते हैं, दोनों पक्षों को सुनते हैं और फ़ैसला सुनाते हैं।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 45–52।

कालांश 8 — जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें

किताब — पृष्ठ 84–86 · स्लाइड — “जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 8. जागरूक उपभोक्ता

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी गुणवत्ता के चिह्न पहचानकर बता पाए कि प्रमाण किन वस्तुओं के लिए अनिवार्य है, और पृष्ठ 86 के छह मामलों को कोपरा के छह अधिकारों में कारण के साथ बाँट पाए।

साथ ले जाइए — पृष्ठ 86 के छह मामलों की पर्चियाँ, अधिकार-चार्ट, और कालांश 4 के खाली पैकेट, अगर बचे हों।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 7 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–12 मिनट · जागरूक कैसे बनें। पृष्ठ 84 के आख़िर से पढ़वाइए: अपने अधिकारों के प्रति सचेत होंगे, तभी अच्छे और बुरे में फ़र्क करके श्रेष्ठ चुनाव कर पाएँगे; “एक जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए निपुणता और ज्ञान प्राप्त करने की जरूरत होती है।” फिर पृष्ठ 85: कोपरा ने केंद्र और राज्य सरकारों में उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग बनवाने में मुख्य भूमिका निभाई; पृष्ठ 84–85 के पोस्टर ऐसे विज्ञापनों के उदाहरण हैं, जिनसे सरकार लोगों को कानूनी प्रक्रिया बताती है, और ऐसे विज्ञापन टेलीविज़न पर भी आते हैं।
  3. 12–20 मिनट · गुणवत्ता के चिह्न। पृष्ठ 85 का बॉक्स “आई.एस.आई और एगमार्क” पढ़वाइए: आई.एस.आई, एगमार्क और हॉलमार्क जैसे चिह्न अच्छी गुणवत्ता का भरोसा दिलाते हैं; प्रमाण देने वाले संगठन चिह्न लगाने की अनुमति तभी देते हैं, जब उत्पादक श्रेष्ठ गुणवत्ता का पालन करे। फिर किताब की शर्त: “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता।” जिन वस्तुओं का असर सुरक्षा या स्वास्थ्य पर पड़ता है, या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, जैसे एल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल, उनके लिए प्रमाण अनिवार्य है। नीचे का चित्र बनाइए; समूह अपने पैकेटों पर चिह्न ढूँढें।
  4. 20–30 मिनट · छह अधिकार, पृष्ठ 86 की छँटाई। अब पहली बार पूरी सूची खोलिए, पृष्ठ 86 की गतिविधि के प्रश्न 4 से: (क) चयन, (ख) सूचना, (ग) निवारण, (घ) प्रतिनिधित्व, (च) सुरक्षा, (छ) उपभोक्ता शिक्षा। हर समूह को एक मामले की पर्ची दीजिए; समूह अधिकार चुने और अधिकार-चार्ट की किसी पंक्ति से मिलाकर कारण बोले। उत्तर बोर्ड-कार्य की तालिका में भरते जाइए।
  5. 30–36 मिनट · चार्ट की आख़िरी पंक्ति, और प्रश्न 5। अधिकार-चार्ट पर छठी पंक्ति: उपभोक्ता शिक्षा | पृष्ठ 84–85 के सरकारी विज्ञापन | लोगों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी। फिर पृष्ठ 86 की गतिविधि का प्रश्न 5 पूरी कक्षा से: अगर मानक गुणवत्ता पक्की करते हैं, तो बाज़ार में इतनी वस्तुएँ बिना चिह्न के क्यों हैं? (चरण 3 की शर्त से।)
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) किन्हीं दो वस्तुओं के नाम, जिनके लिए किताब के अनुसार प्रमाण अनिवार्य है, और क्यों। (2) पृष्ठ 86 का कोई एक मामला और उसका अधिकार।

गुणवत्ता का चिह्न कब अनिवार्य (चरण 3)

गुणवत्ता का चिह्न कब अनिवार्य

प्रमाण देने वाले संगठनबहुत से उत्पादों के लिए गुणवत्ता का मानदंड बनाते हैंश्रेष्ठ गुणवत्ता का पालन हो, तभी चिह्न लगाने की अनुमति
ज़्यादातर वस्तुएँमानदंड का पालन ज़रूरी नहीं
कुछ वस्तुएँसुरक्षा या स्वास्थ्य पर असर, या बड़े पैमाने पर उपयोगप्रमाण अनिवार्य
प्रमाण अनिवार्यएल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल
NCERT, पृष्ठ 85

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

मामला (पृष्ठ 86)अधिकारक्यों
(क) लता को नए आयरन-प्रेस से बिजली का झटकासुरक्षावस्तु जान के लिए खतरनाक निकली
(ख) जॉन ने टेलीफ़ोन सेवाओं से असंतुष्ट होकर ज़िला स्तर के फोरम में मुकदमा कियाप्रतिनिधित्व (निवारण से भी जुड़ता है)उपभोक्ता न्यायालय में अपनी बात रखी
(ग) मित्र ने समाप्ति तारीख निकल चुकी दवा खरीदी, आप शिकायत की सलाह दे रहे हैंउपभोक्ता शिक्षा (निवारण से भी जुड़ता है)आप मित्र को उसका अधिकार बता रहे हैं
(घ) इकबाल खरीदने से पहले आवरण की सारी जानकारी जाँचता हैसूचनापैकेट की जानकारी पढ़ना
(च) केबल ऑपरेटर की सेवा से असंतुष्ट, पर कोई विकल्प नहींचयनचुनने को कुछ है ही नहीं
(छ) दुकानदार ने खराब कैमरा दिया, आप मुख्य कार्यालय में दृढ़ता से शिकायत करते हैंनिवारणनुकसान की भरपाई माँगना

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “जिस पर चिह्न नहीं, वह सामान गैरकानूनी है।” नहीं; किताब के अनुसार सभी उत्पादकों के लिए मानदंड ज़रूरी नहीं, बस कुछ वस्तुओं के लिए प्रमाण अनिवार्य है।
  • “एक मामले के दो उत्तर कैसे?” कई मामलों में एक मुख्य अधिकार है और दूसरा उससे जुड़ता है: (ख) और (ग) के साथ तालिका में लिखा है, और (क) में लता ने तुरंत दुकानदार से शिकायत भी की, जो निवारण से जुड़ती है। बच्चे मुख्य अधिकार कारण के साथ लिखें; कारण ठीक हो, तो दूसरा अधिकार भी मानिए।
  • किताब के अक्षर। पृष्ठ 86 पर अधिकार और मामले दोनों (क), (ख), (ग), (घ), (च), (छ) से गिने गए हैं, (ङ) नहीं। उत्तर में यही अक्षर लिखवाइए।
  • चित्रों वाला चिह्न। पृष्ठ 85 के बॉक्स में पाठ तीन चिह्नों का नाम लेता है, पर चित्रों में फोर्टिफिकेशन का चिह्न भी छपा है; प्रश्न 12 के “फूड फोर्टिफिकेशन” में यही काम आएगा।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “8. जागरूक उपभोक्ता” चलाइए, और “9. आंदोलन आगे कैसे बढ़े” से पहले रुकिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: आई.एस.आई, एगमार्क और हॉलमार्क गुणवत्ता के चिह्न हैं; और एल.पी.जी. सिलिंडर जैसी चीज़ों के लिए प्रमाण अनिवार्य है।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: किताब की सूची में एल.पी.जी. सिलिंडर और बोतलबंद पेयजल साथ-साथ हैं। दोनों में ऐसा क्या है कि प्रमाण अनिवार्य है? (एक का असर सुरक्षा पर पड़ता है, दूसरे का स्वास्थ्य पर, और दोनों बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं।) सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) एल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल में से कोई दो; क्योंकि ये सुरक्षा या स्वास्थ्य पर असर डालती हैं, या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होती हैं। (2) बोर्ड-कार्य की तालिका की कोई एक पंक्ति। जिन बच्चों ने लिखा हो कि हर वस्तु पर चिह्न अनिवार्य है, उनके लिए कालांश 9 की शुरुआत में चित्र एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: किताब के प्रश्न 3, 6, 7 और 9; प्रश्न बैंक के क16, क19, ख8, ख10, घ9 और घ10; तेज़ विद्यार्थी ङ8, च1 और च6 भी। पृष्ठ 86 की गतिविधि के प्रश्न 1, 5 और 6 भी।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 86, प्रश्न 1 (पोस्टर): एक वस्तु चुनिए, जैसे प्रेशर कूकर, और उपभोक्ता की नज़र से उसके पहलू एक पोस्टर पर लिखिए: सेफ्टी वॉल्व ठीक हो (सुरक्षा); डिब्बे पर दाम, बनाने वाले का पता और इस्तेमाल के निर्देश (सूचना); गुणवत्ता का चिह्न; रसीद और वारंटी सँभालकर रखें, ताकि खराबी पर शिकायत हो सके (निवारण)।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 86, प्रश्न 5 (बिना चिह्न की वस्तुएँ): किताब के अनुसार मानदंड का पालन सभी उत्पादकों के लिए ज़रूरी नहीं है। प्रमाण केवल उन वस्तुओं के लिए अनिवार्य है जो उपभोक्ता की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, या जिनका उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, जैसे एल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल। बाक़ी वस्तुएँ बिना चिह्न के भी बिक सकती हैं, इसलिए खरीदते समय चिह्न देखना उपभोक्ता को ख़ुद याद रखना होता है।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 3 (जागरूकता की ज़रूरत): अपने अधिकारों के प्रति सचेत उपभोक्ता ही अच्छे और बुरे में फ़र्क करके श्रेष्ठ चुनाव कर पाता है, और इसके लिए निपुणता और ज्ञान चाहिए। दो उदाहरण: अमृता ने सूचना पाने के अधिकार कानून से प्रार्थना-पत्र दिया, तो देरी के कारण भी बताए गए और नियुक्ति का बुलावा भी मिला; अबिरामी ज़िला आयोग गई, तो 28,000 रुपये लौटाने का आदेश मिला। जागरूकता न हो तो लोग ठगे जाने को अपना दुर्भाग्य मानकर चुप रह जाते हैं (पृष्ठ 89, प्रश्नावली का प्रश्न 5)।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 6 (उपभोक्ता के कर्त्तव्य): खरीदने पर रसीद माँगिए और सँभालकर रखिए; पैकेट पर अवयव, तारीखें और अधिकतम खुदरा मूल्य देखिए, उससे अधिक मत दीजिए; आई.एस.आई. जैसे चिह्न और समाप्ति तिथि जाँचिए; गैस सिलेंडर या पुराने अखबार का वज़न ख़ुद जाँचिए, और बाट की जगह पत्थर से तौलने का विरोध कीजिए; दाम की तुलना कीजिए और लुभाने वाले प्रस्तावों पर तुरंत मत रीझिए; ठगे जाने पर शिकायत कीजिए।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 7 (शहद और बिस्कुट): गुणवत्ता का प्रमाणक चिह्न देखिए, जैसे एगमार्क (प्रश्न 12 में इसे अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाण कहा गया है) या आई.एस.आई.; पोषक तत्व मिलाए गए हों, तो फोर्टिफिकेशन का चिह्न। क्यों: संगठन चिह्न लगाने की अनुमति तभी देते हैं जब उत्पादक श्रेष्ठ गुणवत्ता का पालन करे। साथ में पैकेट पर अवयव, अंतिम तिथि, अधिकतम खुदरा मूल्य और बनाने वाले का पता भी देखिए।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 9 (अधिकार): छह अधिकार, हर एक के साथ किताब का मामला: सुरक्षा (रेजी; प्रेशर कूकर का सेफ्टी वॉल्व), सूचना (पैकेट की जानकारी; अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक लेने पर शिकायत), चयन (अबिरामी; दंतमंजन के साथ ब्रश), निवारण (प्रकाश; क्षति की मात्रा के आधार पर क्षतिपूर्ति), प्रतिनिधित्व (उपभोक्ता न्यायालय में अपनी बात; तीन स्तर के आयोग), उपभोक्ता शिक्षा (निपुणता और ज्ञान; सरकारी विज्ञापन)।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 86, प्रश्न 6 (प्रमाणन देने वाले): अपने आसपास के सुनार या दुकानदार से पूछिए कि उनके सामान पर कौन-सा चिह्न है और वह किस संस्था से मिला। पृष्ठ 85 बताता है कि ऐसे संगठन जाँच करके प्रमाणपत्र देते हैं, और उत्पादक को चिह्न तभी लगाने देते हैं जब वह श्रेष्ठ गुणवत्ता का पालन करे।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 53–63।

कालांश 9 — उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में

किताब — पृष्ठ 86–87 · स्लाइड — “उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 9. आंदोलन आगे कैसे बढ़े

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी किताब के आँकड़ों के साथ आंदोलन की प्रगति और कमियाँ गिना पाए, 2019 के संशोधन की तीन बातें बता पाए, और समझा पाए कि आंदोलन उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही आगे बढ़ेगा।

साथ ले जाइए — कुछ नहीं; किताब और बोर्ड काफ़ी हैं।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 8 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–12 मिनट · 24 दिसंबर। पृष्ठ 86 पढ़वाइए: 24 दिसंबर भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि 1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया था। भारत उन देशों में है, जहाँ उपभोक्ता समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट न्यायालय हैं। आज देश में 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन हैं, पर उनमें से केवल 50–60 ही पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं। बोर्ड-कार्य की तालिका शुरू कीजिए।
  3. 12–20 मिनट · कमियाँ। किताब के शब्द: निवारण प्रक्रिया “जटिल, खर्चीली और समय साध्य” साबित हो रही है। कई बार वकीलों का सहारा लेना पड़ता है, मुकदमे लंबा समय लेते हैं, अधिकांश खरीद के समय रसीद नहीं दी जाती, और अधिकांश खरीद छोटी फुटकर दुकानों से होती है। पूछिए: पृष्ठ 89 की प्रश्नावली के पहले दो प्रश्न रसीद के बारे में क्यों हैं?
  4. 20–28 मिनट · 2019 का संशोधन, और 35 वर्ष बाद। पृष्ठ 87: उपभोक्ता के अधिकार मज़बूत करने के लिए 2019 में कोपरा का संशोधन हुआ; अब इंटरनेट से खरीद भी शामिल है; सेवा में कमी या दोषपूर्ण उत्पाद हो, तो सेवा प्रदाता और निर्माता ज़िम्मेदार ठहराए जाएँगे और दंडित होंगे, जेल भी हो सकती है; आयोग के बाहर तटस्थ मध्यस्थ की मदद से निपटारे को तीनों स्तरों पर बढ़ावा दिया गया है। फिर: “कोपरा के अधिनियम के 35 वर्ष बाद भी” उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे फैल रहा है, श्रमिकों के हितों के कानून ख़ास तौर पर असंगठित क्षेत्र में कमज़ोर हैं, और बाज़ार के नियमों का अक्सर पालन नहीं होता।
  5. 28–36 मिनट · आगे का रास्ता। किताब के आख़िरी वाक्य पढ़वाइए: “फिर भी, उपभोक्ताओं को अपनी भूमिका और अपना महत्त्व समझने की जरूरत है। यह अक्सर कहा जाता है कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की जरूरत है।” नीचे का चित्र बनाइए। फिर हर समूह अध्याय से एकजुटता का एक तरीका ढूँढे: उपभोक्ता दल और परिषद् (पृष्ठ 77, 84), निवासी कल्याण संघ (पृष्ठ 84), क्लास एक्शन सूट (पृष्ठ 82), कंपनियों और सरकार पर मिलकर दबाव (पृष्ठ 78)।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस क्यों मनाया जाता है? (2) निवारण प्रक्रिया की कोई दो कमियाँ।

प्रगति भी, कमियाँ भी (चरण 5)

प्रगति भी, कमियाँ भी

प्रगति24 दिसंबर उपभोक्ता दिवस; विशिष्ट न्यायालय; 2000 से अधिक संगठन; 2019 का संशोधन
कमियाँकेवल 50–60 पूर्ण संगठित; प्रक्रिया जटिल, खर्चीली, लंबी; रसीद नहीं मिलती; ज्ञान धीरे फैल रहा
सक्रिय भागीदारीस्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष
NCERT, पृष्ठ 86–87

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैप्रगति या कमीपृष्ठ
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस24 दिसंबर; 1986 में इसी दिन संसद ने अधिनियम पारित कियाप्रगति86
विशिष्ट न्यायालयभारत उन देशों में, जहाँ उपभोक्ता समस्याओं के लिए विशिष्ट न्यायालय हैंप्रगति86
उपभोक्ता संगठन2000 से अधिक, पर केवल 50–60 पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्तदोनों86
निवारण प्रक्रियाजटिल, खर्चीली और समय साध्य; वकील, लंबे मुकदमे, रसीद नहींकमी86
2019 का संशोधनइंटरनेट से खरीद शामिल; सेवा प्रदाता और निर्माता ज़िम्मेदार, जेल तक; तटस्थ मध्यस्थप्रगति87
उपभोक्ता ज्ञान35 वर्ष बाद भी बहुत धीरे फैल रहा; नियमों का अक्सर पालन नहींकमी87

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “24 दिसंबर 1986 को आंदोलन शुरू हुआ।” उस दिन अधिनियम पारित हुआ; आंदोलन 1960 के दशक में व्यवस्थित रूप में उभरा था (कालांश 2 की तालिका)।
  • “2000 संगठन, यानी आंदोलन बहुत मज़बूत है।” किताब तुरंत जोड़ती है कि उनमें से केवल 50–60 ही पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त हैं।
  • “35 वर्ष” या 30 से अधिक वर्ष? हिंदी किताब में 35 वर्ष छपा है, अंग्रेज़ी संस्करण में 30 से अधिक वर्ष; बच्चे अपनी किताब वाला शब्द लिखें।
  • “2019 में नया कानून बना।” 2019 में कोपरा का संशोधन हुआ; कानून वही है।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “9. आंदोलन आगे कैसे बढ़े” चलाइए, और “सार” से पहले रुकिए; “सार” और “अभ्यास” कालांश 10 के हैं।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: कानून और आयोग बने, पर शिकायत की प्रक्रिया अब भी कठिन और लंबी है; इसलिए उपभोक्ताओं को मिलकर आगे आना होगा।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: किताब कहती है कि अधिकांश खरीद छोटी फुटकर दुकानों से होती है। इसे कमी क्यों गिना गया? (किताब इसे रसीद न मिलने के ठीक बाद गिनाती है; हमारी ओर से जोड़ी गई कड़ी: छोटी दुकानों पर अक्सर पक्का बिल नहीं बनता, इसलिए बाद में सबूत जुटाना कठिन होता है।) सवाल और कड़ी हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): (1) 1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया था। (2) जटिल, खर्चीली और समय साध्य; वकीलों का सहारा; मुकदमे लंबे; रसीद न मिलने से सबूत की कमी; इनमें से कोई दो। जिन बच्चों ने 24 दिसंबर को आंदोलन की शुरुआत लिखा हो, उनके लिए कालांश 10 की शुरुआत में ऊपर का पहला बिंदु एक मिनट दोहराइए।
  • गृहकार्य: किताब के प्रश्न 8, 10 और 11; प्रश्न बैंक के क17, क18, क20, ख9, ग1, ग2 और ग4; तेज़ विद्यार्थी ङ7, च4, च5, छ3 और छ4 भी।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 8 (कानूनी मानदंड): कोपरा (1986) और 2019 में उसका संशोधन; ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के आयोग, अपील की सुविधा के साथ; 2019 के संशोधन में इंटरनेट से खरीद, सेवा प्रदाता और निर्माता की ज़िम्मेदारी, तटस्थ मध्यस्थ; पैकेट पर जानकारी छापने के नियम और सन् 2005 के अक्टूबर से सूचना पाने का अधिकार कानून; एल.पी.जी. सिलिंडर जैसी वस्तुओं के लिए अनिवार्य प्रमाण; उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग और विज्ञापन; समूह में, इंटरनेट से शिकायत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई। ये तभी समर्थ बनाएँगे जब ठीक से लागू हों, क्योंकि किताब के अनुसार नियमों का अक्सर पालन नहीं होता।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 10 (एकजुटता): उपभोक्ता दल और उपभोक्ता संरक्षण परिषद् बनाकर; आवासीय कॉलोनी के ‘निवासी कल्याण संघ’ के ज़रिए; समूह के रूप में शिकायत करके, जिसे क्लास एक्शन सूट कहते हैं; कंपनियों और सरकार पर मिलकर दबाव डालकर, जैसा आंदोलन ने कोपरा से पहले किया; और सक्रिय भागीदारी से, क्योंकि किताब के अनुसार “स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की जरूरत है।”
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 87, प्रश्न 11 (प्रगति की समीक्षा): प्रगति: 1960 के दशक के उदय से 1986 के कोपरा और 2019 के संशोधन तक; 24 दिसंबर राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस; विशिष्ट न्यायालय; 2000 से अधिक संगठन; इंटरनेट और समूह में शिकायत, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई। कमियाँ: केवल 50–60 संगठन पूर्ण संगठित; प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समय साध्य; रसीद न मिलने से सबूत की कमी; 35 वर्ष बाद भी उपभोक्ता ज्ञान धीरे फैल रहा है और नियमों का अक्सर पालन नहीं होता।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 64–72।

कालांश 10 — प्रश्नावली, परियोजना और समापन

किताब — पृष्ठ 87–89 · स्लाइड — “प्रश्नावली, परियोजना और समापन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — सार, अभ्यास, परियोजना

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी प्रश्न 12 और 13 के उत्तर किताब के कारणों के साथ दे पाए, पृष्ठ 89 की प्रश्नावली से अपनी जागरूकता जाँच पाए, और पहले दिन की पर्ची वाले सवाल का जवाब अध्याय के रास्तों से दे पाए।

साथ ले जाइए — पहले दिन की पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा और अधिकार-चार्ट।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 9 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
  2. 5–15 मिनट · प्रश्न 12 और 13। आधे समूह प्रश्न 12 (सुमेलन) करें, आधे प्रश्न 13 (सही या गलत)। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ या मामला बोलना है, बस “सही” या “गलत” नहीं। उत्तर बोर्ड-कार्य की तालिका में भरिए।
  3. 15–22 मिनट · पृष्ठ 89 की प्रश्नावली। हर विद्यार्थी 17 प्रश्नों के उत्तर अपनी कॉपी में ख़ुद के लिए लिखे: हमेशा (क), कभी–कभी (ख) या कभी नहीं (ग)। किताब की टिप्पणी से नतीजा निकलवाइए: प्रश्न 5, 12, 13, 15 और 16 पर ‘ग’ और बाक़ी पर ‘क’ हो, तो पूरी तरह जागरूक; उल्टा हो, तो जागरूक होने की ज़रूरत; सब पर ‘ख’, तो आंशिक रूप से जागरूक। किसी के उत्तर या नतीजे मत माँगिए। फिर पूरी कक्षा से पूछिए: ये पाँच प्रश्न उल्टे क्यों गिने जाते हैं?
  4. 22–32 मिनट · लिफ़ाफ़ा खोलिए। पहले दिन की छह-आठ पर्चियाँ ज़ोर से पढ़िए, बिना नाम के। हर पर्ची को कक्षा अध्याय पर परखे: रसीद या बिल था? पहले किससे शिकायत होगी? सलाह कहाँ मिलेगी? किस अधिकार की बात है? किस आयोग में जाएँगे? नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। आख़िर में अधिकार-चार्ट की छह पंक्तियाँ एक बार साथ पढ़िए।
  5. 32–36 मिनट · परियोजनाएँ बाँटिए। पृष्ठ 88 की छह परियोजनाएँ समूहों में बाँटिए; तरीका नीचे “प्रोजेक्ट और गतिविधि” वाली तालिका में है। श्रीमती कृष्णा का पत्र (परियोजना 2) हर विद्यार्थी घर पर लिखे।
  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। पहले दिन वाला सवाल फिर से: दुकान से लाया पैकेट खराब निकले और दुकानदार कहे “कहीं और जाइए”, तो अब आप क्या करेंगे? तीन कदम, क्रम से।

पर्ची से अध्याय तक (चरण 4)

पर्ची से अध्याय तक

पहले दिन की पर्चीखराब पैकेट; दुकानदार ने कहा "कहीं और जाइए"
विक्रेता से शिकायतरसीद या बिल साथ रखिए
परिषद् से सलाहजैसे प्रकाश, चित्र 5
आयोगदावे की रकम के हिसाब से ज़िला, राज्य या राष्ट्रीयख़ुद, या वकील के साथ
NCERT, पृष्ठ 82–84 · पर्ची वाली कड़ी हमारी ओर से

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

प्रश्नसही विकल्पकिताब से कारण
12 (1) एक उत्पाद के घटकों का विवरण(ङ) सूचना का अधिकारपैकेट पर अवयवों की जानकारी (पृष्ठ 80)
12 (2) एगमार्क(ग) अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाणगुणवत्ता का प्रमाणक चिह्न (पृष्ठ 85)
12 (3) स्कूटर में खराब इंजन से दुर्घटना(क) सुरक्षा का अधिकारखतरनाक वस्तु से सुरक्षा (पृष्ठ 79)
12 (4) ज़िला उपभोक्ता आयोग(ख) उपभोक्ता मामलों में संबंधज़िला स्तर पर उपभोक्ता विवाद सुनता है (पृष्ठ 84)
12 (5) फूड फोर्टिफिकेशन(छ) खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलानाफोर्टिफिकेशन का चिह्न (पृष्ठ 85)
12 (6) उपभोक्ता इंटरनेशनल(घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था100 से अधिक देशों की 200 संस्थाओं की संरक्षक (पृष्ठ 78)
12 (7) भारतीय मानक ब्यूरो(च) वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक विकसित करने वाली एजेंसीमानक बनाने वाले संगठन (पृष्ठ 85)
13 (क) कोपरा केवल सामानों परगलतरेजी, अबिरामी, प्रकाश के मामले सेवाओं के; 2019 में सेवा प्रदाता भी ज़िम्मेदार
13 (ख) भारत में विशिष्ट निवारण व्यवस्थासहीविशिष्ट न्यायालय (पृष्ठ 86)
13 (ग) शोषण हो तो निश्चित रूप से ज़िला आयोगगलतपहले विक्रेता से शिकायत और परिषद् से सलाह, जैसे प्रकाश; आयोग दावे की रकम से तय
13 (घ) बड़ा नुकसान हो, तभी आयोग जाना लाभप्रदगलतज़िला आयोग 1 करोड़ तक सुनता है; अबिरामी को 28,000 रुपये लौटाने का आदेश मिला
13 (ड.) हॉलमार्क आभूषणों की गुणवत्ता का प्रमाणसहीगुणवत्ता का भरोसा दिलाने वाले चिह्नों में (पृष्ठ 85)
13 (च) निवारण प्रक्रिया अत्यंत सरल और शीघ्रगलत“जटिल, खर्चीली और समय साध्य” (पृष्ठ 86)
13 (छ) मुआवज़ा क्षति की मात्रा परसहीपृष्ठ 82

बाक़ी प्रश्न गृहकार्य में बँटे हैं; पूरे उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं। बच्चों की कॉपी जाँचते समय यह तालिका साथ रखिए।

प्रश्नकब दियाउत्तर की मुख्य बात
1, 4कालांश 1अकेला और बिखरा उपभोक्ता; कम तौल, बिना बताए शुल्क, मिलावट, झूठे दावे
2, 5कालांश 21960 के दशक के कारण; आंदोलन का दबाव; 1986 का कोपरा
3, 6, 7, 9कालांश 8जागरूकता के उदाहरण; उपभोक्ता के कर्त्तव्य; गुणवत्ता के चिह्न; छह अधिकार मामलों के साथ
8, 10, 11कालांश 9कानूनी उपाय; एकजुटता के तरीके; प्रगति और कमियाँ
12, 13कालांश 10ऊपर की तालिका

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • प्रश्न 12 की छपाई। “विकसित करने वाली एजेंसी” वाली पंक्ति बाएँ खाने में (4) के नीचे छप गई है; यह दाएँ खाने के (च) का हिस्सा है, इसलिए (4) को “ज़िला उपभोक्ता आयोग” पढ़िए।
  • “(ड.)” अक्षर। प्रश्न 13 में (घ) के बाद “(ड.)” छपा है, जैसा पृष्ठ 84 पर; उत्तर में यही अक्षर रखिए।
  • “प्रश्नावली में ‘क’ हमेशा अच्छा।” प्रश्न 5, 12, 13, 15 और 16 उल्टे गिने जाते हैं, क्योंकि ये लापरवाही की आदतें हैं: ठगे जाने को दुर्भाग्य मानना, ऊँची कीमत को ऊँची गुणवत्ता मानना, आकर्षक प्रस्तावों पर बेहिचक दौड़ना, नियमित दुकानदार पर आँख मूँदकर भरोसा, और वज़न की शंका के बिना होम डिलिवरी मान लेना।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “सार” और “अभ्यास” चलाइए; “परियोजना” वाला हिस्सा बच्चे घर पर खोल सकते हैं।
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए निकास-पर्ची में तीन कदम काफ़ी हैं: बिल रखिए, दुकानदार से शिकायत कीजिए, बात न बने तो आयोग जाइए।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: श्रीमती कृष्णा की शिकायत किस आयोग में जाएगी, और पत्र के साथ क्या लगाना चाहिए? (टी.वी. का दावा 1 करोड़ से बहुत कम है, इसलिए ज़िला आयोग में; बिल और वारंटी, क्योंकि अरिता के मामले में आयोग ने भी पहले यही माँगे थे।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): रसीद या बिल सँभालकर दुकानदार से शिकायत; बात न बने तो उपभोक्ता संरक्षण परिषद् से सलाह; फिर दावे की रकम के हिसाब से आयोग में शिकायत, ख़ुद या वकील के साथ। जिन बच्चों ने अब भी “कुछ नहीं कर सकते” या “दुकान बदल लेंगे” लिखा हो, उनसे अगले दिन दो मिनट अलग से बात कीजिए और प्रकाश वाले चित्र साथ देखिए।
  • गृहकार्य: परियोजना 2 का पत्र; प्रश्न बैंक के तीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक।
    • नमूना उत्तर — पृष्ठ 88, परियोजना 2 (श्रीमती कृष्णा का पत्र): सेवा में, ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, [ज़िले का नाम]। विषय: खराब रंगीन टेलीविज़न के बारे में शिकायत। पत्र में लिखिए: किस दुकान से, किस तारीख को, 6 महीने की वारंटी वाला रंगीन टी.वी. खरीदा; तीन महीने बाद वह बंद हो गया; दुकानदार ने इंजीनियर भेजा, पर टी.वी. बार–बार खराब होता रहा, और फिर शिकायतों का कोई जवाब नहीं मिला; टी.वी. वारंटी की अवधि में खराब हुआ, यह दोषपूर्ण वस्तु और सेवा में कमी का मामला है; निवेदन कि दुकानदार को टी.वी. बदलने या कीमत लौटाने और हर्जाना देने का आदेश दिया जाए। साथ में: खरीद का बिल, वारंटी कार्ड, शिकायतों का ब्योरा तारीख सहित।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड की “अंतिम पाँच मिनट” वाली सूची, फिर पूरा डेक।

पूरे अध्याय के लिए

अलग-अलग बच्चों के लिए

किसके लिएक्या कीजिए
जो बहुत पीछे हैंहर कालांश के “कमज़ोर विद्यार्थी” वाले एक-दो वाक्य ही पक्के कराइए। अधिकार-चार्ट की छह पंक्तियाँ और कॉपी के पहले पन्ने की “मामलों वाली तालिका” उनके लिए पूरा अध्याय हैं।
औसत बच्चेहर अधिकार के साथ किताब का एक मामला, और तीन स्तर के आयोगों की किताब वाली सीमाएँ। प्रश्न बैंक के घ और ङ खंड।
तेज़ बच्चेहर कार्ड का “तेज़ विद्यार्थी” वाला सवाल, प्रश्न बैंक के च और छ खंड, और परियोजना 6 का सर्वेक्षण।
जो बोलने में झिझकते हैंसमूह में पर्ची पढ़ने का काम दीजिए: कालांश 6 के विज्ञापन, कालांश 7 के अरिता के कदम, कालांश 8 के मामले। लिखी बात पढ़ना ख़ुद बोलने से आसान है।

सतत मूल्यांकन

साधनकबक्या देखिए
निकास-पर्चीहर कालांशआज के लक्ष्य वाली बात कितने बच्चों तक पहुँची; अगले दिन की शुरुआत उसी से
मामलों वाली तालिकाकालांश 3–7कौन, क्या गलत हुआ, कहाँ गया, क्या मिला; चारों खाने किताब से भरे हों
अरिता के कदमों की छँटाईकालांश 7क्रम के साथ यह भी कि आयोग से पहले शिकायत और सलाह आती है
पृष्ठ 86 की छँटाईकालांश 8अधिकार के साथ कारण; बस नाम से मिलान नहीं
पहले दिन की पर्ची, फिर सेकालांश 10पहले और अब के जवाब में फ़र्क: रसीद, शिकायत, सलाह, आयोग

लिखित मूल्यांकन

अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; अंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल लीजिए।

प्रकारअंकक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ1कोपरा का वर्ष; प्रश्न 12 जैसा सुमेलन; किसी चिह्न का अर्थ
अति लघूत्तरीय224 दिसंबर क्यों; परिषद् का एक काम; प्रमाण अनिवार्य वाली दो वस्तुएँ
लघूत्तरीय3रेजी या अबिरामी का मामला किस रास्ते गया; परिषद् और आयोग का अंतर
संख्यात्मक या तालिका-आधारित3किताब की सीमाओं से दावे के लिए आयोग चुनना; अबिरामी के मामले के आँकड़ों की तालिका
दीर्घ उत्तरीय5प्रश्न 11 जैसा: आंदोलन की प्रगति और कमियाँ; या प्रश्न 9: छह अधिकार मामलों के साथ
केस-आधारित4पृष्ठ 86 जैसा नया मामला: कौन-सा अधिकार, और शिकायत कहाँ

अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए

  1. अधिकार के साथ मामला। “सुरक्षा का अधिकार” लिखकर रुक जाना आधा उत्तर है; किताब का मामला या उदाहरण साथ हो।
  2. आंदोलन और कानून के साल अलग। आंदोलन 1960 के दशक में उभरा, कोपरा 1986 में बना, संशोधन 2019 में हुआ; इन्हें मिलाने पर अंक कटेंगे।
  3. किताब के आँकड़े। आयोगों की सीमाएँ, अबिरामी की रकमें और संगठनों की गिनती किताब वाली लिखें; अपनी ओर से रकम या नतीजा न जोड़ें, जैसे प्रकाश के फ़ैसले की रकम, जो किताब में है ही नहीं।

प्रोजेक्ट और गतिविधि

#प्रोजेक्टकैसे
1उपभोक्ता जागरूकता सप्ताह का पोस्टर (पृष्ठ 88; पृष्ठ 86 की गतिविधि 1 भी)सभी अधिकार एक पोस्टर पर; पृष्ठ 84 और 85 के विज्ञापनों से विचार और संकेत लीजिए, अंग्रेज़ी शिक्षक की मदद से
2श्रीमती कृष्णा का शिकायत-पत्रकालांश 10 के गृहकार्य वाले नमूने के ढाँचे पर; बिल और वारंटी साथ लगाने की बात ज़रूर
3विद्यालय में उपभोक्ता क्लबबनावटी जागरूकता कार्यशाला; विद्यालय के पास की पुस्तक दुकानों, भोजनालयों और दुकानों के मुद्दे
4नारों वाले विज्ञापनकिताब के नारे, जैसे “सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता है।”; “उठो, जागो और तब तक मत रुको” अपने शब्दों में पूरा कीजिए
5आसपास के चार–पाँच लोगों का साक्षात्कारवे कैसे शोषण का शिकार बने, और उन्होंने क्या किया; नाम लिखना ज़रूरी नहीं
6पृष्ठ 89 की प्रश्नावली से सर्वेक्षणउत्तर बिना नाम के इकट्ठा कीजिए; किताब की टिप्पणी से गिनिए कि कितने लोग पूरी तरह, आंशिक रूप से जागरूक हैं, या किन्हें जागरूक होने की ज़रूरत है

शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ

  1. कक्षा में किताब के आँकड़े ही बोलिए। आयोगों की सीमाएँ (1 करोड़, 10 करोड़) और बाक़ी आँकड़े किताब के हैं। आज की सीमाएँ और शिकायत के आज के रास्ते संवर्धन वाले पन्ने पर हैं; कोई बच्चा पूछे तो वहीं दिखाइए।
  2. पोस्टर किताब के चित्र हैं। पृष्ठ 84–85 के पोस्टर सरकारी विज्ञापन के उदाहरण के रूप में पढ़ाइए। उन पर छपा समय या वेबसाइट आज के लिए मत बताइए; मदद पाने के आज के तरीके संवर्धन वाले पन्ने पर हैं।
  3. मामले किताब के लोगों के ही। रेजी, अमृता, अबिरामी, प्रकाश और अरिता पर चर्चा कीजिए; बच्चों से उनके घर की ठगी या झगड़े के निजी किस्से मत निकलवाइए। प्रश्नावली और सर्वेक्षण में नाम मत इकट्ठा कीजिए।
  4. किताब के चित्र किताब में ही दिखाइए। प्रकाश के नौ चित्र (पृष्ठ 82–83) और पृष्ठ 85 के चिह्न बच्चे किताब खोलकर देखें; बोर्ड पर बस तालिका बनाइए।
  5. अधिकार-चार्ट सँभालकर रखिए। यह कालांश 3 से 10 तक हर दिन काम आता है, और अगले साल फिर बन सकता है।