कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 55 से 73 · कालांश — 10, हर एक 40 मिनट
इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले “एक नज़र में” वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, “तैयारी” वाली तालिका में समझाए गए हैं।
अध्याय का बड़ा विचार — अध्याय इस सवाल से शुरू होता है कि आज हमारे बाज़ारों में इतने विकल्प कहाँ से आए। जवाब है बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश, जो अलग-अलग देशों के उत्पादन और बाज़ारों को जोड़ रहे हैं। इसी जुड़ाव को किताब वैश्वीकरण कहती है: “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” (पृष्ठ 62)। प्रौद्योगिकी, उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन ने इसे तेज़ किया। पर इसका लाभ सबको बराबर नहीं मिला: शहरों के धनी उपभोक्ताओं और बड़ी कंपनियों को फ़ायदा हुआ, जबकि होसुर के रवि जैसे छोटे उत्पादक और दिल्ली की सुशीला जैसी श्रमिक प्रतिस्पर्धा की मार में आए। इसलिए अध्याय न्यायसंगत वैश्वीकरण पर ख़त्म होता है, जिसमें सरकार और जनता दोनों की भूमिका है।
हमारी ओर से पूरे अध्याय के लिए एक सवाल: वैश्वीकरण किसके लिए नये मौके लाया, और किसके लिए नई मुश्किलें? पहले दिन बच्चे पर्ची पर लिखेंगे कि अगर उनके कस्बे में किसी विदेशी कंपनी का सस्ता सामान भर जाए, तो किसका भला होगा और किसका नुकसान; कालांश 10 में वही पर्चियाँ रवि, सुशीला और शहरों के उपभोक्ताओं की कहानियों पर परखी जाएँगी।
एक नज़र में — दस कालांश और उनकी सामग्री
पूरा अध्याय एक कहानी की तरह चलता है। हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।
दस कालांश, एक कहानी
सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय
| कालांश और टॉपिक | पृष्ठ | स्लाइड | इंटरैक्टिव | प्रश्न बैंक | फ़्लैशकार्ड |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 · अन्तरदेशीय उत्पादन | 55–56 | शुरू की तीन स्लाइड, फिर “अन्तरदेशीय उत्पादन” | शुरुआत, 1. अन्तरदेशीय उत्पादन | क1, क2 · घ1 · ङ1 | 1–6 |
| 2 · विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना | 57–59 | “विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना” | 2. उत्पादन को जोड़ना | क3–5 · ख1–5 · ग4 · घ2 · ङ2 · च1 · छ1 | 7–23 |
| 3 · विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण | 59–61 | “विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण” | 3. विदेश व्यापार | क6, क7 · घ3 · ङ3 | 24–29 |
| 4 · वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक | 61–63 | “वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक” | 4. वैश्वीकरण क्या है, 5. संभव बनाने वाले कारक | क8, क9 · ख6 · ग1 · घ4, घ5 · ङ4 | 30–38 |
| 5 · विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण | 64 | “विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण” | 6. उदारीकरण | क10, क11 · ख7, ख8 · ग2, ग3 · घ7 · ङ5 · च2 | 40–50 |
| 6 · विश्व व्यापार संगठन | 65–66 | “विश्व व्यापार संगठन” | 7. विश्व व्यापार संगठन | क12, क13 · ख9 · घ8 · ङ6 · च3 · छ4 | 51–56 |
| 7 · भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव | 66–67 | “भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव” | 8. भारत पर प्रभाव | क14–16 · घ6 · ङ7, ङ8 · च5 | 39, 57–65 |
| 8 · छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार | 68–70 | “छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार” | 9. छोटे उत्पादक और श्रमिक | क17, क18 · ख10 · ग5 · घ9, घ10 · च4 · छ2, छ3 | 66–79 |
| 9 · न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष | 70–71 | “न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष” | 10. न्यायसंगत वैश्वीकरण | क19, क20 · ग6 · च6 · छ5 | 80–83 |
| 10 · सारांश, प्रश्नावली और समापन | 71–73 | “सारांश, प्रश्नावली और समापन” | सार, अभ्यास, परियोजना | तीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक | “अंतिम पाँच मिनट” वाली सूची, फिर पूरा डेक |
प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खण्ड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, और छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न। फ़्लैशकार्ड वाले खाने में कार्डों के नंबर हैं।
पढ़ाने से पहले
तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें
हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।
| हिस्सा या औज़ार | यह क्या है | कैसे तैयार करें |
|---|---|---|
| किताब | NCERT की आर्थिक विकास की समझ, कक्षा 10, अध्याय 4। कार्ड में आज के पृष्ठ लिखे हैं। | एक दिन पहले वे पृष्ठ ख़ुद पढ़िए। कार्ड में तिरछे अक्षरों वाली पंक्तियाँ किताब के शब्द हैं; कक्षा में यही पढ़वानी हैं। |
| स्लाइड | इस अध्याय की प्रस्तुति का पाठ: हर स्लाइड पर क्या दिखाना और बोलना है। हर कालांश की स्लाइडें कौन-सी हैं, यह “एक नज़र में” वाली तालिका के “स्लाइड” खाने में लिखा है। | प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड हो तो स्लाइड बनाने की ज़रूरत नहीं: स्लाइड शो खोलिए और पूरे पर्दे पर चलाइए। इंटरनेट का भरोसा न हो तो उसी पन्ने से फ़ाइल पहले ही डाउनलोड कर लीजिए। प्रोजेक्टर न हो तो भी कालांश चलेगा; कार्ड के चरण बोर्ड और किताब से हैं। |
| इंटरैक्टिव अध्याय | वेबसाइट पर इस अध्याय का पन्ना: छँटाई वाले खेल, छोटे हिसाब और छोटे सवाल। लॉगिन नहीं चाहिए। कार्ड का लिंक सीधे आज वाले हिस्से पर खुलता है। | कक्षा से पहले लिंक खोलकर देख लीजिए; कहाँ रुकना है, यह कार्ड में लिखा है। पर्दा न हो तो बच्चे इसे घर पर दोहराने के लिए खोल सकते हैं। |
| लक्ष्य | कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी क्या बता पाए। | पढ़ाने से पहले एक बार पढ़िए। निकास-पर्ची का सवाल इसी लक्ष्य को जाँचता है। |
| साथ ले जाइए | कक्षा में ले जाने वाली चीज़ें, जैसे चार्ट पेपर, पर्चियाँ, खेल के कार्ड। | एक दिन पहले जुटा लीजिए। |
| 40 मिनट | मिनट-दर-मिनट चरण। | समय अंदाज़े से है। कोई चरण लंबा खिंचे तो भी आख़िरी चरण मत छोड़िए; उसी में निकास-पर्ची है। |
| चित्र | डिब्बों और तीरों वाला चित्र, जो किसी उलझी बात को एक नज़र में दिखाता है। लहरदार तीर वह कड़ी है जो हमारी ओर से जोड़ी गई है। | पहले कागज़ पर एक बार बनाकर देखिए। बोर्ड पर ऊपर से नीचे बनाइए: एक डिब्बा, फिर तीर पर लिखा शब्द बोलिए, फिर अगला डिब्बा। हर चित्र के साथ डाउनलोड का बटन है; उससे चित्र छाप सकते हैं या पर्दे पर दिखा सकते हैं। |
| बोर्ड-कार्य | कालांश के अंत तक बोर्ड पर क्या बना हो। बच्चे इसे कॉपी में उतारते हैं। | कार्ड का चित्र देखकर बोर्ड पर जगह का अंदाज़ा पहले से कर लीजिए। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात अगले दिनों में काम आनी है, वह कॉपी में या चार्ट पर रहे। |
| यहाँ बच्चे अटकेंगे | आम ग़लतफ़हमियाँ, और कमज़ोर व तेज़ विद्यार्थियों के लिए सुझाव। | पढ़ाने से पहले पढ़ लीजिए, ताकि ग़लतफ़हमी आते ही पहचान सकें। |
| निकास-पर्ची | कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट में एक-दो छोटे सवाल। हर विद्यार्थी जवाब कागज़ की छोटी पर्ची पर लिखता है और कक्षा से जाते समय आपको दे देता है। इससे उसी दिन पता चल जाता है कि आज की बात कितने बच्चों तक पहुँची। | कॉपी का आधा पन्ना काफ़ी है; सवाल बोर्ड पर लिख दीजिए। पर्चियाँ उसी दिन देखिए। जो बात ज़्यादा बच्चों ने ग़लत लिखी हो, उसे अगले कालांश की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए। पर्ची पर अंक मत दीजिए; यह जाँच आपके अपने लिए है। |
| प्रश्न बैंक | वेबसाइट पर इस अध्याय के प्रश्न, उत्तर के साथ, सात खंडों में: क वस्तुनिष्ठ, ख रिक्त स्थान, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय, ङ लघूत्तरीय, च दीर्घ उत्तरीय, छ संख्यात्मक और तालिका-आधारित। “क3–5” का मतलब है खंड क के प्रश्न 3 से 5। | गृहकार्य के प्रश्न-संख्याएँ बोर्ड पर लिखिए। जिनके पास फ़ोन नहीं है, उनके लिए वे प्रश्न बोर्ड पर लिख दीजिए या छपवा लीजिए। |
| फ़्लैशकार्ड | दोहराने के लिए छोटे सवाल-जवाब। पन्ने पर हर कार्ड की संख्या (# वाला खाना) लिखी है। | बच्चों को कार्ड-संख्याएँ बता दीजिए। पन्ने पर “आता है / नहीं आता” वाला अभ्यास भी है, जो उसी फ़ोन या कंप्यूटर पर याद रखता है कि कौन-सा कार्ड कब दोहराना है। |
हर कालांश से पहले:
- आज के कार्ड में लिखे किताब के पृष्ठ पढ़िए।
- मिनट-दर-मिनट चरण और चित्र पढ़िए; चित्र एक बार कागज़ पर बनाइए।
- “साथ ले जाइए” वाली चीज़ें जुटाइए, और स्लाइड या इंटरैक्टिव अध्याय इस्तेमाल करना है तो लिंक खोलकर जाँच लीजिए।
- पिछले कालांश की निकास-पर्चियाँ देखिए; जो बात कमज़ोर रही, उसे आज की शुरुआत में दो मिनट दोहराइए।
पढ़ाने का क्रम: पहले कहानियाँ, फिर नाम
यह अध्याय उदाहरणों पर टिका है: औद्योगिक उपकरण बनाने वाली कंपनी (पृष्ठ 56), कारगिल और फोर्ड मोटर्स (पृष्ठ 58–59), चीन के खिलौने (पृष्ठ 60), लंदन की पत्रिका (पृष्ठ 63), अमेरिका के किसान (पृष्ठ 65), और होसुर के रवि और दिल्ली की सुशीला (पृष्ठ 68–69)। हर उदाहरण में बच्चे पहले ख़ुद देखें कि क्या कहाँ से कहाँ गया, किसने किसमें पैसा लगाया, और किसका भला हुआ, किसका नुकसान। “विदेशी निवेश”, “बाज़ारों का एकीकरण”, “उदारीकरण” जैसे नाम उसके बाद आएँ।
इस क्रम को मत तोड़िए। अध्याय का सबसे अच्छा सबक़ कालांश 8 में ख़ुद बच्चों के हाथ आता है: जो प्रतिस्पर्धा कालांश 3 में भारतीय ख़रीदारों के लिए सस्ते खिलौने लाई थी, वही रवि की संधारित्र वाली इकाई को आधे से छोटा कर देती है। अगर पहले ही बता दिया कि वैश्वीकरण से छोटे उत्पादकों को नुकसान हुआ, तो बच्चे रवि की समय-रेखा भरेंगे, पर यह जोड़ ख़ुद नहीं देखेंगे। कालांश 8 में “असर सब पर एक जैसा नहीं” वाली बात तभी बोलिए, जब हर समूह रवि की समय-रेखा और सुशीला की “पहले और अब” तालिका भर चुका हो। इसी तरह कालांश 3 में पृष्ठ 60 खोलने से पहले बच्चे अंदाज़ा लिखें कि सौ में से कितनी खिलौना-दुकानों में एक साल के भीतर चीनी खिलौने आ गए होंगे।
सामग्री — यह जुटा लीजिए
| # | क्या | किस कालांश में |
|---|---|---|
| 1 | हर विद्यार्थी के लिए एक छोटी पर्ची, और पर्चियाँ रखने के लिए एक लिफ़ाफ़ा | 1 (लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा) |
| 2 | चार बड़ी पर्चियाँ: “संयुक्त राज्य अमेरिका”, “चीन”, “मेक्सिको और पूर्वी यूरोप”, “भारत” | 1 |
| 3 | छँटाई के लिए छह कार्ड, हर एक पर किताब का एक उदाहरण (कार्ड कालांश 2 के चरण 3 में लिखे हैं) | 2 |
| 4 | एक चार्ट पेपर और मोटा स्केच पेन: दो खाने, “लाभ मिला” और “मार पड़ी”, कक्षा की दीवार पर टाँगने के लिए | 3 (कालांश 10 तक टँगा रहे) |
| 5 | खिलौनों के खेल के लिए दो दाम-पर्चियाँ, जैसे “भारतीय खिलौना: ज़्यादा दाम” और “चीनी खिलौना: कम दाम, नया डिज़ाइन” | 3 |
| 6 | दरवाज़े के खेल के लिए दस छोटी चीज़ें, जैसे ख़ाली डिब्बियाँ या चॉक के टुकड़े, और पाँच पर्चियाँ जिन पर “कर” लिखा हो | 5 |
| 7 | विश्व का मानचित्र, अगर स्कूल में हो | 1 और 4 |
कक्षा-व्यवस्था
- बच्चों को 4–5 के समूहों में बैठाइए, पूरे अध्याय भर वही समूह।
- “लाभ मिला / मार पड़ी” का चार्ट। कालांश 3 में चार्ट पेपर पर दो खाने बनाइए और कक्षा की दीवार पर टाँगिए। पहली पंक्तियाँ चीन के खिलौनों से आएँगी: भारतीय ख़रीदार एक खाने में, भारतीय खिलौना-निर्माता दूसरे में। आगे कालांश 6 के अमेरिकी और दूसरे देशों के किसान, कालांश 7 के उपभोक्ता और कंपनियाँ, और कालांश 8 के रवि और सुशीला इसी चार्ट पर जुड़ते जाएँ। बोर्ड दूसरे शिक्षक भी इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जो बात कई दिन दिखनी है, वह बोर्ड पर नहीं, चार्ट पर रहे। चार्ट टाँगना संभव न हो तो उसे मोड़कर पर्चियों के लिफ़ाफ़े के साथ रखिए और ज़रूरत के दिन खोलिए।
- कॉपी का पहला पन्ना। हर विद्यार्थी अध्याय की कॉपी के पहले पन्ने पर तीन कॉलम बनाए: कौन | वैश्वीकरण से क्या बदला | लाभ या मार? पहली पंक्तियाँ, भारतीय ख़रीदार और भारतीय खिलौना-निर्माता, कालांश 3 में भरेंगी; दूसरे देशों के किसान कालांश 6 में; शहरों के धनी उपभोक्ता और शीर्ष भारतीय कंपनियाँ कालांश 7 में; और रवि और सुशीला कालांश 8 में। आख़िरी कॉलम “लाभ या मार?” हमारी ओर से है।
- बोर्ड हर कालांश में नया। हर कार्ड का “बोर्ड-कार्य” उसी कालांश में बनता है और कॉपी में उतरता है।
अधिगम प्रतिफल
| # | प्रतिफल | कालांश | जाँच |
|---|---|---|---|
| 1 | बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा बता पाएगा, और किताब के औद्योगिक उपकरण वाले उदाहरण से समझा पाएगा कि उत्पादन कई देशों में क्यों बँटा | 1 | निकास-पर्ची 1, चार देशों वाला खेल |
| 2 | निवेश और विदेशी निवेश में अंतर, और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादन जोड़ने के तरीके किताब के उदाहरणों के साथ बता पाएगा | 2 | उदाहरणों की छँटाई, प्रश्न 4 का गृहकार्य |
| 3 | विदेश व्यापार से उत्पादक और ख़रीदार को क्या मिलता है, और बाज़ार कैसे जुड़ते हैं, यह चीन के खिलौनों से समझा पाएगा | 3 | खिलौनों का खेल, प्रश्न 8 का गृहकार्य |
| 4 | वैश्वीकरण की परिभाषा दे पाएगा, बता पाएगा कि किसका आदान-प्रदान बढ़ा और किसका नहीं, और प्रौद्योगिकी की भूमिका समझा पाएगा | 4 | निकास-पर्ची 4, प्रश्न 1 का गृहकार्य |
| 5 | व्यापार अवरोधक, कोटा और उदारीकरण समझा पाएगा, और 1950–60 के दशकों और करीब सन् 1991 की नीतियों के कारण बता पाएगा | 5 | दरवाज़े का खेल, प्रश्न 2 और 7 का गृहकार्य |
| 6 | विश्व व्यापार संगठन का ध्येय, और उसके नियमों पर विकासशील देशों की शिकायत अमेरिका की कृषि के उदाहरण से बता पाएगा | 6 | पृष्ठ 66 की गतिविधि, प्रश्न 5 का गृहकार्य |
| 7 | भारत में वैश्वीकरण से किन्हें लाभ हुआ, और सरकार ने विदेशी निवेश के लिए कौन-से कदम उठाए, यह बता पाएगा | 7 | लाभ वाली सूची, प्रश्न 3 का गृहकार्य |
| 8 | रवि और सुशीला की कहानियों से समझा पाएगा कि बढ़ी प्रतिस्पर्धा का असर छोटे उत्पादकों और श्रमिकों पर कैसा पड़ा | 8 | रवि की समय-रेखा, सुशीला की तालिका, प्रश्न 6 का गृहकार्य |
| 9 | न्यायसंगत वैश्वीकरण का अर्थ, और उसमें सरकार और जनता की भूमिका बता पाएगा | 9 | निकास-पर्ची 9, प्रश्न 10 का गृहकार्य |
| 10 | पहले दिन की पर्ची वाले अंदाज़े को अध्याय की कहानियों पर परख पाएगा | 10 | पर्चियों वाली चर्चा, प्रश्न 11 से 13 |
कालांश-दर-कालांश
कालांश 1 — अन्तरदेशीय उत्पादन
किताब — पृष्ठ 55–56 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड और “अन्तरदेशीय उत्पादन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — शुरुआत, 1. अन्तरदेशीय उत्पादन
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा अपने शब्दों में बता पाए, और किताब के औद्योगिक उपकरण वाले उदाहरण से समझा पाए कि एक ही कंपनी का काम कई देशों में क्यों बँटा है।
साथ ले जाइए — हर विद्यार्थी के लिए एक पर्ची और एक लिफ़ाफ़ा, चार देशों वाली चार बड़ी पर्चियाँ, और हो सके तो विश्व का मानचित्र।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पहले दिन की पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखे: मान लीजिए आपके कस्बे के बाज़ार में किसी विदेशी कंपनी का सस्ता सामान भर जाए, या पास में उसका बड़ा कारखाना लग जाए। इससे किसका भला होगा, और किसका नुकसान? नाम नहीं लिखना है। पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में रख दीजिए; यह लिफ़ाफ़ा कालांश 10 में खुलेगा। यह सवाल हमारी ओर से है।
- 5–12 मिनट · बाज़ार में इतने विकल्प। पृष्ठ 55 पढ़वाइए। किताब कहती है कि आज हममें से कुछ लोगों के सामने वस्तुओं और सेवाओं के बहुत विकल्प हैं, और दो दशक पहले भारत के बाज़ारों में ऐसी विविधता नहीं थी। पूछिए: आपके घर की कौन-सी चीज़ें आपको किसी दूसरे देश से जुड़ी लगती हैं? तीन-चार जवाब बोर्ड के कोने में लिखिए; आज के अंत में इन पर लौटेंगे।
- 12–24 मिनट · एक कंपनी, चार देश। चार बच्चों को देशों वाली पर्चियाँ दीजिए और कक्षा के चार कोनों में खड़ा कीजिए। पृष्ठ 56 का बॉक्स पढ़वाइए: औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बड़ी कंपनी के उत्पादों का डिज़ाइन संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुसंधान केन्द्रों में बनता है, पुर्ज़े चीन में बनते हैं, जहाज़ से मेक्सिको और पूर्वी यूरोप जाते हैं, वहाँ उपकरणों का संयोजन होता है, और तैयार उपकरण पूरे विश्व में बिकते हैं; ग्राहक देखभाल का काम भारत के कॉल सेंटरों से होता है। जैसे-जैसे पढ़ा जाए, उस कोने वाला बच्चा अपने देश का काम ज़ोर से बोले। मानचित्र हो तो चारों जगहें उस पर दिखाइए।
- 24–32 मिनट · यही देश क्यों? पृष्ठ 57 पर इसी उदाहरण का कारण है। हर कोने वाले बच्चे से पूछिए कि कंपनी उसके देश में क्यों आई, फिर किताब से मिलाइए: चीन सस्ता विनिर्माण स्थल है; मेक्सिको और पूर्वी यूरोप अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों के पास हैं; भारत में अत्यंत कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक हैं, जो ग्राहक देखभाल सेवा दे सकते हैं। किताब कहती है कि इससे कंपनी की लागत में लगभग 50–60 प्रतिशत बचत हो सकती है। फिर पृष्ठ 56 की परिभाषा पढ़वाइए और बोर्ड पर लिखिए: “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।”
- 32–36 मिनट · पहले और अब। पृष्ठ 56 से: बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यतः देशों की सीमाओं के अंदर ही होता था; सीमा पार कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद जाते थे। नीचे का चित्र बोर्ड पर बनाइए। फिर चरण 2 वाली चीज़ों पर लौटिए: उनमें से कोई किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी की हो सकती है, यह बात कालांश 10 की परियोजना में बच्चे ख़ुद जाँचेंगे।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। हर विद्यार्थी पर्ची पर लिखकर जाते समय आपको दे: (1) बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं? (2) किताब की कंपनी ने ग्राहक देखभाल का काम भारत में क्यों रखा?
पहले और अब (चरण 5)
पहले और अब
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। तीसरा खाना चरण 4 से भरिए।
| देश | कंपनी का कौन-सा काम | यही देश क्यों |
|---|---|---|
| संयुक्त राज्य अमेरिका | अनुसंधान केन्द्रों में उत्पादों का डिज़ाइन | कंपनी के अनुसंधान केन्द्र यहीं हैं |
| चीन | पुर्ज़े बनाना | सस्ता विनिर्माण स्थल |
| मेक्सिको और पूर्वी यूरोप | उपकरणों का संयोजन | अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से निकटता |
| भारत | कॉल सेंटर से ग्राहक देखभाल | कुशल इंजीनियर, अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “बहुराष्ट्रीय मतलब कई देशों में बिकने वाली कंपनी।” परिभाषा बिकने की नहीं, उत्पादन की है: एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व। बोर्ड पर “उत्पादन” शब्द के नीचे रेखा खींचिए।
- “कॉल सेंटर में तो कुछ बनता नहीं।” ग्राहक देखभाल भी एक सेवा है, और कंपनी का यह काम भी भारत में हो रहा है। आगे कालांश 4 और 7 में ऐसी सेवाएँ फिर आएँगी।
- शीर्षक का शब्द। किताब में शीर्षक “अन्तरदेशीय उत्पादन” छपा है, यानी कई देशों के बीच फैला उत्पादन। बच्चे इसे “अंतर्देशीय” (देश के अंदर) से न मिलाएँ; यहाँ अर्थ उल्टा है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “शुरुआत” और “1. अन्तरदेशीय उत्पादन” वाला हिस्सा कक्षा से पहले एक बार देख लीजिए, और “2. उत्पादन को जोड़ना” शुरू होने से पहले रुकिए; वह कालांश 2 का है।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: जो कंपनी एक से ज़्यादा देशों में उत्पादन करती या नियंत्रित करती है, वह बहुराष्ट्रीय कंपनी है।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर किसी दिन चीन में पुर्ज़े बनाना महँगा हो जाए, तो कंपनी क्या सोचेगी? (वह फिर ऐसी जगह खोजेगी जहाँ सस्ता श्रम और दूसरे संसाधन मिलें, क्योंकि किताब के अनुसार बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लागत कम और लाभ अधिक रखने के लिए ही जगह चुनती हैं।) यह सवाल हमारी ओर से है।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) जो कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है। (2) भारत में अत्यंत कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक हैं, जो ग्राहक देखभाल सेवा दे सकते हैं। जिन बच्चों ने (1) में सिर्फ़ “कई देशों में बिकती है” लिखा हो, उनके लिए कालांश 2 की शुरुआत में परिभाषा एक मिनट दोहराइए। पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा आज नहीं खुलेगा; उसे सँभालकर रखिए।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क1 और क2; तेज़ विद्यार्थी ङ1 भी।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–6।
कालांश 2 — विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना
किताब — पृष्ठ 57–59 · स्लाइड — “विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 2. उत्पादन को जोड़ना
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी निवेश और विदेशी निवेश का अर्थ बता पाए, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादन जोड़ने के तरीके किताब के उदाहरणों के साथ बता पाए, और फोर्ड मोटर्स के उदाहरण से बता पाए कि भारत उसके लिए बाज़ार भी है और उत्पादन का केन्द्र भी।
साथ ले जाइए — छँटाई के छह कार्ड (चरण 3 में लिखे हैं)।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 1 की निकास-पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए; ज़्यादातर यही होगी कि परिभाषा उत्पादन की है, बिक्री की नहीं।
- 5–12 मिनट · निवेश। पृष्ठ 57 पढ़वाइए: भूमि, भवन, मशीन और दूसरे उपकरणों की खरीद में खर्च किया गया पैसा निवेश है, और कोई भी निवेश इस आशा से किया जाता है कि ये परिसंपत्तियाँ लाभ कमाएँगी। फिर बोर्ड पर: “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।”
- 12–24 मिनट · उदाहरणों की छँटाई। बोर्ड पर तीन खाने बनाइए: साझेदारी (संयुक्त उत्पादन), स्थानीय कंपनी को खरीदना, छोटे उत्पादकों को ऑर्डर। पहले पृष्ठ 57–58 समूहों में पढ़वाइए। फिर हर समूह को एक कार्ड दीजिए और वह बताए कि कार्ड किस खाने में जाएगा। छह कार्ड, सब किताब से: (1) कारगिल फूड्स ने परख फूड्स खरीदी; (2) परख के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में; (3) बहुराष्ट्रीय कंपनी स्थानीय कंपनी को मशीनें खरीदने के लिए धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी देती है; (4) लुधियाना के एक घर में बड़ी कंपनी के लिए फुटबाल बनते हैं; (5) विकसित देशों की बड़ी कंपनियाँ वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल का सामान बनाने वाले छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देती हैं; (6) बड़ी कंपनी छोटे उत्पादकों के लिए मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करती है। उत्तर: कार्ड 1 और 2 स्थानीय कंपनी को खरीदना; कार्ड 3 साझेदारी; कार्ड 4, 5 और 6 छोटे उत्पादकों को ऑर्डर। कार्ड 1 और 2 से पृष्ठ 58 की पंक्ति पढ़वाइए: “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” कारगिल अब 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक है।
- 24–32 मिनट · फोर्ड मोटर्स। पृष्ठ 59 पढ़वाइए और नीचे का चित्र साथ-साथ बनाइए। फिर किताब की वह पंक्ति भी पढ़वाइए कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारों का उत्पादन बंद कर दिया है, पर कारों और कार के इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है। पूछिए: भारत फोर्ड के लिए बाज़ार था, या उत्पादन की जगह? (दोनों: 88,000 कारें यहीं बिकीं, 1,81,000 यहाँ से बाहर गईं।)
- 32–36 मिनट · पृष्ठ 57 और 59 के सवाल। समूह पृष्ठ 57 की ‘मेड इन थाइलैण्ड’ वाली गतिविधि पूरी करें, फिर पृष्ठ 59 के सवाल 1 से 3 पर बोलें। बाक़ी सवाल 4 से 7 गृहकार्य में। उत्तर नीचे “निकास-पर्ची और गृहकार्य” में हैं।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विदेशी निवेश किसे कहते हैं? (2) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता क्या है? किताब का एक उदाहरण लिखिए।
फोर्ड मोटर्स भारत में (चरण 4)
फोर्ड मोटर्स भारत में
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| तरीका | किताब का उदाहरण | स्थानीय उत्पादक के साथ क्या होता है |
|---|---|---|
| साझेदारी (संयुक्त उत्पादन) | फोर्ड ने महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से संयंत्र लगाया | उसे अतिरिक्त निवेश के लिए धन और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी मिलती है |
| स्थानीय कंपनी को खरीदना (सबसे आम रास्ता) | कारगिल फूड्स ने परख फूड्स खरीदी | परख के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में |
| छोटे उत्पादकों को ऑर्डर | वस्त्र, जूते-चप्पल, खेल का सामान; लुधियाना के फुटबाल | माल बड़ी कंपनी के ब्राण्ड नाम से बिकता है; मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें बड़ी कंपनी तय करती है |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “निवेश मतलब बैंक में पैसा जमा करना।” इस अध्याय में निवेश का अर्थ है भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों में लगाया गया पैसा, लाभ की आशा से।
- “बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ज़्यादातर नये कारखाने लगाती हैं।” किताब का सबसे आम रास्ता खरीदना है। प्रश्नावली के प्रश्न 13 (आ) में यही पकड़ा जाता है, जहाँ “नये कारखानों की स्थापना” भी एक विकल्प है।
- फोर्ड के दो आँकड़े उलट जाना। 88,000 भारत में बिकीं, 1,81,000 बाहर भेजी गईं। चित्र में दोनों डिब्बे अलग रखिए। फोर्ड के बारे में किताब के बाहर की कोई ख़बर कक्षा में मत जोड़िए; पृष्ठ 59 की आख़िरी पंक्ति काफ़ी है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “2. उत्पादन को जोड़ना” वाला हिस्सा चरण 3 के बाद खोलिए, और “3. विदेश व्यापार” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: बहुराष्ट्रीय कंपनी का निवेश विदेशी निवेश है; और वह अक्सर किसी स्थानीय कंपनी को खरीदकर आती है, जैसे कारगिल ने परख फूड्स खरीदी।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: कारगिल के लिए परख फूड्स को खरीदना, नया कारखाना लगाने से जल्दी का रास्ता क्यों हो सकता है? (ख़रीदी हुई कंपनी के तेल शोधक केन्द्र और उसका उत्पादन पहले से चल रहा होता है, इसलिए उत्पादन तुरंत बढ़ाया जा सकता है।) यह सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश। (2) स्थानीय कंपनियों को खरीदना और फिर उत्पादन फैलाना; जैसे कारगिल फूड्स ने परख फूड्स खरीदी।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क3–5, ख1–5, ग4, घ1, घ2 और ङ2; तेज़ विद्यार्थी च1 और छ1 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 4 कॉपी में; कालांश 10 में जाँच होगी।
- पृष्ठ 57 की गतिविधि का नमूना उत्तर — इसका एक तय उत्तर नहीं है; बस हर चरण अलग देश में दिखना चाहिए। जैसे: कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है, किसी दूसरे देश में बुनाई और रंगाई करा सकती है, बटन और ज़िप किसी तीसरे देश से मँगा सकती है, और सिलाई थाइलैण्ड में कराकर लेबल लगा सकती है। हर चरण वहाँ होता है जहाँ वह सबसे अच्छा और सस्ता हो।
- पृष्ठ 59 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) हाँ; यह अमेरिकी कंपनी 26 देशों में फैली है और भारत में भी इसका संयंत्र है, यानी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण। (2) बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश विदेशी निवेश है; फोर्ड ने चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए लगाए। (3) बाज़ार: वर्ष 2017 तक 88,000 कारें भारत में ही बिक रही थीं; कम लागत: यहाँ कम लागत पर श्रम और संसाधन मिले, इसलिए 1,81,000 कारें यहाँ से दूसरे देशों को गईं। (4) (अ) सस्ते श्रम और संसाधनों से पुर्ज़े सस्ते बनते हैं; (ब) स्थानीय विनिर्माता पास हों तो आपूर्ति सस्ती और जल्दी मिलती है; (स) भारत और चीन के बड़े ग्राहक-समूह के पास उत्पादन हो तो माल जल्दी और कम ढुलाई में पहुँचता है। (5) संयंत्र महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से बना, स्थानीय विनिर्माता पुर्ज़े देते हैं, और यहाँ बनी कारें और पुर्ज़े दूसरे देशों को जाते हैं; इस तरह भारत का उत्पादन दूसरे देशों के उत्पादन और बाज़ारों से जुड़ता है। (6) साधारण कंपनी प्रायः एक देश में उत्पादन करती है; बहुराष्ट्रीय कंपनी कई देशों में, और उसके पास इतनी संपदा होती है कि कई शीर्ष कंपनियों की संपत्ति विकासशील देशों की सरकारों के पूरे बजट से भी अधिक है। (7) अनुमान का सवाल है; एक तर्क यह है कि दूसरे देशों में कारखाने लगाने और कंपनियाँ खरीदने के लिए अपार धन चाहिए, जो विकसित देशों की बड़ी कंपनियों के पास है।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 7–23।
कालांश 3 — विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण
किताब — पृष्ठ 59–61 · स्लाइड — “विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 3. विदेश व्यापार
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि विदेश व्यापार से उत्पादक और ख़रीदार को क्या मिलता है, और चीन के खिलौनों के उदाहरण से समझा पाए कि व्यापार दो देशों के बाज़ारों को कैसे जोड़ देता है।
साथ ले जाइए — “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट पेपर, स्केच पेन, और खिलौनों के खेल की दो दाम-पर्चियाँ।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 2 की पर्चियों में अगर किसी ने “नये कारखाने” को सबसे आम रास्ता लिखा हो, तो कारगिल वाला उदाहरण एक मिनट दोहराइए।
- 5–10 मिनट · पुराना रिश्ता। पृष्ठ 59–60 से: लंबे समय से विदेश व्यापार ही देशों को जोड़ने का मुख्य माध्यम रहा है; ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियाँ व्यापार के लिए ही भारत आई थीं। विदेश व्यापार उत्पादक को अपने देश से बाहर के बाज़ार देता है, और ख़रीदार को दूसरे देशों में बनी वस्तुओं का विकल्प।
- 10–22 मिनट · खिलौनों का बाज़ार। दो बच्चे दुकानदार बनें: एक के पास “भारतीय खिलौना: ज़्यादा दाम” वाली पर्ची, दूसरे के पास “चीनी खिलौना: कम दाम, नया डिज़ाइन”। बाक़ी बच्चे ख़रीदार हैं; पूछिए कि कौन किस दुकान पर जाएगा। फिर हर बच्चा कॉपी में अंदाज़ा लिखे: सौ खिलौना-दुकानों में से कितनी में एक साल के भीतर चीनी खिलौने आ गए होंगे? अब पृष्ठ 60 पढ़वाइए: एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली। खेल हमारी ओर से है, आँकड़ा किताब का।
- 22–30 मिनट · किसे लाभ, किसे हानि। दीवार के चार्ट पर पहली पंक्तियाँ लिखिए: “लाभ मिला” में भारतीय ख़रीदार (कम कीमत पर अधिक विकल्प) और चीनी खिलौना-निर्माता (व्यवसाय बढ़ा); “मार पड़ी” में भारतीय खिलौना-निर्माता। बच्चे यही पंक्तियाँ कॉपी के पहले पन्ने पर भरें। फिर पृष्ठ 61 का निष्कर्ष पढ़वाइए: “इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।” समझाइए कि जुड़े हुए बाज़ारों में एक ही वस्तु का दाम दोनों जगह एक जैसा होने लगता है, और हज़ारों मील दूर के उत्पादक भी आपस में प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं।
- 30–36 मिनट · पृष्ठ 61 का इस्पात वाला सवाल। समूह पृष्ठ 61 के सवाल 3 और 4 पर काम करें और नीचे का चित्र भरें; सवाल 1 और 2 पर पूरी कक्षा से दो-दो जवाब लीजिए।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विदेश व्यापार से उत्पादक को क्या अवसर मिलता है, और ख़रीदार को क्या? (2) दो देशों के बाज़ार जुड़ गए, इसकी एक पहचान लिखिए।
भारत का इस्पात चीन के बाज़ार में (चरण 5)
भारत का इस्पात चीन के बाज़ार में
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| किसे | विदेश व्यापार से क्या मिला | चीन के खिलौनों में |
|---|---|---|
| उत्पादक | अपने देश से बाहर के बाज़ार | चीनी निर्माताओं को भारत का बाज़ार मिला |
| ख़रीदार | दूसरे देशों में बनी वस्तुओं का विकल्प | भारतीय ख़रीदारों को सस्ते और नये डिज़ाइन वाले खिलौने |
| दूसरे देश के उत्पादक | नई प्रतिस्पर्धा | भारतीय खिलौना-निर्माताओं को हानि |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “विदेश व्यापार और विदेशी निवेश एक ही बात है।” व्यापार में वस्तुएँ ख़रीदी-बेची जाती हैं; निवेश में बहुराष्ट्रीय कंपनी दूसरे देश में भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों में पैसा लगाती है। चीन के खिलौने व्यापार हैं; फोर्ड का संयंत्र निवेश।
- “एकीकरण मतलब दो देश एक हो गए।” देश नहीं, उनके बाज़ार जुड़ते हैं: एक ही वस्तु दोनों जगह मिलती है और उसका दाम एक जैसा होने लगता है।
- इस्पात वाले सवाल में दिशा उलट जाना। यहाँ भारत बेच रहा है और चीन ख़रीद रहा है, यानी खिलौनों से उल्टी दिशा। बोर्ड पर तीर से दिशा दिखाइए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “3. विदेश व्यापार” वाला हिस्सा चरण 4 के बाद खोलिए, और “4. वैश्वीकरण क्या है” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए खिलौनों वाली तालिका की तीन पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: भारत के खिलौना-निर्माता इस प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए क्या कर सकते हैं? (दाम घटाना या गुणवत्ता और डिज़ाइन सुधारना; किताब पृष्ठ 64 पर कहती है कि प्रतिस्पर्धा से उत्पादकों का प्रदर्शन सुधरेगा।) सवाल हमारी ओर से है।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) उत्पादक को अपने देश के बाहर के बाज़ार मिलते हैं; ख़रीदार को दूसरे देशों में बनी वस्तुओं का विकल्प। (2) एक ही वस्तु का दाम दोनों बाज़ारों में एक जैसा होने लगता है, या दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क6, क7, घ3 और ङ3। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 8 कॉपी में, खिलौनों से अलग उदाहरण के साथ (इस्पात वाला उदाहरण चल जाएगा)।
- पृष्ठ 61 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) अतीत में मुख्य माध्यम विदेश व्यापार था; अब उसके साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कई देशों में फैला उत्पादन और विदेशी निवेश भी देशों को जोड़ते हैं। (2) विदेश व्यापार देशों के बीच वस्तुओं की ख़रीद-बिक्री है; विदेशी निवेश बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दूसरे देश की परिसंपत्तियों में लगाया पैसा। (3) (क) चीन की इस्पात कंपनियों को अपने ही बाज़ार में भारतीय इस्पात से प्रतिस्पर्धा करनी होगी, और उन्हें दाम घटाने या गुणवत्ता सुधारनी पड़ेगी; (ख) भारत की इस्पात कंपनियों को चीन का बड़ा बाज़ार मिलेगा; (ग) चीन के उद्योगों के पास इस्पात के अधिक विकल्प होंगे, और वे सस्ता इस्पात चुन सकेंगे। (4) दोनों देशों का इस्पात एक बाज़ार में बिकेगा, ख़रीदार दोनों में से चुनेंगे, उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे, और दाम एक जैसा होने लगेगा; यही एकीकरण है।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 24–29।
कालांश 4 — वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक
किताब — पृष्ठ 61–63 · स्लाइड — “वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 4. वैश्वीकरण क्या है, 5. संभव बनाने वाले कारक
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी वैश्वीकरण की किताब वाली परिभाषा बता पाए, गिना पाए कि देशों के बीच किन चीज़ों का आदान-प्रदान बढ़ा और किसका ज़्यादा नहीं, और समझा पाए कि प्रौद्योगिकी ने इसे कैसे संभव बनाया।
साथ ले जाइए — हो सके तो विश्व का मानचित्र।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 3 की पर्चियों में “एकीकरण” की पहचान कमज़ोर रही हो, तो खिलौनों के दाम वाली बात एक मिनट दोहराइए।
- 5–13 मिनट · परिभाषा। पृष्ठ 61–62 पढ़वाइए: बीते दो-तीन दशकों से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के लिए सस्ती जगहें खोज रही हैं, विदेशी निवेश बढ़ा है, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इन्हीं के नियंत्रण में है। फोर्ड का भारतीय संयंत्र दूसरे विकासशील देशों को कारें और विश्व भर के अपने कारखानों को कार-पुर्ज़े भेजता है। कोई बच्चा पृष्ठ 59 की आख़िरी पंक्ति याद दिलाए, तो वही पढ़वाइए: हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारों का उत्पादन बंद कर दिया है, पर कारों और कार के इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है। फिर बोर्ड पर: “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।”
- 13–20 मिनट · क्या आता-जाता है? पृष्ठ 62 से चार चीज़ें बोर्ड पर लिखिए: वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश, प्रौद्योगिकी। फिर पाँचवीं: लोग। पढ़वाइए कि लोग बेहतर आय, रोज़गार और शिक्षा के लिए एक देश से दूसरे देश जाते हैं, पर बीते कुछ दशकों में अनेक प्रतिबंधों के कारण लोगों के आवागमन में अधिक वृद्धि नहीं हुई। आप पहले अध्याय के उदाहरण बोलिए (खिलौने, कॉल सेंटर, फोर्ड का 1,700 करोड़), और बच्चे बताएँ कि वह किस खाने का है।
- 20–30 मिनट · प्रौद्योगिकी। पृष्ठ 62–63 से: किताब प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति को मुख्य कारक कहती है। बीते पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी बहुत आगे बढ़ी; कंटेनरों में भरा माल जहाज़ों, रेलों, वायुयानों और ट्रकों पर बिना क्षति के लदता है, और ढुलाई की लागत बहुत घटी। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी में टेलीग्राफ, टेलीफोन, मोबाइल फोन, फैक्स, संचार उपग्रह, कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-मेल और वॉयस-मेल। बच्चों से पूछिए: इनमें से कौन-सी चीज़ें आपके घर या स्कूल में हैं?
- 30–36 मिनट · लंदन की पत्रिका। पृष्ठ 63 का उदाहरण पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए। बच्चे किताब में तकनीक वाले शब्दों के नीचे पेंसिल से रेखा खींचें; यही पृष्ठ 63 का सवाल 1 है। सवाल 2 पर दो-तीन समूहों से बात सुनिए।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) वैश्वीकरण की किताब वाली परिभाषा लिखिए। (2) देशों के बीच किन चीज़ों का आदान-प्रदान बढ़ा है, और किसका ज़्यादा नहीं?
लंदन की पत्रिका, दिल्ली में (चरण 5)
लंदन की पत्रिका, दिल्ली में
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें। दूसरा खाना चरण 3 से भरिए।
| क्या आता-जाता है | अध्याय का उदाहरण | बढ़ा या नहीं |
|---|---|---|
| वस्तुएँ | चीन के खिलौने, फोर्ड की कारें | बढ़ा |
| सेवाएँ | कॉल सेंटर, लंदन की पत्रिका का डिज़ाइन | बढ़ा |
| निवेश | फोर्ड का 1,700 करोड़ रुपए का संयंत्र | बढ़ा |
| प्रौद्योगिकी | साझेदारी में मिलने वाली नवीनतम प्रौद्योगिकी | बढ़ा |
| लोग | बेहतर आय, रोज़गार और शिक्षा के लिए जाना | प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “वैश्वीकरण में लोग सबसे तेज़ी से एक देश से दूसरे देश जा रहे हैं।” किताब उल्टा कहती है। प्रश्नावली के प्रश्न 13 (अ) में यही जाँचा जाता है: सही विकल्प में वस्तुएँ, सेवाएँ और निवेश हैं, लोग नहीं।
- “प्रौद्योगिकी मतलब सिर्फ़ इंटरनेट।” किताब पहले परिवहन की बात करती है, कंटेनर और वायु यातायात की, फिर सूचना और संचार की।
- पृष्ठ 63 के शब्द किताब में रेखांकित करवाना। अगर किताबें अगले साल दूसरे बच्चों को जानी हैं, तो रेखा कॉपी में शब्द लिखकर खिंचवाइए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “4. वैश्वीकरण क्या है” चरण 3 के बाद और “5. संभव बनाने वाले कारक” चरण 5 के बाद खोलिए; “6. उदारीकरण” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए परिभाषा के तीन शब्द काफ़ी हैं: देशों का परस्पर संबंध, तीव्र एकीकरण।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: अगर इंटरनेट न होता तो लंदन की पत्रिका दिल्ली में बन पाती? (पाठ और डिज़ाइन के निर्देश डाक से आते-जाते, देर होती और भुगतान भी तुरंत न होता; इसलिए किताब प्रौद्योगिकी को मुख्य कारक कहती है।) उत्तर हमारी ओर से है।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है। (2) वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा; लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क8, क9, ख6, ग1, घ4, घ5 और ङ4। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 1 कॉपी में।
- पृष्ठ 62 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) मुख्य भूमिका: ये सस्ती जगहें खोजकर कई देशों में उत्पादन फैलाती हैं, विदेशी निवेश करती हैं, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इनके नियंत्रण में है। (2) विदेश व्यापार, विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान, और लोगों का आवागमन (जो प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा)। (3) (ख) उत्पादकों के बीच अधिक प्रतिस्पर्धा।
- पृष्ठ 63 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) इंटरनेट (पाठ भेजना), दूरसंचार सुविधाएँ (डिज़ाइन के निर्देश), कंप्यूटर (डिज़ाइन बनाना), वायुमार्ग (पत्रिकाएँ भेजना), और इंटरनेट से ई-बैंकिंग (भुगतान)। (2) सूचना प्रौद्योगिकी से दूर के देशों से तुरंत संपर्क और सूचना संभव हुई, इसलिए कंपनियाँ कई देशों में फैला उत्पादन चला पाती हैं और कॉल सेंटर या पत्रिका के डिज़ाइन जैसी सेवाएँ दूर के देशों को दी जा सकती हैं। इसके बिना वैश्वीकरण, ख़ासकर सेवाओं का, इस गति से संभव नहीं होता।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 30–38।
कालांश 5 — विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण
किताब — पृष्ठ 64 · स्लाइड — “विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 6. उदारीकरण
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी व्यापार अवरोधक, आयात पर कर और कोटा में अंतर बता पाए, यह समझा पाए कि आज़ादी के बाद सरकार ने अवरोध क्यों लगाए और करीब सन् 1991 से क्यों हटाए, और उदारीकरण की परिभाषा दे पाए।
साथ ले जाइए — दरवाज़े के खेल के लिए दस छोटी चीज़ें और पाँच “कर” पर्चियाँ।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 4 की पर्चियों में अगर “लोग” भी बढ़ने वाली चीज़ों में लिखे हों, तो पृष्ठ 62 की वह पंक्ति फिर पढ़वाइए।
- 5–12 मिनट · व्यापार अवरोधक। पृष्ठ 64 पढ़वाइए: आयात पर कर व्यापार अवरोधक का एक उदाहरण है; इसे अवरोधक इसलिए कहते हैं कि यह रोक लगाता है। सरकार इससे तय कर सकती है कि कौन-सी वस्तुएँ कितनी मात्रा में आएँ। आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा कोटा कहलाती है।
- 12–20 मिनट · दरवाज़े का खेल। कक्षा का दरवाज़ा देश की सीमा है, और आप सरकार। एक बच्चा “चीन से” दस चीज़ें लेकर अंदर आना चाहता है। पहली बार: हर चीज़ पर उसे एक “कर” पर्ची देनी है, यानी चीज़ें आएँगी, पर महँगी। दूसरी बार: आप कहिए “इस साल केवल तीन”, यानी कोटा। पूछिए: दोनों में क्या अंतर था? (कर से चीज़ महँगी होती है; कोटा से गिनती सीमित होती है।) खेल हमारी ओर से है।
- 20–30 मिनट · पहले लगाए, फिर हटाए। पृष्ठ 64 पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए: स्वतंत्रता के बाद सरकार ने उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए अवरोध लगाए। 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे; केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों के आयात की अनुमति थी। किताब याद दिलाती है कि सभी विकसित देशों ने भी विकास के शुरुआती चरणों में अपने उत्पादकों को संरक्षण दिया था। फिर करीब सन् 1991 के प्रारंभ से: सरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के विश्व से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है। बोर्ड पर: “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।”
- 30–36 मिनट · पृष्ठ 64 के सवाल। सवाल 1 पूरी कक्षा से। सवाल 2 पर छोटी बहस: आधी कक्षा “कोटा लगाना चाहिए”, आधी “नहीं चाहिए”, हर पक्ष किताब से एक कारण दे।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) कोटा और आयात पर कर में क्या अंतर है? (2) करीब सन् 1991 से सरकार ने अवरोध क्यों हटाए? एक कारण लिखिए।
अवरोध: पहले लगाए, फिर हटाए (चरण 4)
अवरोध: पहले लगाए, फिर हटाए
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| आयात पर कर | कोटा | |
|---|---|---|
| क्या है | आयात होने वाली वस्तु पर लगाया गया कर | आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा |
| चीनी खिलौनों पर असर | खिलौने महँगे हो जाएँगे, और उनका आयात घटेगा | एक साल में केवल तय संख्या में खिलौने आ सकेंगे |
| दोनों में एक बात | दोनों व्यापार अवरोधक हैं | उदारीकरण में ऐसे ही अवरोध हटाए जाते हैं |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “कोटा मतलब आयात पर कर।” कोटा गिनती की सीमा है; कर दाम बढ़ाता है। प्रश्न बैंक का ग3 इसी पर है।
- “उदारीकरण में सरकार सारा नियंत्रण छोड़ देती है।” किताब कहती है कि सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है, इसलिए उसे अधिक उदार कहा जाता है।
- “विकसित देशों ने कभी संरक्षण नहीं दिया।” पृष्ठ 64 कहता है कि सभी विकसित देशों ने शुरुआती चरणों में दिया था। यह बात कालांश 6 की बहस में फिर काम आएगी।
- साल पक्का करना। किताब “करीब सन् 1991 के प्रारंभ से” कहती है। बच्चे इसे किसी एक दिन की घटना न समझें; यह नीतियों के बदलने की शुरुआत है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “6. उदारीकरण” वाला हिस्सा चरण 4 के बाद खोलिए, और “7. विश्व व्यापार संगठन” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: सरकार द्वारा व्यापार पर लगी रोक हटाना उदारीकरण है।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: 1950 और 1960 के दशकों में मशीनरी का आयात रोका क्यों नहीं गया? (भारत के उद्योग अभी उभर रहे थे और उन्हें उत्पादन के लिए मशीनें चाहिए थीं; इसलिए वह ज़रूरी चीज़ों में गिनी गई।) उत्तर हमारी ओर से है, पृष्ठ 64 की सूची पर।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) आयात पर कर वस्तु को महँगा करता है; कोटा आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या सीमित करता है। (2) सरकार ने माना कि अब भारतीय उत्पादकों के विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है, और प्रतिस्पर्धा से उनका प्रदर्शन सुधरेगा।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क10, क11, ख7, ख8, ग2, ग3, घ7 और ङ5; तेज़ विद्यार्थी च2 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 2 और 7 कॉपी में।
- पृष्ठ 64 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) सरकार द्वारा विदेश व्यापार पर लगे अवरोध, जैसे आयात पर कर और कोटा, हटाना; इससे व्यवसायी मुक्त रूप से तय करते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें। (2) सरकार तय कर सकती है कि एक साल में चीन से केवल एक सीमित संख्या में खिलौने आएँ; बाक़ी माँग भारतीय निर्माता पूरी करेंगे। लगाना चाहिए या नहीं, इस पर दोनों तर्क हैं: पक्ष में, भारतीय निर्माताओं और उनके श्रमिकों को संरक्षण मिलता है, और किताब (पृष्ठ 70) भी कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार व्यापार अवरोधक लगा सकती है; विपक्ष में, ख़रीदारों के सस्ते और नये खिलौनों के विकल्प घटेंगे, और भारतीय निर्माताओं पर गुणवत्ता सुधारने का दबाव कम रहेगा। बच्चा अपना मत कारण के साथ लिखे।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 40–50।
कालांश 6 — विश्व व्यापार संगठन
किताब — पृष्ठ 65–66 · स्लाइड — “विश्व व्यापार संगठन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 7. विश्व व्यापार संगठन
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी विश्व व्यापार संगठन का ध्येय बता पाए, यह बता पाए कि यह किसकी पहल पर बना, और अमेरिका की कृषि वाले उदाहरण से समझा पाए कि विकासशील देश इसके नियमों के व्यवहार पर सवाल क्यों उठाते हैं।
साथ ले जाइए — “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट और स्केच पेन।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 5 की पर्चियों में कोटा और कर गड़बड़ाए हों, तो दरवाज़े का खेल एक बार दोहराइए: कर से चीज़ महँगी, कोटा से गिनती सीमित।
- 5–12 मिनट · नियम बनाने वाला। पृष्ठ 65 पढ़वाइए: कुछ बहुत प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठन मानते हैं कि विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। फिर बोर्ड पर: “विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू. टी. ओ.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।” किताब बताती है कि यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम तय करता है और देखता है कि उनका पालन हो, और लगभग 160 देश इसके सदस्य हैं।
- 12–24 मिनट · दो देशों के किसान। पहले जानकारी, फिर सवाल। पृष्ठ 65 का बॉक्स पढ़वाइए और बोर्ड-कार्य वाली तालिका साथ-साथ भरिए: भारत में अधिकांश रोज़गार और जी.डी.पी. का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि से आता है; अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा केवल एक प्रतिशत और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है। फिर भी इन थोड़े से अमेरिकी किसानों को सरकार से उत्पादन और निर्यात के लिए बहुत अधिक धन राशि मिलती है, इसलिए उनकी अधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में कम कीमत पर बिकती है, और वहाँ के किसानों पर बुरा असर पड़ता है। अब पूछिए: जिस किसान की फ़सल का दाम इससे गिरा, उसके पास क्या रास्ता बचा? (बच्चों के संभावित उत्तर: घाटा सहकर कम दाम पर बेचना, दूसरी फ़सल लगाना, या कर्ज़ लेना। सरकार क्या कर सकती है, यह कालांश 9 में पृष्ठ 70 से आएगा: ज़रूरी हो तो व्यापार अवरोधक, और विश्व व्यापार संगठन से न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते।)
- 24–30 मिनट · विकासशील देशों का सवाल। बॉक्स का आख़िरी सवाल पढ़वाइए: “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?” हर समूह एक वाक्य में जवाब दे और कारण बताए। फिर किताब की बात जोड़िए: व्यवहार में विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे, जबकि नियमों ने विकासशील देशों को अवरोधक हटाने के लिए विवश किया। दीवार के चार्ट पर जोड़िए: “लाभ मिला” में अमेरिका के किसान, “मार पड़ी” में दूसरे देशों के किसान।
- 30–36 मिनट · पृष्ठ 66 के सवाल। सवाल 1 के छह रिक्त स्थान पूरी कक्षा से भरवाइए; सवाल 2 पर दो-तीन समूहों से सुझाव लीजिए। सवाल 3 गृहकार्य में।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विश्व व्यापार संगठन का ध्येय क्या है, और यह किसकी पहल पर बना? (2) अमेरिका की कृषि-सहायता से दूसरे देशों के किसानों पर क्या असर पड़ता है?
नियम एक, व्यवहार दो (चरण 4)
नियम एक, व्यवहार दो
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| अमेरिका | भारत | |
|---|---|---|
| जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा | केवल एक प्रतिशत | महत्त्वपूर्ण भाग |
| रोज़गार में कृषि का हिस्सा | केवल 0.5 प्रतिशत | अधिकांश रोज़गार |
| सरकार से | उत्पादन और निर्यात के लिए बहुत अधिक धन राशि | |
| नतीजा | अधिशेष उपज दूसरे देशों में कम कीमत पर बिकती है | ऐसे देशों के किसानों पर बुरा असर |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “विश्व व्यापार संगठन विकासशील देशों की मदद के लिए बना।” किताब कहती है कि यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ।
- “अमेरिका में ज़्यादातर लोग खेती करते हैं, इसलिए सहायता देता है।” तालिका उल्टा दिखाती है: रोज़गार में कृषि का हिस्सा केवल 0.5 प्रतिशत है। यही बॉक्स की चुभन है: थोड़े से किसानों को बहुत अधिक धन।
- सदस्य देशों की संख्या। कक्षा में किताब वाली संख्या, लगभग 160, ही बोलिए। आज की संख्या बच्चे पूछें तो संवर्धन वाला पन्ना देखिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “7. विश्व व्यापार संगठन” वाला हिस्सा चरण 4 के बाद खोलिए, और “8. भारत पर प्रभाव” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो बातें काफ़ी हैं: यह संगठन व्यापार को उदार बनाना चाहता है; पर विकसित देशों ने अपने अवरोधक बनाए रखे।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: कालांश 5 में किताब ने बताया था कि 1950 और 1960 के दशकों में भारत ने उभरते उद्योगों को आयात की प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए अवरोधक लगाए थे। अगर अमेरिका अपने किसानों को भारी धन देता रहे और विकासशील देशों से अवरोधक हटाने को कहे, तो विकासशील देश क्या जवाब दे सकते हैं? (कि नियम सब पर बराबर लागू हों; और पृष्ठ 70 पर किताब ख़ुद कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग कर सकती है।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं, पृष्ठ 64, 65 और 70 पर।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना; यह विकसित देशों की पहल पर बना। (2) सरकारी धन के कारण अमेरिकी अधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में कम कीमत पर बिकती है, जिससे उन देशों के किसानों पर बुरा असर पड़ता है।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क12, क13, ख9, घ8 और ङ6; तेज़ विद्यार्थी च3 और छ4 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 5 कॉपी में, और पृष्ठ 66 का सवाल 3।
- पृष्ठ 66 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) क्रम से: विकसित; अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना; अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार; इन नियमों का पालन हो; न्यायसंगत (मुक्त); व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए विवश हुआ। (2) नियम विकसित और विकासशील, सब देशों पर बराबर लागू हों; विकसित देश भी अपने अवरोधक घटाएँ और अपने उत्पादकों को ऐसी भारी सहायता न दें जिससे उनकी सस्ती उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाए; विकासशील देश मिलकर न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते करें; और जनता के अभियान दबाव बनाएँ। (3) चर्चा का सवाल है। न्यायसंगत मानने का तर्क: पर्यावरण की रक्षा से सबका भला होता है, और नई अच्छी वस्तुओं को शुरू में सहारा चाहिए। अन्यायपूर्ण मानने का तर्क: सहायता इतनी बड़ी हो कि वे वस्तुएँ दूसरे देशों में बहुत सस्ते में बिककर वहाँ के उत्पादकों को नुकसान पहुँचाएँ, तो असर अमेरिकी कृषि-सहायता जैसा होगा। संतुलित मत: सहायता तब न्यायसंगत है जब उसका उद्देश्य सचमुच पर्यावरण हो और वह छिपा व्यापार अवरोधक न बने।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 51–56।
कालांश 7 — भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव
किताब — पृष्ठ 66–67 · स्लाइड — “भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 8. भारत पर प्रभाव
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता पाए कि भारत में वैश्वीकरण से किन चार तरह के लोगों और कंपनियों को लाभ हुआ, किताब की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नाम ले पाए, और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार के कदम गिना पाए।
साथ ले जाइए — “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट; पाँच पर्चियों पर कंपनियों के नाम और पाँच पर उनके उत्पाद (बोर्ड-कार्य वाली तालिका से)।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 6 की पर्चियों में अगर किसी ने लिखा हो कि संगठन विकासशील देशों की पहल पर बना, तो पृष्ठ 65 की वह पंक्ति फिर पढ़वाइए।
- 5–12 मिनट · उपभोक्ता। पृष्ठ 66 पढ़वाइए: वैश्वीकरण और उत्पादकों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को लाभ हुआ है; उनके पास अधिक विकल्प हैं, कई उत्पाद उत्कृष्ट गुणवत्ता के और सस्ते हैं, और उनका जीवन स्तर ऊँचा हुआ है। फिर किताब की अगली पंक्ति बोर्ड पर: “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।” कहिए कि आज लाभ वाली ओर देखेंगे, कालांश 8 में दूसरी ओर।
- 12–20 मिनट · कंपनियाँ। पृष्ठ 66–67 से: बीते 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया है, ख़ासकर शहरी इलाकों के उद्योगों में: सेलफोन, मोटर गाड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ठंडे पेय पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ और बैंकिंग जैसी सेवाएँ, जिनके अधिकतर ख़रीदार संपन्न वर्ग के हैं। इन उद्योगों में नये रोज़गार बने और कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं। शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी में निवेश करके अपने मानक ऊँचे किए; कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करके लाभ कमाया, और कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बनीं।
- 20–28 मिनट · नाम और उत्पाद। पाँच बच्चों को कंपनियों की पर्चियाँ और पाँच को उत्पादों की पर्चियाँ दीजिए; वे अपनी जोड़ी ढूँढ़ें। फिर बोर्ड-कार्य वाली तालिका भरिए। साथ में पृष्ठ 67: सेवा देने वाली कंपनियों, ख़ासकर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली कंपनियों के लिए नये अवसर बने। चार्ट के “लाभ मिला” खाने में चारों जोड़िए।
- 28–36 मिनट · सरकार के कदम। पृष्ठ 67 का बॉक्स पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़), जिनमें विश्व स्तरीय सुविधाएँ होनी चाहिए और जहाँ इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता; और श्रम कानूनों में लचीलापन, जिससे कंपनियाँ काम का दबाव अधिक होने पर छोटी अवधि के लिए श्रमिक रखती हैं। फिर पृष्ठ 67 के सवाल 1 और 3 पर समूहों से बात सुनिए।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) भारत में वैश्वीकरण से किन्हें लाभ हुआ? दो के नाम लिखिए। (2) किताब की दो भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उनके उत्पाद लिखिए।
विदेशी निवेश बुलाने के कदम (चरण 5)
विदेशी निवेश बुलाने के कदम
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| किताब की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनी | किसका उत्पादन |
|---|---|
| टाटा मोटर्स | मोटरगाड़ियाँ |
| इंफोसिस | आई.टी. |
| रैनबैक्सी | दवाइयाँ |
| एशियन पेंट्स | पेंट |
| सुंदरम फास्टनर्स | नट और बोल्ट |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “वैश्वीकरण से सब उपभोक्ताओं को लाभ हुआ।” किताब के अनुसार लाभ विशेषकर शहरी क्षेत्र के धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को हुआ है। प्रश्नावली के प्रश्न 13 (इ) में यही जाँचा जाता है।
- “सेज़ में कभी कर नहीं लगता।” छूट आरंभिक पाँच वर्षों तक की है।
- “श्रम कानूनों में लचीलापन श्रमिकों के फ़ायदे के लिए है।” यह कंपनियों की श्रम लागत घटाने के लिए है। चित्र की आख़िरी कड़ी इसी बात को कालांश 8 से जोड़ती है।
- किताब के बाहर की ख़बर। इन कंपनियों के बारे में आज की कोई ख़बर कक्षा में मत जोड़िए; किताब की सूची काफ़ी है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “8. भारत पर प्रभाव” वाला हिस्सा चरण 5 के बाद खोलिए, और “9. छोटे उत्पादक और श्रमिक” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए चार्ट के “लाभ मिला” खाने की चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि सेलफोन और ठंडे पेय जैसे शहरी उद्योगों में ही क्यों रही? (किताब के अनुसार इनके अधिकतर ख़रीदार संपन्न वर्ग के हैं, और कंपनियाँ वहीं निवेश करती हैं जहाँ लाभ हो।) सवाल हमारी ओर से है।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) इनमें से कोई दो: शहरों के धनी उपभोक्ता; बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उनके स्थानीय आपूर्तिकर्ता; शीर्ष भारतीय कंपनियाँ; सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली सेवा कंपनियाँ। (2) तालिका की कोई दो जोड़ियाँ।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क14–16, घ6, ङ7 और ङ8; तेज़ विद्यार्थी च5 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 3 कॉपी में।
- पृष्ठ 67 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत मिली; शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर मानक ऊँचे किए; बहुराष्ट्रीय कंपनियों वाले उद्योगों में नये रोज़गार बने और स्थानीय आपूर्तिकर्ता समृद्ध हुए। (2) राय का सवाल है। एक तर्क: हाँ, क्योंकि ऐसी कंपनियाँ नवीनतम प्रौद्योगिकी और ऊँचे मानक अपनाती हैं और भारतीय वस्तुएँ और सेवाएँ विश्व के बाज़ारों तक पहुँचाती हैं; पर जनता को सच्चा लाभ तभी होगा जब इसका हिस्सा श्रमिकों और छोटे उत्पादकों तक भी पहुँचे। (3) विदेशी निवेश से नये उद्योग लगते हैं, नये रोज़गार बनते हैं, स्थानीय आपूर्तिकर्ता समृद्ध होते हैं, और साझेदारी में धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी आती है। (4) यह बच्चों को पता करना है। किताब का सवाल अध्याय 1 की बात याद दिलाता है कि एक का विकास दूसरे के लिए विध्वंसक हो सकता है; इसलिए बच्चे देखें कि सेज़ बनने से किसे लाभ होता है और किसका नुकसान। अपने ज़िले या राज्य में कोई सेज़ हो तो अख़बार या बड़ों से पता कीजिए।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 57–65।
कालांश 8 — छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार
किताब — पृष्ठ 68–70 · स्लाइड — “छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 9. छोटे उत्पादक और श्रमिक
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी रवि और सुशीला की कहानियों से बता पाए कि बढ़ी प्रतिस्पर्धा का असर छोटे उत्पादकों और श्रमिकों पर कैसा पड़ा, और ख़ुद कह पाए कि वैश्वीकरण का असर सब पर एक जैसा नहीं।
साथ ले जाइए — “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट और स्केच पेन।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 7 की पर्चियों में कंपनियों और उत्पादों की जोड़ियाँ गड़बड़ हों, तो तालिका एक बार पढ़वाइए।
- 5–15 मिनट · रवि की समय-रेखा। पृष्ठ 68 समूहों में पढ़वाइए और हर समूह कॉपी में नीचे वाले चित्र जैसी समय-रेखा भरे: सन् 1992 में रवि ने तमिलनाडु के होसुर में संधारित्र बनाने की कंपनी बैंक के ऋण से शुरू की; तीन वर्षों में 20 कर्मचारी हो गए। सन् 2001 में विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटे। उसकी ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं, और उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदने लगीं। अब रवि वर्ष 2000 के आधे से भी कम बनाता है और उसके पास केवल सात श्रमिक हैं।
- 15–20 मिनट · अकेला रवि नहीं। पृष्ठ 68 से: बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल के छोटे उत्पादकों पर मार पड़ी; कई इकाइयाँ बंद हुईं। भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक, 11 करोड़, लघु और मध्यम उद्योगों में काम करते हैं। पूछिए: इस सूची में “खिलौने” कहाँ से याद आता है? (कालांश 3 के चीनी खिलौने।)
- 20–30 मिनट · सुशीला: पहले और अब। पृष्ठ 69 पढ़वाइए और बोर्ड-कार्य वाली तालिका भरिए। पहले वस्त्र निर्यात की कड़ी समझाइए: अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियाँ भारतीय निर्यातकों को ऑर्डर देती हैं और सबसे सस्ता माल खोजती हैं; कच्चे माल की लागत नहीं घट सकती, इसलिए निर्यातक श्रम-लागत घटाते हैं। फिर किताब की पंक्ति: “इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” पृष्ठ 70 से: आज अधिकतर श्रमिक असंगठित क्षेत्र में हैं, और संगठित क्षेत्र में भी काम की परिस्थितियाँ उसी जैसी होती जा रही हैं।
- 30–36 मिनट · अब बच्चे कहें। जब हर समूह समय-रेखा और तालिका भर चुका हो, तब पूछिए: कालांश 7 के उपभोक्ता और आज के रवि और सुशीला, क्या वैश्वीकरण का असर इन सब पर एक जैसा पड़ा? जवाब बच्चों से आए। फिर पृष्ठ 66 की वह पंक्ति दोबारा पढ़वाइए जो कालांश 7 में बोर्ड पर थी। चार्ट के “मार पड़ी” खाने में रवि, उसके दोस्तों की इकाइयाँ और सुशीला जोड़िए।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) सन् 2001 के बाद रवि की इकाई का क्या हुआ, और क्यों? (2) सुशीला के काम में “पहले” और “अब” का एक अंतर लिखिए।
रवि की इकाई, 1992 से अब तक (चरण 2)
रवि की इकाई, 1992 से अब तक
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| सुशीला का काम | पहले | अब |
|---|---|---|
| रोज़गार | दिल्ली के वस्त्र निर्यातक के यहाँ स्थायी श्रमिक | कई वर्ष बाद भी अस्थायी श्रमिक |
| सुविधाएँ | स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि, अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी | नहीं मिलतीं |
| दूरी | घर से 30 कि.मी. दूर | |
| कमाई | पहले से आधे से भी कम | |
| दिन | सप्ताह के सातों दिन सुबह 7.30 बजे घर से निकलती है और शाम 10 बजे लौटती है; एक दिन काम नहीं तो उस दिन की मज़दूरी नहीं |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “रवि ने मेहनत नहीं की, इसलिए पिछड़ा।” कहानी में कारण आयात से प्रतिबंध हटना और आधी कीमत वाला आयातित माल है। हैदराबाद और चेन्नई में उसके कई दोस्तों की इकाइयाँ भी बंद हुईं।
- “संधारित्र क्या है?” किताब बताती है कि यह ट्यूबलाइट, टेलीविज़न जैसे अनेक घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगता है। इतना काफ़ी है।
- “अस्थायी काम में भी वही सुविधाएँ मिलती हैं।” सुशीला की तालिका दिखाती है कि स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और दुगुनी ओवरटाइम मज़दूरी छिन गईं।
- कक्षा में किसी के घर की बात। कई बच्चों के परिवार ऐसे ही काम करते होंगे। उदाहरण किताब के रवि और सुशीला से ही लीजिए; किसी बच्चे से उसके घर की कमाई मत पूछिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “9. छोटे उत्पादक और श्रमिक” वाला हिस्सा चरण 5 के बाद खोलिए, और “10. न्यायसंगत वैश्वीकरण” से पहले रुकिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए दो वाक्य काफ़ी हैं: सस्ते आयात से रवि की इकाई छोटी हो गई; सुशीला का रोज़गार स्थायी से अस्थायी हो गया।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: कालांश 3 में सस्ते चीनी खिलौने भारतीय ख़रीदारों के लिए अच्छे थे। रवि की कहानी में वही बात किसके लिए अच्छी, किसके लिए बुरी? (आधी कीमत के आयातित संधारित्र टेलीविज़न कंपनियों के लिए अच्छे रहे, रवि और उसके श्रमिकों के लिए बुरे; यानी एक ही प्रतिस्पर्धा किसी के लिए लाभ, किसी के लिए मार।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) आयात से प्रतिबंध हटे; कुछ ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र लेने लगीं; उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम रह गया, और अब केवल सात श्रमिक काम कर रहे हैं। (2) कोई एक: स्थायी से अस्थायी; स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और दुगुनी ओवरटाइम मज़दूरी नहीं; कमाई आधे से भी कम; घर से 30 कि.मी. दूर काम।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क17, क18, ख10, ग5, घ9 और घ10; तेज़ विद्यार्थी च4, छ2 और छ3 भी। साथ में प्रश्नावली का प्रश्न 6 कॉपी में।
- पृष्ठ 68 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) सन् 2001 में संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटे; ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं, और उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र लेने लगीं; रवि का उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम रह गया, और अब केवल सात श्रमिक काम कर रहे हैं। (2) राय का सवाल है; एक तर्कपूर्ण उत्तर: नहीं। लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) हैं; इकाइयाँ बंद हों तो बहुत लोग बेरोज़गार होंगे। किताब कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद कर सकती है जब तक वे प्रतिस्पर्धा में सक्षम न हो जाएँ। (3) कैसे मदद करेंगी: अच्छी सड़कें, बिजली, पानी और कच्चा माल मिलने से लागत घटेगी, और विपणन व सूचना तंत्र से माल सही बाज़ार तक पहुँचेगा; नई प्रौद्योगिकी से गुणवत्ता सुधरेगी और प्रति इकाई लागत घटेगी; उचित ब्याज पर समय से ऋण मिले तो मशीनें और कच्चा माल ख़रीदना आसान होगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निवेश करेंगी? राय का सवाल है; एक उत्तर: शायद नहीं; वे वहाँ निवेश करती हैं जहाँ उन्हें लाभ हो, और छोटे उत्पादक अक्सर उनके प्रतिस्पर्धी होते हैं। कोई बच्चा कारण देकर हाँ कहे, तो वह भी ठीक है। सरकार की भूमिका? हाँ; सड़क, बिजली, पानी सबके लिए होते हैं, और किताब कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे जब तक वे सक्षम न हो जाएँ। एक उपाय: छोटे उद्योगों वाले शहरों में ऐसे औद्योगिक क्षेत्र, जहाँ बिजली, पानी और सड़क मिलें, बैंक उचित ब्याज पर समय से ऋण दें, और नई मशीनों का प्रशिक्षण मिले।
- पृष्ठ 70 के सवालों के नमूना उत्तर — (1) विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सबसे सस्ता माल पाकर अधिक लाभ कमा रही हैं; भारतीय निर्यातक बड़े ऑर्डर के लिए लागत घटाने की कड़ी कोशिश करते हैं और श्रम-लागत घटाते हैं; श्रमिकों को अस्थायी रोज़गार, लंबे घंटे, रात में काम और कम मज़दूरी मिली, और लाभ में न्यायसंगत हिस्सा नहीं। (2) (क) सरकार श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए; (ख) नियोक्ता लागत घटाने का सारा बोझ मज़दूरी पर न डालें, और जहाँ हो सके स्थायी रोज़गार और ओवरटाइम का पूरा भुगतान दें; (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निर्यातकों को ऐसी कीमत दें जिसमें उचित मज़दूरी संभव हो, और देखें कि फैक्ट्रियाँ श्रम कानूनों का पालन करें; (घ) श्रमिक अपने अधिकार जानें और संगठित होकर आवाज़ उठाएँ। (3) नियोक्ताओं का पक्ष: प्रतिस्पर्धा बहुत है, कच्चे माल की लागत नहीं घटती, इसलिए काम का दबाव हो तभी श्रमिक रखने से लागत कम रहती है और विदेशी निवेश आता है। श्रमिकों का पक्ष: लचीलेपन से रोज़गार सुनिश्चित नहीं रहता; सुशीला की तरह सुविधाएँ छिनती हैं, कमाई घटती है और घंटे बढ़ते हैं।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 66–79।
कालांश 9 — न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष
किताब — पृष्ठ 70–71 · स्लाइड — “न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष” वाला भाग · इंटरैक्टिव — 10. न्यायसंगत वैश्वीकरण
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी न्यायसंगत वैश्वीकरण का अर्थ बता पाए, सरकार के कम-से-कम तीन काम गिना पाए, और एक उदाहरण दे पाए कि जनता की भी भूमिका है।
साथ ले जाइए — “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट; चार पर्चियाँ, हर एक पर सरकार का एक काम (बोर्ड-कार्य वाली तालिका से)।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 8 की पर्चियों में अगर किसी ने रवि के पिछड़ने का कारण उसकी अपनी कमी लिखी हो, तो समय-रेखा का 2001 वाला डिब्बा फिर दिखाइए।
- 5–12 मिनट · चार्ट को पढ़िए। दीवार के चार्ट के दोनों खाने ज़ोर से पढ़वाइए। फिर किताब की पंक्ति बोर्ड पर: “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।” पूछिए: क्या चार्ट यही कह रहा है? (अगर “लाभ मिला” खाने में ज़्यादातर संपन्न उपभोक्ता, बड़ी कंपनियाँ और कुशल लोग हैं, और “मार पड़ी” खाने में रवि, सुशीला और छोटे उत्पादक, तो हाँ। जो पंक्ति मेल न खाए, उस पर बात कीजिए।)
- 12–18 मिनट · लक्ष्य। पृष्ठ 70 से: “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।” इसका मतलब बच्चों से अपने शब्दों में कहलवाइए।
- 18–30 मिनट · कौन-सा काम, किसकी मदद। पहले पृष्ठ 70 पढ़वाइए: सरकार की नीतियाँ केवल धनी और प्रभावशाली लोगों के नहीं, देश के सभी लोगों के हितों की रक्षा करें; फिर किताब “जैसे” कहकर सरकार के चार काम गिनाती है। चार समूहों को एक-एक पर्ची दीजिए; हर समूह बताए कि यह काम अध्याय की किस कहानी में मदद करता: रवि, सुशीला, अमेरिका की कृषि वाली बहस, या चीन के खिलौने। जोड़ियाँ हमारी ओर से हैं; नीचे का चित्र एक जवाब है, अकेला सही जवाब नहीं।
- 30–36 मिनट · जनता भी। पृष्ठ 70–71 से: बीते कुछ वर्षों में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है। किताब में हांगकांग में 2005 के प्रदर्शन की तस्वीर है; किताब में ही दिखाइए। पूछिए: सुशीला जैसे श्रमिक अपने लिए क्या कर सकते हैं? (संगठित होकर आवाज़ उठा सकते हैं; पृष्ठ 70 के सवाल 2 (घ) वाला उत्तर।)
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) न्यायसंगत वैश्वीकरण का मतलब एक वाक्य में लिखिए। (2) सरकार के दो काम लिखिए जो रवि या सुशीला की मदद करते।
किस कहानी में कौन-सा काम (चरण 4)
किस कहानी में कौन-सा काम
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| सरकार क्या कर सकती है (पृष्ठ 70) | अध्याय की कौन-सी कहानी याद आती है |
|---|---|
| श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन, श्रमिकों को उनके अधिकार | सुशीला |
| छोटे उत्पादकों की मदद, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हों | रवि |
| ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधक | चीन के खिलौने और कोटा |
| विश्व व्यापार संगठन से न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते | अमेरिका की कृषि वाली बहस |
तालिका के नीचे किताब की दो बातें और लिखिए: सरकार की नीतियाँ देश के सभी लोगों के हितों की रक्षा करें, केवल धनी और प्रभावशाली लोगों की नहीं (चार्ट के दोनों खाने देखिए); और विश्व व्यापार संगठन में विकसित देशों के वर्चस्व के विरुद्ध समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा।
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- “न्यायसंगत वैश्वीकरण मतलब वैश्वीकरण बंद करना।” किताब का लक्ष्य अवसर सबके लिए और लाभ में सबकी बेहतर हिस्सेदारी है, वैश्वीकरण रोकना नहीं।
- “यह सिर्फ़ सरकार का काम है।” पृष्ठ 70–71 जनता के अभियानों और जनसंगठनों की भूमिका भी बताते हैं।
- हांगकांग वाली तस्वीर। किताब की तस्वीर पर्दे पर मत दिखाइए; किताब में ही दिखाइए। तस्वीर के बारे में किताब में जितना लिखा है, उतना ही बोलिए।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “10. न्यायसंगत वैश्वीकरण” वाला हिस्सा चरण 4 के बाद खोलिए, और “सार” से पहले रुकिए; वह कालांश 10 का है।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए एक वाक्य काफ़ी है: वैश्वीकरण का लाभ सबको मिले, यही न्यायसंगत वैश्वीकरण है।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: “ज़रूरी हो तो व्यापार अवरोधक” और कालांश 5 का उदारीकरण, क्या ये आपस में उल्टे हैं? (पूरी तरह नहीं: उदारीकरण में अवरोध काफ़ी हद तक हटे, पर किताब कहती है कि ज़रूरत पड़ने पर सरकार अवरोधकों का उपयोग कर सकती है, जैसे छोटे उत्पादकों को सक्षम होने का समय देने के लिए।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) ऐसा वैश्वीकरण जो सबको अवसर दे और जिसके लाभ में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो। (2) रवि के लिए: छोटे उत्पादकों की मदद, या ज़रूरी हो तो व्यापार अवरोधक; सुशीला के लिए: श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन।
- गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क19, क20 और ग6; तेज़ विद्यार्थी च6 और छ5 भी। साथ में प्रश्नावली के प्रश्न 9 और 10 कॉपी में।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 80–83।
कालांश 10 — सारांश, प्रश्नावली और समापन
किताब — पृष्ठ 71–73 · स्लाइड — “सारांश, प्रश्नावली और समापन” वाला भाग · इंटरैक्टिव — सार, अभ्यास, परियोजना
लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी पहले दिन की अपनी पर्ची वाले अंदाज़े को अध्याय की कहानियों पर परख पाए, और प्रश्नावली के प्रश्न 11 से 13 हल कर पाए।
साथ ले जाइए — पहले दिन की पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा, “लाभ मिला / मार पड़ी” वाला चार्ट।
40 मिनट
- 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। कालांश 9 की पर्चियों में जो बात कमज़ोर रही, उसे दो मिनट दोहराइए।
- 5–15 मिनट · लिफ़ाफ़ा खोलिए। पहले दिन की पर्चियाँ बाँट दीजिए; किसी को अपनी ही पर्ची मिले, ज़रूरी नहीं। हर बच्चा पर्ची पढ़कर देखे कि उसमें लिखा “भला” और “नुकसान” चार्ट के किस खाने से मिलता है। तीन-चार पर्चियाँ ज़ोर से पढ़वाइए और पूछिए: क्या अध्याय ने यह अंदाज़ा पक्का किया, या बदला?
- 15–22 मिनट · सारांश। पृष्ठ 71 का सारांश पढ़वाइए और नीचे का चित्र बनाइए। बच्चे अपने शब्दों में पूरा अध्याय पाँच वाक्यों में कहें: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश; प्रौद्योगिकी; उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन; असर एक जैसा नहीं; न्यायसंगत वैश्वीकरण।
- 22–32 मिनट · प्रश्न 12 और 13। पूरी कक्षा से, हर उत्तर के साथ किताब से कारण। उत्तर बोर्ड-कार्य की पहली तालिका में हैं।
- 32–36 मिनट · प्रश्न 11 और परियोजना। प्रश्न 11 के छह रिक्त स्थान बच्चे बोलें। फिर पृष्ठ 73 की दोनों परियोजनाएँ समझाइए और समूहों में बाँटिए।
- 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) पहले दिन आपने जो लिखा था, अब उसमें क्या जोड़ेंगे या बदलेंगे? (2) इस अध्याय की एक बात, जो अब भी पूरी तरह समझ नहीं आई।
पर्ची से अध्याय तक (चरण 3)
पर्ची से अध्याय तक
बोर्ड-कार्य
कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।
| प्रश्न | सही विकल्प | किताब से कारण |
|---|---|---|
| 12 (क) | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान | छोटे उत्पादकों से यही बनवाया जाता है (पृष्ठ 58) |
| 12 (ख) | (य) व्यापार अवरोधक | आयात पर कर और कोटा व्यापार अवरोधक हैं (पृष्ठ 64) |
| 12 (ग) | (द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी | किताब की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (पृष्ठ 67) |
| 12 (घ) | (स) कॉल सेंटर | कॉल सेंटर जैसी सेवाएँ दूर देशों को दी जाती हैं (पृष्ठ 56, 67) |
| 12 (ङ) | (अ) मोटर गाड़ियों | जैसे फोर्ड मोटर्स (पृष्ठ 59, 66) |
| 13 (अ) | (ख) वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का | लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा (पृष्ठ 62) |
| 13 (आ) | (ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना | निवेश का सबसे आम रास्ता (पृष्ठ 58) |
| 13 (इ) | (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं | लाभ सबको नहीं मिला; अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला (पृष्ठ 70) |
बाक़ी प्रश्न गृहकार्य में बँटे हैं। कॉपियाँ जाँचते समय यह सूची काम आएगी; पूरे नमूना उत्तर शिक्षक संदर्शिका में हैं।
| प्रश्न | कब दिया | उत्तर की मुख्य बात |
|---|---|---|
| 1 | कालांश 4 | देशों का परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण; वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश, प्रौद्योगिकी; लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं |
| 2 | कालांश 5 | 1950 और 1960 के दशकों में उभरते उद्योगों का संरक्षण; करीब सन् 1991 से प्रतिस्पर्धा का समय |
| 3 | कालांश 7 | काम का दबाव हो तब छोटी अवधि के लिए श्रमिक, श्रम लागत घटती है; पर श्रमिक का रोज़गार सुनिश्चित नहीं |
| 4 | कालांश 2 | कारखाने लगाना, साझेदारी, स्थानीय कंपनी को खरीदना (सबसे आम), छोटे उत्पादकों को ऑर्डर |
| 5 | कालांश 6 | सस्ता उत्पादन और बड़े बाज़ार; विकासशील देश बराबर नियमों की माँग करें (अमेरिका की कृषि-सहायता) |
| 6 | कालांश 8 | लाभ: धनी उपभोक्ता, बड़ी कंपनियाँ; मार: रवि, सुशीला |
| 7 | कालांश 5 | अवरोध हटे तो विदेश व्यापार और विदेशी निवेश बढ़े, जो देशों को जोड़ते हैं |
| 8 | कालांश 3 | खिलौनों से अलग उदाहरण, जैसे चीन को भारत का इस्पात |
| 9 | कालांश 9 | प्रौद्योगिकी, उदारीकरण, नियम चलते रहे तो देश और जुड़ेंगे; सबके लिए अच्छा तभी, जब न्यायसंगत हो |
| 10 | कालांश 9 | दोनों आधे सही; असर एक समान नहीं; उपाय न्यायसंगत वैश्वीकरण |
| 11 | कालांश 10 | वैश्वीकरण · विदेश व्यापार · भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है (पृष्ठ 57 का कारण भी ठीक: बाज़ार के नज़दीक, कम लागत पर श्रम) · विदेश व्यापार · विदेशी निवेश · प्रतिस्पर्धा (चौथी और पाँचवीं का क्रम उलटा भी ठीक) |
यहाँ बच्चे अटकेंगे
- प्रश्न 13 (इ) में “(ख) विकसित देशों के लोगों के”। किताब कहती है कि शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया और अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला; कोई पूरा समूह सही नहीं बैठता, इसलिए सही विकल्प (घ) है।
- प्रश्न 12 (ग) की छपाई। किताब में “इंफोसिस रैनबैक्सी” बिना अल्पविराम छपा है; ये दो अलग कंपनियाँ हैं।
- पर्चियाँ पढ़ते समय। पर्चियों पर नाम नहीं था; किसी बच्चे से मत पूछिए कि कौन-सी पर्ची उसकी है।
- इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो “सार”, “अभ्यास” और “परियोजना” तीनों आज के हैं; “अभ्यास” चरण 4 में खोलिए।
- कमज़ोर विद्यार्थी के लिए प्रश्न 13 के तीनों उत्तर और उनके कारण काफ़ी हैं।
- तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: आपकी पर्ची में जिसका “भला” लिखा था, क्या अध्याय में कोई ऐसा भी है जिसे एक तरफ़ लाभ और दूसरी तरफ़ मार, दोनों मिले? (जैसे भारतीय टेलीविज़न कंपनियाँ: आधी कीमत के आयातित संधारित्र से लाभ, पर बहुराष्ट्रीय ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें संयोजन-कार्य के लिए विवश किया।) सवाल और उत्तर हमारी ओर से हैं।
निकास-पर्ची और गृहकार्य
- निकास-पर्ची (चरण 6): (1) इसका एक तय उत्तर नहीं है; देखिए कि बच्चा अब किसी एक समूह के बजाय “किसी को लाभ, किसी को मार” कहता है या नहीं, और किताब की कोई कहानी जोड़ता है या नहीं। (2) जो बात ज़्यादा पर्चियों में आए, उसे इकाई-परीक्षा से पहले दोहराइए।
- गृहकार्य: पृष्ठ 73 की दोनों परियोजनाएँ, समूहों में (“प्रोजेक्ट और गतिविधि” वाली तालिका देखिए)। परीक्षा से पहले प्रश्न बैंक के तीन नमूना परीक्षा-पत्र, फिर पूरा प्रश्न बैंक।
- दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड का “अंतिम पाँच मिनट” वाला हिस्सा, फिर पूरा डेक।
पूरे अध्याय के लिए
अलग-अलग बच्चों के लिए
| किसके लिए | क्या कीजिए |
|---|---|
| जो बहुत पीछे हैं | हर कालांश के “कमज़ोर विद्यार्थी” वाले एक-दो वाक्य, और चार्ट के दोनों खाने। तीन परिभाषाएँ (बहुराष्ट्रीय कंपनी, वैश्वीकरण, उदारीकरण) अलग पर्ची पर लिखकर दीजिए। |
| औसत बच्चे | हर कालांश का बोर्ड-कार्य, प्रश्न बैंक के क, ख और घ वाले प्रश्न, और फ़्लैशकार्ड। |
| तेज़ बच्चे | हर कार्ड का “तेज़ विद्यार्थी” वाला सवाल, प्रश्न बैंक के च और छ वाले प्रश्न, और पृष्ठ 73 की दूसरी परियोजना की अगुवाई। |
| जो बोलने में झिझकते हैं | कालांश 1 के चार देशों वाले खेल, कालांश 5 के दरवाज़े के खेल और कालांश 7 की नाम-जोड़ी में इन्हें भूमिका दीजिए; बोलना पर्ची पढ़ने जितना ही है। |
सतत मूल्यांकन
| साधन | कब | क्या देखिए |
|---|---|---|
| निकास-पर्ची | हर कालांश के आख़िरी चार-पाँच मिनट | दिन की एक मुख्य बात पकड़ में आई या नहीं |
| पहले दिन की पर्ची | कालांश 1 और 10 | अंदाज़ा किसी एक समूह से आगे बढ़कर “किसी को लाभ, किसी को मार” तक पहुँचा या नहीं |
| “लाभ मिला / मार पड़ी” चार्ट | कालांश 3 से 9 | हर नई पंक्ति बच्चे किताब के उदाहरण के साथ बता पाते हैं या नहीं |
| रवि की समय-रेखा और सुशीला की तालिका | कालांश 8 | साल और संख्याएँ किताब से मिलती हैं या नहीं, और कारण सही जगह है या नहीं |
| गृहकार्य की कॉपी | हर कालांश के बाद | प्रश्नावली के उत्तरों में किताब का उदाहरण है या सिर्फ़ परिभाषा |
लिखित मूल्यांकन
अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; अंक अपनी ज़रूरत के हिसाब से बदल लीजिए।
| प्रकार | अंक | क्या पूछें |
|---|---|---|
| वस्तुनिष्ठ | 1 | निवेश का सबसे आम रास्ता; विश्व व्यापार संगठन किसकी पहल पर बना |
| अति लघूत्तरीय | 2 | कोटा क्या है; बहुराष्ट्रीय कंपनी की परिभाषा |
| लघूत्तरीय | 3 | विदेश व्यापार बाज़ारों को कैसे जोड़ता है, एक उदाहरण के साथ |
| संख्यात्मक या तालिका-आधारित | 3 | अमेरिका की कृषि वाली तालिका, या रवि की इकाई के 20 और सात श्रमिक |
| दीर्घ उत्तरीय | 5 | “वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है”, रवि और सुशीला के साथ |
| केस-आधारित | 4 | लंदन की पत्रिका या फोर्ड मोटर्स का अनुच्छेद देकर चार छोटे प्रश्न |
अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए
- “लोगों का आवागमन” वाला विकल्प। वैश्वीकरण में तेज़ आवागमन वस्तुओं, सेवाओं और निवेश का है; लोगों को इसमें जोड़ने पर प्रश्न 13 (अ) जैसा उत्तर ग़लत होगा।
- कोटा और कर को एक लिखना। कोटा गिनती की सीमा है, कर दाम बढ़ाता है; दोनों व्यापार अवरोधक हैं, पर एक नहीं।
- उदाहरण के बिना “लाभ” या “हानि”। “वैश्वीकरण से लाभ हुआ” या “नुकसान हुआ” अकेले लिखने पर पूरे अंक नहीं मिलेंगे; किसे, और किताब का कौन-सा उदाहरण, यह लिखना है।
प्रोजेक्ट और गतिविधि
| # | प्रोजेक्ट | कैसे |
|---|---|---|
| 1 | ब्रांड जाँच (किताब, पृष्ठ 73) | घर के कुछ ब्रांडेड उत्पाद (साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ) लीजिए, लेबल पर बनाने वाली कंपनी देखिए, और सूची बनाइए: उत्पाद, कंपनी, बहुराष्ट्रीय है या नहीं। |
| 2 | एक उद्योग का अध्ययन (किताब, पृष्ठ 73) | कोई भारतीय उद्योग या सेवा चुनिए; लोगों से बातचीत, अख़बार की कतरनों और किताबों से इन बिंदुओं पर लिखिए: उत्पादक या कंपनियाँ, निर्यात, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, प्रतिस्पर्धा, काम की परिस्थितियाँ, बीते पंद्रह वर्षों का कोई बड़ा बदलाव, और काम करने वालों की समस्याएँ। राजस्थान में आसपास का कोई उद्योग चुनें तो लोगों से बात आसान होगी। |
| 3 | “लाभ मिला / मार पड़ी” चार्ट (हमारी ओर से) | कालांश 3 से 9 तक कक्षा का चार्ट; कालांश 10 में पहले दिन की पर्चियों से मिलाया जाता है। |
शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ
- कक्षा में किताब के आँकड़े ही बोलिए। फोर्ड की बिक्री और निर्यात (किताब में “वर्ष 2017 तक”), विश्व व्यापार संगठन के लगभग 160 सदस्य और बाक़ी सब संख्याएँ किताब की हैं; उत्तर इन्हीं से लिखवाइए, और साल वाली संख्या के साथ साल भी बोलिए। आज के आँकड़े बच्चे पूछें, तो संवर्धन वाला पन्ना देखिए, और साफ़ बताइए कि वे किताब के बाहर के हैं।
- फ़ैसला बच्चों पर छोड़िए। अध्याय वैश्वीकरण को न पूरी तरह अच्छा कहता है, न बुरा; उसका सबक़ यह है कि असर एक समान नहीं। अपनी राय पहले मत रखिए; प्रश्न 10 का उत्तर बच्चों को ख़ुद तक पहुँचने दीजिए।
- रवि और सुशीला किताब के लोग हैं। कई बच्चों के घर छोटे कारखानों या अस्थायी काम से चलते होंगे। उदाहरण किताब से लीजिए, किसी बच्चे के परिवार से नहीं।
- किताब के चित्र और तस्वीरें किताब में ही दिखाइए। इस योजना के सारे चित्र अपने बनाए हैं; किताब की तस्वीरें, जैसे हांगकांग का प्रदर्शन, किताब खोलकर दिखाइए।
- चार्ट को अध्याय भर सँभालिए। “लाभ मिला / मार पड़ी” चार्ट कालांश 3 से 9 तक भरता है, और कालांश 10 में पहले दिन की पर्चियों से मिलाया जाता है; दोनों को तब तक सँभालिए। बोर्ड पर लिखी बात अगले दिन मिट चुकी होगी।