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कक्षा 10 · अर्थशास्त्र

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

अध्याय 4

भरत चौधरी और वनिता कुमारी ने बनाया · marushala.com

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अध्याय 4 — वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था · आर्थिक विकास की समझ · कक्षा 10

कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 55 से 73

यह पन्ना किसलिए — स्लाइड शो कक्षा में चलाने से पहले एक बार पढ़ लेने के लिए। यहाँ सारी स्लाइड एक के नीचे एक हैं। उद्धरण-चिह्नों के भीतर सिर्फ़ किताब के शब्द हैं, और स्लाइड के ऊपर किताब का पृष्ठ लिखा है। जो बात हमारी है, उसके आगे “हमारी ओर से” लिखा है। प्रोजेक्टर न हो, तो यही पन्ना हाथ में रखकर बोर्ड से पढ़ाइए; हर स्लाइड की बात पाठ योजना के बोर्ड-कार्य में भी है।

बच्चों की आम भूलें शिक्षक संदर्शिका में हैं, और अध्याय की सारी तालिकाएँ रिवीजन नोट्स में। बच्चे ख़ुद पढ़ें, तो उन्हें इंटरैक्टिव अध्याय दीजिए।

कौन-सी स्लाइड किस कालांश में — पाठ योजना के हिसाब से:

पहले यह पढ़िए — आज के बाज़ार

पृष्ठ 55

?

हमारी ओर से: आपके घर में आज ऐसी कौन-सी चीज़ें हैं, जिन्हें बनाने वाली कंपनी किसी दूसरे देश की है?

किताब पृष्ठ 55 पर आज के बाज़ारों की विविधता की तुलना दो दशक पहले के बाज़ारों से करती है। बच्चों से सूची बनवाइए; उत्तर अभी जाँचने नहीं हैं।

मान लीजिए आपके कस्बे के बाज़ार में किसी विदेशी कंपनी का सस्ता सामान भर जाए, या पास में उसका बड़ा कारखाना लग जाए। इससे किसका भला होगा, और किसका नुकसान? पर्ची पर लिखिए, नाम मत लिखिए।

अध्याय का नक्शा

पृष्ठ 55 से 73 · पढ़ाने का क्रम हमारी ओर से

  • पहले कंपनियाँ: बहुराष्ट्रीय कंपनी, और वह दूर-दूर के उत्पादन को कैसे जोड़ती है
  • फिर बाज़ार: विदेश व्यापार, और वैश्वीकरण को संभव बनाने वाले कारक
  • फिर नियम: उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन
  • आख़िर में लोग: किसे लाभ मिला, किस पर मार पड़ी, और न्यायसंगत वैश्वीकरण

हमारी ओर से: पहले दिन की पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में सँभालकर रखिए। आख़िरी कालांश में वे फिर काम आएँगी।

1 | अन्तरदेशीय उत्पादन

आपके बस्ते की कोई एक चीज़ उठाइए। क्या उसे बनाने का सारा काम एक ही देश में हुआ होगा?

बहुराष्ट्रीय कंपनी

“एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 56

एक उत्पाद, कई देशों में

पृष्ठ 56

देशकाम
संयुक्त राज्य अमेरिकाअनुसंधान केन्द्र में उत्पादों का डिज़ाइन
चीनपुर्ज़े बनाना
मेक्सिको और पूर्वी यूरोपउपकरणों का संयोजन
भारतकॉल सेंटर से ग्राहक देखभाल सेवा

किताब का उदाहरण औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी का है। बोर्ड पर यही चार पंक्तियाँ लिखिए और पूछिए: हर काम उसी देश में क्यों? किताब का उत्तर अगले पृष्ठ पर है: चीन सस्ता विनिर्माण स्थल है, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों के पास हैं, और भारत में अत्यंत कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक हैं। इन सबसे कंपनी की लागत में लगभग 50–60 प्रतिशत बचत हो सकती है।

कंपनी जगह कैसे चुनती है

पृष्ठ 56–57

  • बाज़ार पास हो
  • कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले
  • उत्पादन के दूसरे कारक उपलब्ध हों
  • सरकारी नीतियाँ उसके हितों का ध्यान रखें

मक़सद: उत्पादन लागत कम हो और लाभ अधिक हो। इसीलिए कंपनियाँ वहाँ जाती हैं, जहाँ उन्हें सस्ता श्रम और दूसरे संसाधन मिल सकें।

2 | विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना

अगर कोई बड़ी कंपनी आपके शहर का कोई पुराना कारखाना ख़रीद ले, तो उस कारखाने में क्या-क्या बदल सकता है?

विदेशी निवेश

“बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 57

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूर के उत्पादन से कैसे जुड़ती हैं

पृष्ठ 57–58

तरीकाकिताब में
स्थानीय कंपनियों से साझेदारी (संयुक्त उत्पादन)स्थानीय कंपनी को अतिरिक्त निवेश के लिए धन, जैसे तेज़ उत्पादन की मशीनों के लिए, और उत्पादन की नवीनतम प्रौद्योगिकी मिलती है
स्थानीय कंपनियों को खरीदनाकारगिल फूड्स ने परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियाँ खरीदीं; परख के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में हैं
छोटे उत्पादकों को ऑर्डरवस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान; माल बड़ी कंपनी अपने ब्राण्ड नाम से बेचती है
स्थानीय कंपनियों से निकट प्रतिस्पर्धाइस तरह भी कंपनी दूसरे देशों के उत्पादन पर प्रभाव जमाती है

नतीजा: दूर-दूर स्थानों पर फैला उत्पादन परस्पर संबंधित हो रहा है।

सबसे आम रास्ता

“बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 58

फोर्ड मोटर्स, किताब के आँकड़े

पृष्ठ 59

बातकिताब में
कितने देशों में उत्पादन26
भारत में कब आई1995
चेन्नई के निकट संयंत्र में निवेश1,700 करोड़ रुपये
किसके सहयोग सेमहिन्द्रा एंड महिन्द्रा
वर्ष 2017 तक भारत में बिकी कारें88,000
वर्ष 2017 तक भारत से निर्यात हुई कारें1,81,000 (दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील, संयुक्त राज्य अमेरिका)

किताब यह भी बताती है कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारों का उत्पादन बंद कर दिया है, लेकिन कारों और कार के इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है। कक्षा में यही आँकड़े बोलिए; कंपनी की आज की ख़बर बच्चे पूछें, तो संवर्धन वाला पन्ना देखिए।

3 | विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण

दुकान पर एक जैसे दो खिलौने हैं: एक भारत में बना, एक चीन में, और चीन वाला सस्ता है। आप कौन-सा लेंगे, और क्यों?

विदेश व्यापार क्या करता है

पृष्ठ 59

  • उत्पादकों को अपने देश के बाहर के बाज़ार मिलते हैं
  • ख़रीदारों के पास अपने देश में बनी चीज़ों के अलावा भी विकल्प होते हैं

किताब का उदाहरण चीन के खिलौने हैं, जो अगली स्लाइड में हैं।

चीन के खिलौने भारत के बाज़ार में

पृष्ठ 60–61

भारत के ख़रीदार

  • सस्ते दाम और नये डिज़ाइन
  • कम कीमत पर अधिक विकल्प

खिलौने बनाने वाले

  • चीन के निर्माताओं का व्यवसाय बढ़ा
  • एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली
  • भारत के खिलौना निर्माताओं को हानि

व्यापार खुलने से दो बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है, और हज़ारों मील दूर बैठे उत्पादक भी एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने लगते हैं।

बाज़ारों का एकीकरण

“इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 61

4 | वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक

आपके दादा-दादी के समय दूसरे देश तक चिट्ठी पहुँचने में कितने दिन लगते होंगे, और आज एक संदेश पहुँचने में कितनी देर लगती है?

वैश्वीकरण

“विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 62

किसका आवागमन बढ़ा

पृष्ठ 61–62

तेज़ी से बढ़ा

  • वस्तुएँ
  • सेवाएँ
  • निवेश
  • प्रौद्योगिकी

ज़्यादा नहीं बढ़ा

  • लोगों का आवागमन, प्रतिबंधों के कारण

प्रश्नावली के प्रश्न 13 (अ) में यही अंतर पूछा गया है।

कारक: प्रौद्योगिकी

पृष्ठ 62–63

  • बीते पचास वर्षों में परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति; कंटेनरों में माल बिना क्षति के लदता है और ढुलाई-लागत में भारी बचत होती है
  • सूचना और संचार प्रौद्योगिकी: दूरसंचार, कंप्यूटर और इंटरनेट
  • किताब का उदाहरण: लंदन के पाठकों के लिए छपने वाली एक पत्रिका का डिज़ाइन और छपाई दिल्ली में; पाठ इंटरनेट से आता है और भुगतान इंटरनेट से तुरंत हो जाता है

किताब के अनुसार प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति वह मुख्य कारक है, जिसने वैश्वीकरण की प्रक्रिया को तेज़ किया। अगले कालांश में: व्यापार अवरोधक और उदारीकरण।

5 | विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण

कक्षा के दरवाज़े पर एक चौकीदार हर अंदर आने वाली चीज़ पर पैसे ले। तब बाहर से कितनी चीज़ें अंदर आएँगी?

दो व्यापार अवरोधक

पृष्ठ 64

आयात पर कर

  • किताब का उदाहरण: खिलौनों के आयात पर कर
  • इसे अवरोधक इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह कुछ प्रतिबंध लगाता है

कोटा

  • आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा

इनसे सरकार विदेश व्यापार बढ़ा या घटा सकती है, और तय कर सकती है कि कौन-सी वस्तुएँ कितनी मात्रा में आयात हों।

संरक्षण से प्रतिस्पर्धा तक

पृष्ठ 64

कबसरकार ने क्या कियाक्यों
स्वतंत्रता के बाद, 1950 और 1960 के दशकों मेंविदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर अवरोधक; केवल मशीनरी, उर्वरक, पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों का आयातउभरते उद्योगों को आयात की प्रतिस्पर्धा से संरक्षण
करीब सन् 1991 सेअवरोधक काफ़ी हद तक हटाएप्रतिस्पर्धा से उत्पादकों का प्रदर्शन सुधरेगा

उदारीकरण

“सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 64

6 | विश्व व्यापार संगठन

अगर खेल के सारे नियम एक ही टीम बनाए, तो क्या खेल बराबरी का होगा?

विश्व व्यापार संगठन

“विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू. टी. ओ.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 65

नियम कौन बनाता है

पृष्ठ 65

  • विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ
  • अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के नियम तय करता है, और देखता है कि उनका पालन हो
  • किताब के अनुसार लगभग 160 देश सदस्य
  • व्यवहार में: विकसित देशों ने अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे, विकासशील देश अवरोधक हटाने के लिए विवश हुए

कक्षा में किताब वाली संख्या ही बोलिए। आज की संख्या बच्चे पूछें, तो संवर्धन वाला पन्ना देखिए।

खेती: अमेरिका और भारत

पृष्ठ 65

अमेरिकाभारत
जी.डी.पी. में कृषि का हिस्साकेवल एक प्रतिशतमहत्त्वपूर्ण भाग
रोज़गार में कृषि का हिस्साकेवल 0.5 प्रतिशतअधिकांश रोज़गार
सरकार सेउत्पादन और निर्यात के लिए बहुत अधिक धन राशि
नतीजाअधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में कम कीमत परऐसे देशों के किसानों पर बुरा असर

किताब का सवाल

पृष्ठ 65

?

“क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”

हर समूह एक वाक्य में जवाब दे और कारण बताए। फिर किताब की बात: विकासशील देशों ने नियमों के अनुसार अवरोधक घटाए, जबकि विकसित देश अपने किसानों को भारी धन देते रहे।

7 | भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में आपके घर या मोहल्ले में कौन-सी नई चीज़ें या सेवाएँ आईं, जो पहले नहीं थीं?

किसे लाभ मिला

पृष्ठ 66–67

  • उपभोक्ता, ख़ासकर शहरों का धनी वर्ग: अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता, कम कीमत, ऊँचा जीवन स्तर
  • बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: बीते 20 वर्षों में निवेश बढ़ाया; नये रोज़गार बने, और कच्चा माल आदि देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं
  • शीर्ष भारतीय कंपनियाँ: नवीनतम प्रौद्योगिकी में निवेश, ऊँचे मानक; कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करके लाभ कमाया, और कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बनीं
  • सेवा देने वाली कंपनियाँ, ख़ासकर सूचना और संचार प्रौद्योगिकी वाली

बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि सेलफोन, मोटर गाड़ियाँ, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ठंडे पेय पदार्थ, जंक खाद्य पदार्थ और बैंकिंग जैसी सेवाओं में रही, जिनके अधिकतर ख़रीदार संपन्न वर्ग के हैं।

किताब की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ

पृष्ठ 67

कंपनीकिसका उत्पादन
टाटा मोटर्समोटरगाड़ियाँ
इंफोसिसआई.टी.
रैनबैक्सीदवाइयाँ
एशियन पेंट्सपेंट
सुंदरम फास्टनर्सनट और बोल्ट

कक्षा में किताब की यही सूची काफ़ी है; इन कंपनियों की आज की ख़बरें मत जोड़िए।

विदेशी निवेश बुलाने के लिए सरकार के कदम

पृष्ठ 67

विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़)

  • केन्द्र और राज्य सरकारें ऐसे औद्योगिक क्षेत्र बना रही हैं, जिनमें बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, भण्डारण, मनोरंजन और शैक्षिक जैसी विश्व स्तरीय सुविधाएँ होनी चाहिए
  • इकाई लगाने वाली कंपनियों पर आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं

श्रम कानूनों में लचीलापन

  • सरकार ने कंपनियों को अनेक नियमों से छूट लेने की अनुमति दी है
  • नियमित आधार के बजाय, काम का दबाव अधिक होने पर, छोटी अवधि के लिए श्रमिक
  • इससे श्रम लागत घटती है
  • विदेशी कंपनियाँ और अधिक लचीलापन माँग रही हैं

किताब में ये दो कदम हैं। कर की छूट सेज़ वाले कदम का हिस्सा है, अलग कदम नहीं।

पर सबके लिए एक जैसा नहीं

“उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 66

8 | छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार

अगर आप कोई चीज़ बनाते हों, और बाज़ार में वही चीज़ आधी कीमत पर मिलने लगे, तो आप क्या करेंगे?

रवि की इकाई

पृष्ठ 68

कबक्या हुआ
1992तमिलनाडु के होसुर में संधारित्र बनाने की कंपनी, बैंक से ऋण लेकर
तीन वर्षों मेंउत्पादन बढ़ा, 20 कर्मचारी
2001सरकार ने विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटाए
उसके बादमुख्य ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ थीं; उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र लेने लगीं
अबवर्ष 2000 के आधे से भी कम उत्पादन, केवल सात श्रमिक

हैदराबाद और चेन्नई में इसी व्यवसाय वाले रवि के कई दोस्तों ने अपनी इकाइयाँ बंद कर दीं।

अकेला रवि नहीं

पृष्ठ 68

11 करोड़

श्रमिक लघु और मध्यम उद्योगों में काम करते हैं, कृषि के बाद सबसे अधिक

किन उद्योगों पर मार पड़ी: बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल। कई इकाइयाँ बंद हुईं और अनेक श्रमिक बेरोज़गार हुए।

सुशीला: पहले और अब

पृष्ठ 69

पहले

  • दिल्ली के एक वस्त्र निर्यातक के यहाँ स्थायी श्रमिक
  • स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि
  • अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी

अब

  • घर से 30 कि.मी. दूर, कई वर्ष बाद भी अस्थायी श्रमिक
  • पहले से आधे से भी कम कमाई
  • सप्ताह के सातों दिन सुबह 7.30 बजे घर से निकलती है, शाम 10 बजे लौटती है
  • एक दिन काम नहीं, तो उस दिन की मज़दूरी नहीं

1990 के दशक के अंतिम वर्षों में फैक्ट्री बंद हुई; छह माह खोजने के बाद उसे नया काम मिला। उदाहरण किताब की सुशीला से ही दीजिए, किसी बच्चे के घर से नहीं।

श्रमिक के लिए इसका अर्थ

“इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 69

9 | न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष

अब तक के अध्याय में किसे वैश्वीकरण से लाभ मिला, और किस पर मार पड़ी? दो सूचियाँ बनाइए।

सबको लाभ नहीं

“शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 70

सरकार क्या कर सकती है

पृष्ठ 70

  • नीतियाँ केवल धनी और प्रभावशाली लोगों के नहीं, सभी लोगों के हितों की रक्षा करें। किताब के चार उदाहरण:
  • श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन, और श्रमिकों को उनके अधिकार
  • छोटे उत्पादकों की मदद, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ
  • ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग
  • विश्व व्यापार संगठन से न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते

किताब यह भी कहती है: विश्व व्यापार संगठन में समान हितों वाले विकासशील देशों को मिलकर लड़ना होगा। हमारी ओर से: हर काम के साथ बच्चों से पूछिए कि इससे अध्याय की किस कहानी में मदद मिलती, रवि, सुशीला या अमेरिका की कृषि वाली बहस।

जनता भी

पृष्ठ 70–71

  • बीते कुछ वर्षों में बड़े अभियानों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने विश्व व्यापार संगठन के व्यापार और निवेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण निर्णयों को प्रभावित किया है
  • यानी न्यायसंगत वैश्वीकरण के संघर्ष में जनता भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

किताब में हांगकांग में 2005 के प्रदर्शन की तस्वीर है; उसे किताब में ही दिखाइए।

लक्ष्य

“न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 70

10 | सारांश, प्रश्नावली और समापन

पूरा अध्याय, एक नज़र में

पृष्ठ 55 से 71 · सार हमारी ओर से

कालांशमुख्य बात
1बहुराष्ट्रीय कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है
2कंपनियाँ साझेदारी से, स्थानीय कंपनी खरीदकर, छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर और निकट प्रतिस्पर्धा से दूर के उत्पादन से जुड़ती हैं
3विदेश व्यापार बाज़ारों को जोड़ता है, जैसे चीन के खिलौने भारत में
4वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश और प्रौद्योगिकी तेज़ी से आती-जाती हैं; प्रौद्योगिकी ने इसे संभव बनाया
5सन् 1991 के आसपास से अवरोधक हटे: उदारीकरण
6विश्व व्यापार संगठन के नियम सब पर बराबर नहीं चले
7धनी उपभोक्ता, बड़ी कंपनियाँ और आई.टी. सेवाएँ लाभ में रहीं
8रवि जैसे छोटे उत्पादकों और सुशीला जैसे श्रमिकों पर मार पड़ी
9न्यायसंगत वैश्वीकरण: सरकार की नीतियाँ और जनता के अभियान

अब किताब की प्रश्नावली: प्रश्न 12 की जोड़ियाँ और प्रश्न 13 के विकल्प, जोड़ियों में।

सुमेल और विकल्प: सही उत्तर

पृष्ठ 72–73 · प्रश्नावली, प्रश्न 12 और 13 · कारण हमारी ओर से

भागसही उत्तरकिताब से कारण
12 (क)(ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामानछोटे उत्पादकों से यही बनवाया जाता है
12 (ख)(य) व्यापार अवरोधकआयात पर कर और कोटा व्यापार अवरोधक हैं
12 (ग)(द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सीकिताब की भारतीय बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
12 (घ)(स) कॉल सेंटरकॉल सेंटर जैसी सेवाएँ भारत जैसे देशों से विकसित देशों को निर्यात होती हैं
12 (ङ)(अ) मोटर गाड़ियोंबहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि मोटर गाड़ियों जैसे उद्योगों में रही, जैसे फोर्ड मोटर्स
13 (अ)(ख) वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों कालोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा
13 (आ)(ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेनानिवेश का सबसे आम रास्ता
13 (इ)(घ) उपर्युक्त में से कोई नहींलाभ सबको नहीं मिला; अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला

किताब में 12 (ग) का विकल्प “इंफोसिस रैनबैक्सी” बिना अल्पविराम छपा है; ये दो अलग कंपनियाँ हैं।

और अब पहले दिन की पर्चियाँ

पहले कालांश की पर्चियाँ, अध्याय के बाद

?

हमारी ओर से: आपकी पर्ची में जिसका भला और जिसका नुकसान लिखा था, वह अध्याय की किस कहानी से मिलता है?

पर्चियों पर नाम नहीं हैं; किसी बच्चे से मत पूछिए कि कौन-सी पर्ची उसकी है। देखिए कि अब बच्चे किसी एक समूह की बात करते हैं, या यह कहते हैं कि किसी को लाभ मिला और किसी पर मार पड़ी।

अध्याय का बड़ा विचार

“उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।”

पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 66

मरुशाला की कहानी

दो शिक्षक, एक मरुशाला

  • भरत चौधरीभरत चौधरीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. जेठन्तरी · ब्लॉक समदड़ी, जिला बालोतरा
  • वनिता कुमारीवनिता कुमारीव्याख्यातारा.उ.मा.वि. रामसीन मूंगड़ा · ब्लॉक एवं जिला बालोतरा

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