यह पन्ना उनके लिए है जो घर पर दसवीं के बच्चे के साथ बैठते हैं। विषय आपको आता हो, यह ज़रूरी नहीं: हर सवाल के आगे लिखा है कि जवाब में क्या आना चाहिए, और किताब के किस पृष्ठ पर है।
दसवीं का बच्चा पंद्रह-सोलह साल का होता है। इस उम्र में उससे सवाल-जवाब करके परखने से ज़्यादा काम आता है उससे समझवाना। उससे कहिए, “मुझे यह अध्याय समझाओ, मैंने नहीं पढ़ा।” समझाते समय बच्चे को ख़ुद पता चल जाता है कि कौन-सी बात पक्की है और कौन-सी कच्ची।
किताब की अपनी पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ संख्या के साथ दी हैं। पृष्ठ संख्याएँ NCERT आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
1. इस अध्याय में क्या है
हम सब रोज़ बाज़ार से कुछ न कुछ खरीदते हैं, और डॉक्टर, कोचिंग या डाकघर जैसी सेवाएँ भी लेते हैं। यह अध्याय बताता है कि खरीदने वाले के रूप में हमारे क्या अधिकार हैं, बाज़ार में ठगी क्यों होती है, और ठगी हो जाए तो कहाँ शिकायत करें। अध्याय की जड़ में यह पंक्ति है: “बाज़ार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमजोर स्थिति में पाता है।” (पृष्ठ 76)
इस अध्याय की बात आठ क़दमों में:
| किताब का सवाल | किताब क्या बताती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| बाज़ार में नियम क्यों चाहिए? | अकेला उपभोक्ता कमज़ोर स्थिति में होता है; कम तौल, मिलावट और घटिया सामान जैसी ठगी होती है | 76–77 |
| उपभोक्ता आंदोलन कैसे बना? | 1960 के दशक में जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मिलावट के ख़िलाफ़ आंदोलन संगठित हुआ; 1986 में कोपरा बना और 2019 में उसका संशोधन हुआ | 77–78 |
| सुरक्षा का अधिकार क्या है? | जान-माल के लिए ख़तरनाक वस्तुओं और सेवाओं से सुरक्षा; रेजी का मामला | 79 |
| सूचना का अधिकार क्या है? | पैकेट पर वस्तु की पूरी जानकारी और अधिकतम खुदरा मूल्य; सरकारी विभागों के लिए 2005 का सूचना पाने का अधिकार कानून और अमृता का मामला | 80 |
| चुनने का अधिकार क्या है? | कोई वस्तु या सेवा ज़बरदस्ती न थोपी जाए; अबिरामी का मामला | 81 |
| नुकसान हो तो क्या? | क्षति की भरपाई का अधिकार; अकेले या समूह में शिकायत; प्रकाश का मामला | 82–83 |
| शिकायत कौन सुनता है? | उपभोक्ता परिषदें रास्ता बताती हैं; ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के आयोग फ़ैसला देते हैं | 84 |
| जागरूक उपभोक्ता कैसे बनें? | गुणवत्ता के चिह्न पहचानना; 24 दिसंबर का उपभोक्ता दिवस; आंदोलन की प्रगति और कमियाँ | 84–87 |
2. बच्चे से समझिए: दस सवाल
एक दिन में दो-तीन सवाल काफ़ी हैं। बच्चा अपने शब्दों में बताए, तो भी ठीक है; बस नीचे लिखी बातें उसके जवाब में आ जाएँ।
| सवाल | जवाब में यह आना चाहिए | पृष्ठ |
|---|---|---|
| उपभोक्ता किसे कहते हैं, और बाज़ार में उसके साथ धोखा कैसे होता है, बताओ। | जो वस्तु या सेवा खरीदकर इस्तेमाल करे; धोखे के उदाहरण: कम तौल, मिलावट, घटिया सामान | 76 |
| उपभोक्ता आंदोलन कब और क्यों संगठित हुआ? | 1960 के दशक में; जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मिलावट के कारण | 77 |
| कोपरा क्या है? | 1986 में बना उपभोक्ताओं की सुरक्षा का कानून; 2019 में उसका संशोधन | 78 |
| उपभोक्ता के छह अधिकार कौन-से हैं? | सुरक्षा, सूचना, चयन, निवारण, प्रतिनिधित्व, उपभोक्ता शिक्षा | 86 |
| पैकेट पर छपा अधिकतम खुदरा मूल्य क्या बताता है? | सबसे ऊँचा दाम जो लिया जा सकता है; ज़्यादा माँगे तो शिकायत हो सकती है; कम के लिए मोल-भाव ठीक है | 80 |
| रेजी, अमृता और अबिरामी के मामलों में कौन-सा अधिकार जुड़ा था? | रेजी: सुरक्षा; अमृता: सूचना; अबिरामी: चुनना | 79–81 |
| ठगी हो जाए तो शिकायत कहाँ होती है? | ज़िला, राज्य या राष्ट्रीय आयोग में; किताब के अनुसार आयोग दावे की रकम से तय होता है | 84 |
| क्या आयोग में वकील ज़रूरी है? | नहीं; शिकायत वकील के बिना भी दर्ज हो सकती है, और प्रकाश ने ख़ुद बहस की | 82–83 |
| आई.एस.आई., एगमार्क और हॉलमार्क के चिह्न क्या बताते हैं? | अच्छी गुणवत्ता का भरोसा; एगमार्क अनाज और खाने के तेल पर, हॉलमार्क गहनों पर; हर वस्तु पर ये ज़रूरी नहीं | 85, 87–88 |
| राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस कब है, और आंदोलन में अभी क्या कमी है? | 24 दिसंबर; शिकायत की प्रक्रिया लंबी और खर्चीली है, रसीद अक्सर नहीं मिलती, नियमों का पालन अक्सर नहीं होता | 86–87 |
3. छह बातें जिनमें बच्चे अक्सर उलझते हैं
| बच्चा लिख देता है | सही बात | पृष्ठ |
|---|---|---|
| उपभोक्ता के अधिकार सिर्फ़ खरीदे गए सामान पर लागू होते हैं। | सेवाओं पर भी: रेजी का इलाज, अबिरामी की कोचिंग, प्रकाश का मनीऑर्डर। 2019 के संशोधन में सेवा में कमी पर सेवा प्रदाता को भी ज़िम्मेदार ठहराया गया। | 79–82, 87 |
| उपभोक्ता आंदोलन 1986 में शुरू हुआ। | आंदोलन 1960 के दशक में संगठित हुआ; 1986 में कोपरा बना। | 77–78 |
| हर शिकायत ज़िला आयोग से ही शुरू होती है। | किताब के अनुसार आयोग दावे की रकम से तय होता है: 1 करोड़ तक ज़िला, 1 से 10 करोड़ तक राज्य, 10 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय। | 84 |
| आयोग में वकील रखना ज़रूरी है। | शिकायत वकील के साथ भी हो सकती है और उसके बिना भी। | 82–83 |
| पैकेट पर छपे दाम से कम में खरीदना भी ग़लत है। | छपा दाम ऊपर की सीमा है। उससे ज़्यादा लेना ग़लत है; उससे कम के लिए मोल-भाव ठीक है। | 80 |
| उपभोक्ता परिषद् और उपभोक्ता आयोग एक ही हैं। | परिषद् स्वयंसेवी संगठन है, जो रास्ता बताती है और साथ देती है; मुकदमा आयोग सुनता है और फ़ैसला देता है। | 83–84 |
4. किताब के शब्द, आसान भाषा में
| किताब का शब्द | आसान मतलब | पृष्ठ |
|---|---|---|
| उपभोक्ता | वस्तु या सेवा खरीदकर इस्तेमाल करने वाला | 76 |
| उपभोक्ता आंदोलन | बाज़ार की ठगी के ख़िलाफ़ उपभोक्ताओं का संगठित प्रयास | 77 |
| कोपरा | 1986 में बना उपभोक्ताओं की सुरक्षा का कानून | 78 |
| उपभोक्ता इंटरनेशनल | उपभोक्ता संस्थाओं की अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक संस्था: 200 संस्थाएँ, 100 से अधिक देश | 78 |
| अधिकतम खुदरा मूल्य | पैकेट पर छपा सबसे ऊँचा दाम | 80 |
| सूचना पाने का अधिकार कानून | 2005 का कानून, जिससे सरकारी विभागों के कामकाज की सूचना माँगी जा सकती है | 80 |
| क्षतिपूर्ति निवारण | नुकसान की भरपाई | 82 |
| क्लास एक्शन सूट | कई उपभोक्ताओं की मिलकर की गई शिकायत | 82 |
| उपभोक्ता संरक्षण परिषद् | स्वयंसेवी संगठन, जो शिकायत का रास्ता बताता है | 84 |
| उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग | शिकायत सुनकर फ़ैसला देने वाली व्यवस्था, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर | 84 |
| निवासी कल्याण संघ | कॉलोनी की संस्था, जो अपने सदस्यों के मामले उठाती है | 84 |
| मानकीकरण | गुणवत्ता के तय मानदंड; उनका पालन करने वाले उत्पाद पर आई.एस.आई., एगमार्क या हॉलमार्क जैसा चिह्न | 85–86 |
| फूड फोर्टिफिकेशन | खाने की चीज़ों में मुख्य पोषक तत्व मिलाना | 87 |
5. लिखे हुए जवाब कैसे जाँचें
किताब के 13 प्रश्न पृष्ठ 87–88 पर हैं। प्रश्न 12 में जोड़ी मिलानी है और प्रश्न 13 में सही या गलत बताना है; बाकी में बच्चे को लिखकर जवाब देना है। आपको पूरा जवाब नहीं जाँचना; बस देखिए कि ये हिस्से हैं या नहीं।
प्रश्न 1: बाज़ार में नियम क्यों चाहिए
- मुख्य बात: अकेला उपभोक्ता कमज़ोर स्थिति में होता है, इसलिए बाज़ार में भी नियम चाहिए (पृष्ठ 76)।
- ठगी के एक-दो उदाहरण, जैसे कम तौल, मिलावट या घटिया सामान।
- पहले असंतुष्ट उपभोक्ता बस वह दुकान या ब्रांड छोड़ देता था, यह लिखा हो तो और अच्छा (पृष्ठ 77)।
प्रश्न 2: उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत और विकास
- मुख्य बात: 1960 के दशक में जमाखोरी, कालाबाज़ारी और मिलावट के कारण आंदोलन संगठित हुआ (पृष्ठ 77)।
- 1986 में कोपरा बना और 2019 में उसका संशोधन हुआ (पृष्ठ 78)।
- 1970 के दशक के लेख और प्रदर्शनियाँ, या 1985 में संयुक्त राष्ट्र का क़दम, आ जाए तो और अच्छा (पृष्ठ 77–78)।
प्रश्न 3: जागरूक होने की ज़रूरत, दो उदाहरणों से
- मुख्य बात: जानकारी हो तो उपभोक्ता अपना हक़ ले पाता है।
- दो उदाहरण, जैसे अमृता ने सूचना माँगकर जवाब पाया (पृष्ठ 80) और अबिरामी को आयोग से फ़ीस वापस मिली (पृष्ठ 81)।
- रसीद माँगने या चिह्न देखने जैसी आदत लिखी हो तो और अच्छा (पृष्ठ 85, 86, 89)।
प्रश्न 4: शोषण किन कारणों से होता है
- मुख्य बात: अकेला उपभोक्ता कमज़ोर है, और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कई बार गलत सूचना भी दी जाती है (पृष्ठ 76)।
- नियमों का पर्यवेक्षण ठीक से नहीं होता (पृष्ठ 79)।
- शिकायत की प्रक्रिया जटिल और खर्चीली है, और रसीद अक्सर नहीं मिलती (पृष्ठ 86); यह भी लिखा हो तो और अच्छा।
प्रश्न 5: कोपरा क्यों बना
- मुख्य बात: पहले उपभोक्ता को ठगी से बचाने की कोई कानूनी व्यवस्था नहीं थी (पृष्ठ 77)।
- आंदोलन के दबाव से 1986 में यह कानून बना, ताकि उपभोक्ता को कानूनी सुरक्षा और शिकायत की जगह मिले (पृष्ठ 78, 84)।
प्रश्न 6: उपभोक्ता के कर्त्तव्य
- मुख्य बात: खरीद पर रसीद लेना और सँभालकर रखना (पृष्ठ 86, 89)।
- पैकेट की जानकारी पढ़ना (पृष्ठ 80), गुणवत्ता का चिह्न देखना (पृष्ठ 85), वज़न जाँचना (पृष्ठ 89)।
- लुभावने प्रस्तावों से सावधान रहना (पृष्ठ 82) और ठगी हो तो शिकायत करना, यह भी हो तो और अच्छा।
प्रश्न 7: शहद या बिस्कुट खरीदते समय क्या देखें
- मुख्य बात: गुणवत्ता का चिह्न, जैसे एगमार्क या आई.एस.आई. (पृष्ठ 85)।
- पोषक तत्व मिलाए हों तो उसका अलग चिह्न (पृष्ठ 85)।
- पैकेट की जानकारी: अवयव, बनने और खराब होने की तारीख़, अधिकतम खुदरा मूल्य (पृष्ठ 80)।
प्रश्न 8: सरकार के कानूनी क़दम
- मुख्य बात: 1986 का कोपरा और 2019 का संशोधन, और उसके तहत ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय आयोग (पृष्ठ 78, 84)।
- पैकेट पर जानकारी देने के नियम और 2005 का सूचना पाने का अधिकार कानून (पृष्ठ 80)।
- कुछ वस्तुओं के लिए गुणवत्ता का प्रमाण अनिवार्य, और उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग (पृष्ठ 84–85); यह भी हो तो और अच्छा।
प्रश्न 9: उपभोक्ता के अधिकार
- मुख्य बात: छहों अधिकारों के नाम: सुरक्षा, सूचना, चयन, निवारण, प्रतिनिधित्व, उपभोक्ता शिक्षा।
- हर अधिकार के साथ एक पंक्ति का उदाहरण, जैसे रेजी, अमृता, अबिरामी, प्रकाश।
प्रश्न 10: उपभोक्ता एकजुट होकर क्या कर सकते हैं
- मुख्य बात: उपभोक्ता परिषदें रास्ता बताती हैं और आयोग में प्रतिनिधित्व करती हैं; निवासी कल्याण संघ भी मामले उठाते हैं (पृष्ठ 84)।
- कई लोग मिलकर शिकायत कर सकते हैं, जिसे क्लास एक्शन सूट कहते हैं (पृष्ठ 82)।
- किताब की बात कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही आंदोलन प्रभावी हो सकता है, आ जाए तो और अच्छा (पृष्ठ 87)।
प्रश्न 11: आंदोलन की प्रगति और कमियाँ
- प्रगति: 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस, उपभोक्ता समस्याओं के लिए विशिष्ट न्यायालय, 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन (पृष्ठ 86–87)।
- कमियाँ: इनमें से केवल 50–60 संगठन पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त; प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और लंबी; रसीद अक्सर नहीं मिलती; नियमों का पालन अक्सर नहीं होता (पृष्ठ 86–87)।
- दोनों तरफ़ की बातें हों, सिर्फ़ एक तरफ़ की नहीं, यह देखिए।
प्रश्न 12: जोड़ी मिलाइए
| हिस्सा | सही जोड़ी |
|---|---|
| (1) एक उत्पाद के घटकों का विवरण | (ङ) सूचना का अधिकार |
| (2) एगमार्क | (ग) अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाण |
| (3) स्कूटर में खराब इंजन के कारण हुई दुर्घटना | (क) सुरक्षा का अधिकार |
| (4) ज़िला उपभोक्ता आयोग | (ख) उपभोक्ता मामलों में संबंध |
| (5) फूड फोर्टिफिकेशन | (छ) खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना |
| (6) उपभोक्ता इंटरनेशनल | (घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था |
| (7) भारतीय मानक ब्यूरो | (च) वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक विकसित करने वाली एजेंसी |
छपी किताब में (च) की आख़िरी पंक्ति, “विकसित करने वाली एजेंसी”, बाएँ खाने में (4) के नीचे छप गई है; ऊपर दोनों हिस्से पूरे दिए हैं।
प्रश्न 13: सही या गलत
| हिस्सा | सही उत्तर |
|---|---|
| (क) कोपरा केवल सामानों पर लागू होता है | गलत: सेवाओं पर भी लागू है |
| (ख) भारत में उपभोक्ता समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट प्राधिकरण हैं | सही |
| (ग) शोषण होने पर ज़िला आयोग में निश्चित रूप से मुकदमा | गलत |
| (घ) अधिक मूल्य का नुकसान हो तभी आयोग जाना लाभप्रद | गलत |
| (ड.) हॉलमार्क आभूषणों की गुणवत्ता का प्रमाण | सही |
| (च) निवारण प्रक्रिया सरल और शीघ्र है | गलत: किताब इसे जटिल, खर्चीली और लंबी बताती है |
| (छ) मुआवज़ा क्षति की मात्रा पर निर्भर | सही |
सभी 13 प्रश्नों के पूरे उत्तर रिवीजन नोट्स के “अपने को जाँचिए” वाले हिस्से में हैं। बच्चे का जवाब उनसे शब्द-शब्द न मिले, तो भी ठीक है, अगर ज़रूरी बातें आ गई हों।
6. घर पर दस मिनट की बातचीत
दसवीं के बच्चे से पूछताछ कम, बातचीत ज़्यादा कीजिए। खाने के समय या कहीं आते-जाते इनमें से कोई एक बात छेड़िए।
घर का कोई पैकेट उठाइए, जैसे बिस्कुट, तेल या दवा का, और बच्चे से पूछिए कि उस पर क्या-क्या छपा है। किताब के अनुसार पैकेट पर वस्तु के अवयव, मूल्य, बैच संख्या, बनने की तारीख़, खराब होने की अंतिम तिथि और बनाने वाले का पता होना चाहिए (पृष्ठ 80)। जो न मिले, उस पर बात कीजिए, और पूछिए कि छपा दाम सबसे ऊँचा दाम क्यों कहलाता है।
या पिछले हफ़्ते की खरीद याद कीजिए: किन चीज़ों की रसीद मिली और किनकी नहीं? किताब में अरिता से आयोग ने बिल और वारंटी माँगे थे (पृष्ठ 84), और किताब मानती है कि रसीद न मिले तो सबूत जुटाना आसान नहीं होता (पृष्ठ 86)। बच्चा बताए कि रसीद सँभालना क्यों काम आता है।
या कभी दुकानदार ने कोई चीज़ के साथ दूसरी चीज़ लेने का दबाव डाला हो, तो वह याद कीजिए। किताब में ऐसे दो उदाहरण हैं: दंतमंजन के साथ ब्रश, और गैस कनेक्शन के साथ चूल्हा (पृष्ठ 81)। बच्चा बताए कि इसमें कौन-सा अधिकार टूटता है।
7. जब हमें ठगा गया: एक सवाल जिसका एक जवाब नहीं
किताब बच्चों से यह कहती है: “अपने अनुभव से एक ऐसे उदाहरण पर विचार करें, जहाँ आपको यह लगा हो कि बाज़ार में ‘धोखा’ दिया जा रहा था। कक्षा में चर्चा करें।” (पृष्ठ 77)
इस सवाल का कोई एक सही जवाब नहीं है, और आपको भी नहीं देना है। घर का कोई सच्चा अनुभव बच्चे को सुनाइए, जैसे कम तौल, खराब निकला सामान या ज़्यादा लिया गया दाम, और फिर उससे तीन बातें पूछिए: क्या हमारे पास रसीद थी? इसमें उपभोक्ता का कौन-सा अधिकार टूटा? शिकायत करते, तो पहले किससे और फिर कहाँ? उस समय आपने कुछ नहीं किया हो, तो वह भी बताइए। किताब के अंत की प्रश्नावली ठीक यही आदत पूछती है: “क्या आप खुद को यह समझा कर संतुष्ट हो जाते हैं कि यह आपका दुर्भाग्य है कि अक्सर आप ठगे जाते हैं और इसमें नया कुछ भी नहीं है?” (पृष्ठ 89) बच्चा जो तय करे, उसका कारण बताए। आज शिकायत कहाँ और कैसे होती है, यह नीचे दिए आख़िरी लिंक पर है।
किताब का एक नारा इस बातचीत को समेट देता है: “सतर्क उपभोक्ता ही सुरक्षित उपभोक्ता है।” (पृष्ठ 88)
अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
ये चार सवाल पूछ लीजिए। चारों ठीक हों, तो अध्याय की मुख्य बातें आ गई हैं।
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| उपभोक्ता के छह अधिकार कौन-से हैं? | सुरक्षा, सूचना, चयन, निवारण, प्रतिनिधित्व, उपभोक्ता शिक्षा |
| कोपरा कब बना, और उसका संशोधन कब हुआ? | 1986 में बना; 2019 में संशोधन हुआ |
| ठगी हो जाए तो शिकायत कहाँ होती है? | उपभोक्ता आयोग में; किताब के अनुसार 1 करोड़ तक ज़िला, 1 से 10 करोड़ तक राज्य, 10 करोड़ से ऊपर राष्ट्रीय |
| दुकानदार पैकेट पर छपे दाम से ज़्यादा माँगे, तो? | यह ग़लत है; छपा दाम अधिकतम खुदरा मूल्य है, और इसकी शिकायत हो सकती है |
बच्चे के लिए इसी अध्याय के और पन्ने
- रिवीजन नोट्स: पूरा अध्याय छोटे में, किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर के साथ।
- प्रश्न बैंक: परीक्षा जैसे प्रश्न, उत्तर के साथ। बच्चा पहले ख़ुद लिखे, फिर मिलाए।
- फ़्लैशकार्ड: बाईं ओर सवाल, दाईं ओर जवाब। जवाब ढककर बोलिए, फिर मिलाइए; रोज़ पाँच मिनट दोहराने के लिए।
- परख प्रश्न: सोचकर जवाब देने वाले प्रश्न, किताब के उदाहरणों और आँकड़ों पर, हर प्रश्न का उत्तर साथ में।
- इंटरैक्टिव अध्याय: पूरा अध्याय स्क्रीन पर, हिस्सा-दर-हिस्सा; आख़िर में अभ्यास और परियोजना।
- आज शिकायत कहाँ और कैसे: आज शिकायत कहाँ और कैसे होती है, और आयोगों की आज की सीमाएँ।