Chapter 3मुद्रा और साख

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NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3

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कुल 66 प्रश्न

तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए।


खण्ड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “आर्थिक विकास की समझ” (कक्षा 10) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

1वस्तु विनिमय प्रणाली में, जहाँ मुद्रा के बिना वस्तुओं का विनिमय होता है, कौन-सी बात अनिवार्य है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) आवश्यकताओं का दोहरा संयोग

व्याख्या: वस्तु विनिमय में जो चीज़ एक व्यक्ति बेचना चाहता है, वही चीज़ दूसरे व्यक्ति को ख़रीदनी भी होनी चाहिए। जूता निर्माता को ऐसा किसान ढूँढ़ना पड़ता, जो गेहूँ बेचना भी चाहे और बदले में जूते ख़रीदना भी। इसी को आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39

2मुद्रा को “विनिमय का माध्यम” क्यों कहा जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) क्योंकि वह विनिमय की प्रक्रिया में मध्यस्थता का काम करती है

व्याख्या: जूता निर्माता पहले जूते बेचकर मुद्रा लेता है और फिर उसी मुद्रा से गेहूँ ख़रीदता है। मुद्रा दोनों सौदों के बीच की कड़ी बनती है, इसलिए उसे विनिमय का माध्यम कहते हैं। आज की मुद्रा कीमती धातु की बनी भी नहीं होती।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39, 40

3आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है। फिर भी उसे विनिमय का माध्यम क्यों स्वीकार किया जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) क्योंकि देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है

व्याख्या: करेंसी-कागज़ के नोट और सिक्के न सोने-चाँदी के बने हैं, न अनाज और पशुओं की तरह रोज़मर्रा की चीज़ हैं। लोग उन्हें इसलिए स्वीकार करते हैं, क्योंकि सरकार उन्हें प्राधिकृत करती है। भारत में कानून किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं देता।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40

4भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय सरकार की तरफ़ से

व्याख्या: भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है। भारतीय कानून के अनुसार किसी और व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं है। व्यावसायिक बैंक जमा लेते हैं और ऋण देते हैं, नोट जारी नहीं करते।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40

5बैंक खातों में जमा धन को ‘माँग जमा’ क्यों कहा जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) क्योंकि इसे माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है

व्याख्या: लोग अपना अतिरिक्त नकद अपने नाम से खाता खोलकर बैंक में जमा करते हैं। बैंक इस पर सूद देता है, और लोग अपनी ज़रूरत के अनुसार इसमें से धन माँगकर निकाल सकते हैं। इसलिए इसे माँग जमा कहते हैं। विकल्प (द) ग़लत है, क्योंकि बैंक जमा पर सूद देते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40

6चैक क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) एक ऐसा कागज़, जो बैंक को किसी के खाते से चैक पर लिखे नाम के व्यक्ति को एक ख़ास रकम देने का आदेश देता है

व्याख्या: चैक वही काटता है, जिसका किसी बैंक में खाता हो। जूता निर्माता सलीम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक देता है, आपूर्तिकर्ता उसे अपने खाते में जमा करता है, और कुछ दिनों में धन एक खाते से दूसरे खाते में चला जाता है। माँग जमा को भी मुद्रा समझा जाता है; चैक उसे एक खाते से दूसरे खाते में भेजने का आदेश है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 41

7किताब के अनुसार आजकल भारत में बैंक अपनी जमा का कितना हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) केवल 5 प्रतिशत

व्याख्या: किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं, इसलिए बैंक का काम जमा के छोटे हिस्से से आराम से चल जाता है। आजकल भारत में यह हिस्सा केवल 5 प्रतिशत है। जमा राशि का बड़ा भाग बैंक ऋण देने में लगाते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42

8बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर

व्याख्या: बैंक जमा पर जो ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ब्याज ऋण पर लेते हैं। इन दोनों का अंतर बैंक की आय का प्रमुख स्रोत है। जमाकर्ताओं को दिया गया ब्याज बैंक की आय नहीं, उसका ख़र्च है, और नोट केवल भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42

9किताब के अनुसार ऋण (उधार) किसे कहते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) एक सहमति, जिसमें साहूकार कर्ज़दार को धन, वस्तुएँ या सेवाएँ देता है और बदले में भविष्य में भुगतान का वादा लेता है

व्याख्या: ऋण में आज कुछ मिलता है और बदले में बाद में चुकाने का वादा किया जाता है। सलीम ने चमड़ा अभी लिया और भुगतान बाद में करने का वादा किया; यह भी ऋण है। सीधी अदला-बदली वस्तु विनिमय है, ऋण नहीं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43

10त्यौहार के मौसम में जूता निर्माता सलीम ने ऋण किस ज़रूरत के लिए लिया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) उत्पादन के लिए कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी करने के लिए

व्याख्या: सलीम को एक महीने के अंदर 3000 जोड़ी जूते पहुँचाने थे। इसके लिए उसे सिलाई और चिपकाने के काम के लिए अतिरिक्त मज़दूर रखने थे और कच्चा माल ख़रीदना था। ऋण से उसने कार्यशील पूँजी की ज़रूरत पूरी की, ऑर्डर समय पर पहुँचाया, लाभ कमाया और उधार भी चुका दिया।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43

11स्वप्ना की फसल बर्बाद हुई, वह कर्ज़ नहीं लौटा सकी और उसे अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। ऐसी स्थिति को आम भाषा में क्या कहा जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) कर्ज–ज़ाल

व्याख्या: ऋण ने स्वप्ना की कमाई बढ़ाने के बजाय उसकी स्थिति बदतर कर दी। ऐसी स्थिति को आम भाषा में कर्ज–ज़ाल कहते हैं, जिससे बाहर निकलना काफ़ी कष्टदायक होता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44

12समर्थक ऋणाधार किसे कहते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) कर्ज़दार की अपनी वह संपत्ति, जिसे वह ऋण चुकने तक उधारदाता के लिए गारंटी के रूप में इस्तेमाल करता है

व्याख्या: भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु और बैंकों में जमा पूँजी इसके उदाहरण हैं। कर्ज़दार ऋण न लौटा पाए, तो उधारदाता को भुगतान पाने के लिए यह संपत्ति बेचने का अधिकार होता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44

13ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीके, इन सबको मिलाकर क्या कहते हैं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) ऋण की शर्तें

व्याख्या: ये चारों बातें मिलकर ऋण की शर्तें कहलाती हैं। एक ऋण व्यवस्था से दूसरी में इनमें काफ़ी फ़र्क होता है, और ये उधारदाता और कर्ज़दार की प्रकृति पर भी निर्भर करती हैं। मेघा के आवास ऋण में ब्याज 12 प्रतिशत वार्षिक था, अदायगी 10 साल में मासिक किश्तों में, कागज़ात नौकरी और वेतन के रिकार्ड, और ऋणाधार नए घर के सभी कागज़।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 45

14सोनपुर के अरुण को खेती के लिए बैंक से मिले ऋण पर वार्षिक ब्याज दर कितनी है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) 8.5 प्रतिशत

व्याख्या: अरुण के पास 7 एकड़ ज़मीन है, और वह सोनपुर के उन कुछ लोगों में से है, जिन्हें खेती के लिए बैंक से ऋण मिला है। यह ऋण अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटाया जा सकता है। 3 और 5 प्रतिशत तो सोनपुर में व्यापारी और महाजन की मासिक दरें हैं, और 60 प्रतिशत महाजन की 5 प्रतिशत मासिक दर का वार्षिक रूप है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46

15रमा के अनुसार सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत कौन है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) भूस्वामी-नियोक्ता

व्याख्या: खेतिहर मज़दूर रमा अपने मालिक, सोनपुर के एक मध्यवर्गीय भूस्वामी, से 5 प्रतिशत मासिक ब्याज पर कर्ज़ लेती है और उसके यहाँ काम करके कर्ज़ लौटाती है। वह बताती है कि सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46

16इनमें से कौन ऋण का औपचारिक स्रोत है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) सहकारी समिति

व्याख्या: औपचारिक क्षेत्रक में बैंकों और सहकारी समितियों से लिए कर्ज़ आते हैं। साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त अनौपचारिक उधारदाता हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48

17आलेख 1 के अनुसार 2019 में ग्रामीण भारत में ऋण का सबसे बड़ा स्रोत कौन था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) व्यावसायिक बैंक

व्याख्या: आलेख 1 में व्यावसायिक बैंकों का हिस्सा 51 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर साहूकार हैं, 23 प्रतिशत के साथ। सहकारी समितियाँ/बैंक 10 प्रतिशत और रिश्तेदार एवं मित्र 7 प्रतिशत हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48

18आलेख 2 के अनुसार शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों के कुल ऋण का कितना प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) 54 प्रतिशत

व्याख्या: गरीब परिवारों के ऋण में 54 प्रतिशत अनौपचारिक और 46 प्रतिशत औपचारिक है। अमीर परिवारों की तस्वीर उलटी है: केवल 17 प्रतिशत अनौपचारिक और 83 प्रतिशत औपचारिक। 46 गरीब परिवारों का औपचारिक हिस्सा है, अनौपचारिक नहीं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 49

19स्वयं सहायता समूह को बैंक से ऋण किसके नाम पर दिया जाता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) समूह के नाम पर

व्याख्या: एक या दो वर्ष तक नियमित बचत करने के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है। ऋण समूह के नाम पर दिया जाता है, और इसे लौटाने की ज़िम्मेदारी भी समूह की होती है। इसका मकसद सदस्यों के लिए स्वरोज़गार के अवसरों का सृजन करना है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51

20बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस को 2006 में कौन-सा सम्मान मिला?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) शांति के लिए नोबेल पुरस्कार

व्याख्या: किताब के बॉक्स में प्रो. मोहम्मद युनूस को ग्रामीण बैंक का संस्थापक और 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित बताया गया है। ग्रामीण बैंक का उचित ब्याज दरों पर गरीबों की ऋण ज़रूरतें पूरी करने का बड़ा सफल इतिहास रहा है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 52

खण्ड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1बहुत प्रारंभिक काल से ही भारतीय ______ और ______ का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे; इसके बाद सोना, चाँदी और ताँबे जैसी धातुओं के सिक्कों का चलन हुआ। (पृष्ठ 40)

उत्तर देखिए

बहुत प्रारंभिक काल से ही भारतीय अनाज और पशु का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे; इसके बाद सोना, चाँदी और ताँबे जैसी धातुओं के सिक्कों का चलन हुआ। (पृष्ठ 40)

2भारत में कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर ______ में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता। (पृष्ठ 40)

उत्तर देखिए

भारत में कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता। (पृष्ठ 40)

3लोग अपना अतिरिक्त नकद बैंकों में ______ के रूप में रखते हैं, और बैंक उस पर ______ भी देते हैं। (पृष्ठ 40)

उत्तर देखिए

लोग अपना अतिरिक्त नकद बैंकों में निक्षेप के रूप में रखते हैं, और बैंक उस पर सूद भी देते हैं। (पृष्ठ 40)

4बैंक ______ (जिनके पास अतिरिक्त राशि है) और ______ (जिन्हें राशि की ज़रूरत है) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं। (पृष्ठ 42)

उत्तर देखिए

बैंक जमाकर्ताओं (जिनके पास अतिरिक्त राशि है) और कर्ज़दारों (जिन्हें राशि की ज़रूरत है) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं। (पृष्ठ 42)

5त्यौहार के मौसम में सलीम को शहर के एक बड़े व्यापारी से ______ जोड़ी जूतों की माँग आई, जिसे उसे ______ के अंदर पूरा करना था। (पृष्ठ 43)

उत्तर देखिए

त्यौहार के मौसम में सलीम को शहर के एक बड़े व्यापारी से 3000 जोड़ी जूतों की माँग आई, जिसे उसे एक महीने के अंदर पूरा करना था। (पृष्ठ 43)

6खेती के आगत ख़रीदने और फसल की बिक्री होने के बीच कम से कम ______ का अंतराल होता है। (पृष्ठ 44)

उत्तर देखिए

खेती के आगत ख़रीदने और फसल की बिक्री होने के बीच कम से कम 3–4 महीने का अंतराल होता है। (पृष्ठ 44)

7मेघा के आवास ऋण में बैंक ने ______ ऋणाधार के रूप में रख लिए। (पृष्ठ 45)

उत्तर देखिए

मेघा के आवास ऋण में बैंक ने नए घर के सभी कागज़ ऋणाधार के रूप में रख लिए। (पृष्ठ 45)

8सोनपुर के नज़दीक के गाँव की कृषक सहकारी समिति के ______ किसान सदस्य हैं। (पृष्ठ 47)

उत्तर देखिए

सोनपुर के नज़दीक के गाँव की कृषक सहकारी समिति के 2300 किसान सदस्य हैं। (पृष्ठ 47)

9एक विशेष स्वयं सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी ______ सदस्य होते हैं, और प्रति व्यक्ति बचत ______ रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक हो सकती है। (पृष्ठ 51)

उत्तर देखिए

एक विशेष स्वयं सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी 15–20 सदस्य होते हैं, और प्रति व्यक्ति बचत 25 रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक हो सकती है। (पृष्ठ 51)

10“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के ______ के लिए अति आवश्यक है।” (पृष्ठ 49)

उत्तर देखिए

“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।” (पृष्ठ 49)

खण्ड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 6 प्रश्न

1चैक अपने आप में मुद्रा है।

उत्तर देखिए

ग़लत

(करेंसी के साथ माँग जमा को भी मुद्रा समझा जाता है; चैक तो बैंक को भुगतान का आदेश देने वाला कागज़ है, जिससे जमा एक खाते से दूसरे खाते में जाती है; पृष्ठ 41)

2भारत में बैंक अपनी सारी जमा राशि नकद के रूप में अपने पास रखते हैं।

उत्तर देखिए

ग़लत

(वे जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं और बड़ा भाग ऋण देने में लगाते हैं; पृष्ठ 42)

3सहकारी समितियाँ ऋण का अनौपचारिक स्रोत हैं।

उत्तर देखिए

ग़लत

(बैंकों की तरह सहकारी समितियाँ भी औपचारिक स्रोत हैं; पृष्ठ 48)

4अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 48)

5शहरी क्षेत्रों में अमीर परिवारों के कर्ज़ का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक स्रोतों से आता है।

उत्तर देखिए

ग़लत

(उनके केवल 17 प्रतिशत कर्ज़ अनौपचारिक स्रोतों से हैं, 83 प्रतिशत औपचारिक स्रोतों से; पृष्ठ 49)

6स्वयं सहायता समूहों में संगठित निर्धन महिलाओं को बैंक ऋण देने को तैयार हो जाते हैं, भले ही उनके पास कोई ऋणाधार न हो।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 51)

खण्ड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न

1★★आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है? जूता निर्माता के उदाहरण से समझाइए।

उत्तर देखिए

जो वस्तु एक व्यक्ति बेचना चाहता है, वही वस्तु दूसरा व्यक्ति ख़रीदना चाहे, तो इसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं; वस्तु विनिमय प्रणाली में यह अनिवार्य है। मुद्रा के बिना जूता निर्माता को ऐसा किसान ढूँढ़ना पड़ता, जो गेहूँ बेचना भी चाहे और जूते ख़रीदना भी। मुद्रा होने पर वह जूते बेचकर मुद्रा लेता है और उससे गेहूँ ख़रीद लेता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39, 40

2★★आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है। फिर भी लोग उसे क्यों स्वीकार करते हैं?

उत्तर देखिए

क्योंकि देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से करेंसी नोट जारी करता है, और कानून किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को मुद्रा जारी करने की इजाज़त नहीं देता। कानून रुपये को विनिमय के माध्यम के रूप में वैधता भी देता है: भारत में कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर रुपयों में अदायगी को अस्वीकार नहीं कर सकता।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40

3★★करेंसी के अलावा माँग जमा को भी आधुनिक मुद्रा क्यों माना जाता है?

उत्तर देखिए

बैंक खाते में जमा धन माँग के ज़रिए निकाला जा सकता है, इसलिए वह माँग जमा है। माँग जमा के बदले चैक लिखकर बिना नकद के सीधा भुगतान किया जा सकता है। करेंसी के साथ-साथ माँग जमा भी भुगतान के माध्यम के रूप में व्यापक स्तर पर स्वीकार की जाती है, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में इसे भी मुद्रा समझा जाता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40, 41

4★जूता निर्माता सलीम ने चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक से भुगतान किया। यह लेन-देन कैसे पूरा हुआ?

उत्तर देखिए

सलीम ने एक विशेष रकम का चैक लिखा, यानी अपने बैंक को आदेश दिया कि वह यह रकम चमड़ा आपूर्तिकर्ता को दे। आपूर्तिकर्ता ने चैक ले जाकर अपने बैंक खाते में जमा कर दिया, और कुछ दिनों में धन एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में अंतरित हो गया। यह लेन-देन बिना नकद की अदायगी के पूरा हुआ।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 41

5★★बैंक जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के बीच मध्यस्थता कैसे करते हैं?

उत्तर देखिए

बैंक जमा का केवल एक छोटा हिस्सा, आजकल भारत में केवल 5 प्रतिशत, नकद रखते हैं और बड़े भाग से लोगों की ऋण-ज़रूरतें पूरी करते हैं। इस तरह वे जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) और जिन्हें राशि की ज़रूरत है (कर्ज़दार), उनके बीच कड़ी बनते हैं। वे जमा पर जितना ब्याज देते हैं, उससे ज़्यादा ब्याज ऋण पर लेते हैं; यही अंतर उनकी आय का प्रमुख स्रोत है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42

6★किताब पूछती है: “अगर सभी जमाकर्ता एक ही समय में अपनी धन राशि की माँग करने बैंक पहुँच जाएँ तो क्या होगा?” इसका उत्तर लिखिए।

उत्तर देखिए

बैंक के पास उस समय सबको लौटाने लायक नकद नहीं होगा। वह जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखता है और बाकी बड़ा भाग ऋण पर दे चुका होता है। बैंक का काम इतने कम नकद से इसीलिए चलता है, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42

7★★ग्रामीण क्षेत्रों में साख की मुख्य माँग किसके लिए होती है, और किसान उधार कब लौटाते हैं?

उत्तर देखिए

ग्रामीण क्षेत्रों में साख की मुख्य माँग फसल उगाने के लिए होती है: बीज, खाद, कीटनाशक दवाओं, पानी, बिजली और उपकरणों की मरम्मत पर काफ़ी ख़र्च होता है। इन्हें ख़रीदने और फसल बिकने के बीच कम से कम 3–4 महीने का अंतराल होता है। किसान ऋतु के आरंभ में उधार लेते हैं और फसल तैयार होने के बाद लौटाते हैं, इसलिए अदायगी मुख्यतः फसल की कमाई पर निर्भर है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44

8★समर्थक ऋणाधार क्या है? उधारदाता इसे क्यों माँगता है?

उत्तर देखिए

समर्थक ऋणाधार कर्ज़दार की अपनी संपत्ति है, जैसे भूमि, इमारत, गाड़ी, पशु या बैंकों में जमा पूँजी, जिसे वह ऋण चुकने तक उधारदाता के लिए गारंटी के रूप में इस्तेमाल करता है। उधारदाता इसे इसलिए माँगता है, क्योंकि कर्ज़दार उधार न लौटा पाए, तो उसे भुगतान पाने के लिए यह संपत्ति बेचने का अधिकार होता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 44

9★★सोनपुर के अरुण और श्यामल के ऋण की शर्तों में कोई दो अंतर लिखिए।

उत्तर देखिए
1

ब्याज दर —

अरुण को बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण मिला है; श्यामल कृषि व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक ब्याज पर ऋण लेता है (उससे पहले महाजन से 5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक)। (2) अदायगी और फसल — अरुण ऋण अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है; श्यामल को वादा करना पड़ता है कि वह अपनी फसल उसी व्यापारी को बेचेगा, जो फसल कटने के समय कम कीमत पर ख़रीदता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46

10★★स्वयं सहायता समूह ऋणाधार की कमी की समस्या कैसे दूर करते हैं?

उत्तर देखिए

सदस्य नियमित रूप से बचत करते हैं, और एक या दो वर्ष बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है। ऋण समूह के नाम पर मिलता है और उसे लौटाने की ज़िम्मेदारी भी समूह की होती है; कोई सदस्य ऋण न लौटाए, तो बाकी सदस्य इसे गंभीरता से लेते हैं। इसी कारण बैंक समूहों में संगठित निर्धन महिलाओं को ऋण दे देते हैं, यद्यपि उनके पास कोई ऋणाधार नहीं होता।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51

खण्ड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न

1★★मुद्रा के आधुनिक रूप पहले के रूपों से कैसे अलग हैं? तीन बिंदुओं में लिखिए।

उत्तर देखिए
1

पहले के रूप —

बहुत प्रारंभिक काल से भारतीय अनाज और पशु का मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे; फिर सोना, चाँदी और ताँबे जैसी धातुओं के सिक्के चले, जिनका चलन पिछली सदी तक रहा।

2

आधुनिक रूप —

करेंसी-कागज़ के नोट और सिक्के बहुमूल्य धातु के नहीं बने, न अनाज और पशुओं की तरह रोज़मर्रा की चीज़ हैं; इनका अपना कोई इस्तेमाल नहीं। इन्हें इसलिए स्वीकार किया जाता है, क्योंकि सरकार इन्हें प्राधिकृत करती है।

3

बैंकों में जमा —

बैंक खातों की माँग जमा भी मुद्रा मानी जाती है, क्योंकि चैक से इसके ज़रिए बिना नकद के भुगतान हो जाता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40, 41

2★★सलीम और स्वप्ना, दोनों ने ऋण लिया, पर नतीजे उलटे रहे। तीन बिंदुओं में समझाइए।

उत्तर देखिए
1

सलीम —

ऋण से उसने उत्पादन के लिए कार्यशील पूँजी जुटाई, 3000 जोड़ी जूते समय पर पहुँचाए, अच्छा-ख़ासा लाभ कमाया और उधार भी चुका दिया। किताब कहती है: “इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।”

2

स्वप्ना —

उसने 3 एकड़ में मूँगफली के लिए साहूकार से ऋण लिया; कीटों से फसल बर्बाद हुई, कर्ज़ नहीं लौटा, अगले साल फिर उधार लेना पड़ा और अंत में ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। इसे आम भाषा में कर्ज–ज़ाल कहा जाता है।

3

अंतर का कारण —

“ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” स्वप्ना की खेती में फसल बर्बाद होने का खतरा था; फसल बर्बाद हुई, वह कर्ज़ नहीं लौटा पाई और उसे अपनी ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43, 44

3★औपचारिक ऋणदाताओं पर भारतीय रिज़र्व बैंक की निगरानी के तीन पहलू लिखिए।

उत्तर देखिए
1

नकद शेष —

बैंक अपनी जमा का एक न्यूनतम नकद हिस्सा अपने पास रखते हैं; रिज़र्व बैंक नज़र रखता है कि बैंक वास्तव में यह नकद शेष बनाए हुए हैं।

2

छोटे कर्ज़दार —

वह देखता है कि बैंक केवल लाभ कमाने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को ही नहीं, बल्कि छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दे रहे हैं।

3

जानकारी —

समय-समय पर बैंकों को रिज़र्व बैंक को बताना पड़ता है कि वे कितना और किनको ऋण दे रहे हैं, और ब्याज की दरें क्या हैं।

अनौपचारिक क्षेत्रक में ऐसी कोई संस्था नहीं है, इसलिए वहाँ ऋणदाता ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48

4★★अनौपचारिक ऋण कर्ज़दार को महँगा क्यों पड़ता है? तीन बिंदु लिखिए।

उत्तर देखिए
1

ऊँचा ब्याज —

अनौपचारिक क्षेत्रक के ज़्यादातर ऋणदाता औपचारिक ऋणदाताओं से कहीं अधिक ब्याज वसूल करते हैं, और उन पर नज़र रखने वाली कोई संस्था नहीं है।

2

कम बचती आय —

कर्ज़दार की आय का अधिकतर हिस्सा ऋण की अदायगी में चला जाता है, जैसा सोनपुर के श्यामल के मामले में दिखा।

3

बढ़ता बोझ —

कभी लौटाने की रकम कर्ज़दार की आय से भी अधिक हो जाती है; बोझ बढ़ता है और व्यक्ति ऋण–जाल में फँस जाता है, जैसा रमा के मामले में दिखा। ऐसा भी हो सकता है कि ऊँची लागत देखकर लोग कर्ज़ लेकर उद्यम शुरू करने से पीछे हट जाएँ।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48, 49

5★★निर्धन परिवार ऋण के लिए अब भी अनौपचारिक स्रोतों पर क्यों निर्भर हैं?

उत्तर देखिए
1

बैंक हर जगह नहीं —

भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक मौजूद नहीं हैं।

2

ऋणाधार और कागज़ात —

बैंक से कर्ज़ लेने के लिए ऋणाधार और विशेष कागज़ात चाहिए, जैसा मेघा के मामले में दिखा; ऋणाधार की अनुपलब्धता एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते।

3

साहूकार की पहचान —

साहूकार कर्ज़दारों को व्यक्तिगत स्तर पर जानते हैं, इसलिए अक्सर बिना ऋणाधार के, और पुराना ऋण चुकाए बिना भी, नया कर्ज़ दे देते हैं। पर वे ब्याज की दरें बहुत ऊँची रखते हैं, लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 50, 51

6★सोनपुर के पास की कृषक सहकारी समिति कैसे काम करती है?

उत्तर देखिए
1

सदस्य और जमा —

सहकारी समिति के सदस्य अपने संसाधन मिलकर एकत्र करते हैं; इस समिति के 2300 किसान सदस्य हैं, और यह उनसे जमा लेती है।

2

बैंक से ऋण —

इस जमा पूँजी को ऋणाधार मानकर समिति ने बैंक से बड़ा ऋण लिया है, जिससे वह सदस्यों को कर्ज़ देती है; ऋण लौटने पर कर्ज़ का दूसरा दौर शुरू हो सकता है।

3

ऋण के काम —

कृषि उपकरण ख़रीदना, खेती और कृषि व्यापार, मछली पकड़ना, घर बनाना और दूसरे कई तरह के ख़र्च।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 47

7★★स्वयं सहायता समूहों से ग्रामीण निर्धनों को कौन-से तीन लाभ होते हैं?

उत्तर देखिए
1

ऋणाधार के बिना ऋण —

समूह कर्ज़दारों को ऋणाधार की कमी की समस्या से उबारते हैं।

2

समय पर, उचित दर पर —

सदस्यों को अलग-अलग ज़रूरतों के लिए समय पर और उचित ब्याज दर पर ऋण मिल जाता है; समूह का ब्याज साहूकार के ब्याज से कम होता है।

3

संगठन और मंच —

समूह ग्रामीण गरीबों को संगठित करते हैं; महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी होती हैं, और नियमित बैठकों में स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा जैसे सामाजिक विषयों पर चर्चा का आम मंच मिलता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51

8★बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक के उदाहरण से क्या सीख मिलती है?

उत्तर देखिए
1

सफल इतिहास —

ग्रामीण बैंक का उचित ब्याज दरों पर गरीबों की ऋण ज़रूरतें पूरी करने का बड़ा सफल इतिहास रहा है; 2018 में इसके सदस्य बांग्लादेश के 81,600 गाँवों में फैले हुए थे।

2

भरोसेमंद कर्ज़दार —

इससे ऋण लेने वाली ज़्यादातर महिलाएँ गरीब तबके की हैं। उन्होंने दिखा दिया कि गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं, और छोटी आय वाली कई तरह की गतिविधियाँ सफलतापूर्वक शुरू करके चला सकती हैं।

3

संस्थापक का विचार —

संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस, जिन्हें 2006 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, कहते हैं: “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी–छोटी गतिविधियों के ज़रिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।”

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 52

खण्ड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न

1★★वस्तु विनिमय की कठिनाई क्या है? मुद्रा उसे कैसे दूर करती है, और समय के साथ मुद्रा के कौन-कौन से रूप रहे हैं?

उत्तर देखिए

मुद्रा हमारे रोज़ के लेन-देन का बड़ा हिस्सा है, और उसका इतिहास बताता है कि उसके रूप समय के साथ बदले हैं।

1

दोहरे संयोग की कठिनाई —

वस्तु विनिमय में जो चीज़ एक व्यक्ति बेचना चाहे, वही दूसरे को ख़रीदनी भी चाहिए।

उदाहरण किताब के चित्र में जूते वाला गेहूँ चाहता है, पर गेहूँ वाले को जूते नहीं, कपड़े चाहिए।

2

मुद्रा बीच की कड़ी —

मुद्रा मध्यस्थता का काम करती है, इसलिए उसे विनिमय का माध्यम कहते हैं।

उदाहरण जूता निर्माता जूते बेचकर मुद्रा लेता है और उससे गेहूँ या कोई भी दूसरी वस्तु ख़रीद लेता है।

3

पुराने रूप —

बहुत प्रारंभिक काल से अनाज और पशु, फिर सोने, चाँदी और ताँबे के सिक्के, जो पिछली सदी तक चले।

उदाहरण किताब में लगभग 2500 वर्ष पुराने आहत सिक्के, गुप्तकालीन सिक्के, तुगलक के सिक्के और अकबर कालीन सोने की मोहर दिखाई गई हैं।

4

करेंसी —

आज नोट और सिक्के मुद्रा हैं; इनका अपना कोई इस्तेमाल नहीं, पर सरकार इन्हें प्राधिकृत करती है।

उदाहरण भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से नोट जारी करता है, और कोई रुपयों में अदायगी को कानूनी तौर पर अस्वीकार नहीं कर सकता।

5

माँग जमा —

बैंक खातों का जमा धन भी मुद्रा है, क्योंकि उससे बिना नकद के भुगतान हो जाता है।

उदाहरण सलीम चैक से चमड़ा आपूर्तिकर्ता को भुगतान करता है, और धन कुछ दिनों में एक खाते से दूसरे खाते में चला जाता है।

निष्कर्ष ★ मुद्रा ने दोहरे संयोग की ज़रूरत ख़त्म कर दी, और उसके आधुनिक रूप, करेंसी और जमा, बैंक प्रणाली से बहुत करीब से जुड़े हुए हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 39–41

2★★बैंक लोगों की जमा का क्या करते हैं? बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियों को समझाइए।

उत्तर देखिए

बैंक एक ओर लोगों की जमा लेते हैं और दूसरी ओर उसी से ऋण देते हैं; पूरी व्यवस्था इन दोनों के बीच चलती है।

1

जमा लेना —

लोग अतिरिक्त नकद अपने नाम से खाता खोलकर बैंक में जमा करते हैं; बैंक इस पर सूद देता है और ज़रूरत पर धन निकालने देता है।

उदाहरण हर महीने के आख़िर में वेतन पाने वाले मज़दूरों के पास अतिरिक्त नकद होता है, जिसे वे बैंक में रखते हैं।

2

थोड़ा नकद —

बैंक जमा का एक छोटा हिस्सा नकद रखते हैं, ताकि किसी दिन निकासी की माँग पूरी हो सके।

उदाहरण आजकल भारत में यह हिस्सा केवल 5 प्रतिशत है, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।

3

बड़ा भाग ऋण में —

जमा राशि का बड़ा भाग विभिन्न आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण देने में लगता है।

उदाहरण सोनपुर के अरुण को खेती के लिए बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण मिला, और मेघा को घर के लिए 5 लाख रुपये का।

4

मध्यस्थता —

बैंक जिनके पास अतिरिक्त राशि है (जमाकर्ता) और जिन्हें राशि चाहिए (कर्ज़दार), उनके बीच कड़ी हैं।

उदाहरण किताब के चित्र में जमाकर्ता धन जमा करते हैं, फिर धन निकालते हैं और ब्याज पाते हैं; कर्ज़दार ऋण लेते हैं, फिर ऋण लौटाते हैं और ब्याज देते हैं; बीच में बैंक की आय बढ़ती है।

5

बैंक की आय —

बैंक ऋण पर जमा से ज़्यादा ब्याज लेते हैं।

उदाहरण कर्ज़दारों से लिए गए ब्याज और जमाकर्ताओं को दिए गए ब्याज के बीच का अंतर बैंकों की आय का प्रमुख स्रोत है।

निष्कर्ष ★ बैंक बचत को ऋण में बदलकर जमाकर्ता, कर्ज़दार और ख़ुद, तीनों के काम आते हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 40, 42, 45, 46

3★★ऋण कभी आय बढ़ाता है और कभी कर्ज़दार को फँसा देता है। किताब के उदाहरणों से समझाइए।

उत्तर देखिए

आर्थिक गतिविधियों के लिए ऋण ज़रूरी है, पर उसका असर परिस्थिति और ऋण की शर्तों पर निर्भर करता है।

1

आय बढ़ाने वाला ऋण —

ऋण से उत्पादन का ख़र्च समय पर पूरा होता है और कमाई बढ़ती है।

उदाहरण सलीम ने कार्यशील पूँजी के लिए ऋण लिया, 3000 जोड़ी जूते समय पर पहुँचाए, लाभ कमाया और उधार चुका दिया।

2

जोखिम में फँसाने वाला ऋण —

फसल बर्बाद हो, तो अदायगी असंभव हो जाती है।

उदाहरण स्वप्ना की मूँगफली कीटों से बर्बाद हुई; कर्ज़ बढ़ता गया और उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। इसे आम भाषा में कर्ज–ज़ाल कहा जाता है।

3

कभी न ख़त्म होने वाला कर्ज़ —

कुछ लोगों को पुराना ऋण लौटाने से पहले ही नया ऋण लेना पड़ता है।

उदाहरण रमा 5 प्रतिशत मासिक ब्याज पर भूस्वामी से कर्ज़ लेती है, उसके यहाँ काम करके लौटाती है, और अभी उसे भूस्वामी के 5,000 रुपये देने हैं।

4

ऊँची लागत —

अनौपचारिक ऋण का ऊँचा ब्याज कर्ज़दार की आय का बड़ा हिस्सा ले लेता है।

उदाहरण श्यामल को कभी महाजन को 5 प्रतिशत मासिक (60 प्रतिशत वार्षिक) देना पड़ता था, और अब व्यापारी को अपनी फसल भी उसी को बेचनी पड़ती है।

5

असली कसौटी —

ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर मिलने वाले सहयोग पर निर्भर है।

उदाहरण सलीम ने समय पर जूते पहुँचाए, लाभ कमाया और ऋण लौटा दिया; स्वप्ना की फसल बर्बाद हुई और कर्ज़ चुकाने के लिए उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा।

निष्कर्ष ★ सस्ता ऋण और कम जोखिम हो, तो ऋण आय बढ़ाता है; महँगा ऋण और ऊँचा जोखिम हो, तो वही ऋण कर्ज़दार की स्थिति बदतर कर देता है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 43, 44, 46, 49

4★★ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों की तुलना कीजिए।

उत्तर देखिए

लोग अलग-अलग स्रोतों से ऋण लेते हैं; इन्हें औपचारिक और अनौपचारिक, दो वर्गों में बाँटा जाता है।

1

कौन देता है —

औपचारिक में बैंक और सहकारी समितियाँ; अनौपचारिक में साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त।

उदाहरण सोनपुर में अरुण बैंक से ऋण लेता है, श्यामल कृषि व्यापारी से, और रमा अपने भूस्वामी-नियोक्ता से।

2

निगरानी —

औपचारिक स्रोतों पर भारतीय रिज़र्व बैंक नज़र रखता है; अनौपचारिक ऋणदाताओं की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।

उदाहरण रिज़र्व बैंक देखता है कि बैंक नकद शेष रखें और छोटे किसानों, छोटे उद्योगों को भी ऋण दें; अनौपचारिक ऋणदाता ऐच्छिक दरों पर ऋण दे सकते हैं।

3

ब्याज —

अनौपचारिक ऋणदाता कहीं अधिक ब्याज वसूल करते हैं।

उदाहरण अरुण बैंक को 8.5 प्रतिशत वार्षिक देता है, जबकि रमा भूस्वामी को 5 प्रतिशत मासिक।

4

ऋणाधार और कागज़ात —

बैंक ऋणाधार और विशेष कागज़ात माँगते हैं; साहूकार कर्ज़दार को निजी तौर पर जानते हैं और अक्सर बिना ऋणाधार के भी ऋण दे देते हैं।

उदाहरण मेघा को नौकरी और वेतन के रिकार्ड दिखाने पड़े, और बैंक ने नए घर के कागज़ ऋणाधार के रूप में रख लिए।

5

वसूली का तरीका —

अनौपचारिक ऋणदाताओं को नाजायज़ तरीकों से पैसा वापस लेने से रोकने वाला कोई नहीं।

उदाहरण महाजन लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करते और निर्धन कर्ज़दारों को तंग करते हैं।

निष्कर्ष ★ औपचारिक ऋण सस्ता है, फिर भी गरीब परिवार ज़्यादातर अनौपचारिक स्रोतों पर ही निर्भर हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 45–51

5★★“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।” इस कथन को समझाइए, और औपचारिक ऋण के बारे में किताब के दो सुझाव लिखिए।

उत्तर देखिए

ऋण की लागत तय करती है कि ऋण कर्ज़दार को आगे बढ़ाएगा या उसे दबा देगा।

1

आय और काम —

सस्ता कर्ज़ मिले, तो लोग फसल उगा सकते हैं, कारोबार कर सकते हैं और छोटे उद्योग लगा सकते हैं।

उदाहरण बैंकों और सहकारी समितियों के ज़्यादा कर्ज़ देने से लोगों की आय बढ़ सकती है।

2

ऋण–जाल से बचाव —

ऊँचे ब्याज से लौटाने की रकम कभी आय से भी ज़्यादा हो जाती है।

उदाहरण रमा के मामले में ऋण का बोझ बढ़ता गया, और व्यक्ति ऋण–जाल में फँस जाता है।

3

नए उद्यम —

ऋण की अधिक लागत देखकर लोग कर्ज़ लेकर उद्यम शुरू करने से पीछे हट सकते हैं।

उदाहरण कम लागत वाला ऋण नया उद्योग लगाने या वस्तुओं का व्यापार करने का रास्ता खोलता है।

4

पहला सुझाव, विस्तार —

बैंकों और सहकारी समितियों को अपनी गतिविधियाँ विशेषकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ानी चाहिए, ताकि अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता घटे।

उदाहरण आलेख 1 के अनुसार 2019 में भी ग्रामीण भारत के ऋण का 34 प्रतिशत (1 + 23 + 7 + 3) अनौपचारिक स्रोतों से था, अकेले साहूकारों से 23 प्रतिशत।

5

दूसरा सुझाव, समान वितरण —

औपचारिक ऋण सभी को मिलना चाहिए, ताकि गरीब परिवार भी सस्ते ऋण का फ़ायदा उठा सकें।

उदाहरण आलेख 2 में शहरों के अमीर परिवारों का 83 प्रतिशत ऋण औपचारिक है, पर गरीब परिवारों का केवल 46 प्रतिशत।

निष्कर्ष ★ औपचारिक ऋण का कुल हिस्सा बढ़े और उसमें गरीबों का हिस्सा भी बढ़े; किताब के अनुसार ये दोनों कदम विकास के लिए ज़रूरी हैं।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48–50, 52

6★★स्वयं सहायता समूह कैसे बनते और काम करते हैं? ग्रामीण निर्धनों, ख़ासकर महिलाओं, को इनसे क्या लाभ होते हैं?

उत्तर देखिए

गरीबों को उधार देने के नए तरीकों में एक है: ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं, को छोटे समूहों में संगठित करना और उनकी बचत एकत्र करना।

1

गठन —

एक समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी 15–20 सदस्य होते हैं, जो नियमित रूप से मिलते हैं और बचत करते हैं।

उदाहरण प्रति व्यक्ति बचत 25 रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक हो सकती है; यह परिवार की बचत करने की क्षमता पर निर्भर है।

2

समूह से छोटे कर्ज़ —

सदस्य अपनी ज़रूरत के लिए समूह से ही छोटे कर्ज़ लेते हैं।

उदाहरण समूह इन कर्ज़ों पर ब्याज लेता है, पर वह साहूकार के ब्याज से कम होता है।

3

बैंक से ऋण —

एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण के योग्य हो जाता है; ऋण समूह के नाम पर मिलता है और उसका मकसद स्वरोज़गार है।

उदाहरण गिरवी ज़मीन छुड़वाने, बीज, खाद, बाँस और कपड़े जैसी कार्यशील पूँजी, घर बनाने, और सिलाई की मशीन, हथकरघा या पशु ख़रीदने के लिए।

4

निर्णय और ज़िम्मेदारी —

बचत और ऋण के ज़्यादातर महत्त्वपूर्ण निर्णय सदस्य ख़ुद लेते हैं, और ऋण लौटाने की ज़िम्मेदारी समूह की होती है।

उदाहरण समूह ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और लौटाने की अवधि तय करता है; इसी भरोसे बैंक बिना ऋणाधार के भी ऋण दे देते हैं।

5

सामाजिक लाभ —

महिलाएँ आर्थिक रूप से स्वावलंबी होती हैं, और नियमित बैठकें उन्हें आम मंच देती हैं।

उदाहरण बैठकों में स्वास्थ्य, पोषण और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा होती है; किताब में गुजरात में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह की बैठक का फ़ोटो है।

निष्कर्ष ★ स्वयं सहायता समूह ऋणाधार की कमी की समस्या दूर करके गरीबों तक सस्ता औपचारिक ऋण पहुँचाते हैं; बांग्लादेश का ग्रामीण बैंक उचित ब्याज दरों पर गरीबों की ऋण ज़रूरतें पूरी करने का बड़ा सफल उदाहरण है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51, 52

खण्ड छ — संख्यात्मक और तालिका-आधारित प्रश्न (3 अंक) — 6 प्रश्न

1★★आलेख 1, “ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019” (प्रतिशत):
व्यावसायिक बैंक 51 · सहकारी समितियाँ/बैंक 10 · अन्य औपचारिक एजेंसियाँ 5
जमींदार 1 · साहूकार 23 · रिश्तेदार एवं मित्र 7 · अन्य अनौपचारिक एजेंसियाँ 3
(क) औपचारिक स्रोतों का कुल हिस्सा निकालिए। (ख) अनौपचारिक स्रोतों का कुल हिस्सा निकालिए। (ग) दो सबसे बड़े स्रोत कौन-से हैं, और इससे क्या पता चलता है?

उत्तर देखिए

(क) औपचारिक: 51 + 10 + 5 = 66 प्रतिशत।

(ख) अनौपचारिक: 1 + 23 + 7 + 3 = 34 प्रतिशत (जाँच: 66 + 34 = 100)।

(ग) सबसे बड़े स्रोत व्यावसायिक बैंक (51) और साहूकार (23) हैं। ग्रामीण ऋण का लगभग दो-तिहाई औपचारिक स्रोतों से आता है, पर लगभग एक-तिहाई अब भी अनौपचारिक स्रोतों से, और उसमें सबसे बड़ा हिस्सा साहूकारों का है।

! जमींदार और रिश्तेदार एवं मित्र अनौपचारिक स्रोत हैं; इन्हें औपचारिक जोड़ में मत गिनिए। (किताब के पाठ में पृष्ठ 49 पर “केवल 50 प्रतिशत” छपा है, जो आलेख 1 के आँकड़ों से मेल नहीं खाता; यह प्रश्न आलेख के आँकड़ों पर है।)

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 48

2★★आलेख 2 में शहरी परिवारों के कुल ऋण का औपचारिक / अनौपचारिक हिस्सा (प्रतिशत):
गरीब परिवार 46 / 54 · कम संपत्ति वाले परिवार 62 / 38 · समृद्ध परिवार 73 / 27 · अमीर परिवार 83 / 17
(क) गरीब से अमीर की ओर जाने पर औपचारिक हिस्सा कैसे बदलता है? (ख) अमीर और गरीब परिवारों के औपचारिक हिस्से में कितने अंकों का अंतर है? (ग) निष्कर्ष लिखिए।

उत्तर देखिए

(क) औपचारिक हिस्सा लगातार बढ़ता है: 46 → 62 → 73 → 83; अनौपचारिक हिस्सा उसी तरह घटता है: 54 → 38 → 27 → 17।

(ख) 83 − 46 = 37 अंक। गरीब परिवारों का अनौपचारिक हिस्सा (54) अमीर परिवारों के अनौपचारिक हिस्से (17) के तीन गुने से भी ज़्यादा है।

(ग) अमीर परिवार औपचारिक ऋणदाताओं से सस्ता ऋण ले रहे हैं, जबकि गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है; किताब के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही तस्वीर है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 49

3★मेघा ने घर ख़रीदने के लिए बैंक से 5 लाख रुपये का कर्ज़ लिया, 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर, जिसे 10 साल में मासिक किश्तों में लौटाना है।
(क) उसके ऋण की शर्तें इन शीर्षकों में लिखिए: ब्याज दर, अदायगी का स्वरूप, आवश्यक कागज़ात, समर्थक ऋणाधार। (ख) उसे कुल कितनी मासिक किश्तें देनी होंगी? (ग) बैंक ऋणाधार कब लौटाएगा?

उत्तर देखिए

(क) ब्याज दर: 12 प्रतिशत वार्षिक; अदायगी का स्वरूप: 10 साल में मासिक किश्तें; आवश्यक कागज़ात: नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड; समर्थक ऋणाधार: नए घर के सभी कागज़।

(ख) 10 साल × 12 महीने = 120 मासिक किश्तें।

(ग) जब मेघा ब्याज समेत पूरा कर्ज़ लौटा देगी, तब बैंक घर के कागज़ वापस करेगा।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 45

4★★सोनपुर में ब्याज की दरें: श्यामल को पहले महाजन से 5 प्रतिशत मासिक, अब कृषि व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक; अरुण को बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक; रमा को भूस्वामी से 5 प्रतिशत मासिक।
(क) मासिक दरों को वार्षिक दर में बदलिए (साल के 12 महीने, साधारण हिसाब)। (ख) मान लीजिए हर कोई 10,000 रुपये एक साल के लिए उधार ले। हर दर पर एक साल का ब्याज कितना होगा? (ग) सबसे सस्ता और सबसे महँगा ऋण किसका है?

उत्तर देखिए

(क) 5 प्रतिशत मासिक = 5 × 12 = 60 प्रतिशत वार्षिक (किताब यही 60 प्रतिशत लिखती है); 3 प्रतिशत मासिक = 3 × 12 = 36 प्रतिशत वार्षिक।

(ख) अरुण (8.5 प्रतिशत): 850 रुपये; श्यामल, व्यापारी से (36 प्रतिशत): 3,600 रुपये; महाजन या रमा के भूस्वामी की दर (60 प्रतिशत): 6,000 रुपये।

(ग) सबसे सस्ता अरुण का बैंक ऋण है, और सबसे महँगा 5 प्रतिशत मासिक वाला ऋण, जो रमा भूस्वामी से लेती है। व्यापारी से लेने पर श्यामल अरुण से चार गुने से भी ज़्यादा ब्याज देता है, ऊपर से उसे अपनी फसल भी व्यापारी को ही बेचनी पड़ती है।

! 5 प्रतिशत मासिक को 5 प्रतिशत वार्षिक समझना आम ग़लती है; ब्याज दर के साथ उसकी अवधि, मासिक या वार्षिक, हमेशा लिखिए।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 46

5★किताब के अनुसार एक स्वयं सहायता समूह में 15–20 सदस्य होते हैं, और प्रति व्यक्ति बचत 25 रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक हो सकती है। मान लीजिए हर सदस्य हर महीने एक बार बचत जमा करता है।
(क) 20 सदस्यों वाला समूह, हर सदस्य 25 रुपए: एक महीने में कितनी बचत? (ख) वही समूह, हर सदस्य 100 रुपए: एक साल में कितनी बचत? (ग) इस बचत का समूह क्या करता है?

उत्तर देखिए

(क) 20 × 25 = 500 रुपए।

(ख) 20 × 100 = 2,000 रुपए हर महीने; 12 महीनों में 2,000 × 12 = 24,000 रुपए।

(ग) सदस्य अपनी ज़रूरतों के लिए इसी बचत से समूह से छोटे कर्ज़ लेते हैं, जिन पर ब्याज साहूकार से कम होता है। एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है।

निष्कर्ष छोटी-छोटी बचत मिलकर समूह की अपनी पूँजी बनती है, और नियमित बचत ही समूह को बैंक ऋण के योग्य बनाती है।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 51

6★किताब के अनुसार आजकल भारत में बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत हिस्सा नकद के रूप में अपने पास रखते हैं। मान लीजिए किसी बैंक में लोगों की कुल जमा 1,00,000 रुपये है।
(क) बैंक कितना नकद रखेगा? (ख) ऋण देने के लिए कितनी राशि बचेगी? (ग) किसी दिन जमाकर्ता 3,000 रुपये निकालने आएँ, तो क्या बैंक का काम चलेगा? और अगर सभी जमाकर्ता एक साथ पूरी जमा माँग लें तो?

उत्तर देखिए

(क) 1,00,000 का 5 प्रतिशत = 1,00,000 × 5 ÷ 100 = 5,000 रुपये।

(ख) 1,00,000 − 5,000 = 95,000 रुपये।

(ग) 3,000 रुपये 5,000 के नकद से आराम से दिए जा सकते हैं, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही आते हैं। पर सभी एक साथ 1,00,000 माँगें, तो बैंक के पास केवल 5,000 नकद है; बाकी 95,000 ऋण में लगा है।

निष्कर्ष बैंक जमा का बड़ा भाग ऋण में लगाकर ही मध्यस्थता करते हैं; यह व्यवस्था इस भरोसे पर चलती है कि सब जमाकर्ता एक साथ नहीं आते।

संदर्भ: NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 3, पृष्ठ 42

उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकलंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर
2 अंक30–40 शब्दउत्तर + कारण या उदाहरण
3 अंक60–80 शब्दतीन बिंदु, पूरे वाक्यों में
5 अंकलगभग 120 शब्दभूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष

★इस अध्याय के लिए तीन सलाह —

  1. किताब के शब्द लिखिए: साख, माँग जमा, समर्थक ऋणाधार, ऋण की शर्तें, औपचारिक और अनौपचारिक क्षेत्रक, स्वयं सहायता समूह। पहले शब्द का अर्थ एक वाक्य में बताइए, फिर उदाहरण दीजिए।
  2. किताब के अपने उदाहरण लिखिए: जूता निर्माता और गेहूँ, सलीम का चैक और त्यौहार का ऑर्डर, स्वप्ना की मूँगफली, मेघा का आवास ऋण, सोनपुर के श्यामल, अरुण और रमा।
  3. आँकड़े उनकी इकाई के साथ लिखिए: बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद; 5 प्रतिशत मासिक (60 प्रतिशत वार्षिक) और 8.5 प्रतिशत वार्षिक; आलेख 1 में औपचारिक 66 (51 + 10 + 5) और अनौपचारिक 34; आलेख 2 में अमीर परिवारों का 83 और गरीब परिवारों का 46 प्रतिशत ऋण औपचारिक।

तीन नमूना परीक्षा-पत्र

हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खण्डों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1वस्तु विनिमय प्रणाली में, जहाँ मुद्रा के बिना वस्तुओं का विनिमय होता है, कौन-सी बात अनिवार्य है?1
2रिक्त स्थान भरिए: बैंक ……… (जिनके पास अतिरिक्त राशि है) और ……… (जिन्हें राशि की ज़रूरत है) के बीच मध्यस्थता का काम करते हैं।1
3सही या ग़लत: चैक अपने आप में मुद्रा है।1
4आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है? जूता निर्माता के उदाहरण से समझाइए।2
5बैंक जमाकर्ताओं और कर्ज़दारों के बीच मध्यस्थता कैसे करते हैं?2
6आलेख 1 के आँकड़ों से ग्रामीण भारत में ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों का कुल हिस्सा निकालिए, और दो सबसे बड़े स्रोत बताइए।3
7वस्तु विनिमय की कठिनाई क्या है? मुद्रा उसे कैसे दूर करती है, और समय के साथ मुद्रा के कौन-कौन से रूप रहे हैं?5
8बैंक लोगों की जमा का क्या करते हैं? बैंकों की ऋण संबंधी गतिविधियों को समझाइए।5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1भारत में करेंसी नोट कौन जारी करता है?1
2रिक्त स्थान भरिए: खेती के आगत ख़रीदने और फसल की बिक्री होने के बीच कम से कम ……… का अंतराल होता है।1
3सही या ग़लत: अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।1
4ग्रामीण क्षेत्रों में साख की मुख्य माँग किसके लिए होती है, और किसान उधार कब लौटाते हैं?2
5सोनपुर के अरुण और श्यामल के ऋण की शर्तों में कोई दो अंतर लिखिए।2
6सलीम और स्वप्ना, दोनों ने ऋण लिया, पर नतीजे उलटे रहे। तीन बिंदुओं में समझाइए।3
7ऋण कभी आय बढ़ाता है और कभी कर्ज़दार को फँसा देता है। किताब के उदाहरणों से समझाइए।5
8ऋण के औपचारिक और अनौपचारिक स्रोतों की तुलना कीजिए।5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1स्वयं सहायता समूह को बैंक से ऋण किसके नाम पर दिया जाता है?1
2रिक्त स्थान भरिए: एक विशेष स्वयं सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी ……… सदस्य होते हैं।1
3सही या ग़लत: शहरी क्षेत्रों में अमीर परिवारों के कर्ज़ का बड़ा हिस्सा अनौपचारिक स्रोतों से आता है।1
4आधुनिक मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं है। फिर भी लोग उसे क्यों स्वीकार करते हैं?2
5स्वयं सहायता समूह ऋणाधार की कमी की समस्या कैसे दूर करते हैं?2
6सोनपुर की मासिक ब्याज दरों को वार्षिक में बदलिए, और 10,000 रुपये पर एक साल का ब्याज हर दर पर निकालिए।3
7“सस्ता और सामर्थ्य के अनुकूल कर्ज़ देश के विकास के लिए अति आवश्यक है।” इस कथन को समझाइए, और औपचारिक ऋण के बारे में किताब के दो सुझाव लिखिए।5
8स्वयं सहायता समूह कैसे बनते और काम करते हैं? ग्रामीण निर्धनों, ख़ासकर महिलाओं, को इनसे क्या लाभ होते हैं?5