ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको आँकड़े पढ़ना, हिसाब लगाना, तुलना करना, पक्ष लेना और कारण देना है। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।
तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — सलीम और स्वप्ना (पृष्ठ 43–44)
किताब का उदाहरण: सलीम जूते बनाता है। उसे त्यौहार के मौसम के लिए 3000 जोड़ी जूतों का ऑर्डर मिला, जिसे एक महीने में पूरा करना था। अतिरिक्त मज़दूर रखने और कच्चा माल ख़रीदने के लिए उसने दो जगह से ऋण लिया: चमड़ा व्यापारी से चमड़ा अभी लेकर भुगतान बाद में करने का वादा किया, और बड़े व्यापारी से 1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान के रूप में नकद लिया। ऑर्डर समय पर पूरा हुआ, अच्छा-खासा लाभ हुआ और उधार चुक गया।
स्वप्ना ने 3 एकड़ में मूँगफली की खेती के खर्च के लिए साहूकार से ऋण लिया। कीटनाशकों के हमले से फसल बर्बाद हो गई, कर्ज़ नहीं चुका और साल भर में बड़ी रकम बन गया। आख़िर उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा।
1सलीम ने अपनी कार्यशील पूँजी की ज़रूरत ऋण से पूरी की। कार्यशील पूँजी क्या है, और सलीम के ऋण के दो स्रोत कौन-से थे? 2 अंक
उत्तर देखिए
कार्यशील पूँजी उत्पादन के रोज़ के खर्च, जैसे कच्चा माल और मज़दूरी, चलाने का पैसा है। सलीम को अतिरिक्त मज़दूर और कच्चे माल के लिए यही चाहिए था।
★दो स्रोत: चमड़ा व्यापारी, जिससे चमड़ा अभी लिया और भुगतान बाद में करने का वादा किया; और बड़ा व्यापारी, जिसने 1000 जूतों के लिए अग्रिम भुगतान दिया। दोनों ऋण हैं, क्योंकि दोनों में अभी कुछ मिला और बदले में भविष्य में भुगतान का वादा हुआ।
2दोनों ने ऋण लिया, पर नतीजे उलटे निकले। किताब की कसौटी से समझाइए कि ऐसा क्यों हुआ। 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब की कसौटी है: “ऋण उपयोगी होगा या नहीं, यह परिस्थिति के खतरों और हानि होने पर प्राप्त सहयोग की संभावना पर निर्भर करता है।” (पृष्ठ 44)
सलीम ने ऋण से समय पर ऑर्डर पूरा किया, और कमाई से उधार चुका दिया। ऋण ने उसकी कमाई बढ़ाई। किताब कहती है: “इस प्रकार ऋण एक महत्त्वपूर्ण तथा सकारात्मक भूमिका अदा करता है।” (पृष्ठ 43)
★स्वप्ना की अदायगी फसल की कमाई पर टिकी थी। फसल बर्बाद हुई, वह कर्ज़ नहीं लौटा पाई और उसे ज़मीन का कुछ हिस्सा बेचना पड़ा। ऋण ने उसकी स्थिति बदतर कर दी। इसे कर्ज–ज़ाल कहते हैं (पृष्ठ 44)।
3किताब पूछती है कि सलीम को व्यापारियों से ऑर्डर मिलते रहें, तो 6 साल बाद उसकी स्थिति क्या होगी। और स्वप्ना के अगले साल फसल सामान्य रही, फिर भी कर्ज़ क्यों नहीं चुका? 2 अंक
उत्तर देखिए
सलीम: ऑर्डर मिलते रहें और समय पर पूरे होते रहें, तो हर बार ऋण से कार्यशील पूँजी मिलेगी, लाभ होगा और उधार चुकता रहेगा। ऐसा चलता रहा, तो 6 साल में उसकी कमाई और बचत बढ़ सकती है, और वह अपना काम बढ़ा सकता है।
★स्वप्ना: पहले साल का न चुका कर्ज़ साल भर में बड़ी रकम बन चुका था। अगले साल की सामान्य फसल से इतनी कमाई नहीं हुई कि यह बढ़ी हुई रकम चुक सके। इसीलिए उसे ज़मीन का हिस्सा बेचना पड़ा।
केस 2 — मेघा का आवास ऋण (पृष्ठ 45)
किताब का उदाहरण: मेघा ने नए घर के लिए बैंक से 5 लाख रुपये का ऋण लिया। ब्याज 12 प्रतिशत वार्षिक है, और ऋण 10 साल में मासिक किश्तों में लौटाना है। बैंक ने नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड माँगे, और ऋणाधार के रूप में नए घर के सभी कागज़ अपने पास रखे, जो ब्याज समेत कर्ज़ लौटाने पर वापस मिलेंगे।
1मेघा के ऋण की बातों को ऋण की चार शर्तों के नीचे रखिए। 2 अंक
उत्तर देखिए
ब्याज दर: 12 प्रतिशत वार्षिक।
समर्थक ऋणाधार: नए घर के सभी कागज़।
आवश्यक कागज़ात: नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड।
भुगतान के तरीके: 10 साल तक मासिक किश्तें।
★किताब की चार शर्तें यही हैं: ब्याज दर, समर्थक ऋणाधार, आवश्यक कागज़ात और भुगतान के तरीके। ये एक ऋण व्यवस्था से दूसरी में बहुत बदल जाती हैं।
2मान लीजिए (काल्पनिक) मेघा के मोहल्ले का एक निर्माण मज़दूर भी उसी बैंक से इतना ही ऋण माँगने जाता है। उसके लिए कौन-सी शर्तें मुश्किल खड़ी करेंगी, और क्यों? 3 अंक
उत्तर देखिए
कागज़ात: बैंक ने मेघा से नौकरी और वेतन का रिकार्ड माँगा। निर्माण मज़दूर की आय अनियमित होती है, ऐसे कागज़ उसके पास नहीं होते।
ऋणाधार: बैंक ऋण चुकने तक कोई संपत्ति गारंटी के रूप में रखता है। ज़मीन, मकान या जमा पूँजी न हो, तो देने को कुछ नहीं।
★किताब के अनुसार ऋणाधार का न होना एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते (पृष्ठ 50)। ऐसे लोग साहूकार जैसे अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।
3उधारदाता समर्थक ऋणाधार क्यों माँगता है? मेघा के ऋण में यह बात कैसे दिखती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
ताकि ऋण लौटने की गारंटी रहे। कर्ज़दार उधार न लौटा पाए, तो उधारदाता को यह संपत्ति बेचकर भुगतान लेने का अधिकार होता है (पृष्ठ 44)।
★मेघा के घर के कागज़ तब तक बैंक के पास रहेंगे, जब तक वह ब्याज समेत पूरा कर्ज़ नहीं लौटा देती। किश्तें रुक जाएँ, तो भी बैंक के पास गारंटी है।
केस 3 — सोनपुर के तीन कर्ज़दार (पृष्ठ 46–47)
किताब का उदाहरण: रोहित और रंजन ने 15 नवम्बर 2019 को अपने गाँव सोनपुर में लोगों से बात की। गाँव में सिंचाई की सुविधा है और आलू की फसल लगी है।
श्यामल (1.5 एकड़ ज़मीन) पहले गाँव के महाजन से 5 प्रतिशत मासिक पर ऋण लेता था। अब वह एक कृषि व्यापारी से 3 प्रतिशत मासिक पर लेता है, जो जुताई के समय आगतें उधार देता है और फसल पर वापसी लेता है। श्यामल को फसल उसी व्यापारी को बेचने का वादा करना पड़ता है।
अरुण (7 एकड़ ज़मीन) को बैंक से 8.5 प्रतिशत वार्षिक पर ऋण मिला है, जिसे वह अगले तीन वर्षों में कभी भी लौटा सकता है।
रमा भूमिहीन कृषि मज़दूर है। वह अपने मालिक, एक मध्यवर्गीय भूस्वामी, से 5 प्रतिशत मासिक पर ऋण लेती है और कर्ज़ उसके यहाँ काम करके चुकाती है। पुराना ऋण चुकने से पहले उसे नया लेना पड़ता है; अभी 5,000 रुपये बाकी हैं।
1मान लीजिए (काल्पनिक) तीनों ने 10,000 रुपये एक साल के लिए उधार लिए, और ब्याज हर बार मूल रकम पर ही लगता है। किताब की दरों से हर एक का एक साल का ब्याज निकालिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
अरुण, बैंक से: 8.5 प्रतिशत वार्षिक। 10,000 × 8.5 ÷ 100 = 850 रुपये।
श्यामल, व्यापारी से: 3 प्रतिशत मासिक, यानी 3 × 12 = 36 प्रतिशत वार्षिक। 10,000 × 36 ÷ 100 = 3,600 रुपये। महाजन से लेता, तो 5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक: 6,000 रुपये।
रमा, भूस्वामी से: 5 प्रतिशत मासिक, यानी 60 प्रतिशत वार्षिक: 6,000 रुपये।
★एक ही रकम पर रमा का ब्याज अरुण से 6,000 − 850 = 5,150 रुपये ज़्यादा है, यानी लगभग सात गुना। ऊपर से श्यामल को फसल उसी व्यापारी को बेचनी पड़ती है, और रमा को भूस्वामी के यहाँ काम करते रहना पड़ता है।
2किताब पूछती है (पृष्ठ 47): श्यामल की तुलना में अरुण को खेती से ज़्यादा आय क्यों होगी? 2 अंक
उत्तर देखिए
अरुण का ब्याज बहुत कम है (8.5 प्रतिशत वार्षिक, जबकि श्यामल का 3 प्रतिशत मासिक), और उसे लौटाने के लिए तीन साल तक का समय मिलता है।
★अरुण आलू शीत भंडार गृह में रखकर बैंक से नया ऋण ले सकता है, यानी उसे पूरी फसल कटाई के समय बेचने की मजबूरी नहीं। श्यामल को फसल उसी व्यापारी को बेचनी पड़ती है, जो कटाई के समय, जब कीमतें कम होती हैं, सस्ते में ख़रीदकर बाद में महँगी बेचता है। साथ ही अरुण के पास 7 एकड़ ज़मीन है, श्यामल के पास 1.5 एकड़।
3भूस्वामी रमा के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, फिर भी रमा उसी के लिए काम करती रहती है। किताब के आधार पर कारण दीजिए, और बताइए कि समय के साथ उसका ऋण बढ़ेगा या घटेगा। 3 अंक
उत्तर देखिए
साल में कई महीने रमा के पास काम नहीं होता, इसलिए रोज़मर्रा के खर्च, अचानक बीमारी और परिवार के समारोह के लिए भी उसे कर्ज़ लेना पड़ता है।
★सोनपुर में भूमिहीन लोगों के लिए ऋण का एकमात्र स्रोत भूस्वामी-नियोक्ता ही है। रमा इसीलिए उसके लिए काम करती रहती है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर उसे ऋण मिल सके।
ऋण बढ़ जाएगा: ब्याज 5 प्रतिशत मासिक है, और वह पुराना ऋण चुकाने से पहले नया लेती है। किताब (पृष्ठ 49) रमा को उदाहरण बनाकर बताती है कि ऐसे में ऋण का बोझ बढ़ता है और व्यक्ति ऋण–जाल में फँस जाता है।
केस 4 — आलेख 1 और आलेख 2 (पृष्ठ 48–49)
किताब के दो आलेख:
आलेख 1, ग्रामीण भारत में ऋण के स्रोत, 2019 (प्रतिशत): व्यावसायिक बैंक 51 · सहकारी समितियाँ/बैंक 10 · अन्य औपचारिक एजेंसियाँ 5 · जमींदार 1 · साहूकार 23 · रिश्तेदार एवं मित्र 7 · अन्य अनौपचारिक एजेंसियाँ 3
आलेख 2, शहरी परिवारों के कुल ऋण में औपचारिक / अनौपचारिक हिस्सा (प्रतिशत): गरीब परिवार 46 / 54 · कम संपत्ति वाले परिवार 62 / 38 · समृद्ध परिवार 73 / 27 · अमीर परिवार 83 / 17
1आलेख 1 से बताइए: ग्रामीण भारत में ज़्यादा ऋण औपचारिक स्रोतों से आता है या अनौपचारिक से? अकेला सबसे बड़ा स्रोत कौन-सा है? 2 अंक
उत्तर देखिए
औपचारिक टुकड़े जोड़िए: 51 + 10 + 5 = 66 प्रतिशत। अनौपचारिक: 1 + 23 + 7 + 3 = 34 प्रतिशत। यानी ज़्यादा ऋण औपचारिक स्रोतों से आता है। (किताब के पाठ में पृष्ठ 49 पर “केवल 50 प्रतिशत” छपा है, जो आलेख 1 के आँकड़ों से मेल नहीं खाता।)
★अकेला सबसे बड़ा स्रोत व्यावसायिक बैंक (51) हैं, फिर साहूकार (23)। फिर भी ग्रामीण ऋण का एक-तिहाई से ज़्यादा हिस्सा अब भी अनौपचारिक स्रोतों से आता है।
2आलेख 2 में गरीब और अमीर परिवारों की तुलना कीजिए। इससे क्या पता चलता है, और ऐसा क्यों होता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
शहरों के गरीब परिवारों के ऋण का 54 प्रतिशत अनौपचारिक स्रोतों से है, जबकि अमीर परिवारों का केवल 17 प्रतिशत; अमीरों के 83 प्रतिशत ऋण औपचारिक स्रोतों से हैं। चारों वर्गों में, परिवार जितना अमीर, औपचारिक हिस्सा उतना बड़ा: 46, 62, 73, 83।
★मतलब यह कि सस्ता औपचारिक ऋण ज़्यादातर अमीर परिवार पाते हैं, और गरीब परिवारों को कर्ज़ के लिए बहुत सारा पैसा देना पड़ता है। किताब के अनुसार गाँवों में भी यही तस्वीर है।
कारण: बैंक ऋणाधार और कागज़ात माँगते हैं। अमीर परिवार ये दे पाते हैं; ऋणाधार का न होना एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते (पृष्ठ 50)।
3किताब कहती है: “अनौपचारिक क्षेत्रक में ऋणदाताओं की गतिविधियों की देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं है।” (पृष्ठ 48) औपचारिक स्रोतों पर भारतीय रिज़र्व बैंक किस तरह नज़र रखता है, और अनौपचारिक ऋणदाताओं पर नज़र न होने से क्या होता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
रिज़र्व बैंक देखता है कि बैंक अपनी जमा का न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच अपने पास रखें।
वह देखता है कि बैंक सिर्फ़ लाभ कमाने वाले व्यवसायियों और व्यापारियों को नहीं, छोटे किसानों, छोटे उद्योगों और छोटे कर्ज़दारों को भी ऋण दें। बैंकों को समय-समय पर उसे बताना पड़ता है कि वे कितना ऋण, किनको और किस ब्याज दर पर दे रहे हैं।
★अनौपचारिक ऋणदाता मनमानी दरों पर ऋण दे सकते हैं, और उन्हें नाजायज़ तरीकों से पैसा वसूलने से रोकने वाला कोई नहीं।
केस 5 — स्वयं सहायता समूह (पृष्ठ 50–52)
किताब का उदाहरण: पृष्ठ 50 के चित्र में रजाई की सिलाई करता एक मज़दूर पूछता है कि क्या बैंक उसे ऋण देगा। किताब बताती है कि एक स्वयं सहायता समूह में एक-दूसरे के पड़ोसी 15–20 सदस्य होते हैं, ख़ासकर गरीब महिलाएँ, जो नियमित मिलते हैं और बचत करते हैं: हर व्यक्ति 25 रुपए से लेकर 100 रुपए या अधिक। सदस्य समूह से ही छोटे कर्ज़ लेते हैं, जिन पर ब्याज साहूकार से कम होता है। एक या दो वर्ष नियमित बचत के बाद समूह बैंक से ऋण लेने के योग्य हो जाता है, और ऋण समूह के नाम पर मिलता है।
पृष्ठ 52 पर बांग्लादेश के ग्रामीण बैंक की बात है, जिसने गरीबों की ऋण ज़रूरतें उचित ब्याज दरों पर पूरी करने में बड़ी सफलता पाई; 2018 में वह 81,600 गाँवों में फैला था। इसके संस्थापक प्रो. मोहम्मद युनूस को 2006 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला।
1रजाई सिलने वाला मज़दूर अकेले बैंक जाए, तो उसे ऋण मिलना मुश्किल क्यों है? स्वयं सहायता समूह से उसका रास्ता कैसे खुल सकता है? 2 अंक
उत्तर देखिए
हो सकता है उसके पास न ऋणाधार हो, न नियमित आय के कागज़। किताब के अनुसार ऋणाधार का न होना एक प्रमुख कारण है, जिससे गरीब बैंकों से ऋण नहीं ले पाते।
★वह अपने जैसे लोगों के साथ समूह बनाकर नियमित बचत करे, तो एक या दो वर्ष बाद समूह के नाम पर बैंक से ऋण मिल सकता है, बिना ऋणाधार के।
2बैंक बिना ऋणाधार के समूह को ऋण क्यों दे देता है? समूह में बचत और ऋण के फ़ैसले कौन लेता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
ऋण लौटाने की ज़िम्मेदारी पूरे समूह की होती है। एक भी सदस्य ऋण न लौटाए, तो बाकी सदस्य इस मामले को गंभीरता से लेते हैं।
★इसी कारण बैंक संगठित गरीब महिलाओं को ऋण देने को तैयार हो जाते हैं, भले उनके पास कोई ऋणाधार न हो। समूह की ज़िम्मेदारी ऋणाधार की कमी पूरी करती है।
बचत और ऋण के ज़्यादातर ज़रूरी फ़ैसले, जैसे ऋण का लक्ष्य, रकम, ब्याज दर और लौटाने की अवधि, समूह के सदस्य ख़ुद लेते हैं, बैंक नहीं (पृष्ठ 51)।
3प्रो. मोहम्मद युनूस के शब्द, जैसे किताब में छपे हैं: “अगर गरीब लोगों को सही और उचित शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है, तो लाखों छोटे लोग अपनी लाखों छोटी–छोटी गतिविधियों के ज़रिए विकास का सबसे बड़ा चमत्कार कर सकते हैं।” (पृष्ठ 52) स्वयं सहायता समूह के उदाहरण से इस कथन को समझाइए। 3 अंक
उत्तर देखिए
सही और उचित शर्तें: साहूकार से कम ब्याज, बिना ऋणाधार का बैंक ऋण, और ज़रूरत के समय ऋण। समूह यही देता है।
छोटी गतिविधियाँ: समूह इन कामों के लिए छोटे कर्ज़ देता है: गिरवी ज़मीन छुड़ाना; बीज, खाद, बाँस और कपड़ा ख़रीदना; घर बनाना; सिलाई की मशीन, हथकरघा, पशु ख़रीदना। इनसे सदस्यों को स्वरोज़गार मिलता है।
★ग्रामीण बैंक ने दिखाया कि गरीब महिलाएँ भरोसेमंद कर्ज़दार हैं और छोटी आय वाली गतिविधियाँ सफलता से चला सकती हैं। समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी भी बनाते हैं, और स्वास्थ्य, पोषण, घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर चर्चा का मंच देते हैं (पृष्ठ 51)।
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1“बैंक हमारा पूरा पैसा तिजोरी में रखते हैं, इसलिए सब जमाकर्ता एक ही दिन पैसा माँगें, तब भी बैंक दे देगा।” (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है।
बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं, और जमा के बड़े भाग से ऋण देते हैं (पृष्ठ 42)।
इतना नकद काफ़ी इसलिए है, क्योंकि किसी एक दिन केवल कुछ जमाकर्ता ही नकद निकालने आते हैं।
★सब एक साथ आ जाएँ, तो बैंक सबको एक साथ पैसा नहीं दे पाएगा; किताब पृष्ठ 42 पर यही सवाल पूछती है। इसीलिए रिज़र्व बैंक देखता है कि बैंक अपनी जमा का न्यूनतम नकद हिस्सा सचमुच रखें (पृष्ठ 48)।
2“मुद्रा तो सिर्फ़ नोट और सिक्के हैं; बैंक खाते का पैसा मुद्रा नहीं है।” (यह कथन काल्पनिक है।) क्या आप सहमत हैं? 3 अंक
उत्तर देखिए
नहीं।
मुद्रा के आधुनिक रूप दो हैं: करेंसी, यानी कागज़ के नोट और सिक्के, और बैंकों में माँग जमा (पृष्ठ 40)।
माँग जमा माँगने पर निकाली जा सकती है, और उसके बदले चैक लिखकर बिना नकद सीधा भुगतान हो सकता है, जैसे एम. सलीम ने चमड़ा आपूर्तिकर्ता को चैक से भुगतान किया (पृष्ठ 41)।
★लोग माँग जमा को करेंसी की तरह भुगतान का माध्यम मानते हैं, इसलिए आधुनिक अर्थव्यवस्था में करेंसी के साथ माँग जमा को भी मुद्रा समझा जाता है (पृष्ठ 41)। चैक तो बैंक को भुगतान का आदेश देने वाला कागज़ है (पृष्ठ 41)।
3“साहूकार बिना कागज़ के ऋण दे देता है, इसलिए छोटे व्यवसाय के लिए साहूकार ही अच्छा है।” (यह कथन काल्पनिक है। किताब की प्रश्नावली का प्रश्न 10 भी पूछता है कि छोटे व्यवसाय के लिए मानव बैंक से ऋण ले या साहूकार से।) अपनी राय दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
आसान दिखता है, पर अच्छा नहीं।
यह सच है कि साहूकार कर्ज़दार को निजी तौर पर जानता है और अक्सर बिना ऋणाधार भी ऋण दे देता है (पृष्ठ 50)।
पर वह ब्याज बहुत ऊँचा रखता है, लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं करता और गरीब कर्ज़दारों को तंग करता है (पृष्ठ 51)। उसकी देखरेख करने वाली कोई संस्था नहीं।
★ऊँची लागत से व्यवसाय की कमाई का बड़ा हिस्सा ऋण चुकाने में जाएगा, और ऋण–जाल का ख़तरा है (पृष्ठ 49)। मानव के पास ऋणाधार और कागज़ात हों, तो बैंक का सस्ता ऋण बेहतर है।
4किताब पूछती है (पृष्ठ 50): क्या भारतीय रिज़र्व बैंक के जैसा कोई निरीक्षक होना चाहिए जो अनौपचारिक ऋणदाताओं की गतिविधियों पर नज़र रखे? उसका काम मुश्किल क्यों होगा? पक्ष लेकर लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है; अंक इस बात के हैं कि राय का कारण किताब से दिया गया हो। एक उत्तर ऐसा हो सकता है:
होना चाहिए: अभी अनौपचारिक ऋणदाता मनमानी दरों पर ऋण दे सकते हैं और नाजायज़ तरीकों से वसूली कर सकते हैं (पृष्ठ 48), और गरीब परिवार इन्हीं पर निर्भर हैं (आलेख 2)।
काम मुश्किल होगा: बहुत-से ऋण निजी पहचान पर दिए जाते हैं, और लेन-देन की लिखा-पढ़ी पूरी नहीं होती (पृष्ठ 50–51), इसलिए जाँच के लिए रिकार्ड ही नहीं मिलेगा। ऋण देने वाले भी तरह-तरह के हैं: साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त।
★इसीलिए किताब का बड़ा सुझाव दूसरा है: बैंक और सहकारी समितियाँ, ख़ासकर गाँवों में, अपनी गतिविधियाँ बढ़ाएँ, ताकि अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता घटे, और औपचारिक ऋण का अधिक समान वितरण हो (पृष्ठ 50)।
भाग ग — तुलना और वर्गीकरण
1ऋण के इन स्रोतों को औपचारिक और अनौपचारिक में बाँटिए, और लिखिए कि किस पर किसकी नज़र है। 3 अंक
| स्रोत | औपचारिक या अनौपचारिक | नज़र कौन रखता है |
|---|---|---|
| अरुण को ऋण देने वाला बैंक (पृष्ठ 46) | ||
| पास के गाँव की कृषक सहकारी समिति (पृष्ठ 47) | ||
| श्यामल का कृषि व्यापारी (पृष्ठ 46) | ||
| रमा का भूस्वामी-नियोक्ता (पृष्ठ 46) | ||
| स्वप्ना का साहूकार (पृष्ठ 43) | ||
| सलीम का चमड़ा व्यापारी, जिसने चमड़ा उधार दिया (पृष्ठ 43) |
उत्तर देखिए
| स्रोत | औपचारिक या अनौपचारिक | नज़र कौन रखता है |
|---|---|---|
| अरुण को ऋण देने वाला बैंक (पृष्ठ 46) | औपचारिक | भारतीय रिज़र्व बैंक |
| पास के गाँव की कृषक सहकारी समिति (पृष्ठ 47) | औपचारिक | भारतीय रिज़र्व बैंक |
| श्यामल का कृषि व्यापारी (पृष्ठ 46) | अनौपचारिक | कोई संस्था नहीं |
| रमा का भूस्वामी-नियोक्ता (पृष्ठ 46) | अनौपचारिक | कोई संस्था नहीं |
| स्वप्ना का साहूकार (पृष्ठ 43) | अनौपचारिक | कोई संस्था नहीं |
| सलीम का चमड़ा व्यापारी, जिसने चमड़ा उधार दिया (पृष्ठ 43) | अनौपचारिक | कोई संस्था नहीं |
★बाँटने की कसौटी यह है कि ऋण कौन दे रहा है: बैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक हैं; साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार और दोस्त अनौपचारिक (पृष्ठ 48)।
ब्याज देखकर मत बाँटिए: श्यामल का व्यापारी (3 प्रतिशत मासिक) महाजन (5 प्रतिशत मासिक) से सस्ता है, फिर भी अनौपचारिक है।
2इनमें से कौन मुद्रा है, और कौन नहीं? कारण लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
| चीज़ | मुद्रा है? | कारण |
|---|---|---|
| 10 रुपये का नोट | हाँ, करेंसी | भारतीय रिज़र्व बैंक केंद्रीय सरकार की तरफ़ से जारी करता है; भारत में कोई रुपयों में अदायगी को कानूनी तौर पर अस्वीकार नहीं कर सकता (पृष्ठ 40) |
| बैंक खाते में माँग जमा | हाँ | माँगने पर निकलती है, चैक से बिना नकद भुगतान होता है; करेंसी की तरह स्वीकार होती है (पृष्ठ 41) |
| सलीम का लिखा चैक | नहीं | चैक बैंक को भुगतान का आदेश देने वाला कागज़ है; मुद्रा के रूप में उसके पीछे की माँग जमा समझी जाती है (पृष्ठ 41) |
| ए.टी.एम. या प्लास्टिक कार्ड | नहीं | लेन-देन में काम आता है, पर अपने आप में मुद्रा नहीं (पृष्ठ 38) |
| बहुत प्रारंभिक काल में अनाज और पशु | उस समय हाँ | भारतीय इनका मुद्रा के रूप में इस्तेमाल करते थे (पृष्ठ 40) |
★आज की मुद्रा का अपना कोई इस्तेमाल नहीं; वह इसलिए चलती है कि देश की सरकार उसे प्राधिकृत करती है (पृष्ठ 40)।
3ऋण की चार शर्तों पर तीन कर्ज़दारों की तुलना कीजिए। जहाँ किताब कुछ नहीं बताती, वहाँ वही लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
| शर्त | मेघा (पृष्ठ 45) | रमा (पृष्ठ 46) | स्वयं सहायता समूह की सदस्य (पृष्ठ 51) |
|---|---|---|---|
| ब्याज दर | 12 प्रतिशत वार्षिक | 5 प्रतिशत मासिक | साहूकार से कम; दर समूह तय करता है |
| समर्थक ऋणाधार | नए घर के सभी कागज़ | किताब कोई ऋणाधार नहीं बताती; ऋण पाने के लिए वह भूस्वामी के यहाँ काम करती रहती है | बैंक ऋण बिना ऋणाधार; लौटाने की ज़िम्मेदारी समूह की |
| आवश्यक कागज़ात | नौकरी और वेतन संबंधी रिकार्ड | किताब में नहीं बताया | किताब में नहीं बताया |
| भुगतान के तरीके | 10 साल तक मासिक किश्तें | भूस्वामी के यहाँ काम करके | लौटाने की अवधि समूह तय करता है |
★मेघा का ब्याज रमा से बहुत कम है, पर उसके लिए ऋणाधार और कागज़ चाहिए। रमा 5 प्रतिशत मासिक के ऋण के लिए भूस्वामी पर आश्रित है और उसके यहाँ काम करके ही ऋण चुकाती है। स्वयं सहायता समूह बिना ऋणाधार के, साहूकार से कम ब्याज पर ऋण का रास्ता खोलता है।
भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि
1. अपने क्षेत्र में ऋण की बातचीत (किताब की गतिविधि पर आधारित, पृष्ठ 47)
सोनपुर में रोहित और रंजन ने लोगों से बात करके जाना कि किसे किस शर्त पर ऋण मिलता है। आप भी अपने क्षेत्र के तीन-चार बड़ों से बात कीजिए, और किसी का नाम मत लिखिए। हर एक से ऋण की चारों शर्तें पूछिए: ऋण किससे लिया, ब्याज दर कितनी, कोई ऋणाधार या कागज़ात दिए या नहीं, और लौटाने का तरीका क्या है। उत्तर सोनपुर की तरह एक तालिका में लिखिए, और अंत में देखिए कि किसे सस्ता ऋण मिला, किसे महँगा, और क्यों।
2. एक दिन के लेन-देन (किताब के सवाल पर आधारित, पृष्ठ 39)
किताब कहती है कि अपने चारों ओर देखें, तो किसी एक दिन में मुद्रा से जुड़े कई सौदे दिखेंगे। एक दिन घर और मोहल्ले में होने वाले लेन-देन की सूची बनाइए, जैसे दूध और सब्ज़ी ख़रीदना, बस या ऑटो का किराया, दर्ज़ी को भुगतान। हर सौदे के आगे लिखिए: मुद्रा से वस्तु ख़रीदी गई, मुद्रा के बदले सेवा मिली, या उस समय मुद्रा नहीं दी गई और बाद में भुगतान का वादा हुआ। आख़िरी तरह के सौदों को गिनिए: ये ऋण हैं।
3. शहर के आठ लोग (किताब की अतिरिक्त परियोजना, पृष्ठ 53)
किताब की तालिका में शहरी क्षेत्रों के आठ लोगों के व्यवसाय हैं: निर्माण मज़दूर, कंप्यूटर शिक्षित स्नातक छात्र, सरकारी सेवा में नियोजित व्यक्ति, दिल्ली में प्रवासी मज़दूर, घरेलू नौकरानी, छोटा व्यापारी, ऑटो रिक्सा चालक और बंद फैक्ट्री का मज़दूर। हर एक के आगे लिखिए कि उसे किन कामों के लिए ऋण चाहिए हो सकता है। फिर दो वर्ग बनाइए: जिन्हें बैंक से कर्ज़ मिल सकता है, और जिन्हें नहीं। किताब पूछती है कि आपने बाँटने के लिए किन कारकों का उपयोग किया; ये तीन कारक काम आ सकते हैं: नियमित आय और उसके कागज़ (मेघा की तरह), ऋणाधार लायक संपत्ति, और आय पक्की है या अनिश्चित।
4. दोनों आलेख चार्ट पेपर पर
केस 4 के आँकड़ों से चार्ट पेपर पर पाँच दंड बनाइए, हर दंड 100 तक ऊँचा। पहला दंड आलेख 1 का हो: सात हिस्से, औपचारिक टुकड़े एक रंग में और अनौपचारिक दूसरे रंग में। बाकी चार दंड आलेख 2 के हों: गरीब, कम संपत्ति वाले, समृद्ध और अमीर परिवार, हर दंड में औपचारिक और अनौपचारिक हिस्सा। नीचे एक पंक्ति लिखिए कि सस्ता ऋण किसे ज़्यादा मिल रहा है। चार्ट कक्षा की दीवार पर लगाइए, ताकि पूरे अध्याय में काम आए।
5. 10 रुपये का नोट (किताब की प्रश्नावली के प्रश्न 4 पर आधारित)
घर का एक 10 रुपये का नोट ध्यान से देखिए। उस पर भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर के हस्ताक्षर के साथ यह वचन छपा होता है: “मैं धारक को दस रुपये अदा करने का वचन देता हूँ” (रिज़र्व बैंक: भारतीय मुद्रा, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)। नोट पर और क्या-क्या लिखा है, उसकी सूची बनाइए। फिर कक्षा में चर्चा कीजिए कि कागज़ का यह टुकड़ा मूल्यवान क्यों है, जबकि उसका अपना कोई इस्तेमाल नहीं (पृष्ठ 40)।
अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए
| आपके उत्तर में | तो |
|---|---|
| किताब का उदाहरण या आँकड़ा सही उठाया, उससे निष्कर्ष निकाला और अपना कारण लिखा | उत्तर पूरा है। |
| आँकड़े सही हैं, पर यह नहीं लिखा कि उनसे क्या पता चलता है | हर आँकड़े के बाद एक पंक्ति जोड़िए कि उससे क्या पता चलता है। |
| मासिक और वार्षिक ब्याज को एक जैसा मान लिया, जैसे 3 प्रतिशत मासिक को 8.5 प्रतिशत वार्षिक से सस्ता | मासिक दर को 12 से गुणा कीजिए: 3 प्रतिशत मासिक का मतलब 36 प्रतिशत वार्षिक। केस 3 का प्रश्न 1 फिर से कीजिए। |
| सहकारी समिति या व्यापारी को ग़लत वर्ग में रखा | बैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक हैं; साहूकार, व्यापारी, मालिक, रिश्तेदार, दोस्त अनौपचारिक। भाग ग का प्रश्न 1 फिर से देखिए। |
| ! लिख दिया कि बैंक जमा का ज़्यादातर पैसा नकद रखते हैं | बैंक जमा का केवल 5 प्रतिशत नकद रखते हैं और बड़े भाग से ऋण देते हैं (पृष्ठ 42)। भाग ख का प्रश्न 1 फिर से पढ़िए। |