Chapter 8किसान, ज़मींदार और राज्य

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8

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कुल 58 प्रश्न

तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए। ! वाले प्रश्नों में अक्सर ग़लती होती है।


खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II” (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

1★सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान के करीब–करीब कितने फ़ीसदी लोग गाँवों में रहते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) 85 फ़ीसदी

व्याख्या: अध्याय इसी बात से शुरू होता है: “सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के दौरान हिंदुस्तान में करीब–करीब 85 फ़ीसदी लोग गाँवों में रहते थे।” 40 फ़ीसदी का आँकड़ा सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में अखिल भारतीय स्तर पर जंगलों के फैलाव के औसत का अंदाज़ा है, गाँवों में रहने वालों का नहीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 196, 208

2★★मुग़ल काल के भारतीय–फ़ारसी स्रोत किसान के लिए आमतौर पर कौन-से शब्द इस्तेमाल करते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) रैयत (बहुवचन रिआया) या मुज़रियान

व्याख्या: किताब के अनुसार इन स्रोतों में किसान के लिए आमतौर पर रैयत (बहुवचन, रिआया) या मुज़रियान शब्द आते हैं; साथ ही किसान और आसामी जैसे शब्द भी मिलते हैं। मुक़द्दम या मंडल गाँव के मुखिया के नाम हैं, अमील–गुज़ार और अमीन राज्य के मुलाज़िम थे, और पोलज व परौती ज़मीन की किस्में हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 197

3★★सत्रहवीं सदी के स्रोत दो किस्म के किसानों की चर्चा करते हैं: खुद–काश्त और पाहि–काश्त। पाहि–काश्त किसान कौन थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) जो दूसरे गाँवों से ठेके पर खेती करने आते थे

व्याख्या: किताब कहती है: “दूसरे (पाहि–काश्त) वे खेतिहर थे जो दूसरे गाँवों से ठेके पर खेती करने आते थे।” विकल्प (अ) खुद–काश्त किसानों का वर्णन है। लोग अपनी मर्ज़ी से भी पाहि–काश्त बनते थे (जैसे किसी दूसरे गाँव में करों की शर्तें बेहतर मिलें) और मजबूरन भी (जैसे अकाल या भुखमरी के बाद आर्थिक परेशानी से)।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 198

4★! आइन के अनुसार दोनों मौसम (खरीफ़ और रबी) मिलाकर मुग़ल प्रांत आगरा और दिल्ली प्रांत में कितनी किस्म की फ़सलें उगाई जाती थीं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) आगरा 39, दिल्ली 43

व्याख्या: किताब के अनुसार “मुग़ल प्रांत आगरा में 39 किस्म की फ़सलें उगाई जाती थीं जबकि दिल्ली प्रांत में 43 फ़सलों की पैदावार होती थी।” दोनों संख्याएँ उलटी मत कीजिए। 50 की संख्या बंगाल की है, जहाँ सिर्फ़ चावल की 50 किस्में पैदा होती थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200

5★★मुग़ल काल के स्रोतों में मिलने वाले शब्द जिन्स–ए–कामिल का क्या अर्थ है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) सर्वोत्तम फ़सलें, जैसे कपास और गन्ना

व्याख्या: किताब में जिन्स–ए–कामिल के आगे कोष्ठक में “(सर्वोत्तम फ़सलें)” लिखा है और बताया है कि “कपास और गन्ने जैसी फ़सलें बेहतरीन जिन्स–ए–कामिल थीं।” मुग़ल राज्य किसानों को ऐसी फ़सलें उगाने के लिए बढ़ावा देता था, क्योंकि इनसे राज्य को ज़्यादा कर मिलता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200

6★तम्बाकू सबसे पहले दक्कन पहुँचा और सत्रहवीं सदी के शुरुआती वर्षों में उत्तर भारत लाया गया। अकबर और उसके अभिजातों ने पहली बार तम्बाकू कब देखा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) 1604 ई.

व्याख्या: किताब के बॉक्स “तम्बाकू का प्रसार” के अनुसार “अकबर और उसके अभिजातों ने 1604 ई. में पहली बार तम्बाकू देखा।” आइन उत्तर भारत की फ़सलों की सूची में तम्बाकू का ज़िक्र नहीं करती।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 200

7★सत्रहवीं सदी तक मक्के की गिनती पश्चिम भारत की मुख्य फ़सलों में होने लगी थी। किताब के अनुसार मक्का भारत में किस रास्ते आया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) अफ्रीका और स्पेन के रास्ते

व्याख्या: किताब लिखती है: “मक्का भारत में अफ्रीका और स्पेन के रास्ते आया”। टमाटर, आलू और मिर्च जैसी सब्ज़ियाँ और अनानास व पपीता जैसे फल नयी दुनिया से लाए गए। दक्कन से उत्तर भारत की ओर तम्बाकू आया था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 201

8★★किसान व्यक्तिगत ज़मीन के मालिक थे, फिर भी कई मायनों में वे एक सामूहिक ग्रामीण समुदाय का हिस्सा थे। इस समुदाय के तीन घटक कौन-से थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) खेतिहर किसान, पंचायत और गाँव का मुखिया (मुक़द्दम या मंडल)

व्याख्या: किताब के अनुसार “इस समुदाय के तीन घटक थे – खेतिहर किसान, पंचायत और गाँव का मुखिया (मुक़द्दम या मंडल)।” बाकी विकल्पों में ऐसे लोग हैं जो गाँव में तो आते हैं, पर किताब उन्हें इन तीन घटकों में नहीं गिनती।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 201

9★★मुग़ल काल में गाँव की पंचायत का सरदार मुखिया (मुक़द्दम या मंडल) होता था। उसका मुख्य काम क्या था, और इसमें उसकी मदद कौन करता था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) गाँव की आमदनी व खर्चे का हिसाब–किताब अपनी निगरानी में बनवाना; पंचायत का पटवारी

व्याख्या: किताब कहती है: “गाँव के आमदनी व खर्चे का हिसाब–किताब अपनी निगरानी में बनवाना मुखिया का मुख्य काम था और इसमें पंचायत का पटवारी उसकी मदद करता था।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 202

10★! ग्राम पंचायत के अलावा गाँव में हर जाति की अपनी पंचायत होती थी। राजस्थान में जाति पंचायतें क्या काम करती थीं?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) अलग–अलग जातियों के लोगों के बीच दीवानी के झगड़ों का निपटारा करती थीं

व्याख्या: किताब के अनुसार “राजस्थान में जाति पंचायतें अलग–अलग जातियों के लोगों के बीच दीवानी के झगड़ों का निपटारा करती थीं।” फ़ौजदारी न्याय की बात अलग थी: “फ़ौजदारी न्याय को छोड़ दें तो ज़्यादातर मामलों में राज्य जाति पंचायत के फ़ैसलों को मानता था।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 203

11★★उन्नीसवीं सदी के कुछ अंग्रेज़ अफ़सरों ने भारतीय गाँवों को एक “छोटे गणराज्य” के रूप में देखा, जहाँ लोग भाईचारे के साथ संसाधनों और श्रम का बँटवारा करते थे। किताब इस धारणा के बारे में क्या कहती है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) ऐसा नहीं लगता कि गाँव में सामाजिक बराबरी थी; संपत्ति की व्यक्तिगत मिल्कियत थी और जाति व जेंडर के नाम पर गहरी विषमताएँ थीं

व्याख्या: किताब के अनुसार “ऐसा नहीं लगता कि गाँव में सामाजिक बराबरी थी।” कुछ ताकतवर लोग गाँव के मसलों पर फ़ैसले लेते थे, कमज़ोर वर्गों का शोषण करते थे और न्याय का अधिकार भी उन्हीं के पास था। विकल्प (ब) भी ग़लत है: गाँवों और शहरों के बीच व्यापार की वजह से गाँवों में भी नकद के रिश्ते फैल चुके थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 205

12★★मुग़ल काल के कई ग्रामीण संप्रदायों में शादी के लिए दहेज की जगह क्या अदा करने की ज़रूरत होती थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) “दुलहन की कीमत”

व्याख्या: किताब के अनुसार “कई ग्रामीण संप्रदायों में शादी के लिए ‘दुलहन की कीमत’ अदा करने की ज़रूरत होती थी, न कि दहेज की।” कारण यह था कि कुपोषण, बार–बार माँ बनने और प्रसव के वक़्त मौत की वजह से महिलाओं में मृत्युदर बहुत ज़्यादा थी, इसलिए शादी–शुदा महिलाओं की कमी थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 207

13★सोलहवीं सदी की बंगाली कविता चंडीमंगल में नायक कालकेतु जंगल खाली करवा के एक साम्राज्य की स्थापना करता है। यह कविता किसने लिखी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) मुकुंदराम चक्रवर्ती

व्याख्या: स्रोत 3 (“कृषि बस्तियों के लिए जंगलों का सफ़ाया”) किताब में इस तरह शुरू होता है: “यह सोलहवीं सदी में मुकुंदराम चक्रवर्ती की लिखी एक बंगाली कविता चंडीमंगल का एक अंश है।” अबुल फ़ज़्ल ने आइन लिखी; कारेरी (इटली) और तैवर्नियर (फ़्रांस) विदेशी यात्री थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 209

14★असम में अहोम राजाओं के पायक कौन थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) वे लोग जिन्हें ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देनी पड़ती थी

व्याख्या: किताब के अनुसार “असम में, अहोम राजाओं के अपने पायक होते थे। ये वे लोग थे जिन्हें ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देनी पड़ती थी।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 210

15★★मुग़ल भारत में ज़मींदारों की विस्तृत व्यक्तिगत ज़मीन, जिस पर उनके निजी इस्तेमाल के लिए खेती होती थी, क्या कहलाती थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) मिल्कियत

व्याख्या: किताब कहती है: “इन्हें मिल्कियत कहते थे, यानी संपत्ति।” ज़मींदार इन ज़मीनों को अपनी मर्ज़ी से बेच सकते थे, किसी और के नाम कर सकते थे या गिरवी रख सकते थे। ख़िदमत वे खास सेवाएँ थीं जो ज़मींदार राज्य को देते थे, और सनद राज्यादेश था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 211, 212

16★★! मुग़ल भू–राजस्व के इंतज़ामात में दो चरण थे: कर निर्धारण और वास्तविक वसूली। जमा और हासिल का क्या अर्थ था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) जमा निर्धारित रक़म थी और हासिल सचमुच वसूली गई रक़म

व्याख्या: किताब के शब्दों में “जमा निर्धारित रक़म थी और हासिल सचमुच वसूली गई रक़म।” दोनों को उलटा मत लिखिए। राजस्व निर्धारित करते समय राज्य अपना हिस्सा ज़्यादा से ज़्यादा रखने की कोशिश करता था, पर स्थानीय हालात की वजह से कभी–कभी सचमुच इतनी वसूली संभव नहीं हो पाती थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213

17★आइन में दिए अकबर के भूमि वर्गीकरण (स्रोत 5) के अनुसार चचर कैसी ज़मीन थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) जो तीन या चार वर्षों तक खाली रहती थी

व्याख्या: स्रोत 5 में लिखा है: “चचर वह ज़मीन है जो तीन या चार वर्षों तक खाली रहती है।” विकल्प (अ) पोलज है, (ब) परौती और (द) बंजर। पोलज और परौती की तीन किस्में थीं: अच्छी, मध्यम और खराब।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 214

18★अकबर के बाद के बादशाहों के समय में भी ज़मीन की नपाई के प्रयास जारी रहे। 1665 ई. में औरंगज़ेब ने अपने राजस्व कर्मचारियों को क्या स्पष्ट निर्देश दिया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) हर गाँव में खेतिहरों की संख्या का सालाना हिसाब रखा जाए

व्याख्या: किताब के अनुसार “1665 ई. में, औरंगज़ेब ने अपने राजस्व कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर गाँव में खेतिहरों की संख्या का सालाना हिसाब रखा जाए”। तम्बाकू पर पाबंदी जहाँगीर ने लगाई थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213, 215

19★मुग़ल साम्राज्य एशिया के उन बड़े साम्राज्यों में एक था जो सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ मज़बूत बनाने में कामयाब रहे। किताब बाकी तीन साम्राज्य कौन-से बताती है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) मिंग (चीन में), सफ़ावी (ईरान में) और ऑटोमन (तुर्की में)

व्याख्या: किताब के अनुसार “ये साम्राज्य थे–मिंग (चीन में), सफ़ावी (ईरान में), और ऑटोमन (तुर्की में)।” इन साम्राज्यों की राजनीतिक स्थिरता ने चीन से लेकर भूमध्य सागर तक ज़मीनी व्यापार का जीवंत जाल बिछाने में मदद की।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 215

20★★अबुल फ़ज़्ल ने अकबर के हुक्म पर आइन–ए–अकबरी का ज़िम्मा उठाया। आइन–ए–अकबरी कब पूरी हुई?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) अकबर के शासन के बयालीसवें वर्ष, 1598 ई. में, पाँच संशोधनों के बाद

व्याख्या: किताब कहती है: “अकबर के शासन के बयालीसवें वर्ष, 1598 ई. में, पाँच संशोधनों के बाद, इसे पूरा किया गया।” आइन इतिहास लिखने की उस बड़ी परियोजना का हिस्सा थी जिसका परिणाम अकबरनामा था; अकबरनामा तीन जिल्दों में रचा गया और उसकी तीसरी जिल्द आइन–ए–अकबरी है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 217

खंड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1मुग़ल काल में गुजरात में जिन किसानों के पास ______ के करीब ज़मीन थी वे समृद्ध माने जाते थे; बंगाल में एक औसत किसान की ज़मीन की ऊपरी सीमा 5 एकड़ थी। (पृष्ठ 198)

उत्तर देखिए

मुग़ल काल में गुजरात में जिन किसानों के पास 6 एकड़ के करीब ज़मीन थी वे समृद्ध माने जाते थे; बंगाल में एक औसत किसान की ज़मीन की ऊपरी सीमा 5 एकड़ थी। (पृष्ठ 198)

2मुग़ल काल में जिन इलाकों में प्रति वर्ष ______ या उससे ज़्यादा बारिश होती थी, वहाँ कमोबेश चावल की खेती होती थी। (पृष्ठ 198)

उत्तर देखिए

मुग़ल काल में जिन इलाकों में प्रति वर्ष 40 इंच या उससे ज़्यादा बारिश होती थी, वहाँ कमोबेश चावल की खेती होती थी। (पृष्ठ 198)

3मुग़ल काल में खेती मौसम के दो मुख्य चक्रों के दौरान होती थी: ______ (पतझड़ में) और ______ (वसंत में)। (पृष्ठ 200)

उत्तर देखिए

मुग़ल काल में खेती मौसम के दो मुख्य चक्रों के दौरान होती थी: खरीफ़ (पतझड़ में) और रबी (वसंत में)। (पृष्ठ 200)

4उत्तर भारत में मुग़ल राज्य ने कई नयी नहरें खुदवाईं और कई पुरानी नहरों की मरम्मत करवाई; किताब इसका उदाहरण शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान पंजाब की शाह नहर देती है। (पृष्ठ 200)

5आर्थिक इतिहासकारों की गणना के मुताबिक, 1600 से 1800 के बीच (200 वर्षों में) भारत की आबादी लगभग 5 करोड़ बढ़ी, जो करीब–करीब ______ बढ़ोतरी थी। (पृष्ठ 200) किताब में यहाँ “1600 से 1700” छपा है, पर अगले ही वाक्य में “200 वर्षों” लिखा है; अंग्रेज़ी संस्करण 1600 से 1800 बताता है।

उत्तर देखिए

आर्थिक इतिहासकारों की गणना के मुताबिक, 1600 से 1800 के बीच (200 वर्षों में) भारत की आबादी लगभग 5 करोड़ बढ़ी, जो करीब–करीब 33 फ़ीसदी बढ़ोतरी थी। (पृष्ठ 200) किताब में यहाँ “1600 से 1700” छपा है, पर अगले ही वाक्य में “200 वर्षों” लिखा है; अंग्रेज़ी संस्करण 1600 से 1800 बताता है।

6अंग्रेज़ी शासन के शुरुआती वर्षों के गाँवों के सर्वेक्षण और मराठाओं के दस्तावेज़ बताते हैं कि कहीं–कहीं तो कुल घरों के ______ घर दस्तकारों के थे। (पृष्ठ 204)

उत्तर देखिए

अंग्रेज़ी शासन के शुरुआती वर्षों के गाँवों के सर्वेक्षण और मराठाओं के दस्तावेज़ बताते हैं कि कहीं–कहीं तो कुल घरों के 25 फ़ीसदी घर दस्तकारों के थे। (पृष्ठ 204)

7महाराष्ट्र में गाँव की जो ज़मीन दस्तकारों को उनकी सेवाओं के बदले मिलती थी, वह उनकी मीरास या वतन बन गई, जिस पर दस्तकारों का पुश्तैनी अधिकार होता था। (पृष्ठ 205)

8सत्रहवीं सदी के फ्रांसीसी यात्री ज्यां बैप्टिस्ट तैवर्नियर के अनुसार भारत के गाँवों में मुद्रा की फेर बदल करने वाले लोग सराफ़ कहलाते थे। (पृष्ठ 206)

9मुग़ल राज्य के लिए जंगल बदमाशों को शरण देने वाला अड्डा था, जिसे मवास कहा गया है। (पृष्ठ 208)

10मुग़ल राज्य में पूरे राज्य की वित्तीय व्यवस्था की देख–रेख की ज़िम्मेदारी ______ के दफ़्तर पर थी। (पृष्ठ 213)

उत्तर देखिए

मुग़ल राज्य में पूरे राज्य की वित्तीय व्यवस्था की देख–रेख की ज़िम्मेदारी दीवान के दफ़्तर पर थी। (पृष्ठ 213)

खंड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 8 प्रश्न

1मुग़ल काल में खेती व्यक्तिगत मिल्कियत के सिद्धांत पर आधारित थी, और किसानों की ज़मीन उसी तरह खरीदी और बेची जाती थी जैसे दूसरे संपत्ति मालिकों की।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 198)

2! आइन–ए–अकबरी उत्तर भारत की फ़सलों की सूची में तम्बाकू का ज़िक्र करती है।

उत्तर देखिए

ग़लत

(आइन उत्तर भारत की फ़सलों की सूची में तम्बाकू का ज़िक्र नहीं करती; अकबर और उसके अभिजातों ने 1604 ई. में पहली बार तम्बाकू देखा; पृष्ठ 200)

3मुग़ल काल में पूर्वी भारत में सभी शादियाँ गाँव के मुखिया (मंडल) की मौजूदगी में होती थीं।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 203)

4! जजमानी शब्द सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में बहुत इस्तेमाल होता था।

उत्तर देखिए

ग़लत

(यह व्यवस्था अठारहवीं सदी के बंगाल के स्रोतों में मिलती है, जहाँ ज़मींदार लोहारों, बढ़ई और सुनारों को उनकी सेवाओं के बदले भत्ता और नकदी देते थे; पर यह शब्द सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में बहुत इस्तेमाल नहीं होता था; पृष्ठ 205)

5! मुग़ल काल की समसामयिक रचनाओं में जंगल में रहने वालों के लिए आया “जंगली” शब्द सभ्यता के न होने का अर्थ देता था।

उत्तर देखिए

ग़लत

(उन दिनों यह शब्द ऐसे लोगों के लिए इस्तेमाल होता था जिनका गुज़ारा जंगल के उत्पादों, शिकार और स्थानांतरीय खेती से होता था; पृष्ठ 208)

6मुग़ल काल के भूमिहर भद्रजनों में हिंदू और मुसलमान महिलाओं को ज़मींदारी उत्तराधिकार में मिलती थी, जिसे बेचने अथवा गिरवी रखने के लिए वे स्वतंत्र थीं।

उत्तर देखिए

सही (पृष्ठ 207)

7! भारत में चाँदी के अपने प्राकृतिक संसाधन थे, इसलिए सोलहवीं से अठारहवीं सदी के बीच यहाँ चाँदी के रुपयों की उपलब्धि स्थिर बनी रही।

उत्तर देखिए

ग़लत

(भारत में चाँदी के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे; निर्यात होने वाली वस्तुओं के भुगतान के लिए एशिया में आई चाँदी का एक बड़ा हिस्सा भारत की तरफ़ खिंच गया; पृष्ठ 216)

8आइन–ए–अकबरी में बंगाल और उड़ीसा के ज़मींदारों की जाति के बारे में भी विस्तृत सूचनाएँ दी गई हैं।

उत्तर देखिए

ग़लत

(कई सूबों के लिए ये सूचनाएँ संकलित की गईं, पर बंगाल और उड़ीसा के लिए ऐसी सूचनाएँ मौजूद नहीं हैं; यह आइन के आँकड़ों की एक सीमा है; पृष्ठ 220)

खंड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 6 प्रश्न

1★★सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के कृषि इतिहास के लिए आइन–ए–अकबरी के अलावा किन स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: किसान अपने बारे में खुद नहीं लिखते थे, और आइन किसानों के बारे में सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया देती है। इसलिए इतिहासकार मुग़लों की राजधानी से दूर लिखे गए स्रोत भी देखते हैं:

  • पश्चिम भारत के दस्तावेज़: सत्रहवीं व अठारहवीं सदियों के गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के वे दस्तावेज़ जो सरकार की आमदनी की विस्तृत जानकारी देते हैं।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी के दस्तावेज़: ये पूर्वी भारत में कृषि–संबंधों का उपयोगी खाका पेश करते हैं।

ये स्रोत किसानों, ज़मींदारों और राज्य के बीच के झगड़े दर्ज करते हैं और बताते हैं कि किसान राज्य को किस नज़रिये से देखते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 197

2★मुग़ल काल में गाँव की पंचायत कौन-से दंड दे सकती थी, और उनका मकसद क्या था?

उत्तर देखिए

उत्तर: पंचायतों को जुर्माना लगाने और समुदाय से निष्कासित करने जैसे ज़्यादा गंभीर दंड देने के अधिकार थे।

  • निष्कासन: यह एक कड़ा कदम था जो एक सीमित समय के लिए लागू किया जाता था। दंडित व्यक्ति को उस समय के लिए गाँव छोड़ना पड़ता था, और इस दौरान वह अपनी जाति और पेशे से हाथ धो बैठता था।
  • मकसद: ऐसी नीतियों का मकसद जातिगत रिवाजों की अवहेलना रोकना था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 203

3★मुग़ल काल में भीलों का साल भर का काम मौसम के मुताबिक कैसे बँटा हुआ था?

उत्तर देखिए

उत्तर: भीलों में बसंत के मौसम में जंगल के उत्पाद इकट्ठा किए जाते, गर्मियों में मछली पकड़ी जाती, मानसून के महीनों में खेती की जाती, और शरद व जाड़े के महीनों में शिकार किया जाता था। यह सिलसिला लगातार गतिशीलता पर टिका था; एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहना जंगलों में रहने वाले कबीलों की एक खासियत थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 208

4★सत्रहवीं सदी में वाणिज्यिक खेती और व्यापार का असर जंगलवासियों पर कैसे पड़ा? दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: बाहर की माँग जंगल तक पहुँची और जंगलवासी व्यापार में शामिल हुए।

  • जंगल के उत्पाद: शहद, मधुमोम और लाक की बहुत माँग थी; लाक तो सत्रहवीं सदी में भारत से समुद्र पार होने वाले निर्यात की मुख्य वस्तुओं में से एक थी। हाथी भी पकड़े और बेचे जाते थे।
  • ज़मीनी व्यापार: पंजाब का लोहानी कबीला भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच होने वाले ज़मीनी व्यापार में लगा था, और पंजाब के गाँवों और शहरों के बीच होने वाले व्यापार में भी शिरकत करता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 210

5★★आइन के अनुसार मुग़ल भारत में ज़मींदारों की मिली–जुली सैनिक शक्ति कितनी थी?

उत्तर देखिए

उत्तर: किताब के बॉक्स “एक समांतर सैनिक बल!” में आइन के ये आँकड़े दिए गए हैं:

  • 384,558 घुड़सवार
  • 4,277,057 पैदल
  • 1863 हाथी
  • 4260 तोप
  • 4,500 नाव

ज़्यादातर ज़मींदारों के पास अपने किले और अपनी सैनिक टुकड़ियाँ थीं, जिनमें घुड़सवारों, तोपखाने और पैदल सिपाहियों के जत्थे होते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 211, 212

6★★अकबर ने अमील–गुज़ार (राजस्व वसूली करने वाले) को भुगतान के तरीके के बारे में क्या हुक्म दिया?

उत्तर देखिए

उत्तर: अकबर ने हुक्म दिया कि अमील–गुज़ार कोशिश करे कि खेतिहर नक़द भुगतान करे, पर फ़सलों में भुगतान का विकल्प भी खुला रहे। स्रोत 6 में भी यही बात है: अमील–गुज़ार सिर्फ़ नक़द लेने की आदत न डाले बल्कि फ़सल भी लेने के लिए तैयार रहे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213, 215

खंड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 5 प्रश्न

1★★सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में कृषि उत्पादन को किस हद तक महज़ गुज़ारे के लिए खेती कह सकते हैं? अपने उत्तर के कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: सिर्फ़ कुछ हद तक। खेती का प्राथमिक उद्देश्य लोगों का पेट भरना था, पर एक औसत किसान की ज़मीन पर पेट भरने के लिए होने वाला उत्पादन और व्यापार के लिए होने वाला उत्पादन एक दूसरे से जुड़े थे।

  • गुज़ारे का पक्ष: चावल, गेहूँ, ज्वार जैसी रोज़मर्रा के खाने की फ़सलें सबसे ज़्यादा उगाई जाती थीं।
  • व्यापार का पक्ष: मुग़ल राज्य जिन्स–ए–कामिल (सर्वोत्तम फ़सलें), जैसे कपास और गन्ना, उगाने को बढ़ावा देता था क्योंकि इनसे ज़्यादा कर मिलता था; तिलहन (जैसे सरसों) और दलहन भी नकदी फ़सलें थीं।
  • नयी फ़सलें: सत्रहवीं सदी के अंत तक तम्बाकू पूरे भारत में खेती, व्यापार और उपयोग की मुख्य वस्तुओं में से एक बन गया था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 198, 200

2★★कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में महिलाएँ और मर्द कंधे से कंधा मिलाकर खेतों में काम करते थे।

  • खेत में: मर्द खेत जोतते और हल चलाते थे; महिलाएँ बुआई, निराई और कटाई के साथ–साथ पकी हुई फ़सल का दाना निकालने का काम करती थीं।
  • घर का श्रम: छोटी ग्रामीण इकाइयों और किसान की व्यक्तिगत खेती में घर–परिवार के संसाधन और श्रम ही उत्पादन की बुनियाद थे, इसलिए घर और बाहर के काम का लिंग के आधार पर बँटवारा मुमकिन नहीं था।
  • दस्तकारी: सूत कातना, बरतन के लिए मिट्टी साफ़ करना और गूँधना, और कपड़ों पर कढ़ाई महिलाओं के श्रम पर निर्भर थे; किसी वस्तु का जितना वाणिज्यीकरण होता, उतनी ही इस श्रम की माँग होती थी।
  • पूर्वाग्रह: पश्चिमी भारत में राजस्वला महिलाओं को हल या कुम्हार का चाक छूने की इजाज़त नहीं थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 206

3★★सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में मौद्रिक कारोबार की अहमियत उदाहरण देकर समझाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में नकद का लेन–देन व्यापार और कर वसूली में तो था ही, गाँवों और शहरों के बीच व्यापार की वजह से गाँवों में भी नकद के रिश्ते फैल चुके थे।

  • चाँदी: भारत से निर्यात होने वाली वस्तुओं के भुगतान के लिए भारी मात्रा में चाँदी भारत आई; सोलहवीं से अठारहवीं सदी के बीच चाँदी के रुपयों की उपलब्धि में स्थिरता रही और मुग़ल राज्य को नकदी कर उगाहने में आसानी हुई।
  • कर और मज़दूरी: मुग़लों के केंद्रीय इलाकों में कर की गणना और वसूली नकद में होती थी; निर्यात के लिए उत्पादन करने वाले दस्तकारों को मज़दूरी या पूर्व भुगतान भी नकद में मिलता था।
  • गाँव में सराफ़: फ्रांसीसी यात्री तैवर्नियर के अनुसार भारत में वे गाँव बहुत छोटे कहे जाते जिनमें मुद्रा की फेर बदल करने वाले सराफ़ न हों।
  • कारेरी की गवाही (स्रोत 8): लगभग 1690 ई. में भारत से होकर गुज़रे इटली के मुसाफ़िर जोवान्नी कारेरी के अनुसार यहाँ से यूरोप जाने वाली सारी वस्तुएँ नकद में खरीदी जाती थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 205, 206, 216, 217

4★★उन सबूतों की जाँच कीजिए जो बताते हैं कि मुग़ल राजकोषीय व्यवस्था के लिए भू–राजस्व बहुत महत्त्वपूर्ण था।

उत्तर देखिए

उत्तर: किताब के अनुसार “ज़मीन से मिलने वाला राजस्व मुग़ल साम्राज्य की आर्थिक बुनियाद थी।”

  • प्रशासनिक तंत्र: राजस्व आकलन और वसूली के लिए राज्य ने एक तंत्र खड़ा किया, जिसमें पूरे राज्य की वित्तीय व्यवस्था देखने वाला दीवान का दफ़्तर था।
  • नपाई: हर प्रांत में जुती हुई और जोतने लायक ज़मीन नपवाई गई; अबुल फ़ज़्ल ने आइन में इन ज़मीनों के आँकड़े संकलित किए। 1665 ई. में औरंगज़ेब ने हर गाँव में खेतिहरों की संख्या का सालाना हिसाब रखने का निर्देश दिया।
  • बारीक नियम: अकबर ने ज़मीन को पोलज, परौती, चचर और बंजर में बाँटा और हर वर्ग के लिए अलग राजस्व तय किया; पहले दो प्रकार (पोलज और परौती) की ज़मीन में मध्यम उत्पाद का एक–तिहाई हिस्सा शाही शुल्क माना जाता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 213, 214

5★आइन–ए–अकबरी के पहले तीन भाग (दफ़्तर) किन विषयों के बारे में हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: आइन पाँच भागों (दफ्तर) का संकलन है, जिसके पहले तीन भाग प्रशासन का विवरण देते हैं।

  • मंज़िल–आबादी: शाही घर–परिवार और उसके रख–रखाव के बारे में।
  • सिपह–आबादी: सैनिक व नागरिक प्रशासन और नौकरों की व्यवस्था के बारे में; इसमें शाही अफ़सरों (मनसबदार), विद्वानों, कवियों और कलाकारों की संक्षिप्त जीवनियाँ भी हैं।
  • मुल्क–आबादी: साम्राज्य व प्रांतों के वित्तीय पहलू, राजस्व की दरों के आँकड़े और “बारह प्रांतों का बयान”।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 218

खंड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 5 प्रश्न

1★★कृषि इतिहास लिखने के लिए आइन–ए–अकबरी को स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने में कौन-सी समस्याएँ हैं? इतिहासकार इन समस्याओं से कैसे निपटते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फ़ज़्ल की आइन–ए–अकबरी (1598 ई. में पूरी) में खेतों की जुताई, करों की उगाही और ज़मींदारों से रिश्तों के नियमन के लिए राज्य के इंतज़ामों का लेखा–जोखा बड़ी सावधानी से दिया गया है। फिर भी कृषि इतिहास के स्रोत के रूप में इसकी सीमाएँ हैं।

  • ऊपर से देखा नज़रिया: आइन का मुख्य उद्देश्य अकबर के साम्राज्य का ऐसा खाका पेश करना था जहाँ एक मज़बूत सत्ताधारी वर्ग सामाजिक मेल–जोल बनाकर रखता था। किसानों के बारे में इससे जो पता चलता है, वह किताब के शब्दों में “सत्ता के ऊँचे गलियारों का नज़रिया” है।
  • जोड़ की ग़लतियाँ: जोड़ करने में कई ग़लतियाँ पाई गई हैं; माना जाता है कि ये अंकगणित की छोटी–मोटी चूक हैं या नकल उतारते समय अबुल फ़ज़्ल के सहयोगियों की भूल। आमतौर पर ये मामूली हैं और बड़े स्तर पर आँकड़ों की सच्चाई को कम नहीं करतीं।
  • आँकड़ों में विषमता: सभी सूबों से आँकड़े एक ही शक्ल में नहीं जुटाए गए; कई सूबों के ज़मींदारों की जाति की सूचनाएँ हैं, पर बंगाल और उड़ीसा के लिए नहीं।
  • कीमतें और मज़दूरी: राजकोषीय आँकड़े तफ़सील से हैं, पर कीमतें और मज़दूरी उतने अच्छे से दर्ज नहीं हैं; जो विस्तृत सूची है, वह राजधानी आगरा या उसके इर्द–गिर्द के इलाकों से ली गई है, इसलिए देश के बाकी हिस्सों के लिए इसकी प्रासंगिकता सीमित है।
  • इतिहासकार कैसे निपटते हैं: वे आइन का ध्यान से अध्ययन करके उसकी ग़लतियाँ पहचानते हैं, और आइन के साथ–साथ मुग़लों की राजधानी से दूर लिखे स्रोतों का भी इस्तेमाल करते हैं: सत्रहवीं व अठारहवीं सदियों के गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के दस्तावेज़, और पूर्वी भारत के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी के दस्तावेज़। ये स्रोत किसानों, ज़मींदारों और राज्य के बीच के झगड़े भी दर्ज करते हैं।

इन सीमाओं के बावजूद आइन सावधानी से बनी किताब है: अबुल फ़ज़्ल ने पांडुलिपि पाँच बार संशोधित की, मौखिक बयानों को शामिल करने से पहले अन्य स्रोतों से उनकी पुष्टि करने की कोशिश की, और सांख्यिकी वाले खंडों में आँकड़े अंकों के साथ शब्दों में भी लिखे ताकि बाद की प्रतियों में नकल की ग़लतियाँ कम से कम हों।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 197, 217, 220

2★★मुग़ल काल के कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति किस हद तक एक कारक थी?

उत्तर देखिए

उत्तर: सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के कृषि समाज में जाति काम, हैसियत, न्याय और ज़मीन पर पकड़, सब पर असर डालती थी, पर सब समूहों पर एक जैसा नहीं।

  • काम और ग़रीबी: जाति और जाति जैसे भेदभावों की वजह से खेतिहर किसान कई समूहों में बँटे थे। खेती लायक ज़मीन की कमी नहीं थी, फिर भी कुछ जाति के लोगों को सिर्फ़ नीच समझे जाने वाले काम दिए जाते थे, इसलिए वे ग़रीब रहने के लिए मजबूर थे। उनकी हालत कमोबेश आधुनिक भारत के दलितों जैसी थी।
  • दूसरे संप्रदायों में भी: मुसलमान समुदायों में हलालख़ोरान जैसे ‘नीच’ कामों से जुड़े समूह गाँव की हदों के बाहर ही रह सकते थे; बिहार में मल्लाहज़ादाओं (नाविकों के पुत्र) की तुलना दासों से की जा सकती थी।
  • बीच के समूहों में ढील: निचले तबकों में जाति, ग़रीबी और सामाजिक हैसियत के बीच सीधा रिश्ता था, बीच के समूहों में ऐसा नहीं था। सत्रहवीं सदी में मारवाड़ में लिखी एक किताब राजपूतों की चर्चा किसानों के रूप में करती है; उसके मुताबिक जाट भी किसान थे, पर जाति व्यवस्था में उनकी जगह राजपूतों से नीची थी। पशुपालन और बागबानी में बढ़ते मुनाफ़े से अहीर, गुज्जर और माली जैसी जातियाँ सामाजिक सीढ़ी में ऊपर उठीं; पूर्वी इलाकों में सदगोप व कैवर्त जैसी पशुपालक और मछुआरी जातियाँ किसानों जैसी सामाजिक स्थिति पाने लगीं।
  • पंचायत में जाति: पंचायत देखती थी कि लोग अपनी जाति की हदों में रहें। राजस्थान में जाति पंचायतें अलग–अलग जातियों के लोगों के बीच दीवानी के झगड़े निपटाती थीं और देखती थीं कि शादियाँ जातिगत मानदंडों के मुताबिक हो रही हैं या नहीं।
  • ज़मींदारी में जाति: ज़मींदारों की बढ़ी हुई हैसियत का एक कारण जाति था; अबुल फ़ज़्ल के अनुसार “ऊँची जाति” के ब्राह्मण–राजपूत गठबंधन का ग्रामीण समाज पर ठोस नियंत्रण था। फिर भी ज़मींदारी धड़ल्ले से खरीदी और बेची जाती थी, इसलिए अपेक्षाकृत “निचली” जातियों के लोग भी ज़मींदार बन सकते थे।

जाति एक बड़ा कारक थी, सबसे ज़्यादा निचले तबकों के लिए; पर मुनाफ़े और ज़मींदारी की खरीद–बिक्री ने कुछ समूहों को ऊपर उठने का रास्ता भी दिया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 201, 202, 203, 211, 212

3★★सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में जंगल वासियों की ज़िंदगी किस तरह बदल गई?

उत्तर देखिए

उत्तर: इन दो सदियों में राज्य, बसी हुई खेती और व्यापार जंगलों तक पहुँचे, और जंगल वासियों की ज़िंदगी बदलने लगी।

  • पहले का जीवन: समसामयिक स्रोतों के आधार पर अंदाज़ा है कि जंगलों के फैलाव का औसत करीब–करीब 40 फ़ीसदी था। जंगल में रहने वालों का गुज़ारा जंगल के उत्पादों, शिकार और स्थानांतरीय खेती से होता था; भीलों जैसे कबीले मौसम के मुताबिक काम बदलते और लगातार एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते थे।
  • राज्य की घुसपैठ: राज्य के लिए जंगल बदमाशों को शरण देने वाला अड्डा (मवास) था। सेना के लिए हाथियों की ज़रूरत थी, इसलिए जंगलवासियों से ली जाने वाली पेशकश में अकसर हाथी भी शामिल होते थे। दरबारी इतिहासकारों के अनुसार शिकार अभियान के नाम पर बादशाह अपने विशाल साम्राज्य के कोने–कोने का दौरा करता था।
  • खेती का फैलाव: सोलहवीं सदी में मुकुंदराम चक्रवर्ती की लिखी बंगाली कविता चंडीमंगल (स्रोत 3) में नायक कालकेतु जंगल खाली करवा के एक साम्राज्य की स्थापना करता है।
  • व्यापार: शहद, मधुमोम और लाक की बहुत माँग थी; लाक सत्रहवीं सदी में भारत से समुद्र पार होने वाले निर्यात की मुख्य वस्तुओं में थी। हाथी भी पकड़े और बेचे जाते थे, और पंजाब का लोहानी कबीला भारत और अफ़ग़ानिस्तान के बीच ज़मीनी व्यापार में लगा था।
  • सरदार से राजा: कबीलाई व्यवस्था से राजतांत्रिक प्रणाली की तरफ़ संक्रमण पहले ही शुरू हो चुका था, पर लगता है कि सोलहवीं सदी में आकर यह प्रक्रिया पूरी तरह विकसित हुई। कई कबीलों के सरदार ज़मींदार बन गए, कुछ राजा भी हो गए, और उन्हें सेना खड़ी करनी पड़ी; सिंध इलाके की कबीलाई सेनाओं में 6000 घुड़सवार और 7000 पैदल सिपाही होते थे। असम में अहोम राजाओं के अपने पायक थे, जिन्हें ज़मीन के बदले सैनिक सेवा देनी पड़ती थी। सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में कोच राजाओं ने पड़ोसी कबीलों के साथ एक के बाद एक युद्ध करके उन पर कब्ज़ा जमा लिया।
  • नए सांस्कृतिक प्रभाव: कुछ इतिहासकारों के अनुसार नए बसे इलाकों के खेतिहर समुदायों के धीरे–धीरे इस्लाम अपनाने में सूफ़ी संतों (पीर) ने बड़ी भूमिका अदा की।

घूमते रहने वाली ज़िंदगी पर राज्य की माँगों, बसी हुई खेती और बाज़ार का दबाव बढ़ा, और कई कबीले राजतंत्र की ओर बढ़े।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 208, 209, 210, 211

4★★मुग़ल भारत में ज़मींदारों की भूमिका की जाँच कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: मुग़ल भारत में ज़मींदार वह तबका था जिसकी कमाई तो खेती से आती थी लेकिन जो कृषि उत्पादन में सीधे हिस्सेदारी नहीं करता था। गाँवों के सामाजिक संबंधों को एक पिरामिड मानें, तो ज़मींदार उसके संकरे शीर्ष पर थे।

  • हैसियत: ज़मींदारों की बढ़ी हुई हैसियत के दो कारण थे: जाति, और राज्य को दी जाने वाली खास सेवाएँ (ख़िदमत)। उनकी विस्तृत व्यक्तिगत ज़मीन मिल्कियत कहलाती थी, जिसे वे बेच सकते थे, किसी और के नाम कर सकते थे या गिरवी रख सकते थे।
  • राज्य के लिए: वे अकसर राज्य की ओर से कर वसूल कर सकते थे, और इसके बदले उन्हें वित्तीय मुआवज़ा मिलता था। ज़्यादातर ज़मींदारों के अपने किले और सैनिक टुकड़ियाँ थीं; आइन के अनुसार उनकी मिली–जुली सैनिक शक्ति में 384,558 घुड़सवार और 4,277,057 पैदल थे।
  • ज़मींदारी कैसे पक्की हुई: नयी ज़मीनें बसाकर (जंगल–बारी), अधिकारों के हस्तांतरण के ज़रिये, राज्य के आदेश से, या खरीद कर। राजपूतों और जाटों ने उत्तर भारत में, और सदगोप जैसे किसान–पशुचारियों ने मध्य और दक्षिण–पश्चिम बंगाल में ताकतवर ज़मींदारियाँ खड़ी कीं।
  • गाँव की अर्थव्यवस्था में: उन्होंने खेती लायक ज़मीनें बसाने में अगुआई की, खेतिहरों को खेती के साजो–सामान व उधार दिए, अपनी मिल्कियत की फ़सल बेची और अकसर बाज़ार (हाट) स्थापित किए। ज़मींदारी की खरीद–फ़रोख्त से गाँवों के मौद्रीकरण में तेज़ी आई।
  • शोषक, पर संरक्षक भी: ज़मींदार शोषण करने वाला तबका था, फिर भी किसानों से उनके रिश्तों में “पारस्परिकता, पैतृकवाद और संरक्षण का पुट था”। भक्ति संतों ने ज़मींदारों को किसानों के शोषक के रूप में नहीं दिखाया; उनके गुस्से का निशाना आमतौर पर राज्य का राजस्व अधिकारी था। सत्रहवीं सदी के कृषि विद्रोहों में राज्य के ख़िलाफ़ ज़मींदारों को अकसर किसानों का समर्थन मिला।

इस तरह ज़मींदार कर वसूली और सैनिक ताकत के कारण राज्य के लिए अहम थे, और गाँव में खेती फैलाने, हाट बसाने और मौद्रीकरण तेज़ करने में भी उनकी बड़ी भूमिका थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 211, 212, 213

5★★पंचायत और गाँव का मुखिया किस तरह से ग्रामीण समाज का नियमन करते थे? विवेचना कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: मुग़ल काल के गाँव में पंचायत और उसका सरदार, मुखिया (मुक़द्दम या मंडल), मिलकर गाँव का हिसाब, जाति के नियम और झगड़े सँभालते थे।

  • पंचायत की बनावट: गाँव की पंचायत में बुज़ुर्गों का जमावड़ा होता था, आमतौर पर गाँव के वे महत्त्वपूर्ण लोग जिनके पास अपनी संपत्ति के पुश्तैनी अधिकार होते थे। यह एक अल्पतंत्र था जिसमें गाँव के अलग–अलग संप्रदायों और जातियों की नुमाइंदगी होती थी; फिर भी छोटे–मोटे और “नीच” काम करने वाले खेतिहर मज़दूरों के लिए इसमें जगह होने की संभावना कम थी। पंचायत का फ़ैसला गाँव में सबको मानना पड़ता था।
  • मुखिया: कुछ स्रोतों के अनुसार गाँव के बुज़ुर्ग आम सहमति से मुखिया को चुनते थे और इसकी मंज़ूरी ज़मींदार से लेनी पड़ती थी; भरोसा न रहे तो बुज़ुर्ग उसे बर्ख़ास्त कर सकते थे। पंचायत के पटवारी की मदद से गाँव की आमदनी व खर्चे का हिसाब बनवाना उसका मुख्य काम था।
  • आम ख़ज़ाना: पंचायत का खर्चा गाँव के आम ख़ज़ाने से चलता था, जिसमें हर व्यक्ति अपना योगदान देता था; इसी से गाँव आने वाले कर अधिकारियों की ख़ातिरदारी का खर्चा भी होता था।
  • जाति के नियम: पंचायत देखती थी कि लोग अपनी जाति की हदों में रहें; पूर्वी भारत में सभी शादियाँ मंडल की मौजूदगी में होती थीं। पंचायत जुर्माना लगा सकती थी और सीमित समय के लिए समुदाय से निष्कासित भी कर सकती थी। हर जाति की अपनी जाति पंचायत भी होती थी; फ़ौजदारी न्याय को छोड़ दें तो ज़्यादातर मामलों में राज्य जाति पंचायत के फ़ैसलों को मानता था।
  • शिकायतें: राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे प्रांतों के दस्तावेज़ों में ऐसी कई अर्ज़ियाँ हैं जिनमें पंचायत से “ऊँची” जातियों या राज्य के अधिकारियों के ख़िलाफ़ ज़बरन कर उगाही या बेगार वसूली की शिकायत की गई है; ये अर्ज़ियाँ आमतौर पर सबसे निचले तबके के लोग लगाते थे। अत्यधिक कर की माँगों पर पंचायत अकसर समझौते का सुझाव देती थी; जहाँ समझौता नहीं हो पाता, वहाँ किसान गाँव छोड़कर भाग जाने जैसे उग्र रास्ते अपनाते थे; जोतने लायक खाली ज़मीन आसानी से मिल जाती थी और श्रम के लिए प्रतियोगिता थी, इसलिए यह खेतिहरों के हाथ में बड़ा प्रभावी हथियार था।
  • सीमाएँ: मंडलों पर आरोप था कि वे पटवारी के साथ मिलकर हिसाब–किताब में हेरा–फेरी करते थे और अपनी ज़मीन पर कर का आकलन कम करके अतिरिक्त बोझ छोटे किसानों पर डाल देते थे।

पंचायत और मुखिया गाँव में व्यवस्था रखते थे, पर उनका नियमन जाति की ऊँच–नीच और गाँव के ताकतवर लोगों के हितों से बँधा था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 202, 203, 204

खंड छ — स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक) — 4 प्रश्न

1★★स्रोत 2 (पेड़ों और खेतों की सिंचाई) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“हिंदुस्तान के मुल्क का ज्यादातर हिस्सा मैदानी ज़मीन पर बसा हुआ है।” “शरद ऋतु की फ़सलें बारिश के पानी से ही पैदा हो जाती हैं” “लाहौर, दीपालपुर (दोनों ही आज के पाकिस्तान में) और ऐसी दूसरी जगहों पर लोग रहट के ज़रिये सिंचाई करते हैं।” “इस अंतिम पहिये को बैल के ज़रिये घुमाया जाता है” “आगरा, चाँदवर और बयाना (आज के उत्तर प्रदेश में) और ऐसे अन्य इलाकों में भी, लोगबाग बालटियों से सिंचाई करते हैं।” “एक शख़्स को बैल हाँकना पड़ता है, दूसरा बालटी से पानी निकालता है।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) बाबरनामा से; यह बादशाह बाबर का वर्णन है, जिसमें वह उत्तर भारत में देखे सिंचाई के उपकरणों के बारे में बताता है।
  • (ख) लाहौर और दीपालपुर (दोनों आज के पाकिस्तान में) में रहट से, और आगरा, चाँदवर और बयाना में बालटियों से (आगरा और चाँदवर आज के उत्तर प्रदेश में, बयाना आज के राजस्थान में; किताब तीनों को उत्तर प्रदेश में बताती है)।
  • (ग) रहट के लिए कुआँ, कुएँ की गहराई जितनी लंबी रस्सी के दो फ़ंदे, लकड़ी के गुटके, घड़े, दाँतेदार पहिये और उन्हें घुमाने वाला बैल चाहिए; घड़ों का पानी एक संकरे नाले से हर जगह पहुँचाया जाता था। बालटी के लिए कुएँ के किनारे गड़े लकड़ी के कन्ने, बेलन, बड़ी बालटी, रस्सी और बैल चाहिए, और दो लोग: एक बैल हाँकता, दूसरा बालटी से पानी निकालता। दोनों तरीक़ों में कुआँ और बैल लगते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 199

2★★स्रोत 4 (पहाड़ी कबीलों और मैदानों के बीच व्यापार, लगभग 1595) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“अवध सूबे (आज के उत्तर प्रदेश का हिस्सा) के मैदानी इलाकों और पहाड़ी कबीलों के बीच होने वाले लेन–देन” “उत्तर के पहाड़ों से इंसानों, मोटे–मोटे घोड़ों और बकरों की पीठ पर लादकर बेशुमार सामान ले जाए जाते हैं, जैसे कि सोना, ताँबा, शीशा, कस्तूरी, सुरागाय (याक) की पूँछ, शहद” “मोम, ऊनी कपड़े, लकड़ी के सामान” “इसके बदले, वे सफ़ेद और रंगीन कपड़े” “नमक, हींग, गहने और शीशे व मिट्टी के बरतन वापिस ले जाते हैं।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) अबुल फ़ज़्ल ने; यह अवध सूबे (आज के उत्तर प्रदेश का हिस्सा) के मैदानी इलाकों और पहाड़ी कबीलों के लेन–देन के बारे में है।
  • (ख) इंसानों, मोटे–मोटे घोड़ों और बकरों की पीठ पर लादकर।
  • (ग) पहाड़ी कबीले मैदानों से कटे हुए नहीं थे। पहाड़ों से सोना, ताँबा, कस्तूरी, शहद, मोम, ऊनी कपड़े जैसी चीज़ें मैदानों में लाई जाती थीं और बदले में कपड़े, नमक, हींग, गहने और बरतन ले जाए जाते थे, यानी दोनों के बीच अदला–बदली होती थी। किताब भी बताती है कि जंगल के उत्पादों, जैसे शहद, मधुमोम और लाक, की बहुत माँग थी और कुछ कबीले, जैसे पंजाब का लोहानी कबीला, ज़मीनी व्यापार में लगे थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 210

3★★स्रोत 6 (नक़द या जीन्स?) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“अमील-गुज़ार सिर्फ़ नक़द लेने की आदत न डाले बल्कि फ़सल भी लेने के लिए तैयार रहे।” “पहला, कणकुत: हिंदी ज़ुबान में कण का मतलब है, अनाज, और कुत, अंदाज़ा” “दूसरा, बटाई जिसे भाओली भी कहते हैं (में), फ़सल काट कर जमा कर लेते हैं, और फ़िर सभी पक्षों की मौजूदगी में व रज़ामंदी में बँटवारा करते हैं।” “तीसरे, खेत बटाई जब वे बीज बोने के बाद खेत बाँट लेते हैं।” “चौथे, लाँग बटाई; फ़सल काटने के बाद, वे उसका ढेर बना लेते हैं और फिर उसे अपने में बाँट लेते हैं”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) आइन से; अमील–गुज़ार सिर्फ़ नक़द लेने की आदत न डाले, फ़सल भी लेने के लिए तैयार रहे।
  • (ख) हिंदी में कण का मतलब अनाज और कुत का मतलब अंदाज़ा है, यानी फ़सल का अंदाज़े से आकलन; आइन के अनुसार अकसर अंदाज़ से किया गया ज़मीन का आकलन भी पर्याप्त रूप से सही नतीजा देता है। शक होने पर फ़सल को अच्छा, मध्यम और बदतर, तीन पुलिंदों में काटकर शक दूर किया जाता था।
  • (ग) भाओली (बटाई) में फ़सल काटकर जमा की जाती और सभी पक्षों की मौजूदगी व रज़ामंदी से बाँटी जाती थी; इसमें कई समझदार निरीक्षकों की ज़रूरत पड़ती थी। खेत बटाई में बीज बोने के बाद खेत ही बाँट लिए जाते थे। लाँग बटाई में फ़सल काटकर उसका ढेर बनाया जाता और बाँट लिया जाता, और हर पक्ष अपना हिस्सा घर ले जाता था। यानी बँटवारा कटी फ़सल का भी हो सकता था और बोए हुए खेत का भी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 215

4★स्रोत 8 (भारत में चाँदी कैसे आई?) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“दुनिया भर में बिचरने वाला सारा सोना–चाँदी आखिरकार यहीं पहुँच जाता है।” “ये सब जानते हैं कि इसका बहुत बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है” “न ही फ़ारस, अरबिया और तुर्की (के लोग) भारत की वस्तुओं के बिना रह सकते हैं।” “वो सब कुछ, जो डच लोग जापान की खानों से हासिल करते हैं, देर–सवेर इंदोस्तान (को) चला जाता है” “यहाँ से यूरोप को जाने वाली सारी वस्तुएँ, चाहे वो फ्रांस जाएँ या इंग्लैंड या पुर्तगाल, सभी नकद में खरीदी जाती हैं, जो (नकद) वहीं (हिंदुस्तान में) रह जाता है।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) इटली के मुसाफ़िर जोवान्नी कारेरी के लेख से, जो लगभग 1690 ई. में भारत से होकर गुज़रा था; उसका लेख बर्नियर के लेख पर आधारित है।
  • (ख) अमेरिका से।
  • (ग) अंश के अनुसार दूसरे देश भारत की वस्तुओं के बिना नहीं रह सकते थे, और यूरोप जाने वाली सारी वस्तुएँ नकद में खरीदी जाती थीं, जो भारत में ही रह जाता था। किताब बताती है कि भारत में चाँदी के प्राकृतिक संसाधन नहीं थे, इसलिए यह चाँदी भारत के लिए अच्छी थी: सोलहवीं से अठारहवीं सदी के बीच चाँदी के रुपयों की उपलब्धि में अच्छी स्थिरता बनी रही, मुद्रा संचार और सिक्कों की ढलाई में अभूतपूर्व विस्तार हुआ, और मुग़ल राज्य को नकदी कर उगाहने में आसानी हुई।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 8, पृष्ठ 216, 217

उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकलंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर
2 अंक30–40 शब्दउत्तर + कारण या उदाहरण
3 अंक60–80 शब्दतीन बिंदु, पूरे वाक्यों में
4 अंक (स्रोत)हर भाग 1–3 वाक्यपहले अंश में उत्तर खोजिए, फिर किताब की बात जोड़िए
5 अंकलगभग 120 शब्दभूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष

किताब के अभ्यास के प्रश्न 1 से 5 लगभग 100 से 150 शब्दों में और प्रश्न 6 से 9 लगभग 250–300 शब्दों में उत्तर माँगते हैं। ये प्रश्न खंड ङ और च में हैं, इसलिए वहाँ के उत्तर कुछ लंबे रखे गए हैं।

★इस अध्याय के लिए तीन सलाह:

  1. किताब के शब्द लिखिए: रैयत, मुज़रियान, खुद–काश्त, पाहि–काश्त, जिन्स–ए–कामिल, मुक़द्दम, मंडल, पटवारी, मिल्कियत, ख़िदमत, जंगल–बारी, पेशकश, मवास, जमा, हासिल, अमील–गुज़ार, पोलज, परौती, चचर, बंजर, कणकुत, भाओली।
  2. हर बात के साथ व्यक्ति, जगह और समय लिखिए: अबुल फ़ज़्ल (अकबर का दरबारी इतिहासकार, आइन–ए–अकबरी), बाबर (बाबरनामा), मुकुंदराम चक्रवर्ती (चंडीमंगल, बंगाली कविता, सोलहवीं सदी), ज्यां बैप्टिस्ट तैवर्नियर (फ्रांसीसी यात्री, सत्रहवीं सदी), जोवान्नी कारेरी (इटली का मुसाफ़िर, लगभग 1690 ई.)।
  3. तिथियाँ किताब की तरह लिखिए: लगभग 1595 (अवध का वर्णन, स्रोत 4), 1598 (आइन पूरी हुई, अकबर के शासन का बयालीसवाँ वर्ष), 1604 (अकबर ने पहली बार तम्बाकू देखा), 1665 (औरंगज़ेब का निर्देश)। आबादी की बढ़ोतरी 1600 से 1800 के बीच (200 वर्षों में) लिखिए; किताब में यहाँ “1600 से 1700” छपा है, पर अगले ही वाक्य में “200 वर्षों” लिखा है; अंग्रेज़ी संस्करण 1600 से 1800 बताता है।

तीन नमूना परीक्षा-पत्र

हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खंडों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1मुग़ल काल के भारतीय–फ़ारसी स्रोत किसान के लिए आमतौर पर कौन-से शब्द इस्तेमाल करते थे?1
2रिक्त स्थान भरिए: मुग़ल काल में खेती मौसम के दो मुख्य चक्रों के दौरान होती थी: ______ (पतझड़ में) और ______ (वसंत में)।1
3सही या ग़लत: आइन–ए–अकबरी उत्तर भारत की फ़सलों की सूची में तम्बाकू का ज़िक्र करती है।1
4सोलहवीं–सत्रहवीं सदी के कृषि इतिहास के लिए आइन–ए–अकबरी के अलावा किन स्रोतों का इस्तेमाल किया जा सकता है?2
5मुग़ल काल में भीलों का साल भर का काम मौसम के मुताबिक कैसे बँटा हुआ था?2
6सोलहवीं–सत्रहवीं सदी में कृषि उत्पादन को किस हद तक महज़ गुज़ारे के लिए खेती कह सकते हैं?3
7कृषि इतिहास लिखने के लिए आइन–ए–अकबरी को स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने में कौन-सी समस्याएँ हैं? इतिहासकार इनसे कैसे निपटते हैं?5
8मुग़ल भारत में ज़मींदारों की भूमिका की जाँच कीजिए।5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1मुग़ल भारत में ज़मींदारों की विस्तृत व्यक्तिगत ज़मीन, जिस पर उनके निजी इस्तेमाल के लिए खेती होती थी, क्या कहलाती थी?1
2रिक्त स्थान भरिए: मुग़ल राज्य के लिए जंगल बदमाशों को शरण देने वाला अड्डा था, जिसे ______ कहा गया है।1
3सही या ग़लत: भारत में चाँदी के अपने प्राकृतिक संसाधन थे, इसलिए सोलहवीं से अठारहवीं सदी के बीच यहाँ चाँदी के रुपयों की उपलब्धि स्थिर बनी रही।1
4मुग़ल काल में गाँव की पंचायत कौन-से दंड दे सकती थी, और उनका मकसद क्या था?2
5आइन के अनुसार मुग़ल भारत में ज़मींदारों की मिली–जुली सैनिक शक्ति कितनी थी?2
6कृषि उत्पादन में महिलाओं की भूमिका का विवरण दीजिए।3
7मुग़ल काल के कृषि समाज में सामाजिक व आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने में जाति किस हद तक एक कारक थी?5
8सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में जंगल वासियों की ज़िंदगी किस तरह बदल गई?5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1मुग़ल भू–राजस्व व्यवस्था में जमा और हासिल का क्या अर्थ था?1
2अबुल फ़ज़्ल की आइन–ए–अकबरी कब पूरी हुई?1
3रिक्त स्थान भरिए: मुग़ल राज्य में पूरे राज्य की वित्तीय व्यवस्था की देख–रेख की ज़िम्मेदारी ______ के दफ़्तर पर थी।1
4सही या ग़लत: जजमानी शब्द सोलहवीं व सत्रहवीं सदी में बहुत इस्तेमाल होता था।1
5सत्रहवीं सदी में वाणिज्यिक खेती और व्यापार का असर जंगलवासियों पर कैसे पड़ा? दो उदाहरण दीजिए।2
6अकबर ने अमील–गुज़ार (राजस्व वसूली करने वाले) को भुगतान के तरीके के बारे में क्या हुक्म दिया?2
7उन सबूतों की जाँच कीजिए जो बताते हैं कि मुग़ल राजकोषीय व्यवस्था के लिए भू–राजस्व बहुत महत्त्वपूर्ण था।3
8स्रोत 6 (नक़द या जीन्स?) के अंश पढ़कर खंड छ के प्रश्न 3 के तीनों भागों के उत्तर दीजिए।4
9पंचायत और गाँव का मुखिया किस तरह से ग्रामीण समाज का नियमन करते थे? विवेचना कीजिए।5