अध्याय 5 — उपभोक्ता अधिकार · आर्थिक विकास की समझ · कक्षा 10
कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 75 से 89
यह पन्ना किसलिए — स्लाइड शो कक्षा में चलाने से पहले एक बार पढ़ लेने के लिए। यहाँ सारी स्लाइड एक के नीचे एक हैं। उद्धरण-चिह्नों के भीतर सिर्फ़ किताब के शब्द हैं, और स्लाइड के ऊपर किताब का पृष्ठ लिखा है। जो बात हमारी है, उसके आगे “हमारी ओर से” लिखा है। प्रोजेक्टर न हो, तो यही पन्ना हाथ में रखकर बोर्ड से पढ़ाइए; हर स्लाइड की बात पाठ योजना के बोर्ड-कार्य में भी है।
बच्चों की आम भूलें शिक्षक संदर्शिका में हैं, और अध्याय की सारी तालिकाएँ रिवीजन नोट्स में। बच्चे ख़ुद पढ़ें, तो उन्हें इंटरैक्टिव अध्याय दीजिए।
कौन-सी स्लाइड किस कालांश में — पाठ योजना के हिसाब से:
- कालांश 1 — शुरू की तीन स्लाइड, फिर बाज़ार में उपभोक्ता
- कालांश 2 — उपभोक्ता आंदोलन
- कालांश 3 — सुरक्षा सबका अधिकार है (रेजी)
- कालांश 4 — वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी (अमृता)
- कालांश 5 — चयन के अधिकार का उल्लंघन (अबिरामी)
- कालांश 6 — न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए (प्रकाश)
- कालांश 7 — प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र
- कालांश 8 — जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें
- कालांश 9 — उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में
- कालांश 10 — प्रश्नावली, परियोजना और समापन
पहले यह पढ़िए — अध्याय का पहला चित्र
पृष्ठ 75
हमारी ओर से: चित्र में एक आदमी ऑपरेशन की मेज़ पर लेटा है और चारों ओर लोग उसे चीज़ें थमा रहे हैं। यह चित्र बाज़ार के बारे में क्या कहता है?
किताब पृष्ठ 75 के इस चित्र में लेटे आदमी की ओर पैसा, मकान, कार, कंप्यूटर और मशीन जैसी चीज़ें बढ़ाई जा रही हैं। चित्र किताब में ही दिखाइए। बच्चों के उत्तर बोर्ड के कोने में लिख लीजिए; अभी जाँचने नहीं हैं।
मान लीजिए आप दुकान से एक पैकेट लाए और घर आकर पता चला कि सामान ख़राब है, या कम तौला गया है। दुकानदार कहता है, “कहीं और जाइए”। आप क्या करेंगे? पर्ची पर लिखिए, नाम मत लिखिए।
अध्याय का नक्शा
पृष्ठ 75 से 89 · पढ़ाने का क्रम हमारी ओर से
- पहले बाज़ार: अकेला ग्राहक कमज़ोर क्यों पड़ता है, और उपभोक्ता आंदोलन क्यों उठा
- फिर अधिकार, एक-एक मामले से: रेजी, अमृता, अबिरामी और प्रकाश
- फिर रास्ता: उपभोक्ता संरक्षण परिषद्, निवासी कल्याण संघ और तीन स्तर के आयोग
- आख़िर में आप: जागरूक उपभोक्ता, गुणवत्ता के चिह्न, और आंदोलन की प्रगति और कमियाँ
हमारी ओर से: पहले दिन की पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में सँभालकर रखिए। आख़िरी कालांश में वे फिर काम आएँगी। कालांश 3 से दीवार पर अधिकार-चार्ट भी बनेगा; उसकी हर पंक्ति इन्हीं स्लाइडों में है।
1 | बाज़ार में उपभोक्ता
आप बाज़ार में किस-किस रूप में जाते हैं? कभी कुछ बेचने, कभी कुछ ख़रीदने?
बाज़ार में हम दो रूपों में
“बाज़ार में हमारी भागीदारी उत्पादक और उपभोक्ता दोनों रूपों में होती है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 76
नियम क्यों चाहिए
“बाज़ार में भी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियमों की आवश्यकता होती है, क्योंकि अकेला उपभोक्ता प्राय: स्वयं को कमजोर स्थिति में पाता है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 76
बाज़ार में शोषण के रूप
पृष्ठ 76–77
| कौन | किताब का उदाहरण |
|---|---|
| दुकानदार | उचित वज़न से कम तौलना |
| व्यापारी | ऐसे शुल्क जोड़ देना, जिनका वर्णन पहले न किया गया हो |
| विक्रेता | मिलावटी या दोषपूर्ण वस्तुएँ बेचना |
| बड़ी कंपनी | शिशुओं के दूध के पाउडर को सर्वाधिक वैज्ञानिक उत्पाद बताकर कई वर्षों तक बेचना; बाद में मानना पड़ा कि दावे झूठे थे |
| सिगरेट कंपनियाँ | यह मनवाने के लिए कि उनका उत्पाद कैंसर का कारण हो सकता है, न्यायालय में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी |
शिकायत होने पर विक्रेता सारा उत्तरदायित्व क्रेता पर डालने की कोशिश करता है, और किताब उसका जवाब यूँ लिखती है: “आपने जो खरीदा है अगर वह पसंद नहीं है तो कहीं और जाइए।” बोर्ड पर यही वाक्य लिखिए; पूरे अध्याय में यही सवाल लौटेगा कि इसके बाद ग्राहक क्या करे।
2 | उपभोक्ता आंदोलन
अगर कोई कानून ही न हो, तो ठगा गया ग्राहक क्या कर सकता है?
पहले क्या था
“बाज़ार में उपभोक्ता को शोषण से बचाने के लिए कोई कानूनी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 77
सावधानी किसकी, यह सोच कैसे बदली
पृष्ठ 77
- लंबे समय तक नाराज़ ग्राहक बस उस ब्रांड का सामान या उस दुकान से ख़रीदना बंद कर देता था
- माना जाता था कि ख़रीदते वक़्त सावधानी बरतना उपभोक्ता की ही ज़िम्मेदारी है
- संस्थाओं को लोगों में जागरूकता लाने में कई वर्ष लगे
- इसने गुणवत्ता सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी विक्रेताओं पर भी डाल दी
यानी आंदोलन ने ग्राहक को अकेला नहीं छोड़ा। बच्चों से पूछिए कि उनके घर में आज भी कौन-सी बात ख़रीदने वाले की ही ग़लती मानी जाती है।
आंदोलन, साल-दर-साल
पृष्ठ 77–78
| कब | किताब में |
|---|---|
| 1960 का दशक | अत्यधिक खाद्य कमी, जमाखोरी, कालाबाज़ारी और खाद्य तेल में मिलावट से आंदोलन व्यवस्थित रूप में उठा |
| 1970 का दशक | उपभोक्ता संस्थाएँ उपभोक्ता अधिकार पर आलेख लिखने और प्रदर्शनी लगाने लगीं; सड़क यात्री परिवहन और राशन दुकानों पर नज़र रखने के लिए उपभोक्ता दल बने |
| 1985 | संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश अपनाए |
| 1986 | भारत सरकार ने उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 बनाया, जिसे कोपरा कहते हैं |
| 2019 | कोपरा में संशोधन |
किताब यह भी बताती है कि आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 100 से भी अधिक देशों के 200 संस्थाओं की संरक्षक संस्था है। प्रश्नावली के प्रश्न 12 में यही नाम आएगा।
3 | सुरक्षा सबका अधिकार है
प्रेशर कुकर का सेफ़्टी वाल्व ख़राब निकले, तो क्या हो सकता है? ऐसी चीज़ें बेचने से पहले किसे जाँचना चाहिए?
रेजी का मामला
पृष्ठ 79
| बात | किताब में |
|---|---|
| कौन | रेजी मेथ्यू, कक्षा 9 का एक स्वस्थ लड़का |
| कहाँ | केरल का एक निजी चिकित्सालय, टॉन्सिल निकलवाने के लिए |
| क्या हुआ | अनुचित बेहोशी के कारण दिमागी असामान्यता के लक्षण आ गए; वह जिंदगी भर के लिए अपंग हो गया |
| दावा | पिता ने राज्य आयोग में 5,00,000 के मुआवज़े का दावा किया |
| राज्य आयोग | सबूत पर्याप्त नहीं, कहकर मामला खारिज किया |
| राष्ट्रीय आयोग (दिल्ली) | अस्पताल को लापरवाही का दोषी माना और हर्जाना देने का निर्देश दिया |
किताब पृष्ठ 79 पर “समिति” छपा है; सही नाम “उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग” है। अधिकार-चार्ट की पहली पंक्ति आज लिखिए: सुरक्षा | रेजी | लापरवाही का दोषी, हर्जाने का निर्देश।
नियम हैं, पर
“इन नियमों का पर्यवेक्षण उचित रूप से नहीं हो रहा है और उपभोक्ता आंदोलन भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 79
4 | वस्तुओं और सेवाओं के बारे में जानकारी
बिस्कुट के किसी पैकेट पर आपने क्या-क्या लिखा देखा है? याद से गिनिए।
पैकेट पर क्या छपा होता है
पृष्ठ 80
- अवयव, मूल्य, बैच संख्या
- निर्माण की तारीख और ख़राब होने की अंतिम तिथि
- वस्तु बनाने वाले का पता
- दवा पर उचित प्रयोग के निर्देश, और कपड़ों पर धुलाई संबंधी निर्देश
ये जानकारियाँ देनी क्यों पड़ती हैं? क्योंकि उपभोक्ता को सूचना पाने का अधिकार है, और तभी वह खराबी पर शिकायत कर सकता है। किताब यह भी बताती है कि उपभोक्ता अधिकतम खुदरा मूल्य से कम दाम के लिए मोल-भाव कर सकता है। खाली पैकेट कक्षा में लाइए और बच्चों से यही चीज़ें ढुँढवाइए।
सूचना पाने का अधिकार और अमृता
पृष्ठ 80–81
| बात | किताब में |
|---|---|
| कानून | सन् 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने सूचना पाने का अधिकार कानून (राइट टू इनफॉरमेशन) लागू किया |
| अमृता | इंजीनियरिंग स्नातक; प्रमाणपत्र जमा किए, इंटरव्यू दिया, पर सरकारी विभाग से कोई रिजल्ट नहीं मिला |
| रुकावट | कर्मचारियों ने उसके प्रश्नों का उत्तर देने से इनकार किया |
| उसने क्या किया | इसी कानून के तहत प्रार्थना-पत्र दिया |
| नतीजा | देरी के कारण बताए गए, और नियुक्ति के लिए बुलावे का पत्र मिला, क्योंकि उसने इंटरव्यू अच्छा दिया था |
अधिकार-चार्ट की दूसरी पंक्ति: सूचना | अमृता | देरी के कारण बताए गए, बुलावे का पत्र मिला।
5 | चयन के अधिकार का उल्लंघन
दुकानदार कहे कि टूथपेस्ट तभी मिलेगा जब साथ में ब्रश भी लेंगे, और आपको ब्रश नहीं चाहिए। तब क्या?
अबिरामी का मामला
पृष्ठ 81
| कदम | किताब में |
|---|---|
| दाख़िला | एक क्षेत्रीय कोचिंग संस्थान का दो वर्षीय पाठ्यक्रम; पूरे दो वर्ष के लिए करीब 61,020 रुपये जमा |
| परेशानी | पढ़ाई का स्तर ठीक नहीं लगा, साल के अंत में पाठ्यक्रम छोड़ने का निश्चय; एक साल का पैसा माँगा तो मना कर दिया गया |
| ज़िला आयोग | 28,000 रुपये लौटाने का आदेश, क्योंकि छात्रा को चुनने का अधिकार है |
| राज्य आयोग | संस्थान की अपील पर ज़िला आयोग का निर्देश बना रहा; बेकार की अपील के लिए 25,000 का दंड, और 7,000 रुपये मुआवज़े और याचिका खर्च के |
| आगे के लिए | राज्य आयोग ने संस्थानों को पूरे साल की फीस एडवांस में लेने से मना किया |
हमारी ओर से: बच्चों को दिखाइए कि अपील उपभोक्ता ही नहीं, विक्रेता भी कर सकता है। अधिकार-चार्ट की तीसरी पंक्ति: चयन | अबिरामी | पैसा लौटाने का आदेश, अपील पर दंड।
चयन का अधिकार, रोज़ की ज़िंदगी में
पृष्ठ 81
- दंतमंजन के साथ ब्रश ख़रीदने को मजबूर करना
- नया गैस कनेक्शन देते समय साथ में चूल्हा लेने का दबाव
किताब के अनुसार सेवा लेने वाले हर उपभोक्ता को, चाहे वह किसी भी आयु या लिंग का हो, चुनने का अधिकार है। ऐसा दबाव इसी अधिकार का उल्लंघन है।
6 | न्याय पाने के लिए कहाँ जाना चाहिए
“पैकेट के भीतर एक सोने का सिक्का।” ऐसा विज्ञापन देखकर आप सबसे पहले क्या पूछेंगे?
किताब के छह विज्ञापन
पृष्ठ 82
- हर 500 ग्राम के पैक पर 15 ग्राम की अतिरिक्त छूट
- अख़बार के ग्राहक बनिए, साल के अंत में उपहार
- खुरचिए और 10 लाख तक का इनाम
- 500 ग्राम ग्लूकोज़ के डिब्बे के भीतर एक दूध का चॉकलेट
- पैकेट के भीतर एक सोने का सिक्का
- 2000 रुपये तक का जूता ख़रीदिए, 500 रुपये तक का एक जोड़ी मुफ़्त
हमारी ओर से: हर विज्ञापन पर बच्चे पूछें कि पूरी शर्त कहाँ लिखी है और वादा पूरा न हो तो शिकायत किससे होगी। परखने के तीन सवाल पाठ योजना के कालांश 6 में हैं।
निवारण का अधिकार
“यदि एक उपभोक्ता को कोई क्षति पहुँचाई जाती है, तो क्षति की मात्रा के आधार पर उसे क्षतिपूर्ति पाने का अधिकार होता है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 82
प्रकाश का मामला, और शिकायत के तरीके
पृष्ठ 82–83
| बात | किताब में |
|---|---|
| प्रकाश | बेटी की शादी के लिए गाँव मनीऑर्डर भेजा; पैसे ज़रूरत के समय नहीं पहुँचे, महीनों बाद भी नहीं |
| कहाँ गए | नयी दिल्ली के ज़िला स्तर के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मुकदमा दर्ज किया |
| वकील | शिकायत वकील के साथ भी हो सकती है और वकील की सेवा के बिना भी |
| आजकल | अकेले या समूह में (क्लास एक्शन सूट), ख़ुद जाकर या इंटरनेट से शिकायत; वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई |
प्रकाश के कदम किताब के चित्रों में क्रम से हैं; उन्हें किताब में ही दिखाइए, और क्रम पाठ योजना के बोर्ड-कार्य से लीजिए। अधिकार-चार्ट की चौथी पंक्ति: निवारण | प्रकाश | ज़िला आयोग में मुकदमा।
7 | प्रतिनिधित्व का अधिकार और त्रिस्तरीय न्यायिक तंत्र
आपके मोहल्ले में किसी के साथ धोखा हो, पर वह अकेला अदालत जाने से डरे, तो उसकी ओर से कौन बोल सकता है?
उपभोक्ता की ओर से कौन
पृष्ठ 84
- उपभोक्ता अदालत या उपभोक्ता संरक्षण परिषद् कहलाने वाले संगठन: बताते हैं कि उपभोक्ता अदालत में मुकदमा कैसे दर्ज कराएँ
- निवासी कल्याण संघ: किसी सदस्य के साथ अनुचित व्यावसायिक कार्रवाई हो, तो उसकी तरफ़ से मामला देखता है
हमारी ओर से: परिषद् रास्ता बताती है; फ़ैसला आयोग करता है। यह फ़र्क अगली स्लाइड से पहले बोर्ड पर लिख दीजिए।
तीन स्तर के आयोग, किताब के अनुसार
पृष्ठ 84
| स्तर | किन दावों के मुकदमे |
|---|---|
| ज़िला आयोग | 1 करोड़ तक |
| राज्य आयोग | 1 करोड़ से 10 करोड़ तक |
| राष्ट्रीय आयोग | 10 करोड़ से ऊपर |
मुकदमा ज़िला आयोग में खारिज हो, तो उपभोक्ता राज्य आयोग में और उसके बाद राष्ट्रीय आयोग में अपील कर सकता है। कक्षा में किताब की सीमाएँ ही बोलिए; आज के नियम बच्चे पूछें, तो संवर्धन वाला पन्ना देखिए।
प्रतिनिधित्व का अधिकार
“इस प्रकार, अधिनियम ने उपभोक्ता के रूप में उपभोक्ता न्यायालय में प्रतिनिधित्व का अधिकार देकर हमें समर्थ बनाया है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 84
अरिता के आठ कदम
पृष्ठ 84 · गतिविधि
- किताब अरिता की शिकायत के आठ कदम उलटे-पुलटे देती है, (क) से (ज) तक
- सही क्रम: (छ), (ग), (ड.), (ख), (क), (च), (घ), (ज)
कदमों की पर्चियाँ और उनके वाक्य पाठ योजना के कालांश 7 में हैं। समूह पहले ख़ुद क्रम लगाएँ, फिर यह स्लाइड खोलिए। अधिकार-चार्ट की पाँचवीं पंक्ति: प्रतिनिधित्व | परिषद्, अरिता और तीन स्तर के आयोग | उपभोक्ता की ओर से कोई बोल सकता है, और अपील हो सकती है।
8 | जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए आवश्यक बातें
शहद की बोतल ख़रीदते समय आप उस पर कौन-सा चिह्न ढूँढेंगे?
जागरूक उपभोक्ता
“एक जागरूक उपभोक्ता बनने के लिए निपुणता और ज्ञान प्राप्त करने की जरूरत होती है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 84
सरकार लोगों तक बात कैसे पहुँचाती है
पृष्ठ 85
- कोपरा ने केंद्र और राज्य सरकारों में उपभोक्ता मामलों के अलग विभाग बनवाने में मुख्य भूमिका निभाई
- किताब के सरकारी विज्ञापन इसी का उदाहरण हैं; ऐसे विज्ञापन टेलीविज़न चैनलों पर भी आते हैं
यही उपभोक्ता शिक्षा है। अधिकार-चार्ट की छठी पंक्ति: उपभोक्ता शिक्षा | पृष्ठ 84–85 के सरकारी विज्ञापन | लोगों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी। पोस्टर पर छपा समय और वेबसाइट आज वाले नहीं हैं; हेल्पलाइन की आज की जानकारी संवर्धन वाले पन्ने पर है।
गुणवत्ता के चिह्न
पृष्ठ 85
| बात | किताब में |
|---|---|
| कौन-से चिह्न | आई.एस.आई., एगमार्क, हॉलमार्क |
| ये क्या करते हैं | ख़रीदते समय अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित कराने में मदद |
| हर उत्पाद पर ज़रूरी? | नहीं; सभी उत्पादकों के लिए इन मानदंडों का पालन ज़रूरी नहीं |
| किन पर अनिवार्य | सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले उत्पाद, जैसे एल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट, बोतलबंद पेयजल |
किताब के शब्दों में: “सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता।” इसीलिए चिह्न देखना ग्राहक का काम है। प्रश्नावली का प्रश्न 7 (शहद और बिस्कुट) इसी स्लाइड से हल होगा।
छह अधिकार, छह मामले
पृष्ठ 79 से 86 · मामलों की जोड़ी हमारी ओर से
| अधिकार | अध्याय का मामला |
|---|---|
| सुरक्षा | रेजी |
| सूचना | अमृता |
| चयन | अबिरामी |
| निवारण | प्रकाश |
| प्रतिनिधित्व | परिषद्, निवासी कल्याण संघ, अरिता |
| उपभोक्ता शिक्षा | सरकारी विज्ञापन |
पृष्ठ 86 की गतिविधि में किताब यही छह अधिकार गिनाती है और छह छोटे मामले देती है। बच्चे हर मामले को एक अधिकार से जोड़ें; उत्तर पाठ योजना के कालांश 8 में हैं। अब अधिकार-चार्ट पूरा है।
9 | उपभोक्ता आंदोलन को आगे बढ़ाने के संबंध में
आपने कभी किसी दुकान से रसीद माँगी है? न मिले तो बाद में शिकायत कैसे साबित करेंगे?
आंदोलन ने क्या पाया
पृष्ठ 86–87
| बात | किताब में |
|---|---|
| 24 दिसंबर | राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस; 1986 में इसी दिन संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया |
| विशिष्ट न्यायालय | भारत उन देशों में है, जहाँ उपभोक्ता समस्याओं के निवारण के लिए विशिष्ट न्यायालय हैं |
| संगठन | 2000 से अधिक उपभोक्ता संगठन, जिनमें केवल 50–60 पूर्ण संगठित और मान्यता प्राप्त |
| 2019 का संशोधन | इंटरनेट से ख़रीद भी शामिल; सेवा में कमी या दोषपूर्ण उत्पाद पर सेवा प्रदाता और निर्माता ज़िम्मेदार, जेल तक हो सकती है; तीनों स्तरों पर तटस्थ मध्यस्थ से निपटारे को बढ़ावा |
प्रश्नावली का प्रश्न 11 (प्रगति की समीक्षा) इसी तालिका और अगली स्लाइड से हल होगा।
फिर भी
“फिर भी, उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समय साध्य साबित हो रही है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 86
प्रक्रिया अब भी कठिन क्यों
पृष्ठ 86–87
- कई बार वकीलों का सहारा लेना पड़ता है, और मुकदमे काफ़ी समय लेते हैं
- अधिकांश ख़रीद पर रसीद नहीं मिलती, तो प्रमाण जुटाना आसान नहीं
- बाज़ार की अधिकांश ख़रीद छोटी फुटकर दुकानों से होती है
- भारत में उपभोक्ता ज्ञान बहुत धीरे-धीरे फैल रहा है; श्रमिकों के हितों की रक्षा के कानून भी, खास तौर से असंगठित क्षेत्र में, कमज़ोर हैं
हमारी ओर से: बच्चों से पूछिए कि इनमें से कौन-सी कमी वे ख़ुद कल से कम कर सकते हैं। सबसे आसान उत्तर रसीद माँगना है।
10 | प्रश्नावली, परियोजना और समापन
पूरा अध्याय, एक नज़र में
पृष्ठ 75 से 87 · सार हमारी ओर से
| कालांश | मुख्य बात |
|---|---|
| 1 | बाज़ार में हम उत्पादक भी हैं और उपभोक्ता भी; अकेला उपभोक्ता कमज़ोर पड़ता है, इसलिए नियम चाहिए |
| 2 | 1960 के दशक में आंदोलन उठा; 1986 में कोपरा बना |
| 3 | सुरक्षा का अधिकार: रेजी |
| 4 | सूचना पाने का अधिकार: पैकेट की जानकारी और अमृता |
| 5 | चुनने का अधिकार: अबिरामी, और ज़बरदस्ती के साथ वाले सामान |
| 6 | क्षतिपूर्ति निवारण का अधिकार: प्रकाश |
| 7 | प्रतिनिधित्व का अधिकार: परिषद् और तीन स्तर के आयोग |
| 8 | जागरूक उपभोक्ता: गुणवत्ता के चिह्न और उपभोक्ता शिक्षा |
| 9 | आंदोलन की प्रगति भी है और कमियाँ भी |
अब किताब की प्रश्नावली: प्रश्न 12 की जोड़ियाँ और प्रश्न 13 के सही-गलत, जोड़ियों में।
सुमेल और सही-गलत: सही उत्तर
पृष्ठ 87–88 · प्रश्नावली, प्रश्न 12 और 13 · कारण हमारी ओर से
| भाग | सही उत्तर | किताब से कारण |
|---|---|---|
| 12 (1) घटकों का विवरण | (ङ) सूचना का अधिकार | पैकेट की जानकारी सूचना के अधिकार से आती है |
| 12 (2) एगमार्क | (ग) अनाजों और खाद्य तेल का प्रमाण | एगमार्क गुणवत्ता का शब्दचिह्न है |
| 12 (3) स्कूटर में खराब इंजन से दुर्घटना | (क) सुरक्षा का अधिकार | जान को ख़तरे वाली वस्तु से बचाव |
| 12 (4) ज़िला उपभोक्ता आयोग | (ख) उपभोक्ता मामलों में संबंध | ज़िला आयोग उपभोक्ता विवादों के मुकदमे सुनता है |
| 12 (5) फूड फोर्टिफिकेशन | (छ) खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना | फोर्टिफिकेशन का यही अर्थ है |
| 12 (6) उपभोक्ता इंटरनेशनल | (घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था | 100 से अधिक देशों के 200 संस्थाओं की संरक्षक संस्था |
| 12 (7) भारतीय मानक ब्यूरो | (च) वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक विकसित करने वाली एजेंसी | ऐसे संगठन उत्पादों के लिए गुणवत्ता का मानदंड विकसित करते हैं |
| 13 (क) | गलत | रेजी, अबिरामी और प्रकाश के मामले सेवाओं के हैं |
| 13 (ख) | सही | भारत में उपभोक्ता समस्याओं के लिए विशिष्ट न्यायालय हैं |
| 13 (ग) | गलत | मुकदमा दावे की रक़म के हिसाब से ज़िला, राज्य या राष्ट्रीय आयोग में जाता है |
| 13 (घ) | गलत | छोटे दावे भी ज़िला आयोग सुनता है, 1 करोड़ तक |
| 13 (ड.) | सही | हॉलमार्क गुणवत्ता के शब्दचिह्नों में है |
| 13 (च) | गलत | किताब के अनुसार प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समय साध्य है |
| 13 (छ) | सही | क्षतिपूर्ति क्षति की मात्रा के आधार पर मिलती है |
(च) “वस्तुओं और सेवाओं के लिए मानक” का मेल भारतीय मानक ब्यूरो से है; इसके बाकी शब्द “विकसित करने वाली एजेंसी” किताब में बाएँ खाने में (4) के नीचे छपे हैं।
किताब की परियोजनाएँ और प्रश्नावली
पृष्ठ 88–89
- पृष्ठ 88 पर छह अतिरिक्त परियोजनाएँ और कार्यकलाप हैं; उन्हें बाँटने का तरीका पाठ योजना के प्रोजेक्ट और गतिविधि वाले भाग में है
- पृष्ठ 89 की 17 सवालों वाली प्रश्नावली हर बच्चा ख़ुद भरे
- किताब की टिप्पणी: प्रश्न 5, 12, 13, 15 और 16 में उत्तर ‘ग’ और बाकी में ‘क’ हो, तो बच्चा पूरी तरह जागरूक है; इसका उलटा हो, तो उसे जागरूक होने की ज़रूरत है; सब में ‘ख’ हो, तो वह आंशिक रूप से जागरूक है
प्रश्नावली के उत्तर किसी से पूछिए मत, न बोर्ड पर लिखिए। यह बच्चे की अपनी जाँच है।
और अब पहले दिन की पर्चियाँ
पहले कालांश की पर्चियाँ, अध्याय के बाद
हमारी ओर से: पहले दिन आपने ख़राब पैकेट पर जो कदम लिखे थे, उनमें अब क्या जुड़ेगा: रसीद, शिकायत, परिषद्, या आयोग?
पर्चियों पर नाम नहीं हैं; किसी बच्चे से मत पूछिए कि कौन-सी पर्ची उसकी है। देखिए कि अब बच्चे “कहीं और जाइए” सुनकर लौट आने की बात करते हैं, या रसीद, शिकायत और आयोग की।
अध्याय का बड़ा विचार
“यह अक्सर कहा जाता है कि उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है। इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी से युक्त संघर्ष की जरूरत है।”
पाठ्यपुस्तक, पृष्ठ 87

