यह पन्ना उनके लिए है जो घर पर बारहवीं के बच्चे के साथ बैठते हैं। इतिहास आपको याद हो, यह ज़रूरी नहीं: हर सवाल के आगे लिखा है कि जवाब में क्या आना चाहिए।
बारहवीं के बच्चे से सवाल-जवाब करके परखने से ज़्यादा काम आता है उससे समझवाना। उससे कहिए कि आपने यह अध्याय नहीं पढ़ा है, वह आपको समझाए। समझाते समय बच्चे को ख़ुद पता चल जाता है कि कौन-सी बात पक्की है और कौन-सी कच्ची।
किताब की अपनी पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ संख्या के साथ दी हैं। पृष्ठ संख्याएँ NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय (कक्षा 12, पुस्तक 2) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
1. इस अध्याय में क्या है
यह अध्याय लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक के विजयनगर साम्राज्य और उसकी राजधानी की बात करता है। साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था। 1565 में राजधानी पर आक्रमण हुआ, उसे लूटा गया और कुछ ही वर्षों में वह उजड़ गई (पृष्ठ 170, 173)।
इस अध्याय के स्रोत खंडहर हैं: इमारतों के अवशेष, उनके नक्शे और रेखाचित्र, छाया चित्र, अभिलेख, विदेशी यात्रियों के वृत्तांत और साहित्य। किताब दिखाती है कि इतिहासकार और पुरातत्त्वविद इन्हें जोड़कर शहर को कैसे पढ़ते हैं, और किन सवालों के जवाब इमारतें अकेले नहीं देतीं।
यहाँ राजनीति को राजनीति की तरह पढ़ना है: कौन किसका प्रतिद्वंद्वी था, किसने किससे क्या सीखा, और सत्ता कैसे चलती थी। बच्चे को किसी धर्म, शासक या समुदाय को बड़ा या छोटा नहीं बताना है। हर सवाल का जवाब किताब के स्रोत से आना चाहिए।
किताब यह बात इन हिस्सों में समझाती है:
| हिस्सा | किताब क्या बताती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| 1. हम्पी की खोज | कॉलिन मैकेन्ज़ी का 1800 का सर्वेक्षण, अभिलेख और छाया चित्र, और पुरोहितों की स्मृतियाँ | 170–171 |
| 2. राय, नायक तथा सुलतान | साम्राज्य की स्थापना, घोड़ों का व्यापार, चार राजवंश, कृष्णदेव राय, 1565 का युद्ध, और अमर–नायक प्रणाली | 171–175 |
| 3. राजधानी तथा उसके परिप्रदेश | शहर का रूप, पानी का प्रबंध, क़िलेबंदी और सड़कें, और शहरी केंद्र | 176–179 |
| 4. राजकीय केंद्र | महानवमी डिब्बा, कमल महल और हज़ार राम मन्दिर | 179–183 |
| 5. धार्मिक केंद्र | राजधानी का चयन, विरुपाक्ष मन्दिर, गोपुरम् और मण्डप, विट्ठल मन्दिर और रथ गलियाँ | 184–188 |
| 6. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन | पूरे क्षेत्र को वर्गों में बाँटकर नक्शे, और बाज़ारों के अवशेष | 188–190 |
| 7. उत्तरों की खोज में प्रश्न | इमारतें क्या बताती हैं और क्या नहीं | 191–192 |
| काल-रेखा और प्रश्न | दो काल-रेखाएँ, और बारह प्रश्न | 193–195 |
2. बच्चे से समझिए: दस सवाल
एक दिन में दो-तीन सवाल काफ़ी हैं। बच्चा अपने शब्दों में बताए, तो भी ठीक है; बस नीचे लिखी बातें उसके जवाब में आ जाएँ।
| सवाल | जवाब में यह आना चाहिए | पृष्ठ |
|---|---|---|
| हम्पी के खंडहरों के बारे में हमें कैसे पता चला? | 1800 में कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेष प्रकाश में लाए और पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया; उनकी शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी। फिर 1836 से अभिलेख इकट्ठे हुए, 1856 से छाया चित्र, 1876 से मंदिरों की दीवारों के अभिलेखों का प्रलेखन और 1902 से संरक्षण। 1986 में यूनेस्को ने हम्पी को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया। | 170, 193 |
| विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने की, और उस साल के बारे में किताब क्या सावधानी रखती है? | परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार 1336 में दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने। पृष्ठ 193 की काल-रेखा में तिथि 1336? लिखी है; प्रश्नचिह्न का मतलब है कि तिथि अनिश्चित है। समकालीन लोग इसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहते थे; “विजयनगर साम्राज्य” इतिहासकारों का शब्द है। | 171, 193 |
| घोड़ों का व्यापार राजा के लिए क्यों ज़रूरी था? | उस समय की युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए अरब और मध्य एशिया से घोड़े मँगाने पड़ते थे। व्यापार प्रतिष्ठा का मानक था और उसका राजस्व राज्य की समृद्धि बढ़ाता था। स्रोत 2 में कृष्णदेव राय व्यापारियों को अपने साथ जोड़ने की बात करते हैं, ताकि ये वस्तुएँ दुश्मनों तक न पहुँचें। | 172–173 |
| विजयनगर के चार राजवंश कौन-से थे, और कृष्णदेव राय किस वंश के थे? | संगम, सुलुव, तुलुव और अराविदु। कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे; उनका शासनकाल 1509–29 था। सुलुव सैनिक कमांडर थे, जिन्होंने संगम वंश को उखाड़ फेंका। | 173 |
| 1565 में क्या हुआ? | दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर के विरुद्ध मैत्री–समझौता किया। प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में विजयनगर की सेना राक्षसी–तांगड़ी (जिसे तालीकोटा भी कहते हैं) के युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं से हारी, और विजयी सेनाओं ने शहर लूटा। किताब के अनुसार रामराय ने एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने की कोशिश की, पर सुल्तानों ने मिलकर उन्हें निर्णायक रूप से हराया। किताब इसे कहती है: “यह रामराय की जोखिम भरी नीति थी”। | 173–174 |
| नायक और अमर–नायक कौन थे? | नायक: सेना प्रमुख, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे। अमर–नायक: सैनिक कमांडर, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे। वे किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से कर वसूलते थे और उससे घोड़ों और हाथियों का निर्धारित दल रखते, तथा मन्दिरों और सिंचाई के साधनों का रख-रखाव करते थे। | 175 |
| शहर के पानी का प्रबंध कैसे होता था? क़िलेबंदी के भीतर खेत क्यों थे? | विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में था, इसलिए लगभग सभी धाराओं पर बाँध बनाकर हौज़ बनाए गए; कमलपुरम् जलाशय और हिरिया नहर इसके उदाहरण हैं। क़िलेबंदी ने खेत भी घेरे थे, ताकि घेराबंदी में भोजन न कटे; किताब इसे “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” कहती है। | 177–178 |
| राजकीय केंद्र और धार्मिक केंद्र क्या हैं, और शहर में कहाँ थे? | राजकीय केंद्र बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में था: लगभग तीस संरचनाएँ महल के रूप में पहचानी गई हैं, और 60 से भी अधिक मन्दिर भी थे। धार्मिक केंद्र तुंगभद्रा नदी के किनारे का चट्टानी उत्तरी भाग था, जहाँ विरुपाक्ष और पम्पादेवी के मन्दिर हैं। | 179, 184 |
| महानवमी डिब्बा क्या है, और उस पर क्या होता था? | राजकीय केंद्र में शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना विशाल मंच। उससे जुड़े अनुष्ठान संभवत: सितंबर–अक्टूबर में मनाए जाने वाले दस दिन के हिंदू त्योहार महानवमी के अवसर पर किए जाते थे। शासक अपने रुतबे, ताक़त और अधिराज्य का प्रदर्शन करते थे: पूजा, नृत्य, कुश्ती, शोभायात्रा, नायकों की भेंट और अंतिम दिन सेना का निरीक्षण। किताब कहती है: “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।” | 180–181 |
| इमारतें हमें क्या नहीं बतातीं? | सामान्य स्त्री, पुरुष और बच्चे इन इमारतों के बारे में क्या सोचते थे, और क्या वे शाही या धार्मिक केंद्र के हर भाग में जा सकते थे। यह भी कि नक्शे किसने बनाए, राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आए और उन्हें कैसा वेतन मिलता था। इन सवालों के जवाब सिर्फ़ इमारतें देखकर नहीं मिलते; किताब कहती है कि दूसरे स्रोतों के प्रयोग से जारी शोध संभवत: कुछ और संकेत दे सके। | 191–192 |
3. छह बातें जिनमें बच्चे अक्सर उलझते हैं
अगर बच्चा इनमें से कोई बात बोले या लिखे, तो वहीं रुककर उससे पूछिए कि किताब में यह कहाँ लिखा है।
| बच्चा लिख देता है | सही बात | पृष्ठ |
|---|---|---|
| विजयनगर साम्राज्य उस समय का नाम था | यह इतिहासकारों का शब्द है; समकालीन लोग इसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहते थे | 171 |
| 1336 पक्की तिथि है | पृष्ठ 193 की काल-रेखा में 1336? छपा है; प्रश्नचिह्न का मतलब है कि तिथि अनिश्चित है | 171, 193 |
| 1565 में रामराय राजा थे | रामराय विजयनगर के प्रधानमंत्री थे; सेना उनके नेतृत्व में राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) के युद्ध में हारी | 173 |
| विजयनगर और सुल्तानों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे | किताब के अनुसार संबंध धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी “हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे”। कृष्णदेव राय ने सल्तनतों के दावेदारों का समर्थन किया, और उनकी मृत्यु के बाद बीजापुर के सुल्तान ने उत्तराधिकार विवाद सुलझाने में हस्तक्षेप किया | 174 |
| खेत शहर की दीवारों के बाहर थे | क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा था; दीवारों के भीतर खेत, बग़ीचे और आवास थे | 177–178 |
| 1490 में अहमदाबाद सल्तनत बनी | अहमदनगर, बीजापुर और बेरार की सल्तनतें (1490) | 173, 193 |
4. किताब के शब्द, आसान भाषा में
बच्चे से पूछिए कि इनमें से कौन-से शब्द वह बिना देखे समझा सकता है। जो न समझा पाए, उसे वहीं किताब का पृष्ठ खोलने दीजिए।
| किताब का शब्द | आसान मतलब | पृष्ठ |
|---|---|---|
| हम्पी | उजड़े विजयनगर का वह नाम जिससे कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के लोग उसे याद रखते रहे; यह नाम स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से बना | 170 |
| कर्नाटक साम्राज्यमु | विजयनगर साम्राज्य के लिए समकालीन लोगों का नाम | 171 |
| राय | विजयनगर के शासक अपने को इसी नाम से पुकारते थे | 172 |
| कुदिरई चेट्टी | घोड़ों के स्थानीय व्यापारी, जो अरब व्यापारियों के साथ घोड़ों के व्यापार में भाग लेते थे | 172 |
| गजपति | शाब्दिक अर्थ हाथियों का स्वामी; पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली वंश का नाम | 172 |
| यवन | संस्कृत शब्द, जो यूनानियों और उत्तर-पश्चिम से उपमहाद्वीप में आने वाले दूसरे लोगों के लिए प्रयोग होता था | 174 |
| नायक | सेना प्रमुख, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे; ये आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे | 175 |
| अमर–नायक | सैनिक कमांडर, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे | 175 |
| इक्ता | दिल्ली सल्तनत की प्रणाली; ऐसा प्रतीत होता है कि अमर–नायक प्रणाली के कई तत्त्व इसी से लिए गए | 175 |
| हौज़ | जल-धाराओं के साथ बाँध बनाकर बनाए गए अलग-अलग आकार के जलाशय | 177 |
| बुर्ज़ | क़िलेबंद दीवार से बाहर की ओर निकले वर्गाकार या आयताकार हिस्से | 177 |
| इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) | कला-इतिहासकारों का नाम उस शैली के लिए जो अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से विकसित हुई; मेहराब और गुंबद इसके तत्त्व माने जाते हैं | 178 |
| राजकीय केंद्र | विजयनगर बस्ती का दक्षिण-पश्चिमी भाग, जिसमें लगभग तीस महल और 60 से भी अधिक मन्दिर थे | 179 |
| महानवमी डिब्बा | राजकीय केंद्र में शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना विशाल मंच | 180 |
| धार्मिक केंद्र | विजयनगर शहर का तुंगभद्रा नदी के किनारे वाला चट्टानी उत्तरी भाग | 184 |
| हिन्दू सूरतराणा | विजयनगर के शासकों की उपाधि: अरबी शब्द सुल्तान (राजा) का संस्कृत रूपांतरण, शाब्दिक अर्थ हिंदू सुलतान | 184 |
| राय गोपुरम् | मन्दिर का राजकीय प्रवेशद्वार, जो अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना कर देता था और दूर से मन्दिर का संकेत देता था | 185 |
| रथ गली | मन्दिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में जाने वाली, पत्थर के फर्श वाली गली, जिसके दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डपों में व्यापारी दुकानें लगाते थे | 188 |
5. लिखे हुए जवाब कैसे जाँचें
किताब के बारह प्रश्न पृष्ठ 194 और 195 पर हैं। प्रश्न 1 से 5 लगभग 100 से 150 शब्दों में लिखने हैं, प्रश्न 6 से 9 लगभग 250 से 300 शब्दों के छोटे निबंध हैं, प्रश्न 10 मानचित्र का काम है, और प्रश्न 11 और 12 परियोजनाएँ हैं (कोई एक करनी है)। हर प्रश्न के नीचे लिखा है कि अच्छे जवाब में क्या होना चाहिए। शब्द वही न हों तो चिंता मत कीजिए; बातें आ जाएँ, तो जवाब ठीक है।
प्रश्न 1: हम्पी को पढ़ने के तरीके (पृष्ठ 170, 176, 188–189, 193)
- मुख्य बात: 1800 से आज तक हम्पी के खंडहर कई तरीकों से पढ़े गए, और हर तरीके ने पुरोहितों की स्मृति को परखा और आगे बढ़ाया।
- सर्वेक्षण मानचित्र: 1800 में कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेष प्रकाश में लाए और पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया।
- अभिलेख: 1836 से कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे हुए; 1876 में जे.एफ. फ्लीट ने मंदिरों की दीवारों के अभिलेखों का प्रलेखन शुरू किया।
- छाया चित्र: 1856 से भवनों के चित्र संकलित हुए; अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने अवशेषों के पहले विस्तृत चित्र लिए।
- मिलान: इतिहासकारों ने इन स्रोतों का विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य से मिलान किया।
- संरक्षण और अंकन: 1902 से जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण हुआ; 1980 के दशक के आरंभ से लगभग बीस वर्ष तक पूरे क्षेत्र को 25 वर्गों में बाँटकर हज़ारों संरचनाओं का प्रलेखन हुआ।
- पूरक कैसे: मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी; बाकी तरीकों ने उसे लिखित और भौतिक साक्ष्य से परखा।
प्रश्न 2: विजयनगर की पानी की ज़रूरतें (पृष्ठ 177, 179)
- मुख्य बात: विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में था, इसलिए पानी इकट्ठा करने और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध किए गए।
- नदी और पहाड़ियाँ: तुंगभद्रा नदी ने यहाँ एक प्राकृतिक कुण्ड बनाया; चारों ओर की ग्रेनाइट की पहाड़ियों से कई जल-धाराएँ नदी में मिलती थीं।
- हौज़: लगभग सभी धाराओं के साथ बाँध बनाकर अलग-अलग आकार के हौज़ बनाए गए।
- कमलपुरम् जलाशय: पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में बना; इससे आस-पास के खेत सींचे जाते थे और एक नहर से पानी राजकीय केंद्र तक जाता था।
- हिरिया नहर: तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाकर धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी सींचती थी; इसे संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाया।
- आम लोगों के लिए: कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: सामान्य नगर निवासियों के लिए पानी के स्रोत थे।
प्रश्न 3: क़िले के भीतर खेत, फ़ायदे और नुकसान (पृष्ठ 173, 177–178)
- मुख्य बात: विजयनगर की क़िलेबंदी ने शहर के साथ खेतों को भी घेरा था। इस प्रश्न में बच्चे को अपना विचार देना है, इसलिए फ़ायदे और नुकसान दोनों के कारण आएँ।
- फ़ायदा, भोजन: मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य विरोधी को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था; भीतर खेत होने से शहर भूखा नहीं रहता।
- फ़ायदा, पानी: कृषि क्षेत्र को तुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहरों की व्यवस्था सींचती थी।
- फ़ायदा, अन्नागार से आगे: दूसरे शासक आम तौर पर क़िलेबंद क्षेत्र में विशाल अन्नागार बनवाते थे; विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को बचाने की नीति अपनाई।
- नुकसान, खर्च: किताब इसे “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” कहती है।
- नुकसान, बचाव: इतना बड़ा घेरा बचाना कठिन रहा होगा। यह बच्चे का अपना तर्क है, किताब का वाक्य नहीं।
- फिर भी: 1565 में सेना की हार के बाद विजयी सेनाओं ने शहर लूटा।
प्रश्न 4: महानवमी डिब्बा के अनुष्ठान (पृष्ठ 180–181)
- मुख्य बात: ये अनुष्ठान संभवत: सितंबर–अक्टूबर के दस दिन के हिंदू त्योहार महानवमी के अवसर पर किए जाते थे, और किताब कहती है: “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।”
- ताक़त का प्रदर्शन: इस अवसर पर शासक “अपने रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन” करते थे।
- धर्म से जुड़ाव: मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा और जानवरों की बलि से राजसत्ता अनुष्ठान के साथ जुड़ी दिखती थी।
- नायकों की निष्ठा: प्रमुख नायक और अधीनस्थ राजा राजा और उसके अतिथियों को औपचारिक भेंट देते थे।
- सेना का निरीक्षण: अंतिम दिन राजा खुले मैदान में अपनी और अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था।
- उत्सव: नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा और साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा।
- ध्यान रखने की बात: विद्वानों का मानना है कि आज की संरचना के चारों ओर का स्थान इतनी बड़ी शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था, इसलिए यह मंच ही इन अनुष्ठानों का केंद्र था या नहीं, यह पहेली बनी हुई है।
प्रश्न 5: विरुपाक्ष मन्दिर के स्तंभ का चित्र (पृष्ठ 184–186, 194)
- मुख्य बात: यह बच्चे का अपना काम है। चित्र 7.33 को ध्यान से देखकर फूल, जानवर और मानव आकृतियाँ उसी से पहचाननी हैं।
- जाँचने की बातें: बच्चा बताए कि फूल, कली या पत्तियों जैसे आकार स्तंभ में कहाँ हैं; हर आकृति खड़ी है या बैठी, उसके हाथ में क्या है और वह क्या करती दिखती है।
- किताब का सहारा: कृष्णदेव राय का बनवाया मण्डप सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजाया गया था। विशाल स्तर पर बनी संरचनाएँ, जैसे राय गोपुरम्, राजकीय सत्ता की द्योतक थीं (पृष्ठ 185), और मन्दिर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र थे।
- जानवर क्यों दिखाए गए: बच्चा अपना कारण दे सकता है; बस उसके पीछे किताब की कोई बात हो।
प्रश्न 6: क्या “शाही केंद्र” नाम सही है (पृष्ठ 176–183)
- मुख्य बात: चित्र 7.4 के नक्शे पर इस भाग को “शाही केंद्र” लिखा है; किताब का पाठ इसे ज़्यादातर राजकीय केंद्र कहता है, पर पृष्ठ 192 और अभ्यास का प्रश्न 6 भी “शाही केंद्र” कहते हैं। नाम आधा ही सही है: यहाँ राजसत्ता के भवन थे, पर धर्म के भी।
- नाम के पक्ष में: यह बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में था; तीसरी क़िलेबंदी इसे घेरती थी; लगभग तीस संरचनाएँ महल मानी गई हैं; सभा मंडप और महानवमी डिब्बा यहीं हैं।
- नाम के विरुद्ध: यहाँ 60 से भी अधिक मन्दिर थे; “राजा का भवन” के राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं है; कमल महल जैसी कई संरचनाओं का असली काम आज भी निश्चित नहीं है।
- धर्म और राजसत्ता साथ-साथ: किताब के अनुसार मन्दिरों और संप्रदायों को प्रश्रय देना शासकों के लिए स्पष्टत: महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि वे देवी-देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने का प्रयास कर रहे थे (पृष्ठ 179)।
- निष्कर्ष: बच्चा जो भी निष्कर्ष निकाले, वह इन दोनों पलड़ों पर टिका हो।
प्रश्न 7: कमल महल और “हाथियों का अस्तबल” (पृष्ठ 171–172, 175, 178–182, 186)
- मुख्य बात: दोनों भवन राजकीय केंद्र में हैं। इनका स्थापत्य दिखाता है कि विजयनगर के शासकों ने दूसरी शैलियाँ अपनाईं; हमारी ओर से: वे भव्यता भी चाहते थे। इनका असली काम निश्चित नहीं है, इसलिए जवाब सावधानी से लिखा हो।
- कमल महल: राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में से एक; इसमें नौ मीनारें थीं, बीच में एक ऊँची और आठ उसकी भुजाओं के साथ-साथ।
- कमल महल की मेहराबें: किताब कहती है कि वे संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों से प्रभावित थीं।
- कमल महल का नाम: यह नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। मैकेन्ज़ी के मानचित्र से मिले सुझाव के अनुसार यह परिषदीय सदन था, जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।
- “हाथियों का अस्तबल”: किताब यह नाम उद्धरण-चिह्नों में देती है और पूछती है कि क्या ये वास्तव में हाथियों के अस्तबल थे।
- शैलियाँ अपनाईं: मेहराब और गुंबद तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित स्थापत्य के तत्त्व माने जाते हैं। दक्कन के सुलतानों और गजपतियों से संपर्क में विजयनगर के शासकों ने अवधारणाएँ और भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं और आगे विकसित कीं।
- राजकाज और शान: लगभग तीस संरचनाएँ महल मानी गई हैं, जो अपेक्षाकृत बड़ी हैं और आनुष्ठानिक कार्यों से संबद्ध नहीं होतीं। हमारी ओर से: बड़े और सजे महल बताते हैं कि शासक राजकाज के साथ अपनी शान भी दिखाना चाहते थे।
- सैनिक शक्ति: युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी और अमर–नायक घोड़ों और हाथियों के दल रखते थे। हमारी ओर से: यदि ये सचमुच अस्तबल थे, तो यह भवन उसी सैनिक शक्ति को दिखाता है।
- यह भी आए तो और अच्छा: निष्कर्ष केवल स्थापत्य पर टिका है, क्योंकि दोनों भवनों का काम अनिश्चित है।
प्रश्न 8: स्थापत्य की परंपराएँ और उनमें बदलाव (पृष्ठ 171–172, 178–179, 181, 184–188)
- मुख्य बात: विजयनगर के वास्तुविदों ने दक्षिण भारत की पुरानी मन्दिर परंपरा और सुल्तानों की इंडो–इस्लामिक शैली, दोनों से सीखा, और उन्हें राजकीय सत्ता दिखाने के लिए नए रूप दिए।
- पहली प्रेरणा, पुराने दक्षिणी राज्य: तमिलनाडु में चोलों और कर्नाटक में होयसालों के शासक वर्ग ने तंजावुर के बृहदेश्वर और बेलूर के चन्नकेशव जैसे विशाल मन्दिरों को संरक्षण दिया। विजयनगर के राय इन परंपराओं को “नयी ऊँचाइयों तक” ले गए।
- दूसरी प्रेरणा, लंबा मन्दिर इतिहास: इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाता है। विरुपाक्ष का सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था।
- तीसरी प्रेरणा, सुल्तानों से संपर्क: दक्कन के सुलतानों और उड़ीसा के गजपतियों से संपर्क में विचारों का आदान-प्रदान हुआ, विशेषकर स्थापत्य में। मेहराब और गुंबद तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित तत्त्व माने जाते हैं।
- चौथी प्रेरणा, दूसरे क्षेत्र की पूजा: महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विट्ठल की पूजा कर्नाटक में आरंभ की गई।
- बदलाव, विशाल पैमाना: राय गोपुरम् इतने ऊँचे बने कि केंद्रीय देवालयों की मीनारें बौनी लगतीं; वे दूर से मन्दिर का संकेत देते और शासकों की ताकत की याद दिलाते।
- बदलाव, मण्डप और गलियारे: लंबे स्तंभों वाले गलियारे और अलग-अलग कामों के सभागार बने: संगीत, नृत्य और नाटक देखने, देवताओं के विवाह और झूला झुलाने के लिए।
- बदलाव, परिसर का विस्तार: विरुपाक्ष मन्दिर में कृष्णदेव राय ने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में मण्डप बनवाया और पूर्वी गोपुरम् का श्रेय भी उसी को है; केंद्रीय देवालय पूरे परिसर का छोटा भाग रह गया।
- बदलाव, रथ गलियाँ: गोपुरम् से सीधी रेखा में पत्थर के फर्श वाली गलियाँ, जिनके दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डपों में व्यापारी दुकानें लगाते थे।
- बदलाव, राजा मन्दिर में: राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित होने लगीं, और राजा की मन्दिर यात्राएँ महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर बन गईं।
- बदलाव, इंडो–इस्लामिक तत्त्व: क़िलेबंद बस्ती के प्रवेशद्वारों पर मेहराब और गुंबद बने। शहरी केंद्र की मस्ज़िदों और मक़बरों का स्थापत्य मन्दिरों के मण्डपों से मिलता-जुलता है।
- यह भी आए तो और अच्छा: किताब के शब्दों में, शासकों ने “एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण के लिए” अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात किया। बाद में नायकों ने भी ये परंपराएँ जारी रखीं।
प्रश्न 9: आम लोगों के जीवन की छवि (पृष्ठ 175–181, 188, 191–192)
- मुख्य बात: अध्याय के विवरण, ख़ासकर विदेशी यात्रियों के वृत्तांत, आम लोगों के जीवन की कुछ झलक देते हैं। पर बहुत-सी बातें हम नहीं जानते, और जवाब में यह साफ़ लिखा हो।
- घर और मुहल्ले: शहरी केंद्र में आम लोगों के आवासों के पुरातात्विक साक्ष्य अपेक्षाकृत कम हैं। बरबोसा के अनुसार घर छप्पर के थे, पर सुदृढ़, और व्यवसाय के आधार पर खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में बसे थे।
- शहरी केंद्र का एक कोना: उत्तर-पूर्वी कोने जैसे स्थानों में परिष्कृत चीनी मिट्टी मिली, यानी हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों। यह मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला भी था, जहाँ मक़बरे और मस्ज़िदें थीं।
- पानी, खेती और पूजा: कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: आम नगर निवासियों के पानी के स्रोत थे। दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे और आवास थे, और धान उगाया जाता था। बहुत से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर अलग-अलग संप्रदायों की ओर संकेत करते हैं।
- बाज़ार और भोजन: पेस एक चौड़ी गली का वर्णन करता है जहाँ माणिक्य, हीरे, मोती और वस्त्र बिकते थे और हर शाम मेला लगता था। उसके अनुसार चावल, गेहूँ और दालें सस्ते और प्रचुर थे। नूनिज़ के अनुसार फल सस्ते और प्रचुर थे। किताब यह भी कहती है कि बाज़ारों में मांस बड़ी मात्रा में बिकता था।
- श्रम, कर और उत्सव: अमर–नायक किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू राजस्व और अन्य कर वसूलते थे। कई बार उपजाऊ भूमि की तलाश में किसान नायकों के साथ चलते थे। महानवमी पर नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा और शोभायात्राएँ होती थीं।
- जो हम नहीं जानते: आम लोग इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे, क्या वे शाही या धार्मिक केंद्र के हर भाग में जा सकते थे, और राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आते थे और उन्हें कैसा वेतन मिलता था। भवनों को देखने मात्र से इनके उत्तर नहीं मिलते।
- यह भी आए तो और अच्छा: छवि एक भरे-पूरे व्यापारिक शहर की बनती है। पर यह छवि ज़्यादातर बाहर से आए यात्रियों की आँखों से बनी है, आम लोगों की अपनी आवाज़ में नहीं।
प्रश्न 10: मानचित्र का काम (पृष्ठ 172, 174, 176–177, 179)
यह बच्चे का अपना काम है। जाँचने की बातें ये हैं:
- चार देश: बच्चा एटलस की मदद से विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस को मोटे तौर पर अंकित करे।
- इटली: निकोलो दे कॉन्ती, इतालवी व्यापारी, पंद्रहवीं शताब्दी।
- ईरान: अब्दुर रज़्ज़ाक, जिसे किताब फ़ारस के राजा का दूत बताती है, पंद्रहवीं शताब्दी। पृष्ठ 177 के अनुसार उसे कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा गया था।
- रूस: अफ़ानासी निकितिन, रूस का व्यापारी, पंद्रहवीं शताब्दी।
- पुर्तगाल: फर्नाओ नूनिज़ और दुआर्ते बरबोसा (पृष्ठ 179 पर बरबोसा पुर्तगाली यात्री है), दोनों सोलहवीं शताब्दी के। डोमिंगो पेस भी सोलहवीं शताब्दी में आया।
- मार्ग: बच्चा मार्ग के लिए एटलस या अपने अध्यापक की मदद ले। किताब से इतना जोड़ा जा सकता है कि पुर्तगाली 1498 से उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आने लगे थे; मानचित्र 1 पर कालीकट और गोवा भी देखिए।
प्रश्न 11 और 12: परियोजनाएँ (पृष्ठ 194–195)
इनमें से कोई एक करनी है। दोनों में बच्चा अपनी खोज करता है, इसलिए कोई एक जवाब नहीं है।
- प्रश्न 11, शहर चुनना: लगभग चौदहवीं–सत्रहवीं शताब्दियों में फला-फूला कोई एक बड़ा शहर चुने, और अपने अध्यापक या पुस्तकालय की किताबों से उसकी जानकारी जुटाए।
- प्रश्न 11, ढाँचा: विजयनगर के अध्याय को ढाँचा बनाए: नक्शा, दीवारें और प्रवेशद्वार, पानी के प्रबंध, राजकीय भवन, धार्मिक भवन, बाज़ार और सड़कें।
- प्रश्न 11, तीन भाग: राजनीतिक केंद्र होने के लक्षण (महल, सभा भवन, ऊँची दीवारों वाले घेरे); आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भवन; और शहरी भाग को आस-पास से अलग करने वाले लक्षण (क़िलेबंदी, प्रवेशद्वार, नदी या पहाड़ियाँ)।
- प्रश्न 12, रेखाचित्र: अपने आस-पास का कोई धार्मिक भवन चुने और उसका एक सादा रेखाचित्र बनाए, जिस पर छत, स्तंभ, मेहराबें (यदि हों), गलियारे, रास्ते, सभागार, प्रवेशद्वार और पानी का प्रबंध अंकित हों।
- प्रश्न 12, तुलना: विरुपाक्ष मन्दिर से तुलना की तालिका बने। विरुपाक्ष की ओर ये बातें हों: ऊँचा गोपुरम्, कृष्णदेव राय का बनवाया मण्डप और पूर्वी गोपुरम्, स्तंभों वाले सभागार और गलियारे, जलाशय, और पूरे परिसर में छोटा-सा केंद्रीय देवालय।
- प्रश्न 12, इतिहास: किताब कहती है कि भवन का हर भाग किस प्रयोग में लाया जाता था, यह लिखिए और उसके इतिहास का पता कीजिए। हमारी ओर से: इसके लिए पुजारी, प्रबंधक या बुज़ुर्गों से पूछा जा सकता है, और कोई शिलालेख या स्थापना-पट्ट हो तो उसे पढ़ा जा सकता है।
- दोनों में: हर बात के आगे लिखा हो कि वह किस स्रोत से मिली: यात्रियों के वृत्तांत, अभिलेख, नक्शे या तसवीरें।
अपने को जाँचने के लिए बच्चा रिवीजन नोट्स में किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर देख सकता है, लिखने के बाद।
6. घर पर दस मिनट की बातचीत
इनमें से कोई एक चुन लीजिए, चाहे खाने के बाद, चाहे सैर पर। पहले बच्चे को बोलने दीजिए; फिर नीचे की बातों से मिलाइए। ये तीनों प्रश्न किताब के अपने “चर्चा कीजिए” वाले प्रश्न हैं।
पहली बातचीत: विजयनगर का नक्शा और हमारा अपना गाँव या शहर (पृष्ठ 179)
किताब कहती है कि विजयनगर की रूपरेखा की तुलना अपने नगर या गाँव की रूपरेखा से कीजिए। पहले बच्चा अपने इलाके की रूपरेखा बताए, फिर विजयनगर की।
- विजयनगर के भाग: बाहरी दीवार, धार्मिक केंद्र, शहरी केंद्र, राजकीय केंद्र, दीवारों के भीतर खेत, नहरें और जलाशय, घाटियों से होकर जाती सड़कें, और मन्दिरों से निकलती बाज़ार वाली सड़कें।
- अपने नगर या गाँव में: पानी कहाँ से आता है, बाज़ार कहाँ है, पूजा स्थल कहाँ हैं, खेत बस्ती के भीतर हैं या बाहर, और सरकारी दफ़्तर कहाँ हैं।
- दोनों का एक सादा नक्शा बनाकर समानताएँ और अंतर लिखे जा सकते हैं। जैसे, किताब के अनुसार विजयनगर की क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा था (पृष्ठ 177–178); बच्चा देखे कि उसके नगर या गाँव में खेत कहाँ हैं।
- बच्चा जो भी कहे, उससे पूछिए कि किताब की कौन-सी बात उसके जवाब को सहारा देती है।
दूसरी बातचीत: नायकों ने पुरानी भवन परंपरा क्यों जारी रखी (पृष्ठ 183–188)
पूछिए कि विजयनगर पर आक्रमण के बाद भी नायकों ने शासकों की भवन निर्माण की परंपराएँ क्यों जारी रखीं।
- किताब क्या बताती है: नायकों ने महलनुमा संरचनाएँ बनाने की परंपरा जारी रखी (पृष्ठ 183), क़िलेबंदी और मन्दिर निर्माण को और व्यापक बनाया, और कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरम् भी बनवाए (पृष्ठ 188)। मदुरई के नायकों का गोपुरम् इसका उदाहरण है (चित्र 7.26)।
- नायक कौन थे: पहले वे विजयनगर के अधीन सेना प्रमुख थे, और सत्रहवीं शताब्दी में कई ने अपने स्वतंत्र राज्य बना लिए। हमारी ओर से: नए शासकों को अपनी सत्ता दिखानी थी।
- मन्दिरों का मतलब: विजयनगर के शासकों के लिए मन्दिरों का निर्माण, मरम्मत और रख-रखाव सत्ता, संपत्ति और निष्ठा के लिए समर्थन और मान्यता पाने के माध्यम थे (पृष्ठ 184)। हमारी ओर से: नायक भी यही चाहते होंगे।
- ऊँचे गोपुरम्: वे शासकों की ताकत की याद दिलाते थे।
- बच्चा जो भी कहे, उससे पूछिए कि किताब की कौन-सी बात उसके जवाब को सहारा देती है।
तीसरी बातचीत: पुरानी मन्दिर परंपराएँ कैसे और क्यों अपनाई गईं (पृष्ठ 188)
पूछिए कि विजयनगर के शासकों ने पहले से चली आ रही मन्दिर परंपराओं को कैसे और क्यों अपनाया और बदला।
- कैसे: पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाने वाली मन्दिर परंपरा अपनाई गई। उसमें विशाल राय गोपुरम्, लंबे स्तंभों वाले गलियारे, अलग-अलग कामों के मण्डप, रथ गलियाँ और मन्दिरों में राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ जोड़ी गईं। महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विट्ठल की पूजा कर्नाटक में आरंभ की गई।
- क्यों: शासक मन्दिर निर्माण से अपने को ईश्वर से जोड़ते थे और भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे। मन्दिर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र थे। अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात कर शासक एक साम्राज्यिक संस्कृति बना रहे थे।
- बच्चा जो भी कहे, उससे पूछिए कि किताब की कौन-सी बात उसके जवाब को सहारा देती है।
7. अध्याय का आख़िरी सवाल: इमारतें क्या बताती हैं और क्या नहीं
अध्याय के आख़िरी हिस्से (पृष्ठ 191–192) में किताब पूछती है कि बची हुई इमारतों से हमें क्या पता चलता है और क्या नहीं। इमारतें बताती हैं कि स्थानों को कैसे संगठित किया गया और उनका कैसे प्रयोग हुआ, और वे किस सामग्री और किन तकनीकों से बनीं। क़िलेबंदी के अध्ययन से शहर की रक्षा की ज़रूरतों और सैनिक तैयारी का पता चलता है, और दूसरी जगहों की इमारतों से तुलना करने पर विचारों के फैलाव और सांस्कृतिक प्रभावों का। इमारतें वे विचार भी व्यक्त करती हैं जो बनाने वाले या संरक्षक देना चाहते थे।
कृष्णदेव राय की एक मूर्ति तमिलनाडु के चिदम्बरम मन्दिर के गोपुरम् में है (पृष्ठ 192)। किताब कहती है: “स्वाभाविक है कि शासक इसी रूप में अपने आप को प्रस्तुत करना चाहता था।”
पर इमारतें बहुत कुछ नहीं बतातीं। आम स्त्री, पुरुष और बच्चे इन इमारतों के बारे में क्या सोचते थे, यह स्थापत्य से पता नहीं चलता। यह भी नहीं कि वे शाही या धार्मिक केंद्र के हर भाग में जा सकते थे या नहीं। शासक तय करते थे कि क्या, कहाँ और किस शैली में बने, पर नक्शे किसने बनाए, राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आए, और उन्हें कैसा वेतन मिलता था, यह इमारतें देखकर नहीं पता चलता। किताब कहती है कि दूसरे स्रोतों के प्रयोग से जारी शोध संभवत: कुछ और संकेत दे सके।
बच्चे से कहिए कि अध्याय में से कोई एक इमारत चुने, और बताए कि वह हमें क्या बताती है और क्या नहीं। उदाहरण के लिए, महानवमी डिब्बा बताता है कि राजकीय केंद्र में शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर विशाल मंच बना था, जिसके अनुष्ठान संभवत: दस दिन के महानवमी त्योहार के अवसर पर किए जाते थे (पृष्ठ 180–181)। पर आम लोग वहाँ जा सकते थे या नहीं, इसका पता इमारत से नहीं चलता (पृष्ठ 191); और विद्वानों का मानना है कि आज की संरचना के चारों ओर का स्थान बड़ी शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था, इसलिए यह एक पहेली बनी हुई है (पृष्ठ 181)।
अगर सिर्फ़ पाँच मिनट हों
ये चार सवाल पूछ लीजिए। चारों ठीक हों, तो अध्याय की मुख्य बातें आ गई हैं।
| सवाल | जवाब |
|---|---|
| विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने की, और उसकी तिथि 1336 के आगे प्रश्नचिह्न क्यों है? | दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने; प्रश्नचिह्न का मतलब है कि तिथि अनिश्चित है (पृष्ठ 171, 193)। |
| 1565 में विजयनगर की सेना किस युद्ध में हारी, और उसका नेतृत्व किसने किया? | राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) के युद्ध में; प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में (पृष्ठ 173–174)। |
| अमर–नायक कौन थे? | सैनिक कमांडर, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे; वे कर वसूलते और घोड़ों और हाथियों का दल रखते थे (पृष्ठ 175)। |
| विजयनगर की क़िलेबंदी के भीतर खेत क्यों थे? | ताकि घेराबंदी में भोजन न कटे; किताब इसे एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति कहती है (पृष्ठ 177–178)। |
बच्चे के लिए इसी अध्याय के और पन्ने
- रिवीजन नोट्स: पूरा अध्याय छोटे में, किताब के सभी प्रश्नों के उत्तर के साथ।
- प्रश्न बैंक: परीक्षा जैसे प्रश्न, उत्तर के साथ। बच्चा पहले ख़ुद लिखे, फिर मिलाए।
- फ़्लैशकार्ड: बाईं ओर सवाल, दाईं ओर जवाब। जवाब ढककर बोलिए, फिर मिलाइए; रोज़ पाँच मिनट दोहराने के लिए।
- परख प्रश्न: सोचकर जवाब देने वाले प्रश्न, किताब के स्रोतों और उदाहरणों पर, हर प्रश्न का उत्तर साथ में।
- इंटरैक्टिव अध्याय: पूरा अध्याय स्क्रीन पर, हिस्सा-दर-हिस्सा।