अध्याय 7एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7

कुल 59 प्रश्न

तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए। ! वाले प्रश्नों में अक्सर ग़लती होती है।


खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II” (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

1★★इतिहासकार “विजयनगर साम्राज्य” शब्द का प्रयोग करते हैं। विजयनगर के समकालीन लोग इस साम्राज्य को किस नाम से पुकारते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) कर्नाटक साम्राज्यमु

व्याख्या: किताब के बॉक्स में लिखा है: “जहाँ इतिहासकार विजयनगर साम्राज्य शब्द का प्रयोग करते हैं वहीं समकालीन लोगों ने उसे कर्नाटक साम्राज्यमु की संज्ञा दी।” हम्पी नाम खंडहरों का है, रायचूर दोआब एक क्षेत्र है और नगलपुरम् एक उपनगर।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 171

2★1565 के बाद उजड़ा विजयनगर कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के निवासियों की स्मृतियों में “हम्पी” नाम से जीवित रहा। यह नाम किसके नाम से आया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी

व्याख्या: किताब के अनुसार “इस नाम का आविर्भाव यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था।” विरुपाक्ष राज्य के संरक्षक देवता थे, पर हम्पी नाम पम्पादेवी से जुड़ा है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 170, 184

3★1800 ई. में हम्पी के भग्नावशेषों को प्रकाश में लाने वाले कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी कौन थे?

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सही उत्तर: (द) ईस्ट इण्डिया कंपनी में कार्यरत एक अभियंता तथा पुराविद

व्याख्या: मैकेन्ज़ी ने इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। उनकी शुरुआती जानकारियाँ विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 170

4★★परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में किसने की?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) दो भाई, हरिहर और बुक्का

व्याख्या: किताब के पृष्ठ 193 की काल-रेखा में इस तिथि के साथ प्रश्नचिह्न लगा है; प्रश्नचिह्न अनिश्चित तिथि की ओर संकेत करता है। संगम और सुलुव राजवंशों के नाम हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 171, 193

5★“गजपति” शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) हाथियों का स्वामी

व्याख्या: “गजपति का शाब्दिक अर्थ हाथियों का स्वामी होता है।” विजयनगर की लोक प्रचलित परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को अश्वपति (घोड़ों के स्वामी) और रायों को नरपति (लोगों के स्वामी) कहा गया है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 172

6★विजयनगर में घोड़ों के व्यापार में भाग लेने वाले व्यापारियों के स्थानीय समूह क्या कहलाते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) कुदिरई चेट्टी

व्याख्या: युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए अरब तथा मध्य एशिया से घोड़ों का आयात बहुत महत्त्वपूर्ण था। आरंभ में यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था; कुदिरई चेट्टी अथवा घोड़ों के व्यापारी भी इसमें भाग लेते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 172

7★★विजयनगर पर शासन करने वाले राजवंशों का सही क्रम कौन-सा है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) संगम, सुलुव, तुलुव, अराविदु

व्याख्या: संगम वंश ने 1485 तक नियंत्रण रखा। उन्हें सुलुवों ने उखाड़ फेंका, जो सैनिक कमांडर थे और 1503 तक सत्ता में रहे। फिर तुलुव आए; कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे। 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में चला गया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 173

8★★कृष्णदेव राय के शासनकाल में 1512 में क्या हुआ?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) तुंगभद्रा और कृष्णा नदियों के बीच का क्षेत्र (रायचूर दोआब) हासिल किया गया

व्याख्या: किताब का क्रम: रायचूर दोआब (1512), उड़ीसा के शासकों का दमन (1514), बीजापुर के सुल्तान की पराजय (1520)। राक्षसी–तांगड़ी का युद्ध 1565 में हुआ, कृष्णदेव राय की मृत्यु (1529) के बाद।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 173

9★★1565 में राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) के युद्ध में विजयनगर की सेना किसके नेतृत्व में उतरी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) प्रधानमंत्री रामराय

व्याख्या: इस युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर तथा गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर को हराया। इसके बाद साम्राज्य का केंद्र पूर्व की ओर चला गया और अराविदु राजवंश ने पेनुकोण्डा से और बाद में चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप) से शासन किया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 173

10★कृष्णदेव राय (शासनकाल 1509–29) ने शासनकला के विषय में अमुक्तमल्यद नाम की कृति किस भाषा में लिखी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) तेलुगु

व्याख्या: स्रोत 2 में लिखा है कि कृष्णदेव राय ने “शासनकला के विषय में अमुक्तमल्यद नामक तेलुगु भाषा में एक कृति लिखी।” इसमें उन्होंने व्यापारियों के बारे में भी लिखा।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 173

11★“यवन” शब्द किस भाषा का है और किनके लिए प्रयोग होता था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) संस्कृत; यूनानियों तथा उत्तर–पश्चिम से उपमहाद्वीप में आने वाले अन्य लोगों के लिए

व्याख्या: कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद धारण करके गौरव महसूस किया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 174

12★★अमर–नायक प्रणाली के कई तत्त्व किस प्रणाली से लिए गए प्रतीत होते हैं?

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सही उत्तर: (द) दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली

व्याख्या: “अमर–नायक प्रणाली विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी। ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रणाली के कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 175

13★सत्रहवीं शताब्दी में कई अमर–नायकों ने क्या किया, जिससे विजयनगर के केंद्रीय राजकीय ढाँचे का विघटन तेज़ी से होने लगा?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए

व्याख्या: अमर–नायक राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे और अपनी स्वामिभक्ति प्रकट करने के लिए दरबार में उपहारों के साथ स्वयं उपस्थित होते थे। राजा कभी–कभी उन्हें एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करके उन पर नियंत्रण दर्शाता था। किताब के अनुसार सत्रहवीं शताब्दी में इनमें से कई नायकों ने अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 175

14★★फ़ारस के शासक द्वारा कालीकट (कोज़ीकोड) भेजे गए दूत अब्दुर रज़्ज़ाक ने विजयनगर में दुर्गों की कितनी पंक्तियों का उल्लेख किया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) सात

व्याख्या: इन दुर्गों से न केवल शहर को, बल्कि कृषि में प्रयुक्त आसपास के क्षेत्र तथा जंगलों को भी घेरा गया था। सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर की पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177

15★विजयनगर की हिरिया नहर के बारे में कौन-सा कथन सही है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) इसमें तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाया जाता था और यह धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी को सींचती थी

व्याख्या: हिरिया नहर आज भी भग्नावशेषों के बीच देखी जा सकती है; संभवत: इसका निर्माण संगम वंश के राजाओं ने करवाया था। कमलपुरम् जलाशय (पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में बना) एक अलग हौज़ था, जिसका पानी एक नहर से राजकीय केंद्र तक ले जाया गया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177

16★★राजकीय केंद्र में शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित महानवमी डिब्बा क्या है?

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सही उत्तर: (द) लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊँचाई तक जाने वाला एक विशालकाय मंच

व्याख्या: ऐसे साक्ष्य मिले हैं जिनसे पता चलता है कि इस मंच पर लकड़ी की एक संरचना बनी थी। नौ मीनारें कमल महल की थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 180, 181

17★महानवमी जिस दस दिन के हिंदू त्यौहार से जुड़ी है, उसे बंगाल में किस नाम से जाना जाता है?

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सही उत्तर: (ब) दुर्गा पूजा

व्याख्या: यह त्यौहार उत्तर भारत में दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा तथा प्रायद्वीपीय भारत में नवरात्री या महानवमी के नाम से जाना जाता है। महानवमी का शाब्दिक अर्थ है महान नवाँ दिवस।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 180, 181

18★राजकीय केंद्र के लोटस (कमल) महल का यह नाम किसने रखा?

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सही उत्तर: (स) उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने

व्याख्या: इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस कार्य के लिए बना था। मैकेन्ज़ी के बनाए मानचित्र से मिलने वाला एक सुझाव यह है कि यह परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 181, 182

19★★विजयनगर के सभी राजकीय आदेशों पर सामान्यतया कन्नड़ लिपि में कौन-से शब्द अंकित होते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) श्री विरुपाक्ष

व्याख्या: विजयनगर के शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे। विरुद “हिन्दू सूरतराणा” अरबी शब्द सुल्तान (अर्थ: राजा) का संस्कृत अनुवाद था, जिसका शाब्दिक अर्थ था हिंदू सुलतान।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 184

20★विजयनगर के विट्ठल मन्दिर के प्रमुख देवता विट्ठल कौन थे?

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सही उत्तर: (ब) विष्णु का एक रूप, जो सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते थे

व्याख्या: किताब के अनुसार कर्नाटक में विट्ठल की पूजा आरंभ करना उन माध्यमों का द्योतक है जिनसे विजयनगर के शासकों ने एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण के लिए अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात किया। शिव का रूप विरुपाक्ष माने जाते हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 187, 188

खंड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1विजयनगर साम्राज्य की स्थापना चौदहवीं शताब्दी में हुई; अपने चरमोत्कर्ष पर यह उत्तर में ______ नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था। (पृष्ठ 170)

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विजयनगर साम्राज्य की स्थापना चौदहवीं शताब्दी में हुई; अपने चरमोत्कर्ष पर यह उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था। (पृष्ठ 170)

2हम्पी के बारे में कॉलिन मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारियाँ ______ मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं। (पृष्ठ 170)

उत्तर देखिए

हम्पी के बारे में कॉलिन मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारियाँ विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं। (पृष्ठ 170)

31815 में कॉलिन मैकेन्ज़ी को भारत का पहला ______ बनाया गया, और 1821 में अपनी मृत्यु तक वे इस पद पर रहे। (पृष्ठ 171)

उत्तर देखिए

1815 में कॉलिन मैकेन्ज़ी को भारत का पहला सर्वेयर जनरल बनाया गया, और 1821 में अपनी मृत्यु तक वे इस पद पर रहे। (पृष्ठ 171)

4विजयनगर की लोक प्रचलित परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को ______ (घोड़ों के स्वामी) और रायों को नरपति (लोगों के स्वामी) कहा गया है। (पृष्ठ 172)

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विजयनगर की लोक प्रचलित परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को अश्वपति (घोड़ों के स्वामी) और रायों को नरपति (लोगों के स्वामी) कहा गया है। (पृष्ठ 172)

5______ ई. से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आए और व्यापारिक तथा सामरिक केंद्र स्थापित करने का प्रयास करने लगे। (पृष्ठ 172)

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1498 ई. से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आए और व्यापारिक तथा सामरिक केंद्र स्थापित करने का प्रयास करने लगे। (पृष्ठ 172)

6कृष्णदेव राय ने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप ______ नामक उपनगर की स्थापना की। (पृष्ठ 173)

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कृष्णदेव राय ने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप नगलपुरम् नामक उपनगर की स्थापना की। (पृष्ठ 173)

7विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे ______ क्षेत्रों में से एक था, इसलिए पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध करना आवश्यक था। (पृष्ठ 177)

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विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक था, इसलिए पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध करना आवश्यक था। (पृष्ठ 177)

8क़िलेबंद बस्ती के प्रवेशद्वार की मेहराब और गुंबद वाली शैली को कला–इतिहासकार ______ कहते हैं, क्योंकि इसका विकास विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ। (पृष्ठ 178)

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क़िलेबंद बस्ती के प्रवेशद्वार की मेहराब और गुंबद वाली शैली को कला–इतिहासकार इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) कहते हैं, क्योंकि इसका विकास विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ। (पृष्ठ 178)

9राजकीय केंद्र के ______ मन्दिर का प्रयोग संभवत: केवल राजा और उनके परिवार द्वारा किया जाता था। (पृष्ठ 182, 183)

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राजकीय केंद्र के हज़ार राम मन्दिर का प्रयोग संभवत: केवल राजा और उनके परिवार द्वारा किया जाता था। (पृष्ठ 182, 183)

101976 में हम्पी को ______ के रूप में मान्यता मिली। (पृष्ठ 188)

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1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली। (पृष्ठ 188)

खंड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 8 प्रश्न

1कृष्णदेव राय तुलुव वंश के शासक थे।

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सही (पृष्ठ 173)

2! धार्मिक भिन्नताओं के कारण दक्कन के सुलतानों और रायों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे।

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ग़लत

(धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी ये संबंध हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे; पृष्ठ 174)

3डोमिंगो पेस को पहाड़ पर चढ़कर विजयनगर का जो भाग दिखा, वह उसे पेरिस जितना विशाल लगा।

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ग़लत

(स्रोत 3 के अनुसार वह पेस को रोम जितना विशाल प्रतीत हुआ; पृष्ठ 176)

4विजयनगर की क़िलेबंदी की दीवारों में पत्थरों को जोड़ने के लिए गारे का प्रयोग किया गया था।

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ग़लत

(गारे या जोड़ने के लिए किसी भी वस्तु का प्रयोग नहीं हुआ; फानाकार पत्थर अपने स्थान पर टिके रहते थे; पृष्ठ 177)

5! विजयनगर की क़िलेबंदी केवल शहर को घेरती थी; खेत दीवारों के बाहर छोड़ दिए गए थे।

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ग़लत

(कृषि में प्रयुक्त आसपास के क्षेत्र और जंगल भी घेरे गए थे; पृष्ठ 177)

6राजकीय केंद्र में मन्दिर पूरी तरह से राजगिरी से बने थे, जबकि धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी (नष्ट हो जाने वाली) वस्तुओं से बनी थी।

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सही (पृष्ठ 180)

7विरुपाक्ष मन्दिर पूरी तरह विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद बना।

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ग़लत

(अभिलेखों के अनुसार सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था; साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे कहीं अधिक बड़ा किया गया; पृष्ठ 186)

8विद्वानों का मानना है कि महानवमी डिब्बा के चारों ओर का स्थान सशस्त्र आदमियों, औरतों और बड़ी संख्या में जानवरों की शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था।

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सही (पृष्ठ 181)

खंड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 6 प्रश्न

1★★विजयनगर के लिए घोड़ों का आयात इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था, और यह व्यापार किनके हाथ में था?

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उत्तर: विजयनगर और उसके प्रतिस्पर्धी राज्यों की युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए अरब तथा मध्य एशिया से घोड़ों का आयात बहुत महत्त्वपूर्ण था।

  • आरंभ में: यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था।
  • स्थानीय व्यापारी: कुदिरई चेट्टी अथवा घोड़ों के व्यापारी भी इन विनिमयों में भाग लेते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 172

2★विजयनगर के शासकों ने विशाल मन्दिरों के संरक्षण की किन पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाया?

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उत्तर: विजयनगर से पहले तमिलनाडु में चोलों और कर्नाटक में होयसालों के राज्य विकसित हो चुके थे।

  • इन क्षेत्रों के शासक वर्ग ने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर और बेलूर के चन्नकेशव मंदिर जैसे विशाल मंदिरों को संरक्षण दिया था।
  • विजयनगर के शासकों, जो अपने आप को राय कहते थे, ने इन परंपराओं को आगे बढ़ाया और नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 171, 172

3★★अमर–नायक कौन थे, और वे राजस्व का प्रयोग कैसे करते थे?

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उत्तर: अमर–नायक सैनिक कमांडर थे जिन्हें राय द्वारा प्रशासन के लिए राज्य–क्षेत्र दिये जाते थे। वे किसानों, शिल्पकर्मियों तथा व्यापारियों से भू राजस्व तथा अन्य कर वसूल करते थे।

  • अपने लिए और सेना के लिए: राजस्व का कुछ भाग व्यक्तिगत उपयोग तथा घोड़ों और हाथियों के निर्धारित दल के रख–रखाव के लिए रखते थे। इन दलों से विजयनगर के शासकों को वह सैनिक शक्ति मिली जिसकी मदद से उन्होंने पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप को अपने नियंत्रण में किया।
  • मन्दिर और सिंचाई: राजस्व का कुछ भाग मन्दिरों तथा सिंचाई के साधनों के रख–रखाव पर खर्च होता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 175

4★सोलहवीं शताब्दी के पुर्तगाली यात्री बरबोसा ने विजयनगर के लोगों के आवासों के बारे में क्या लिखा?

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उत्तर: बरबोसा लिखता है: “लोगों के अन्य आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृढ़ हैं, और व्यवसाय के आधार पर कई खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में व्यवस्थित हैं।” किताब यह भी बताती है कि सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 178, 179

5★★राय गोपुरम् क्या थे, और ये क्या संकेत देते थे?

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उत्तर: राय गोपुरम् राजकीय प्रवेशद्वार थे, जो अकसर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे।

  • ये लंबी दूरी से ही मन्दिर के होने का संकेत देते थे।
  • ये संभवत: शासकों की ताकत की याद भी दिलाते थे, जो इतनी ऊँची मीनारों के निर्माण के लिए आवश्यक साधन, तकनीक तथा कौशल जुटाने में सक्षम थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 185, 186

6★विजयनगर के मन्दिरों के सभागारों का प्रयोग किन कामों के लिए होता था?

उत्तर देखिए

उत्तर: मन्दिर के सभागारों का प्रयोग विविध प्रकार के कार्यों के लिए होता था:

  • कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रम देखने के लिए रखी जाती थीं।
  • कुछ में देवी–देवताओं के विवाह के उत्सव पर आनंद मनाया जाता था, और कुछ में देवी–देवताओं को झूला झुलाया जाता था।

इन अवसरों पर ऐसी विशिष्ट मूर्तियाँ काम में आती थीं जो छोटे केंद्रीय देवालयों की मूर्तियों से भिन्न होती थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 187

खंड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 5 प्रश्न

1★★विजयनगर की क़िलेबंदी की तीन विशेषताएँ बताइए।

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उत्तर: फ़ारस के शासक का दूत अब्दुर रज़्ज़ाक इस क़िलेबंदी से बहुत प्रभावित हुआ और उसने दुर्गों की सात पंक्तियों का उल्लेख किया।

  • खेत और जंगल भी भीतर: दीवारों से न केवल शहर को, बल्कि कृषि में प्रयुक्त आसपास के क्षेत्र तथा जंगलों को भी घेरा गया था। सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर की पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी।
  • बिना गारे की चिनाई: गारे या जोड़ने के लिए किसी भी वस्तु का प्रयोग नहीं हुआ। पत्थर के टुकड़े फानाकार थे, इसलिए अपने स्थान पर टिके रहते थे; दीवारों के अंदर का भाग मिट्टी और मलवे के मिश्रण से बना था।
  • बुर्ज़: वर्गाकार तथा आयताकार बुर्ज़ बाहर की ओर निकले हुए थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177

2★★विजयनगर के शासकों ने कृषि–क्षेत्रों को क़िलेबंद भूभाग के भीतर क्यों रखा?

उत्तर देखिए

उत्तर: मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य अक्सर प्रतिपक्ष को खाद्य सामग्री से वंचित करके समर्पण के लिए बाध्य करना होता था।

  • लंबी घेराबंदी: ये घेराबंदियाँ कई महीनों और यहाँ तक कि वर्षों तक चल सकती थीं।
  • आम उपाय: शासक आम तौर पर क़िलेबंद क्षेत्रों के भीतर विशाल अन्नागार बनवाते थे।
  • विजयनगर का उपाय: विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को बचाने के लिए “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” अपनाई। पंद्रहवीं शताब्दी में फ़ारस के शासक के दूत अब्दुर रज़्ज़ाक ने पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेतों, बग़ीचों तथा आवासों का, और पेस ने पहली परिधि से शहर तक के बीच के धान के खेतों और उद्यानों का वर्णन किया है। आज के पुरातत्त्वविदों ने धार्मिक केंद्र तथा नगरीय केंद्र के बीच एक कृषि क्षेत्र के साक्ष्य खोजकर इसकी पुष्टि की है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177, 178

3★पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर आए किन यात्रियों के वृत्तांत सबसे उल्लेखनीय हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: किताब इन यात्रियों के नाम देती है:

  • पंद्रहवीं शताब्दी: निकोलो दे कॉन्ती (इतालवी व्यापारी), अब्दुर रज़्ज़ाक (फ़ारस के राजा का दूत) और अफ़ानासी निकितिन (रूस का एक व्यापारी)।
  • सोलहवीं शताब्दी: दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा पुर्तगाल का फर्नाओ नूनिज़।

इनके साथ विजयनगर के राजाओं और उनके नायकों के बड़ी संख्या में अभिलेख भी मिले हैं, जिनमें मन्दिरों को दिए दानों और महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विवरण है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 176

4★महानवमी के अवसर पर होने वाले अनुष्ठानों और समारोहों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: महानवमी के अवसर पर विजयनगर शासक अपने रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन करते थे।

  • धर्मानुष्ठान: मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा, तथा भैंसों और अन्य जानवरों की बलि।
  • प्रमुख आकर्षण: नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा, साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा, और प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं द्वारा राजा और उसके अतिथियों को दी जाने वाली औपचारिक भेंट।
  • अंतिम दिन: राजा अपनी तथा अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में भव्य समारोह में निरीक्षण करता था; नायक राजा के लिए बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर भी लाते थे।

किताब कहती है: “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 180, 181

5★विजयनगर के शहरी केंद्र के बारे में पुरातत्त्वविदों को क्या पता चला है?

उत्तर देखिए

उत्तर: सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य हैं, फिर भी कुछ बातें सामने आई हैं:

  • चीनी मिट्टी: शहरी केंद्र के उत्तर–पूर्वी कोने समेत कुछ स्थानों पर परिष्कृत चीनी मिट्टी मिली है; पुरातत्त्वविदों का सुझाव है कि हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों।
  • मुस्लिम मुहल्ला: यह मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला भी था। यहाँ के मक़बरों तथा मस्ज़िदों का स्थापत्य हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों से मिलता–जुलता है।
  • पानी के स्रोत: सर्वेक्षणों के अनुसार कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: सामान्य नगरवासियों के लिए पानी के स्रोत थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 178, 179

खंड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न

1★★विजयनगर साम्राज्य के चरमोत्कर्ष और पतन का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की।

  • राजवंश: संगम वंश (1485 तक), फिर सुलुव (1503 तक), फिर तुलुव। 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में चला गया, जो सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक सत्ता में रहे।
  • कृष्णदेव राय (शासनकाल 1509–29): उनके शासन की चारित्रिक विशेषता विस्तार और दृढ़ीकरण थी। रायचूर दोआब (1512), उड़ीसा के शासकों का दमन (1514) और बीजापुर के सुल्तान की पराजय (1520) इसी शासन में हुए। कुछ बेहतरीन मंदिरों के निर्माण तथा कई महत्त्वपूर्ण दक्षिण भारतीय मंदिरों में भव्य गोपुरमों को जोड़ने का श्रेय उन्हें जाता है; अपनी माँ के नाम पर उन्होंने नगलपुरम् उपनगर बसाया।
  • तनाव: 1529 में कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद उनके उत्तराधिकारियों को विद्रोही नायकों या सेनापतियों से चुनौती मिली।
  • राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा), 1565: प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में उतरी सेना को बीजापुर, अहमदनगर तथा गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं ने हराया। किताब इसे “रामराय की जोखिम भरी नीति” का परिणाम बताती है, जिसमें उसने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की, पर सुल्तान एक हो गए।
  • बाद में: साम्राज्य का केंद्र पूर्व की ओर चला गया; अराविदु राजवंश ने पेनुकोण्डा से और बाद में चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप) से शासन किया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 171, 173, 174

2★★हम्पी के भग्नावशेष कैसे प्रकाश में आए, और इतिहासकारों ने विजयनगर का इतिहास किन स्रोतों से जोड़ा?

उत्तर देखिए

उत्तर: 1565 में लूटे जाने के बाद विजयनगर उजड़ गया, पर कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के निवासियों ने इसे हम्पी नाम से याद रखा।

  • 1800, मैकेन्ज़ी: ईस्ट इण्डिया कंपनी में कार्यरत अभियंता तथा पुराविद कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेषों को प्रकाश में लाया और इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। उनकी शुरुआती जानकारियाँ विरुपाक्ष मंदिर तथा पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं।
  • अभिलेख और छाया–चित्र: 1836 से अभिलेखकर्ताओं ने यहाँ और हम्पी के अन्य मंदिरों से कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे किए; 1856 ई. से छाया चित्रकारों ने भवनों के चित्र संकलित किए।
  • मिलान: इतिहासकारों ने इन स्रोतों का मिलान विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों तथा तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे गए साहित्य से किया।
  • बीसवीं शताब्दी: 1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली। 1980 के दशक के आरंभ में अवशेषों के सूक्ष्म प्रलेखन की एक बड़ी परियोजना शुरू हुई, जिसमें लगभग बीस वर्षों तक दुनिया भर के दर्जनों विद्वानों ने काम किया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 170, 188

3★★विजयनगर के राजकीय केंद्र की प्रमुख इमारतों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: राजकीय केंद्र बस्ती के दक्षिण–पश्चिमी भाग में था। इसमें 60 से भी अधिक मन्दिर थे और लगभग तीस संरचनाओं की पहचान महलों के रूप में की गई है।

  • राजा का भवन: यह अंत:क्षेत्र की सबसे विशाल संरचना है, पर इसके राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं मिला है। इसके दो प्रभावशाली मंच सभा मंडप और महानवमी डिब्बा कहलाते हैं।
  • महानवमी डिब्बा: लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊँचाई तक जाने वाला विशालकाय मंच, जिससे महानवमी के अनुष्ठान जुड़े थे। इसका ठीक प्रयोग अब भी एक पहेली है।
  • कमल महल: उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने यह नाम रखा; एक सुझाव है कि यह परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।
  • हज़ार राम मन्दिर: संभवत: केवल राजा और उनके परिवार के प्रयोग के लिए; इसकी आंतरिक दीवारों पर रामायण से लिए गए दृश्यांश उत्कीर्णित हैं।

राजकीय केंद्र के मन्दिर पूरी तरह से राजगिरी से बने थे, जबकि धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी वस्तुओं से बनी थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 179, 180, 181, 182, 183

4★★विजयनगर के धार्मिक केंद्र के मन्दिर स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: धार्मिक केंद्र तुंगभद्रा नदी के तट से लगे शहर के चट्टानी उत्तरी भाग में था। इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण का इतिहास पल्लव, चालुक्य, होयसाल तथा चोल राजवंशों तक जाता है।

  • राजा और देवता: यह संभव है कि विजयनगर के स्थान का चयन विरुपाक्ष तथा पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था। राजकीय आदेशों पर कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” अंकित होता था, और मन्दिरों में राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ प्रदर्शित की जाने लगीं।
  • राय गोपुरम्: विशाल राजकीय प्रवेशद्वार, जो केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे और लंबी दूरी से मन्दिर का संकेत देते थे।
  • मण्डप और गलियारे: मण्डप तथा लंबे स्तंभों वाले गलियारे, जो अकसर देवस्थलों के चारों ओर बने थे।
  • विरुपाक्ष मन्दिर: सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था; साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे कहीं अधिक बड़ा किया गया। मुख्य मन्दिर के सामने का मण्डप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया, और पूर्वी गोपुरम् का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
  • विट्ठल मन्दिर: विट्ठल विष्णु का एक रूप हैं, जो सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते थे। यहाँ कई सभागार और रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर है; मन्दिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में रथ गलियाँ जाती हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 184, 185, 186, 187, 188

5★विजयनगर में पानी की व्यवस्था का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: विजयनगर की भौगोलिक स्थिति की सबसे चौंकाने वाली बात तुंगभद्रा नदी द्वारा यहाँ बना एक प्राकृतिक कुण्ड है। यह नदी उत्तर–पूर्व दिशा में बहती है।

  • हौज़: आस–पास की ग्रेनाइट पहाड़ियों से कई जल–धाराएँ आकर नदी से मिलती हैं; लगभग सभी धाराओं के साथ–साथ बाँध बनाकर अलग–अलग आकारों के हौज़ बनाए गए थे। यह प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक था, इसलिए पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध ज़रूरी थे।
  • कमलपुरम् जलाशय: पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में बना; इसके पानी से आस–पास के खेत सींचे जाते थे और एक नहर से इसे राजकीय केंद्र तक भी ले जाया गया।
  • हिरिया नहर: इसमें तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी आता था और यह धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी को सींचती थी; संभवत: इसे संगम वंश के राजाओं ने बनवाया।
  • स्रोत 4: कृष्णदेव राय के बनवाए एक जलाशय के वर्णन में पानी पाइपों से आने, बगीचों और धान के खेतों की सिंचाई, और “पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी” के काम करने की बात है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177

6★विजयनगर के भवन हमें इतिहास के बारे में क्या बताते हैं, और कौन-से प्रश्न खुले छोड़ देते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: सुरक्षित भवन बताते हैं कि स्थानों को कैसे व्यवस्थित किया गया और प्रयोग में लाया गया।

  • सामग्री और तकनीक: किन वस्तुओं और तकनीकों से भवन बने, और कैसे बने।
  • रक्षा: क़िलेबंदी के अध्ययन से शहर की प्रतिरक्षण आवश्यकताओं और सामरिक तैयारी का पता चलता है।
  • विचार और प्रतीक: दूसरी जगहों के भवनों से तुलना करने पर विचारों के फैलाव और सांस्कृतिक प्रभावों का पता चलता है; इन्हें समझने के लिए साहित्य, अभिलेखों तथा लोकप्रचलित परंपराओं की जानकारी जोड़नी पड़ती है।
  • खुले प्रश्न: भवनों के नक्शे कौन बनाता था? राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आते थे, और उन्हें किस प्रकार के वेतन मिलते थे? निर्माण के लिए कच्चा माल कैसे और कहाँ से लाया जाता था? किताब कहती है कि इनके उत्तर हम भवनों को देखने मात्र से नहीं दे सकते।

किताब के अनुसार “संभवत: अन्य स्त्रोतों के प्रयोग से जारी शोध कुछ और संकेत दे सकें।”

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 191, 192

खंड छ — स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक) — 4 प्रश्न

1★★स्रोत 2 (राजा और व्यापारी) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“एक राजा को अपने बन्दरगाहों को सुधारना चाहिए” “घोड़ों, हाथियों, रत्नों, चंदन, मोती तथा अन्य वस्तुओं का खुले तौर पर आयात किया जा सके” “उन विदेशी नाविकों जिन्हें तूफानों, बीमारी या थकान के कारण उनके देश में उतरना पड़ता है, की भली–भाँति देखभाल की जा सके” “सुदूर देशों के व्यापारियों, जो हाथियों और अच्छे घोड़ों का आयात करते हैं, को रोज बैठक में बुलाकर, तोहफ़े देकर तथा उचित मुनाफे की स्वीकृति देकर अपने साथ संबद्ध करना चाहिए।” “ऐसा करने पर ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) कृष्णदेव राय (शासनकाल 1509–29) ने, शासनकला पर तेलुगु भाषा की अपनी कृति अमुक्तमल्यद में।
  • (ख) तूफ़ान, बीमारी या थकान के कारण उतरने वाले विदेशी नाविकों की भली–भाँति देखभाल होनी चाहिए।
  • (ग) विजयनगर की युद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए घोड़ों और हाथियों का आयात सेना के लिए ज़रूरी था; अंश कहता है कि व्यापारियों को साथ रखने से ये वस्तुएँ दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी। साथ ही व्यापार से प्राप्त राजस्व राज्य की समृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान देता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 172, 173

2★★स्रोत 3 (विशाल, फैला हुआ शहर) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“यह एक स्थान से पूरी तरह नहीं देखा जा सकता” “यह कई पर्वत शृंखलाओं के बीच स्थित है” “वहाँ से मैंने जो देखा वह मुझे रोम जितना विशाल प्रतीत हुआ, और देखने में अत्यंत सुन्दर” “इसमें पेड़ों के कई उपवन हैं, आवासों के बगीचों में, तथा पानी की कई नालियाँ जो इसमें आती हैं, तथा कई स्थानों पर झीलें हैं”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) डोमिंगो पेस।
  • (ख) क्योंकि शहर कई पर्वत शृंखलाओं के बीच स्थित है; पेस एक पहाड़ पर चढ़कर उसका एक बड़ा भाग ही देख पाया।
  • (ग) विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक था, इसलिए वहाँ उपवन, बगीचे, नालियाँ और झीलें ध्यान खींचती थीं। ये पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के उन व्यापक प्रबंधों का परिणाम थे जिनका वर्णन किताब करती है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 176, 177

3★स्रोत 4 (हौज़ों/जलाशयों का निर्माण किस प्रकार होता था?) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“दो पहाड़ियों के मुख–विबर पर” “जलाशय में तीन विशाल स्तंभ बने हैं” “बगीचों तथा धान के खेतों की सिंचाई” “इस जलाशय को बनाने के लिए इस राजा ने एक पूरी पहाड़ी को तुड़वा दिया…” “वहाँ पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी थे, चीटियों की तरह…”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) कृष्णदेव राय ने।
  • (ख) बगीचों तथा धान के खेतों की सिंचाई के लिए।
  • (ग) विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक था, इसलिए पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध आवश्यक थे। इसी लिए जलधाराओं पर बाँध बनाकर हौज़ बनाए गए, जैसे कमलपुरम् जलाशय।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 177

4★स्रोत 5 (बाज़ार) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
पेस: “आगे जाने पर एक चौड़ी और सुंदर गली पाते हैं… इस गली में कई व्यापारी रहते हैं और वहाँ आप सभी प्रकार के माणिक्य, और हीरे, और पन्ने, और मोती, और छोटे मोती, और वस्त्र, और पृथ्वी पर होने वाली हर वस्तु जिसे आप खरीदना चाहेंगे, पाएँगे।” पेस शहर को “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” कहता है, जहाँ बाज़ार “चावल, गेहूँ, अनाज, भारतीय मकई और कुछ मात्रा में जौ तथा सेम, मूँग, दालें, काला चना जैसे खाद्य पदार्थों से भरे रहते थे”। नूनिज़: विजयनगर के बाज़ार “प्रचुर मात्रा में फलों, अंगूरों और संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से भरे रहते थे और सभी बहुत सस्ते।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” के रूप में, जहाँ अनाज सस्ते दामों पर तथा प्रचुर मात्रा में मिलता था।
  • (ख) फलों, अंगूरों, संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से।
  • (ग) पेस लिखता है कि उस गली में “सभी प्रकार के माणिक्य, और हीरे, और पन्ने, और मोती” और वस्त्र मिलते थे। इन वर्णनों से पता चलता है कि विजयनगर के बाज़ारों में खाने का सामान भरपूर और सस्ता था, और समृद्ध लोग रत्नों और आभूषणों जैसी मँहगी वस्तुएँ खरीदते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7, पृष्ठ 172, 191

उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकलंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर
2 अंक30–40 शब्दउत्तर + कारण या उदाहरण
3 अंक60–80 शब्दतीन बिंदु, पूरे वाक्यों में
4 अंक (स्रोत)हर भाग 1–3 वाक्यपहले अंश में उत्तर खोजिए, फिर किताब की बात जोड़िए
5 अंकलगभग 120 शब्दभूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष

★इस अध्याय के लिए तीन सलाह:

  1. किताब के शब्द लिखिए: राय, नायक, अमर–नायक, सुलतान, गजपति, अश्वपति, नरपति, यवन, कुदिरई चेट्टी, महानवमी डिब्बा, गोपुरम्, मण्डप, राजकीय केंद्र, धार्मिक केंद्र।
  2. हर बात के साथ व्यक्ति, जगह और समय लिखिए: अब्दुर रज़्ज़ाक (फ़ारस के राजा का दूत, पंद्रहवीं शताब्दी), डोमिंगो पेस और फर्नाओ नूनिज़ (सोलहवीं शताब्दी), कॉलिन मैकेन्ज़ी (1800)।
  3. तिथियाँ किताब की तरह लिखिए: 1336, कृष्णदेव राय (शासनकाल 1509–29), 1512, 1514, 1520, 1542, 1565, 1976।

तीन नमूना परीक्षा-पत्र

हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खंडों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में किसने की?1
2रिक्त स्थान भरिए: कृष्णदेव राय ने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप ______ नामक उपनगर की स्थापना की।1
3सही या ग़लत: विजयनगर की क़िलेबंदी केवल शहर को घेरती थी; खेत दीवारों के बाहर छोड़ दिए गए थे।1
4विजयनगर के लिए घोड़ों का आयात इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था, और यह व्यापार किनके हाथ में था?2
5राय गोपुरम् क्या थे, और ये क्या संकेत देते थे?2
6विजयनगर की क़िलेबंदी की तीन विशेषताएँ बताइए।3
7विजयनगर साम्राज्य के चरमोत्कर्ष और पतन का वर्णन कीजिए।5
8विजयनगर के भवन हमें इतिहास के बारे में क्या बताते हैं, और कौन-से प्रश्न खुले छोड़ देते हैं?5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1अमर–नायक प्रणाली के कई तत्त्व किस प्रणाली से लिए गए प्रतीत होते हैं?1
2रिक्त स्थान भरिए: 1976 में हम्पी को ______ के रूप में मान्यता मिली।1
3सही या ग़लत: धार्मिक भिन्नताओं के कारण दक्कन के सुलतानों और रायों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे।1
4अमर–नायक कौन थे, और वे राजस्व का प्रयोग कैसे करते थे?2
5विजयनगर के मन्दिरों के सभागारों का प्रयोग किन कामों के लिए होता था?2
6महानवमी के अवसर पर होने वाले अनुष्ठानों और समारोहों का वर्णन कीजिए।3
7हम्पी के भग्नावशेष कैसे प्रकाश में आए, और इतिहासकारों ने विजयनगर का इतिहास किन स्रोतों से जोड़ा?5
8विजयनगर के राजकीय केंद्र की प्रमुख इमारतों का वर्णन कीजिए।5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1विजयनगर के सभी राजकीय आदेशों पर सामान्यतया कन्नड़ लिपि में कौन-से शब्द अंकित होते थे?1
2रिक्त स्थान भरिए: विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे ______ क्षेत्रों में से एक था, इसलिए पानी के संचयन और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध करना आवश्यक था।1
3सही या ग़लत: विरुपाक्ष मन्दिर पूरी तरह विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद बना।1
4विजयनगर के शासकों ने विशाल मन्दिरों के संरक्षण की किन पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाया?2
5सोलहवीं शताब्दी के पुर्तगाली यात्री बरबोसा ने विजयनगर के लोगों के आवासों के बारे में क्या लिखा?2
6विजयनगर के शासकों ने कृषि–क्षेत्रों को क़िलेबंद भूभाग के भीतर क्यों रखा?3
7विजयनगर के धार्मिक केंद्र के मन्दिर स्थापत्य की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।5
8विजयनगर में पानी की व्यवस्था का वर्णन कीजिए।5