कुल 62 प्रश्न
तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए। ! वाले प्रश्नों में अक्सर ग़लती होती है।
खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II” (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
1एक कृषक समाज के सांस्कृतिक आचरणों का वर्णन करने के लिए “महान” और “लघु” परंपरा जैसे शब्द किस बीसवीं शताब्दी के समाजशास्त्री ने दिए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) राबर्ट रेडफील्ड
व्याख्या: रेडफील्ड ने देखा कि किसान समाज के प्रभुत्वशाली वर्ग के कर्मकांडों और पद्धतियों का अनुकरण करते थे, और दोनों परंपराओं में समय के साथ आपसी लेन-देन से बदलाव हुए। अमीर खुसरो कवि और संगीतज्ञ थे; मीर खुर्द किरमानी और अब्दुल हक मुहाद्दिस देहलवी ने सूफ़ी संतों की जीवनियाँ (तज़किरा) लिखीं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 141, 157, 165
2★प्रारंभिक भक्ति आंदोलन (लगभग छठी शताब्दी) का नेतृत्व अलवारों और नयनारों ने किया। अलवार किसकी भक्ति में तन्मय थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) विष्णु
व्याख्या: अलवार विष्णु भक्ति में तन्मय थे और नयनार शिवभक्त थे। दोनों एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हुए तमिल में अपने इष्ट की स्तुति में भजन गाते थे। मारिची एक बौद्ध देवी है (चित्र 6.3)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 142, 143
3★★अलवार संतों के जिस मुख्य काव्य संकलन का वर्णन “तमिल वेद” के रूप में किया जाता था, उसका नाम क्या है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) नलयिरादिव्यप्रबंधम्
व्याख्या: नलयिरादिव्यप्रबंधम् (“चार हज़ार पावन रचनाएँ”) को “तमिल वेद” कहकर इसका महत्त्व संस्कृत के चारों वेदों जितना बताया गया। दसवीं शताब्दी तक बारह अलवारों की रचनाएँ इसमें संकलित हो चुकी थीं। तवरम में अप्पार, संबंदर और सुंदरार की कविताएँ हैं, कीर्तनघोष असम के शंकरदेव की रचना है और कबीर बीजक कबीर पंथियों ने सँभाला।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 144, 160, 164
4945 ईसवी के एक अभिलेख के अनुसार चोल सम्राट परांतक प्रथम ने एक शिव मंदिर में किन संत कवियों की धातु प्रतिमाएँ स्थापित करवाईं?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) अप्पार, संबंदर और सुंदरार
व्याख्या: अप्पार, संबंदर और सुंदरार की कविताएँ तवरम में रखी गईं, जो तमिल भाषा के शैव भजनों का संकलन है; इन संतों की मूर्तियों को उत्सव के जुलूस में निकाला जाता था। अंडाल और तोंदराडिप्पोडि विष्णु के भक्त अलवार थे, और कराइक्काल अम्मइयार एक शिवभक्त स्त्री थीं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 144, 145, 146
5★बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक में वीरशैव आंदोलन का नेतृत्व करने वाले बासवन्ना (1106–68) कौन थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) एक ब्राह्मण, जो कलाचुरी राजा के दरबार में मंत्री थे
व्याख्या: बासवन्ना ब्राह्मण थे और कलाचुरी राजा के दरबार में मंत्री थे। उनके अनुयायी वीरशैव (शिव के वीर) और लिंगायत (लिंग धारण करने वाले) कहलाए। जंगम वे यायावर भिक्षु हैं जिन्हें लिंगायत श्रद्धा से देखते हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 146, 147
6★★लिंगायत मृत्यु के बारे में क्या मानते हैं?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) भक्त मृत्यु के बाद शिव में लीन हो जाएँगे और इस संसार में फिर नहीं लौटेंगे
व्याख्या: मृत्यु के बाद शिव में लीन होने के विश्वास के कारण लिंगायत धर्मशास्त्र में बताए गए श्राद्ध संस्कार का पालन नहीं करते और अपने मृतकों को विधिपूर्वक दफनाते हैं। उन्होंने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर भी प्रश्न उठाया। उर्स की परिपाटी सूफ़ी पीरों की दरगाहों से जुड़ी है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 147, 153
7★अरब क्षेत्र से बाहर इस्लाम का प्रसार होने पर कुरान और हदीस के अलावा शरिया के कौन-से दो और स्रोत माने जाने लगे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) क़ियास और इजमा
व्याख्या: क़ियास का अर्थ है सदृशता के आधार पर तर्क और इजमा का अर्थ है समुदाय की सहमति। जज़िया एक कर था, मेहराब और मिम्बर मस्जिद के हिस्से हैं, और ज़िक्र व समा सूफ़ी उपासना के तरीक़े हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 149, 151, 157
8खोजा इस्माइली (शिया) समुदाय के लोग कुरान के विचार व्यक्त करने के लिए राग में निबद्ध जो भक्ति गीत पंजाबी, मुल्तानी, सिंधी, कच्छी, हिंदी और गुजराती में गाते थे, उन्हें क्या कहते थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) जीनन
व्याख्या: जीनन शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द ज्ञान से है; ये गीत दैनिक प्रार्थना में गाए जाते थे। वचन वीरशैवों की कन्नड़ रचनाएँ हैं, कौल अमीर खुसरो ने कव्वाली में चलाया और शबद बाबा गुरु नानक के पंजाबी भजन हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 147, 150, 157, 163
9★मस्जिदों का कौन-सा स्थापत्य तत्व हर जगह (सार्वभौमिक) एक जैसा था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) इमारत का मक्का की तरफ़ अनुस्थापन, जो मेहराब और मिम्बर से दिखता था
व्याख्या: मेहराब प्रार्थना का आला है और मिम्बर व्यासपीठ। छत और निर्माण के सामान में भिन्नता दिखती है: केरल की तेरहवीं शताब्दी की एक मस्जिद की छत शिखर के आकार की है (चित्र 6.9), और श्रीनगर की शाह हमदान मस्जिद (1395) कश्मीरी लकड़ी की स्थापत्य कला का उदाहरण है (चित्र 6.11)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 151, 152
10★“सूफ़ीवाद” शब्द के बारे में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) यह उन्नीसवीं शताब्दी में गढ़ा गया एक अंग्रेज़ी शब्द है; इस्लामी ग्रंथों में इसके लिए तसव्वुफ़ शब्द आता है
व्याख्या: कुछ विद्वानों के अनुसार तसव्वुफ़ शब्द “सूफ़” (ऊन) से निकला है, तो दूसरे इसे “सफ़ा” से जोड़ते हैं। जंज़ीर “सिलसिला” का अर्थ है, और ख़ानक़ाह वह जगह थी जिसके इर्द-गिर्द सूफ़ी अपना संगठित समुदाय बनाते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 152, 153
11★★“सिलसिला” शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) जंज़ीर
व्याख्या: सिलसिला शेख और मुरीद के बीच एक निरंतर रिश्ते को दिखाता है, जिसकी पहली अटूट कड़ी पैगम्बर मोहम्मद से जुड़ी है। “दरबार” फ़ारसी शब्द दरगाह का अर्थ है, “विवाह” उर्स का और “कहावत” कौल का।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 153, 157
12★कलंदर, मदारी, मलंग और हैदरी जैसे सूफ़ी, जो शरिया की अवहेलना करते थे, क्या कहलाते थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) बे–शरिया
व्याख्या: शरिया का पालन करने वाले सूफ़ी बा–शरिया कहलाते थे। उलमा इस्लाम के ज्ञाता विद्वान थे, और ज़िम्मी वह संरक्षित श्रेणी थी जिसमें यहूदी, ईसाई और भारत में हिंदू भी गिने गए।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 148, 149, 153
13! चिश्ती सिलसिले का नाम कहाँ से पड़ा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) मध्य अफगानिस्तान के चिश्ती शहर से
व्याख्या: ज़्यादातर सिलसिलों के नाम उन्हें स्थापित करने वालों के नाम पर पड़े, जैसे कादरी सिलसिला शेख अब्दुल कादिर जिलानी के नाम पर। कुछ सिलसिलों का नाम जन्मस्थान पर पड़ा: चिश्ती नाम मध्य अफगानिस्तान के चिश्ती शहर से लिया गया। इसलिए शेख मुइनुद्दीन चिश्ती के नाम से इसे जोड़ना ग़लत है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 153
14अजमेर में ख़्वाजा मुइनुद्दीन की दरगाह पर आने वाला पहला सुल्तान कौन था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) मुहम्मद बिन तुगलक (1324–51)
व्याख्या: शेख की मज़ार पर सबसे पहली इमारत मालवा के सुल्तान गियासुद्दीन खलजी ने पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में बनवाई। अकबर यहाँ चौदह बार आया। उलुग़ ख़ान का किस्सा शेख फ़रीदुद्दीन से जुड़ा है (स्रोत 9)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 155, 159
15★अमीर खुसरो (1253–1325) ने चिश्ती समा को एक विशिष्ट आकार देने के लिए किसका प्रचलन किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) कौल
व्याख्या: कौल अरबी शब्द है जिसका अर्थ है कहावत; इसे कव्वाली के शुरू और आख़िर में गाया जाता था। जीनन खोजा समुदाय के गीत हैं, कबीर की कुछ रचनाएँ उलटबाँसी (“उलटी कही उक्तियाँ”) कहलाती हैं और चरखानामा चरखे के चलने की धुन पर आधारित एक सूफ़ी गीत है (स्रोत 8)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 150, 157, 160
16★★दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद सुल्तानों ने उलमा की यह माँग क्यों ठुकरा दी कि शरिया लागू किया जाए?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) सुल्तान जानते थे कि उनकी अधिकांश प्रजा इस्लाम धर्म मानने वाली नहीं है
व्याख्या: उलमा की माँग ठुकराने के बाद सुल्तानों ने सूफ़ी संतों का सहारा लिया, जो अपनी आध्यात्मिक सत्ता को अल्लाह से उद्भूत मानते थे और उलमा द्वारा शरिया की व्याख्या पर निर्भर नहीं थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 158
17कबीर की बानी का संकलन कबीर ग्रंथावली किससे जुड़ा है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) राजस्थान के दादू पंथियों से
व्याख्या: कबीर बीजक कबीर पंथियों द्वारा वाराणसी और उत्तर प्रदेश के अन्य स्थानों पर संरक्षित है, और कबीर के कई पद आदि ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। शंकरदेव असम में वैष्णव धर्म के प्रचारक थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 160, 164
18! बाबा गुरु नानक, उनके चार उत्तराधिकारियों, बाबा फरीद, रविदास और कबीर की बानी को आदि ग्रंथ साहिब में किसने संकलित किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) पाँचवें गुरु अर्जन देव जी
व्याख्या: ग्रंथ का संकलन बाबा गुरु नानक ने नहीं, पाँचवें गुरु अर्जन देव जी ने किया। सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने नवें गुरु तेग बहादुर की रचनाएँ भी इसमें शामिल कीं और इसे गुरु ग्रंथ साहिब कहा गया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 163
19कुछ परंपराओं के अनुसार मीराबाई के गुरु कौन थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) रैदास, जो एक चर्मकार थे
व्याख्या: एक चर्मकार को गुरु मानने से पता चलता है कि मीरा ने जातिवादी समाज की रूढ़ियों का उल्लंघन किया। रामानंद को कुछ जीवनियाँ कबीर का गुरु बताती हैं; बासवन्ना कर्नाटक के वीरशैव आंदोलन के नेता थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 146, 162, 164
20फवाइद–अल–फुआद किस प्रकार का सूफ़ी ग्रंथ है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) शेख निज़ामुद्दीन औलिया की बातचीत (मुलफुज़ात) का संग्रह, जिसे अमीर हसन सिजज़ी देहलवी ने संकलित किया
व्याख्या: स्रोत 9 (शाही भेंट अस्वीकार) में फवाइद–अल–फुआद से लिया एक अंश दिया गया है। भारत में लिखा पहला सूफ़ी तज़किरा मीर खुर्द किरमानी का सियार–उल–औलिया है, सरहिंदी के पत्र मक्तुबात–ए–इमाम रब्बानी में हैं, और जहाँआरा की लिखी जीवनी मुनिस–अल–अखाह है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 156, 165
खंड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
1पुरी (उड़ीसा) में मुख्य देवता को बारहवीं शताब्दी तक आते-आते ______ (शाब्दिक अर्थ में संपूर्ण विश्व का स्वामी), विष्णु के एक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। (पृष्ठ 141)
उत्तर देखिए
पुरी (उड़ीसा) में मुख्य देवता को बारहवीं शताब्दी तक आते-आते जगन्नाथ (शाब्दिक अर्थ में संपूर्ण विश्व का स्वामी), विष्णु के एक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। (पृष्ठ 141)
2धर्म के इतिहासकार भक्ति परंपरा को दो मुख्य वर्गों में बाँटते हैं: ______ (विशेषण सहित) और निर्गुण (विशेषण विहीन); पहले वर्ग में शिव, विष्णु तथा उनके अवतार व देवियों की आराधना आती है, जिनकी मूर्त रूप में अवधारणा हुई। (पृष्ठ 143)
उत्तर देखिए
धर्म के इतिहासकार भक्ति परंपरा को दो मुख्य वर्गों में बाँटते हैं: सगुण (विशेषण सहित) और निर्गुण (विशेषण विहीन); पहले वर्ग में शिव, विष्णु तथा उनके अवतार व देवियों की आराधना आती है, जिनकी मूर्त रूप में अवधारणा हुई। (पृष्ठ 143)
3मालाबार तट (केरल) पर बसे अरब मुसलमान व्यापारियों ने स्थानीय मलयालम भाषा के साथ ______ और मातृगृहता जैसे स्थानीय आचार भी अपनाए। (पृष्ठ 150)
उत्तर देखिए
मालाबार तट (केरल) पर बसे अरब मुसलमान व्यापारियों ने स्थानीय मलयालम भाषा के साथ मातृकुलीयता और मातृगृहता जैसे स्थानीय आचार भी अपनाए। (पृष्ठ 150)
4प्रवासी समुदायों के लिए एक अधिक सामान्य शब्द ______ था, जो इस बात की ओर इंगित करता था कि वे वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे। (पृष्ठ 151)
उत्तर देखिए
प्रवासी समुदायों के लिए एक अधिक सामान्य शब्द म्लेच्छ था, जो इस बात की ओर इंगित करता था कि वे वर्ण नियमों का पालन नहीं करते थे। (पृष्ठ 151)
5शेख निज़ामुद्दीन औलिया (चौदहवीं शताब्दी) की ग़ियासपुर वाली ख़ानक़ाह में कई छोटे-छोटे कमरे और एक बड़ा हाल (______) था, जहाँ सहवासी और अतिथि रहते और उपासना करते थे। (पृष्ठ 153)
उत्तर देखिए
शेख निज़ामुद्दीन औलिया (चौदहवीं शताब्दी) की ग़ियासपुर वाली ख़ानक़ाह में कई छोटे-छोटे कमरे और एक बड़ा हाल (जमातख़ाना) था, जहाँ सहवासी और अतिथि रहते और उपासना करते थे। (पृष्ठ 153)
6शेख निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह में सामुदायिक रसोई (लंगर) ______ (बिना माँगी खैर) पर चलती थी। (पृष्ठ 154)
उत्तर देखिए
शेख निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह में सामुदायिक रसोई (लंगर) फ़ुतूह (बिना माँगी खैर) पर चलती थी। (पृष्ठ 154)
7शेख निज़ामुद्दीन औलिया के अनुयायी उन्हें ______ (अर्थात शेखों में सुल्तान) कह कर संबोधित करते थे। (पृष्ठ 158)
उत्तर देखिए
शेख निज़ामुद्दीन औलिया के अनुयायी उन्हें सुल्तान–उल–मशेख (अर्थात शेखों में सुल्तान) कह कर संबोधित करते थे। (पृष्ठ 158)
8बाबा गुरु नानक ने अपने अनुयायी ______ को अपने बाद गुरुपद पर आसीन किया; इस परिपाटी का पालन 200 वर्षों तक होता रहा। (पृष्ठ 163)
उत्तर देखिए
बाबा गुरु नानक ने अपने अनुयायी अंगद को अपने बाद गुरुपद पर आसीन किया; इस परिपाटी का पालन 200 वर्षों तक होता रहा। (पृष्ठ 163)
9बाबा गुरु नानक अपने शबद अलग-अलग रागों में गाते थे और उनका सेवक ______ रबाब बजाकर उनका साथ देता था। (पृष्ठ 163)
उत्तर देखिए
बाबा गुरु नानक अपने शबद अलग-अलग रागों में गाते थे और उनका सेवक मरदाना रबाब बजाकर उनका साथ देता था। (पृष्ठ 163)
10पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में असम में वैष्णव धर्म के मुख्य प्रचारक शंकरदेव ने आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार के लिए सत्र या मठ तथा ______ जैसे प्रार्थनागृह की स्थापना को बढ़ावा दिया। (पृष्ठ 164)
उत्तर देखिए
पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में असम में वैष्णव धर्म के मुख्य प्रचारक शंकरदेव ने आध्यात्मिक ज्ञान के प्रचार के लिए सत्र या मठ तथा नामघर जैसे प्रार्थनागृह की स्थापना को बढ़ावा दिया। (पृष्ठ 164)
खंड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 8 प्रश्न
1ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रसार करने वाले पौराणिक ग्रंथ सरल संस्कृत छंदों में थे, जिन्हें वैदिक विद्या से विहीन स्त्रियाँ और शूद्र भी ग्रहण कर सकते थे।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 141)
2कुछ इतिहासकारों का मानना है कि तमिलनाडु के अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा व ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज़ उठाई।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 144)
3तमिल क्षेत्र में बौद्ध और जैन धर्म को राजकीय संरक्षण और अनुदान नियमित रूप से मिलता था।
उत्तर देखिए
ग़लत
(उन्हें व्यापारी व शिल्पी वर्ग का प्रश्रय हासिल था; राजकीय संरक्षण और अनुदान उन्हें यदा–कदा ही मिलता था; पृष्ठ 145)
4धर्मशास्त्रों में जिन आचारों को अस्वीकार किया गया था, जैसे वयस्क विवाह और विधवा पुनर्विवाह, बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक के लिंगायतों ने उन्हें मान्यता दी।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 147)
5आठवीं से चौदहवीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथों और अभिलेखों में मुसलमान शब्द का खूब प्रयोग हुआ है।
उत्तर देखिए
ग़लत
(इनमें यह शब्द शायद ही कहीं आया; लोगों का वर्गीकरण उनके जन्मस्थान के आधार पर होता था, जैसे तुर्की मुसलमानों को तुरुष्क, तजाकिस्तान से आए लोगों को ताजिक और फारस के लोगों को पारसीक कहा गया; पृष्ठ 151)
6चिश्ती सूफ़ी सत्ता से दूर रहने पर बल देते थे, इसलिए सत्ताधारी वर्ग से बिना माँगे मिले अनुदान या भेंट भी स्वीकार नहीं करते थे।
उत्तर देखिए
ग़लत
(सत्ताधारी विशिष्ट वर्ग अगर बिना माँगे अनुदान या भेंट देता था तो सूफ़ी संत उसे स्वीकार करते थे; सुल्तानों ने ख़ानक़ाहों को कर मुक्त (इनाम) भूमि अनुदान में दी; पृष्ठ 158)
7इतिहासकारों के अनुसार कबीर और रामानंद का समकालीन होना मुश्किल प्रतीत होता है, जब तक कि उन्हें बहुत ही लंबी आयु न दे दी जाए।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 162)
8मीराबाई (लगभग पंद्रहवीं–सोलहवीं शताब्दी) ने अपने अनुयायियों की एक निजी मंडली की नींव डाली।
उत्तर देखिए
ग़लत
(उनके आसपास अनुयायियों का जमघट नहीं लगा और उन्होंने किसी निजी मंडली की नींव नहीं डाली, फिर भी वे शताब्दियों से प्रेरणा का स्रोत रही हैं; पृष्ठ 164)
खंड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 8 प्रश्न
1★बीसवीं शताब्दी के समाजशास्त्री राबर्ट रेडफील्ड ने एक कृषक समाज के आचरणों को “महान” और “लघु” परंपरा में कैसे बाँटा?
उत्तर देखिए
उत्तर: रेडफील्ड ने एक कृषक समाज के सांस्कृतिक आचरणों का वर्णन करने के लिए ये दो शब्द दिए:
- महान परंपरा: वे कर्मकांड और पद्धतियाँ, जिनका पालन समाज के प्रभुत्वशाली वर्ग, जैसे पुरोहित और राजा, करते थे और जिनका किसान अनुकरण करते थे।
- लघु परंपरा: कृषक समुदाय के वे दूसरे लोकाचार, जो महान परिपाटी से सर्वथा भिन्न थे।
रेडफील्ड ने यह भी देखा कि समय के साथ दोनों परंपराओं के पारस्परिक आदान–प्रदान से दोनों में परिवर्तन हुए।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 141
2★तांत्रिक पूजा पद्धति की तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: अधिकांशत: देवी की आराधना पद्धति को तांत्रिक नाम से जाना जाता है। यह उपमहाद्वीप के कई भागों में प्रचलित थी:
- स्त्री और पुरुष दोनों: इसमें स्त्री और पुरुष दोनों ही शामिल हो सकते थे।
- वर्ग और वर्ण का भेद नहीं: कर्मकांडीय संदर्भ में वर्ग और वर्ण के भेद की अवहेलना की जाती थी।
- दूसरे दर्शनों पर असर: इसके विचारों ने शैव और बौद्ध दर्शन को भी प्रभावित किया, खासतौर से उपमहाद्वीप के पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी भागों में।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 142
3★ज़िम्मी कौन थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: ज़िम्मी (व्युत्पत्ति अरबी शब्द ज़िम्मा से) का अर्थ है संरक्षित श्रेणी:
- कौन: उद्घटित धर्मग्रंथ को मानने वाले लोग, जैसे इस्लामी शासकों के क्षेत्र में रहने वाले यहूदी और ईसाई।
- संरक्षण: ये जज़िया नामक कर चुका कर मुसलमान शासकों से संरक्षण पाने के अधिकारी हो जाते थे।
- भारत में: हिंदुओं को भी इस श्रेणी में शामिल कर लिया गया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 149
4★ग्यारहवीं शताब्दी तक सूफ़ियों की ख़ानक़ाह का संचालन कैसे होता था?
उत्तर देखिए
उत्तर: ग्यारहवीं शताब्दी तक आते–आते सूफ़ी अपने को एक संगठित समुदाय, ख़ानक़ाह (फारसी), के इर्द–गिर्द स्थापित करते थे:
- नियंत्रण: ख़ानक़ाह शेख (अरबी), पीर अथवा मुर्शीद (फारसी) के हाथ में थी।
- अनुयायी और वारिस: वे अनुयायियों (मुरीदों) की भरती करते थे और अपने वारिस (खलीफ़ा) की नियुक्ति करते थे।
- नियम: वे आध्यात्मिक व्यवहार के नियम तय करते थे, और ख़ानक़ाह में रहने वालों के आपसी संबंध और शेख व जनसामान्य के रिश्तों की सीमा भी नियत करते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 152
5★★सूफ़ी परंपरा में ज़ियारत और उर्स से आप क्या समझते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: पीर की मृत्यु के बाद उसकी दरगाह (फारसी में इसका अर्थ दरबार) उसके मुरीदों के लिए भक्ति का स्थल बन जाती थी:
- ज़ियारत: पीर की दरगाह पर ज़ियारत के लिए जाने की परिपाटी चल निकली, खासतौर से उनकी बरसी के अवसर पर।
- उर्स: इस परिपाटी को उर्स (विवाह, मायने पीर की आत्मा का ईश्वर से मिलन) कहा जाता था, क्योंकि लोगों का मानना था कि मृत्यु के बाद पीर ईश्वर से एकीभूत हो जाते हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 153
6★कबीर ने परम सत्य को वर्णित करने के लिए किन परिपाटियों के शब्दों का सहारा लिया?
उत्तर देखिए
उत्तर: कबीर बानी की एक विशिष्टता यह है कि उन्होंने परम सत्य के लिए अनेक परिपाटियों के शब्द लिए:
- इस्लामी दर्शन: अल्लाह, खुदा, हज़रत और पीर।
- वेदांत दर्शन: अलख (अदृश्य), निराकार, ब्रह्मन् और आत्मन्।
- योगी परंपरा: शब्द और शून्य।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 160
7★गुरु गोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ के किन पाँच प्रतीकों का वर्णन किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: दसवें गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ (पवित्रों की सेना) की नींव डाली और उसके पाँच प्रतीक बताए: बिना कटे केश, कृपाण, कच्छ, कंघा और लोहे का कड़ा। उनके नेतृत्व में समुदाय एक सामाजिक, धार्मिक और सैन्य बल के रूप में संगठित होकर सामने आया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 163
8★असम के शंकरदेव के उपदेशों को ‘भगवती धर्म’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: पंद्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में असम में शंकरदेव वैष्णव धर्म के मुख्य प्रचारक के रूप में उभरे:
- नाम का कारण: उनके उपदेश भगवद् गीता और भागवत पुराण पर आधारित थे, इसलिए उन्हें ‘भगवती धर्म’ कहा जाता है।
- मुख्य बात: ये उपदेश सर्वोच्च देवता विष्णु के प्रति पूर्ण समर्पण भाव पर केंद्रित थे।
- उपासना: शंकरदेव ने नाम कीर्तन और श्रद्धावान भक्तों के सत्संग में ईश्वर के नाम उच्चारण पर बल दिया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 164
खंड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 6 प्रश्न
1★★तमिल भक्ति परंपरा (अलवार और नयनार) में स्त्रियों की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: संभवत: इस परंपरा की सबसे बड़ी विशिष्टता इसमें स्त्रियों की उपस्थिति थी:
- अंडाल: इस अलवार स्त्री के भक्ति गीत व्यापक स्तर पर गाए जाते थे (और आज भी गाए जाते हैं)। अंडाल स्वयं को विष्णु की प्रेयसी मानकर अपनी प्रेमभावना को छंदों में व्यक्त करती थीं।
- कराइक्काल अम्मइयार: इस शिवभक्त स्त्री ने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या का मार्ग अपनाया। नयनार परंपरा में उनकी रचनाओं को सुरक्षित किया गया।
- पितृसत्ता को चुनौती: इन स्त्रियों ने अपने सामाजिक कर्तव्यों का परित्याग किया, पर वे किसी वैकल्पिक व्यवस्था अथवा भिक्षुणी समुदाय की सदस्या नहीं बनीं।
इन स्त्रियों की जीवन पद्धति और इनकी रचनाओं ने पितृसत्तात्मक आदर्शों को चुनौती दी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 144
2★★बा–शरिया और बे–शरिया सूफ़ियों में क्या अंतर था? उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: अंतर शरिया के पालन का था; बे–शरिया सूफ़ी ख़ानक़ाह का तिरस्कार भी करते थे:
- बा–शरिया: शरिया का पालन करने वाले सूफ़ी बा–शरिया कहलाते थे।
- ख़ानक़ाह: ग्यारहवीं शताब्दी तक आते–आते सूफ़ी अपने को एक संगठित समुदाय, ख़ानक़ाह, के इर्द–गिर्द स्थापित करते थे, जिसका नियंत्रण शेख, पीर अथवा मुर्शीद के हाथ में था। बे–शरिया इसी ख़ानक़ाह से अलग रहे।
- बे–शरिया: कुछ रहस्यवादियों ने सूफ़ी सिद्धांतों की मौलिक व्याख्या के आधार पर नवीन आंदोलनों की नींव रखी। वे ख़ानक़ाह का तिरस्कार करके फकीर की ज़िंदगी बिताते थे और निर्धनता व ब्रह्मचर्य को गौरव देते थे। शरिया की अवहेलना करने के कारण उन्हें बे–शरिया कहा जाता था।
- उदाहरण: बे–शरिया रहस्यवादी कलंदर, मदारी, मलंग, हैदरी इत्यादि नामों से जाने जाते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 152, 153
3★चोल सम्राटों (नवीं से तेरहवीं शताब्दी) ने नयनार और अलवार संतों का समर्थन क्यों और कैसे किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: नयनार और अलवार संत वेल्लाल कृषकों द्वारा सम्मानित होते थे, इसलिए शासकों ने भी उनका समर्थन पाने का प्रयास किया:
- मंदिर: चोल सम्राटों ने दैवीय समर्थन पाने का दावा किया और अपनी सत्ता के प्रदर्शन के लिए पत्थर और धातु की मूर्तियों से सुसज्जित सुंदर मंदिर बनवाए। उन्होंने विष्णु और शिव के मंदिरों के निर्माण के लिए भूमि–अनुदान दिए।
- भजन: उन्होंने तमिल भाषा के शैव भजनों का गायन इन मंदिरों में प्रचलित किया और ऐसे भजनों का संकलन एक ग्रंथ (तवरम) के रूप में करने का भी ज़िम्मा उठाया।
- संतों की प्रतिमाएँ: 945 ईसवी के एक अभिलेख से पता चलता है कि चोल सम्राट परांतक प्रथम ने अप्पार, संबंदर और सुंदरार की धातु प्रतिमाएँ एक शिव मंदिर में स्थापित करवाईं। इन मूर्तियों को उत्सव में एक जुलूस में निकाला जाता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 145, 146
4★मस्जिदों की स्थापत्य कला में सार्वभौमिक और स्थानीय तत्वों का मिश्रण कैसे दिखता है? उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: एक सार्वभौमिक धर्म के स्थानीय आचारों के संग जटिल मिश्रण का सर्वोत्तम उदाहरण संभवत: मस्जिदों की स्थापत्य कला में दिखता है:
- सार्वभौमिक तत्व: इमारत का मक्का की तरफ़ अनुस्थापन, जो मेहराब (प्रार्थना का आला) और मिम्बर (व्यासपीठ) की स्थापना से लक्षित होता था।
- स्थानीय भिन्नता: छत और निर्माण के सामान जैसे बहुत से तत्वों में भिन्नता देखने में आती है।
- उदाहरण: केरल की तेरहवीं शताब्दी की एक मस्जिद की छत शिखर के आकार की है (चित्र 6.9); बांग्लादेश के मैमनसिंग ज़िले की अतिया मस्जिद (1609) ईंटों की बनी है (चित्र 6.10); श्रीनगर में झेलम नदी के किनारे बनी शाह हमदान मस्जिद (1395) कश्मीरी लकड़ी की स्थापत्य कला का सर्वोत्तम उदाहरण है (चित्र 6.11)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 151, 152
5★अजमेर की ख़्वाजा मुइनुद्दीन की दरगाह के लोकप्रिय होने के कारण बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इस दरगाह का सबसे पहला किताबी ज़िक्र चौदहवीं शताब्दी का है। इसकी लोकप्रियता के कारण ये थे:
- शेख और उनके वारिस: शेख की सदाचारिता और धर्मनिष्ठा तथा उनके आध्यात्मिक वारिसों की महानता।
- राजसी प्रश्रय: मुहम्मद बिन तुगलक (1324–51) यहाँ आने वाला पहला सुल्तान था। सोलहवीं शताब्दी तक आते–आते दरगाह बहुत लोकप्रिय हो गई थी; अकबर यहाँ चौदह बार आया, कभी तो साल में दो–तीन बार। 1568 में उसने तीर्थयात्रियों के लिए खाना पकाने के लिए एक विशाल देग़ भेंट की और दरगाह के अहाते में एक मस्जिद भी बनवाई।
- व्यापारिक मार्ग: दरगाह दिल्ली और गुजरात को जोड़ने वाले व्यापारिक मार्ग पर थी, अत: अनेक यात्री यहाँ आते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 155, 156
6★बाबा गुरु नानक (1469–1539) के संदेश की मुख्य बातें बताइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: बाबा गुरु नानक का संदेश उनके भजनों और उपदेशों में निहित है:
- निर्गुण भक्ति: उन्होंने निर्गुण भक्ति का प्रचार किया। उनके लिए परम पूर्ण रब का कोई लिंग या आकार नहीं था।
- आडंबरों का विरोध: उन्होंने धर्म के सभी बाहरी आडंबरों, जैसे यज्ञ, आनुष्ठानिक स्नान, मूर्ति पूजा व कठोर तप, को अस्वीकार किया, और हिंदू और मुसलमानों के धर्मग्रंथों को भी नकारा।
- उपासना का सरल उपाय: रब की उपासना के लिए उन्होंने निरंतर स्मरण व नाम का जाप बताया, और अपने विचार पंजाबी भाषा में शबद के माध्यम से सामने रखे।
- संगत: उन्होंने अपने अनुयायियों को एक समुदाय में संगठित किया और सामुदायिक उपासना (संगत) के नियम निर्धारित किए, जहाँ सामूहिक रूप से पाठ होता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 162, 163
खंड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न
1★★पूजा प्रणालियों के समन्वय को समझाने के लिए इतिहासकार किन दो प्रक्रियाओं की बात करते हैं? पुरी के जगन्नाथ और देवी संप्रदायों के उदाहरण देकर लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: इतिहासकारों का सुझाव है कि धार्मिक विश्वासों और आचरणों के विकास में कम से कम दो प्रक्रियाएँ कार्यरत थीं:
- पहली प्रक्रिया: ब्राह्मणीय विचारधारा का प्रचार। इसका प्रसार पौराणिक ग्रंथों की रचना, संकलन और परिरक्षण द्वारा हुआ। ये ग्रंथ सरल संस्कृत छंदों में थे, जो वैदिक विद्या से विहीन स्त्रियों और शूद्रों द्वारा भी ग्राह्य थे।
- दूसरी प्रक्रिया: स्त्री, शूद्रों व अन्य सामाजिक वर्गों की आस्थाओं और आचरणों को ब्राह्मणों द्वारा स्वीकृत किया जाना और उन्हें एक नया रूप देना।
- जगन्नाथ (पुरी, उड़ीसा): बारहवीं शताब्दी तक आते–आते वहाँ के मुख्य देवता को जगन्नाथ (शाब्दिक अर्थ में संपूर्ण विश्व का स्वामी), विष्णु के एक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। यह एक स्थानीय देवता थे, जिनकी प्रतिमा पहले भी और आज भी स्थानीय जनजाति के विशेषज्ञ लकड़ी से गढ़ते हैं।
- देवी संप्रदाय: देवी की उपासना अधिकतर सिंदूर से पोते गए पत्थर के रूप में होती थी। इन स्थानीय देवियों को पौराणिक परंपरा में मुख्य देवताओं की पत्नी के रूप में मान्यता दी गई: कभी लक्ष्मी के रूप में विष्णु की पत्नी, कभी पार्वती के रूप में शिव की पत्नी।
- “महान” और “लघु”: समाजशास्त्रियों का मानना है कि समूचे उपमहाद्वीप में अनेक धार्मिक विचारधाराएँ और पद्धतियाँ “महान” संस्कृत–पौराणिक परिपाटी तथा “लघु” परंपरा के बीच हुए अविरल संवाद का परिणाम हैं।
वैदिक देवकुल के अग्नि, इंद्र और सोम जैसे देवता पूरी तरह गौण हो गए और साहित्य व मूर्तिकला में उनका निरूपण नहीं दिखता; फिर भी वेदों को प्रामाणिक माना जाता रहा।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 141, 142
2★★अलवार, नयनार और वीरशैव (लिंगायत) संतों ने जाति प्रथा और ब्राह्मणीय मान्यताओं पर कैसे सवाल उठाए? स्रोत 1 और स्रोत 2 के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: कुछ इतिहासकारों का यह मानना है कि अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा व ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज़ उठाई:
- संत विविध समुदायों से: कुछ हद तक यह बात सत्य प्रतीत होती है, क्योंकि भक्ति संत ब्राह्मण, शिल्पकार, किसान जैसे विविध समुदायों से थे, और कुछ तो उन जातियों से आए थे जिन्हें “अस्पृश्य” माना जाता था।
- स्रोत 1 (तोंदराडिप्पोडि): इस ब्राह्मण अलवार के काव्य में कहा गया है कि विष्णु उन चतुर्वेदियों से भी ज़्यादा, जो अजनबी हैं और विष्णु की सेवा के प्रति निष्ठा नहीं रखते, उन “दासों” को पसंद करते हैं जो उनके चरणों से प्रेम रखते हैं, चाहे वे वर्ण–व्यवस्था के परे हों।
- स्रोत 2 (अप्पार): नयनार संत अप्पार शास्त्र को उद्धृत करने वालों से पूछते हैं: “तुम्हारा गोत्र और कुल भला किस काम का?” वे उन्हें केवल मारपेरू के स्वामी (शिव) को अपना एकमात्र आश्रयदाता मानकर नतमस्तक होने को कहते हैं।
- लिंगायत: बारहवीं शताब्दी में कर्नाटक में बासवन्ना (1106–68) के अनुयायी लिंगायतों ने जाति की अवधारणा और कुछ समुदायों के “दूषित” होने की ब्राह्मणीय अवधारणा का विरोध किया। उन्होंने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रश्नवाचक चिह्न लगाया, और धर्मशास्त्रों में अस्वीकार किए गए वयस्क विवाह और विधवा पुनर्विवाह को मान्यता दी।
इन कारणों से ब्राह्मणीय सामाजिक व्यवस्था में जिन समुदायों को गौण स्थान मिला था, वे लिंगायतों के अनुयायी हो गए।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 144, 146, 147
3★★शेख निज़ामुद्दीन औलिया (चौदहवीं शताब्दी) की ख़ानक़ाह के उदाहरण से चिश्ती ख़ानक़ाह के जीवन का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: ख़ानक़ाह सामाजिक जीवन का केंद्र बिंदु था:
- स्थान और बनावट: यह ख़ानक़ाह उस समय के दिल्ली शहर की बाहरी सीमा पर यमुना नदी के किनारे ग़ियासपुर में थी। यहाँ कई छोटे–छोटे कमरे और एक बड़ा हाल (जमातख़ाना) था, जहाँ सहवासी और अतिथि रहते और उपासना करते थे। शेख छत पर एक छोटे कमरे में रहते थे, जहाँ वे सुबह–शाम मेहमानों से मिलते थे।
- सहवासी और शरण: सहवासियों में शेख का अपना परिवार, सेवक और अनुयायी थे। एक बार मंगोल आक्रमण के समय पड़ोसी क्षेत्र के लोगों ने ख़ानक़ाह में शरण ली।
- लंगर: यहाँ एक सामुदायिक रसोई (लंगर) फ़ुतूह (बिना माँगी खैर) पर चलती थी।
- मिलने वाले: सुबह से देर रात तक सब तबके के लोग (सिपाही, गुलाम, गायक, व्यापारी, कवि, राहगीर, धनी और निर्धन, हिंदू जोगी और कलंदर) अनुयायी बनने, इबादत करने, ताबीज़ लेने या शेख की मध्यस्थता के लिए आते थे। अमीर हसन सिजज़ी और अमीर खुसरो जैसे कवि तथा दरबारी इतिहासकार ज़ियाउद्दीन बरनी भी आते थे, और इन सभी ने शेख के बारे में लिखा।
- स्थानीय परंपराएँ: शेख के सामने झुकना, मिलने वालों को पानी पिलाना, दीक्षितों के सर का मुंडन और यौगिक व्यायाम जैसे व्यवहार बताते हैं कि स्थानीय परंपराओं को आत्मसात करने का प्रयत्न किया गया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 153, 154
4★★चिश्ती सूफ़ी संतों और सुल्तानों के संबंधों में सहयोग और तनाव दोनों कैसे दिखते हैं? समझाइए।
उत्तर देखिए
उत्तर: चिश्ती संप्रदाय में सत्ता से दूर रहने पर बल दिया जाता था, किंतु इसका मतलब राजनीतिक सत्ता से अलगाव नहीं था:
- अनुदान: सत्ताधारी विशिष्ट वर्ग अगर बिना माँगे अनुदान या भेंट देता था, तो सूफ़ी संत उसे स्वीकार करते थे। सुल्तानों ने ख़ानक़ाहों को कर मुक्त (इनाम) भूमि अनुदान में दी और दान संबंधी न्यास स्थापित किए।
- दान का उपयोग: चिश्ती दान को सँजोने के बजाय खाने, कपड़े, रहने की व्यवस्था और समा की महफ़िलों जैसे अनुष्ठानों पर पूरी तरह खर्च कर देते थे। इससे शेख के नैतिक अधिकार की पुष्टि होती थी और आम लोगों का उनकी ओर झुकाव बढ़ता था।
- शासकों को समर्थन की ज़रूरत: दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद तुर्कों ने उलमा द्वारा शरिया लागू किए जाने की माँग ठुकरा दी, क्योंकि सुल्तान जानते थे कि उनकी अधिकांश प्रजा इस्लाम धर्म मानने वाली नहीं है। तब सुल्तानों ने सूफ़ी संतों का सहारा लिया, जो अपनी आध्यात्मिक सत्ता को अल्लाह से उद्भूत मानते थे।
- कब्रें: माना जाता था कि औलिया मध्यस्थ के रूप में ईश्वर से लोगों की ऐहिक और आध्यात्मिक दशा बेहतर करवाते हैं। “शायद इसलिए शासक अपनी कब्र सूफ़ी दरगाहों और ख़ानक़ाहों के नज़दीक बनाना चाहते थे।”
- तनाव: अपनी सत्ता का दावा करने के लिए दोनों ही झुक कर प्रणाम और कदम चूमने जैसे आचारों पर बल देते थे। शेख निज़ामुद्दीन औलिया के अनुयायी उन्हें सुल्तान–उल–मशेख (अर्थात शेखों में सुल्तान) कह कर संबोधित करते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 158
5★कबीर (लगभग चौदहवीं–पंद्रहवीं शताब्दी) की बानी कहाँ–कहाँ संकलित है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं? उनके जीवन के बारे में इतिहासकार किन बातों पर संदेह करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: इतिहासकारों ने कबीर के जीवन और काल का अध्ययन उनके काव्य और बाद में लिखी गई जीवनियों के आधार पर किया है, और यह प्रक्रिया कई वजहों से चुनौतीपूर्ण रही है:
- बानी के संकलन: कबीर बीजक वाराणसी तथा उत्तर प्रदेश के अन्य स्थानों पर कबीर पंथियों द्वारा संरक्षित है; कबीर ग्रंथावली का संबंध राजस्थान के दादू पंथियों से है; कबीर के कई पद आदि ग्रंथ साहिब में संकलित हैं। लगभग सभी पांडुलिपि संकलन कबीर की मृत्यु के बहुत बाद में किए गए।
- भाषा और उलटबाँसी: कबीर की रचनाएँ अनेक भाषाओं और बोलियों में मिलती हैं, कुछ निर्गुण कवियों की खास बोली संत भाषा में। कुछ रचनाएँ उलटबाँसी (उलटी कही उक्तियाँ) कहलाती हैं, जो परम सत्य के स्वरूप को समझने की मुश्किल दर्शाती हैं।
- परम सत्य के कई नाम: इस्लामी दर्शन की तरह वे इस सत्य को अल्लाह, खुदा, हज़रत और पीर कहते हैं; वेदांत दर्शन से प्रभावित होकर अलख (अदृश्य), निराकार, ब्रह्मन् और आत्मन्; और योगी परंपरा से लिए शब्द शब्द और शून्य का भी इस्तेमाल करते हैं।
- जीवन पर संदेह: वैष्णव परंपरा की जीवनियों में कबीर को जन्म से हिंदू कबीरदास बताया गया है, किंतु उनका पालन एक गरीब मुसलमान जुलाहा परिवार में हुआ जो कुछ समय पहले ही इस्लाम धर्म का अनुयायी बना था। इन जीवनियों में रामानंद को उनका गुरु बताया गया है, पर इतिहासकारों का मानना है कि कबीर और रामानंद का समकालीन होना मुश्किल प्रतीत होता है, जब तक कि उन्हें बहुत ही लंबी आयु न दे दी जाए।
दोनों को जोड़ने वाली परंपराओं से यह अवश्य पता चलता है कि कबीर की विरासत बाद की पीढ़ी के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 160, 162
6★भक्ति और सूफ़ी संतों ने अपनी बात कहने के लिए किन–किन भाषाओं का प्रयोग किया? उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: भक्ति और सूफ़ी संतों ने कई भाषाओं और बोलियों में अपनी बात रखी:
- तमिल: प्रारंभिक भक्ति आंदोलन (लगभग छठी शताब्दी) के अलवार और नयनार संत एक स्थान से दूसरे स्थान पर भ्रमण करते हुए तमिल में भजन गाते थे।
- कन्नड़: वीरशैव परंपरा की व्युत्पत्ति उन वचनों से है जो इस आंदोलन में शामिल स्त्री–पुरुषों ने कन्नड़ भाषा में रचे।
- हिंदवी और क्षेत्रीय भाषा: दिल्ली में चिश्ती सिलसिले के लोग हिंदवी में बातचीत करते थे। बाबा फरीद ने क्षेत्रीय भाषा में काव्य रचना की, जो गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है।
- दक्खनी: बीजापुर (कर्नाटक) के आसपास सत्रहवीं–अठारहवीं शताब्दियों में बसे चिश्ती संतों ने दक्खनी (उर्दू का रूप) में छोटी कविताएँ रचीं, जो संभवत: औरतें चक्की पीसते और चरखा कातते हुए गाती थीं।
- कव्वाली: अमीर खुसरो (1253–1325) ने कौल (अरबी शब्द, अर्थ कहावत) का प्रचलन करके चिश्ती समा को विशिष्ट आकार दिया। कव्वाली में सूफ़ी कविता फारसी, हिंदवी अथवा उर्दू में होती थी, और कभी–कभी इन तीनों ही भाषाओं के शब्द उसमें होते थे।
- संत भाषा और पंजाबी: कबीर की कुछ रचनाएँ निर्गुण कवियों की खास बोली संत भाषा में हैं। बाबा गुरु नानक ने अपने विचार पंजाबी भाषा में शबद के माध्यम से सामने रखे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 143, 147, 157, 160, 163
खंड छ — स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक) — 4 प्रश्न
1★★स्रोत 2 (शास्त्र या भक्ति) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“हे धूर्तजन, जो तुम शास्त्र को उद्धृत करते हो” “तुम्हारा गोत्र और कुल भला किस काम का?” “को अपना एकमात्र आश्रयदाता मानकर नतमस्तक हो।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) अप्पार, जो एक नयनार (शिवभक्त) संत थे।
- (ख) शिव को, जो तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मारपेरू में बसते हैं।
- (ग) अप्पार कहते हैं कि शास्त्र उद्धृत करने वालों का गोत्र और कुल किसी काम का नहीं; उन्हें केवल मारपेरू के स्वामी (शिव) को अपना एकमात्र आश्रयदाता मानकर नतमस्तक होना चाहिए। यह कुछ इतिहासकारों के उस मत से मेल खाता है कि अलवार और नयनार संतों ने जाति प्रथा व ब्राह्मणों की प्रभुता के विरोध में आवाज़ उठाई।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 144
2★स्रोत 6 (जोगी के प्रति श्रद्धा) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“बुलंद मकाम शिवमूरत गुरु आनंद नाथ जियो!” “जनाब–ए–मुहतरम (श्रद्धेय) अमन और खुशी से हमेशा श्री शिव जियो की पनाह में रहें!” “पोशाक के लिए वस्त्र और पच्चीस रुपए की रकम जो भेंट के तौर पर भेजी गई है आप तक पहुँचेगी…” “जनाब–ए–मुहतरम आप हमें लिख सकते हैं जब भी हमारी मदद की ज़रूरत हो।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) औरंगज़ेब ने 1661–62 में एक जोगी, गुरु आनंद नाथ, को यह पत्र लिखा।
- (ख) शिव: बादशाह जोगी को “शिवमूरत” कहकर संबोधित करता है और कामना करता है कि वे हमेशा श्री शिव जियो की पनाह में रहें।
- (ग) रवैया आदर और श्रद्धा का है: बादशाह जोगी को जनाब–ए–मुहतरम (श्रद्धेय) कहता है, पोशाक के लिए वस्त्र और पच्चीस रुपए भेंट के तौर पर भेजता है, और लिखता है कि ज़रूरत पड़ने पर वे उससे मदद माँग सकते हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 150
3★★स्रोत 9 (शाही भेंट अस्वीकार) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“इस ज़मीन, खेत और बगीचे का मुझे क्या करना है?” “हमारे कोई भी आध्यात्मिक गुरु ने इस तरह का काम नहीं किया।” “मुझे धन दे दो मैं इसे दरवेशों में बाँट दूँगा”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) 1313 में, शेख निज़ामुद्दीन औलिया की ख़ानक़ाह में; वर्णन अमीर हसन सिजज़ी ने किया है।
- (ख) दो बगीचे और बहुत सी ज़मीन का पट्टा, साथ ही उनके रखरखाव के लिए औज़ार व आवश्यक वस्तुएँ।
- (ग) शेख ने भेंट अस्वीकार कर दी: ज़मीन, खेत और बगीचे उनके किसी काम के नहीं, और उनके किसी आध्यात्मिक गुरु ने ऐसा नहीं किया। फिर उन्होंने कहानी सुनाई कि उलुग़ ख़ान (बाद में सुल्तान ग़ियासुद्दीन) ने शेख फ़रीदुद्दीन को कुछ धनराशि और चार गाँवों का पट्टा भेंट किया था। शेख फ़रीदुद्दीन ने कहा कि धन उन्हें दे दिया जाए, वे उसे दरवेशों में बाँट देंगे, पर ज़मीन का पट्टा उन लोगों को दे दिया जाए जिन्हें उसकी कामना हो।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 159
4★★स्रोत 10 (एक ईश्वर) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“ईश्वर को अनेक नामों से पुकारा जाता है: जैसे अल्लाह, राम, करीम, केशव, हरि तथा हज़रत।” “विभिन्नताएँ तो केवल शब्दों में हैं जिनका आविष्कार हम स्वयं करते हैं।” “एक बकरे को मारता है और दूसरा गाय को।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) कबीर की।
- (ख) केवल शब्दों में, जिनका आविष्कार हम स्वयं करते हैं; ईश्वर एक है, उसे अनेक नामों से पुकारा जाता है।
- (ग) कबीर पूछते हैं कि संसार के एक नहीं, दो स्वामी कैसे हो सकते हैं। अल्लाह, राम, करीम, केशव, हरि और हज़रत एक ही ईश्वर के नाम हैं। कबीर कहते हैं कि दोनों ही भुलावे में हैं: एक बकरे को मारता है और दूसरा गाय को; इनमें से कोई एक राम को प्राप्त नहीं कर सकता, और वे पूरा जीवन विवादों में ही गँवा देते हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 6, पृष्ठ 160
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर |
| 2 अंक | 30–40 शब्द | उत्तर + कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | 60–80 शब्द | तीन बिंदु, पूरे वाक्यों में |
| 4 अंक (स्रोत) | हर भाग 1–3 वाक्य | पहले अंश में उत्तर खोजिए, फिर किताब की बात जोड़िए |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द | भूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष |
★इस अध्याय के लिए तीन सलाह:
- किताब के शब्द लिखिए: अलवार, नयनार, वीरशैव, लिंगायत, तवरम, नलयिरादिव्यप्रबंधम्, उलमा, शरिया, ज़िम्मी, ख़ानक़ाह, सिलसिला, पीर, मुरीद, बा–शरिया, बे–शरिया, ज़ियारत, उर्स, समा, कौल, उलटबाँसी, शबद, संगत। पहले शब्द का अर्थ एक वाक्य में बताइए, फिर उदाहरण दीजिए।
- हर बात के साथ संत या परंपरा का नाम, जगह और समय लिखिए: अलवार और नयनार (तमिल, लगभग छठी शताब्दी), वीरशैव (कर्नाटक, बारहवीं शताब्दी), चिश्ती (बारहवीं शताब्दी के अंत में भारत आए), कबीर (लगभग चौदहवीं–पंद्रहवीं शताब्दी), शंकरदेव (असम, पंद्रहवीं शताब्दी का उत्तरार्द्ध)। जहाँ हो सके, स्रोत का नंबर भी लिखिए।
- तिथियाँ किताब की तरह लिखिए: 945 ईसवी, बासवन्ना (1106–68), 1313, मुहम्मद बिन तुगलक (1324–51), अमीर खुसरो (1253–1325), 1568, बाबा गुरु नानक (1469–1539); और लगभग, शायद, संभवत:, कुछ इतिहासकार, कुछ परंपराओं के अनुसार जैसे शब्द मत छोड़िए, क्योंकि बात उन्हीं से सही बनती है।
तीन नमूना परीक्षा-पत्र
हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खंडों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | अलवार संतों के जिस मुख्य काव्य संकलन का वर्णन “तमिल वेद” के रूप में किया जाता था, उसका नाम क्या है? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: पुरी (उड़ीसा) में मुख्य देवता को बारहवीं शताब्दी तक आते-आते ……… (शाब्दिक अर्थ में संपूर्ण विश्व का स्वामी), विष्णु के एक स्वरूप के रूप में प्रस्तुत किया गया। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: तमिल क्षेत्र में बौद्ध और जैन धर्म को राजकीय संरक्षण और अनुदान नियमित रूप से मिलता था। | 1 |
| 4 | तांत्रिक पूजा पद्धति की दो विशेषताएँ बताइए। | 2 |
| 5 | ज़िम्मी कौन थे? | 2 |
| 6 | तमिल भक्ति परंपरा (अलवार और नयनार) में स्त्रियों की भूमिका का वर्णन कीजिए। | 3 |
| 7 | पूजा प्रणालियों के समन्वय को समझाने के लिए इतिहासकार किन दो प्रक्रियाओं की बात करते हैं? पुरी के जगन्नाथ और देवी संप्रदायों के उदाहरण देकर लिखिए। | 5 |
| 8 | अलवार, नयनार और वीरशैव (लिंगायत) संतों ने जाति प्रथा और ब्राह्मणीय मान्यताओं पर कैसे सवाल उठाए? स्रोत 1 और स्रोत 2 के उदाहरण दीजिए। | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | “सिलसिला” शब्द का शाब्दिक अर्थ क्या है? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: मालाबार तट (केरल) पर बसे अरब मुसलमान व्यापारियों ने स्थानीय मलयालम भाषा के साथ ……… और मातृगृहता जैसे स्थानीय आचार भी अपनाए। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: आठवीं से चौदहवीं शताब्दी के संस्कृत ग्रंथों और अभिलेखों में मुसलमान शब्द का खूब प्रयोग हुआ है। | 1 |
| 4 | ग्यारहवीं शताब्दी तक सूफ़ियों की ख़ानक़ाह का संचालन कैसे होता था? | 2 |
| 5 | सूफ़ी परंपरा में ज़ियारत और उर्स से आप क्या समझते हैं? | 2 |
| 6 | मस्जिदों की स्थापत्य कला में सार्वभौमिक और स्थानीय तत्वों का मिश्रण कैसे दिखता है? उदाहरण दीजिए। | 3 |
| 7 | शेख निज़ामुद्दीन औलिया (चौदहवीं शताब्दी) की ख़ानक़ाह के उदाहरण से चिश्ती ख़ानक़ाह के जीवन का वर्णन कीजिए। | 5 |
| 8 | चिश्ती सूफ़ी संतों और सुल्तानों के संबंधों में सहयोग और तनाव दोनों कैसे दिखते हैं? समझाइए। | 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | कुछ परंपराओं के अनुसार मीराबाई के गुरु कौन थे? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: बाबा गुरु नानक ने अपने अनुयायी ……… को अपने बाद गुरुपद पर आसीन किया; इस परिपाटी का पालन 200 वर्षों तक होता रहा। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: धर्मशास्त्रों में जिन आचारों को अस्वीकार किया गया था, जैसे वयस्क विवाह और विधवा पुनर्विवाह, लिंगायतों ने उन्हें मान्यता दी। | 1 |
| 4 | गुरु गोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ के किन पाँच प्रतीकों का वर्णन किया? | 2 |
| 5 | असम के शंकरदेव के उपदेशों को ‘भगवती धर्म’ क्यों कहा जाता है? | 2 |
| 6 | बाबा गुरु नानक (1469–1539) के संदेश की मुख्य बातें बताइए। | 3 |
| 7 | कबीर (लगभग चौदहवीं–पंद्रहवीं शताब्दी) की बानी कहाँ–कहाँ संकलित है और उसकी विशेषताएँ क्या हैं? उनके जीवन के बारे में इतिहासकार किन बातों पर संदेह करते हैं? | 5 |
| 8 | भक्ति और सूफ़ी संतों ने अपनी बात कहने के लिए किन–किन भाषाओं का प्रयोग किया? उदाहरण सहित लिखिए। | 5 |