कुल 62 प्रश्न
तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए।
खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न
पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II” (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।
1अल–बिरूनी का जन्म सन् 973 में किस स्थान पर हुआ, जो आज उज़्बेकिस्तान में है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) ख़्वारिज़्म
व्याख्या: ख़्वारिज़्म शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र था, और अल–बिरूनी ने वहाँ उस समय की सबसे अच्छी शिक्षा पाई। ग़ज़नी वह बाद में आया: 1017 ई. में सुल्तान महमूद के ख़्वारिज़्म पर आक्रमण के बाद, बंधक के रूप में। तैंजियर इब्न बतूता का जन्मस्थान है, और मुल्तान इब्न बतूता के दिल्ली जाने के रास्ते में पड़ा।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 116, 118
2अल–बिरूनी की कृति किताब–उल–हिन्द किस भाषा में लिखी गई, और यह कितने अध्यायों में बँटी है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) अरबी, अस्सी अध्याय
व्याख्या: किताब–उल–हिन्द अरबी में है, इसकी भाषा सरल और स्पष्ट है, और यह अस्सी अध्यायों में बँटा एक विस्तृत ग्रंथ है। अल–बिरूनी संस्कृत जानता था और उसने कई संस्कृत कृतियों का अरबी में अनुवाद भी किया, पर अपनी यह कृति उसने अरबी में लिखी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 116, 117
3किताब के अनुसार “हिंदू” शब्द किससे निकला?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) सिंधु नदी के पूर्व के क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होने वाले एक प्राचीन फ़ारसी शब्द से
व्याख्या: यह शब्द लगभग छठी–पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के एक प्राचीन फ़ारसी शब्द से निकला। अरबों ने बाद में इस क्षेत्र को अल–हिंद कहा, और उसके भी बाद तुर्कों ने यहाँ के लोगों को हिंदू, क्षेत्र को हिंदुस्तान और भाषा को हिंदवी कहा। किताब के शब्दों में: “इनमें से कोई भी शब्द लोगों की धार्मिक पहचान का द्योतक नहीं था।”
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 117
4मोरक्को के यात्री इब्न बतूता का परिवार किस बात की विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) इस्लामी कानून यानी शरिया
व्याख्या: इब्न बतूता का जन्म तैंजियर के सबसे सम्मानित और शिक्षित परिवारों में से एक में हुआ, जो शरिया की विशेषज्ञता के लिए प्रसिद्ध था। परिवार की परंपरा के अनुसार उसने कम उम्र में ही साहित्यिक और शास्त्ररूढ़ शिक्षा पाई। सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक उसकी विद्वता से प्रभावित हुआ और उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118
51342 ई. में सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक ने इब्न बतूता को अपने दूत के रूप में किसके पास जाने का आदेश दिया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) चीन के मंगोल शासक के पास
व्याख्या: दिल्ली में कई वर्ष क़ाज़ी रहने के बाद इब्न बतूता सुल्तान का विश्वास खो बैठा और कारागार में डाला गया। ग़लतफ़हमी दूर होने पर उसे फिर राजकीय सेवा में लिया गया, और 1342 ई. में सुल्तान के दूत के रूप में मंगोल शासक के पास चीन जाने का आदेश मिला। मालद्वीप उसके रास्ते में पड़ा, जहाँ वह अठारह महीनों तक क़ाज़ी रहा।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118
61620 के दशक में व्यापक रूप से यात्राएँ करने वाला कौन–सा लेखक भारत से इतना सम्मोहित हुआ कि कुछ समय के लिए सन्यासी भी बन गया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) महमूद वली बल्खी
व्याख्या: 1400 से 1800 के बीच भारत आए यात्रियों ने फ़ारसी में कई यात्रा वृत्तांत लिखे। अब्दुर रज़्ज़ाक समरकंदी ने 1440 के दशक में दक्षिण भारत की यात्रा की। शेख़ अली हाज़िन 1740 के दशक में उत्तर भारत आया; वह अपने लिए उत्सवीय स्वागत की आशा कर रहा था, इसलिए भारत से निराश हुआ और घृणा भी करने लगा। तैवर्नियर एक फ्रांसीसी जौहरी था, जो कम से कम छह बार भारत आया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 121, 122
7फ्रांस्वा बर्नियर भारत में सबसे पहले किसका चिकित्सक रहा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) सम्राट शाहजहाँ के ज्येष्ठ पुत्र दारा शिकोह
व्याख्या: बर्नियर 1656 से 1668 तक बारह वर्ष भारत में रहा। पहले वह दारा शिकोह का चिकित्सक रहा, और बाद में मुग़ल दरबार के एक आर्मीनियाई अमीर दानिशमंद ख़ान के साथ एक बुद्धिजीवी और वैज्ञानिक के रूप में। मुहम्मद बिन तुग़लक दिल्ली का वह सुल्तान था जिसने इब्न बतूता को क़ाज़ी बनाया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118, 122
8बर्नियर के कार्य फ्रांस में कब छपे, जिसके बाद अगले पाँच वर्षों में अंग्रेज़ी, डच, जर्मन और इतालवी में उनका अनुवाद हो गया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) 1670–71 में
व्याख्या: बर्नियर के कार्य फ्रांस में 1670–71 में छपे, और 1670 और 1725 के बीच फ्रांसीसी में आठ बार दोबारा छपे। 1656 वह वर्ष है जब से वह भारत में रहा। 1684 तक उसके कार्य अंग्रेज़ी में तीन बार दोबारा छपे। 1800 से पहले सामान्यत: न छपने वाले वृत्तांत अरबी और फ़ारसी के थे, जो हस्तलिपियों के रूप में फैलते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 122, 123
9अल–बिरूनी ने भारत को समझने में जिन अवरोधों की चर्चा की, उनमें पहला अवरोध क्या था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) भाषा
व्याख्या: अल–बिरूनी के अनुसार संस्कृत, अरबी और फ़ारसी से इतनी भिन्न थी कि विचारों और सिद्धांतों को एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना आसान नहीं था। दूसरा अवरोध धार्मिक अवस्था और प्रथा में भिन्नता थी, और तीसरा अभिमान। यात्रा के ख़तरे इब्न बतूता के वृत्तांत में आते हैं, अल–बिरूनी के अवरोधों में नहीं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 119, 124
10जाति व्यवस्था की ब्राह्मणवादी व्याख्या मानने के बावजूद अल–बिरूनी ने किस मान्यता को प्रकृति के नियमों के विरुद्ध बताकर अस्वीकार किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) अपवित्रता की मान्यता
व्याख्या: अल–बिरूनी के अनुसार हर वह वस्तु जो अपवित्र हो जाती है, अपनी पवित्रता की मूल स्थिति फिर से पाने का प्रयास करती है और सफल होती है: सूर्य हवा को स्वच्छ करता है, और समुद्र में नमक पानी को गंदा होने से बचाता है। वर्णों की उत्पत्ति उसने ग्रंथों के आधार पर स्रोत 5 में लिखी, और फ़ारस के वर्ग और इस्लाम की समानता उसकी तुलना के उदाहरण थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 124, 125
11इब्न बतूता ने नारियल के वृक्ष (स्रोत 6) को अपने पाठकों के लिए किस वृक्ष जैसा बताया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) खजूर का वृक्ष
व्याख्या: उसके अनुसार नारियल के वृक्ष हू–बहू खजूर के वृक्ष जैसे दिखते हैं; अंतर बस इतना है कि एक से काष्ठफल मिलता है और दूसरे से खजूर। अंगूर–लता और जायफल स्रोत 7 में आते हैं: पान अंगूर–लता की तरह उगाया जाता है, और सुपारी जायफल जैसी होती है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 126
12इब्न बतूता के वर्णन (स्रोत 8) के अनुसार देहली शहर के कितने द्वार थे?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) अट्ठाईस
व्याख्या: शहर के अट्ठाईस द्वार थे, जिन्हें दरवाज़ा कहा जाता था, और इनमें बदायूँ दरवाज़ा सबसे विशाल था। ग्यारह हाथ प्राचीर की दीवार की चौड़ाई है। बाईस वर्ष इब्न बतूता की उम्र थी जब वह तैंजियर से निकला, और मुल्तान से दिल्ली की यात्रा में चालीस दिन लगे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118, 119, 127
13इब्न बतूता के वृत्तांत (स्रोत 9) में ताराबबाद क्या है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) दौलताबाद में पुरुष और महिला गायकों का बाज़ार
व्याख्या: ताराबबाद दौलताबाद के सबसे विशाल और सुंदर बाज़ारों में से एक था। इसके बीच के विशाल गुंबद में हर गुरुवार सुबह की इबादत के बाद संगीतकारों के प्रमुख बैठते थे, और गायिकाएँ झुंडों में आकर गाती और नाचती थीं। मांडवी दरवाज़े के भीतर की अनाज मंडी देहली में थी (स्रोत 8)।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 127, 128
14इब्न बतूता के अनुसार सिंध से दिल्ली की यात्रा में लगभग पचास दिन लगते थे। गुप्तचरों की ख़बरें डाक व्यवस्था से सुल्तान तक कितने दिनों में पहुँच जाती थीं?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) पाँच दिन
व्याख्या: इब्न बतूता डाक प्रणाली की कार्यकुशलता देखकर चकित हुआ। इससे व्यापारी लंबी दूरी तक सूचना भेज सकते थे, उधार प्रेषित कर सकते थे और कम सूचना पर माल भी भेज सकते थे। चालीस दिन मुल्तान से दिल्ली की यात्रा में लगे, और ग्वालियर से दिल्ली दस दिन में पहुँचा जा सकता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 119, 129
15बर्नियर के अनुसार भारत और यूरोप के बीच मूल भिन्नताओं में से एक क्या थी?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) भारत में निजी भूस्वामित्व का अभाव
व्याख्या: बर्नियर निजी स्वामित्व के गुणों में दृढ़ विश्वास रखता था, और भूमि पर राजकीय स्वामित्व को राज्य और उसके निवासियों, दोनों के लिए हानिकारक मानता था। बाकी विकल्प उसके अपने विवरण से कट जाते हैं: वह एक समृद्ध व्यापारिक समुदाय को रेखांकित करता है, मानता है कि पूरे विश्व से बड़ी मात्रा में बहुमूल्य धातुएँ भारत आती थीं, और मुग़लकालीन शहरों को शिविर नगर कहता है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 130, 133, 134
16बर्नियर के वृत्तांत से प्राच्य निरंकुशवाद का सिद्धांत किसने विकसित किया?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) मॉन्टेस्क्यू
व्याख्या: फ्रांसीसी दार्शनिक मॉन्टेस्क्यू के इस सिद्धांत के अनुसार एशिया में शासक अपनी प्रजा पर निर्बाध प्रभुत्व रखते थे। कार्ल मार्क्स ने उन्नीसवीं शताब्दी में एशियाई उत्पादन शैली का सिद्धांत दिया। अबुल फ़ज़्ल अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार था, और पेलसर्ट सत्रहवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में आया एक डच यात्री।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 130, 132
17पश्चिमी भारत में व्यापारियों के समूह महाजन कहलाते थे। अहमदाबाद जैसे शहरी केंद्रों में सभी महाजनों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करने वाला व्यापारिक समुदाय का मुखिया क्या कहलाता था?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (अ) नगर सेठ
व्याख्या: एक महाजन समूह का मुखिया सेठ कहलाता था, और अहमदाबाद जैसे शहरों में सभी महाजनों का मुखिया नगर सेठ। क़ाज़ी न्यायाधीश को कहते थे; इब्न बतूता दिल्ली में इसी पद पर रहा।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118, 134
18सिंध पहुँचकर इब्न बतूता ने सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक को भेंट देने के लिए क्या खरीदा?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (द) घोड़े, ऊँट तथा दास
व्याख्या: किताब के शब्दों में उसने भेंटस्वरूप “घोड़े, ऊँट तथा दास” खरीदे। किशमिश के बादाम मुल्तान के गवर्नर को दी गई भेंट में थे: “किशमिश के बादाम के साथ एक दास और घोड़ा”। किताब इन उदाहरणों से दिखाती है कि बाज़ारों में दास किसी भी दूसरी वस्तु की तरह खुले आम बेचे जाते थे और नियमित रूप से भेंट में दिए जाते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135
19सभी समकालीन यूरोपीय यात्रियों के लिए महिलाओं से किया जाने वाला बर्ताव अकसर पश्चिमी और पूर्वी समाजों के बीच भिन्नता का एक महत्त्वपूर्ण संकेतक था। इसलिए बर्नियर ने किस प्रथा को विस्तृत विवरण के लिए चुना?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (ब) सती प्रथा
व्याख्या: बर्नियर ने लिखा कि कुछ महिलाएँ प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थीं, पर अन्य को मरने के लिए बाध्य किया जाता था। दासों और गायिकाओं के विवरण इब्न बतूता के वृत्तांत में हैं, और जाति व्यवस्था का विवरण अल–बिरूनी ने दिया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 125, 128, 135
20किताब के अनुसार, यात्रियों के वृत्तांतों वाले काल (लगभग दसवीं से सत्रहवीं सदी) के भारत में व्यापारिक परिवारों से आने वाली महिलाओं के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर और व्याख्या देखिए
सही उत्तर: (स) वे व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा लेती थीं, और कभी–कभी वाणिज्यिक विवाद अदालत तक ले जाती थीं
व्याख्या: महिलाओं का श्रम कृषि में और कृषि के अलावा होने वाले उत्पादन, दोनों में महत्त्वपूर्ण था, और व्यापारिक परिवारों की महिलाएँ व्यापार में हिस्सा लेती थीं। इसीलिए किताब कहती है कि यह असंभाव्य लगता है कि महिलाओं को उनके घरों के खास स्थानों तक सीमित रखा जाता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135, 136
खंड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न
11017 ई. में सुल्तान महमूद के ख़्वारिज़्म पर आक्रमण के बाद अल–बिरूनी ______ के रूप में ग़ज़नी आया, और सत्तर वर्ष की आयु में अपनी मृत्यु तक वहीं रहा। (पृष्ठ 116)
उत्तर देखिए
1017 ई. में सुल्तान महमूद के ख़्वारिज़्म पर आक्रमण के बाद अल–बिरूनी बंधक के रूप में ग़ज़नी आया, और सत्तर वर्ष की आयु में अपनी मृत्यु तक वहीं रहा। (पृष्ठ 116)
2अल–बिरूनी ने अपने ब्राह्मण मित्रों के लिए यूनानी गणितज्ञ ______ के कार्यों का संस्कृत में अनुवाद किया। (पृष्ठ 116)
उत्तर देखिए
अल–बिरूनी ने अपने ब्राह्मण मित्रों के लिए यूनानी गणितज्ञ यूक्लिड के कार्यों का संस्कृत में अनुवाद किया। (पृष्ठ 116)
3मोरक्को के यात्री इब्न बतूता का अरबी में लिखा यात्रा वृत्तांत ______ कहलाता है। (पृष्ठ 118)
उत्तर देखिए
मोरक्को के यात्री इब्न बतूता का अरबी में लिखा यात्रा वृत्तांत रिह्ला कहलाता है। (पृष्ठ 118)
4इब्न बतूता के श्रुतलेखों (बोले हुए वृत्तांतों) को लिखने के लिए ______ को नियुक्त किया गया था। (पृष्ठ 121)
उत्तर देखिए
इब्न बतूता के श्रुतलेखों (बोले हुए वृत्तांतों) को लिखने के लिए इब्न जुज़ाई को नियुक्त किया गया था। (पृष्ठ 121)
5बर्नियर ने अपनी प्रमुख कृति फ्रांस के शासक ______ को समर्पित की थी। (पृष्ठ 122)
उत्तर देखिए
बर्नियर ने अपनी प्रमुख कृति फ्रांस के शासक लुई XIV को समर्पित की थी। (पृष्ठ 122)
6इब्न बतूता के अनुसार अश्व डाक को ______ कहा जाता था; इसमें हर चार मील की दूरी पर राजकीय घोड़े रखे जाते थे। (पृष्ठ 129)
उत्तर देखिए
इब्न बतूता के अनुसार अश्व डाक को उलुक कहा जाता था; इसमें हर चार मील की दूरी पर राजकीय घोड़े रखे जाते थे। (पृष्ठ 129)
7सोलहवीं शताब्दी में अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार अबुल फ़ज़्ल भूमि राजस्व को ______ बताता है। (पृष्ठ 132)
उत्तर देखिए
सोलहवीं शताब्दी में अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार अबुल फ़ज़्ल भूमि राजस्व को राजत्व का पारिश्रमिक बताता है। (पृष्ठ 132)
8उन्नीसवीं शताब्दी में कार्ल मार्क्स ने बर्नियर के विवरणों से बने विचार को ______ के सिद्धांत के रूप में आगे बढ़ाया। (पृष्ठ 132)
उत्तर देखिए
उन्नीसवीं शताब्दी में कार्ल मार्क्स ने बर्नियर के विवरणों से बने विचार को एशियाई उत्पादन शैली के सिद्धांत के रूप में आगे बढ़ाया। (पृष्ठ 132)
9सत्रहवीं शताब्दी में भारत की जनसंख्या का लगभग ______ भाग नगरों में रहता था, जो औसतन उसी समय पश्चिमी यूरोप की नगरीय जनसंख्या के अनुपात से अधिक था। (पृष्ठ 134)
उत्तर देखिए
सत्रहवीं शताब्दी में भारत की जनसंख्या का लगभग पंद्रह प्रतिशत भाग नगरों में रहता था, जो औसतन उसी समय पश्चिमी यूरोप की नगरीय जनसंख्या के अनुपात से अधिक था। (पृष्ठ 134)
10बर्नियर मुग़लकालीन शहरों को ______ कहता है, यानी ऐसे नगर जो अपने अस्तित्व और बने रहने के लिए राजकीय शिविर पर निर्भर थे। (पृष्ठ 134)
उत्तर देखिए
बर्नियर मुग़लकालीन शहरों को शिविर नगर कहता है, यानी ऐसे नगर जो अपने अस्तित्व और बने रहने के लिए राजकीय शिविर पर निर्भर थे। (पृष्ठ 134)
खंड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 8 प्रश्न
1अल–बिरूनी यूनानी भाषा जानता था, इसलिए उसने प्लेटो के कार्य मूल यूनानी में पढ़े।
उत्तर देखिए
ग़लत
(वह यूनानी नहीं जानता था; प्लेटो और दूसरे यूनानी दार्शनिकों के कार्य उसने अरबी अनुवादों के ज़रिए पढ़े; पृष्ठ 116)
2किताब के अनुसार 1500 ई. से पहले भारत में अल–बिरूनी को कुछ ही लोगों ने पढ़ा होगा।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 117)
3इब्न बतूता अपनी श्रेणी के दूसरे लोगों की तरह यात्राओं के अनुभव से ज़्यादा पुस्तकों को ज्ञान का स्रोत मानता था।
उत्तर देखिए
ग़लत
(उनसे अलग, वह पुस्तकों की जगह यात्राओं से मिले अनुभव को ज्ञान का ज़्यादा महत्त्वपूर्ण स्रोत मानता था; पृष्ठ 118)
4अरबी और फ़ारसी के यात्रा वृत्तांत हस्तलिपियों के रूप में फैलते थे और 1800 से पहले सामान्यत: छपते नहीं थे।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 123)
5इब्न बतूता के अनुसार भारत की मिट्टी उपजाऊ थी, जिससे किसान वर्ष में दो फसलें उगा पाते थे।
उत्तर देखिए
सही (पृष्ठ 128)
6इब्न बतूता के अनुसार पैदल डाक (दावा) अश्व डाक (उलुक) से धीमी होती थी।
उत्तर देखिए
ग़लत
(पैदल डाक अश्व डाक से तेज़ होती थी; पृष्ठ 129)
7सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ बताते हैं कि राज्य ही भूमि का एकमात्र स्वामी था।
उत्तर देखिए
ग़लत
(किताब के अनुसार एक भी सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ ऐसा नहीं बताता; पृष्ठ 132)
8बर्नियर के अनुसार सती होने वाली सभी महिलाएँ अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाती थीं।
उत्तर देखिए
ग़लत
(उसके अनुसार कुछ महिलाएँ प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थीं, पर अन्य को मरने के लिए बाध्य किया जाता था; पृष्ठ 135)
खंड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 8 प्रश्न
1★★अल–बिरूनी ने भारत को समझने में कौन–से तीन अवरोध बताए?
उत्तर देखिए
उत्तर: अल–बिरूनी जानता था कि अपने लिए तय किए उद्देश्य में कई समस्याएँ छिपी हैं, और उसने समझने में बाधक तीन अवरोधों की चर्चा की:
- भाषा: संस्कृत, अरबी और फ़ारसी से इतनी भिन्न थी कि विचारों और सिद्धांतों का एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद आसान नहीं था।
- धार्मिक अवस्था और प्रथा में भिन्नता: यह दूसरा अवरोध था।
- अभिमान: यह तीसरा अवरोध था।
इन समस्याओं को जानते हुए भी वह लगभग पूरी तरह ब्राह्मणों की रची कृतियों पर आश्रित रहा।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 124
2★किताब–उल–हिन्द के अध्याय किस क्रम में लिखे गए हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: सामान्यत: (हालाँकि हमेशा नहीं) अल–बिरूनी के हर अध्याय में एक तय क्रम मिलता है:
- आरंभ: एक प्रश्न।
- बीच में: संस्कृतवादी परंपराओं पर आधारित वर्णन।
- अंत में: दूसरी संस्कृतियों से तुलना।
आज के कुछ विद्वान मानते हैं कि इस लगभग ज्यामितीय संरचना का एक मुख्य कारण अल–बिरूनी का गणित की ओर झुकाव था; यह संरचना अपनी स्पष्टता और पूर्वानुमेयता के लिए जानी जाती है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 117
3★★अल–बिरूनी ने अपवित्रता की मान्यता क्यों अस्वीकार की?
उत्तर देखिए
उत्तर: जाति व्यवस्था की ब्राह्मणवादी व्याख्या मानने के बावजूद उसने अपवित्रता की मान्यता नहीं मानी, और इसके लिए प्रकृति से तर्क दिया:
- प्रकृति का नियम: हर वह वस्तु जो अपवित्र हो जाती है, अपनी पवित्रता की मूल स्थिति फिर से पाने का प्रयास करती है और सफल होती है।
- उदाहरण: सूर्य हवा को स्वच्छ करता है, और समुद्र में नमक पानी को गंदा होने से बचाता है।
- निष्कर्ष: ऐसा न होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव होता; इसलिए उसके अनुसार जाति व्यवस्था में सन्निहित अपवित्रता की अवधारणा प्रकृति के नियमों के विरुद्ध थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 124, 125
4★★इब्न बतूता ने अपने पाठकों को नारियल और पान जैसी अनजानी उपज कैसे समझाई?
उत्तर देखिए
उत्तर: उसके पाठक इन दो वानस्पतिक उपजों से पूरी तरह अपरिचित थे, इसलिए उसने इनका वर्णन जानी–पहचानी चीज़ों से तुलना करके किया:
- नारियल (स्रोत 6): इसके वृक्ष हू–बहू खजूर के वृक्ष जैसे दिखते हैं, और फल मानव सिर से मेल खाता है: मानो दो आँखें और एक मुख हों, अंदर का भाग हरा होने पर मस्तिष्क जैसा दिखता है और रेशा बालों जैसा।
- पान (स्रोत 7): यह अंगूर–लता की तरह उगाया जाता है और केवल पत्तियों के लिए उगाया जाता है; इसके साथ खाई जाने वाली सुपारी जायफल जैसी होती है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 126
5★इब्न बतूता के अनुसार भारत में डाक की कौन–सी दो व्यवस्थाएँ थीं?
उत्तर देखिए
उत्तर: स्रोत 10 में वह दो प्रकार की डाक व्यवस्था बताता है:
- अश्व डाक (उलुक): हर चार मील की दूरी पर रखे राजकीय घोड़ों से चलती थी।
- पैदल डाक (दावा): इसमें प्रति मील तीन अवस्थान होते थे; संदेशवाहक एक हाथ में पत्र और दूसरे में ताँबे की घंटियों वाली छड़ लेकर दौड़ता था। यह अश्व डाक से तेज़ थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 129
6★बर्नियर के वृत्तांत और अरबी–फ़ारसी यात्रा वृत्तांत पाठकों तक कैसे पहुँचे?
उत्तर देखिए
उत्तर: दोनों के पाठकों तक पहुँचने का रास्ता अलग था:
- बर्नियर के कार्य: फ्रांस में 1670–71 में छपे और अगले पाँच वर्षों में अंग्रेज़ी, डच, जर्मन और इतालवी में अनुवादित हुए; 1670 और 1725 के बीच फ्रांसीसी में आठ बार और 1684 तक अंग्रेज़ी में तीन बार दोबारा छपे।
- अरबी और फ़ारसी वृत्तांत: हस्तलिपियों के रूप में फैलते थे और 1800 से पहले सामान्यत: छपते नहीं थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 123
7★महाजन, सेठ और नगर सेठ कौन थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: व्यापारी अकसर मज़बूत सामुदायिक या बंधुत्व के संबंधों से जुड़े थे, और अपनी जाति और व्यावसायिक संस्थाओं के ज़रिए संगठित रहते थे:
- महाजन: पश्चिमी भारत में व्यापारियों के ऐसे समूह।
- सेठ: महाजन समूह का मुखिया।
- नगर सेठ: अहमदाबाद जैसे शहरी केंद्रों में सभी महाजनों का सामूहिक प्रतिनिधित्व करने वाला व्यापारिक समुदाय का मुखिया।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 134
8★इब्न बतूता के अनुसार दास और दासियाँ किन कामों में लगाए जाते थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: इब्न बतूता के विवरण से लगता है कि दासों में काफ़ी विभेद था:
- संगीत और गायन: सुल्तान की सेवा में कुछ दासियाँ इनमें निपुण थीं; सुल्तान की बहन की शादी पर इब्न बतूता ने उनके प्रदर्शन का खूब आनंद लिया।
- निगरानी: सुल्तान अपने अमीरों पर नज़र रखने के लिए दासियों को भी नियुक्त करता था।
- घरेलू श्रम: दास सामान्यत: घरेलू श्रम में लगाए जाते थे; पालकी या डोले में पुरुषों और महिलाओं को ले जाने में इब्न बतूता ने उनकी सेवा विशेष रूप से अपरिहार्य पाई।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135
खंड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 6 प्रश्न
1★★ग़ज़नी में रहते हुए अल–बिरूनी की भारत में रुचि कैसे जागी, और उसने भारत के बारे में ज्ञान कैसे पाया?
उत्तर देखिए
उत्तर: किताब के अनुसार ग़ज़नी में भारत में रुचि जागना कोई असामान्य बात नहीं थी:
- अनुवाद की परंपरा: आठवीं शताब्दी से ही संस्कृत में लिखे खगोल–विज्ञान, गणित और चिकित्सा के ग्रंथों का अरबी में अनुवाद होने लगा था।
- पंजाब से संपर्क: पंजाब के ग़ज़नवी साम्राज्य का हिस्सा बनने के बाद स्थानीय लोगों से हुए संपर्कों ने आपसी विश्वास और समझ का माहौल बनाया।
- ब्राह्मण विद्वानों के साथ: अल–बिरूनी ने ब्राह्मण पुरोहितों और विद्वानों के साथ कई वर्ष बिताकर संस्कृत, धर्म और दर्शन का ज्ञान पाया।
उसका यात्रा–कार्यक्रम साफ़ नहीं है, फिर भी लगता है कि उसने पंजाब और उत्तर भारत के कई हिस्सों की यात्रा की थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 116
2★★इब्न बतूता ने देहली (दिल्ली) शहर का कैसा वर्णन किया?
उत्तर देखिए
उत्तर: इब्न बतूता दिल्ली को बड़ा शहर, विशाल आबादी वाला और भारत में सबसे बड़ा बताता है; स्रोत 8 में उसका वर्णन यह है:
- प्राचीर: शहर के चारों ओर की प्राचीर अतुलनीय है, और दीवार की चौड़ाई ग्यारह हाथ है (एक हाथ लगभग 20 इंच)। प्राचीर के भीतर रात के पहरेदारों और द्वारपालों के कक्ष हैं, और खाद्यसामग्री, हथियार, बारूद, प्रक्षेपास्त्र और घेरेबंदी की मशीनों के भंडारगृह।
- बनावट: प्राचीर का निचला भाग पत्थर का और ऊपरी भाग ईंटों का है, और इसमें पास–पास कई मीनारें बनी हैं।
- द्वार: शहर के अट्ठाईस द्वार हैं, जिन्हें दरवाज़ा कहते हैं; बदायूँ दरवाज़ा सबसे विशाल है, मांडवी दरवाज़े के भीतर अनाज मंडी है, और गुल दरवाज़े की बगल में फलों का बगीचा।
शहर में एक बेहतरीन क़ब्रगाह भी है, जहाँ क़ब्रों पर गुंबद या मेहराब हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 127
3★इब्न बतूता के वृत्तांत से कैसे पता चलता है कि बाज़ार केवल लेन–देन की जगह नहीं थे?
उत्तर देखिए
उत्तर: इब्न बतूता के अनुसार बाज़ार सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों के केंद्र भी थे:
- पूजा के स्थान: ज़्यादातर बाज़ारों में एक मस्जिद और एक मंदिर होता था।
- प्रदर्शन की जगह: कम से कम कुछ बाज़ारों में नर्तकों, संगीतकारों और गायकों के सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए जगह तय थी।
- ताराबबाद (स्रोत 9): दौलताबाद में पुरुष और महिला गायकों का यह बाज़ार सबसे विशाल और सुंदर बाज़ारों में से एक था। एक हिंदू शासक जब भी इस बाज़ार से गुज़रता, गुंबद में उतरता और गायिकाएँ उसके सामने गाती थीं; कई मुस्लिम शासक भी ऐसा ही करते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 128
4★★बर्नियर के अनुसार भारत में निजी भूस्वामित्व न होने के क्या परिणाम हुए?
उत्तर देखिए
उत्तर: बर्नियर को लगा कि मुग़ल साम्राज्य में सम्राट सारी भूमि का स्वामी था और उसे अपने अमीरों में बाँटता था; उसके तर्क की कड़ियाँ ये थीं:
- बच्चों को भूमि नहीं: भूधारक अपनी भूमि अपने बच्चों को नहीं दे सकते थे, इसलिए वे उत्पादन बनाए रखने और बढ़ाने के लिए दूरगामी निवेश के प्रति उदासीन थे।
- भूधारकों का वर्ग नहीं: पश्चिमी यूरोप जैसा ऐसा भूधारक वर्ग नहीं उभरा, जो भूमि के रखरखाव और उसे बेहतर बनाने के प्रति सजग रहता।
- नतीजा: उसके अनुसार कृषि का समान रूप से विनाश, किसानों का असीम उत्पीड़न, और शासक वर्ग को छोड़कर समाज के सभी वर्गों के जीवन स्तर में लगातार पतन।
किताब याद दिलाती है कि एक भी सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ यह नहीं बताता कि राज्य ही भूमि का एकमात्र स्वामी था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 130, 131, 132
5★बर्नियर ने राजकीय कारखानों का कैसा वर्णन किया (स्रोत 14)?
उत्तर देखिए
उत्तर: किताब के अनुसार संभवत: बर्नियर एकमात्र ऐसा इतिहासकार है जो राजकीय कारखानों की कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण देता है:
- कक्ष: बड़े कक्ष, जिन्हें कारखाना या शिल्पकारों की कार्यशाला कहते थे; अलग–अलग कक्षों में कसीदाकार (एक मास्टर की देखरेख में), सुनार, चित्रकार, प्रलाक्षा रस का रोगन लगाने वाले, बढ़ई, खरादी, दर्जी, जूते बनाने वाले, और रेशम, जरी और महीन मलमल का काम करने वाले।
- दिनचर्या: शिल्पकार हर सुबह कारखानों में आते, दिन भर काम करते और शाम को अपने घर लौट जाते।
- बर्नियर की राय: उसके अनुसार इसी निश्चेष्ट नियमित ढंग से उनका समय बीतता था, और कोई अपने जन्म की स्थितियों को बेहतर बनाना नहीं चाहता था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 134
6★किताब यह कैसे दिखाती है कि महिलाओं का जीवन सती प्रथा तक सीमित नहीं था?
उत्तर देखिए
उत्तर: किताब के अनुसार महिलाओं का जीवन सती प्रथा के अलावा कई और चीज़ों के चारों ओर घूमता था:
- कृषि और उत्पादन: उनका श्रम कृषि में और कृषि के अलावा होने वाले उत्पादन, दोनों में महत्त्वपूर्ण था।
- व्यापार: व्यापारिक परिवारों की महिलाएँ व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा लेती थीं, और कभी–कभी वाणिज्यिक विवादों को अदालत के सामने भी ले जाती थीं।
- निष्कर्ष: इसलिए यह असंभाव्य लगता है कि महिलाओं को उनके घरों के खास स्थानों तक सीमित रखा जाता था।
वृत्तांत लिखने वाले यात्री सामान्यतया पुरुष थे, और कभी–कभी वे सामाजिक पक्षपात को “सामान्य” परिस्थिति मान लेते थे; इसलिए इन विवरणों को ध्यान से पढ़ना पड़ता है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135, 136
खंड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न
1★★अल–बिरूनी ने जाति व्यवस्था को कैसे समझा और समझाया? उसके विवरण की सीमा क्या थी?
उत्तर देखिए
उत्तर: अल–बिरूनी ने दूसरे समुदायों में प्रतिरूप खोजकर जाति व्यवस्था को समझने और समझाने का प्रयास किया:
- प्राचीन फ़ारस से तुलना: उसने लिखा कि प्राचीन फ़ारस में चार सामाजिक वर्गों को मान्यता थी: घुड़सवार और शासक वर्ग; भिक्षु, आनुष्ठानिक पुरोहित तथा चिकित्सक; खगोल शास्त्री तथा अन्य वैज्ञानिक; और कृषक तथा शिल्पकार। यानी ऐसे सामाजिक वर्ग केवल भारत तक सीमित नहीं थे।
- इस्लाम से तुलना: उसने बताया कि इस्लाम में सभी लोगों को समान माना जाता था, और उनमें भिन्नताएँ केवल धार्मिकता के पालन में थीं।
- चार वर्ण (स्रोत 5): हिंदुओं के ग्रंथों के आधार पर उसने लिखा कि ब्राह्मण ब्रह्मन् के सिर से, क्षत्रिय कंधों और हाथों से, वैश्य जंघाओं से और शूद्र चरणों से उत्पन्न हुए; अंतिम दो वर्गों में अधिक अंतर नहीं था; लेकिन वर्गों में भिन्नता होने पर भी वे एक ही शहरों और गाँवों में मिल–जुलकर रहते थे।
- अपवित्रता अस्वीकार: ब्राह्मणवादी व्याख्या मानने के बावजूद उसने अपवित्रता की मान्यता को प्रकृति के नियमों के विरुद्ध माना।
- सीमा: उसका विवरण नियामक संस्कृत ग्रंथों के अध्ययन से गहराई से प्रभावित था, जिनमें जाति व्यवस्था के नियम ब्राह्मणों के दृष्टिकोण से लिखे गए थे। वास्तविक जीवन में व्यवस्था इतनी कड़ी नहीं थी: अंत्यज (शाब्दिक अर्थ, व्यवस्था से परे) कहलाने वाली श्रेणियों से किसानों और ज़मींदारों के लिए सस्ता श्रम देने की अपेक्षा की जाती थी।
यानी ये लोग अकसर सामाजिक प्रताड़ना झेलते थे, फिर भी आर्थिक तंत्र में शामिल थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 124, 125
2★★इब्न बतूता की यात्राओं का वर्णन कीजिए: वह कहाँ से निकला, भारत में उसने क्या किया, और वह कब घर लौटा?
उत्तर देखिए
उत्तर: मोरक्को के तैंजियर में जन्मा इब्न बतूता पुस्तकों की जगह यात्राओं से मिले अनुभव को ज्ञान का ज़्यादा महत्त्वपूर्ण स्रोत मानता था:
- आरंभ: स्रोत 2 के अनुसार वह पुण्यस्थानों को देखने की इच्छा से तैंजियर से अकेला निकला, और उस समय उसकी उम्र बाईस वर्ष थी। भारत आने से पहले वह मक्का की तीर्थ यात्राएँ, और सीरिया, इराक, फारस, यमन, ओमान और पूर्वी अफ्रीका के कई तटीय व्यापारिक बंदरगाहों की यात्राएँ कर चुका था।
- भारत आना: 1332–33 में वह भारत के लिए निकला, और मध्य एशिया के रास्ते सन् 1333 में स्थलमार्ग से सिंध पहुँचा; फिर मुल्तान और उच्छ होकर दिल्ली गया।
- दिल्ली में: सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक ने उसकी विद्वता से प्रभावित होकर उसे दिल्ली का क़ाज़ी बनाया। कई वर्ष बाद वह सुल्तान का विश्वास खोकर कारागार में डाला गया, और ग़लतफ़हमी दूर होने पर फिर राजकीय सेवा में लिया गया।
- चीन की ओर: 1342 ई. में उसे सुल्तान के दूत के रूप में मंगोल शासक के पास चीन जाने का आदेश मिला। रास्ते में वह मालद्वीप में अठारह महीनों तक क़ाज़ी रहा, और अंततः उसने श्रीलंका जाने का निश्चय किया। बाद में वह एक बार फिर मालाबार तट और मालद्वीप गया, बंगाल और असम भी गया, और जहाज़ से सुमात्रा होकर चीनी बंदरगाह नगर जायतुन पहुँचा, और बीजिंग तक गया।
- वापसी: 1347 में उसने घर लौटने का निश्चय किया, और 1354 में घर पहुँचा, अपनी यात्रा आरंभ करने के लगभग तीस वर्ष बाद।
उसके श्रुतलेखों को लिखने के लिए इब्न जुज़ाई को नियुक्त किया गया, और यह वृत्तांत अरबी में रिह्ला के नाम से जाना जाता है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 118, 119, 121
3★★इब्न बतूता के वृत्तांत से चौदहवीं शताब्दी के भारतीय शहरों, व्यापार और डाक व्यवस्था के बारे में क्या पता चलता है?
उत्तर देखिए
उत्तर: इब्न बतूता ने उपमहाद्वीप के शहरों को उन लोगों के लिए व्यापक अवसरों से भरपूर पाया जिनके पास ज़रूरी इच्छा, साधन और कौशल था:
- शहर: शहर घनी आबादी वाले और समृद्ध थे, और ज़्यादातर में भीड़–भाड़ वाली सड़कें और चमक–दमक वाले रंगीन बाज़ार थे। दिल्ली भारत में सबसे बड़ा शहर था, और दौलताबाद आकार में उसे चुनौती देता था।
- गाँवों का अधिशेष: इतिहासकारों ने उसके वृत्तांत से यह तर्क दिया है कि शहर अपनी संपत्ति का बड़ा भाग गाँवों का अधिशेष लेकर पाते थे; उसके अनुसार उपजाऊ मिट्टी के कारण किसान वर्ष में दो फसलें उगा पाते थे।
- व्यापार: उपमहाद्वीप व्यापार और वाणिज्य के अंतर एशियाई तंत्रों से अच्छी तरह जुड़ा था। भारतीय माल की मध्य और दक्षिण–पूर्व एशिया, दोनों में बहुत माँग थी, ख़ासकर सूती कपड़े, महीन मलमल, रेशम, ज़री और साटन की।
- राज्य के उपाय: व्यापारियों को प्रोत्साहन देने के लिए लगभग सभी व्यापारिक मार्गों पर सराय और विश्राम गृह बने थे।
- डाक: अश्व डाक (उलुक) और पैदल डाक (दावा) इतनी कुशल थीं कि सिंध से दिल्ली की लगभग पचास दिन की यात्रा के बावजूद गुप्तचरों की ख़बरें सुल्तान तक पाँच दिनों में पहुँच जाती थीं, और व्यापारी लंबी दूरी तक सूचना और उधार भेज सकते थे।
चौदहवीं शताब्दी में जब इब्न बतूता दिल्ली आया, तब तक पूरा उपमहाद्वीप एक ऐसे वैश्विक संचार तंत्र का हिस्सा बन चुका था जो पूर्व में चीन से पश्चिम में उत्तर–पश्चिमी अफ़्रीका और यूरोप तक फैला था।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 126, 127, 128, 129
4★★बर्नियर ने भारत की तुलना यूरोप से किस तरह की? उसके अपने विवरण किस तरह एक अधिक जटिल सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं?
उत्तर देखिए
उत्तर: बर्नियर भारत में देखी हर चीज़ की तुलना सामान्य रूप से यूरोप और ख़ास तौर पर फ्रांस की स्थितियों से करता था, और उसका इरादा नीति–निर्माताओं और बुद्धिजीवी वर्ग को प्रभावित करना था:
- द्वि–विपरीतता: उसने भारत को यूरोप के प्रतिलोम के रूप में दिखाया, और जो भिन्नताएँ उसे दिखीं, उन्हें पदानुक्रम में सजाया, जिससे भारत पश्चिमी दुनिया को निम्न कोटि का लगे।
- उसका चित्र: निजी भूस्वामित्व का अभाव; दरिद्र लोगों का समरूप जनसमूह, जिसमें सबसे गरीब और सबसे अमीर के बीच कोई सामाजिक समूह या वर्ग नहीं; शहर केवल शिविर नगर; और उत्पादन हर जगह पतनोन्मुख।
- उसके अपने विवरण में दरारें: वही बर्नियर मानता है कि पूरे विश्व से बड़ी मात्रा में बहुमूल्य धातुएँ भारत आती थीं, क्योंकि उत्पादों का सोने और चाँदी के बदले निर्यात होता था, और वह लंबी दूरी के विनिमय में लगे एक समृद्ध व्यापारिक समुदाय को रेखांकित करता है।
- स्रोत 13: उसके अनुसार बंगाल मिस्र से चावल और मकई में ही नहीं, रेशम, कपास और नील जैसी वाणिज्यिक वस्तुओं में भी कहीं आगे था, और शिल्पकार गलीचे, ज़री, कसीदाकारी, सोने–चाँदी के वस्त्र और रेशमी–सूती वस्त्र बनाते थे जो विदेश भी जाते थे।
- शहरों का सच: सत्रहवीं शताब्दी के मुग़ल भारत में जनसंख्या का लगभग पंद्रह प्रतिशत भाग नगरों में रहता था, जो औसतन उसी समय के पश्चिमी यूरोप के नगरीय अनुपात से अधिक था; उत्पादन केंद्र, व्यापारिक नगर, बंदरगाह नगर, धार्मिक केंद्र और तीर्थ स्थान, सभी तरह के नगर थे।
इसलिए किताब उसके शिविर नगर वाले चित्रण को भी भूस्वामित्व वाले चित्रण की तरह अतिसरलीकृत मानती है।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 130, 131, 133, 134
5★★बर्नियर के भूस्वामित्व वाले विवरण का पश्चिमी विचारकों पर क्या असर पड़ा, और किताब इस विवरण पर क्या प्रश्न उठाती है?
उत्तर देखिए
उत्तर: अठारहवीं शताब्दी से बर्नियर के विवरणों ने पश्चिमी विचारकों को प्रभावित किया, पर किताब के अनुसार उसका चित्रण सच्चाई से बहुत दूर था:
- मॉन्टेस्क्यू: इस फ्रांसीसी दार्शनिक ने उसके वृत्तांत से प्राच्य निरंकुशवाद का सिद्धांत विकसित किया: एशिया में शासक अपनी प्रजा पर निर्बाध प्रभुत्व रखते थे, और प्रजा दासता और गरीबी में रहती थी, क्योंकि सारी भूमि राजा की थी और निजी संपत्ति थी ही नहीं।
- कार्ल मार्क्स: उन्नीसवीं शताब्दी में उसने इस विचार को एशियाई उत्पादन शैली के सिद्धांत के रूप में आगे बढ़ाया: उपनिवेशवाद से पहले भारत (और दूसरे एशियाई देशों) में अधिशेष राज्य ले लेता था, और इसे एक निष्क्रिय प्रणाली माना गया।
- मुग़ल दस्तावेज़: एक भी सरकारी मुग़ल दस्तावेज़ यह नहीं बताता कि राज्य ही भूमि का एकमात्र स्वामी था। अकबर के काल का सरकारी इतिहासकार अबुल फ़ज़्ल भूमि राजस्व को ‘राजत्व का पारिश्रमिक’ बताता है, जो प्रजा को सुरक्षा देने के बदले राजा की माँग प्रतीत होती है, न कि अपनी भूमि पर लगान।
- राजस्व का स्वरूप: संभव है कि यूरोपीय यात्री इसे लगान मानते रहे, क्योंकि भूमि राजस्व की माँग अकसर बहुत अधिक होती थी; असल में यह न लगान था, न भूमिकर, बल्कि उपज पर लगने वाला कर था।
- ग्रामीण समाज: सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी के ग्रामीण समाज में बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक विभेद था: एक ओर बड़े ज़मींदार, दूसरी ओर “अस्पृश्य” भूमिविहीन श्रमिक (बलाहार), और बीच में बड़े किसान और छोटे किसान।
इसलिए दरिद्र लोगों के समरूप जनसमूह वाली बर्नियर की तस्वीर इस विभेद भरे ग्रामीण समाज से मेल नहीं खाती।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 131, 132, 133
6★★यात्रियों के वृत्तांतों से महिलाओं के जीवन के बारे में क्या पता चलता है? इब्न बतूता और बर्नियर के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखिए
उत्तर: लिखित वृत्तांत छोड़ने वाले यात्री सामान्यतया पुरुष थे, जिन्हें उपमहाद्वीप में महिलाओं की स्थिति रुचिकर और कभी–कभी जिज्ञासापूर्ण लगती थी:
- दास प्रथा (इब्न बतूता): बाज़ारों में दास खुले आम बेचे जाते और भेंट में दिए जाते थे; सिंध पहुँचकर उसने सुल्तान के लिए भेंटस्वरूप “घोड़े, ऊँट तथा दास” खरीदे।
- दासियों में विभेद: कुछ दासियाँ संगीत और गायन में निपुण थीं; सुल्तान अमीरों पर नज़र रखने के लिए दासियों को भी नियुक्त करता था (स्रोत 15); घरेलू श्रम वाली दासियों की कीमत बहुत कम होती थी, और जो परिवार उन्हें रख सकते थे, उनमें से ज़्यादातर कम से कम एक या दो रखते थे।
- सती (बर्नियर): यूरोपीय यात्रियों के लिए महिलाओं से बर्ताव पश्चिमी और पूर्वी समाजों की भिन्नता का संकेतक था, इसलिए बर्नियर ने सती प्रथा को विस्तृत विवरण के लिए चुना। उसके अनुसार कुछ महिलाएँ प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थीं, पर अन्य को बाध्य किया जाता था; स्रोत 16 में वह लाहौर में एक अल्पवयस्क विधवा की बलि का विवरण देता है।
- श्रमिक महिलाएँ: उनका श्रम कृषि और कृषि के अलावा होने वाले उत्पादन, दोनों में महत्त्वपूर्ण था; व्यापारिक परिवारों की महिलाएँ व्यापार में हिस्सा लेती थीं और कभी–कभी वाणिज्यिक विवाद अदालत तक ले जाती थीं।
इसलिए किताब के अनुसार यह असंभाव्य लगता है कि महिलाओं को घरों के खास स्थानों तक सीमित रखा जाता था; साथ ही यात्री कभी–कभी सामाजिक पक्षपात को “सामान्य” परिस्थिति मान लेते थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135, 136
खंड छ — स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक) — 4 प्रश्न
1★★स्रोत 5 (वर्ण व्यवस्था) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“वे ब्रह्मन् के सिर से उत्पन्न हुए थे” “अंतिम दो वर्गों के बीच अधिक अंतर नहीं है।” “ये एक साथ एक ही शहरों और गाँवों में रहते हैं”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) हिंदुओं के ग्रंथों के आधार पर: वह लिखता है कि ग्रंथ बताते हैं कि ब्राह्मण ब्रह्मन् के सिर से उत्पन्न हुए थे, इसलिए हिंदू उन्हें मानव जाति में सबसे उत्तम मानते हैं।
- (ख) वैश्य, जिनका उद्भव ब्रह्मन् की जंघाओं से बताया गया, और शूद्र, जिनका सृजन चरणों से।
- (ग) उसका विवरण नियामक संस्कृत ग्रंथों के अध्ययन से गहराई से प्रभावित था, जिनमें नियम ब्राह्मणों के दृष्टिकोण से लिखे गए थे। वास्तविक जीवन में व्यवस्था इतनी कड़ी नहीं थी: अंत्यज कहलाने वाली श्रेणियों से किसानों और ज़मींदारों के लिए सस्ता श्रम देने की अपेक्षा की जाती थी, यानी वे आर्थिक तंत्र में शामिल थे।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 125
2★स्रोत 7 (पान) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“पान एक ऐसा वृक्ष है जिसे अंगूर-लता की तरह ही उगाया जाता है” “पान का कोई फल नहीं होता और इसे केवल इसकी पत्तियों के लिए ही उगाया जाता है” “यह जायफल जैसी ही होती है”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) अंगूर–लता से: पान अंगूर–लता की तरह ही उगाया जाता है।
- (ख) सुपारी, जो जायफल जैसी होती है; इसके छोटे–छोटे टुकड़े करके मुँह में रखकर चबाया जाता है, और फिर पान की पत्तियों के साथ।
- (ग) उसके पाठक इन दो वानस्पतिक उपजों से पूरी तरह अपरिचित थे, इसलिए उसने इन्हें जानी–पहचानी चीज़ों से जोड़ा, जैसे नारियल का वृक्ष खजूर जैसा और उसका फल मानव सिर जैसा (स्रोत 6)। किताब बताती है कि चौदहवीं शताब्दी के जिन शहरी केंद्रों में अरबी, फ़ारसी, तुर्की और दूसरी भाषाएँ बोलने वाले लोग कहानियाँ और जानकारी आपस में बाँटते थे, उन कहानियों में जो भी अपरिचित था, उसे विशेष रूप से रेखांकित किया जाता था, ताकि श्रोता या पाठक सुदूर पर सुगम्य देशों के वृत्तांतों से पूरी तरह प्रभावित हो सकें।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 126
3★★स्रोत 13 (एक भिन्न सामाजिक–आर्थिक परिदृश्य) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“इस देश के विस्तृत भू–भाग का अधिकांश भाग अत्यधिक उपजाऊ है” “सोना और चाँदी भारत में आकर कुछ हद तक खो जाता है।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) मिस्र से: उसके अनुसार बंगाल चावल, मकई और जीवन की दूसरी ज़रूरी वस्तुओं में ही नहीं, रेशम, कपास और नील जैसी वाणिज्यिक वस्तुओं में भी मिस्र से कहीं आगे है।
- (ख) गलीचे, ज़री, कसीदाकारी कढ़ाई, सोने और चाँदी के वस्त्र, और तरह–तरह के रेशमी और सूती वस्त्र, जो देश में भी काम आते हैं और विदेश भी भेजे जाते हैं।
- (ग) बाकी जगह बर्नियर कहता है कि शिल्पकारों के पास उत्पाद बेहतर बनाने का कोई प्रोत्साहन नहीं था, इसलिए उत्पादन हर जगह पतनोन्मुख था। यहाँ उपजाऊ भूमि, अच्छी खेती, निर्यात और भारत आता सोना–चाँदी दिखते हैं। किताब के अनुसार उसके विवरण कभी–कभी एक अधिक जटिल सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 133
4★स्रोत 15 (दासियाँ) के ये अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“हर बड़े या छोटे अमीर के साथ अपने दासों में से एक को रखने की जो उसके अमीरों की मुखबिरी करता है।” “अधिकांश दासियों को हमलों और अभियानों के दौरान बलपूर्वक प्राप्त किया जाता था।”
उत्तर और व्याख्या देखिए
उत्तर:
- (क) उस अमीर की मुखबिरी करने के लिए; यानी सुल्तान अमीरों पर नज़र रखता था।
- (ख) उन महिला सफाई कर्मचारियों को, जिन्हें सम्राट नियुक्त करता था और जो बिना बताए घरों में दाखिल हो जाती थीं।
- (ग) बाज़ारों में दास किसी भी दूसरी वस्तु की तरह खुले आम बेचे जाते थे और नियमित रूप से भेंट में दिए जाते थे। कुछ दासियाँ संगीत और गायन में निपुण थीं। दास सामान्यत: घरेलू श्रम में लगते थे, और घरेलू श्रम वाली दासियों की कीमत बहुत कम होती थी।
संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 5, पृष्ठ 135
उत्तर लिखने का तरीक़ा
| अंक | लंबाई | कैसे लिखें |
|---|---|---|
| 1 अंक | एक वाक्य | सीधे उत्तर |
| 2 अंक | 30–40 शब्द | उत्तर + कारण या उदाहरण |
| 3 अंक | 60–80 शब्द | तीन बिंदु, पूरे वाक्यों में |
| 4 अंक (स्रोत) | हर भाग 1–3 वाक्य | पहले अंश में उत्तर खोजिए, फिर किताब की बात जोड़िए |
| 5 अंक | लगभग 120 शब्द | भूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष |
★इस अध्याय के लिए तीन सलाह:
- किताब के शब्द लिखिए: किताब–उल–हिन्द, रिह्ला, शरिया, क़ाज़ी, अपवित्रता, वर्ण, अंत्यज, उलुक, दावा, ताराबबाद, शिविर नगर, प्राच्य निरंकुशवाद, राजकीय कारखाने, सती। पहले शब्द का अर्थ एक वाक्य में बताइए, फिर उदाहरण दीजिए।
- हर बात के साथ लिखिए कि वह किस यात्री की नज़र है और किताब उसे कैसे परखती है: अल–बिरूनी संस्कृत ग्रंथों पर आश्रित रहा, इब्न बतूता अनजानी चीज़ों को जानी–पहचानी चीज़ों से समझाता है, और बर्नियर हर बात की तुलना यूरोप से करता है। जहाँ हो सके, स्रोत का नंबर भी लिखिए।
- तिथियाँ और अनुमान किताब की तरह लिखिए: सन् 973, 1017 ई., 1332–33, 1342 ई., 1354, 1656 से 1668, 1670–71, चौदहवीं शताब्दी, लगभग पंद्रह प्रतिशत; और लगभग, शायद, संभवत:, कुछ इतिहासकार जैसे शब्द मत छोड़िए, क्योंकि बात उन्हीं से सही बनती है।
तीन नमूना परीक्षा-पत्र
हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खंडों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।
नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | अल–बिरूनी का जन्म सन् 973 में किस स्थान पर हुआ, जो आज उज़्बेकिस्तान में है? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: 1017 ई. में सुल्तान महमूद के ख़्वारिज़्म पर आक्रमण के बाद अल–बिरूनी ……… के रूप में ग़ज़नी आया। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: अल–बिरूनी यूनानी भाषा जानता था, इसलिए उसने प्लेटो के कार्य मूल यूनानी में पढ़े। | 1 |
| 4 | अल–बिरूनी ने भारत को समझने में कौन–से तीन अवरोध बताए? | 2 |
| 5 | इब्न बतूता के अनुसार भारत में डाक की कौन–सी दो व्यवस्थाएँ थीं? | 2 |
| 6 | बर्नियर के अनुसार भारत में निजी भूस्वामित्व न होने के क्या परिणाम हुए? | 3 |
| 7 | अल–बिरूनी ने जाति व्यवस्था को कैसे समझा और समझाया? उसके विवरण की सीमा क्या थी? | 5 |
| 8 | इब्न बतूता के वृत्तांत से चौदहवीं शताब्दी के भारतीय शहरों, व्यापार और डाक व्यवस्था के बारे में क्या पता चलता है? | 5 |
नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | 1342 ई. में सुल्तान मुहम्मद बिन तुग़लक ने इब्न बतूता को अपने दूत के रूप में किसके पास जाने का आदेश दिया? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: बर्नियर ने अपनी प्रमुख कृति फ्रांस के शासक ……… को समर्पित की थी। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: इब्न बतूता के अनुसार पैदल डाक (दावा) अश्व डाक (उलुक) से धीमी होती थी। | 1 |
| 4 | अल–बिरूनी ने अपवित्रता की मान्यता क्यों अस्वीकार की? | 2 |
| 5 | महाजन, सेठ और नगर सेठ कौन थे? | 2 |
| 6 | इब्न बतूता ने देहली (दिल्ली) शहर का कैसा वर्णन किया? | 3 |
| 7 | इब्न बतूता की यात्राओं का वर्णन कीजिए: वह कहाँ से निकला, भारत में उसने क्या किया, और वह कब घर लौटा? | 5 |
| 8 | बर्नियर के भूस्वामित्व वाले विवरण का पश्चिमी विचारकों पर क्या असर पड़ा, और किताब इस विवरण पर क्या प्रश्न उठाती है? | 5 |
नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)
| प्र. | प्रश्न | अंक |
|---|---|---|
| 1 | बर्नियर के वृत्तांत से प्राच्य निरंकुशवाद का सिद्धांत किसने विकसित किया? | 1 |
| 2 | रिक्त स्थान भरिए: सत्रहवीं शताब्दी में भारत की जनसंख्या का लगभग ……… भाग नगरों में रहता था। | 1 |
| 3 | सही या ग़लत: बर्नियर के अनुसार सती होने वाली सभी महिलाएँ अपनी इच्छा से मृत्यु को गले लगाती थीं। | 1 |
| 4 | इब्न बतूता ने अपने पाठकों को नारियल और पान जैसी अनजानी उपज कैसे समझाई? | 2 |
| 5 | इब्न बतूता के अनुसार दास और दासियाँ किन कामों में लगाए जाते थे? | 2 |
| 6 | बर्नियर ने राजकीय कारखानों का कैसा वर्णन किया (स्रोत 14)? | 3 |
| 7 | बर्नियर ने भारत की तुलना यूरोप से किस तरह की? उसके अपने विवरण किस तरह एक अधिक जटिल सामाजिक सच्चाई की ओर इशारा करते हैं? | 5 |
| 8 | यात्रियों के वृत्तांतों से महिलाओं के जीवन के बारे में क्या पता चलता है? इब्न बतूता और बर्नियर के उदाहरण दीजिए। | 5 |