अध्याय 2राजा, किसान और नगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2

कुल 66 प्रश्न

तारों का मतलब: ★ज़रूरी · ★★बहुत ज़रूरी; समय कम हो तो पहले ये प्रश्न और ये बातें दोहराइए।


खंड क — वस्तुनिष्ठ प्रश्न (1 अंक) — 20 प्रश्न

पृष्ठ संख्याएँ NCERT की किताब “भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I” (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

1ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स प्रिंसेप ने ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपियों का अर्थ किस दशक में निकाला?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) 1830 के दशक में

व्याख्या: किताब के अनुसार भारतीय अभिलेख विज्ञान में यह उल्लेखनीय प्रगति 1830 के दशक में हुई, और असोक के समय की ब्राह्मी का अर्थ प्रिंसेप ने 1838 में निकाला; बाकी दशक काल रेखा 2 की दूसरी घटनाओं के हैं: 1784 में बंगाल एशियाटिक सोसाइटी का गठन, 1810 के दशक में कोलिन मैकेंज़ी का अभिलेख एकत्र करना, और 1877 में अलेक्ज़ैंडर कनिंघम का असोक के अभिलेखों के एक अंश को प्रकाशित करना।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 28, 46, 51

2प्रिंसेप को अधिकांश अभिलेखों और सिक्कों पर राजा का जो नाम पियदस्सी लिखा मिला, उसका अर्थ क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) मनोहर मुखाकृति वाला राजा

व्याख्या: पृष्ठ 28 पर पियदस्सी का अर्थ मनोहर मुखाकृति वाला राजा बताया गया है और पृष्ठ 47 पर देखने में सुंदर; देवताओं का प्रिय असोक की दूसरी उपाधि देवानांपिय का अर्थ है, राजाओं का घर मगध की आरंभिक राजधानी राजगाह के नाम का अर्थ है, और सोने के पहाड़ मौर्य प्रांतीय केंद्र सुवर्णगिरि के नाम का।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 28, 31, 33, 47

3बौद्ध और जैन धर्म के आरंभिक ग्रंथों में महाजनपद नाम से कितने राज्यों का उल्लेख मिलता है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) सोलह

व्याख्या: इन ग्रंथों में सोलह महाजनपदों का उल्लेख है; नामों की सूची हर ग्रंथ में एकसमान नहीं है, पर वज्जि, मगध, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार और अवन्ति जैसे नाम प्राय: मिलते हैं, जिससे पता चलता है कि ये प्रमुख महाजनपदों में गिने जाते होंगे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 29

4आरंभिक जैन और बौद्ध लेखकों ने मगध की महत्ता का कारण किसे बताया?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) बिंबिसार, अजातसत्तु और महापद्मनंद जैसे शासकों की नीतियों को

व्याख्या: छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में मगध सबसे शक्तिशाली महाजनपद बना; अच्छी उपज, आधुनिक झारखंड की लोहे की खदानें, जंगलों के हाथी और गंगा का सस्ता आवागमन आधुनिक इतिहासकारों के बताए कारण हैं, जबकि आरंभिक जैन और बौद्ध लेखक महत्त्वाकांक्षी शासकों की नीतियों को कारण मानते हैं, जिन्हें उनके मंत्री लागू करते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 31

5मगध की आरंभिक राजधानी राजगाह, जो आधुनिक बिहार के राजगीर का प्राकृत नाम है, उसके नाम का अर्थ क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) राजाओं का घर

व्याख्या: किताब बताती है कि राजगाह शब्द का अर्थ ‘राजाओं का घर’ है; पहाड़ियों के बीच बसा राजगाह एक किलेबंद शहर था। बाद में पाटलिपुत्र, जिसे अब पटना कहा जाता है, राजधानी बना: राजधानी वहाँ लाने का निर्णय पाँचवीं सदी ई.पू. में हुआ, और चौथी शताब्दी ई.पू. तक वह मौर्य साम्राज्य की राजधानी बन चुका था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 31, 42

6किताब के अनुसार मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य का समय क्या है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) लगभग 321 ई.पू.

व्याख्या: चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 321 ई.पू.) का शासन पश्चिमोत्तर में अफ़गानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था; काल रेखा 1 में लगभग 600-500 ई.पू. महाजनपदों और गंगा घाटी में नगरीकरण का समय है, लगभग 375-415 ई. गुप्त शासक चंद्रगुप्त द्वितीय का, और लगभग 606-647 ई. कन्नौज के राजा हर्षवर्धन का।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 40, 50

7मौर्य साम्राज्य का कौन-सा प्रांतीय केंद्र कर्नाटक में सोने की खदान के लिए उपयोगी था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) सुवर्णगिरि

व्याख्या: सुवर्णगिरि का अर्थ ही सोने के पहाड़ है; तक्षशिला और उज्जयिनी लंबी दूरी वाले महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर थे, और तोसलि चौथा प्रांतीय केंद्र था; राजधानी पाटलिपुत्र समेत इन पाँचों केंद्रों का उल्लेख असोक के अभिलेखों में है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 33

8मेगस्थनीज़ ने सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक समिति और कितनी उपसमितियों का उल्लेख किया है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) छ:

व्याख्या: छ: उपसमितियों के काम थे नौसेना, यातायात और खान-पान, पैदल सैनिकों, अश्वारोहियों, रथारोहियों और हाथियों का संचालन; दूसरी उपसमिति उपकरण ढोने के लिए बैलगाड़ियाँ, सैनिकों का भोजन, जानवरों का चारा, और सैनिकों की देखभाल के लिए सेवक और शिल्पकार जुटाती थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 34

9असोक ने धम्म के प्रचार के लिए जो विशेष अधिकारी नियुक्त किए, वे क्या कहलाते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) धम्म महामात्त

व्याख्या: धम्म महामात्त धम्म के प्रचार के लिए नियुक्त हुए; असोक के एक अभिलेख (स्रोत 10) के पतिवेदक लोगों के समाचार राजा तक पहुँचाते थे, चौथी शताब्दी ई. के सामंत स्थानीय संसाधनों से निर्वाह करते और शासकों को सैनिक सहायता देते थे, और गहपति घर का मुखिया होता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 34, 36, 39, 47

10असोक के अधिकांश अभिलेख किस भाषा में हैं, और पश्चिमोत्तर के कुछ अभिलेख किस लिपि में लिखे गए?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) प्राकृत भाषा; खरोष्ठी लिपि

व्याख्या: असोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत में हैं और प्राकृत के अधिकांश अभिलेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए, जबकि पश्चिमोत्तर के कुछ अभिलेख खरोष्ठी में; पश्चिमोत्तर से मिले अभिलेख अरामेइक और यूनानी भाषा में हैं, और अरामेइक और यूनानी लिपियों का प्रयोग अफ़गानिस्तान में मिले अभिलेखों में हुआ।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32

11कई कुषाण शासकों ने अपने नाम के आगे कौन-सी उपाधि लगाई, जो संभवत: उन चीनी शासकों से प्रेरित थी जो स्वयं को स्वर्गपुत्र कहते थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) देवपुत्र

व्याख्या: कुषाण शासक (लगभग प्रथम शताब्दी ई.पू. से प्रथम शताब्दी ई. तक) देवपुत्र की उपाधि लगाते थे, और मथुरा के पास माट के एक देवस्थान पर उनकी विशालकाय मूर्तियाँ लगाई गईं; देवानांपिय और पियदस्सी असोक की उपाधियाँ हैं, और राजकवि हरिषेण और बाणभट्ट जैसे दरबारी कवियों का पद था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 36, 37, 40, 47

12प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) की रचना संस्कृत में किसने की?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) समुद्रगुप्त के राजकवि हरिषेण ने

व्याख्या: हरिषेण समुद्रगुप्त के राजकवि थे, जिन्हें किताब गुप्त सम्राटों में संभवत: सबसे शक्तिशाली सम्राट बताती है; बाणभट्ट ने हर्षवर्धन की जीवनी हर्षचरित लिखी, चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए यूनानी राजदूत मेगस्थनीज़ ने एक विवरण लिखा, और अर्थशास्त्र के कुछ भागों की रचना संभवत: कौटिल्य या चाणक्य ने की।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 37, 40

13एक पाषाण अभिलेख (स्रोत 5) के अनुसार गुजरात की सुदर्शन झील की मरम्मत अपने खर्चे से, प्रजा से कर लिए बिना, किस शासक ने करवाई थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) शक शासक रुद्रदमन

व्याख्या: यह बात लगभग दूसरी शताब्दी ई. के संस्कृत के एक पाषाण अभिलेख में बताई गई है, जो रुद्रदमन की उपलब्धियों का उल्लेख करने के लिए बनवाया गया था; झील मौर्य काल में एक स्थानीय राज्यपाल ने बनवाई थी, और उसी पाषाण-खंड पर लगभग पाँचवीं सदी के एक और अभिलेख के अनुसार गुप्त वंश के एक शासक ने इसकी फिर मरम्मत करवाई।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 38

14पालि भाषा में गहपति शब्द का प्रयोग किनके लिए किया जाता था?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) छोटे किसानों और ज़मींदारों के लिए

व्याख्या: बौद्ध कथाओं में भूमिहीन खेतिहर श्रमिक, छोटे किसान और बड़े ज़मींदार, तीनों मिलते हैं, और पालि में गहपति छोटे किसानों और ज़मींदारों के लिए आता है; गहपति घर का मुखिया होता था, जो घर की महिलाओं, बच्चों, नौकरों और दासों पर नियंत्रण रखता और घर की भूमि, जानवरों और दूसरी वस्तुओं का मालिक होता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 39

15आरंभिक तमिल संगम साहित्य में गाँव के वेल्लालर किन्हें कहा गया है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (अ) बड़े ज़मींदारों को

व्याख्या: संगम साहित्य में वेल्लालर बड़े ज़मींदार हैं, हलवाहा उल्वर है और दास अणिमई; सफल व्यापारी तमिल में मसत्थुवन और प्राकृत में सत्थवाह और सेट्ठी कहलाते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 39, 44

16अग्रहार किसे कहते थे?

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सही उत्तर: (अ) ब्राह्मणों को दान की गई भूमि, जिससे भूमिकर या अन्य कर नहीं वसूले जाते थे

व्याख्या: अग्रहार पाने वाले ब्राह्मणों को स्थानीय लोगों से कर वसूलने का अधिकार भी था; उत्पादकों और व्यापारियों का संघ श्रेणी है, पहाड़ियों के बीच बसी किलेबंद राजधानी राजगाह थी, और सीमा पर गाड़े जाने वाले निशानों की सलाह मनुस्मृति (स्रोत 6) देती है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 31, 39, 41, 43

17भूमि की स्वामी और दान करने वाली प्रभावती गुप्त किसकी पुत्री थी?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (स) चंद्रगुप्त द्वितीय की, जिनका समय लगभग 375-415 ई. है

व्याख्या: प्रभावती का विवाह दक्कन पठार के वाकाटक परिवार में हुआ था; संस्कृत धर्मशास्त्रों के अनुसार महिलाओं को भूमि जैसी संपत्ति पर स्वतंत्र अधिकार नहीं था, फिर भी एक अभिलेख (स्रोत 8) बताता है कि प्रभावती भूमि की स्वामी थी और उसने दान भी किया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 40, 41

18सबसे पहले ढाले गए और प्रयोग में आए आहत सिक्के, जो छठी शताब्दी ई.पू. के हैं, किस धातु के थे?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) चाँदी और ताँबे के

व्याख्या: चाँदी और ताँबे के आहत सिक्के पूरे उपमहाद्वीप में खुदाई में मिले हैं, और इन पर प्रतीकों को आहत कर उन्हें बनाया जाता था; सोने के सिक्के बड़े पैमाने पर प्रथम शताब्दी ई. में कुषाण राजाओं ने जारी किए।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 44, 45

19शासकों की प्रतिमा और नाम वाले सबसे पहले सिक्के किन शासकों ने जारी किए?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (द) हिंद-यूनानी शासकों ने

व्याख्या: हिंद-यूनानी शासकों ने द्वितीय शताब्दी ई.पू. में उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया था। कुषाण राजाओं ने बाद में, प्रथम शताब्दी ई. में, बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए, जिनका आकार और वज़न रोमन सम्राटों और ईरान के पार्थियन शासकों के सिक्कों जैसा था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 44

20असोक के अभिलेख (स्रोत 10) में आने वाले पतिवेदक शब्द का अर्थ अभिलेखशास्त्रियों ने क्या बताया है?

उत्तर और व्याख्या देखिए

सही उत्तर: (ब) संवाददाता

व्याख्या: स्रोत 10 में राजा चाहते हैं कि पतिवेदक लोगों के समाचार उन तक सदैव पहुँचाएँ, चाहे वे खाना खा रहे हों, अन्त:पुर में हों या वाटिका में; स्रोत 10 में असोक का नाम नहीं है, केवल उनकी उपाधियाँ देवानांपिय और पियदस्सी हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 47

खंड ख — रिक्त स्थान (1 अंक) — 10 प्रश्न

1अभिलेखों के अध्ययन को ______ कहते हैं। (पृष्ठ 28)

उत्तर देखिए

अभिलेखों के अध्ययन को अभिलेखशास्त्र कहते हैं। (पृष्ठ 28)

2प्राकृत उन भाषाओं को कहा जाता था जो ______ की भाषाएँ होती थीं। (पृष्ठ 29)

उत्तर देखिए

प्राकृत उन भाषाओं को कहा जाता था जो जनसामान्य की भाषाएँ होती थीं। (पृष्ठ 29)

3जिन अभिलेखों पर तिथि नहीं मिलती, उनका काल आमतौर पर ______ अथवा लेखन शैली के आधार पर तय किया जाता है। (पृष्ठ 29)

उत्तर देखिए

जिन अभिलेखों पर तिथि नहीं मिलती, उनका काल आमतौर पर पुरालिपि अथवा लेखन शैली के आधार पर तय किया जाता है। (पृष्ठ 29)

4लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मणों ने संस्कृत में ______ नामक ग्रंथों की रचना शुरू की, जिनमें यह अपेक्षा थी कि शासक क्षत्रिय वर्ण से होंगे। (पृष्ठ 30)

उत्तर देखिए

लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मणों ने संस्कृत में धर्मशास्त्र नामक ग्रंथों की रचना शुरू की, जिनमें यह अपेक्षा थी कि शासक क्षत्रिय वर्ण से होंगे। (पृष्ठ 30)

5मौर्य साम्राज्य मात्र ______ साल तक ही चल पाया। (पृष्ठ 35)

उत्तर देखिए

मौर्य साम्राज्य मात्र डेढ़ सौ साल तक ही चल पाया। (पृष्ठ 35)

6चौथी शताब्दी ई. में गुप्त साम्राज्य सहित कई बड़े साम्राज्यों के साक्ष्य मिलते हैं; इनमें से कई साम्राज्य ______ पर निर्भर थे, जो शासकों को सैनिक सहायता भी देते थे। (पृष्ठ 36)

उत्तर देखिए

चौथी शताब्दी ई. में गुप्त साम्राज्य सहित कई बड़े साम्राज्यों के साक्ष्य मिलते हैं; इनमें से कई साम्राज्य सामंतों पर निर्भर थे, जो शासकों को सैनिक सहायता भी देते थे। (पृष्ठ 36)

7जातक कथाएँ पहली सहस्राब्दि ई. के मध्य में ______ भाषा में लिखी गईं। (पृष्ठ 38)

उत्तर देखिए

जातक कथाएँ पहली सहस्राब्दि ई. के मध्य में पालि भाषा में लिखी गईं। (पृष्ठ 38)

8कन्नौज के शासक हर्षवर्धन की संस्कृत जीवनी हर्षचरित के लेखक उनके राजकवि ______ थे। (पृष्ठ 40)

उत्तर देखिए

कन्नौज के शासक हर्षवर्धन की संस्कृत जीवनी हर्षचरित के लेखक उनके राजकवि बाणभट्ट थे। (पृष्ठ 40)

9उत्पादकों और व्यापारियों के संघ को ______ कहा गया है। (पृष्ठ 43)

उत्तर देखिए

उत्पादकों और व्यापारियों के संघ को श्रेणी कहा गया है। (पृष्ठ 43)

10सिक्कों के अध्ययन को ______ कहते हैं। (पृष्ठ 45)

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सिक्कों के अध्ययन को मुद्राशास्त्र कहते हैं। (पृष्ठ 45)

खंड ग — सही/ग़लत (1 अंक) — 8 प्रश्न

1आज की भारतीय भाषाओं की लगभग सभी लिपियों का मूल ब्राह्मी लिपि है।

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सही (पृष्ठ 46)

2आरंभिक अभिलेख पढ़ने वाले विद्वानों ने उन्हें प्राकृत में लिखा माना, जबकि सबसे पुराने अभिलेख वस्तुत: संस्कृत में थे।

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ग़लत

(उलटा है: विद्वानों ने कई बार अनुमान लगाया कि ये संस्कृत में हैं, जबकि प्राचीनतम अभिलेख वस्तुत: प्राकृत में थे; पृष्ठ 46)

3लोहे के फाल वाले हल का उपयोग पूरे उपमहाद्वीप में फैल गया था।

उत्तर देखिए

ग़लत

(यह उपमहाद्वीप के कुछ ही हिस्से में था; पंजाब और राजस्थान जैसे अर्धशुष्क क्षेत्रों में इसका प्रयोग बीसवीं सदी में शुरू हुआ, और पूर्वोत्तर व मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों ने कुदाल का उपयोग किया; पृष्ठ 38, 39)

4स्रोत 10 वाले अभिलेख में असोक का नाम लिखा है।

उत्तर देखिए

ग़लत

(उसमें केवल उपाधियाँ देवानांपिय और पियदस्सी हैं; असोक नाम दूसरे अभिलेखों में मिलता है; पृष्ठ 47)

5आरंभिक नगरों के अधिकांश स्थलों पर व्यापक खुदाई संभव नहीं है, क्योंकि आज भी इन क्षेत्रों में लोग रहते हैं।

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सही (पृष्ठ 42)

6यूनानी स्रोतों में मौर्य सम्राट की सेना के जो आँकड़े हैं, यानी छ: लाख पैदल सैनिक, तीस हज़ार घुड़सवार और नौ हज़ार हाथी, उन्हें सभी इतिहासकार सही मानते हैं।

उत्तर देखिए

ग़लत

(कुछ इतिहासकार इस विवरण को अतिशयोक्तिपूर्ण मानते हैं; पृष्ठ 35)

7संस्कृत धर्मशास्त्रों के अनुसार महिलाओं को भूमि पर स्वतंत्र अधिकार नहीं था, फिर भी एक अभिलेख से पता चलता है कि प्रभावती गुप्त भूमि की स्वामी थी और उसने दान भी किया।

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सही (पृष्ठ 40)

8सरदार अपने अधीन लोगों से कर वसूलता था, जबकि राजा भेंट लेते थे।

उत्तर देखिए

ग़लत

(उलटा है: सरदार भेंट लेता था और उसे अपने समर्थकों में बाँटता था, जबकि राजा कर वसूलते थे; पृष्ठ 35)

खंड घ — अति लघूत्तरीय प्रश्न (2 अंक) — 10 प्रश्न

1★★अभिलेख किसे कहते हैं? जिन अभिलेखों पर तिथि नहीं होती, उनका काल कैसे तय किया जाता है?

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उत्तर: अभिलेख वे हैं जो पत्थर, धातु या मिट्टी के बर्तन जैसी कठोर सतह पर खुदे होते हैं।

  • क्या लिखा होता है: उन्हें बनवाने वालों की उपलब्धियाँ, क्रियाकलाप या विचार, जैसे राजाओं के क्रियाकलाप और महिलाओं और पुरुषों द्वारा धार्मिक संस्थाओं को दिए दान; इसलिए अभिलेख एक तरह के स्थायी प्रमाण हैं।
  • बिना तिथि वाले अभिलेख: इनका काल पुरालिपि, यानी लेखन शैली के आधार पर तय होता है; जैसे लगभग 250 ई.पू. में अक्षर ‘अ’ जिस ढंग से लिखा जाता था, 500 ई. में उससे अलग ढंग से लिखा जाता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 29

2★महाजनपदों में राजा के शासन और गण या संघ के शासन में क्या अंतर था?

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उत्तर: अधिकांश महाजनपदों पर एक राजा का शासन होता था।

  • गण और संघ: इन राज्यों में कई लोगों का समूह शासन करता था, और समूह का हर व्यक्ति राजा कहलाता था; वज्जि संघ की ही भाँति कुछ राज्यों में भूमि सहित अनेक आर्थिक स्रोतों पर ये राजा सामूहिक नियंत्रण रखते थे।
  • उदाहरण: भगवान महावीर और भगवान बुद्ध इन्हीं गणों से संबंधित थे, और ऐसे कई राज्य लगभग एक हज़ार साल तक बने रहे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 29

3★पाटलिपुत्र नगर का विकास कैसे हुआ?

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उत्तर: पाटलिपुत्र का विकास पाटलिग्राम नाम के एक गाँव से हुआ।

  • पाँचवीं सदी ई.पू. में मगध के शासकों ने अपनी राजधानी राजगाह से हटाकर इस बस्ती में लाने का निर्णय किया और इसका नाम बदल दिया।
  • चौथी शताब्दी ई.पू. तक यह मौर्य साम्राज्य की राजधानी और एशिया के सबसे बड़े नगरों में से एक बन गया।
  • बाद में इसका महत्त्व कम हो गया: चीनी यात्री श्वैन त्सांग सातवीं सदी ई. में यहाँ आया, तो उसे यह नगर खंडहर में बदला मिला और जनसंख्या भी कम थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 42

4★★उपमहाद्वीप के लंबे इतिहास में मौर्य साम्राज्य को बहुत बड़ा काल क्यों नहीं माना जा सकता?

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उत्तर: किताब इसके दो कारण बताती है।

  • छोटी अवधि: यह साम्राज्य मात्र डेढ़ सौ साल तक ही चल पाया।
  • अधूरा फैलाव: मानचित्र 2 दिखाता है कि मौर्य साम्राज्य उपमहाद्वीप के सभी क्षेत्रों में नहीं फैल पाया था, और साम्राज्य की सीमा के भीतर भी नियंत्रण एकसमान नहीं था।

दूसरी शताब्दी ई.पू. आते-आते उपमहाद्वीप के कई भागों में नए शासक और रजवाड़े स्थापित होने लगे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 35

5★दक्षिण के सरदार कौन होते थे? उनके काम क्या थे?

उत्तर देखिए

उत्तर: सरदार एक शक्तिशाली व्यक्ति होता है, जिसका पद वंशानुगत भी हो सकता है और नहीं भी; उसके समर्थक उसके खानदान के लोग होते हैं।

  • काम: विशेष अनुष्ठान का संचालन, युद्ध के समय नेतृत्व, और विवादों को सुलझाने में मध्यस्थता।
  • भेंट, कर नहीं: वह अपने अधीन लोगों से भेंट लेता है, जबकि राजा कर वसूलते हैं, और उस भेंट को अपने समर्थकों में बाँटता है।

सरदारी में सामान्यतया कोई स्थायी सेना या अधिकारी नहीं होते। तमिलकम में चोल, चेर और पाण्ड्य जैसी सरदारियों का उदय हुआ।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 35

6★प्रशस्ति क्या होती थी? इतिहासकार इससे तथ्य निकालते समय सावधान क्यों रहते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: प्रशस्ति वह रचना है जो कवि अपने राजा या स्वामी की प्रशंसा में लिखते थे; गुप्त शासकों का इतिहास साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों के साथ इन प्रशस्तियों की सहायता से भी लिखा गया है।

  • सावधानी क्यों: इनके रचयिता इन्हें तथ्यात्मक विवरण नहीं, काव्यात्मक ग्रंथ मानते थे।
  • उदाहरण: इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख के नाम से प्रसिद्ध प्रयाग प्रशस्ति, जिसकी रचना समुद्रगुप्त के राजकवि हरिषेण ने संस्कृत में की।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 36, 37

7★गहपति कौन होता था?

उत्तर देखिए

उत्तर: गहपति घर का मुखिया होता था।

  • वह घर में रहने वाली महिलाओं, बच्चों, नौकरों और दासों पर नियंत्रण रखता था, और घर से जुड़ी भूमि, जानवरों और दूसरी सभी वस्तुओं का मालिक होता था।
  • कभी-कभी यह शब्द नगरों में रहने वाले संभ्रांत व्यक्तियों और व्यापारियों के लिए भी आता था; पालि भाषा में इसका प्रयोग छोटे किसानों और ज़मींदारों के लिए होता था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 39

8★धान की रोपाई क्या है? गंगा की घाटी में इसका क्या असर हुआ?

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उत्तर: धान की रोपाई उन क्षेत्रों में होती है जहाँ पानी बहुत होता है।

  • तरीका: पहले धान के बीज अंकुरित किए जाते हैं, फिर पानी से भरे खेतों में पौधों की रोपाई की जाती है; ज़्यादा पौध बच जाने से उपज बढ़ जाती है।
  • असर: गंगा की घाटी में धान की रोपाई से उपज में भारी वृद्धि हुई, हालाँकि किसानों को इसके लिए कमरतोड़ मेहनत करनी पड़ती थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 38

9★आरंभिक नगरों के स्थलों पर बड़े पैमाने पर खुदाई क्यों संभव नहीं है? फिर भी वहाँ से कौन-से पुरावशेष मिले हैं?

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उत्तर: हड़प्पा शहरों से भिन्न, इनमें से अधिकांश स्थलों पर आज भी लोग रहते हैं, इसलिए व्यापक खुदाई संभव नहीं है।

  • उत्तरी कृष्ण मार्जित पात्र: उत्कृष्ट श्रेणी के मिट्टी के कटोरे और थालियाँ, जिन पर चमकदार कलई चढ़ी है; संभवत: इनका उपयोग अमीर लोग करते थे।
  • दूसरे पुरावशेष: सोने, चाँदी, कांस्य, ताँबे, हाथी दाँत और शीशे जैसे पदार्थों के बने गहने, उपकरण, हथियार और बर्तन, साथ में सीप और पक्की मिट्टी की वस्तुएँ।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 42

10★दानात्मक अभिलेख क्या हैं? इनसे नगरों के लोगों के बारे में क्या पता चलता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: दानात्मक अभिलेखों में धार्मिक संस्थाओं को दिए दान का विवरण होता है; द्वितीय शताब्दी ई.पू. आते-आते ऐसे छोटे अभिलेख कई नगरों में मिलने लगते हैं।

  • व्यवसाय: इनमें दाता के नाम के साथ प्राय: उसका व्यवसाय भी लिखा होता है, जैसे नगरों में रहने वाले धोबी, बुनकर, लिपिक, बढ़ई, कुम्हार, स्वर्णकार, लौहकार, अधिकारी, धार्मिक गुरु, व्यापारी और राजा।
  • उदाहरण: मथुरा से मिली एक मूर्ति के भाग (चित्र 2.6) पर प्राकृत में अभिलेख है कि एक स्वर्णकार धर्मक की पत्नी नागपिया ने इसे एक धार्मिक स्थल में स्थापित किया था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 42, 43

खंड ङ — लघूत्तरीय प्रश्न (3 अंक) — 8 प्रश्न

1★★महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई.पू. को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है, और बौद्ध और जैन धर्म के आरंभिक ग्रंथों में सोलह महाजनपदों का उल्लेख है।

  • शासन: अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन था; गण और संघ कहलाने वाले राज्यों में कई लोगों का समूह शासन करता था, और समूह का हर व्यक्ति राजा कहलाता था।
  • राजधानी: हर महाजनपद की एक राजधानी थी, जो प्राय: किलेबंद होती थी।
  • नियम: लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मणों ने संस्कृत में धर्मशास्त्र नामक ग्रंथों की रचना शुरू की, जिनमें अपेक्षा थी कि शासक क्षत्रिय वर्ण से होंगे।
  • आय: शासक किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से कर और भेंट लेते थे, और पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करके धन इकट्ठा करना भी वैध उपाय माना जाता था।
  • सेना और नौकरशाही: धीरे-धीरे कुछ राज्यों ने स्थायी सेनाएँ और नौकरशाही तंत्र बना लिए; बाकी राज्य अब भी सहायक-सेना पर निर्भर थे, जिसके सैनिक प्राय: कृषक वर्ग से लिए जाते थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 29, 30

2★★छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में मगध की सत्ता के विकास के लिए आरंभिक और आधुनिक लेखकों ने क्या-क्या व्याख्याएँ दी हैं? ये एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में मगध (आधुनिक बिहार) सबसे शक्तिशाली महाजनपद बन गया, और इसके कारणों पर दो तरह की व्याख्याएँ मिलती हैं।

  • आधुनिक इतिहासकार: मगध में खेती की उपज खास तौर पर अच्छी होती थी; लोहे की खदानें (आधुनिक झारखंड में) आसानी से उपलब्ध थीं, जिससे उपकरण और हथियार बनाना सरल था; जंगलों में हाथी मिलते थे, जो सेना का महत्वपूर्ण अंग थे; और गंगा और उसकी उपनदियों से आवागमन सस्ता और सुलभ था।
  • आरंभिक जैन और बौद्ध लेखक: ये मगध की महत्ता का कारण शासकों की नीतियाँ बताते हैं: बिंबिसार, अजातसत्तु और महापद्मनंद जैसे प्रसिद्ध राजा अत्यंत महत्त्वाकांक्षी शासक थे, और उनके मंत्री उनकी नीतियाँ लागू करते थे।
  • भेद: आधुनिक व्याख्या भूगोल और संसाधनों पर ज़ोर देती है, आरंभिक व्याख्या राजाओं और उनके मंत्रियों पर।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 31

3★★मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्र कौन-से थे? इन केंद्रों का चयन सोच-समझकर क्यों किया गया?

उत्तर देखिए

उत्तर: मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्र थे: राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि; इन सबका उल्लेख असोक के अभिलेखों में है।

  • व्यापार मार्ग: तक्षशिला और उज्जयिनी, दोनों लंबी दूरी वाले महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग पर स्थित थे।
  • खनिज: सुवर्णगिरि (अर्थात् सोने के पहाड़) कर्नाटक में सोने की खदान के लिए उपयोगी था।
  • नियंत्रण: साम्राज्य के क्षेत्र बहुत विविध थे, अफ़गानिस्तान के पहाड़ी क्षेत्रों से उड़ीसा के तटवर्ती क्षेत्रों तक; किताब के अनुसार यह संभव है कि सबसे प्रबल प्रशासनिक नियंत्रण राजधानी और उसके आसपास के प्रांतीय केंद्रों पर रहा हो।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 33

4★★असोक का धम्म क्या था? उन्होंने इसका प्रचार कैसे किया?

उत्तर देखिए

उत्तर: असोक वह पहला सम्राट था जिसने अपने अधिकारियों और प्रजा के लिए संदेश प्राकृतिक पत्थरों और पॉलिश किए हुए स्तंभों पर लिखवाए, और इन्हीं अभिलेखों के माध्यम से धम्म का प्रचार किया।

  • धम्म में क्या था: बड़ों के प्रति आदर, संन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता, सेवकों और दासों के साथ उदार व्यवहार, और दूसरों के धर्मों और परंपराओं का आदर।
  • असोक की सोच: धम्म के सिद्धांत बहुत साधारण और सार्वभौमिक थे; असोक के अनुसार इससे लोगों का जीवन इस संसार में और इसके बाद के संसार में अच्छा रहेगा।
  • प्रचार की व्यवस्था: धम्म के प्रचार से असोक ने साम्राज्य को अखंड बनाए रखने का प्रयास भी किया, और इसके लिए धम्म महामात्त नाम के विशेष अधिकारी नियुक्त किए।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 34

5★गुजरात की सुदर्शन झील के अभिलेख (स्रोत 5) से सिंचाई और शासकों के बारे में क्या पता चलता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: सुदर्शन झील एक कृत्रिम जलाशय था, जिसका ज्ञान लगभग दूसरी शताब्दी ई. के संस्कृत के एक पाषाण अभिलेख से होता है; यह अभिलेख शक शासक रुद्रदमन की उपलब्धियों का उल्लेख करने के लिए बनवाया गया था।

  • बनना और टूटना: जलद्वारों और तटबंधों वाली यह झील मौर्य काल में एक स्थानीय राज्यपाल ने बनवाई थी; एक भीषण तूफ़ान से इसके तटबंध टूट गए और सारा पानी बह गया।
  • मरम्मत: बताया जाता है कि तत्कालीन शासक रुद्रदमन ने झील की मरम्मत अपने खर्चे से करवाई थी और इसके लिए प्रजा से कर भी नहीं लिया था; उसी पाषाण-खंड पर लगभग पाँचवीं सदी के एक और अभिलेख के अनुसार गुप्त वंश के एक शासक ने इसकी फिर मरम्मत करवाई।
  • शासक और सिंचाई: तालाब, कुएँ और नहरें जैसे सिंचाई के साधन बनवाने वाले प्राय: राजा या प्रभावशाली लोग थे, जिन्होंने अपने इन कामों का उल्लेख अभिलेखों में भी करवाया।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 38, 39

6★★भूमिदान के अभिलेख किन पर लिखे जाते थे, और भूमिदान के प्रभाव पर इतिहासकारों के कौन-से दो मत हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: ईसवी की आरंभिक शताब्दियों से भूमिदान के प्रमाण मिलते हैं, और इनमें से कई का उल्लेख अभिलेखों में है।

  • किस पर, किसे: कुछ अभिलेख पत्थरों पर लिखे गए, पर अधिकांश ताम्र पत्रों पर खुदे थे, जो संभवत: भूमिदान लेने वालों को प्रमाण के रूप में दिए जाते थे; दान साधारण तौर पर धार्मिक संस्थाओं या ब्राह्मणों को दिए गए।
  • भाषा: अधिकांश अभिलेख संस्कृत में थे; विशेषकर सातवीं शताब्दी के बाद के अभिलेखों के कुछ अंश तमिल और तेलुगु जैसी स्थानीय भाषाओं में हैं।
  • दो मत: कुछ इतिहासकारों के अनुसार भूमिदान शासक वंश द्वारा कृषि को नए क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने की रणनीति थी; कुछ के अनुसार इससे दुर्बल होते राजनीतिक प्रभुत्व का संकेत मिलता है, यानी सामंतों पर राजा का शासन दुर्बल होने लगा तो उसने भूमिदान से अपने समर्थक जुटाए।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 40

7★★तमिल महाकाव्य सिलप्पादिकारम् के अंश (स्रोत 3) में लोग सेनगुत्तुवन के लिए जो वस्तुएँ लाए, उनकी तुलना स्रोत 8 में दंगुन गाँव से जुड़ी वस्तुओं से कीजिए। आपको क्या समानताएँ और असमानताएँ दिखती हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: दोनों सूचियाँ जंगल और गाँव की स्थानीय चीज़ों की हैं, पर स्रोत 3 में लोग ये चीज़ें शासक के पास लाते हैं, जबकि स्रोत 8 में गाँव को ऐसी चीज़ें देने से छूट मिलती है।

  • स्रोत 3 की वस्तुएँ: हाथी दाँत, सुगंधित लकड़ी, हिरणों के बाल से बने चँवर, मधु, चंदन, गेरू, सुरमा, हल्दी, इलायची, मिर्च, नारियल, आम, जड़ी-बूटी, फल, प्याज, गन्ना, फूल, सुपारी, केला, और बाघों के बच्चे, शेर, हाथी, बंदर, भालू, हिरण, मोर, बोलने वाले तोते जैसे जानवर।
  • स्रोत 8 की वस्तुएँ: दंगुन गाँव को दौरे पर आने वाले शासकीय अधिकारियों को घास, आसन के लिए जानवरों की खाल और कोयला देने से, और खनिज-पदार्थ, खदिर वृक्ष के उत्पाद, फूल और दूध देने से छूट मिली।
  • समानता: दोनों सूचियाँ जंगल, पेड़ और पशुओं से मिलने वाली स्थानीय चीज़ों की हैं, और फूल दोनों में हैं।
  • असमानता: स्रोत 3 में लोग नाचते-गाते उपहार लाते हैं, “ठीक उसी तरह जैसे पराजित लोग विजयी का आदर करते हैं”; स्रोत 8 में प्रभावती गुप्त के आदेश से दंगुन गाँव को ये चीज़ें देने के दायित्व से मुक्त किया गया, क्योंकि ये अग्रहार के लिए उपयुक्त रियायतें थीं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 36, 41

8★★अभिलेखशास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।

उत्तर देखिए

उत्तर: किताब अभिलेखों से मिलने वाली जानकारी की कई सीमाएँ बताती है।

  • हलके या टूटे अक्षर: कुछ अक्षर हलके ढंग से उत्कीर्ण होते हैं, जिन्हें पढ़ना मुश्किल है, और अभिलेख नष्ट होने से अक्षर लुप्त भी हो जाते हैं।
  • अर्थ की कठिनाई: शब्दों का वास्तविक अर्थ जानना सदा सरल नहीं, क्योंकि कुछ अर्थ किसी विशेष स्थान या समय से जुड़े होते हैं; विद्वान पढ़ने की वैकल्पिक विधियों पर चर्चा करते रहते हैं।
  • अधूरा भंडार: कई हज़ार अभिलेख मिले हैं, पर सबके अर्थ नहीं निकले, न सब प्रकाशित या अनूदित हुए; अनेक अभिलेख रहे होंगे जो कालांतर में सुरक्षित नहीं बचे।
  • छूटे विषय: खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के सुख-दुख प्राय: दर्ज नहीं हैं, क्योंकि अभिलेख प्राय: बड़े और विशेष अवसरों का वर्णन करते हैं।
  • एक ही दृष्टि: अभिलेख उन्हें बनवाने वालों के विचार बताते हैं, इसलिए उनके दावों को परखना पड़ता है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 48, 49

खंड च — दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) — 6 प्रश्न

1★★मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए। असोक के अभिलेखों में इनमें से कौन-कौन से तत्वों के प्रमाण मिलते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य (लगभग 321 ई.पू.) का शासन पश्चिमोत्तर में अफ़गानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था, और इतने बड़े साम्राज्य को चलाने के लिए एक व्यवस्था बनी।

  • पाँच राजनीतिक केंद्र: राजधानी पाटलिपुत्र और चार प्रांतीय केंद्र तक्षशिला, उज्जयिनी, तोसलि और सुवर्णगिरि; तक्षशिला और उज्जयिनी लंबी दूरी के व्यापार मार्ग पर थे, सुवर्णगिरि कर्नाटक की सोने की खदान के लिए उपयोगी था।
  • नियंत्रण एकसमान नहीं: संभवत: सबसे प्रबल नियंत्रण राजधानी और उसके आसपास के प्रांतीय केंद्रों पर था।
  • मार्ग और सेना: भूमि और नदी, दोनों मार्गों से आवागमन ज़रूरी था; राजधानी से प्रांतों तक कई सप्ताह या महीने लगते होंगे, इसलिए यात्रियों के खान-पान और सुरक्षा की व्यवस्था करनी पड़ती, और सेना सुरक्षा का प्रमुख माध्यम रही होगी।
  • सैनिक समितियाँ: मेगस्थनीज़ के अनुसार एक समिति और छ: उपसमितियाँ थीं: नौसेना, यातायात और खान-पान, पैदल सैनिक, अश्वारोही, रथारोही और हाथी।
  • अधिकारी: स्रोत 1 के अनुसार अधिकारी नदियों की देख-रेख, भूमि मापन, नहरों के मुखद्वार का निरीक्षण, शिकारियों का संचालन और कर वसूली करते थे, और लकड़हारों, बढ़ई, लोहारों और खननकर्ताओं का निरीक्षण भी।
  • धम्म और धम्म महामात्त: असोक ने धम्म के प्रचार से साम्राज्य को अखंड रखने का प्रयास किया, और इसके लिए धम्म महामात्त नियुक्त किए।

असोक के अभिलेखों में प्रमाण

  • केंद्र: पाँचों राजनीतिक केंद्रों का उल्लेख असोक के अभिलेखों में है।
  • फैलाव: आधुनिक पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत से आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और उत्तराखंड तक एक जैसे संदेश उत्कीर्ण किए गए।
  • धम्म: अभिलेखों में बड़ों के प्रति आदर, संन्यासियों और ब्राह्मणों के प्रति उदारता, सेवकों और दासों के साथ उदार व्यवहार, और दूसरों के धर्मों और परंपराओं के आदर की बात है।
  • सूचना: स्रोत 10 में राजा चाहते हैं कि पतिवेदक लोगों के समाचार उन तक सदैव पहुँचाएँ।
  • युद्ध: स्रोत 11 में कलिंग की विजय और उसके बाद राजा की वेदना है।

सेना की उपसमितियों और अधिकारियों के कामों का ब्योरा मेगस्थनीज़ के विवरण से मिलता है, और यूनानी स्रोतों की सेना की संख्या को कुछ इतिहासकार अतिशयोक्तिपूर्ण मानते हैं।

निष्कर्ष मौर्य प्रशासन राजधानी और प्रांतीय केंद्रों, मार्गों, सेना और अधिकारियों पर टिका था; असोक के अभिलेख केंद्रों, साम्राज्य के फैलाव, धम्म और सूचना की व्यवस्था की पुष्टि करते हैं।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32–35, 47, 48

2★★बीसवीं शताब्दी के सुविख्यात अभिलेखशास्त्री डी.सी. सरकार का वक्तव्य है कि भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिसका प्रतिबिंब अभिलेखों में नहीं है। चर्चा कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: डी.सी. सरकार ने 1965-66 में इंडियन एपिग्राफ़ी एंड इंडियन एपिग्राफ़िकल ग्लोसरी प्रकाशित की। इस अध्याय के अभिलेख सचमुच जीवन के बहुत से पक्ष दिखाते हैं, पर किताब उनकी सीमाएँ भी बताती है।

कथन के पक्ष में

  • राजा और राजनीति: असोक की उपाधियाँ देवानांपिय और पियदस्सी, कलिंग की विजय (स्रोत 11), और प्रयाग प्रशस्ति में समुद्रगुप्त की प्रशंसा (स्रोत 4)।
  • प्रशासन और नीति: मौर्यों के पाँच राजनीतिक केंद्रों का उल्लेख, धम्म का प्रचार, और पतिवेदक (स्रोत 10)।
  • खेती और गाँव: सुदर्शन झील का बनना और उसकी मरम्मत (स्रोत 5); सिंचाई के साधन बनवाने वालों ने अपने काम अभिलेखों में दर्ज करवाए; भूमिदान और अग्रहार की रियायतें (स्रोत 8)।
  • नगर और लोग: दानात्मक अभिलेखों में धोबी, बुनकर, लिपिक, बढ़ई, कुम्हार, स्वर्णकार, लौहकार और व्यापारी; महिलाओं के दान, जैसे प्रभावती गुप्त का भूमिदान और मथुरा की नागपिया की भेंट।

कथन की सीमाएँ

  • पढ़ने की कठिनाई: कुछ अक्षर हलके खुदे होते हैं या नष्ट हो जाते हैं, और कुछ शब्दों के अर्थ किसी विशेष स्थान या समय से जुड़े होते हैं।
  • अधूरा भंडार: कई हज़ार अभिलेखों में से सबके अर्थ नहीं निकले, न सब प्रकाशित या अनूदित हुए, और अनेक अभिलेख रहे होंगे जो कालांतर में सुरक्षित नहीं बचे।
  • छूटे विषय और लोग: खेती की दैनिक प्रक्रियाएँ और रोज़मर्रा के सुख-दुख प्राय: दर्ज नहीं हैं; पशुपालक, संग्राहक, शिकारी और मछुआरे जैसे लोग प्राय: अपने जीवन के विवरण नहीं रखते थे।
  • एक ही दृष्टि: अभिलेख उन्हें बनवाने वालों के विचार बताते हैं, इसलिए उनके दावे परखने पड़ते हैं।

निष्कर्ष अभिलेखों में जीवन के बहुत से पक्षों की झलक है, पर किताब का निष्कर्ष है कि “राजनीतिक और आर्थिक इतिहास का पूर्ण ज्ञान मात्र अभिलेखशास्त्र से ही नहीं मिलता है”; इसलिए अभिलेखों को ग्रंथों, सिक्कों और पुरावशेषों के साथ मिलाकर पढ़ना पड़ता है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 34, 37–43, 47–49, 51

3★★उत्तर-मौर्य काल में विकसित राजत्व के विचारों की चर्चा कीजिए।

उत्तर देखिए

उत्तर: मौर्य साम्राज्य मात्र डेढ़ सौ साल चला, और दूसरी शताब्दी ई.पू. आते-आते उपमहाद्वीप के कई भागों में नए शासकों ने अपनी सत्ता अलग-अलग ढंग से जताई।

  • दक्षिण के सरदार: तमिलकम में चोल, चेर और पाण्ड्य जैसी सरदारियाँ उभरीं; सरदार अनुष्ठान, युद्ध में नेतृत्व और विवादों में मध्यस्थता करता, भेंट लेकर समर्थकों में बाँटता था, जबकि राजा कर वसूलते थे। संगम ग्रंथों की कविताएँ सरदारों का विवरण देती हैं।
  • व्यापार से राजस्व: सातवाहन (लगभग द्वितीय शताब्दी ई.पू. से द्वितीय शताब्दी ई. तक) और मध्य एशियाई मूल के शक शासक लंबी दूरी के व्यापार से राजस्व जुटाते थे।
  • दैवी दर्जा: कुषाणों ने मथुरा के पास माट के देवस्थान पर और अफ़गानिस्तान के एक देवस्थान पर अपनी विशालकाय मूर्तियाँ लगवाईं; कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इनके ज़रिए वे स्वयं को देवतुल्य दिखाना चाहते थे। कई कुषाण शासकों ने देवपुत्र की उपाधि ली, संभवत: उन चीनी शासकों से प्रेरित होकर, जो स्वयं को स्वर्गपुत्र कहते थे।
  • सामंत: चौथी शताब्दी ई. में गुप्त साम्राज्य सहित कई बड़े साम्राज्यों के साक्ष्य मिलते हैं, और इनमें से कई साम्राज्य सामंतों पर निर्भर थे; शक्तिशाली सामंत राजा भी बन जाते थे, और दुर्बल राजा बड़े शासकों के अधीन हो जाते थे।
  • प्रशस्ति: कवि अपने राजा या स्वामी की प्रशंसा में प्रशस्तियाँ लिखते थे; हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति (स्रोत 4) कहती है, “धरती पर उनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था।”, और समुद्रगुप्त को कुबेर, वरुण, इंद्र और यम के तुल्य बताती है।
  • प्रजा की नज़र: गंदतिन्दु जातक में प्रजा कुटिल राजा को अपने दुखों के लिए भला-बुरा कहती है: “रात में डकैत उन पर हमला करते हैं तो दिन में कर इकट्ठा करने वाले अधिकारी।”

निष्कर्ष उत्तर-मौर्य काल में राजत्व के कई रूप दिखे: भेंट पर टिकी सरदारी, व्यापार से राजस्व, देवताओं से जुड़ाव और कवियों की प्रशंसा; चौथी शताब्दी ई. तक कई बड़े साम्राज्य सामंतों पर भी निर्भर थे।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 35–38

4★★लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से कृषि के तौर-तरीकों में किस हद तक परिवर्तन हुए?

उत्तर देखिए

उत्तर: शासक अपने राजकोष को भरने के लिए बड़े-बड़े कर माँगते थे, और करों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए किसानों ने उपज बढ़ाने के तरीके खोजे।

  • हल: छठी शताब्दी ई.पू. से हल का प्रचलन गंगा और कावेरी की घाटियों के उर्वर कछारी क्षेत्र में फैल गया; भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में लोहे के फाल वाले हलों से जुताई होने लगी।
  • धान की रोपाई: गंगा की घाटी में धान की रोपाई से उपज में भारी वृद्धि हुई, हालाँकि इसमें कमरतोड़ मेहनत लगती थी।
  • सिंचाई: कुओं, तालाबों और कहीं-कहीं नहरों से सिंचाई होने लगी; सुदर्शन झील (स्रोत 5) इसका उदाहरण है।
  • परिवर्तन की सीमा: लोहे के फाल वाले हल का उपयोग उपमहाद्वीप के कुछ ही हिस्से में था; पंजाब और राजस्थान जैसे अर्धशुष्क क्षेत्रों में यह बीसवीं सदी में आया, और पूर्वोत्तर और मध्य पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों ने कुदाल का उपयोग किया। हर्षचरित (स्रोत 7) में विंध्य क्षेत्र की एक बस्ती के अधिकांश लोग कुदाल का प्रयोग करते हैं, क्योंकि घास से भरी भूमि में हल चलाना मुश्किल है।
  • समाज पर असर: नई तकनीकों से उपज बढ़ी, पर लाभ समान नहीं थे; बौद्ध कथाओं में भूमिहीन खेतिहर श्रमिक, छोटे किसान और बड़े ज़मींदार मिलते हैं, और संगम साहित्य में वेल्लालर, उल्वर और अणिमई।
  • भूमिदान: ईसवी की आरंभिक शताब्दियों से भूमिदान हुए; कुछ इतिहासकार इन्हें खेती को नए क्षेत्रों में फैलाने की रणनीति मानते हैं।

निष्कर्ष हल, धान की रोपाई और सिंचाई से उपज बढ़ी, पर लोहे के फाल वाले हल का उपयोग उपमहाद्वीप के कुछ ही हिस्से में था, और नई तकनीकों के लाभ सबको समान नहीं मिले।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 38–40

5★★सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार कैसे करते हैं?

उत्तर देखिए

उत्तर: पशुपालक, संग्राहक, शिकारी, मछुआरे, शिल्पकार और जगह-जगह घूमकर खेती करने वाले लोग सामान्यत: अपने जीवन के विवरण नहीं रखते थे, इसलिए इतिहासकार कई तरह के स्रोत जोड़ते हैं।

  • कहानियाँ: जातक और पंचतंत्र की कई कथाओं के स्रोत मौखिक किस्से-कहानियाँ हैं, जिन्हें बाद में लिपिबद्ध किया गया होगा; गंदतिन्दु जातक में प्रजा करों और डकैतों से बचने के लिए गाँव छोड़कर जंगल में बस जाती है।
  • अभिलेख: सुदर्शन झील का अभिलेख (स्रोत 5), भूमिदान के अभिलेख (स्रोत 8), और नगरों के दानात्मक अभिलेख, जो दाताओं के व्यवसाय बताते हैं।
  • ग्रंथ: मनुस्मृति (स्रोत 6) सीमा चिह्नों की बात करती है, हर्षचरित (स्रोत 7) विंध्य क्षेत्र की बस्ती का चित्र देता है, और संगम साहित्य वेल्लालर, उल्वर और अणिमई का।
  • खेती और पुरावशेष: हल, लोहे का फाल, धान की रोपाई और सिंचाई के प्रमाण; नगरों से मिले बर्तन, गहने, उपकरण और हथियार।
  • सावधानी: अभिलेख प्राय: बड़े और विशेष अवसर दर्ज करते हैं, रोज़मर्रा के सुख-दुख नहीं, और बनवाने वालों का ही दृष्टिकोण बताते हैं।

निष्कर्ष सामान्य लोगों का जीवन किसी एक स्रोत से नहीं, कहानियों, अभिलेखों, ग्रंथों और पुरावशेषों को मिलाकर समझा जाता है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 38–42, 48, 49

6★छठी शताब्दी ई.पू. से उपमहाद्वीप में और उसके बाहर व्यापार कैसे फैला? सिक्कों से इसके बारे में क्या पता चलता है?

उत्तर देखिए

उत्तर: छठी शताब्दी ई.पू. से उपमहाद्वीप में नदी मार्गों और भूमार्गों का मानो जाल बिछ गया था, और व्यापार कई दिशाओं में फैला।

  • मार्ग: मध्य एशिया और उससे आगे तक भू-मार्ग थे; जलमार्ग अरब सागर से उत्तरी अफ़्रीका और पश्चिम एशिया तक, और बंगाल की खाड़ी से चीन और दक्षिणपूर्व एशिया तक फैला। शासक इन मार्गों पर नियंत्रण की कोशिश करते, और संभवत: व्यापारियों की सुरक्षा के बदले उनसे धन लेते थे।
  • व्यापारी और सामान: पैदल फेरी लगाने वाले, बैलगाड़ी और घोड़े-खच्चरों के दल वाले, और समुद्री यात्री; सफल व्यापारी तमिल में मसत्थुवन और प्राकृत में सत्थवाह और सेट्ठी कहलाते थे। स्रोत 9 (पेरिप्लस ऑफ़ एरीथ्रियन सी, लगभग प्रथम शताब्दी ई.) के अनुसार मालाबार तट से काली मिर्च का निर्यात होता था।
  • आहत सिक्के: चाँदी और ताँबे के आहत सिक्के (छठी शताब्दी ई.पू.) सबसे पहले ढाले गए; इन पर बने प्रतीकों के मिलान से पता चला कि इन्हें राजाओं ने जारी किया, और यह भी संभव है कि कुछ सिक्के व्यापारियों, धनपतियों और नागरिकों ने जारी किए हों।
  • शासकों के सिक्के: शासक की प्रतिमा और नाम वाले पहले सिक्के हिंद-यूनानी शासकों के थे (द्वितीय शताब्दी ई.पू.); कुषाणों ने प्रथम शताब्दी ई. में बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के जारी किए, और दक्षिण भारत के अनेक पुरास्थलों से बड़ी संख्या में रोमन सिक्के मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि व्यापार राजनीतिक सीमाओं में बँधा नहीं था।
  • गणराज्य और गुप्त: पंजाब और हरियाणा के यौधेय (प्रथम शताब्दी ई.) के हज़ारों ताँबे के सिक्के उनकी व्यापार में रुचि दिखाते हैं; गुप्त शासकों के सोने के सिक्कों से दूर देशों से व्यापार-विनिमय आसान होता था।
  • बहस: छठी शताब्दी ई. से सोने के सिक्के कम मिलने लगे; कुछ इतिहासकार इसे रोमन साम्राज्य के पतन के बाद दूरवर्ती व्यापार में कमी से जोड़ते हैं, जबकि अन्य कहते हैं कि नए नगर और व्यापार के नवीन तंत्र उभर रहे थे और अभिलेखों और ग्रंथों में सिक्कों का उल्लेख होता रहा।

निष्कर्ष सिक्के बताते हैं कि विनिमय कुछ हद तक आसान हुआ, कौन-से शासक और समुदाय व्यापार से जुड़े थे, और व्यापार उपमहाद्वीप से कितनी दूर तक फैला था।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 43–45

खंड छ — स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक) — 4 प्रश्न

1★स्रोत 1 (मेगस्थनीज़ के विवरण का एक अंश) पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“साम्राज्य के महान अधिकारियों में से कुछ नदियों की देख-रेख और भूमि मापन का काम करते हैं जैसा कि मिस्र में होता था। कुछ प्रमुख नहरों से उपनहरों के लिए छोड़े जाने वाले पानी के मुखद्वार का निरीक्षण करते हैं ताकि हर स्थान पर पानी की समान पूर्ति हो सके। यही अधिकारी शिकारियों का संचालन करते हैं और शिकारियों के कृत्यों के आधार पर उन्हें इनाम या दंड देते हैं। वे कर वसूली करते हैं और भूमि से जुड़े सभी व्यवसायों का निरीक्षण करते हैं साथ ही लकड़हारों, बढ़ई, लोहारों और खननकर्ताओं का भी निरीक्षण करते हैं।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) मेगस्थनीज़ चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आए यूनानी राजदूत थे; उनके लिखे विवरण के आज कुछ अंश ही उपलब्ध हैं।
  • (ख) ताकि हर स्थान पर पानी की समान पूर्ति हो सके।
  • (ग) यही अधिकारी कर वसूली करते थे और भूमि से जुड़े सभी व्यवसायों का निरीक्षण करते थे, इसलिए इन समूहों पर नज़र राज्य की आय के लिए ज़रूरी थी। सोचिए: लकड़ी, औज़ार, हथियार और धातु इन्हीं समूहों से मिलते थे, और सेना और यातायात को इनकी ज़रूरत थी।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 32, 34

2★★स्रोत 4 (समुद्रगुप्त की प्रशस्ति) के ये वाक्य पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“धरती पर उनका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था।” “वे अनेक सहस्र गायों के दाता हैं।” “वे देवताओं में कुबेर (धन-देव), वरुण (समुद्र-देव), इंद्र (वर्षा के देवता) और यम (मृत्यु-देव) के तुल्य हैं।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त की; इसकी रचना उनके राजकवि हरिषेण ने संस्कृत में की।
  • (ख) इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख।
  • (ग) प्रशस्तियों के रचयिता उन्हें तथ्यात्मक विवरण नहीं, काव्यात्मक ग्रंथ मानते थे। यह कहना कि धरती पर समुद्रगुप्त का कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं था, या उन्हें कुबेर, वरुण, इंद्र और यम के तुल्य बताना कवि की प्रशंसा है; ऐसी बातों को दूसरे स्रोतों से परखना पड़ता है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 36, 37

3★स्रोत 7 (हर्षचरित का एक अंश) पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“बस्ती के किनारे का अधिकांश क्षेत्र जंगल है और यहाँ धान की उपज वाली, खलिहान और उपजाऊ भूमि के हिस्सों को छोटे किसानों ने आपस में बाँट लिया है… यहाँ के अधिकांश लोग कुदाल का प्रयोग करते हैं… क्योंकि घास से भरी भूमि में हल चलाना मुश्किल है। बहुत कम हिस्से साफ़ हैं, जो हैं भी उसकी काली मिट्टी काले लोहे जैसी सख्त है।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) कन्नौज के शासक हर्षवर्धन की संस्कृत में लिखी जीवनी; इसके लेखक उनके राजकवि बाणभट्ट (लगभग सातवीं शताब्दी ई.) थे।
  • (ख) क्योंकि घास से भरी भूमि में हल चलाना मुश्किल है।
  • (ग) पहली बात: बस्ती के किनारे का अधिकांश क्षेत्र जंगल है, और धान की उपज वाली, खलिहान और उपजाऊ भूमि के हिस्से छोटे किसानों ने आपस में बाँट लिए हैं। दूसरी बात: साफ़ भूमि बहुत कम है, और जो है उसकी काली मिट्टी काले लोहे जैसी सख्त है।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 40

4★★स्रोत 11 (राजा की वेदना) का यह अंश पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
“जब देवानांपिय पियदस्सी ने अपने शासन के आठ वर्ष पूरे किए तो उन्होंने कलिंग (आधुनिक तटवर्ती उड़ीसा) पर विजय प्राप्त की। डेढ़ लाख पुरुषों को निष्कासित किया गया; एक लाख मारे गए और इससे भी ज़्यादा की मृत्यु हुई। कलिंग पर शासन स्थापित करने के बाद देवानांपिय धम्म के गहन अध्ययन, धम्म के स्नेह और धम्म के उपदेश में डूब गए हैं। यही देवानांपिय के लिए कलिंग की विजय का पश्चाताप है।”

उत्तर और व्याख्या देखिए

उत्तर:

  • (क) असोक की; देवानांपिय का अर्थ है देवताओं का प्रिय।
  • (ख) शासन के आठ वर्ष पूरे होने पर; डेढ़ लाख पुरुषों को निष्कासित किया गया।
  • (ग) असोक के अभिलेख आधुनिक उड़ीसा से मिले हैं, पर वेदना दिखाने वाला यह अभिलेख वहाँ नहीं मिला, यानी उस क्षेत्र में नहीं मिलता जिस पर विजय प्राप्त की गई थी। इसलिए इतिहासकार अभिलेख के शाब्दिक अर्थ से आगे जाकर पूछते हैं कि इसका क्या अर्थ लगाया जाए।

संदर्भ: NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 2, पृष्ठ 47, 48

उत्तर लिखने का तरीक़ा

अंकलंबाईकैसे लिखें
1 अंकएक वाक्यसीधे उत्तर
2 अंक30–40 शब्दउत्तर + कारण या उदाहरण
3 अंक60–80 शब्दतीन बिंदु, पूरे वाक्यों में
4 अंक (स्रोत)हर भाग 1–3 वाक्यपहले अंश में उत्तर खोजिए, फिर किताब की बात जोड़िए
5 अंकलगभग 120 शब्दभूमिका + पाँच बिंदु + निष्कर्ष

★इस अध्याय के लिए तीन सलाह:

  1. किताब के शब्द लिखिए: महाजनपद, गण और संघ, धम्म, धम्म महामात्त, सामंत, प्रशस्ति, गहपति, अग्रहार, श्रेणी, आहत सिक्के, अभिलेखशास्त्र, मुद्राशास्त्र, पुरालिपि, ब्राह्मी, खरोष्ठी। पहले शब्द का अर्थ एक वाक्य में बताइए, फिर उदाहरण दीजिए।
  2. हर बात के साथ लिखिए कि इतिहासकार उसे कैसे जानते हैं: कौन-सा अभिलेख, ग्रंथ, सिक्का या पुरावशेष, और किताब का कौन-सा स्रोत, जैसे स्रोत 5 (सुदर्शन झील) या स्रोत 8 (प्रभावती गुप्त का भूमिदान)।
  3. तिथियाँ और अनुमान किताब की तरह लिखिए: लगभग 321 ई.पू., छठी शताब्दी ई.पू., 1830 के दशक, 1838; और “कुछ इतिहासकार”, “संभवत:” जैसे शब्द मत छोड़िए, क्योंकि बात उन्हीं से सही बनती है।

तीन नमूना परीक्षा-पत्र

हर पत्र के सभी प्रश्नों के उत्तर इसी पन्ने के ऊपर के खंडों में हैं। पहले बिना देखे लिखिए, फिर मिलाइए।

नमूना पत्र 1 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1किताब के अनुसार मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य का समय क्या है?1
2रिक्त स्थान भरिए: अभिलेखों के अध्ययन को ……… कहते हैं।1
3सही या ग़लत: सरदार अपने अधीन लोगों से कर वसूलता था, जबकि राजा भेंट लेते थे।1
4अभिलेख किसे कहते हैं? जिन अभिलेखों पर तिथि नहीं होती, उनका काल कैसे तय किया जाता है?2
5उपमहाद्वीप के लंबे इतिहास में मौर्य साम्राज्य को बहुत बड़ा काल क्यों नहीं माना जा सकता?2
6मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्र कौन-से थे? इन केंद्रों का चयन सोच-समझकर क्यों किया गया?3
7मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए। असोक के अभिलेखों में इनमें से कौन-कौन से तत्वों के प्रमाण मिलते हैं?5
8लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से कृषि के तौर-तरीकों में किस हद तक परिवर्तन हुए?5

नमूना पत्र 2 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1प्रयाग प्रशस्ति (इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख) की रचना संस्कृत में किसने की?1
2रिक्त स्थान भरिए: चौथी शताब्दी ई. में गुप्त साम्राज्य सहित कई बड़े साम्राज्यों के साक्ष्य मिलते हैं; इनमें से कई साम्राज्य ……… पर निर्भर थे, जो शासकों को सैनिक सहायता भी देते थे।1
3सही या ग़लत: स्रोत 10 वाले अभिलेख में असोक का नाम लिखा है।1
4महाजनपदों में राजा के शासन और गण या संघ के शासन में क्या अंतर था?2
5प्रशस्ति क्या होती थी? इतिहासकार इससे तथ्य निकालते समय सावधान क्यों रहते हैं?2
6छठी से चौथी शताब्दी ई.पू. में मगध की सत्ता के विकास के लिए आरंभिक और आधुनिक लेखकों ने क्या-क्या व्याख्याएँ दी हैं? ये एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं?3
7उत्तर-मौर्य काल में विकसित राजत्व के विचारों की चर्चा कीजिए।5
8डी.सी. सरकार का वक्तव्य है कि भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिसका प्रतिबिंब अभिलेखों में नहीं है। चर्चा कीजिए।5

नमूना पत्र 3 (कुल 20 अंक)

प्र.प्रश्नअंक
1शासकों की प्रतिमा और नाम वाले सबसे पहले सिक्के किन शासकों ने जारी किए?1
2रिक्त स्थान भरिए: जातक कथाएँ पहली सहस्राब्दि ई. के मध्य में ……… भाषा में लिखी गईं।1
3सही या ग़लत: लोहे के फाल वाले हल का उपयोग पूरे उपमहाद्वीप में फैल गया था।1
4गहपति कौन होता था?2
5दानात्मक अभिलेख क्या हैं? इनसे नगरों के लोगों के बारे में क्या पता चलता है?2
6भूमिदान के अभिलेख किन पर लिखे जाते थे, और भूमिदान के प्रभाव पर इतिहासकारों के कौन-से दो मत हैं?3
7सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार कैसे करते हैं?5
8छठी शताब्दी ई.पू. से उपमहाद्वीप में और उसके बाहर व्यापार कैसे फैला? सिक्कों से इसके बारे में क्या पता चलता है?5