ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको किताब के स्रोत पढ़ना, प्रमाण से नतीजा निकालना, तुलना करना, पक्ष लेना और कारण देना है। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।
तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए। ! वाली पंक्ति उस चूक की ओर इशारा करती है जो अक्सर हो जाती है।
भाग क — केस-आधारित प्रश्न
केस 1 — हम्पी की खोज: मैकेन्ज़ी और उनके स्रोत (पृष्ठ 170–171)
किताब का उदाहरण: विजयनगर साम्राज्य चौदहवीं शताब्दी में स्थापित हुआ। 1565 में उसकी राजधानी पर आक्रमण हुआ, उसे लूटा गया और बाद में वह उजड़ गई; सत्रहवीं–अठारहवीं शताब्दियों तक वह पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। फिर भी कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के लोगों की स्मृतियों में वह हम्पी नाम से जीवित रही। यह नाम स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से बना। 1800 ई. में ईस्ट इण्डिया कंपनी में कार्यरत अभियंता और पुराविद कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने इन भग्नावशेषों को प्रकाश में लाया और इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया। स्रोत 1 में किताब मैकेन्ज़ी का परिचय देती है: वे 1754 में जन्मे, 1815 में उन्हें “भारत का पहला सर्वेयर जनरल” बनाया गया और 1821 में अपनी मृत्यु तक वे उसी पद पर रहे। उन्होंने स्थानीय इतिहास और परंपराएँ इकट्ठी कीं और ऐतिहासिक स्थलों का सर्वेक्षण किया, “भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए”।
1किताब के अनुसार किन चीज़ों ने विद्वानों को विजयनगर साम्राज्य को फिर से खोजने में मदद की? 2 अंक
उत्तर देखिए
किताब पाँच तरह की चीज़ें गिनाती है। (पृष्ठ 170)
- ★मौखिक परंपराएँ और पुरातात्विक खोजें।
- ★स्थापत्य के नमूने, अभिलेख और दूसरे दस्तावेज़।
2मैकेन्ज़ी को हम्पी के बारे में शुरुआती जानकारी किससे मिली? इतिहासकारों ने बाद में शहर का इतिहास कैसे जोड़ा? 3 अंक
उत्तर देखिए
मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी। (पृष्ठ 170)
- ★आगे चलकर 1836 से अभिलेखकर्ताओं ने यहाँ से कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे किए, और 1856 से छायाचित्रकारों ने यहाँ के भवनों के चित्र संकलित करने शुरू किए।
- ★इतिहासकारों ने इन स्रोतों का मिलान विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे साहित्य से किया, और इस तरह शहर और साम्राज्य का इतिहास जोड़ा।
- ! हम्पी की जानकारी को केवल मैकेन्ज़ी की अपनी खोज मत लिखिए; शुरुआत स्थानीय पुरोहितों की स्मृति से हुई।
3स्रोत 1 के अनुसार मैकेन्ज़ी ने स्थानीय इतिहास और परंपराएँ क्यों इकट्ठी कीं? दक्षिण भारत के बारे में उनका अपना नज़रिया क्या था? 3 अंक
उत्तर देखिए
उन्होंने ये काम दो उद्देश्यों से किए, और उनका नज़रिया ब्रिटिश प्रशासन के पक्ष में था। (पृष्ठ 171)
- ★उद्देश्य: “भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए”।
- ★नज़रिया: उनके अनुसार ब्रिटिश प्रशासन के आने से पहले दक्षिण भारत लंबे समय तक “खराब प्रबंधन की दुर्गति” से जूझता रहा।
- हमारा निष्कर्ष: यह स्रोत हमें मैकेन्ज़ी का अपना नज़रिया बताता है; इसे दक्षिण भारत के पुराने शासन के बारे में अंतिम फ़ैसला न मानिए।
केस 2 — शासक और व्यापारी (पृष्ठ 171–172)
किताब का उदाहरण: उस समय की युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए अरब और मध्य एशिया से घोड़ों का आयात ज़रूरी था। शुरुआती दौर में यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था; स्थानीय व्यापारी, कुदिरई चेट्टी (घोड़ों के व्यापारी), भी इसमें भाग लेते थे। 1498 ई. से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आने लगे और व्यापारिक और सामरिक केंद्र बनाने की कोशिश करने लगे। विजयनगर मसालों, वस्त्रों और रत्नों के बाज़ारों के लिए जाना जाता था। स्रोत 2 में कृष्णदेव राय की तेलुगु रचना अमुक्तमल्यद का अंश है, जो शासनकला पर है और जिसमें वे व्यापारियों के बारे में लिखते हैं।
1विजयनगर के लिए अरब और मध्य एशिया से घोड़ों का आयात क्यों ज़रूरी था? यह व्यापार किनके हाथ में था? 2 अंक
उत्तर देखिए
उस समय की युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी। (पृष्ठ 172)
- ★शुरुआती दौर में यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था।
- स्थानीय व्यापारी कुदिरई चेट्टी भी घोड़ों के व्यापार में भाग लेते थे।
2पुर्तगालियों के आने के बारे में किताब क्या बताती है? उन्हें किस चीज़ से मदद मिली? 3 अंक
उत्तर देखिए
1498 ई. से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आने लगे। (पृष्ठ 172)
- ★वे व्यापारिक और सामरिक केंद्र बनाने की कोशिश करने लगे।
- ★उनकी बेहतर सैन्य तकनीक, विशेषकर बंदूकों, ने उनकी मदद की।
3स्रोत 2 में कृष्णदेव राय राजा को व्यापारियों और विदेशी नाविकों के साथ कैसा व्यवहार करने की सलाह देते हैं? “ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी” से वे क्या कहना चाहते हैं? 4 अंक
उत्तर देखिए
कृष्णदेव राय व्यापार को बढ़ावा देने और व्यापारियों का सम्मान करने की सलाह देते हैं। (पृष्ठ 173)
- ★बन्दरगाह सुधारे जाएँ और वाणिज्य को इस तरह प्रोत्साहन मिले कि “घोड़ों, हाथियों, रत्नों, चंदन, मोती तथा अन्य वस्तुओं का खुले तौर पर आयात किया जा सके”।
- तूफ़ान, बीमारी या थकान के कारण बंदरगाह पर उतरने वाले विदेशी नाविकों की अच्छी देखभाल हो।
- हाथी और अच्छे घोड़े लाने वाले दूर देशों के व्यापारियों को रोज़ बैठक में बुलाकर तोहफ़े दिए जाएँ और उचित मुनाफ़ा कमाने दिया जाए।
- ★हमारी ओर से: इस पंक्ति का मतलब यह निकलता है कि व्यापारियों से अच्छा रिश्ता रखने पर घोड़े और हाथी जैसी युद्ध की चीज़ें विजयनगर को मिलती रहेंगी, दुश्मन को नहीं।
4गजपति, अश्वपति और नरपति का क्या मतलब है? ये शब्द किसके लिए आए हैं? 2 अंक
उत्तर देखिए
तीनों शब्दों में “पति” का मतलब स्वामी है। (पृष्ठ 172)
- ★गजपति (हाथियों का स्वामी): पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली वंश का नाम।
- ★अश्वपति (घोड़ों के स्वामी) और नरपति (लोगों के स्वामी): विजयनगर की लोक परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को अश्वपति और रायों को नरपति कहा गया।
केस 3 — राज्य का चरमोत्कर्ष और पतन (पृष्ठ 173–174)
किताब का उदाहरण: विजयनगर पर चार वंशों का शासन रहा। पहला संगम वंश था, जिसका 1485 तक नियंत्रण रहा। सैनिक कमांडर सुलुवों ने उसे उखाड़ फेंका और 1503 तक शासन किया; फिर तुलुवों ने उनका स्थान लिया। कृष्णदेव राय तुलुव वंश के थे और उनका शासनकाल 1509 से 1529 तक रहा। 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में चला गया। 1565 में विजयनगर की सेना प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में राक्षसी–तांगड़ी (जिसे तालीकोटा भी कहते हैं) के युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं से हारी। किताब इसके साथ यह भी बताती है कि सुल्तानों और विजयनगर के संबंध “धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे”।
1विजयनगर के चार वंशों को क्रम से लिखिए। सुलुव कौन थे? 3 अंक
उत्तर देखिए
क्रम है: संगम, सुलुव, तुलुव और अराविदु। (पृष्ठ 173)
- ★संगम वंश का नियंत्रण 1485 तक रहा; सुलुवों ने 1503 तक शासन किया; तुलुवों के बाद 1542 तक केंद्र पर अराविदु वंश का नियंत्रण हो गया।
- ★सुलुव सैनिक कमांडर थे, जिन्होंने संगम वंश को उखाड़ फेंका।
- ! सुलुवों को संगम वंश की ही शाखा मत लिखिए।
2कृष्णदेव राय के शासन की चार बातें लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
किताब उनके शासन को “विस्तार और दृढ़ीकरण” का शासन बताती है। (पृष्ठ 173)
- ★1512 में तुंगभद्रा और कृष्णा के बीच का रायचूर दोआब हासिल हुआ; 1514 में उड़ीसा के शासकों का दमन हुआ; 1520 में बीजापुर के सुल्तान को बुरी तरह पराजित किया गया।
- राज्य हमेशा सैनिक रूप से तैयार रहता था, फिर भी “अतुलनीय शांति और समृद्धि की स्थितियों में फला–फूला”।
- कुछ बेहतरीन मंदिरों के निर्माण और कई महत्त्वपूर्ण दक्षिण भारतीय मंदिरों में भव्य गोपुरमों को जोड़ने का श्रेय उन्हें दिया जाता है।
- उन्होंने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप नगलपुरम् नामक उपनगर बसाया।
31565 में विजयनगर की हार किन कारणों से हुई, किताब के अनुसार? इसके बाद शहर और साम्राज्य का क्या हुआ? 4 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार सुलतानों और रायों के संबंध धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे; हार के पीछे किताब रामराय की जोखिम भरी नीति बताती है, जिसके अनुसार उसने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की। (पृष्ठ 173–174)
- ★दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर के विरुद्ध मैत्री–समझौता किया, और राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) में उनकी संयुक्त सेनाओं ने रामराय के नेतृत्व वाली सेना को हराया।
- ★किताब के अनुसार “यह रामराय की जोखिम भरी नीति थी”: उन्होंने एक सुल्तान को दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने की कोशिश की, पर सुल्तानों ने मिलकर उन्हें निर्णायक रूप से हराया।
- विजयी सेनाओं ने शहर लूटा, और कुछ ही वर्षों में शहर पूरी तरह उजड़ गया।
- साम्राज्य का केंद्र पूर्व की ओर चला गया; अराविदु वंश ने पेनुकोण्डा से और बाद में चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप) से शासन किया।
- ! रामराय को राजा मत लिखिए; वे प्रधानमंत्री थे।
4किताब के अनुसार विजयनगर और दक्कन के सुल्तानों के संबंध “हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण” नहीं रहते थे। इसके दो प्रमाण दीजिए। “यवन” शब्द का क्या मतलब है? 4 अंक
उत्तर देखिए
किताब दो प्रमाण देती है, और दोनों इस बात के हैं कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की स्थिरता चाहते थे। (पृष्ठ 174)
- ★कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और गर्व से “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” उपाधि ली।
- ★कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर के उत्तराधिकार विवाद सुलझाने में बीजापुर के सुल्तान ने हस्तक्षेप किया।
- यवन संस्कृत भाषा का शब्द है, जो यूनानियों तथा उत्तर–पश्चिम से उपमहाद्वीप में आने वाले दूसरे लोगों के लिए प्रयोग होता था।
- ! संबंधों को हमेशा शत्रुतापूर्ण लिखना किताब के ख़िलाफ़ है; 1565 में संयुक्त सेनाओं ने शहर लूटा, फिर भी किताब यही बात कहती है।
केस 4 — राय और नायक: अमर–नायक प्रणाली (पृष्ठ 175)
किताब का उदाहरण: विजयनगर साम्राज्य में सेना प्रमुख, जिन्हें नायक कहा जाता था, आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और उनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे। वे आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे। राय सैनिक कमांडरों, यानी अमर–नायकों, को प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे। अमर–नायक किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू राजस्व और दूसरे कर वसूलते थे। किताब के अनुसार ऐसा प्रतीत होता है कि इस प्रणाली के कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे।
1नायक कौन थे? विजयनगर के राजाओं के साथ उनका रिश्ता कैसा रहता था? 3 अंक
उत्तर देखिए
नायक सेना प्रमुख थे, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे। (पृष्ठ 175)
- ★वे एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते थे, और कई बार उपजाऊ भूमि की तलाश में किसान भी उनके साथ चलते थे।
- ★कई नायकों ने विजयनगर की अधीनता मानी, पर वे अक्सर विद्रोह करते थे और सैनिक कार्रवाई से दबाए जाते थे।
2अमर–नायक प्रणाली कैसे चलती थी? वसूले राजस्व का क्या होता था, और राय को इससे क्या मिलता था? 4 अंक
उत्तर देखिए
राय अमर–नायकों को प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे और अमर–नायक उससे राजस्व वसूलते थे। (पृष्ठ 175)
- ★राजस्व के हिस्से तीन काम में लगते थे: निजी उपयोग, घोड़ों और हाथियों का निर्धारित दल रखना, और मन्दिरों और सिंचाई के साधनों का रख-रखाव।
- ★यही दल प्रभावी सैनिक शक्ति बना, जिससे राय पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप को नियंत्रण में ला सके।
- अमर–नायक राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे और अपनी स्वामिभक्ति दिखाने के लिए उपहारों के साथ राजकीय दरबार में उपस्थित होते थे।
3राय अमर–नायकों पर अपना नियंत्रण कैसे जताते थे? सत्रहवीं शताब्दी में क्या बदला? 3 अंक
उत्तर देखिए
राजा कभी-कभी अमर–नायकों का एक जगह से दूसरी जगह तबादला करके अपना नियंत्रण जताते थे। (पृष्ठ 175)
- ★सत्रहवीं शताब्दी में कई नायकों ने अपने स्वतंत्र राज्य बना लिए, जिससे केंद्रीय राजकीय ढाँचा तेज़ी से बिखरने लगा।
- ! अमर–नायक प्रणाली को पूरी तरह विजयनगर की नई चीज़ मत लिखिए; किताब इसे विजयनगर की एक प्रमुख राजनीतिक खोज कहती है, पर इसके कई तत्त्व इक्ता से लिए बताती है।
केस 5 — जल-संपदा: सूखे इलाक़े में शहर (पृष्ठ 177, 179)
किताब का उदाहरण: विजयनगर की भौगोलिक स्थिति की सबसे चौंकाने वाली बात किताब के अनुसार “तुंगभद्रा नदी द्वारा यहाँ निर्मित एक प्राकृतिक कुण्ड” है। आस-पास की ग्रेनाइट की पहाड़ियाँ शहर के चारों ओर करधनी-सी बनाती प्रतीत होती हैं, और उनसे कई जल-धाराएँ आकर नदी में मिलती हैं। लगभग सभी धाराओं के साथ बाँध बनाकर अलग-अलग आकार के हौज़ बनाए गए। स्रोत 4 में डोमिंगो पेस, सोलहवीं शताब्दी का एक यात्री, कृष्णदेव राय के बनवाए एक जलाशय का वर्णन करता है।
1विजयनगर में पानी इकट्ठा करने और उसे शहर तक ले जाने के इतने बड़े इंतज़ाम क्यों करने पड़े? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि किताब के अनुसार विजयनगर “प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक” में था। (पृष्ठ 177)
- ★इसीलिए लगभग सभी धाराओं पर बाँध बनाकर अलग-अलग आकार के हौज़ बनाए गए।
2कमलपुरम् जलाशय और हिरिया नहर के बारे में किताब क्या बताती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
दोनों शहर के पानी के इंतज़ाम के हिस्से थे, और दोनों के काम अलग थे। (पृष्ठ 177)
- ★कमलपुरम् जलाशय “पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में” बना था। इससे आस-पास के खेत सींचे जाते थे, और एक नहर से इसका पानी “राजकीय केंद्र” तक ले जाया जाता था।
- ★हिरिया नहर तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाकर “धार्मिक केंद्र” को “शहरी केंद्र” से अलग करने वाली घाटी को सींचती थी। इसके अवशेष आज भी खंडहरों के बीच दिखते हैं।
- ! हिरिया नहर को पक्के तौर पर संगम वंश की बनवाई मत लिखिए; किताब कहती है कि इसे संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाया था।
3स्रोत 4 के अनुसार कृष्णदेव राय का जलाशय कैसे बना और उसका पानी कहाँ से और किन कामों के लिए आता था? 4 अंक
उत्तर देखिए
पेस का वर्णन बताता है कि यह बड़े पैमाने का काम था। (पृष्ठ 177)
- ★जलाशय दो पहाड़ियों के मुहाने पर बना था, ताकि दोनों ओर का पानी यहाँ इकट्ठा हो।
- ★पानी “9 मील (लगभग 15 किमी) से भी अधिक की दूरी से पाइपों से” एक झील से आता था।
- जलाशय में “तीन विशाल स्तंभ” थे, जिनसे जुड़े पाइप बगीचों और धान के खेतों को सींचने के लिए पानी ले जाते थे।
- राजा ने इसके लिए एक पूरी पहाड़ी तुड़वा दी; वहाँ “पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी” काम कर रहे थे।
हमारा निष्कर्ष: यह एक यात्री का वर्णन है, इसलिए संख्याएँ उसी की बताई हुई मानिए।
4आम नगर-निवासियों को पानी कहाँ से मिलता था, और यह बात किताब किस तरह कहती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय। (पृष्ठ 179)
- ★किताब इन्हें आम नगर-निवासियों के पानी के स्रोत “संभवत:” बताती है; यह अनुमान है, पक्का साक्ष्य नहीं।
केस 6 — क़िलेबंदी, खेत और सड़कें (पृष्ठ 177–178)
किताब का उदाहरण: पंद्रहवीं शताब्दी में फ़ारस के शासक ने अब्दुर रज़्ज़ाक को कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा। वह विजयनगर की क़िलेबंदी से बहुत प्रभावित हुआ और उसने “दुर्गों की सात पंक्तियों” का उल्लेख किया। किताब के अनुसार इन दीवारों से शहर ही नहीं, उसके आस-पास का कृषि क्षेत्र और जंगल भी घिरे थे। अब्दुर रज़्ज़ाक लिखता है: “पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं”। पेस भी लिखता है कि पहली परिधि से शहर में प्रवेश करने तक की दूरी बहुत है, जिसमें धान के खेत और कई उद्यान हैं।
1विजयनगर की दीवारों की बनावट के तीन ब्योरे लिखिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब दीवारों की बनावट के ये ब्योरे देती है। (पृष्ठ 177)
- ★दीवार थोड़ी शुण्डाकार (ऊपर पतली होती) थी।
- ★गारे या जोड़ने के किसी मसाले का प्रयोग नहीं हुआ; पत्थर के टुकड़े फानाकार (कील जैसे) थे, जो अपनी जगह टिके रहते थे।
- दीवारों का भीतरी भाग मिट्टी और मलबे से भरा था, और बाहर की ओर वर्गाकार और आयताकार बुर्ज़ निकले थे।
2किताब इस क़िलेबंदी की सबसे ख़ास बात क्या बताती है? विजयनगर के शासकों ने यह नीति क्यों अपनाई, और पुरातत्त्व इसकी पुष्टि कैसे करता है? 4 अंक
उत्तर देखिए
सबसे ख़ास बात यह है कि दीवारों के भीतर खेत भी घिरे थे। (पृष्ठ 177–178)
- ★मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य विरोधी को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था, और वे कई महीनों, यहाँ तक कि वर्षों तक चल सकती थीं।
- ★आम तौर पर शासक क़िलेबंद क्षेत्रों में विशाल अन्नागार बनवाते थे, पर विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को बचाने के लिए “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” अपनाई।
- पुरातत्त्वविदों को धार्मिक केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच एक कृषि क्षेत्र के साक्ष्य मिले हैं, जिसे तुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहरों की व्यापक व्यवस्था सींचती थी।
हमारा निष्कर्ष: नीति महँगी थी, पर उसका मक़सद घेराबंदी में भी शहर को अनाज देते रहना था।
3किताब कितनी क़िलेबंदियों का वर्णन करती है, और अब्दुर रज़्ज़ाक के “दुर्गों की सात पंक्तियों” से इसका क्या संबंध है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब का अपना पाठ तीन क़िलेबंदियों का वर्णन करता है। (पृष्ठ 177–178)
- ★सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर की पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी; दूसरी नगरीय केंद्र के भीतरी भाग के चारों ओर थी; तीसरी राजकीय केंद्र के चारों ओर।
- राजकीय केंद्र में महत्त्वपूर्ण इमारतों के हर समूह को अपनी ऊँची दीवारों से घेरा गया था।
- ! “दुर्गों की सात पंक्तियों” अब्दुर रज़्ज़ाक का अपना वर्णन है; इसे पुरातत्त्वविदों की गिनती मत लिखिए।
4शहर के प्रवेशद्वारों और सड़कों के बारे में किताब क्या बताती है? “इंडो–इस्लामिक” शैली का नाम क्यों पड़ा? 3 अंक
उत्तर देखिए
प्रवेशद्वारों की मेहराब और गुंबद तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व माने जाते हैं। (पृष्ठ 177–178)
- ★किताब के अनुसार “कला–इतिहासकार इस शैली को इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) कहते हैं क्योंकि इसका विकास विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य की परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ।”
- सड़कें आम तौर पर पहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से होकर जाती थीं।
- सबसे महत्त्वपूर्ण सड़कों में से कई मन्दिरों के प्रवेशद्वारों से आगे बढ़ती थीं, और उनके दोनों ओर बाज़ार थे।
केस 7 — शहरी केंद्र और राजकीय केंद्र (पृष्ठ 178–179)
किताब का उदाहरण: शहरी केंद्र में सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं। उत्तर-पूर्वी कोने जैसे कुछ स्थानों से परिष्कृत चीनी मिट्टी के बर्तन मिले। सोलहवीं शताब्दी का पुर्तगाली यात्री बरबोसा लिखता है: “लोगों के अन्य आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृढ़ हैं, और व्यवसाय के आधार पर कई खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में व्यवस्थित हैं।” राजकीय केंद्र विजयनगर बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में था। किताब के अनुसार इसमें “60 से भी अधिक मन्दिर” थे, और “लगभग तीस संरचनाओं” की पहचान महलों के रूप में हुई है।
1परिष्कृत चीनी मिट्टी के बर्तन मिलने से पुरातत्त्वविद क्या मानते हैं? इस नतीजे की सीमा क्या है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पुरातत्त्वविद मानते हैं कि हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों। (पृष्ठ 179)
- ★यह अनुमान है, पक्का नतीजा नहीं: बर्तन कुछ ही स्थानों से मिले हैं, और सामान्य लोगों के आवासों के साक्ष्य अपेक्षाकृत कम हैं।
- शहरी केंद्र के बारे में किताब यह भी कहती है: “यह मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला भी था।” यहाँ के मक़बरों और मस्ज़िदों का स्थापत्य हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों के स्थापत्य से मिलता-जुलता है।
2बरबोसा के वर्णन और पुरातात्विक साक्ष्य को साथ रखकर शहरी केंद्र के आम लोगों के घरों की कैसी तसवीर बनती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
तसवीर अधूरी है, क्योंकि पुरातात्विक साक्ष्य कम हैं और वर्णन एक यात्री का है। (पृष्ठ 178–179)
- ★बरबोसा के अनुसार घर छप्पर के थे, पर सुदृढ़ थे, और व्यवसाय के आधार पर लंबी, खुले स्थानों वाली गलियों में बसे थे।
- ★पूजा के लिए बहुत से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर मिले हैं, जो किताब के अनुसार विविध संप्रदायों की ओर संकेत करते हैं, “जो संभवत: विभिन्न समुदायों द्वारा संरक्षित थे”।
- ! बरबोसा की बात को पुरातत्त्व से पक्का हुआ मत लिखिए; किताब यहाँ दोनों को अलग-अलग स्रोत की तरह रखती है।
3राजकीय केंद्र को “राजकीय” कहना कितना सही है? किताब के दो तथ्य दीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
नाम आधा ही सही है, क्योंकि यहाँ राजसत्ता के भवन भी थे और मन्दिर भी। (पृष्ठ 179)
- ★इसमें “60 से भी अधिक मन्दिर” थे।
- ★“लगभग तीस संरचनाओं” की पहचान महलों के रूप में हुई है; ये अपेक्षाकृत बड़ी संरचनाएँ हैं, जो आनुष्ठानिक कार्यों से नहीं जुड़ी थीं।
- किताब के अनुसार मन्दिरों और संप्रदायों को संरक्षण देना उन शासकों के लिए ज़रूरी था जो देवी-देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने का प्रयास कर रहे थे।
हमारा निष्कर्ष: राजकीय केंद्र में राजसत्ता और धर्म साथ-साथ दिखते हैं।
4मन्दिर और धर्मेतर भवन अलग-अलग सामग्री से बने थे। इसका आज क्या असर दिखता है? 2 अंक
उत्तर देखिए
मन्दिर पूरी तरह राजगिरी (पत्थर की चिनाई) से बने थे, जबकि धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी (नष्ट हो जाने वाली) वस्तुओं से बनी थी। (पृष्ठ 179–180)
- हमारा निष्कर्ष: इसीलिए आज मन्दिर ज़्यादा बचे हैं, और महलों जैसे भवनों का ऊपरी भाग नहीं बचा।
केस 8 — महानवमी डिब्बा (पृष्ठ 180–181)
किताब का उदाहरण: किताब के अनुसार “राजा का भवन” घेरे की सबसे बड़ी संरचना है, पर इसके राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं है। इसके दो सबसे प्रभावशाली मंचों को आम तौर पर “सभा मंडप” और “महानवमी डिब्बा” कहा जाता है। महानवमी डिब्बा के बारे में किताब लिखती है कि यह “एक विशालकाय मंच है जो लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊँचाई तक जाता है।” इस पर लकड़ी की एक संरचना के साक्ष्य मिले हैं, और इसका आधार उभारदार उत्कीर्णन से ढका है।
1महानवमी डिब्बा क्या है? उसके आकार और बनावट के बारे में किताब क्या कहती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
यह शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना एक विशालकाय मंच है। (पृष्ठ 180)
- ★किताब के अनुसार इसका आधार लगभग 11000 वर्ग फीट का है और ऊँचाई 40 फीट तक जाती है।
- ★इस पर लकड़ी की एक संरचना के साक्ष्य मिले हैं, और इसका आधार उभारदार उत्कीर्णन से ढका है।
- सभा मंडप एक ऊँचा मंच है, जिसमें लकड़ी के स्तंभों के लिए पास-पास और नियमित दूरी पर छेद हैं।
2किताब के अनुसार महानवमी के उत्सव में क्या-क्या होता था? 4 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार इस संरचना से जुड़े अनुष्ठान संभवत: सितंबर और अक्टूबर के शरद मास में मनाए जाने वाले दस दिन के हिंदू त्योहार महानवमी के अवसर पर किए जाते थे, और वह ब्योरे गिनाती है। (पृष्ठ 180–181)
- ★मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा, और भैंसों और दूसरे जानवरों की बलि।
- ★नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा, और साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा।
- प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं की ओर से राजा और उसके अतिथियों को औपचारिक भेंट।
- अंतिम दिन राजा खुले मैदान में भव्य समारोह में अपनी और अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था, और नायक बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर भी लाते थे।
3किताब कहती है, “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।” ऊपर के ब्योरों से इन अर्थों के दो उदाहरण छाँटिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार इस अवसर पर विजयनगर शासक “अपने रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन” करते थे। (पृष्ठ 181)
- ★राजसत्ता और धर्म साथ-साथ: पूजा और बलि जैसे अनुष्ठान राजा के समारोह का हिस्सा थे।
- ★नायकों की निष्ठा और राजा की सैनिक ताक़त: नायकों की भेंट, और सेना का निरीक्षण।
- हमारा निष्कर्ष: यह एक ही उत्सव में राजा की सत्ता दिखाने का मंच था; यह निष्कर्ष किताब के ब्योरों से निकलता है, किताब ने यह वाक्य इसी रूप में नहीं लिखा।
4पेस ने सभा मंडप और महानवमी डिब्बा को मिलाकर क्या कहा? किताब इस संरचना को “पहेली” क्यों कहती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
पेस इन्हें मिलाकर “विजय का भवन” कहता है। (पृष्ठ 180–181)
- ★उसके वर्णन में एक के ऊपर एक दो मंच हैं; ऊपर वाले पर राजा के लिए कपड़े का बना एक कक्ष था, जिसमें “मूर्ति का एक पूजा स्थल” था।
- ★विद्वानों का मानना है कि आज की संरचना के चारों ओर का स्थान सशस्त्र पुरुषों, स्त्रियों और बड़ी संख्या में जानवरों की शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था; इसलिए किताब कहती है कि यह भी “एक पहेली बना हुआ है।”
- ! इसे पक्की बात की तरह मत लिखिए कि पूरी शोभायात्रा इसी मंच के चारों ओर निकलती थी; किताब इसे अनिश्चित बताती है।
केस 9 — कमल महल, “हाथियों का अस्तबल” और हज़ार राम मन्दिर (पृष्ठ 181–183)
किताब का उदाहरण: राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में से एक लोटस (कमल) महल है। यह नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा, और इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस काम के लिए बना था। किताब लिखती है: “कमल महल में नौ मीनारें थीं– बीच में एक ऊँची, तथा आठ उसकी भुजाओं के साथ–साथ।” कमल महल के समीप एक भवन है जिसे किताब “हाथियों का अस्तबल” कहती है, उद्धरण-चिह्नों में। एक हज़ार राम मन्दिर के बारे में किताब कहती है: “संभवत: इसका प्रयोग केवल राजा और उनके परिवार द्वारा ही किया जाता था।”
1कमल महल का नाम किसने रखा? उसके काम के बारे में किताब क्या सुझाव देती है, और वह कितना पक्का है? 3 अंक
उत्तर देखिए
नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। (पृष्ठ 181)
- ★मैकेन्ज़ी के बनाए मानचित्र से मिले एक सुझाव के अनुसार यह परिषदीय सदन था, जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था (पृष्ठ 181–182)।
- ★पर इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस काम के लिए बना था; यह सुझाव है, तय बात नहीं।
- ! “कमल महल” को विजयनगर के शासकों का दिया नाम मत लिखिए।
2कमल महल की मेहराबों के बारे में किताब क्या कहती है? इससे विजयनगर के शासकों के बारे में क्या पता चलता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब कहती है: “ये संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों से प्रभावित थीं।” (पृष्ठ 181)
- ★किताब के अनुसार दक्कन के सुलतानों और उड़ीसा के गजपतियों से संपर्क में विजयनगर के शासकों ने अवधारणाएँ और भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं, और उन्हें आगे विकसित किया (पृष्ठ 171)।
- ! “संभवत:” को छोड़कर इसे पक्की बात मत लिखिए।
3किताब “हाथियों का अस्तबल” नाम उद्धरण-चिह्नों में क्यों देती है? 2 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि किताब ख़ुद पूछती है: “क्या आपको लगता है कि ये वास्तव में हाथियों के अस्तबल थे?” (पृष्ठ 182)
- ★भवन कमल महल के समीप है; किताब में इसका खड़ा रेखाचित्र, नक्शा और तसवीर तीनों हैं।
4हज़ार राम मन्दिर के बारे में किताब क्या बताती है? इसके पटलों से क्या पता चलता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार यह मन्दिर राजकीय केंद्र के मन्दिरों में से है, और संभवत: केवल राजा और उनके परिवार के प्रयोग में आता था। (पृष्ठ 182–183)
- ★इसके केंद्रीय देवालय की मूर्तियाँ अब नहीं हैं, पर दीवारों पर उत्कीर्णित पटल बचे हैं।
- ★इनमें मन्दिर की भीतरी दीवारों पर रामायण के दृश्यांश हैं।
- ज़्यादातर मन्दिर धार्मिक केंद्र में थे, पर राजकीय केंद्र में भी कई थे।
5शहर पर आक्रमण के बाद भवन बनाने की परंपरा का क्या हुआ? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार कई संरचनाएँ नष्ट हो गईं, पर नायकों ने महलनुमा संरचनाएँ बनाने की परंपरा जारी रखी। (पृष्ठ 183)
- ★किताब के अनुसार इनमें से कई भवन आज भी अस्तित्व में हैं।
- हमारा निष्कर्ष: विजयनगर की भवन-परंपरा शहर के उजड़ने के बाद नायकों के राज्यों में आगे चलती रही।
केस 10 — धार्मिक केंद्र: जगह का चुनाव और मन्दिरों का लंबा इतिहास (पृष्ठ 184)
किताब का उदाहरण: धार्मिक केंद्र शहर का तुंगभद्रा नदी के किनारे वाला चट्टानी उत्तरी भाग है। किताब के अनुसार स्थानीय मान्यताओं में ये पहाड़ियाँ “रामायण में उल्लिखित बाली और सुग्रीव के वानर राज्य की रक्षा करती थीं”। अन्य मान्यताओं के अनुसार स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी ने इन पहाड़ियों में विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप किया था। किताब लिखती है: “यह संभव है कि विजयनगर के स्थान का चयन वहाँ विरुपाक्ष तथा पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था।”
1धार्मिक केंद्र की पहाड़ियों के बारे में किताब कौन-सी स्थानीय मान्यताएँ बताती है? इन्हें इतिहास की भाषा में कैसे लिखेंगे? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब इन्हें “स्थानीय मान्यताओं” के रूप में रखती है, यानी लोगों की मान्यताएँ। (पृष्ठ 184)
- ★एक मान्यता के अनुसार ये पहाड़ियाँ बाली और सुग्रीव के वानर राज्य की रक्षा करती थीं।
- ★दूसरी के अनुसार पम्पादेवी ने इन पहाड़ियों में विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप किया था; किताब के अनुसार आज तक यह विवाह हर वर्ष विरुपाक्ष मन्दिर में धूमधाम से मनाया जाता है।
- ! मान्यता को घटना की तरह मत लिखिए; साफ़ कहिए कि यह मान्यता है, यानी लोगों का विश्वास है।
2विजयनगर का स्थान चुनने के बारे में किताब क्या सुझाव देती है? इस सुझाव के पीछे किताब कौन-सी बात रखती है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब का सुझाव अनुमान के रूप में है, पक्के फ़ैसले के रूप में नहीं। (पृष्ठ 184)
- ★सुझाव यह है कि स्थान का चयन वहाँ विरुपाक्ष और पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था; किताब “यह संभव है कि” लिखती है।
- ★इन पहाड़ियों में विजयनगर साम्राज्य से पहले के जैन मन्दिर भी मिले हैं।
- किताब के अनुसार इसका मतलब है कि यह क्षेत्र कई धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा था।
- ! “संभव है” छोड़कर इसे पक्की बात मत लिखिए।
3शासक मन्दिरों को बढ़ावा क्यों देते थे? इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण का इतिहास कहाँ तक जाता है? 4 अंक
उत्तर देखिए
इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण का इतिहास पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाता है। (पृष्ठ 184)
- ★शासक अपने को ईश्वर से जोड़ने के लिए मन्दिर निर्माण को बढ़ावा देते थे। मन्दिर शिक्षा के केंद्र भी थे।
- ★शासक और दूसरे लोग मन्दिरों के रख-रखाव के लिए भूमि या संपत्ति देते थे, इसलिए मन्दिर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र बन गए।
- शासकों के लिए मन्दिरों का निर्माण, मरम्मत और रख-रखाव अपनी सत्ता, संपत्ति और निष्ठा के लिए समर्थन और मान्यता पाने के महत्त्वपूर्ण माध्यम थे।
4“श्री विरुपाक्ष” का राजकीय आदेशों से क्या संबंध था? “हिन्दू सूरतराणा” उपाधि का क्या अर्थ है? 3 अंक
उत्तर देखिए
विजयनगर के शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे। (पृष्ठ 184)
- ★राजकीय आदेशों पर सामान्यतया कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” अंकित होता था।
- ★“हिन्दू सूरतराणा” अरबी शब्द सुल्तान (राजा) का संस्कृत रूपांतरण है; इसका शाब्दिक अर्थ हिंदू सुलतान है।
- ! उपाधि का शब्दार्थ ही लिखिए; उससे अपनी ओर से कोई और निष्कर्ष मत जोड़िए, किताब नहीं जोड़ती।
5विजयनगर के शासकों ने मन्दिर की पुरानी परंपराओं के साथ क्या किया? दो उदाहरण दीजिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार उन्होंने पुरानी परंपराएँ अपनाईं, उनमें नवीनता लाए और उन्हें आगे बढ़ाया। (पृष्ठ 184)
- ★राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित होने लगीं।
- ★राजा की मन्दिर यात्राएँ महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर बन गईं, जिनमें साम्राज्य के महत्त्वपूर्ण नायक भी साथ जाते थे।
केस 11 — गोपुरम्, मण्डप, विट्ठल मन्दिर और रथ गलियाँ (पृष्ठ 185–188)
किताब का उदाहरण: विजयनगर के मन्दिरों की नई विशेषताओं में राजकीय सत्ता की द्योतक विशाल संरचनाएँ थीं। इनका सबसे अच्छा उदाहरण राय गोपुरम् या राजकीय प्रवेशद्वार हैं (चित्र 7.7)। विरुपाक्ष मन्दिर कई शताब्दियों में बना; अभिलेखों के अनुसार सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था। विट्ठल मन्दिर के प्रमुख देवता विट्ठल हैं, जो विष्णु का एक रूप हैं और सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते हैं।
1राय गोपुरम् क्या हैं? किताब के अनुसार वे क्या काम करते थे? 3 अंक
उत्तर देखिए
राय गोपुरम् मन्दिर के राजकीय प्रवेशद्वार हैं। (पृष्ठ 185–186)
- ★वे अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना कर देते थे और दूर से ही मन्दिर का संकेत देते थे।
- ★किताब के अनुसार वे संभवत: शासकों की ताकत की याद भी दिलाते थे, जो इतनी ऊँची मीनारें बनाने के लिए ज़रूरी साधन, तकनीक और कौशल जुटा सकते थे।
- ! “संभवत:” को छोड़कर इसे पक्की बात मत लिखिए।
2विरुपाक्ष मन्दिर के बारे में किताब के चार तथ्य लिखिए। बाद में जुड़े इन हिस्सों का केंद्रीय देवालय पर क्या असर पड़ा? 4 अंक
उत्तर देखिए
विरुपाक्ष मन्दिर कई शताब्दियों में बना। (पृष्ठ 186)
- ★अभिलेखों के अनुसार सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था।
- ★विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे बहुत बड़ा किया गया।
- मुख्य मन्दिर के सामने का मण्डप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया; इसे सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजाया गया।
- पूर्वी गोपुरम् के निर्माण का श्रेय भी उन्हीं को दिया जाता है।
किताब के अनुसार इन परिवर्धनों का अर्थ था कि केंद्रीय देवालय पूरे परिसर के एक छोटे भाग तक सीमित रह गया।
3मन्दिरों के सभागारों का प्रयोग किन-किन कामों के लिए होता था? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब के अनुसार मन्दिर के सभागारों का प्रयोग कई तरह के कामों के लिए होता था। (पृष्ठ 186–187)
- ★कुछ में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रम देखने के लिए रखी जाती थीं।
- ★कुछ में देवताओं के विवाह के उत्सव होते थे (चित्र 7.22 का कल्याण मंडप)।
- कुछ देवताओं को झूला झुलाने के लिए थे (चित्र 7.25, जिंजी का झूलता मण्डप)।
इन अवसरों पर विशेष मूर्तियों का प्रयोग होता था, जो छोटे केंद्रीय देवालयों में रखी मूर्तियों से अलग थीं।
4किताब विट्ठल मन्दिर के बारे में क्या बताती है? किताब के चित्र 7.24 का सवाल है: “क्या आपको लगता है कि वास्तव में इस प्रकार के रथ बनाए जाते होंगे?” इसका उत्तर दीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
विट्ठल महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु के रूप हैं, पर यह मन्दिर कर्नाटक में है। (पृष्ठ 187–188)
- ★किताब के अनुसार कर्नाटक में विट्ठल की पूजा आरंभ करना दिखाता है कि विजयनगर के शासकों ने एक साम्राज्यिक संस्कृति बनाने के लिए अलग-अलग परंपराओं को कैसे आत्मसात किया।
- ★इस मन्दिर में कई सभागार हैं, और रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर भी है (चित्र 7.24)।
- चित्र 7.24 के सवाल का उत्तर: किताब इस चित्र को “रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर” कहती है, यानी चित्र में रथ के आकार का मन्दिर है। असली रथ बनते थे या नहीं, इस पर अपनी राय दीजिए, पर इसी बात को आधार बनाइए।
5रथ गलियाँ क्या थीं? नायकों ने मन्दिर निर्माण की परंपरा का क्या किया? 3 अंक
उत्तर देखिए
रथ गलियाँ मन्दिर परिसरों की एक चारित्रिक विशेषता थीं। (पृष्ठ 188)
- ★वे गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती थीं; इनका फर्श पत्थर के टुकड़ों से बना था, और दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डप थे, जिनमें व्यापारी दुकानें लगाते थे।
- ★नायकों ने क़िलेबंदी और मन्दिर निर्माण की परंपराएँ जारी रखीं और उन्हें और व्यापक बनाया।
- किताब के अनुसार “कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरमों का निर्माण भी स्थानीय नायकों द्वारा किया गया था”।
केस 12 — हम्पी का अंकन, बाज़ार और इमारतों की सीमा (पृष्ठ 188–192)
किताब का उदाहरण: बीसवीं शताब्दी में हम्पी का संरक्षण भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण और कर्नाटक पुरातात्विक एवं संग्रहालय विभाग ने किया, और 1976 में उसे “राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में” मान्यता मिली। 1980 के दशक के आरंभ में भौतिक अवशेषों के प्रलेखन की एक बड़ी परियोजना शुरू हुई। जॉन एम. फ्रिट्ज़, जॉर्ज मिशेल और एम. एस. नागराज राव, जिन्होंने वर्षों इस स्थल पर काम किया, लिखते हैं कि उन्हें नष्ट हो चुकी लकड़ी की वस्तुओं की “एक पूरी श्रेणी की कल्पना करनी पड़ती है”।
1हम्पी के अंकन (नक्शा बनाने) का पहला चरण क्या था? अंकन में कितना समय लगा और क्या मिला? 4 अंक
उत्तर देखिए
पहला चरण पूरे क्षेत्र को 25 वर्गाकार भागों में बाँटना था। (पृष्ठ 188–189)
- ★हर वर्ग को वर्णमाला के एक अक्षर से इंगित किया गया; फिर इन्हें छोटे वर्गों के समूहों में, और उन्हें और छोटी इकाइयों में बाँटा गया।
- ★“लगभग बीस वर्षों” में दर्जनों विद्वानों ने यह जानकारी इकट्ठी और सुरक्षित की।
- छोटे देवस्थलों और घरों से लेकर विशाल मन्दिरों तक हज़ारों संरचनाओं के अवशेष खोजे और प्रलेखित किए गए। सड़कों, रास्तों और बाज़ारों के अवशेष भी मिले, जिनकी जगह स्तंभों के आधारों और मंचों से पहचानी गई।
किताब इन अवशेषों के बारे में कहती है: “एक समय जो बाज़ार, जीवंत थे, उनका बस अब यही कुछ बचा है”।
2किताब के चित्र 7.27 के नक्शे में सभी वर्गों पर अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षर छपे हैं और वह 25 वर्गों में बँटा है। कौन-सा अक्षर प्रयोग नहीं हुआ? 2 अंक
उत्तर देखिए
अंग्रेज़ी वर्णमाला में 26 अक्षर हैं और वर्ग 25 हैं, इसलिए एक अक्षर छूटा है। (पृष्ठ 189)
- ★छूटा हुआ अक्षर अंग्रेज़ी वर्णमाला का नौवाँ अक्षर आई है।
- नक्शे पर लगे अक्षरों को ऊपर से नीचे पढ़कर ख़ुद जाँचिए।
3विजयनगर के स्मारकों का अध्ययन करने वालों को लकड़ी की किन चीज़ों की कल्पना करनी पड़ती है? ऐसा क्यों? 3 अंक
उत्तर देखिए
क्योंकि लकड़ी की संरचनाएँ नष्ट हो गईं और केवल पत्थर बचा। (पृष्ठ 190)
- ★फ्रिट्ज़, मिशेल और नागराज राव लिखते हैं: “विजयनगर के स्मारकों के अपने अध्ययन में हमें नष्ट हो चुकी लकड़ी की वस्तुओं–स्तंभ, टेक (ब्रेकेट), धरन, भीतरी छत, लटकते हुए छज्जों के अंदरूनी भाग तथा मीनारों–की एक पूरी श्रेणी की कल्पना करनी पड़ती है जो प्लास्टर से सजाए और संभवत: चटकीले रंगों से चित्रित थे।”
- ★फिर भी यात्रियों के वृत्तांत उस समय के जीवंत जीवन के कुछ पहलू फिर से जोड़ने में मदद करते हैं।
- ! चटकीले रंगों को पक्की बात मत लिखिए; वाक्य में “संभवत:” है।
4स्रोत 5 में पेस और नूनिज़ विजयनगर के बाज़ारों के बारे में क्या बताते हैं? दो-दो बातें लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
दोनों यात्री बाज़ारों में तरह-तरह की चीज़ों की भरमार बताते हैं। (पृष्ठ 191)
- ★पेस एक चौड़ी और सुंदर गली का वर्णन करता है, जिसमें बहुत से व्यापारी थे; वहाँ “सभी प्रकार के माणिक्य, और हीरे, और पन्ने, और मोती, और छोटे मोती, और वस्त्र, और पृथ्वी पर होने वाली हर वस्तु” मिलती थी।
- ★पेस विजयनगर को “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” कहता है; बाज़ार चावल, गेहूँ और दूसरे अनाजों जैसे खाद्य पदार्थों से भरे रहते थे, जो सस्ते दामों पर और प्रचुर मात्रा में मिलते थे।
- नूनिज़ के अनुसार बाज़ार “प्रचुर मात्रा में फलों, अंगूरों और संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से भरे रहते थे और सभी बहुत सस्ते।”
- किताब के अनुसार बाज़ारों में मांस भी बड़ी मात्रा में बिकता था; नूनिज़ भेड़–बकरी, सूअर, मृग, तीतर, खरगोश, कबूतर और बटेर जैसे कई जानवरों और पक्षियों का नाम लेता है।
हमारा निष्कर्ष: ये दो यात्रियों के वर्णन हैं, इसलिए उन्हें यात्रियों के वर्णन की तरह ही लिखिए।
5किताब के अनुसार इमारतें हमें क्या बताती हैं और क्या नहीं बतातीं? दो-दो बातें लिखिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
इमारतें बनाने वालों की सोच और बनावट के बारे में बताती हैं, पर आम लोगों के बारे में कम बताती हैं। (पृष्ठ 191–192)
- ★बताती हैं: स्थानों का संगठन और प्रयोग, और सामग्री और तकनीक; क़िलेबंदी से रक्षा की ज़रूरतें और सैनिक तैयारी; दूसरी जगहों की इमारतों से तुलना करने पर विचारों के फैलाव और सांस्कृतिक प्रभाव।
- ★नहीं बतातीं: जनसंख्या का बड़ा भाग, यानी सामान्य स्त्री, पुरुष और बच्चे, इन इमारतों के बारे में क्या सोचते थे।
- नहीं बतातीं: विशेष ज्ञान किसके पास था, नक्शे किसने बनाए, राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आए, उन्हें कैसा वेतन मिलता था, और कच्चा माल कहाँ से और कैसे लाया जाता था।
किताब को उम्मीद है कि दूसरे स्रोतों के प्रयोग से चल रहा शोध इन सवालों पर शायद कुछ और संकेत दे सके।
6कृष्णदेव राय की एक मूर्ति चिदम्बरम मन्दिर के गोपुरम् में है (चित्र 7.31)। मूर्ति और पेस का वर्णन साथ रखने से हमें क्या पता चलता है? 3 अंक
उत्तर देखिए
किताब मूर्ति को शासक के अपने प्रस्तुत किए रूप की तरह रखती है, और पेस का वर्णन उसके साथ दूसरे स्रोत की तरह रखती है। (पृष्ठ 192)
- ★किताब कहती है: “स्वाभाविक है कि शासक इसी रूप में अपने आप को प्रस्तुत करना चाहता था।”
- ★पेस उन्हें ऐसे बताता है: “मझला कद, गोरा रंग और अच्छी काठी, कुछ मोटा, राजा के चेहरे पर चेचक के दाग़ हैं।”
हमारा निष्कर्ष: मूर्ति से पता चलता है कि शासक अपने को कैसे प्रस्तुत करना चाहता था; पेस का वर्णन उससे अलग तरह का स्रोत है।
भाग ख — तर्क और मूल्यांकन
1विजयनगर के समकालीन लोग अपने राज्य को विजयनगर साम्राज्य ही कहते थे। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार इतिहासकार विजयनगर साम्राज्य शब्द का प्रयोग करते हैं, जबकि समकालीन लोगों ने उसे कर्नाटक साम्राज्यमु की संज्ञा दी। (पृष्ठ 171)
- ★यह किताब के एक अलग बॉक्स में लिखा है: नाम दो हैं, और दोनों के बोलने वाले अलग हैं।
- किताब यह भी बताती है कि इस साम्राज्य की अस्थिर सीमाओं में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले और अलग-अलग धार्मिक परंपराओं को मानने वाले लोग रहते थे।
2विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की तिथि 1336 पक्की मानी जाती है। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब का पाठ कहता है कि परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने 1336 में इस साम्राज्य की स्थापना की; और काल-रेखा 1 में यही तिथि “1336?” छपी है। (पृष्ठ 171, 193)
- ★पाठ में तिथि के साथ “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” जुड़ा है; यानी तिथि का आधार बताया गया है।
- ★काल-रेखा में तिथि के साथ प्रश्नचिह्न है, जो इसे अनिश्चित दिखाता है।
- ! उत्तर में स्थापना का वर्ष सीधे पक्का मत लिखिए; लिखिए कि परंपरा और अभिलेखों के अनुसार स्थापना 1336 में हुई।
3सुलुव संगम वंश की ही एक शाखा थे, इसलिए संगम वंश का शासन 1503 तक चला। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार संगम वंश ने 1485 तक नियंत्रण रखा; उन्हें सुलुवों ने उखाड़ फेंका, जो सैनिक कमांडर थे, और वे 1503 तक सत्ता में रहे। (पृष्ठ 173)
- ★क्रम यह है: संगम (1485 तक), सुलुव (1503 तक), फिर तुलुव।
- ★कृष्णदेव राय तुलुव वंश से संबंधित थे।
41565 में विजयनगर की सेना का नेतृत्व राजा रामराय कर रहे थे। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार 1565 में विजयनगर की सेना प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में राक्षसी–तांगड़ी (जिसे तालीकोटा के नाम से भी जाना जाता है) के युद्ध में हारी। (पृष्ठ 173)
- ★रामराय राजा नहीं, प्रधानमंत्री थे।
- ★हराने वाली सेनाएँ बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाएँ थीं।
- किताब इसे रामराय की “जोखिम भरी नीति” कहती है: उन्होंने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की, पर सुल्तान एक हो गए (पृष्ठ 174)।
5विजयनगर और दक्कन के सुल्तानों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे, इसलिए 1565 की हार पुरानी दुश्मनी का सीधा नतीजा थी। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार सुलतानों और रायों के संबंध धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे। (पृष्ठ 174)
- ★कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद धारण करके गौरव महसूस किया।
- ★कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद बीजापुर के सुल्तान ने विजयनगर में उत्तराधिकार का विवाद सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया।
- किताब यह भी कहती है कि विजयनगर के शासक और सल्तनतें दोनों एक-दूसरे के स्थायित्व को निश्चित करने की इच्छुक थीं।
- सामरिक महत्त्वाकांक्षाओं के चलते समीकरण बदलते रहे; अंत में दक्कन की सल्तनतों के बीच विजयनगर के विरुद्ध मैत्री–समझौता हुआ (पृष्ठ 173)।
6अमर–नायक प्रणाली विजयनगर की बिलकुल नई देन थी, उसके पीछे कोई पुरानी व्यवस्था नहीं थी। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब इसे विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज कहती है, पर यह भी लिखती है कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसके कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे। (पृष्ठ 175)
- ★किताब “प्रतीत होता है” कहती है, यानी यह अनुमान है, पक्का दावा नहीं।
- ★इक्ता दिल्ली सल्तनत की प्रणाली थी।
7विजयनगर की दीवारें केवल शहर को घेरती थीं; खेत दीवारों के बाहर थे। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार इस क़िलेबंदी की सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह थी कि इससे खेतों को भी घेरा गया था। (पृष्ठ 177)
- ★अब्दुर रज़्ज़ाक ने पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे और आवास बताए।
- ★आज के पुरातत्त्वविदों ने धार्मिक केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच एक कृषि क्षेत्र के साक्ष्य खोज निकाले हैं (पृष्ठ 178)।
- यह क्षेत्र एक व्यापक नहर प्रणाली से सींचा जाता था, जिसमें तुंगभद्रा से जल लाया जाता था।
8हिरिया नहर को संगम वंश के राजाओं ने ही बनवाया था, यह पक्की बात है। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब कहती है कि संभवत: इसका निर्माण संगम वंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था। (पृष्ठ 177)
- ★“संभवत:” अनुमान का शब्द है; उत्तर में इसे हटाइए मत।
- इस नहर में तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाया जाता था, और इसे “धार्मिक केंद्र” से “शहरी केंद्र” को अलग करने वाली घाटी को सिंचित करने में प्रयोग किया जाता था।
- किताब के अनुसार इसे आज भी भग्नावशेषों के बीच देखा जा सकता है।
9राजकीय केंद्र में केवल महल थे; मन्दिर वहाँ नहीं थे। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार इसे राजकीय केंद्र की संज्ञा दी गई है, पर इसमें 60 से भी अधिक मन्दिर सम्मिलित थे। (पृष्ठ 179)
- ★लगभग तीस संरचनाओं की पहचान महलों के रूप में की गई है; ये अपेक्षाकृत बड़ी संरचनाएँ हैं जो आनुष्ठानिक कार्यों से संबद्ध नहीं होतीं।
- किताब के अनुसार मन्दिरों और संप्रदायों को प्रश्रय देना शासकों के लिए स्पष्टत: महत्त्वपूर्ण था।
10कमल महल नाम विजयनगर के शासकों ने रखा था, और उसका काम तय है: वह परिषदीय सदन था। (यह कथन काल्पनिक है।) इसे जाँचिए। 3 अंक
उत्तर देखिए
कथन ग़लत है। किताब के अनुसार कमल महल का नामकरण उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने किया था, और इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस कार्य के लिए बना था। (पृष्ठ 181)
- ★परिषदीय सदन वाली बात एक सुझाव है, जो मैकेन्ज़ी द्वारा बनाए गए मानचित्र से मिलता है; इसके अनुसार राजा वहाँ अपने परामर्शदाताओं से मिलता था (पृष्ठ 182)।
- ★किताब “यह नाम निश्चित रूप से रोमांचक है” कहकर भी काम के बारे में निश्चित नहीं होती।
भाग ग — तुलना और वर्गीकरण
1राय, नायक और अमर–नायक की तुलना तालिका में कीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
| बात | राय | नायक | अमर–नायक |
|---|---|---|---|
| कौन | विजयनगर के शासक, जो अपने को इसी नाम से पुकारते थे | सेना प्रमुख, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे | सैनिक कमांडर, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे |
| भाषा या काम | अमर–नायकों को राज्य-क्षेत्र देते थे | आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे; एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते थे | किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू राजस्व और दूसरे कर वसूलते थे |
| राजा से रिश्ता | कभी-कभी अमर–नायकों का एक जगह से दूसरी जगह तबादला करके नियंत्रण जताते थे | कई ने अधीनता मानी, पर अक्सर विद्रोह करते थे और सैनिक कार्रवाई से दबाए जाते थे | वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे और स्वामिभक्ति दिखाने के लिए उपहारों के साथ दरबार में उपस्थित होते थे |
| सत्रहवीं शताब्दी | केंद्रीय राजकीय ढाँचा तेज़ी से बिखरने लगा | — | इनमें से कई नायकों ने अपने स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिए |
| पृष्ठ | 172, 175 | 175 | 175 |
★कसौटी: नायक सेना प्रमुख हैं; अमर–नायक वे सैनिक कमांडर हैं जिन्हें राय राज्य-क्षेत्र सौंपते थे। राजस्व के तीन उपयोग (निजी उपयोग, घोड़ों और हाथियों का दल, मन्दिरों और सिंचाई के साधनों का रख-रखाव) अमर–नायक प्रणाली के हैं, और सत्रहवीं शताब्दी वाली बात नायकों की (पृष्ठ 175)।
2विजयनगर के तीन केंद्रों (धार्मिक, शहरी, राजकीय) की तुलना तालिका में कीजिए। 4 अंक
उत्तर देखिए
| बात | धार्मिक केंद्र | शहरी केंद्र | राजकीय केंद्र |
|---|---|---|---|
| जगह | तुंगभद्रा नदी के किनारे वाला चट्टानी उत्तरी भाग | “धार्मिक केंद्र” से एक घाटी द्वारा अलग; घाटी में कृषि क्षेत्र | बस्ती का दक्षिण–पश्चिमी भाग |
| क्या मिलता है | विरुपाक्ष और पम्पादेवी के मन्दिर; साम्राज्य से पहले के जैन मन्दिर | सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम साक्ष्य; बहुत से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर | 60 से भी अधिक मन्दिर; लगभग तीस संरचनाएँ जिनकी पहचान महलों के रूप में हुई |
| ख़ास बात | शासक मन्दिर निर्माण से अपने को ईश्वर से जोड़ते थे; राजकीय आदेशों पर सामान्यतया “श्री विरुपाक्ष” अंकित होता था | उत्तर-पूर्वी कोने जैसे स्थानों से परिष्कृत चीनी मिट्टी के बर्तन मिले | नाम “राजकीय” है, पर बहुत से मन्दिर भी वहीं थे |
| पृष्ठ | 184 | 177, 178 | 179 |
★कसौटी: हर केंद्र को उसके साक्ष्य से पहचानिए। धार्मिक केंद्र में मन्दिरों की लंबी परंपरा, शहरी केंद्र में आवासों के कम साक्ष्य, और राजकीय केंद्र में महलों के साथ 60 से भी अधिक मन्दिर (पृष्ठ 178, 179, 184)।
3विजयनगर के इतिहास को जानने के साधनों को तालिका में रखिए। हर साधन के लिए किताब का एक उदाहरण दीजिए। 4 अंक
| साधन | किताब का उदाहरण | इतिहासकार को क्या मिलता है |
|---|---|---|
| स्थानीय स्मृतियाँ | ||
| अभिलेख | ||
| यात्रियों के वृत्तांत | ||
| पुरातात्विक साक्ष्य | ||
| नक्शे, तसवीरें और रेखाचित्र |
उत्तर देखिए
| साधन | किताब का उदाहरण | इतिहासकार को क्या मिलता है |
|---|---|---|
| स्थानीय स्मृतियाँ | मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी (पृष्ठ 170) | हम्पी के बारे में शुरुआती सुराग़ |
| अभिलेख | विजयनगर के राजाओं और नायकों के बड़ी संख्या में अभिलेख (पृष्ठ 176) | मन्दिरों को दिए जाने वाले दानों का उल्लेख और महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विवरण |
| यात्रियों के वृत्तांत | अब्दुर रज़्ज़ाक, बरबोसा, पेस, नूनिज़ (पृष्ठ 176, 190) | क़िलेबंदी, बाज़ार और आवासों जैसे ब्योरे; किताब के अनुसार ये जीवन के कुछ आयामों को पुनर्निर्मित करने में सहायक हैं |
| पुरातात्विक साक्ष्य | धार्मिक और नगरीय केंद्र के बीच कृषि क्षेत्र के साक्ष्य; परिष्कृत चीनी मिट्टी के बर्तन (पृष्ठ 178) | यात्रियों के कुछ कथनों की पुष्टि; शहरी केंद्र में कौन रहता होगा, इसका अनुमान |
| नक्शे, तसवीरें और रेखाचित्र | मैकेन्ज़ी का पहला सर्वेक्षण मानचित्र; 1856 से छाया चित्रकारों के चित्र; कमल महल का खड़ा रेखाचित्र (पृष्ठ 170, 181) | भवनों को बिना वहाँ गए पढ़ने और जाँचने का साधन |
★कसौटी: किताब का कोई भी साधन अकेला नहीं चलता; पृष्ठ 178 पर आज के पुरातत्त्वविदों ने अब्दुर रज़्ज़ाक और पेस के कथनों की पुष्टि की है। यात्री और पुरातत्त्वविद साथ पढ़ने पर एक-दूसरे की जाँच करते हैं (पृष्ठ 178)।
भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि
1. नक्शे पर चार देश और छह यात्री (किताब का प्रश्न 10, पृष्ठ 194)
किताब का प्रश्न है कि विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस अंकित कीजिए और पृष्ठ 176 के यात्रियों के विजयनगर पहुँचने के मार्ग पहचानिए। पृष्ठ 176 पर ये यात्री हैं: निकोलो दे कॉन्ती (इतालवी व्यापारी), अब्दुर रज़्ज़ाक (फ़ारस के राजा का दूत), अफ़ानासी निकितिन (रूस का व्यापारी), इन तीनों ने पंद्रहवीं शताब्दी में यात्रा की; और दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस तथा पुर्तगाल का फर्नाओ नूनिज़, जो सभी सोलहवीं शताब्दी में आए।
1विश्व का एक खाली सीमारेखा मानचित्र लीजिए या एटलस से देखकर बनाइए।
2चारों देश (इटली, पुर्तगाल, ईरान, रूस) अंकित कीजिए।
3हर देश के पास उसके यात्री का नाम और शताब्दी लिखिए।
4मार्ग एटलस या अध्यापक की मदद से खींचिए।
आपके नक्शे में नाम और शताब्दी इस तरह जुड़ने चाहिए। (पृष्ठ 176)
- इटली: निकोलो दे कॉन्ती, पंद्रहवीं शताब्दी।
- ईरान: अब्दुर रज़्ज़ाक, पंद्रहवीं शताब्दी; किताब के अनुसार उन्हें फ़ारस के शासक ने कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा था (पृष्ठ 177)।
- रूस: अफ़ानासी निकितिन, पंद्रहवीं शताब्दी।
- पुर्तगाल: फर्नाओ नूनिज़ (पृष्ठ 176) और बरबोसा (पृष्ठ 179 पर “पुर्तगाली यात्री”), दोनों सोलहवीं शताब्दी।
सीख: देश, यात्री और शताब्दी साथ लिखने से दिखता है कि विजयनगर तक पंद्रहवीं और सोलहवीं शताब्दियों में दूर-दूर से यात्री आए।
2. किसी एक शहर का प्रोजेक्ट (किताब का प्रश्न 11, पृष्ठ 194)
किताब कहती है कि लगभग चौदहवीं–सत्रहवीं शताब्दियों में फला-फूला कोई एक प्रमुख शहर चुनिए, उसके स्थापत्य का वर्णन कीजिए और देखिए कि उसमें वे लक्षण हैं या नहीं जो राजनीतिक केंद्र, आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भवनों और शहरी भाग को आस-पास से अलग करने वाली चीज़ों को दिखाते हैं। विजयनगर का अध्याय आपको ढाँचा देता है: नक्शा, दीवारें और प्रवेशद्वार, पानी के प्रबंध, राजकीय भवन, धार्मिक भवन, बाज़ार और सड़कें।
1अपने अध्यापक या पुस्तकालय की मदद से एक शहर चुनिए।
2विजयनगर के ऊपर वाले छह शीर्षक अपने पन्ने पर लिखिए।
3हर शीर्षक के नीचे उस शहर के बारे में जो मिला, लिखिए।
4हर बात के आगे लिखिए कि वह किस साधन से मिली: यात्रियों का वृत्तांत, अभिलेख, नक्शा या तसवीर।
5अंत में विजयनगर से तुलना की एक छोटी तालिका बनाइए।
इस प्रोजेक्ट का कोई एक सही उत्तर नहीं है; आपका शहर आपका उत्तर तय करेगा। उसे इस तरह परखिए। (पृष्ठ 194)
- प्रश्न के तीनों भाग अलग लिखे हों: राजनीतिक केंद्र के लक्षण (महल, सभा भवन, ऊँची दीवारों वाले घेरे), आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भवन, और शहरी भाग को आस-पास से अलग करने वाले लक्षण।
- हर बात के साथ उसका साधन लिखा हो।
- अंत में दो-तीन वाक्य हों कि दोनों शहर कहाँ मिलते हैं और कहाँ अलग हैं।
सीख: शहर चाहे कोई हो, उसे पढ़ने का तरीक़ा वही रहता है: क्या दिखता है, किस साधन से पता चला, और उससे क्या नहीं पता चलता।
3. एक पुराने भवन का रेखाचित्र (किताब का प्रश्न 12, पृष्ठ 195)
किताब कहती है कि अपने आस-पास के किसी धार्मिक भवन को देखिए और रेखाचित्र के माध्यम से छत, स्तंभों, मेहराबों (यदि हों), गलियारों, रास्तों, सभागारों, प्रवेशद्वारों और जल-आपूर्ति का वर्णन कीजिए, फिर इनकी तुलना विरुपाक्ष मन्दिर से कीजिए। हमारी ओर से: यह काम भवन की बनावट का है, किसी की आस्था का नहीं; भवन आपके आस-पास का कोई भी पुराना धार्मिक भवन हो सकता है।
1एक भवन चुनिए और उसका सादा रेखाचित्र बनाइए।
2रेखाचित्र पर छत, स्तंभ, मेहराबें (यदि हों), गलियारे, रास्ते, सभागार, प्रवेशद्वार और पानी का प्रबंध अंकित कीजिए।
3विरुपाक्ष मन्दिर के लिए पृष्ठ 185–186 से इन बातों की तालिका बनाइए: ऊँचा गोपुरम्, कृष्णदेव राय का बनवाया मण्डप और पूर्वी गोपुरम्, स्तंभों वाले सभागार और गलियारे, जलाशय।
4हर भाग के आगे दो खाने रखिए: आपके भवन में और विरुपाक्ष मन्दिर में।
आपकी तालिका की विरुपाक्ष वाली पंक्तियाँ किताब से इस तरह मिलनी चाहिए। (पृष्ठ 185–186)
- किताब के अनुसार विरुपाक्ष मन्दिर में कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण की स्मृति में सभा मण्डप बनवाया और पूर्वी गोपुरम् के निर्माण का श्रेय उन्हें दिया जाता है (पृष्ठ 186)।
- पृष्ठ 186 के अनुसार इन परिवर्धनों का अर्थ था कि केंद्रीय देवालय मन्दिर परिसर के एक छोटे भाग तक सीमित रह गया था।
- ! अपने भवन के भागों के नाम और काम के लिए किताब नहीं, बड़ों से पूछना और जगह पर लगा पट्ट पढ़ना काम आएगा।
सीख: विरुपाक्ष की सूची आपके भवन को देखने का नक़्शा बन जाती है।
4. 25 वर्गों वाले नक्शे में अक्षर और पैमाना (किताब का किनारे का प्रश्न, पृष्ठ 189)
किताब के अनुसार हम्पी के अंकन में पूरा क्षेत्र 25 वर्गों में बाँटा गया, और हर वर्ग पर अंग्रेज़ी वर्णमाला का एक अक्षर है, पर एक अक्षर प्रयोग नहीं हुआ। किताब पूछती है कि कौन-सा अक्षर प्रयोग नहीं किया गया और मानचित्र के पैमाने से एक छोटे वर्ग की लंबाई नापिए।
1चित्र 7.27 के नक्शे में वर्गों पर बने अक्षर एक-एक करके पढ़िए।
2अंग्रेज़ी वर्णमाला के क्रम में देखिए कि कौन-सा अक्षर छूटा है।
3मानचित्र के नीचे के पैमाने की पट्टी रूलर से नापिए।
4फिर एक वर्ग की भुजा नापिए और अनुपात से किलोमीटर निकालिए।
आपकी जाँच इस तरह होनी चाहिए। (पृष्ठ 188–189)
- अंग्रेज़ी वर्णमाला में 26 अक्षर हैं और वर्ग 25 हैं, इसलिए एक अक्षर छूटता है; यह अंग्रेज़ी वर्णमाला का नौवाँ अक्षर है।
- लंबाई के लिए: (वर्ग की नापी हुई लंबाई ÷ पैमाने की पट्टी की नापी हुई लंबाई) × पट्टी पर लिखी दूरी।
- किताब के अनुसार इस अंकन में लगभग बीस वर्षों के काल में पूरे विश्व के दर्जनों विद्वानों ने काम किया (पृष्ठ 188)।
सीख: वर्गों में बाँटना एक बड़े क्षेत्र को छोटे-छोटे हिस्सों में पढ़ने की तरकीब है।
5. कृष्णदेव राय के समय की काल-रेखा (किताब पृष्ठ 173–174)
किताब बताती है कि संगम वंश ने 1485 तक नियंत्रण रखा, फिर सुलुवों ने 1503 तक शासन किया, और फिर तुलुवों ने। कृष्णदेव राय का शासनकाल 1509–29 था। इसी काल में रायचूर दोआब हासिल किया गया (1512), उड़ीसा के शासकों का दमन किया गया (1514) और बीजापुर के सुल्तान को बुरी तरह पराजित किया गया (1520)। 1529 में कृष्णदेव की मृत्यु के बाद राजकीय ढाँचे में तनाव उत्पन्न होने लगा, 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथों में चला गया, और 1565 में राक्षसी–तांगड़ी का युद्ध हुआ।
1कॉपी में एक सीधी रेखा खींचिए और उस पर 1485 से 1565 तक के खाने बराबर दूरी पर लगाइए।
2ऊपर दी तिथियाँ उनकी घटना के साथ रेखा पर लिखिए।
31509–29 वाला हिस्सा रंग से भरिए।
4रेखा के नीचे लिखिए कि 1565 की लड़ाई में किसकी सेनाएँ आमने-सामने थीं।
आपकी काल-रेखा में तिथियाँ इसी क्रम में आनी चाहिए। (पृष्ठ 173–174)
- 1485 संगम का अंत, 1503 सुलुवों का अंत, 1509–29 कृष्णदेव राय, 1512, 1514, 1520, 1529, 1542, 1565।
- 1565 में विजयनगर की सेना, प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में, बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं से हारी।
सीख: साल क्रम से रखने पर यह दिखता है कि कृष्णदेव राय का काल विस्तार का काल था और उनके बाद राजकीय ढाँचे में तनाव शुरू हुआ।
6. मानचित्र 1: विजयनगर के आज के राज्य (किताब का किनारे का प्रश्न, पृष्ठ 174)
किताब का प्रश्न है कि उन आधुनिक राज्यों को चिह्नित कीजिए जो विजयनगर साम्राज्य का भाग थे। पृष्ठ 174 के मानचित्र 1 पर विजयनगर, चन्द्रगिरी, तंजावुर, मदुरई और मैसूर जैसे नाम हैं।
1भारत का आज का राजनीतिक मानचित्र और पृष्ठ 174 का मानचित्र 1 साथ-साथ रखिए।
2मानचित्र 1 पर ये पाँच नाम ढूँढिए।
3आज के मानचित्र पर देखिए कि हर नाम किस राज्य में पड़ता है।
4उन राज्यों को रंग दीजिए और रंगे हुए राज्यों की सूची बनाइए।
आपकी सूची आज के मानचित्र से बनेगी; जाँचने के लिए ये बातें देखिए। (पृष्ठ 174)
- किताब के अनुसार अपने चरमोत्कर्ष पर साम्राज्य उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था (पृष्ठ 170)।
- पाँचों नाम मानचित्र 1 पर मिलने चाहिए; किसी नाम का राज्य एटलस से पक्का कीजिए।
सीख: पुराने साम्राज्य की सीमा को आज के नक्शे से मिलाने पर उसका फैलाव दिखता है, पर आज के राज्यों की सूची हमारा अपना काम है।
अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए
| आपके उत्तर में | तो |
|---|---|
| स्रोत या तथ्य किताब से सही उठाया, उससे नतीजा निकाला और अपना कारण लिखा | उत्तर पूरा है। |
| किताब का हवाला दिया, पर यह नहीं लिखा कि उससे क्या पता चलता है | हर हवाले के बाद एक पंक्ति जोड़िए कि उससे अध्याय की कौन-सी बात सिद्ध होती है। |
| विजयनगर साम्राज्य को उस समय का नाम बताया | यह इतिहासकारों का शब्द है; समकालीन लोग कर्नाटक साम्राज्यमु कहते थे (पृष्ठ 171)। भाग ख का प्रश्न 1 फिर से कीजिए। |
| स्थापना की तिथि 1336 को पक्की लिखा | पाठ में “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” जुड़ा है और काल-रेखा में प्रश्नचिह्न है (पृष्ठ 171, 193)। भाग ख का प्रश्न 2 फिर से कीजिए। |
| हम्पी की जानकारी को केवल मैकेन्ज़ी की अपनी खोज लिखा | उनकी शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी (पृष्ठ 170)। केस 1 का प्रश्न 2 फिर से कीजिए। |
| सुलुवों को संगम वंश की शाखा लिखा | सुलुवों ने संगम वंश को उखाड़ फेंका (पृष्ठ 173)। भाग ख का प्रश्न 3 फिर से कीजिए। |
| 1565 में रामराय को राजा लिखा | रामराय प्रधानमंत्री थे (पृष्ठ 173)। केस 3 का प्रश्न 3 और भाग ख का प्रश्न 4 फिर से कीजिए। |
| सुल्तानों से संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण लिखे | किताब कहती है कि वे हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे (पृष्ठ 174)। केस 3 का प्रश्न 4 और भाग ख का प्रश्न 5 फिर से कीजिए। |
| अमर–नायक प्रणाली को पूरी तरह नई लिखा | किताब के अनुसार इसके कई तत्त्व इक्ता से लिए प्रतीत होते हैं (पृष्ठ 175)। केस 4 का प्रश्न 3 और भाग ख का प्रश्न 6 फिर से कीजिए। |
| खेतों को दीवारों के बाहर लिखा | क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा था (पृष्ठ 177)। केस 6 का प्रश्न 2 और भाग ख का प्रश्न 7 फिर से कीजिए। |
| “दुर्गों की सात पंक्तियों” को पुरातत्त्वविदों की गिनती लिखा | यह अब्दुर रज़्ज़ाक का वर्णन है (पृष्ठ 177)। केस 6 का प्रश्न 3 फिर से कीजिए। |
| हिरिया नहर को पक्के तौर पर संगम राजाओं की लिखा | किताब कहती है “संभवत:” (पृष्ठ 177)। केस 5 का प्रश्न 2 और भाग ख का प्रश्न 8 फिर से कीजिए। |
| राजकीय केंद्र में केवल महल लिखे | वहाँ 60 से भी अधिक मन्दिर थे (पृष्ठ 179)। केस 7 का प्रश्न 3 और भाग ख का प्रश्न 9 फिर से कीजिए। |
| कमल महल का नाम और काम पक्का लिखा, या “हाथियों का अस्तबल” को पक्का अस्तबल लिखा | नाम अंग्रेज़ यात्रियों का है और काम निश्चित नहीं; अस्तबल वाला नाम किताब उद्धरण-चिह्नों में देती है (पृष्ठ 181–182)। केस 9 का प्रश्न 1 और 3 तथा भाग ख का प्रश्न 10 फिर से कीजिए। |
| विट्ठल को शिव का रूप लिखा | विट्ठल सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु के एक रूप हैं (पृष्ठ 187)। केस 11 का प्रश्न 4 फिर से कीजिए। |
| इमारतों से आम लोगों की सोच बताई | किताब के अनुसार इमारतें यह नहीं बतातीं कि जनसंख्या का बड़ा भाग इनके बारे में क्या सोचता था (पृष्ठ 192)। केस 12 का प्रश्न 5 फिर से कीजिए। |
इनमें से जिस पंक्ति में आपका उत्तर बैठता है, उसमें बताया प्रश्न फिर से हल कीजिए और अपना उत्तर नीचे दिए उत्तर से मिलाइए।