अध्याय 4वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

परख प्रश्न16 मिनटस्रोत जाँचे गए

NCERT, आर्थिक विकास की समझ (कक्षा 10), अध्याय 4

ये प्रश्न रटकर हल नहीं होते। इनमें आपको किताब के उदाहरण पढ़ना, आँकड़ों से नतीजा निकालना, तुलना करना, पक्ष लेना और कारण देना है। पहले अपना उत्तर ख़ुद लिखिए, फिर नीचे दिया उत्तर खोलकर मिलाइए। अंक सिर्फ़ यह अंदाज़ा देते हैं कि उत्तर कितना लंबा हो।

तारों का मतलब: ★वाली पंक्ति उत्तर की मुख्य बात है; दोहराते समय पहले वही पढ़िए।


भाग क — केस-आधारित प्रश्न

केस 1 — एक कंपनी, कई देश (पृष्ठ 56–57)

किताब का उदाहरण: औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने उत्पादों का डिज़ाइन संयुक्त राज्य अमेरिका के अनुसंधान केन्द्र में करती है। पुर्ज़े चीन में बनते हैं और जहाज़ से मेक्सिको और पूर्वी यूरोप भेजे जाते हैं, जहाँ उपकरणों का संयोजन होता है। तैयार उपकरण पूरे विश्व में बिकते हैं, और ग्राहक देखभाल सेवा भारत के कॉल सेंटर से दी जाती है।

1बहुराष्ट्रीय कंपनी किसे कहते हैं? यह कंपनी उस परिभाषा पर कैसे खरी उतरती है? 2 अंक

उत्तर देखिए
1

किताब की परिभाषा: “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” (पृष्ठ 56)

2

★इस कंपनी का काम चार जगह बँटा है: अमेरिका में डिज़ाइन, चीन में पुर्ज़े, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में संयोजन, और भारत में ग्राहक सेवा। उत्पादन एक से अधिक देशों में है और नियंत्रण इसी कंपनी का है, इसलिए यह बहुराष्ट्रीय कंपनी है।

2हर काम के लिए यही देश क्यों चुना गया? किताब के कारण लिखिए, और बताइए कि इससे कंपनी को क्या मिलता है। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

चीन: सस्ता विनिर्माण स्थल।

2

मेक्सिको और पूर्वी यूरोप: अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों से निकटता।

3

भारत: अत्यंत कुशल इंजीनियर, और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक जो ग्राहक देखभाल सेवा दे सकते हैं।

★हर काम वहाँ होता है जहाँ वह सबसे सस्ता या सबसे सुविधाजनक हो। किताब के अनुसार इससे कंपनी की लागत में लगभग 50–60 प्रतिशत बचत हो सकती है (पृष्ठ 57), और लागत घटे तो लाभ बढ़ता है।

3बहुराष्ट्रीय कंपनी उत्पादन के लिए जगह चुनते समय किन बातों को देखती है? इस केस में कौन-सी दो बातें सबसे साफ़ दिखती हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए
1

चार बातें: जगह बाज़ार के नज़दीक हो; वहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले; उत्पादन के दूसरे कारक उपलब्ध हों; और सरकारी नीतियाँ कंपनी के हितों का ध्यान रखें।

2

★इस केस में सबसे साफ़ दो बातें दिखती हैं: कम लागत पर श्रम (चीन में पुर्ज़े, भारत में कुशल इंजीनियर और ग्राहक सेवा), और बाज़ार से निकटता (मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में संयोजन)।


केस 2 — कारगिल और फोर्ड मोटर्स (पृष्ठ 58–59)

किताब के दो उदाहरण:
कारगिल फूड्स: इस अमेरिकी कंपनी ने परख फूड्स जैसी छोटी भारतीय कंपनियाँ खरीदीं। परख फूड्स के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के नियंत्रण में हैं, और कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की निर्माण क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक कंपनी है।
फोर्ड मोटर्स: यह अमेरिकी कंपनी विश्व के 26 देशों में फैली है। 1995 में यह भारत आई और चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश करके महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से विशाल संयंत्र लगाया। वर्ष 2017 तक यह भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें बेच रही थी, और 1,81,000 कारें भारत से दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात हुईं। किताब आगे बताती है कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारों का उत्पादन बंद कर दिया है, पर कारों और कार के इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है।

1कारगिल और फोर्ड ने भारत में उत्पादन के लिए अलग-अलग रास्ते अपनाए। दोनों रास्ते पहचानिए। 2 अंक

उत्तर देखिए
1

कारगिल: स्थानीय कंपनियाँ खरीदकर, फिर उत्पादन फैलाकर। किताब के शब्दों में, “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” (पृष्ठ 58)

2

★फोर्ड: नया संयंत्र लगाकर, और वह भी एक भारतीय कंपनी, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, के सहयोग से। दोनों में पैसा भारत की परिसंपत्तियों में लगा, इसलिए दोनों विदेशी निवेश हैं।

2किताब कहती है कि भारत में संयंत्र लगाकर फोर्ड जैसी कंपनियाँ भारत के विशाल बाज़ार और कम उत्पादन लागत, दोनों का लाभ उठाती हैं (पृष्ठ 59)। फोर्ड के आँकड़ों से यह बात समझाइए। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

बाज़ार: वर्ष 2017 तक फोर्ड भारतीय बाज़ारों में 88,000 कारें बेच रही थी। भारत उसके लिए ग्राहकों का बड़ा बाज़ार था।

2

कम लागत: उसी संयंत्र से 1,81,000 कारें चार देशों को निर्यात हुईं, यानी भारत में बिकी कारों से दुगुनी से ज़्यादा। कंपनी दूर के देशों के लिए भी कारें यहीं बनवा रही थी, क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के लिए सस्ती जगहें खोजती हैं।

3

★भारत फोर्ड के लिए बाज़ार भी था और सस्ता उत्पादन केन्द्र भी। इसी से भारत का उत्पादन दूसरे देशों के बाज़ारों से जुड़ता है।

3बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कारखाना लगाए या कंपनी खरीदे बिना भी दूर के छोटे उत्पादकों पर नियंत्रण कैसे जमा लेती हैं? 2 अंक

उत्तर देखिए
1

विकसित देशों की बड़ी कंपनियाँ वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान जैसे उद्योगों में छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं, और माल अपने ब्राण्ड नाम से बेचती हैं। किताब में लुधियाना के एक घर में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनी के लिए फुटबाल बनाते लोगों की तस्वीर है (पृष्ठ 58)।

2

★ऐसी कंपनियों के पास दूर के उत्पादकों के लिए मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करने की “प्रचण्ड क्षमता” होती है (पृष्ठ 58)। छोटा उत्पादक ऑर्डर पाने के लिए उन्हीं की शर्तें मानता है।


केस 3 — भारत में चीन के खिलौने (पृष्ठ 60–61)

किताब का उदाहरण: चीनी विनिर्माताओं ने देखा कि भारत में खिलौने अधिक मूल्य पर बिक रहे हैं, और उन्होंने भारत को खिलौने निर्यात करना शुरू किया। सस्ते दाम और नये डिज़ाइनों के कारण एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली।

1इस व्यापार से किसे फ़ायदा हुआ और किसे नुकसान? तीनों पक्षों के बारे में लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

भारतीय खरीदार: फ़ायदा। अब उनके पास भारतीय और चीनी खिलौनों में से चुनने का विकल्प है, कम कीमत पर और नये डिज़ाइनों में।

2

चीनी विनिर्माता: फ़ायदा। उन्हें भारत का बड़ा बाज़ार मिला और उनका व्यवसाय बढ़ा।

3

★भारतीय खिलौना निर्माता: नुकसान। एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों से उनके खिलौनों की जगह चीनी खिलौनों ने ले ली।

2इस उदाहरण से समझाइए कि बाज़ारों का एकीकरण क्या है। 2 अंक

उत्तर देखिए
1

व्यापार खुलने से खिलौने एक देश के बाज़ार से दूसरे देश के बाज़ार में पहुँचे, खरीदारों के विकल्प बढ़े, और हज़ारों मील दूर बैठे दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करने लगे। दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का दाम एक जैसा होने लगता है।

2

★किताब का निष्कर्ष: “इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।” (पृष्ठ 61)

3मान लीजिए (काल्पनिक) सरकार तय कर दे कि एक वर्ष में चीन से केवल एक सीमित संख्या में खिलौने आयात होंगे। इस रोक को क्या कहते हैं? भारतीय खिलौना निर्माताओं और खरीदारों पर इसका क्या असर होगा? 3 अंक

उत्तर देखिए
1

आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा कोटा कहलाती है; यह एक व्यापार अवरोधक है। किताब पृष्ठ 64 पर खिलौनों के उदाहरण से यही सवाल पूछती है।

2

निर्माता: बाकी माँग भारतीय निर्माताओं से पूरी होगी, और उन पर सस्ते आयात की पूरी मार नहीं पड़ेगी।

3

★खरीदार: सस्ते और नये डिज़ाइन वाले खिलौनों का विकल्प घटेगा। यानी कोटा से निर्माताओं को संरक्षण मिलता है, पर खरीदारों का विकल्प कम होता है।


केस 4 — होसुर के रवि (पृष्ठ 68)

किताब का उदाहरण: सन् 1992 में रवि ने तमिलनाडु के औद्योगिक शहर होसुर में संधारित्र बनाने की कंपनी शुरू करने के लिए बैंक से ऋण लिया। संधारित्र ट्यूबलाइट, टेलीविज़न जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में लगते हैं। तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ा और कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे। सन् 2001 में सरकार ने विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटा दिए। रवि के मुख्य ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ थीं; बहुराष्ट्रीय ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा ने उन्हें बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने के लिए विवश कर दिया, और उनमें से कुछ संधारित्र आयात करना पसंद करने लगीं, क्योंकि आयातित माल की कीमत रवि जैसे लोगों की कीमत से आधी थी। अब रवि वर्ष 2000 के उत्पादन के आधे से भी कम संधारित्र बनाता है और उसके पास केवल सात श्रमिक हैं। हैदराबाद और चेन्नई में इसी व्यवसाय वाले उसके कई दोस्तों ने अपनी इकाइयाँ बंद कर दीं।

1रवि की कंपनी पहले और अब: श्रमिकों और उत्पादन के आँकड़ों से बदलाव लिखिए। बदलाव किस साल की घटना के बाद आया? 2 अंक

उत्तर देखिए
1

श्रमिक: 20 से घटकर सात। उत्पादन: वर्ष 2000 के आधे से भी कम।

2

★बदलाव सन् 2001 के बाद आया, जब विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात पर से प्रतिबंध हटे, यानी व्यापार का उदारीकरण हुआ।

2रवि ने ख़ुद कोई ग़लती नहीं की, फिर भी उसकी बिक्री क्यों घटी? घटनाओं की कड़ी बनाकर समझाइए। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

आयात पर से प्रतिबंध हटे, तो विदेशी संधारित्र भारत आने लगे, और उनकी कीमत रवि की कीमत से आधी थी।

2

उधर टेलीविज़न के बाज़ार में बहुराष्ट्रीय ब्रांडों की प्रतिस्पर्धा बढ़ी, और भारतीय टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं।

3

★रवि के यही ग्राहक अब सस्ते आयातित संधारित्र खरीदने लगे। इसलिए उसका ऑर्डर घटा, उत्पादन घटा और श्रमिक घटे। किताब के अनुसार बैटरी, संधारित्र, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल के छोटे उत्पादकों पर भी ऐसी ही मार पड़ी (पृष्ठ 68)।

3किताब पूछती है (पृष्ठ 68): दूसरे देशों के उत्पादकों की तुलना में लागत अधिक हो, तो क्या रवि जैसे उत्पादकों को उत्पादन रोक देना चाहिए? अपनी राय कारण सहित लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है; अंक इस बात के हैं कि राय का कारण किताब से दिया गया हो। एक उत्तर ऐसा हो सकता है:

1

नहीं रोकना चाहिए: भारत में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक (11 करोड़) लघु और मध्यम उद्योगों में काम करते हैं (पृष्ठ 68)। ऐसी इकाइयाँ बंद हों, तो बहुत लोग बेरोज़गार होंगे।

2

क्या चाहिए: किताब के अनुसार छोटे उत्पादकों को बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए तीन चीज़ें चाहिए: बेहतर सड़कें, बिजली, पानी, कच्चा माल, विपणन और सूचना तंत्र; प्रौद्योगिकी में सुधार और आधुनिकीकरण; और उचित ब्याज दर पर समय पर साख (पृष्ठ 68)।

3

★किताब यह भी कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे, जब तक वे प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम न हो जाएँ (पृष्ठ 70)।


केस 5 — सुशीला और वस्त्र निर्यात की कड़ी (पृष्ठ 69–70)

किताब का उदाहरण: अमेरिका और यूरोप की वस्त्र उद्योग की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारतीय निर्यातकों को ऑर्डर देती हैं और लाभ बढ़ाने के लिए सबसे सस्ता माल खोजती हैं। बड़े ऑर्डर पाने के लिए निर्यातक लागत घटाने की कड़ी कोशिश करते हैं।
35 वर्ष की सुशीला ने दिल्ली के एक वस्त्र निर्यातक उद्योग में कई वर्ष काम किया। स्थायी श्रमिक के रूप में उसे स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी मिलती थी। 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में उसकी फैक्ट्री बंद हो गई। छह माह खोजने के बाद उसे घर से 30 कि.मी. दूर काम मिला। कई वर्षों तक वहाँ काम करने के बाद भी वह अस्थायी श्रमिक है और पहले से आधे से भी कम कमाती है। वह सप्ताह के सातों दिन सुबह 7.30 बजे घर से निकलती है और शाम 10 बजे लौटती है। उसे अब कोई ऐसा लाभ नहीं मिलता जो पहले मिलता था।

1सुशीला के काम में पहले और अब क्या बदला? कम से कम तीन बातें लिखिए। 2 अंक

उत्तर देखिए
1

पहले: स्थायी श्रमिक; स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि, और अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी।

2

★अब: अस्थायी श्रमिक; पहले से आधे से भी कम कमाई; घर से 30 कि.मी. दूर, सातों दिन सुबह 7.30 बजे से शाम 10 बजे तक; और पहले वाला कोई लाभ नहीं।

2निर्यातक श्रमिकों की ही लागत क्यों घटाते हैं? बहुराष्ट्रीय कंपनी से सुशीला तक की कड़ी समझाइए। 3 अंक

उत्तर देखिए
1

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लाभ बढ़ाने के लिए सबसे सस्ता माल खोजती हैं, इसलिए भारतीय निर्यातक बड़े ऑर्डर पाने के लिए लागत घटाने की होड़ में रहते हैं।

2

कच्चे माल की लागत घटाई नहीं जा सकती, इसलिए वे श्रम-लागत घटाते हैं: स्थायी के बजाय अस्थायी रोज़गार देते हैं, ताकि पूरे वर्ष वेतन न देना पड़े। श्रमिकों को बहुत लंबे घंटे और रात में भी काम करना पड़ता है।

3

★किताब का निष्कर्ष: प्रतिस्पर्धा से बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अधिक लाभ कमाने में मदद मिली है, “परन्तु वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं दिया गया है।” (पृष्ठ 69)

3किताब पूछती है (पृष्ठ 70): वैश्वीकरण से मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा मिल सके, इसके लिए (क) सरकार, (ख) निर्यातक फैक्ट्रियों के नियोक्ता, (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और (घ) श्रमिक क्या कर सकते हैं? 3 अंक

उत्तर देखिए
1

सरकार: श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए, ताकि श्रमिकों को उनके अधिकार मिलें (पृष्ठ 70)।

2

नियोक्ता: लागत घटाने का सारा बोझ मज़दूरी पर न डालें; जहाँ हो सके स्थायी रोज़गार, उचित मज़दूरी और अतिरिक्त समय के काम का पूरा भुगतान दें।

3

बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: निर्यातकों को ऐसी कीमत दें जिसमें उचित मज़दूरी संभव हो, और देखें कि उनका माल बनाने वाली फैक्ट्रियाँ श्रम कानूनों का पालन करें।

4

★श्रमिक: अपने अधिकार जानें और संगठित होकर आवाज़ उठाएँ। किताब बताती है कि बड़े अभियानों और जनसंगठनों ने विश्व व्यापार संगठन के महत्त्वपूर्ण निर्णयों को भी प्रभावित किया है (पृष्ठ 70)।

भाग ख — तर्क और मूल्यांकन

1“वैश्वीकरण से भारत में सबका जीवन स्तर सुधरा है।” (यह कथन काल्पनिक है। किताब की प्रश्नावली का प्रश्न 13 (इ) इसी से जुड़ा है।) इसे जाँचिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

कथन ग़लत है।

1

लाभ उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को मिला: अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत (पृष्ठ 66)। शीर्ष भारतीय कंपनियाँ भी आगे बढ़ीं।

2

पर रवि जैसे छोटे उत्पादकों की इकाइयाँ घटीं या बंद हुईं, और सुशीला जैसे श्रमिकों का रोज़गार अस्थायी हो गया (पृष्ठ 68–69)।

3

★किताब के शब्दों में: “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।” (पृष्ठ 70) इसीलिए प्रश्न 13 (इ) का सही विकल्प (घ) “उपर्युक्त में से कोई नहीं” है।

2“विश्व व्यापार संगठन के नियमों से अब सब देशों के बीच मुक्त और न्यायसंगत व्यापार होता है।” (यह कथन काल्पनिक है।) क्या आप सहमत हैं? 3 अंक

उत्तर देखिए

नहीं।

1

विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ (पृष्ठ 65)। व्यवहार में विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने व्यापार अवरोधक बनाए रखे, जबकि उसके नियमों ने विकासशील देशों को अवरोधक हटाने के लिए विवश किया।

2

किताब का उदाहरण: अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा केवल एक प्रतिशत और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसानों को सरकार से उत्पादन और निर्यात के लिए बहुत अधिक धन राशि मिलती है। उनकी अधिशेष उपज दूसरे देशों में कम कीमत पर बिकती है और वहाँ के किसानों पर बुरा असर डालती है (पृष्ठ 65)।

3

★इसीलिए विकासशील देश पूछते हैं: “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?” (पृष्ठ 65)

3“वैश्वीकरण से छोटे उत्पादकों और श्रमिकों को नुकसान हुआ है, इसलिए इसे रोक देना चाहिए।” (यह कथन काल्पनिक है। किताब की प्रश्नावली का प्रश्न 10 भी ऐसी ही बहस पूछता है।) अपनी राय दीजिए। 3 अंक

उत्तर देखिए

नुकसान की बात सच है, पर हल रोकना नहीं।

1

नुकसान सच है: रवि की कंपनी 20 से सात श्रमिकों पर आ गई, और सुशीला की कमाई आधी से भी कम हो गई (पृष्ठ 68–69)।

2

पर फ़ायदे भी हैं: उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिले, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश वाले उद्योगों में नये रोज़गार बने, और कुछ भारतीय कंपनियाँ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बनीं (पृष्ठ 66–67)।

3

★किताब का रास्ता वैश्वीकरण को न्यायसंगत बनाना है: “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।” (पृष्ठ 70) इसके लिए सरकार श्रम कानूनों का पालन कराए, छोटे उत्पादकों की मदद करे, और ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग करे।

4किताब पूछती है (पृष्ठ 70): भारत में बहस है कि क्या कंपनियों को रोज़गार नीतियों में लचीलापन अपनाना चाहिए। नियोक्ताओं और श्रमिकों, दोनों के पक्ष लिखिए, और फिर अपनी राय दीजिए। 4 अंक

उत्तर देखिए

इसका कोई एक सही उत्तर नहीं है; अंक इस बात के हैं कि दोनों पक्ष और अपनी राय का कारण किताब से दिया गया हो। एक उत्तर ऐसा हो सकता है:

1

नियोक्ताओं का पक्ष: प्रतिस्पर्धा बहुत है और विदेशी खरीदार सबसे सस्ता माल चाहते हैं। काम का दबाव हो तभी श्रमिक रखने से श्रम लागत घटती है। सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए यह छूट दी है, और विदेशी कंपनियाँ और अधिक लचीलापन माँग रही हैं (पृष्ठ 67)।

2

श्रमिकों का पक्ष: किताब के शब्दों में लचीलेपन का अर्थ है कि “श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” (पृष्ठ 69) सुशीला जैसे श्रमिकों से स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और दुगुनी मज़दूरी छिन गई।

3

★एक संतुलित राय: कंपनियों को प्रतिस्पर्धा में टिकना है, पर उसकी पूरी क़ीमत श्रमिक न चुकाएँ। किताब कहती है कि श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो और श्रमिकों को उनके अधिकार मिलें (पृष्ठ 70)।

भाग ग — तुलना और वर्गीकरण

1इनमें से कौन-सी घटना विदेश व्यापार है और कौन-सी विदेशी निवेश? कारण लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए
घटनाविदेश व्यापार या विदेशी निवेशकारण
चीन के खिलौने भारत की दुकानों में बिकना (पृष्ठ 60)विदेश व्यापारएक देश में बनी वस्तु दूसरे देश में बिक रही है
फोर्ड का चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए लगाकर संयंत्र बनाना (पृष्ठ 59)विदेशी निवेशबहुराष्ट्रीय कंपनी ने भारत में भवन और मशीनों में पैसा लगाया
कारगिल का परख फूड्स जैसी कंपनियाँ खरीदना (पृष्ठ 58)विदेशी निवेशबहुराष्ट्रीय कंपनी ने भारत की कंपनी और उसके तेल शोधक केन्द्र खरीदे
भारत में बनी 1,81,000 फोर्ड कारें चार देशों को जाना (पृष्ठ 59)विदेश व्यापारभारत में बनी वस्तु का दूसरे देशों को निर्यात
हाल के वर्षों में चीन का भारत से इस्पात आयात करना (पृष्ठ 61)विदेश व्यापारवस्तु की देशों के बीच ख़रीद-बिक्री

★कसौटी: विदेश व्यापार उत्पादकों को अपने देश से बाहर के बाज़ारों तक पहुँचाता है, और ख़रीदारों को दूसरे देशों में बनी वस्तुएँ देता है (पृष्ठ 59); बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों में लगाया पैसा विदेशी निवेश है (पृष्ठ 57)।

एक ही कंपनी दोनों कर सकती है: फोर्ड ने भारत में निवेश किया, और फिर यहाँ बनी कारों का व्यापार किया।

2वैश्वीकरण का असर: इनमें से किसे लाभ मिला और किस पर दबाव पड़ा? किताब से कारण लिखिए। 3 अंक

उत्तर देखिए
कौनलाभ या दबावकारण
शहरों के धनी उपभोक्ता (पृष्ठ 66)लाभअधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता, कम कीमत, ऊँचा जीवन स्तर
बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कच्चा माल आदि देने वाली स्थानीय कंपनियाँ (पृष्ठ 66)लाभबहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश वाले उद्योगों से इनका काम बढ़ा और ये समृद्ध हुईं
टाटा मोटर्स, इंफोसिस जैसी शीर्ष भारतीय कंपनियाँ (पृष्ठ 67)लाभनवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाई; कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं
होसुर का रवि (पृष्ठ 68)दबावआधी कीमत वाले आयातित संधारित्रों से उसकी बिक्री घटी
सुशीला जैसे वस्त्र श्रमिक (पृष्ठ 69)दबावरोज़गार अस्थायी हुआ, कमाई घटी, पहले वाले लाभ छिने

★किताब की मुख्य बात: “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।” (पृष्ठ 66)

3इनमें से कौन व्यापार अवरोधक है, कौन अवरोधक हटाना है, और कौन विदेशी निवेश आकर्षित करने का कदम? 3 अंक

उत्तर देखिए
चीज़किस वर्ग मेंकिताब क्या कहती है
आयात पर कर (पृष्ठ 64)व्यापार अवरोधकविदेश व्यापार पर रोक; सरकार इससे विदेश व्यापार बढ़ा या घटा सकती है
कोटा (पृष्ठ 64)व्यापार अवरोधकआयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा
सन् 2001 में संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटना (पृष्ठ 68)अवरोधक हटाना, यानी उदारीकरणविश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार
विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) (पृष्ठ 67)विदेशी निवेश आकर्षित करने का कदमविश्व स्तरीय सुविधाओं वाले औद्योगिक क्षेत्र; वहाँ इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं
श्रम कानूनों में लचीलापन (पृष्ठ 67)विदेशी निवेश आकर्षित करने का कदमकंपनियाँ काम का दबाव अधिक होने पर श्रमिकों को छोटी अवधि के लिए रख सकती हैं

★पृष्ठ 67 के बॉक्स में सरकार के दो कदम हैं: विशेष आर्थिक क्षेत्र, और श्रम कानूनों में लचीलापन। पाँच वर्ष की कर-छूट सेज़ वाले कदम का ही हिस्सा है, अलग कदम नहीं।

अवरोधक और उदारीकरण उलटे हैं: अवरोधक व्यापार पर रोक लगाता है, उदारीकरण वह रोक हटाता है।

भाग घ — प्रोजेक्ट और गतिविधि

1. ब्रांड जाँच (किताब की अतिरिक्त परियोजना, पृष्ठ 73)

घर में रोज़ इस्तेमाल होने वाले कुछ ब्रांडेड सामान लीजिए, जैसे साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ। हर पैकेट या लेबल पर बनाने वाली कंपनी का नाम देखिए, और पता कीजिए कि उनमें से कौन-से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बनाए हैं। तीन खानों की सूची बनाइए: सामान, कंपनी, और बहुराष्ट्रीय है या नहीं। अंत में गिनिए कि आपके घर के कितने सामान बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हैं।

2. एक उद्योग का अध्ययन (किताब की अतिरिक्त परियोजना, पृष्ठ 73)

अपनी पसंद का कोई भारतीय उद्योग या सेवा चुनिए। लोगों से बातचीत, अख़बार और पत्रिकाओं की कतरनें, किताबें, दूरदर्शन और इंटरनेट से जानकारी और फोटो जुटाइए। किताब के इन सात बिंदुओं पर लिखिए: (क) उद्योग के उत्पादक या कंपनियाँ; (ख) क्या उत्पाद दूसरे देशों को निर्यात होता है; (ग) क्या उत्पादकों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हैं; (घ) उद्योग में प्रतिस्पर्धा; (ङ) काम की परिस्थितियाँ; (च) बीते पंद्रह वर्षों में कोई बड़ा बदलाव; (छ) उद्योग में काम करने वाले लोगों की समस्याएँ।

3. बड़ों से बातचीत: पहले और अब (किताब के पहले पृष्ठ पर आधारित, पृष्ठ 55)

किताब अध्याय की शुरुआत इस बात से करती है कि दो दशक पहले भारत के बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं थी। घर या पड़ोस के दो-तीन बड़ों से बात कीजिए, और किसी का नाम मत लिखिए। पूछिए कि उनकी किशोर उम्र में मोबाइल फ़ोन, कारें, टेलीविज़न, जूते या खिलौने किन ब्रांडों के मिलते थे, और कितने विकल्प थे। फिर आज की किसी दुकान से तुलना कीजिए। एक तालिका बनाइए: वस्तु, तब के विकल्प, अब के विकल्प। नीचे दो पंक्तियाँ लिखिए कि यह बदलाव अध्याय की किन बातों से जुड़ता है।

4. लेबल पर देश (किताब के खिलौनों वाले उदाहरण पर आधारित, पृष्ठ 60)

किताब बताती है कि एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली थी। आप अपने घर के दस सामान लीजिए, जैसे खिलौने, कपड़े, बिजली का सामान और बर्तन, और हर एक के लेबल पर देखिए कि वह किस देश में बना है। लेबल पर देश न लिखा हो, तो वह भी लिखिए। एक तालिका बनाइए, और गिनिए कि कितने सामान भारत में बने हैं और कितने बाहर। फिर लिखिए कि इससे आपके घर का बाज़ार दूसरे देशों से कैसे जुड़ा दिखता है।

5. एक कमीज़ का सफ़र (किताब की गतिविधि पर आधारित, पृष्ठ 57)

किताब पृष्ठ 57 पर ‘मेड इन थाइलैण्ड’ लेबल वाली एक कमीज़ की बात करती है, और पूछती है कि वस्त्र का उत्पादन विश्व भर में कैसे फैला है। किताब का संकेत है कि कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है। विश्व के एक रेखा-मानचित्र पर कमीज़ बनने का पूरा सफ़र दिखाइए: सूत, बुनाई और रंगाई, बटन और ज़िप, सिलाई, और बिक्री। हर चरण के लिए एक देश चुनिए और तीर से जोड़िए। हर तीर के पास एक शब्द में लिखिए कि वह चरण वहीं क्यों हुआ होगा, जैसे सस्ता श्रम या बाज़ार से निकटता। केस 1 वाली कंपनी आपके लिए नमूना है।

अपना उत्तर ख़ुद जाँचिए

आपके उत्तर मेंतो
किताब का उदाहरण या आँकड़ा सही उठाया, उससे निष्कर्ष निकाला और अपना कारण लिखाउत्तर पूरा है।
उदाहरण लिखा, पर यह नहीं लिखा कि उससे क्या पता चलता हैहर उदाहरण के बाद एक पंक्ति जोड़िए कि उससे अध्याय की कौन-सी बात सिद्ध होती है।
विदेश व्यापार और विदेशी निवेश को एक ही बात मान लियाव्यापार में वस्तुएँ देशों के बीच ख़रीदी-बेची जाती हैं; निवेश में बहुराष्ट्रीय कंपनी परिसंपत्तियों में पैसा लगाती है। भाग ग का प्रश्न 1 फिर से कीजिए।
लिख दिया कि वैश्वीकरण में लोगों का आवागमन सबसे तेज़ बढ़ाप्रतिबंधों के कारण लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा; तेज़ आवागमन वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का है (पृष्ठ 62)।
! विदेशी निवेश आकर्षित करने के तीन कदम गिना दिए, या लिख दिया कि सेज़ में कभी कर नहीं लगतापृष्ठ 67 के बॉक्स में दो कदम हैं: विशेष आर्थिक क्षेत्र और श्रम कानूनों में लचीलापन। कर की छूट सेज़ का हिस्सा है, और केवल आरंभिक पाँच वर्षों तक। भाग ग का प्रश्न 3 फिर से देखिए।