कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 55 से 73
यह पन्ना किसलिए — पढ़ाने से पहले अध्याय पर अपनी पकड़ पक्की करने के लिए: अध्याय का तर्क, अध्याय के आँकड़े, किताब की परिभाषाएँ, प्रश्नावली के उत्तर, और वे जगहें जहाँ बच्चे अकसर भटकते हैं। कक्षा में किस कालांश में क्या करना है, वह पाठ योजना में है।
सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। किताब की पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ-संख्या के साथ दी गई हैं। जो बात किताब की नहीं, हमारी अपनी है, उसके साथ “हमारी ओर से” लिखा है।
अध्याय की पकड़
अध्याय का तर्क — किताब किस क्रम में सोचती है
अध्याय बाज़ार से शुरू होता है और फिर चार हिस्सों में आगे बढ़ता है। पहले किताब दिखाती है कि उत्पादन अब एक देश में नहीं रहा: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कई देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती हैं और निवेश, साझेदारी, खरीद और ऑर्डर से दूर-दूर का उत्पादन जोड़ती हैं। फिर विदेश व्यापार आता है, जो बाज़ारों को जोड़ता है (चीनी खिलौने)। इन दोनों को मिलाकर किताब वैश्वीकरण की परिभाषा देती है, और पूछती है कि यह संभव कैसे हुआ: प्रौद्योगिकी, उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन। आख़िर में हिसाब: किसे लाभ मिला, किस पर मार पड़ी (रवि, सुशीला), और वैश्वीकरण न्यायसंगत कैसे बने।
अध्याय के चार हिस्से
किताब के दो वाक्य इस अध्याय की धुरी हैं:
- “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।” (पृष्ठ 66)
- “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।” (पृष्ठ 70)
हमारी ओर से — पहला वाक्य अध्याय का मोड़ है: पृष्ठ 66 तक किताब बताती है कि वैश्वीकरण क्या है और कैसे हुआ; इस वाक्य के बाद वह पूछती है कि इसका असर किस पर कैसा पड़ा। बच्चे इस मोड़ को पकड़ लें, तो प्रश्न 6 और 10 जैसे बड़े प्रश्न अपने आप दो हिस्सों में बँट जाते हैं।
हमारी ओर से — दूसरा वाक्य अध्याय का निष्कर्ष है: किताब वैश्वीकरण को रोकने की बात नहीं करती; वह पूछती है कि इसका लाभ सब तक कैसे पहुँचे। इसीलिए हर बड़े उत्तर का आख़िरी हिस्सा आगे का रास्ता होता है।
अध्याय के आँकड़े — तथ्य एक नज़र में
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और व्यापार
| आँकड़ा | किसका | पृष्ठ |
|---|---|---|
| दो दशक पहले | बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं थी | 55 |
| बीसवीं शताब्दी के मध्य तक | उत्पादन मुख्यतः देशों की सीमाओं के अंदर | 56 |
| लगभग 50–60 प्रतिशत | कई देशों में उत्पादन फैलाने से कंपनी की लागत में बचत | 57 |
| चार · 50 लाख पैकेट प्रतिदिन | परख फूड्स के तेल शोधक केन्द्र, अब कारगिल के पास · कारगिल की निर्माण क्षमता | 58 |
| 6500 रु. | विकासशील देशों में बनी जीन्स की अमेरिका में कीमत (तस्वीर का परिचय) | 58 |
| 26 देश · 1995 · 1,700 करोड़ रुपए | फोर्ड मोटर्स का फैलाव · भारत आने का साल · चेन्नई के निकट निवेश | 59 |
| वर्ष 2017 तक 88,000 · 1,81,000 | भारत में बिक रही फोर्ड की कारें · भारत से निर्यात हुई कारें | 59 |
| 70–80 प्रतिशत | खिलौने की दुकानें, जिनमें एक वर्ष में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ली | 60 |
वैश्वीकरण के कारक और नीतियाँ
| आँकड़ा | किसका | पृष्ठ |
|---|---|---|
| दो-तीन दशक | जब से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उत्पादन के लिए सस्ती जगहें खोज रही हैं | 61 |
| पचास वर्ष | जिनमें परिवहन प्रौद्योगिकी में बहुत उन्नति हुई | 62 |
| 1950 और 1960 के दशक | उद्योगों का उदय; आयात पर प्रतिबंध | 64 |
| सन् 1991 | करीब इसके प्रारंभ से नीतियों में दूरगामी परिवर्तन | 64 |
| लगभग 160 | विश्व व्यापार संगठन के सदस्य देश | 65 |
| एक प्रतिशत · 0.5 प्रतिशत | अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा · कुल रोज़गार में कृषि का हिस्सा | 65 |
| 20 वर्ष | जिनमें बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया | 66 |
| पाँच वर्ष | सेज़ में कंपनियों को आरंभ में कोई कर नहीं | 67 |
छोटे उत्पादक और श्रमिक
| व्यक्ति या समूह | क्या हुआ | पृष्ठ |
|---|---|---|
| रवि, होसुर (तमिलनाडु) | 1992 में संधारित्र की कंपनी; तीन वर्षों में 20 कर्मचारी; 2001 में आयात से प्रतिबंध हटे; अब उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम, सात श्रमिक | 68 |
| लघु और मध्यम उद्योग | 11 करोड़ श्रमिक, कृषि के बाद सबसे अधिक | 68 |
| सुशीला, दिल्ली | 35 वर्ष; 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में फैक्ट्री बंद; अब घर से 30 कि.मी. दूर अस्थायी काम; सुबह 7.30 से शाम 10 बजे, सातों दिन | 69 |
| हांगकांग | 2005 में विश्व व्यापार संगठन के खिलाफ़ प्रदर्शन (तस्वीर का परिचय) | 71 |
ध्यान दीजिए:
- 50–60 प्रतिशत बचत को किताब संभावना के रूप में कहती है: ये चीज़ें लागत का लगभग 50–60 प्रतिशत “बचत कर सकती हैं”। इसे पक्का आँकड़ा बनाकर मत लिखवाइए।
- जीन्स के 6500 रु. और हांगकांग का 2005 तस्वीरों के परिचय में हैं, पाठ में नहीं। इन पर सवाल बनाने से बचिए।
- फोर्ड के सारे आँकड़े किताब के ही काल में पढ़ाइए: “वर्ष 2017 तक”। किताब इसी बॉक्स में यह भी बताती है कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारें बनाना बंद कर दिया है, पर कारों और इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है।
- विश्व व्यापार संगठन के सदस्य किताब में “लगभग 160” हैं। उत्तर में यही लिखवाइए।
- कुछ शब्द ग़लत छपे हैं; कॉपी में सही रूप लिखवाइए: पृष्ठ 61 पर “सिलेसिलाए” (सिले-सिलाए), और पृष्ठ 67 पर “सुंदरम फास्नर्स” (सुंदरम फास्टनर्स)। प्रश्न 12 में “इंफोसिस रैनबैक्सी” के बीच अल्पविराम नहीं छपा; ये दो अलग कंपनियाँ हैं।
मुख्य शब्द — किताब की परिभाषाएँ
| शब्द | किताब क्या कहती है | पृष्ठ |
|---|---|---|
| बहुराष्ट्रीय कंपनी | “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” | 56 |
| निवेश | भूमि, भवन, मशीन और दूसरे उपकरणों जैसी परिसंपत्तियों की खरीद में लगाया गया पैसा | 57 |
| विदेशी निवेश | “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।” | 57 |
| संयुक्त उत्पादन | बहुराष्ट्रीय कंपनी स्थानीय कंपनी के साथ मिलकर उत्पादन करती है और उसे अतिरिक्त निवेश के लिए धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी देती है | 57 |
| विदेश व्यापार | देशों के बीच वस्तुओं की खरीद-बिक्री; उत्पादक को अपने देश से बाहर के बाज़ार और ख़रीदार को अधिक विकल्प | 59 |
| बाज़ारों का एकीकरण | व्यापार से दो देशों के बाज़ार जुड़ जाते हैं: एक ही वस्तु का मूल्य दोनों में एक समान होने लगता है और उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं | 61 |
| वैश्वीकरण | “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” | 62 |
| व्यापार अवरोधक | व्यापार पर लगी रोक, जैसे आयात पर कर | 64 |
| कोटा | आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या पर सरकार की सीमा | 64 |
| उदारीकरण | “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।” | 64 |
| विश्व व्यापार संगठन | “विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू. टी. ओ.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।” | 65 |
| विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़) | केन्द्र और राज्य सरकारों के बनाए औद्योगिक क्षेत्र, जिनमें विश्व स्तर की सुविधाएँ हों; वहाँ इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं | 67 |
| श्रम कानूनों में लचीलापन | कंपनियों को अनेक नियमों से छूट: काम का दबाव हो तो श्रमिकों को छोटी अवधि के लिए रखना | 67 |
| न्यायसंगत वैश्वीकरण | सबके लिए अवसर, और वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी | 70 |
आगे की कक्षाओं और दूसरे विषयों से जोड़
- पिछला अध्याय, मुद्रा और साख। रवि ने अपनी कंपनी बैंक से ऋण लेकर शुरू की थी (पृष्ठ 68), और पृष्ठ 68 का कार्यकलाप कहता है कि छोटे उत्पादकों को उचित ब्याज दर पर समय पर साख चाहिए। मुद्रा और साख की संदर्शिका की औपचारिक और अनौपचारिक साख वाली बात यहाँ सीधे काम आती है।
- अध्याय 1, विकास। सेज़ के विरोध वाले प्रश्न (पृष्ठ 67) में वही बात लौटती है कि एक का विकास दूसरे के लिए विध्वंसक हो सकता है। विकास की संदर्शिका देखिए।
- अध्याय 2, भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक। सुशीला का स्थायी से अस्थायी काम पर आना (पृष्ठ 69) संगठित और असंगठित क्षेत्रक के अंतर का जीता-जागता उदाहरण है। क्षेत्रक की संदर्शिका देखिए।
- हमारी ओर से — इतिहास की घंटी से। किताब ख़ुद (पृष्ठ 59) याद दिलाती है कि ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियाँ व्यापार के लिए भारत आई थीं। इतिहास में व्यापार से देशों के जुड़ने की बात पढ़ चुके बच्चों से यहीं पूछिए कि तब और अब के जुड़ाव में क्या फ़र्क है (पृष्ठ 61 का पहला सवाल)।
किताब की प्रश्नावली के उत्तर
पृष्ठ 57 का कार्यकलाप — मेड इन थाइलैण्ड वाली कमीज़
किताब की बात (पृष्ठ 57): बहुराष्ट्रीय कंपनी उत्पादन वहाँ करती है जहाँ बाज़ार पास हो, कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले, और उत्पादन के दूसरे कारक उपलब्ध हों। कार्यकलाप एक “मेड इन थाइलैण्ड” लेबल वाली कमीज़ लेता है; पहला कदम किताब ख़ुद बताती है कि कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है।
1. कथन पूरा करके दिखाइए कि वस्त्र उद्योग में उत्पादन विश्व भर में कैसे फैला है।
नमूना उत्तर — यहाँ कोई एक तय उत्तर नहीं है; बस हर चरण अलग देश में दिखाना है। एक संभव पूर्ति: कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है, किसी दूसरे देश में उसकी बुनाई और रंगाई करा सकती है, बटन और ज़िप किसी तीसरे देश से मँगा सकती है, और अंत में सिलाई थाइलैण्ड में कराकर लेबल लगा सकती है। हर चरण वहाँ होता है जहाँ वह सबसे अच्छा और सस्ता हो।
पृष्ठ 59 का कार्यकलाप — फोर्ड मोटर्स के सात सवाल
किताब की बात (पृष्ठ 59): फोर्ड मोटर्स 26 देशों में फैली अमेरिकी कंपनी है। वह 1995 में भारत आई और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश करके संयंत्र लगाया। वर्ष 2017 तक भारत में उसकी 88,000 कारें बिक रही थीं, और भारत में बनी 1,81,000 कारें दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात हुईं।
1. क्या फोर्ड मोटर्स बहुराष्ट्रीय कंपनी है? क्यों?
नमूना उत्तर — हाँ। वह 26 देशों में फैली है और भारत में भी उसका संयंत्र है, यानी वह एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।
2. विदेशी निवेश क्या है? फोर्ड ने भारत में कितना निवेश किया था?
नमूना उत्तर — बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किया गया निवेश विदेशी निवेश कहलाता है। फोर्ड ने चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश किया था।
3. भारत में संयंत्र लगाकर फोर्ड जैसी कंपनियाँ विशाल बाज़ार और कम उत्पादन लागत, दोनों का लाभ कैसे उठाती हैं?
नमूना उत्तर — बाज़ार: भारत में ख़रीदार बहुत हैं; वर्ष 2017 तक फोर्ड यहाँ 88,000 कारें बेच रही थी। कम लागत: कंपनियाँ वहाँ उत्पादन करती हैं जहाँ कम लागत पर श्रम और दूसरे संसाधन मिलें और पुर्ज़े देने वाले स्थानीय विनिर्माता पास हों; इसीलिए भारत में बनी 1,81,000 कारें चार देशों को निर्यात हुईं। भारत उसका बाज़ार भी है और सस्ता उत्पादन केन्द्र भी।
4. कंपनी भारत को कार-पुर्ज़ों के विनिर्माण केन्द्र के रूप में क्यों विकसित करना चाहती है? (अ) श्रम और दूसरे संसाधनों की लागत (ब) पुर्ज़े देने वाले स्थानीय विनिर्माता (स) भारत और चीन के ग्राहकों से निकटता
नमूना उत्तर —
- अश्रम और संसाधन कम लागत पर मिलें तो पुर्ज़े सस्ते बनते हैं।
- बपुर्ज़े देने वाले स्थानीय विनिर्माता पहले से हों तो आपूर्ति पास और सस्ती मिलती है।
- सभारत और चीन में ग्राहक बहुत हैं; उनके पास उत्पादन हो तो माल जल्दी और कम ढुलाई में पहुँचता है। तीनों मिलकर लागत घटाते हैं।
5. भारत में फोर्ड द्वारा कारों के निर्माण से उत्पादन किस प्रकार परस्पर संबंधित होगा?
नमूना उत्तर — भारतीय संयंत्र महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से बना और स्थानीय विनिर्माता इसे पुर्ज़े देते हैं। यहाँ बनी कारें दूसरे देशों को और कार-पुर्ज़े विश्व भर में फोर्ड के कारखानों को जाते हैं। इस तरह भारत का उत्पादन दूसरे देशों के उत्पादन और बाज़ारों से जुड़ जाता है।
6. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरी कंपनियों से किस प्रकार अलग हैं?
नमूना उत्तर — साधारण कंपनी प्रायः एक देश में उत्पादन करती है; बहुराष्ट्रीय कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती है। उसके पास अपार संपदा होती है, और वह दूर के उत्पादकों के लिए मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय कर सकती है।
7. लगभग सभी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अमेरिका, जापान या यूरोप की हैं। ऐसा क्यों हो सकता है?
नमूना उत्तर (बच्चों के अनुमान अलग हो सकते हैं) — दूसरे देशों में कारखाने लगाने, स्थानीय कंपनियाँ खरीदने और नवीनतम प्रौद्योगिकी लाने के लिए अपार धन चाहिए, जो विकसित देशों की बड़ी कंपनियों के पास है। ये देश पहले विकसित हुए, इसलिए इनकी कंपनियाँ पहले बड़ी हुईं।
पृष्ठ 61 का कार्यकलाप — व्यापार, निवेश और चीन का इस्पात
किताब की बात (पृष्ठ 59–61): लंबे समय तक विदेश व्यापार ही देशों को जोड़ने का मुख्य माध्यम रहा। व्यापार से उत्पादक को बाहर के बाज़ार और ख़रीदार को अधिक विकल्प मिलते हैं, और दोनों देशों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। चीनी खिलौनों का उदाहरण यही दिखाता है।
1. अतीत में देशों को जोड़ने वाला मुख्य माध्यम क्या था? अब यह अलग कैसे है?
नमूना उत्तर — अतीत में विदेश व्यापार; ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियाँ व्यापार के लिए ही भारत आईं। अब व्यापार के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कई देशों में फैला उत्पादन और विदेशी निवेश भी देशों को जोड़ते हैं, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इन्हीं कंपनियों के नियंत्रण में है।
2. विदेश व्यापार और विदेशी निवेश में अंतर बताइए।
नमूना उत्तर — विदेश व्यापार देशों के बीच वस्तुओं की खरीद-बिक्री है। विदेशी निवेश बहुराष्ट्रीय कंपनियों का दूसरे देश में भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों में लगाया पैसा है, इस आशा से कि ये लाभ कमाएँगी।
3. चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है। इसका (क) चीन की इस्पात कंपनियों (ख) भारत की इस्पात कंपनियों (ग) चीन में इस्पात खरीदने वाले उद्योगों पर क्या असर होगा?
नमूना उत्तर — (क) उन्हें अपने ही बाज़ार में भारतीय इस्पात से प्रतिस्पर्धा करनी होगी। (ख) उन्हें चीन का बड़ा बाज़ार मिलेगा और बिक्री बढ़ेगी। (ग) उनके पास अधिक विकल्प होंगे और वे सस्ता इस्पात चुनकर लागत घटा सकेंगे।
4. यह आयात दोनों देशों के इस्पात बाज़ारों के एकीकरण में कैसे मदद करेगा?
नमूना उत्तर — चीन के ख़रीदार दोनों देशों के इस्पात में से चुनेंगे, दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे, और दोनों बाज़ारों में इस्पात का मूल्य एक समान होने लगेगा। दो बाज़ार एक-दूसरे से जुड़ जाएँगे।
पृष्ठ 62 का कार्यकलाप — देश कैसे जुड़ते हैं
किताब की बात (पृष्ठ 61–62): पिछले दो-तीन दशकों से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सस्ते उत्पादन की जगहें खोज रही हैं, विदेशी निवेश बढ़ा है, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इनके नियंत्रण में है। देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ा है, पर लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा।
1. वैश्वीकरण में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की क्या भूमिका है?
नमूना उत्तर — मुख्य भूमिका। वे सस्ती जगहें खोजकर कई देशों में उत्पादन फैलाती हैं, विदेशी निवेश करती हैं, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा उनके नियंत्रण में है।
2. देशों को किन तरीकों से परस्पर जोड़ा जा सकता है?
नमूना उत्तर — विदेश व्यापार, विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान, और लोगों का आवागमन (जो प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा)।
3. देशों के जुड़ने से उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होगी, अधिक होगी, या नहीं बदलेगी?
नमूना उत्तर — अधिक होगी। जुड़े हुए बाज़ारों में दूर के देशों के उत्पादक भी आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं।
पृष्ठ 63 का कार्यकलाप — लंदन की पत्रिका
किताब की बात (पृष्ठ 62–63): वैश्वीकरण को तेज़ करने वाला मुख्य कारक प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति है: परिवहन, कंटेनर और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी। बॉक्स में लंदन की एक पत्रिका है, जिसका डिज़ाइन और छपाई दिल्ली में होती है।
1. बॉक्स में उत्पादन में प्रौद्योगिकी के प्रयोग वाले शब्द रेखांकित कीजिए।
नमूना उत्तर — इंटरनेट (पाठ भेजना), दूरसंचार सुविधाएँ (डिज़ाइन के निर्देश), कंप्यूटर (डिज़ाइन तैयार करना), वायुमार्ग (पत्रिकाएँ भेजना), और इंटरनेट से ई-बैंकिंग (भुगतान)।
2. सूचना प्रौद्योगिकी वैश्वीकरण से कैसे जुड़ी है? क्या इसके बिना वैश्वीकरण संभव होता?
नमूना उत्तर — इससे विश्व भर में संपर्क करना और सूचनाएँ तुरंत पाना आसान हुआ, कंपनियाँ कई देशों में फैले उत्पादन को चला पाती हैं, और कॉल सेंटर या पत्रिका के डिज़ाइन जैसी सेवाएँ दूर के देशों को दी जा सकती हैं। इसके बिना वैश्वीकरण, ख़ासकर सेवाओं का, इस गति और पैमाने पर संभव नहीं होता।
पृष्ठ 64 का कार्यकलाप — उदारीकरण और कोटा
किताब की बात (पृष्ठ 64): आयात पर कर एक व्यापार अवरोधक है, और कोटा आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या पर सीमा है। करीब सन् 1991 के प्रारंभ से भारत में अवरोध काफ़ी हद तक हटाए गए।
1. विदेश व्यापार के उदारीकरण से आप क्या समझते हैं?
नमूना उत्तर — सरकार द्वारा विदेश व्यापार पर लगे अवरोध या प्रतिबंध, जैसे आयात पर कर और कोटा, हटाना। व्यवसायी मुक्त रूप से तय करते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें, और सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है।
2. चीन के खिलौनों के उदाहरण से समझाइए कि कोटा का प्रयोग व्यापार अवरोधक के रूप में कैसे हो सकता है। क्या ऐसा होना चाहिए?
नमूना उत्तर — सरकार तय कर सकती है कि एक वर्ष में चीन से केवल एक सीमित संख्या में खिलौने आयात हों; बाकी माँग भारतीय निर्माताओं से पूरी होगी। पक्ष में: भारतीय निर्माताओं और उनके श्रमिकों को संरक्षण मिलता है, और किताब भी कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार अवरोधकों का उपयोग कर सकती है। विपक्ष में: ख़रीदारों के विकल्प घटेंगे और भारतीय निर्माताओं पर गुणवत्ता सुधारने का दबाव कम रहेगा। बच्चा कोई भी पक्ष ले, कारण के साथ ले।
पृष्ठ 66 का कार्यकलाप — विश्व व्यापार संगठन और न्यायसंगत व्यापार
किताब की बात (पृष्ठ 65): विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ, व्यापार के नियम बनाता है और उनका पालन देखता है। व्यवहार में विकसित देशों ने अपने अवरोधक बनाए रखे, जबकि विकासशील देशों को अवरोधक हटाने पड़े; अमेरिका अपने किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए भारी धन देता है।
1. रिक्त स्थान भरिए (विश्व व्यापार संगठन वाला अनुच्छेद)।
नमूना उत्तर — क्रम से: विकसित; अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना; अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार; इन नियमों का पालन हो; न्यायसंगत (मुक्त); व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए विवश हुआ।
2. देशों के बीच अधिक न्यायसंगत व्यापार के लिए क्या किया जा सकता है?
नमूना उत्तर — विश्व व्यापार संगठन के नियम सब देशों पर बराबर लागू हों; विकसित देश भी अपने अवरोधक घटाएँ और अपने उत्पादकों को ऐसी भारी सहायता न दें जिससे उनकी सस्ती उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाए; विकासशील देश मिलकर न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते करें।
3. सरकार कभी-कभी पर्यावरण के अनुकूल वस्तुओं के उत्पादन के लिए सहायता देती है। यह न्यायसंगत है या नहीं?
नमूना उत्तर (चर्चा का प्रश्न) — न्यायसंगत मानने का तर्क: पर्यावरण की रक्षा से सबका भला होता है, और नई वस्तुओं के उत्पादकों को शुरू में सहारा चाहिए। अन्यायपूर्ण मानने का तर्क: सहायता इतनी बड़ी हो कि वे वस्तुएँ दूसरे देशों में बहुत सस्ते में बिककर वहाँ के उत्पादकों को नुकसान पहुँचाएँ, तो असर अमेरिकी कृषि सहायता जैसा ही होगा। संतुलित मत: सहायता तब न्यायसंगत है जब उसका उद्देश्य सचमुच पर्यावरण हो और वह छिपा अवरोधक न बने।
पृष्ठ 67 का कार्यकलाप — प्रतिस्पर्धा, भारतीय कंपनियाँ और सेज़
किताब की बात (पृष्ठ 66–67): उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमतें मिलीं। शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाई और कुछ बहुराष्ट्रीय बन गईं। सरकार ने विदेशी निवेश के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाए और श्रम कानूनों में लचीलापन दिया।
1. प्रतिस्पर्धा से भारत के लोगों को कैसे लाभ हुआ है?
नमूना उत्तर — उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमत मिली। शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाकर अपने मानक ऊँचे किए। बहुराष्ट्रीय कंपनियों वाले उद्योगों में नये रोज़गार बने और स्थानीय आपूर्तिकर्ता समृद्ध हुए।
2. क्या और भारतीय कंपनियों को बहुराष्ट्रीय बनना चाहिए? इससे जनता को क्या लाभ होगा?
नमूना उत्तर (राय का प्रश्न) — एक तर्क: हाँ, क्योंकि ऐसी कंपनियाँ नवीनतम प्रौद्योगिकी और ऊँचे मानक अपनाती हैं और भारतीय वस्तुएँ और सेवाएँ विश्व के बाज़ारों तक पहुँचाती हैं। पर जनता को सच्चा लाभ तभी होगा जब इस बढ़त का हिस्सा श्रमिकों और छोटे उत्पादकों तक भी पहुँचे।
3. सरकारें अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने की कोशिश क्यों करती हैं?
नमूना उत्तर — विदेशी निवेश से नये उद्योग लगते हैं, नये रोज़गार बनते हैं, और कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध होती हैं। साझेदारी में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी भी लाती हैं।
4. कुछ लोगों ने सेज़ की स्थापना का विरोध किया है। ये लोग कौन हैं और क्यों विरोध कर रहे हैं?
नमूना उत्तर — यह बच्चों को पता करना है। किताब का सवाल अध्याय 1 की बात याद दिलाता है कि एक का विकास दूसरे के लिए विध्वंसक हो सकता है; इसलिए बच्चे देखें कि सेज़ बनने से किसे लाभ होता है और किसका नुकसान। बच्चे अख़बार या बड़ों से पता करें, और जो मिले उसे स्रोत के साथ लिखें।
पृष्ठ 68 का कार्यकलाप — रवि और छोटे उत्पादक
किताब की बात (पृष्ठ 68): रवि ने 1992 में होसुर में संधारित्र की कंपनी शुरू की। 2001 में आयात से प्रतिबंध हटे, उसकी कुछ ग्राहक कंपनियाँ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदने लगीं, और अब उसके पास केवल सात श्रमिक हैं। किताब के अनुसार अध्ययन बताते हैं कि छोटे उत्पादकों को बेहतर सुविधाएँ (सड़क, बिजली, पानी, कच्चा माल, विपणन और सूचना तंत्र), प्रौद्योगिकी में सुधार और उचित ब्याज दर पर समय पर साख चाहिए।
1. रवि की इकाई बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कैसे प्रभावित हुई?
नमूना उत्तर — 2001 में संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटे। बहुराष्ट्रीय ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा के कारण उसकी ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं, और उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदने लगीं। रवि का उत्पादन वर्ष 2000 के आधे से भी कम रह गया। शुरू के तीन वर्षों में उसकी कंपनी में 20 कर्मचारी काम करने लगे थे; अब केवल सात श्रमिक काम कर रहे हैं।
2. लागत अधिक होने के कारण क्या रवि जैसे उत्पादकों को उत्पादन रोक देना चाहिए?
नमूना उत्तर (राय का प्रश्न) — नहीं। लघु और मध्यम उद्योगों में कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक, 11 करोड़, काम करते हैं; इकाइयाँ बंद हों तो बहुत लोग बेरोज़गार होंगे। किताब कहती है कि सरकार छोटे उत्पादकों की तब तक मदद कर सकती है जब तक वे प्रतिस्पर्धा में सक्षम न हो जाएँ।
3. तीन ज़रूरतें छोटे उत्पादकों की कैसे मदद करेंगी, क्या बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इनमें निवेश करेंगी, सरकार की क्या भूमिका है, और एक उपाय सुझाइए।
नमूना उत्तर — मदद: अच्छी सुविधाओं से उत्पादन और ढुलाई की लागत घटेगी, नई प्रौद्योगिकी से गुणवत्ता सुधरेगी, समय पर सस्ता ऋण मशीनें और कच्चा माल ख़रीदना आसान करेगा। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: शायद नहीं; वे वहाँ निवेश करती हैं जहाँ उन्हें लाभ हो, जैसे शहरों के संपन्न ख़रीदारों वाले क्षेत्र। सरकार: हाँ, सड़क, बिजली, पानी जैसी सुविधाएँ सबके लिए होती हैं और इन्हें सरकार ही अच्छी तरह दे सकती है। उपाय (हमारी ओर से): छोटे उद्योगों के लिए ऐसे औद्योगिक क्षेत्र जहाँ बिजली, पानी और सड़क मिलें, और बैंक उचित ब्याज पर समय से ऋण दें।
पृष्ठ 70 का कार्यकलाप — वस्त्र उद्योग और लचीलापन
किताब की बात (पृष्ठ 69): अमेरिका और यूरोप की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सबसे सस्ता माल खोजती हैं। बड़े ऑर्डर पाने के लिए भारतीय निर्यातक लागत घटाते हैं; कच्चे माल की लागत नहीं घटती, तो श्रम लागत घटाई जाती है। सुशीला स्थायी से अस्थायी श्रमिक बन गई।
1. प्रतिस्पर्धा ने वस्त्र उद्योग के श्रमिकों, भारतीय निर्यातकों और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कैसे प्रभावित किया?
नमूना उत्तर — बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ: सबसे सस्ता माल पाकर अधिक लाभ। निर्यातक: बड़े ऑर्डर के लिए लागत घटाने की कड़ी कोशिश, इसलिए श्रम लागत में कटौती। श्रमिक: स्थायी के बजाय अस्थायी रोज़गार, लंबे कार्य-घंटे, रात में काम, कम मज़दूरी।
2. लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा मिले, इसके लिए (क) सरकार (ख) निर्यातक फैक्ट्रियों के नियोक्ता (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (घ) श्रमिक क्या कर सकते हैं?
नमूना उत्तर — (क) सरकार श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन कराए। (ख) नियोक्ता लागत घटाने का सारा बोझ मज़दूरी पर न डालें; उचित मज़दूरी और अतिरिक्त समय के काम का पूरा भुगतान दें। (ग) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निर्यातकों को ऐसी कीमत दें जिसमें उचित मज़दूरी संभव हो, और देखें कि फैक्ट्रियाँ श्रम कानूनों का पालन करें। (घ) श्रमिक अपने अधिकार जानें और संगठित होकर आवाज़ उठाएँ।
3. रोज़गार में लचीलेपन पर नियोक्ताओं और श्रमिकों के पक्ष लिखिए।
नमूना उत्तर — नियोक्ता: प्रतिस्पर्धा बहुत है, विदेशी ख़रीदार सबसे सस्ता माल चाहते हैं, कच्चे माल की लागत नहीं घटती, इसलिए काम के दबाव के समय ही श्रमिक रखने से लागत कम रहती है। श्रमिक: लचीलेपन का मतलब है कि रोज़गार सुनिश्चित नहीं रहता; सुशीला से स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और दुगुनी ओवरटाइम मज़दूरी छिन गई, और कमाई आधी से भी कम हो गई।
पृष्ठ 73 की परियोजना — ब्रांड जाँच और एक उद्योग का अध्ययन
किताब की बात (पृष्ठ 73): पहली परियोजना में रोज़ के ब्रांडेड उत्पाद (साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ) लेकर पता करना है कि कौन-से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बनाए हैं। दूसरी में कोई भारतीय उद्योग या सेवा चुनकर सात बिंदुओं पर अध्ययन करना है: उत्पादक, निर्यात, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, प्रतिस्पर्धा, काम की परिस्थितियाँ, बीते पंद्रह वर्षों का कोई बड़ा बदलाव, और श्रमिकों की समस्याएँ।
1. इन परियोजनाओं को कैसे जाँचें?
नमूना उत्तर (हमारी ओर से) — दोनों के नतीजे हर जगह अलग होंगे, इसलिए किसी एक उत्तर से मिलान मत कीजिए। ब्रांड जाँच में देखिए कि सूची में उत्पाद, कंपनी का नाम और एक कॉलम यह बताए कि कंपनी बहुराष्ट्रीय है या नहीं, और कसौटी किताब की परिभाषा हो। उद्योग अध्ययन में देखिए कि सातों बिंदु हों और हर जानकारी के साथ लिखा हो कि वह किससे या कहाँ से मिली।
1 से 4 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु
प्रश्न 1 — वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं (पृष्ठ 61–62)
- देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया।
- यह जुड़ाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के फैले उत्पादन, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से होता है; बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ मुख्य भूमिका निभाती हैं।
- वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ता है; लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा।
जाँचते समय: परिभाषा के साथ किताब का एक उदाहरण हो, और लोगों के आवागमन वाली भूल न हो।
नमूना उत्तर — वैश्वीकरण का मतलब है अलग-अलग देशों का आपस में तेज़ी से जुड़ना और एक होते जाना। यह जुड़ाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कई देशों में फैले उत्पादन, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से होता है। इससे वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ता है, जबकि लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा। उदाहरण: भारत के बाज़ारों में चीन के खिलौने, और भारत में बनी फोर्ड की कारों का दूसरे देशों को निर्यात।
प्रश्न 2 — अवरोधक क्यों लगे, और क्यों हटाने चाहे (पृष्ठ 64)
- आज़ादी के बाद: देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण; 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे।
- केवल मशीनरी, उर्वरक, पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों का आयात।
- करीब सन् 1991 के प्रारंभ से: अब विश्व से प्रतिस्पर्धा का समय; प्रतिस्पर्धा से गुणवत्ता और प्रदर्शन सुधरेगा; प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों का समर्थन।
जाँचते समय: दोनों हिस्से हों, लगाने का कारण और हटाने का कारण।
नमूना उत्तर — आज़ादी के बाद सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर अवरोध लगाए, ताकि देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिले। 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे, इसलिए केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों के आयात की अनुमति थी। करीब सन् 1991 के प्रारंभ से सरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा से उन्हें अपनी गुणवत्ता सुधारनी होगी। प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों ने भी इसका समर्थन किया।
प्रश्न 3 — श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों की मदद कैसे करेगा (पृष्ठ 67, 69)
- श्रमिकों को नियमित रखने के बजाय काम का दबाव होने पर छोटी अवधि के लिए रखना।
- पूरे वर्ष वेतन नहीं, इसलिए श्रम लागत घटती है।
- कच्चे माल की लागत नहीं घटती, तो श्रम लागत घटाकर निर्यातक बड़े ऑर्डर की प्रतिस्पर्धा में टिकते हैं।
जाँचते समय: उत्तर कंपनी की ओर से हो; श्रमिक पर असर एक पंक्ति में जोड़ना अच्छा है, पूरा उत्तर उसी पर नहीं।
नमूना उत्तर — लचीलेपन से कंपनियाँ श्रमिकों को नियमित आधार पर रखने के बजाय, जब काम का दबाव अधिक हो, तब छोटी अवधि के लिए रख सकती हैं। उन्हें पूरे वर्ष वेतन नहीं देना पड़ता, इसलिए श्रम लागत घटती है। कच्चे माल की लागत घटाई नहीं जा सकती, तो श्रम लागत घटाकर ही निर्यातक विदेशी ख़रीदारों के बड़े ऑर्डर पा सकते हैं। सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए यह छूट दी है। पर श्रमिक के लिए इसका अर्थ है कि उसका रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।
प्रश्न 4 — बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों में उत्पादन पर नियंत्रण कैसे जमाती हैं (पृष्ठ 56–59)
- जगह का चुनाव: बाज़ार पास, कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम, उत्पादन के दूसरे कारक, अनुकूल सरकारी नीतियाँ।
- कारखाने लगाकर (फोर्ड, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से), स्थानीय कंपनियों से साझेदारी करके, स्थानीय कंपनियाँ खरीदकर (कारगिल और परख, सबसे आम रास्ता)।
- छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर (वस्त्र, जूते-चप्पल, खेल का सामान), और मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करके।
जाँचते समय: कम से कम तीन तरीके, हर एक के साथ किताब का उदाहरण।
नमूना उत्तर — बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसी जगहें चुनती हैं जो बाज़ार के पास हों, जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले और सरकारी नीतियाँ उनके हितों का ध्यान रखें। फिर वे चार तरीकों से उत्पादन पर नियंत्रण जमाती हैं: कारखाने लगाकर, जैसे फोर्ड ने चेन्नई के निकट महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से संयंत्र लगाया; स्थानीय कंपनियों के साथ संयुक्त उत्पादन करके, जिसमें वे अतिरिक्त निवेश के लिए धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी देती हैं; स्थानीय कंपनियाँ खरीदकर, जैसे कारगिल ने परख फूड्स को खरीदा, जो सबसे आम रास्ता है; और छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देकर, जैसे वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान में।
5 से 8 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु
प्रश्न 5 — विकसित देश उदारीकरण क्यों चाहते हैं; विकासशील देश क्या माँगें (पृष्ठ 61, 65, 70)
- उनकी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सस्ता उत्पादन और बड़े बाज़ार खोजती हैं; अवरोध हटें तो वे आसानी से निवेश कर सकती हैं, कंपनियाँ खरीद सकती हैं और माल बेच सकती हैं।
- विश्व व्यापार संगठन विकसित देशों की पहल पर बना।
- व्यवहार में विकसित देशों ने अपने अवरोधक बनाए रखे; अमेरिका अपने किसानों को भारी धन देता है।
- इसलिए विकासशील देश माँगें कि नियम सब पर बराबर लागू हों, और मिलकर न्यायसंगत नियमों के लिए लड़ें।
जाँचते समय: दूसरे हिस्से में बच्चे की अपनी राय हो, और उसका कारण किताब के अमेरिकी कृषि वाले उदाहरण से आए।
नमूना उत्तर — विकसित देशों की बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ऐसी जगहें खोजती हैं जहाँ उत्पादन सस्ता हो और बड़े बाज़ार हों। अवरोध हटें तो वे विकासशील देशों में आसानी से निवेश कर सकती हैं और अपना माल बेच सकती हैं; विश्व व्यापार संगठन भी इन्हीं देशों की पहल पर बना। हाँ, विकासशील देशों को भी बदले में माँग करनी चाहिए, क्योंकि व्यवहार में विकसित देशों ने अनुचित ढंग से अपने अवरोधक बनाए रखे हैं। अमेरिका अपने किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए भारी धन देता है, जिससे उनकी सस्ती अधिशेष उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाती है। विकासशील देश माँग करें कि नियम सब पर बराबर लागू हों।
प्रश्न 6 — वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं (पृष्ठ 66–70)
- लाभ: शहरों के धनी उपभोक्ता, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उनके स्थानीय आपूर्तिकर्ता, शीर्ष भारतीय कंपनियाँ, आई.टी. सेवा कंपनियाँ।
- मार: छोटे उत्पादक (रवि; बैटरी, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद, खाद्य तेल की इकाइयाँ), और श्रमिक (सुशीला)।
- निष्कर्ष: शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने नये अवसरों का सबसे अच्छा उपयोग किया; अनेक को लाभ में हिस्सा नहीं मिला।
जाँचते समय: दोनों पक्ष हों, और हर पक्ष में किताब का एक नाम या उदाहरण।
नमूना उत्तर — वैश्वीकरण से कुछ लोगों को बहुत लाभ हुआ और कुछ पर मार पड़ी। शहरों के धनी उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प, अच्छी गुणवत्ता और कम कीमतें मिलीं; बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ और उन्हें कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं; शीर्ष भारतीय कंपनियाँ आगे बढ़ीं और कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं। दूसरी ओर, होसुर के रवि की कंपनी सस्ते आयात के बाद आधे से कम उत्पादन और केवल सात श्रमिकों पर आ गई, और सुशीला जैसे श्रमिक स्थायी से अस्थायी हो गए। इसलिए किताब कहती है कि शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने नये अवसरों का सबसे अच्छा उपयोग किया, जबकि अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला।
प्रश्न 7 — उदारीकरण वैश्वीकरण में कैसे मदद करता है (पृष्ठ 64, 71)
- सरकार व्यापार और निवेश पर लगे अवरोध हटाती है।
- आयात-निर्यात आसान; विदेशी कंपनियाँ कार्यालय और कारखाने लगा सकती हैं; व्यवसायी ख़ुद तय करते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें।
- विदेश व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ते हैं, और यही देशों को जोड़ते हैं।
जाँचते समय: उदारीकरण की परिभाषा और उसका व्यापार व निवेश से संबंध, दोनों हों।
नमूना उत्तर — उदारीकरण में सरकार व्यापार और निवेश पर लगे अवरोध हटाती है। इससे वस्तुओं का आयात-निर्यात आसान होता है, विदेशी कंपनियाँ देश में अपने कार्यालय और कारखाने लगा सकती हैं, और व्यवसायी ख़ुद तय करते हैं कि क्या आयात या निर्यात करें। इससे विदेश व्यापार और विदेशी निवेश बढ़ते हैं, जो देशों को जोड़ते हैं। उलटा देखिए: अगर सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगाए, तो वे सस्ते नहीं रहेंगे और उनका आयात अपने आप घट जाएगा। इस तरह अवरोधक हटाकर उदारीकरण ने वैश्वीकरण को सुगम बनाया है।
प्रश्न 8 — विदेश व्यापार बाज़ारों को कैसे जोड़ता है, दूसरे उदाहरण से (पृष्ठ 59–61)
- उत्पादक को अपने देश से बाहर के बाज़ार, ख़रीदार को अधिक विकल्प।
- दोनों देशों के उत्पादक आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं, और एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है।
- दूसरा उदाहरण खिलौनों से अलग हो। बच्चे अपने आसपास के बाज़ार से उदाहरण लें; पृष्ठ 61 के कार्यकलाप वाला उदाहरण भी चलेगा: चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है।
जाँचते समय: प्रश्न खिलौनों से अलग उदाहरण माँगता है; खिलौने ही दोहराए हों तो उत्तर अधूरा है।
नमूना उत्तर — व्यापार खुलने से वस्तुएँ एक देश के बाज़ार से दूसरे देश के बाज़ार में जाती हैं। उत्पादक को बाहर के बाज़ार मिलते हैं, ख़रीदारों के विकल्प बढ़ते हैं, दोनों देशों के उत्पादक एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, और दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का मूल्य एक समान होने लगता है। उदाहरण: चीन भारत से इस्पात आयात कर रहा है। भारत की इस्पात कंपनियों को चीन का बाज़ार मिलता है, चीन के उद्योगों के पास चीनी और भारतीय इस्पात में से चुनने का विकल्प होता है, चीन की इस्पात कंपनियों को भारतीय इस्पात से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है, और दोनों देशों में इस्पात का मूल्य एक जैसा होने लगता है।
9 से 11 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु
प्रश्न 9 — बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा (पृष्ठ 62–64, 70)
- यह बच्चे की अपनी कल्पना का प्रश्न है; कारण अध्याय से आएँ।
- जिन कारकों ने वैश्वीकरण बढ़ाया (प्रौद्योगिकी, उदारीकरण, विश्व व्यापार संगठन के नियम), वे चलते रहे तो देश और अधिक जुड़े होंगे।
- वह दुनिया सबके लिए अच्छी होगी या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि वैश्वीकरण कितना न्यायसंगत बनता है।
जाँचते समय: कल्पना कोई भी हो, पर हर अनुमान के साथ अध्याय का एक कारण हो।
नमूना उत्तर (बच्चों के उत्तर अलग होंगे) — जिन कारकों ने वैश्वीकरण को आगे बढ़ाया, यानी प्रौद्योगिकी में तीव्र उन्नति, व्यापार और निवेश का उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन के नियम, वे चलते रहे तो बीस वर्ष बाद देश और अधिक जुड़े होंगे। वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ेगा, और सूचना प्रौद्योगिकी से और ज़्यादा सेवाएँ दूर देशों से दी जाएँगी। पर यह दुनिया सबके लिए अच्छी तभी होगी जब सरकारें सबके हितों की रक्षा करें, श्रम कानूनों का पालन हो और छोटे उत्पादकों को मदद मिले।
प्रश्न 10 — दो लोगों का तर्क: वैश्वीकरण से क्षति या सहायता (पृष्ठ 66–71)
- दोनों की बात आधी सही है, क्योंकि असर एक समान नहीं पड़ा।
- सहायता: उपभोक्ताओं को विकल्प, नये रोज़गार, शीर्ष कंपनियों की बढ़त, आई.टी. सेवाओं के अवसर।
- क्षति: छोटे उत्पादकों की इकाइयाँ बंद, श्रमिकों का रोज़गार अस्थायी और असुरक्षित।
- रास्ता: वैश्वीकरण को न्यायसंगत बनाना, किताब के पाँच उपाय।
जाँचते समय: तीनों हिस्से हों: सहायता, क्षति, और आगे का रास्ता।
नमूना उत्तर — मैं दोनों से कहूँगा कि आपकी बात आधी सही है, क्योंकि वैश्वीकरण का असर सब पर एक समान नहीं पड़ा। उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प और कम कीमतें मिलीं, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश से नये रोज़गार बने, शीर्ष भारतीय कंपनियाँ आगे बढ़ीं और आई.टी. सेवाओं के लिए नये अवसर बने। पर बढ़ी प्रतिस्पर्धा से रवि जैसे अनेक छोटे उत्पादकों की इकाइयाँ बंद हुईं और सुशीला जैसे श्रमिकों का रोज़गार असुरक्षित हो गया। इसलिए वैश्वीकरण को रोकने के बजाय उसे न्यायसंगत बनाना चाहिए: सरकार सबके हितों की रक्षा करे, श्रम कानूनों का पालन कराए, छोटे उत्पादकों की तब तक मदद करे जब तक वे सक्षम न हों, ज़रूरत पर व्यापार अवरोधक लगाए, और विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए लड़े।
प्रश्न 11 — रिक्त स्थान (पृष्ठ 59–61, 66)
- वैश्वीकरण
- विदेश व्यापार
- भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है
- विदेश व्यापार
- विदेशी निवेश
- प्रतिस्पर्धा
जाँचते समय: तीसरा खाली स्थान एक शब्द नहीं, एक वाक्यांश है; बच्चे केवल लाभ शब्द भर दें तो भाव ठीक है, पर पूरा वाक्यांश लिखवाइए।
नमूना उत्तर — क्रम से: वैश्वीकरण; विदेश व्यापार; भारत में निवेश करना उनके लिए लाभप्रद रहा है; विदेश व्यापार; विदेशी निवेश; प्रतिस्पर्धा। चौथी और पाँचवीं ख़ाली जगह का क्रम उलट जाए (विदेशी निवेश; विदेश व्यापार), तो भी उत्तर ठीक है।
12 और 13 के प्रश्न — कुंजी और कारण
| प्रश्न | सही उत्तर | कारण |
|---|---|---|
| 12 (क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों पर खरीदती हैं | (ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान | पृष्ठ 58 |
| 12 (ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग व्यापार नियमन के लिए | (य) व्यापार अवरोधक | पृष्ठ 64 |
| 12 (ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ | (द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी | पृष्ठ 67; दो कंपनियों के बीच अल्पविराम नहीं छपा |
| 12 (घ) आई.टी. ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की | (स) कॉल सेंटर | पृष्ठ 56, 67 |
| 12 (ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन के लिए निवेश किया | (अ) मोटर गाड़ियों | फोर्ड मोटर्स, पृष्ठ 59, 66 |
| 13 (अ) द्रुत आवागमन | (ख) वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का | लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा, पृष्ठ 62 |
| 13 (आ) निवेश का सबसे सामान्य मार्ग | (ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना | पृष्ठ 58 |
| 13 (इ) जीवन-स्तर में सुधार | (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं | लाभ सबको नहीं मिला; विकासशील देशों के श्रमिकों का रोज़गार असुरक्षित हुआ, पृष्ठ 69–71 |
कक्षा में
बच्चे कहाँ भटकते हैं — आठ आम भूलें
1. भूल: वैश्वीकरण में लोगों का आवागमन तेज़ी से बढ़ा है। सही बात: वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश और प्रौद्योगिकी तेज़ी से गए; लोगों का आवागमन प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा (पृष्ठ 62)।
2. भूल: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ ज़्यादातर नये कारखाने लगाकर आती हैं। सही बात: निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और फिर उत्पादन फैलाना है (पृष्ठ 58)।
3. भूल: विदेश व्यापार और विदेशी निवेश एक ही बात है। सही बात: व्यापार में वस्तुएँ देशों के बीच खरीदी-बेची जाती हैं; निवेश में कंपनी दूसरे देश में परिसंपत्तियों पर पैसा लगाती है (पृष्ठ 57, 59)।
4. भूल: कोटा का मतलब आयात पर कर है। सही बात: कोटा आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या की सीमा है; आयात पर कर अलग अवरोधक है (पृष्ठ 64)।
5. भूल: उदारीकरण में सरकार सारा नियंत्रण छोड़ देती है। सही बात: अवरोध और प्रतिबंध हटते हैं, और सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है (पृष्ठ 64)।
6. भूल: विश्व व्यापार संगठन विकासशील देशों की पहल पर बना। सही बात: यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ (पृष्ठ 65)।
7. भूल: श्रम कानूनों में लचीलापन श्रमिकों के फ़ायदे के लिए है। सही बात: यह कंपनियों की श्रम लागत घटाने के लिए है; श्रमिक के लिए इसका अर्थ है कि रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं (पृष्ठ 67, 69)।
8. भूल: वैश्वीकरण से सबका जीवन स्तर सुधरा है। सही बात: लाभ धनी उपभोक्ताओं और कुशल, शिक्षित, संपन्न लोगों को मिला; अनेक छोटे उत्पादक और श्रमिक प्रभावित हुए (पृष्ठ 66, 70)।
किताब की पंक्तियाँ जो उत्तर में काम आती हैं
ये पंक्तियाँ रटवाने के लिए नहीं हैं। पहले बात समझाइए, फिर उत्तर में यह पंक्ति लिखवाइए; किताब के अपने शब्द उत्तर को सधा हुआ बनाते हैं।
| पंक्ति | पृष्ठ | कहाँ काम आती है |
|---|---|---|
| “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” | 56 | प्रश्न 4; पृष्ठ 59 का कार्यकलाप |
| “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” | 58 | प्रश्न 4, 13 (आ) |
| “इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।” | 61 | प्रश्न 8 |
| “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” | 62 | प्रश्न 1 |
| “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।” | 64 | प्रश्न 2, 7 |
| “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।” | 66 | प्रश्न 6, 10 |
| “इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” | 69 | प्रश्न 3; पृष्ठ 70 का कार्यकलाप |
| “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।” | 70 | प्रश्न 6, 13 (इ) |
| “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।” | 70 | प्रश्न 9, 10 |
बच्चे ये सवाल पूछेंगे — किताब के अपने सवाल
पृष्ठ 55 — बाज़ार में इतना तेज़ बदलाव कैसे समझें, इसे कौन-से कारक ला रहे हैं, और लोगों के जीवन पर इसका क्या असर है? नमूना उत्तर — यही पूरे अध्याय के तीन सवाल हैं। बदलाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से आया; कारक प्रौद्योगिकी, उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन हैं; और असर सब पर एक समान नहीं पड़ा।
पृष्ठ 60 — चीनी खिलौनों के आने से यहाँ क्या हो रहा है? नमूना उत्तर — भारतीय ख़रीदारों को कम कीमत पर अधिक विकल्प मिले, चीनी निर्माताओं को व्यवसाय फैलाने का अवसर मिला, और भारतीय खिलौना निर्माताओं को हानि हुई। दोनों देशों के खिलौना बाज़ार जुड़ गए।
पृष्ठ 64 — सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगा दे, तो क्या होगा? नमूना उत्तर — ख़रीदारों को अधिक कीमत चुकानी होगी, चीनी खिलौने सस्ते नहीं रहेंगे, उनका आयात अपने आप घट जाएगा, और भारतीय खिलौना निर्माताओं को फिर से मौका मिलेगा।
पृष्ठ 65 — “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?” नमूना उत्तर — नहीं। विकासशील देशों को अवरोधक हटाने पड़े, जबकि अमेरिका जैसे विकसित देश अपने किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए भारी धन देते रहे, जिससे उनकी सस्ती उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाती है।
पृष्ठ 66 — वैश्वीकरण का लोगों के जीवन पर क्या असर हुआ है? नमूना उत्तर — उपभोक्ताओं, बड़ी कंपनियों और आई.टी. सेवाओं को लाभ हुआ; रवि जैसे छोटे उत्पादकों और सुशीला जैसे श्रमिकों पर मार पड़ी। किताब का उत्तर है कि असर एक समान नहीं पड़ा।
पृष्ठ 70 — वैश्वीकरण को अधिक न्यायसंगत कैसे बनाया जाए? नमूना उत्तर — सरकार की नीतियाँ सबके हितों की रक्षा करें, श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो, छोटे उत्पादकों की तब तक मदद हो जब तक वे सक्षम न हों, ज़रूरत पर व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग हो, और विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते हों। जनता के अभियान भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
सावधानी
- फोर्ड को किताब के काल में पढ़ाइए। पृष्ठ 59 के आँकड़े “वर्ष 2017 तक” के हैं, और उसी बॉक्स में किताब बताती है कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारें बनाना बंद कर दिया है। बच्चे आज की बात पूछें, तो किताब की यही बात बताइए; कक्षा में नए आँकड़े मत जोड़िए।
- सेज़ की कर-छूट हमेशा की नहीं। किताब (पृष्ठ 67) के अनुसार कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता। प्रश्न बैंक के क16 और ङ7 यही बात परखते हैं।
- संरक्षण को बुरा मत कहलवाइए। किताब (पृष्ठ 64) बताती है कि सभी विकसित देशों ने भी अपने विकास के शुरुआती दौर में घरेलू उत्पादकों को संरक्षण दिया था, और पृष्ठ 70 पर कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार अवरोधकों का उपयोग कर सकती है।
- हमारी ओर से — ब्रांड जाँच में घर की ख़रीद पर टिप्पणी नहीं। बच्चे घर के उत्पादों की सूची लाएँगे। कक्षा में केवल कंपनी और कसौटी पर बात कीजिए; किसके घर में कौन-सा ब्रांड है, इस पर कोई टिप्पणी मत होने दीजिए।
- हमारी ओर से — रवि और सुशीला को अपने इलाके से जोड़ते समय। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) स्थानीय उदाहरण लेने को कहते हैं। किसी बच्चे के परिवार की नौकरी छूटने या काम बंद होने की बात उससे कक्षा के सामने मत पूछिए; उदाहरण इलाके के उद्योग से लीजिए, किसी घर से नहीं।
समय कम हो तो — छह बातें जो हर बच्चे तक पहुँचें
- बहुराष्ट्रीय कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व रखती है; उसका निवेश विदेशी निवेश है (पृष्ठ 56–57)।
- निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना है, जैसे कारगिल ने परख फूड्स को खरीदा (पृष्ठ 58)।
- विदेश व्यापार बाज़ारों को जोड़ता है; चीनी खिलौनों से ख़रीदारों को विकल्प मिले और भारतीय निर्माताओं को हानि हुई (पृष्ठ 60–61)।
- वैश्वीकरण देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया है; इसे प्रौद्योगिकी, उदारीकरण (करीब सन् 1991 से) और विश्व व्यापार संगठन ने संभव बनाया (पृष्ठ 62–65)।
- असर एक समान नहीं: धनी उपभोक्ताओं और बड़ी कंपनियों को लाभ, रवि जैसे छोटे उत्पादकों और सुशीला जैसे श्रमिकों पर मार (पृष्ठ 66–70)।
- न्यायसंगत वैश्वीकरण में अवसर सबके लिए हों और लाभ में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो; इसमें सरकार और जनता दोनों की भूमिका है (पृष्ठ 70)।
अभ्यास के लिए: प्रश्न बैंक, फ़्लैशकार्ड और क्विज़।