कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र (आर्थिक विकास की समझ) · पृष्ठ — 55 से 73
यह पन्ना किसलिए — किताब हाथ में लेकर पढ़ाते समय साथ रखने के लिए। हर कार्ड किताब के कुछ पन्नों का है: उन पन्नों की ज़रूरी पंक्तियाँ, उन्हें कक्षा में कैसे खोलें, और बच्चे कहाँ अटकते हैं। कार्ड के ऊपर लिखा है कि वह पाठ योजना के किस कालांश का है।
किताब की पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ-संख्या के साथ हैं (2026-27 में छपी किताब)। जो बात किताब की नहीं, हमारी है, उसके आगे “हमारी ओर से” लिखा है। प्रश्नावली की कुंजी, परिभाषाएँ और आँकड़ों की तालिका शिक्षक संदर्शिका में हैं; यहाँ उनके लिंक हैं।
किताब के साथ, पन्ना-दर-पन्ना
पृष्ठ 55–56 — अन्तरदेशीय उत्पादन
कालांश 1 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: शुरुआत · इंटरैक्टिव: 1. अन्तरदेशीय उत्पादन
किताब कहाँ से शुरू करती है। बाज़ार से (पृष्ठ 55)। किताब कहती है कि दो दशक पहले भारत के बाज़ारों में वस्तुओं की ऐसी विविधता नहीं थी, और फिर तीन सवाल रखती है: इस तेज़ बदलाव को कैसे समझें, कौन-से कारक इसे ला रहे हैं, और इसका लोगों के जीवन पर क्या असर हो रहा है। पूरा अध्याय इन्हीं तीन सवालों का जवाब है। इन्हें चार्ट पेपर पर लिखकर कक्षा में टाँग दीजिए; आख़िरी कालांश में इन्हीं पर लौटना है।
फिर किताब पीछे जाती है: बीसवीं शताब्दी के मध्य तक उत्पादन मुख्यतः देशों की सीमाओं के अंदर था, और सीमा पार करने वाली चीज़ें थीं कच्चा माल, खाद्य पदार्थ और तैयार उत्पाद। उसके बाद परिभाषा आती है: “एक बहुराष्ट्रीय कंपनी वह है, जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती है।” यह पंक्ति बच्चे अपनी कॉपी में लिखें।
किताब का उदाहरण औद्योगिक उपकरण बनाने वाली एक कंपनी का है: डिज़ाइन अमेरिका के अनुसंधान केन्द्र में, पुर्ज़े चीन में, संयोजन मेक्सिको और पूर्वी यूरोप में, और ग्राहक देखभाल भारत के कॉल सेंटर से। हर देश क्यों चुना गया, यह अगले पन्ने के ऊपर है: चीन सस्ता विनिर्माण स्थल है, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों के पास हैं, और भारत में अत्यंत कुशल इंजीनियर और अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक हैं। किताब कहती है कि इससे कंपनी की लागत में लगभग 50–60 प्रतिशत बचत हो सकती है।
हमारी ओर से — एक कंपनी, चार देश। चार बच्चों को कक्षा के चार कोनों में खड़ा कीजिए और हर एक के हाथ में एक पर्ची दीजिए: अमेरिका: डिज़ाइन, चीन: पुर्ज़े, मेक्सिको और पूर्वी यूरोप: संयोजन, भारत: कॉल सेंटर। एक कॉपी को मशीन मानकर कोने-कोने घुमाइए। हर कोने पर बाकी कक्षा बताए कि कंपनी यह काम यहीं क्यों करवा रही है। आख़िर में पूछिए: यह मशीन किस एक देश में बनी? बच्चे ख़ुद कहेंगे कि किसी एक में नहीं। यहीं से “अन्तरदेशीय उत्पादन” शब्द बोर्ड पर लिखिए।
यहीं रुकिए। कोई कंपनी अपना सारा माल एक ही देश में बनाती है, पर बेचती बीस देशों में है। क्या वह बहुराष्ट्रीय कंपनी है?
नमूना उत्तर — नहीं। किताब की परिभाषा उत्पादन पर नियंत्रण या स्वामित्व की बात करती है, बिक्री की नहीं। जब तक उत्पादन एक ही देश में है, कंपनी बहुराष्ट्रीय नहीं कहलाएगी।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। “बहुराष्ट्रीय” शब्द सुनकर बच्चे मान लेते हैं कि जो कंपनी कई देशों में माल बेचे, वही बहुराष्ट्रीय है। परिभाषा के दो शब्द, “उत्पादन” और “नियंत्रण”, पर उँगली रखवाइए। दूसरी उलझन: भारत को कॉल सेंटर का काम क्यों मिला। जवाब किताब में ही है: अंग्रेज़ी बोलने वाले शिक्षित युवक, जो ग्राहक देखभाल सेवा दे सकते हैं।
इसी हिस्से में। मुख्य शब्द · अध्याय के आँकड़े · फ़्लैशकार्ड 1–4; प्रश्न बैंक क1, क2, घ1, घ2, ङ1।
पृष्ठ 57–59 — विश्व-भर के उत्पादन को एक-दूसरे से जोड़ना
कालांश 2 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 2. उत्पादन को जोड़ना
किताब कहाँ से शुरू करती है। कंपनी जगह कैसे चुनती है, इससे (पृष्ठ 57): बाज़ार के पास, जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम मिले, जहाँ उत्पादन के दूसरे कारक हों, और जहाँ सरकारी नीतियाँ उसके हितों का ध्यान रखें। फिर दो परिभाषाएँ: भूमि, भवन, मशीन जैसी परिसंपत्तियों पर खर्च किया गया पैसा निवेश है, और “बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा किए गए निवेश को विदेशी निवेश कहते हैं।”
इसके बाद किताब बताती है कि कंपनियाँ दूर के उत्पादन से कैसे जुड़ती हैं: स्थानीय कंपनी के साथ संयुक्त उत्पादन (जिसमें स्थानीय कंपनी को अतिरिक्त निवेश के लिए धन और नवीनतम प्रौद्योगिकी मिलती है), स्थानीय कंपनी को खरीदना, और छोटे उत्पादकों को ऑर्डर देना। इनमें से दूसरे को किताब सबसे आम रास्ता कहती है: “बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरीदना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है।” उदाहरण कारगिल फूड्स का है, जिसने परख फूड्स जैसी कंपनियाँ खरीदीं; परख के चार तेल शोधक केन्द्र अब कारगिल के पास हैं, और कारगिल 50 लाख पैकेट प्रतिदिन की क्षमता के साथ भारत में खाद्य तेलों की सबसे बड़ी उत्पादक है।
छोटे उत्पादकों वाली बात में किताब वस्त्र, जूते-चप्पल और खेल के सामान का नाम लेती है, और कहती है कि मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और श्रम-शर्तें तय करने की इन कंपनियों की “प्रचण्ड क्षमता” होती है। पृष्ठ 59 पर फोर्ड मोटर्स का बॉक्स है: 26 देशों में फैली कंपनी, 1995 में भारत आई, चेन्नई के निकट 1,700 करोड़ रुपए का निवेश, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से संयंत्र; वर्ष 2017 तक भारत में 88,000 कारें बिक रही थीं और 1,81,000 कारें दक्षिण अफ्रीका, मेक्सिको, ब्राज़ील और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात हुईं। इसी बॉक्स में किताब यह भी बताती है कि हाल के वर्षों में फोर्ड ने भारत में बेचने के लिए कारें बनाना बंद कर दिया है, पर कारों और इंजनों का छोटे स्तर पर निर्यात करती है।
हमारी ओर से — कौन-सा तरीका? बोर्ड पर चार खाने बनाइए: कारखाने लगाना, साझेदारी, खरीद, छोटे उत्पादकों को ऑर्डर। फिर किताब के तीन उदाहरण एक-एक करके बोलिए: कारगिल और परख फूड्स, फोर्ड और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, लुधियाना के घरों में बनते फुटबाल। बच्चे बताएँ कि कौन-सा उदाहरण किस खाने में जाएगा और क्यों। फोर्ड वाले उदाहरण के दो उत्तर हो सकते हैं: संयंत्र फोर्ड ने लगाया, पर महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के सहयोग से। जो बच्चा कारण के साथ कोई भी खाना चुने, उसका उत्तर ठीक मानिए।
यहीं रुकिए। कारगिल ने भारत में कोई नया कारखाना नहीं लगाया, फिर भी वह भारत में खाद्य तेल की सबसे बड़ी उत्पादक कैसे बन गई?
नमूना उत्तर — उसने परख फूड्स जैसी स्थानीय कंपनियाँ खरीद लीं। परख के चार तेल शोधक केन्द्र उसके नियंत्रण में आ गए, और फिर उसने उत्पादन फैलाया। किताब इसी को निवेश का सबसे आम रास्ता कहती है।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। बच्चे सोचते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनी हमेशा नया कारखाना लगाकर आती है। अध्याय के अंत की प्रश्नावली (प्रश्न 13 आ) ठीक यही पूछती है, और सही उत्तर “स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना” है। फोर्ड के आँकड़ों में भी उलझन होती है: 88,000 भारत में बिकीं, 1,81,000 बाहर गईं। दोनों को दो अलग रंगों में लिखवाइए, और फोर्ड को किताब के ही काल में पढ़ाइए।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 59 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 5–23; प्रश्न बैंक क3, क4, क5, ख1–ख5, ग4, ङ2, च1, छ1।
पृष्ठ 59–61 — विदेश व्यापार और बाज़ारों का एकीकरण
कालांश 3 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 3. विदेश व्यापार
किताब कहाँ से शुरू करती है। इतिहास से (पृष्ठ 59)। लंबे समय से विदेश व्यापार ही देशों को जोड़ने का मुख्य माध्यम रहा है, और ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनियाँ व्यापार के लिए ही भारत आई थीं। व्यापार उत्पादक को अपने देश से बाहर के बाज़ार देता है, और ख़रीदार को अपने देश में बनी चीज़ों से आगे के विकल्प।
फिर चीन के खिलौनों का उदाहरण (पृष्ठ 60)। चीनी विनिर्माताओं ने देखा कि भारत में खिलौने अधिक कीमत पर बिक रहे हैं। सस्ते दाम और नये डिज़ाइन के कारण एक वर्ष में ही खिलौने की 70–80 प्रतिशत दुकानों में चीनी खिलौनों ने भारतीय खिलौनों की जगह ले ली। किताब हिसाब लगाती है कि किसे क्या मिला: भारतीय ख़रीदारों को कम कीमत पर अधिक विकल्प, चीनी निर्माताओं को व्यवसाय फैलाने का अवसर, और भारतीय निर्माताओं को हानि। निष्कर्ष पृष्ठ 61 पर: “इस प्रकार, विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाज़ारों को जोड़ने या एकीकरण में सहायक होता है।”
हमारी ओर से — तीन कुर्सियाँ। तीन बच्चे आगे बुलाइए: भारतीय ख़रीदार, चीनी निर्माता, भारतीय निर्माता। कक्षा हर एक से पूछे कि चीनी खिलौने आने से उसे क्या मिला और क्या गया। जवाब किताब के ही रहें। फिर एक सवाल पूरी कक्षा से: दोनों देशों में एक ही खिलौने का दाम धीरे-धीरे कैसा हो जाएगा? यहीं “बाज़ारों का एकीकरण” शब्द आता है।
यहीं रुकिए। चीनी खिलौने भारत में आए, तो चीन और भारत के खिलौना बाज़ार जुड़ कैसे गए?
नमूना उत्तर — अब भारत के ख़रीदार दोनों देशों के खिलौनों में से चुनते हैं, दोनों देशों के निर्माता एक-दूसरे से प्रतिस्पर्धा करते हैं, और दोनों बाज़ारों में एक ही वस्तु का दाम एक समान होने लगता है। दो अलग बाज़ार अब एक जैसे चलने लगते हैं; यही एकीकरण है।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। विदेश व्यापार और विदेशी निवेश को एक मान लेना। खिलौने बनकर भारत आए, यह व्यापार है; फोर्ड ने भारत में संयंत्र लगाया, यह निवेश है। पृष्ठ 61 का कार्यकलाप ठीक यही अंतर पूछता है।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 61 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 24–29; प्रश्न बैंक क6, क7, घ3, ङ3।
पृष्ठ 61–63 — वैश्वीकरण क्या है और इसे संभव बनाने वाले कारक
कालांश 4 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 4. वैश्वीकरण क्या है · इंटरैक्टिव: 5. संभव बनाने वाले कारक
किताब कहाँ से शुरू करती है। पिछले दो-तीन दशकों से (पृष्ठ 61)। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सस्ते उत्पादन की जगहें खोज रही हैं, विदेशी निवेश बढ़ा है, और विदेश व्यापार का बड़ा हिस्सा इन कंपनियों के नियंत्रण में है। फिर परिभाषा, पृष्ठ 62 पर: “विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है।” देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान बढ़ रहा है, पर अनेक प्रतिबंधों के कारण लोगों का आवागमन ज़्यादा नहीं बढ़ा।
कारकों में किताब पहले प्रौद्योगिकी को रखती है: बीते पचास वर्षों में परिवहन में बहुत उन्नति, कंटेनरों से ढुलाई की लागत में भारी बचत, और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी। उदाहरण लंदन की एक पत्रिका का है, जिसका डिज़ाइन और छपाई दिल्ली में होती है (पृष्ठ 63): पाठ इंटरनेट से आता है, डिज़ाइन कंप्यूटर पर बनता है, पत्रिकाएँ वायुमार्ग से जाती हैं, और भुगतान ई-बैंकिंग से।
हमारी ओर से — पत्रिका का सफ़र। बोर्ड पर बाईं ओर लंदन और दाईं ओर दिल्ली लिखिए। बच्चे किताब का बॉक्स पढ़कर बारी-बारी से आएँ और दोनों के बीच एक तीर खींचें: पाठ किससे गया, डिज़ाइन किससे बना, पत्रिकाएँ किससे गईं, पैसा किससे आया। हर तीर पर उस प्रौद्योगिकी का नाम लिखें। यही पृष्ठ 63 के कार्यकलाप का पहला सवाल भी है। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) कहते हैं कि प्रौद्योगिकी बच्चों को आकर्षित करती है, इसलिए यहाँ उन्हें ख़ुद खोजने दीजिए।
यहीं रुकिए। वैश्वीकरण में क्या-क्या तेज़ी से एक देश से दूसरे देश जा रहा है, और क्या नहीं?
नमूना उत्तर — वस्तुएँ, सेवाएँ, निवेश और प्रौद्योगिकी तेज़ी से जा रहे हैं। लोगों का आवागमन अनेक प्रतिबंधों के कारण ज़्यादा नहीं बढ़ा।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। सबसे आम भूल यह मानना है कि वैश्वीकरण का मतलब लोगों का विदेश जाना है, और प्रश्नावली का प्रश्न 13 (अ) इसी को पकड़ता है: सही विकल्प में लोग नहीं, निवेश हैं।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 62 का कार्यकलाप · पृष्ठ 63 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 30–38; प्रश्न बैंक क8, क9, ख6, ग1, घ4, घ5, घ6, ङ4, च2।
पृष्ठ 64 — विदेशी व्यापार तथा विदेशी निवेश नीति का उदारीकरण
कालांश 5 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 6. उदारीकरण
किताब कहाँ से शुरू करती है। फिर उन्हीं खिलौनों से (पृष्ठ 64)। अगर सरकार चीनी खिलौनों के आयात पर कर लगा दे, तो ख़रीदारों को अधिक कीमत चुकानी होगी, चीनी खिलौने सस्ते नहीं रहेंगे और उनका आयात अपने आप घट जाएगा। आयात पर ऐसा कर एक व्यापार अवरोधक है। सरकार आयात होने वाली वस्तुओं की संख्या भी सीमित कर सकती है; इसे कोटा कहते हैं।
आज़ादी के बाद सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर अवरोध लगाए, ताकि देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से संरक्षण मिले। 1950 और 1960 के दशकों में उद्योग उभर ही रहे थे; केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ों के आयात की अनुमति थी। किताब यह भी कहती है कि सभी विकसित देशों ने भी अपने शुरुआती दौर में घरेलू उत्पादकों को संरक्षण दिया था। करीब सन् 1991 के प्रारंभ से नीतियाँ बदलीं: सरकार ने तय किया कि अब भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व से प्रतिस्पर्धा करने का समय आ गया है। परिभाषा: “सरकार द्वारा अवरोधों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया उदारीकरण के नाम से जानी जाती है।”
1991 से पहले और बाद
हमारी ओर से — दो दुकानें, दो दौर। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) याद दिलाते हैं कि बच्चों ने उदारीकरण से पहले का भारत देखा ही नहीं है, और सुझाते हैं कि पहले और बाद की तुलना एक नाटक से कराई जाए। इसका पूरा ढाँचा नीचे पृष्ठ 64 की गतिविधि में है।
यहीं रुकिए। आयात पर कर और कोटा, दोनों व्यापार अवरोधक हैं। दोनों में फ़र्क क्या है?
नमूना उत्तर — आयात पर कर से विदेशी वस्तु महँगी हो जाती है, पर जितनी चाहे उतनी आ सकती है। कोटा में सरकार यह सीमा तय करती है कि कितनी वस्तुएँ आयात होंगी।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। दो जगह। पहली, यह मानना कि उदारीकरण में सरकार सारा नियंत्रण छोड़ देती है। ऐसा नहीं है: सरकार पहले से कम नियंत्रण करती है, इसलिए उसे “अधिक उदार” कहा जाता है। दूसरी, यह मानना कि व्यापार अवरोधक हमेशा बुरे हैं। किताब ख़ुद बताती है कि शुरुआती उद्योगों को बचाने के लिए ये ज़रूरी थे, और अध्याय के अंत में कहती है कि ज़रूरी हो तो सरकार इनका उपयोग कर सकती है।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 64 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 40–50; प्रश्न बैंक क10, क11, ख7, ख8, ग2, ग3, घ7, ङ5।
पृष्ठ 65–66 — विश्व व्यापार संगठन
कालांश 6 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 7. विश्व व्यापार संगठन
किताब कहाँ से शुरू करती है। एक सोच से (पृष्ठ 65): कुछ प्रभावशाली अन्तर्राष्ट्रीय संगठन मानते हैं कि व्यापार और निवेश के सारे अवरोधक हानिकारक हैं और सब देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी चाहिए। फिर परिचय: “विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू. टी. ओ.) एक ऐसा संगठन है, जिसका ध्येय अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार को उदार बनाना है।” यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ, व्यापार के नियम बनाता है और उनका पालन देखता है; किताब के अनुसार लगभग 160 देश इसके सदस्य हैं।
यहीं किताब सवाल उठाती है। व्यवहार में विकसित देशों ने अपने अवरोधक बनाए रखे, जबकि विकासशील देशों को अवरोधक हटाने पड़े। उदाहरण कृषि का है: अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा केवल एक प्रतिशत और रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसानों को सरकार से उत्पादन और निर्यात के लिए भारी धन मिलता है, और उनकी सस्ती अधिशेष उपज दूसरे देशों के किसानों को नुकसान पहुँचाती है। बॉक्स का आख़िरी सवाल है: “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”
हमारी ओर से — कृषि पर बहस। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) कहते हैं कि विश्व व्यापार संगठन की संधियाँ और शक्ति का असमान संतुलन व्याख्यान से नहीं, चर्चा से पढ़ाइए। बहस का ढाँचा नीचे पृष्ठ 65 की गतिविधि में है।
यहीं रुकिए। अमेरिका में कृषि से इतने कम लोग जुड़े हैं। फिर वहाँ के किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता से भारत के किसान की चिंता क्यों?
नमूना उत्तर — क्योंकि उस सहायता से अमेरिकी किसान अपनी उपज बहुत कम कीमत पर बेच पाते हैं, और उनकी अधिशेष उपज दूसरे देशों के बाज़ारों में सस्ते में बिकती है। भारत में अधिकांश रोज़गार कृषि से आता है, इसलिए सस्ती विदेशी उपज यहाँ के बहुत से किसानों की आमदनी पर असर डाल सकती है।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। कई बच्चे मानते हैं कि विश्व व्यापार संगठन ग़रीब देशों की मदद के लिए बना। किताब साफ़ कहती है कि यह विकसित देशों की पहल पर शुरू हुआ। और “लगभग 160” किताब का आँकड़ा है; उत्तर में यही लिखवाइए।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 66 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 51–56; प्रश्न बैंक क12, क13, ख9, घ8, ङ6, च3, छ4।
पृष्ठ 66–67 — भारत में वैश्वीकरण का प्रभाव
कालांश 7 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 8. भारत पर प्रभाव
किताब कहाँ से शुरू करती है। उपभोक्ता से (पृष्ठ 66)। बढ़ी प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं, ख़ासकर शहरों के धनी वर्ग को अधिक विकल्प, उत्कृष्ट गुणवत्ता और कम कीमतें मिलीं। फिर अध्याय का मोड़ आता है: “उत्पादकों और श्रमिकों पर वैश्वीकरण का एक समान प्रभाव नहीं पड़ा है।”
लाभ किसे मिला, किताब गिनाती है। बीते 20 वर्षों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया, ख़ासकर शहरी इलाकों के सेलफोन, मोटर गाड़ी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, ठंडे पेय, जंक खाद्य पदार्थ और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में; इनमें नये रोज़गार बने और कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ समृद्ध हुईं। शीर्ष भारतीय कंपनियों ने नवीनतम प्रौद्योगिकी अपनाई, और कुछ ख़ुद बहुराष्ट्रीय बन गईं, जैसे टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी, एशियन पेंट्स और सुंदरम फास्टनर्स (पृष्ठ 67)। सेवा कंपनियों, ख़ासकर सूचना प्रौद्योगिकी वाली, को नये अवसर मिले। पृष्ठ 67 के बॉक्स में सरकार के दो कदम हैं: विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज़), जहाँ कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता, और श्रम कानूनों में लचीलापन।
हमारी ओर से — दो कॉलम। बोर्ड को बीच से बाँटिए: किसे लाभ मिला और किस पर मार पड़ी। आज केवल पहला कॉलम भरिए, किताब के चार समूह लेकर: संपन्न उपभोक्ता, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, उन्हें कच्चा माल देने वाली स्थानीय कंपनियाँ, और शीर्ष भारतीय कंपनियाँ। दूसरा कॉलम ख़ाली छोड़ दीजिए और बच्चों से कहिए कि अगले कालांश में रवि और सुशीला उसे भरेंगे। बोर्ड साझा है, तो यही दो कॉलम बच्चे अपनी कॉपी के एक पूरे पन्ने पर बना लें।
यहीं रुकिए। सेज़ में लगी कंपनी को कभी कर नहीं देना पड़ता, क्या यह सही है?
नमूना उत्तर — नहीं। किताब के अनुसार सेज़ में उत्पादन इकाई लगाने वाली कंपनियों को आरंभिक पाँच वर्षों तक कोई कर नहीं देना पड़ता। छूट शुरुआती वर्षों की है, हमेशा की नहीं।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। “श्रम कानूनों में लचीलापन” सुनकर बच्चे इसे श्रमिकों की सुविधा समझ लेते हैं। किताब के अनुसार यह कंपनियों की छूट है: श्रमिक को काम का दबाव होने पर छोटी अवधि के लिए रखना, ताकि श्रम लागत घटे। इसकी दूसरी तरफ़ अगले कालांश में सुशीला की कहानी में दिखेगी।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 67 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 39, 57–65; प्रश्न बैंक क14, क15, क16, ङ7, ङ8, च5।
पृष्ठ 68–70 — छोटे उत्पादक और अनिश्चित रोज़गार
कालांश 8 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 9. छोटे उत्पादक और श्रमिक
किताब कहाँ से शुरू करती है। रवि से (पृष्ठ 68)। सन् 1992 में उसने बैंक से ऋण लेकर तमिलनाडु के होसुर में संधारित्र बनाने की कंपनी शुरू की; तीन वर्षों में 20 कर्मचारी काम करने लगे। सन् 2001 में विश्व व्यापार संगठन के समझौते के अनुसार संधारित्रों के आयात से प्रतिबंध हटे। उसकी ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन करने लगीं, और उनमें से कुछ आधी कीमत वाले आयातित संधारित्र खरीदने लगीं। अब रवि वर्ष 2000 के आधे से भी कम उत्पादन करता है और उसके पास केवल सात श्रमिक हैं। बैटरी, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल जैसे उद्योगों में भी कई इकाइयाँ बंद हुईं; और कृषि के बाद सबसे अधिक श्रमिक, 11 करोड़, लघु और मध्यम उद्योगों में हैं।
फिर श्रमिकों की बात (पृष्ठ 69): अधिकतर नियोक्ता रोज़गार देने में लचीलापन पसंद करते हैं, और “इसका अर्थ है कि श्रमिकों का रोज़गार अब सुनिश्चित नहीं है।” वस्त्र निर्यात की कड़ी और सुशीला की कहानी यहीं हैं। 35 वर्ष की सुशीला दिल्ली के एक वस्त्र निर्यातक उद्योग में स्थायी श्रमिक थी, जिसे स्वास्थ्य बीमा, भविष्य निधि और अतिरिक्त समय के काम की दुगुनी मज़दूरी मिलती थी। 1990 के दशक के अंतिम वर्षों में फैक्ट्री बंद हुई; अब वह घर से 30 कि.मी. दूर अस्थायी श्रमिक है, पहले से आधे से भी कम कमाती है, और सातों दिन सुबह 7.30 बजे निकलकर शाम 10 बजे लौटती है।
वस्त्र निर्यात की कड़ी
हमारी ओर से — सुशीला का एक दिन। बोर्ड पर एक घड़ी बनाइए। सुबह 7.30 पर घर से निकली और शाम 10 बजे पर लौटी लिखिए। बच्चे गिनें कि वह कितने घंटे घर से बाहर रही, और फिर गिनें कि सप्ताह में उसकी छुट्टी कितने दिन है। इसके बाद पिछले कालांश के ख़ाली कॉलम किस पर मार पड़ी में (कॉपी के उसी पन्ने पर) बच्चे ख़ुद रवि और सुशीला लिखें।
यहीं रुकिए। तीन वर्षों में रवि की कंपनी में 20 कर्मचारी हो गए थे। फिर उसका काम क्यों घटा?
नमूना उत्तर — आयात से प्रतिबंध हटने के बाद आयातित संधारित्र उसकी कीमत से आधी कीमत पर मिलने लगे। उसकी ग्राहक कंपनियों में से कुछ सस्ता आयातित माल खरीदने लगीं। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा के कारण उसकी ग्राहक टेलीविज़न कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए संयोजन-कार्य करने लगीं। यानी उसका काम सस्ते आयात और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से घटा।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। रवि और सुशीला को मिला देना। रवि उत्पादक है जिसका काम सस्ते आयात से घटा; सुशीला श्रमिक है जिसका रोज़गार अस्थायी हुआ। उत्तर में दोनों की बात अलग-अलग लिखवाइए। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) यहाँ स्थानीय उदाहरण लेने को कहते हैं, जैसे आयात का स्थानीय किसानों पर असर; अपने इलाके का कोई उदाहरण बच्चों से पूछिए।
इसी हिस्से में। पृष्ठ 68 का कार्यकलाप · पृष्ठ 70 का कार्यकलाप · फ़्लैशकार्ड 66–79; प्रश्न बैंक क17, क18, ख10, ग5, घ9, घ10, च4, छ2, छ3।
पृष्ठ 70–71 — न्यायसंगत वैश्वीकरण के लिए संघर्ष
कालांश 9 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 10. न्यायसंगत वैश्वीकरण
किताब कहाँ से शुरू करती है। एक सीधी बात से (पृष्ठ 70): “शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नये अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर, अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला है।” फिर लक्ष्य: “न्यायसंगत वैश्वीकरण सभी के लिए अवसर प्रदान करेगा और यह सुनिश्चित भी करेगा कि वैश्वीकरण के लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।”
सरकार क्या कर सकती है, किताब पाँच बातें गिनाती है: नीतियाँ सब लोगों के हितों की रक्षा करें; श्रमिक कानूनों का उचित कार्यान्वयन हो; छोटे उत्पादकों की तब तक मदद हो जब तक वे प्रतिस्पर्धा में सक्षम न हों; ज़रूरी हो तो व्यापार और निवेश अवरोधकों का उपयोग हो; और विश्व व्यापार संगठन में न्यायसंगत नियमों के लिए समझौते हों। अंत में जनता की भूमिका: बड़े अभियानों और जनसंगठनों ने विश्व व्यापार संगठन के निर्णयों को प्रभावित किया है। पृष्ठ 71 पर हांगकांग में 2005 के प्रदर्शन की तस्वीर इसी बात के साथ है।
हमारी ओर से — पाँच चिट। सरकार की पाँच बातें पाँच चिटों पर लिखिए। पाँच समूह बनाइए, हर समूह एक चिट उठाए और बताए कि यह कदम रवि, सुशीला या भारत के किसान में से किसकी मदद करेगा, और कैसे। इससे पिछले दो कालांशों की कहानियाँ इस कालांश के उपायों से जुड़ जाती हैं।
यहीं रुकिए। क्या न्यायसंगत वैश्वीकरण का मतलब वैश्वीकरण रोक देना है?
नमूना उत्तर — नहीं। किताब वैश्वीकरण को एक सच्चाई मानती है और पूछती है कि इसे अधिक न्यायसंगत कैसे बनाया जाए: अवसर सबके लिए हों और लाभों में सबकी बेहतर हिस्सेदारी हो।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। प्रश्न 13 (इ) में बच्चे “सभी लोगों के” चुन लेते हैं। सही उत्तर “उपर्युक्त में से कोई नहीं” है, और कारण यही पृष्ठ है: लाभ सबको नहीं मिला।
इसी हिस्से में। अध्याय का तर्क · फ़्लैशकार्ड 80–83; प्रश्न बैंक क19, क20, ग6, च6।
पृष्ठ 71–73 — सारांश और समापन
कालांश 10 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: सार · इंटरैक्टिव: अभ्यास · इंटरैक्टिव: परियोजना
किताब कहाँ से शुरू करती है। सारांश से (पृष्ठ 71)। पूरा अध्याय एक बार फिर क्रम से आता है: बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी और उदारीकरण, असमान असर, और न्यायसंगत वैश्वीकरण। फिर पृष्ठ 72–73 पर 13 प्रश्न और दो परियोजनाएँ।
हमारी ओर से — तीन सवालों पर लौटिए। पहले कालांश में टाँगा चार्ट पेपर उतारिए। तीनों सवाल एक-एक करके पढ़िए और हर सवाल के नीचे बच्चे एक-एक पंक्ति का जवाब लिखवाएँ: बदलाव बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विदेश व्यापार और विदेशी निवेश से आया; कारक प्रौद्योगिकी, उदारीकरण और विश्व व्यापार संगठन हैं; असर सब पर एक समान नहीं। यही चार्ट अध्याय का सार बन जाता है।
यहीं रुकिए। इस अध्याय को एक वाक्य में कहना हो, तो क्या कहेंगे?
नमूना उत्तर — देश तेज़ी से एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं, पर इस जुड़ाव का लाभ सबको बराबर नहीं मिला, इसलिए वैश्वीकरण को न्यायसंगत बनाना ज़रूरी है।
बच्चे यहाँ अटकते हैं। प्रश्न 10 जैसे दोनों पक्षों वाले प्रश्नों में बच्चे केवल एक पक्ष लिखकर रुक जाते हैं। उन्हें याद दिलाइए कि इस अध्याय का हर बड़ा उत्तर तीन हिस्सों में बनता है: लाभ, हानि, और आगे का रास्ता।
इसी हिस्से में। किताब की पंक्तियाँ · समय कम हो तो · प्रश्न बैंक छ5 और तीनों नमूना परीक्षा-पत्र।
कक्षा की गतिविधियाँ
पृष्ठ 57 की गतिविधि — एक कमीज़, कई देश
कालांश 2 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 2. उत्पादन को जोड़ना
किताब का कार्यकलाप एक “मेड इन थाइलैण्ड” लेबल वाली कमीज़ से शुरू होता है और बच्चों से पूरा करवाता है कि वस्त्र उद्योग में उत्पादन विश्व भर में कैसे फैला है। किताब ख़ुद पहला कदम बता देती है: कंपनी कोरिया से सूत ले सकती है। यहाँ कोई एक तय उत्तर नहीं है; बस हर चरण अलग देश में दिखाना है।
हमारी ओर से। बोर्ड पर पाँच डिब्बे बनाइए: सूत, बुनाई और रंगाई, बटन और ज़िप, सिलाई, लेबल। पहले डिब्बे में कोरिया, और आख़िरी दो डिब्बों (सिलाई और लेबल) में थाइलैण्ड लिख दीजिए। बीच के डिब्बों के देश बच्चे ख़ुद सुझाएँ, पर हर सुझाव के साथ यह भी बताएँ कि कंपनी वह काम वहाँ क्यों करवाएगी: बाज़ार पास है, कम लागत पर कुशल या अकुशल श्रम मिलता है, उत्पादन के दूसरे कारक मिलते हैं, या सरकारी नीतियाँ अनुकूल हैं। ये कारण किताब पृष्ठ 57 पर गिनाती है।
पृष्ठ 64 की गतिविधि — उदारीकरण से पहले और बाद
कालांश 5 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 6. उदारीकरण
किताब की बात पहले बच्चों को दीजिए: 1950 और 1960 के दशकों में आयात पर अवरोध थे और केवल मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम जैसी ज़रूरी चीज़ें आयात होती थीं, क्योंकि देश के उद्योग अभी उभर रहे थे। करीब सन् 1991 के प्रारंभ से अवरोध काफ़ी हद तक हटाए गए, और व्यवसायी ख़ुद तय करने लगे कि क्या आयात या निर्यात करें। किताब के निर्देश (पृष्ठ 54) यहीं पहले और बाद की तुलना के लिए नाटक का सुझाव देते हैं।
हमारी ओर से। दो दृश्य, पाँच-पाँच मिनट के। पहला दृश्य, पहले का दौर: एक खिलौने की दुकान, जिसमें केवल देश में बने खिलौने हैं; दुकानदार ग्राहक से कहता है कि विदेशी खिलौने आयात नहीं होते। दूसरा दृश्य, 1991 के बाद: वही दुकान, अब विदेशी खिलौने भी, और एक देसी खिलौना-निर्माता जो दुकानदार से पूछता है कि उसका माल क्यों नहीं बिक रहा। नाटक के बाद कक्षा से तीन सवाल पूछिए: पहले दौर में किसे सुरक्षा थी? दूसरे दौर में ख़रीदार को क्या मिला? देसी निर्माता को अब क्या करना होगा? नाटक में कोई नया आँकड़ा मत जोड़िए; सारी बातें किताब के पृष्ठ 60 और 64 की ही रहें।
पृष्ठ 65 की गतिविधि — कृषि व्यापार पर बहस
कालांश 6 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: 7. विश्व व्यापार संगठन
किताब की बात पहले बच्चों को दीजिए: अमेरिका के जी.डी.पी. में कृषि का हिस्सा केवल एक प्रतिशत और कुल रोज़गार में केवल 0.5 प्रतिशत है, फिर भी वहाँ के किसानों को उत्पादन और निर्यात के लिए सरकार से बहुत अधिक धन मिलता है। भारत में अधिकांश रोज़गार और जी.डी.पी. का महत्त्वपूर्ण भाग कृषि से आता है। विकासशील देश पूछते हैं कि उन्होंने तो नियमों के अनुसार अवरोधक घटाए, पर विकसित देश अपने किसानों को भारी धन देते रहे।
हमारी ओर से। कक्षा को दो दलों में बाँटिए: एक दल विकासशील देशों की ओर से बोले, दूसरा विकसित देशों की ओर से। हर दल को तीन मिनट दीजिए, फिर एक-एक मिनट का जवाब। विकसित देशों वाले दल से किताब की वह सोच रखवाइए कि सब देशों के बीच मुक्त व्यापार होना चाहिए; विकासशील देशों वाला दल अमेरिका के आँकड़ों से जवाब दे। अंत में किताब के बॉक्स का सवाल बोर्ड पर लिखिए, “क्या यह मुक्त और न्यायसंगत व्यापार है?”, और हर बच्चा कॉपी में एक कारण के साथ अपना उत्तर लिखे।
पृष्ठ 73 की गतिविधि — ब्रांड जाँच
कालांश 10 · पाठ योजना में यह कालांश · इंटरैक्टिव: परियोजना
किताब की पहली परियोजना: रोज़ इस्तेमाल होने वाले कुछ ब्रांडेड उत्पाद लीजिए, जैसे साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ, और पता कीजिए कि उनमें से कौन-से बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बनाए हैं।
हमारी ओर से। इसे घर का काम बनाइए। हर बच्चा अपने घर से पाँच पैकेट या लेबल देखे और कॉपी में तीन कॉलम की सूची बनाए: उत्पाद, बनाने वाली कंपनी का नाम (पैकेट पर जैसा लिखा है), और बहुराष्ट्रीय है या नहीं। तीसरे कॉलम में पता नहीं लिखना भी ठीक है; अगले दिन कक्षा में ऐसे नामों पर चर्चा कीजिए। कसौटी हर बार किताब की परिभाषा ही रहे: क्या यह कंपनी एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण रखती है? दूसरी परियोजना, एक उद्योग का अध्ययन, बड़ी है; उसे समूहों में दो सप्ताह के लिए दीजिए।
पृष्ठ 72–73 — प्रश्नावली
कालांश 10 · कालांश 10 का कार्ड · इंटरैक्टिव: अभ्यास
इनके उत्तर यहाँ दोहराए नहीं गए, ताकि दो पन्नों में दो अलग उत्तर न हों। सब शिक्षक संदर्शिका में हैं:
- प्रश्न 1 से 4: उत्तर के मुख्य बिंदु
- प्रश्न 5 से 8: उत्तर के मुख्य बिंदु
- प्रश्न 9 से 11: उत्तर के मुख्य बिंदु
- प्रश्न 12 और 13: कुंजी और कारण
- पृष्ठ 73 की परियोजनाएँ: ब्रांड जाँच और एक उद्योग का अध्ययन
- अध्याय के बीच के कार्यकलाप, पृष्ठ 57 से 70: प्रश्नावली के उत्तर
अभ्यास के लिए बच्चों को प्रश्न बैंक, फ़्लैशकार्ड और क्विज़ दीजिए।