अध्याय 7एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7

कक्षा — 12 · विषय — इतिहास (भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग 2) · पृष्ठ — 170 से 195

यह पन्ना किसलिए — पढ़ाने से पहले अध्याय पर अपनी पकड़ पक्की करने के लिए: अध्याय का तर्क, अध्याय के आँकड़े, किताब की परिभाषाएँ, प्रश्नावली के उत्तर, और वे जगहें जहाँ बच्चे अकसर भटकते हैं। कक्षा में किस कालांश में क्या करना है, वह पाठ योजना में है।

सारे पृष्ठ 2026-27 में छपी किताब के हैं। किताब की पंक्तियाँ उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ-संख्या के साथ दी गई हैं। जो बात किताब की नहीं, हमारी अपनी है, उसके साथ “हमारी ओर से” लिखा है।

सामग्री के पन्ने

अध्याय की पकड़

अध्याय का तर्क — किताब किस क्रम में सोचती है

हमारी ओर से: यह अध्याय राजाओं की सूची नहीं है। किताब एक उजड़े शहर को उसके खंडहरों, नक्शों, अभिलेखों, यात्रियों के वृत्तांतों और साहित्य से फिर से पढ़ती है, और हर भाग में यह भी दिखाती है कि कोई बात हमें किस स्रोत से पता चली। काल है लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक (पृष्ठ 170)। किताब सात भागों में चलती है:

  • शुरुआत और भाग 1 (पृष्ठ 170–171): साम्राज्य का फैलाव, 1565 का आक्रमण, और हम्पी की खोज: 1800 में कॉलिन मैकेन्ज़ी का पहला सर्वेक्षण मानचित्र, फिर अभिलेख और छाया चित्र।
  • भाग 2 (पृष्ठ 171–175): राय, नायक तथा सुलतान: घोड़ों का व्यापार, चार राजवंश, कृष्णदेव राय, 1565 का युद्ध, सुलतानों से संबंध, और अमर–नायक प्रणाली।
  • भाग 3 (पृष्ठ 176–179): राजधानी तथा उसके परिप्रदेश: जल–संपदा, क़िलेबंदियाँ और सड़कें, शहरी केंद्र।
  • भाग 4 (पृष्ठ 179–183): राजकीय केंद्र: महानवमी डिब्बा, कमल महल, “हाथियों का अस्तबल” और हज़ार राम मन्दिर।
  • भाग 5 (पृष्ठ 184–188): धार्मिक केंद्र: राजधानी का चयन, गोपुरम् और मण्डप, विरुपाक्ष और विट्ठल मन्दिर।
  • भाग 6 (पृष्ठ 188–190): महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन: पूरे क्षेत्र को 25 वर्गों में बाँटकर किया गया प्रलेखन; साथ में पृष्ठ 191 का स्रोत 5, बाज़ार।
  • भाग 7 (पृष्ठ 191–192): उत्तरों की खोज में प्रश्न: इमारतें क्या बताती हैं, और क्या नहीं बतातीं। फिर काल-रेखा 1 और 2 (पृष्ठ 193)।

किताब विजयनगर को किन चीज़ों से पढ़ती है

खंडहरभवनों के अवशेषदीवारें, महानवमी डिब्बा, कमल महल, मन्दिर
नक्शेसर्वेक्षण और प्रलेखन1800 का पहला सर्वेक्षण मानचित्र; बाद में 25 वर्गों वाला प्रलेखन
छाया चित्र1856 ई. सेभवनों के चित्र संकलित हुए
अभिलेख1836 से इकट्ठे हुएमन्दिरों को दिए दान और महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
यात्रीविदेशी वृत्तांतअब्दुर रज़्ज़ाक, पेस, बरबोसा, नूनिज़
साहित्य और स्मृतितेलुगु, कन्नड़, तमिल, संस्कृतऔर पुरोहितों की स्मृतियाँ
NCERT, पृष्ठ 170, 176, 188–189

किताब के दो वाक्य इस अध्याय की धुरी हैं:

  1. “सुरक्षित भवन हमें उन तरीकों के विषय में बताते हैं जिनसे स्थानों को व्यवस्थित किया गया और उन्हें प्रयोग में लाया गया।” (पृष्ठ 191)
  2. “संभवत: अन्य स्त्रोतों के प्रयोग से जारी शोध कुछ और संकेत दे सकें।” (पृष्ठ 192)

पहला वाक्य बताता है कि किताब इतनी इमारतें क्यों दिखाती है: बची हुई इमारतें बताती हैं कि जगहें कैसे बँटी थीं, किस सामग्री और किन तकनीकों से बनीं, और क़िलेबंदी से रक्षा की तैयारी का पता चलता है। दूसरा वाक्य सीमा बताता है: सामान्य स्त्री, पुरुष, बच्चे और मज़दूर इन इमारतों के बारे में क्या सोचते थे, नक्शे किसने बनाए, राजगीर और मूर्तिकार कहाँ से आए, ये बातें इमारतें नहीं बतातीं (पृष्ठ 191–192)। हर भाग के बाद बच्चों से यही दो सवाल पूछिए: यह बात किस स्रोत से पता चली, और कौन-सी बात अब भी पता नहीं है।

हमारी ओर से — कक्षा के चार्ट के लिए: यह तालिका चार्ट पेपर पर बनाकर पूरे अध्याय में दीवार पर रखिए। भाग 3, 4 और 5 पढ़ाते हुए हर पंक्ति भरिए। हर भाग का पृष्ठ आख़िरी खाने में है।

शहर का भागकहाँ और कैसाकिताब में यहाँ क्या हैपृष्ठ
बाहरी दीवारशहर के चारों ओर की पहाड़ियों को आपस में जोड़तीभीतर शहर, कृषि क्षेत्र और जंगल; अब्दुर रज़्ज़ाक ने “दुर्गों की सात पंक्तियों” का उल्लेख किया177
धार्मिक केंद्रतुंगभद्रा नदी के किनारे वाला चट्टानी उत्तरी भागविरुपाक्ष और पम्पादेवी के मन्दिर; यहीं किताब गोपुरम्, मण्डप और रथ गलियों की बात करती है184–188
कृषि क्षेत्रधार्मिक केंद्र और नगरीय केंद्र के बीचतुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहरें; हिरिया नहर177–178
शहरी केंद्रदूसरी क़िलेबंदी इसके भीतरी भाग के चारों ओरसामान्य लोगों के आवासों के कम साक्ष्य; उत्तर-पूर्वी कोने में परिष्कृत चीनी मिट्टी और मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला; पूजा स्थल और छोटे मन्दिर178–179
राजकीय केंद्रबस्ती का दक्षिण-पश्चिमी भाग; तीसरी क़िलेबंदी इसके चारों ओर60 से भी अधिक मन्दिर, लगभग तीस महल; महानवमी डिब्बा, कमल महल, हज़ार राम मन्दिर178–183

हमारी ओर से — अध्याय का पाठ कैसे खोलें: पहले शीर्षक बोर्ड पर लिखिए: “एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर”। बच्चों को बताइए कि किताब के अनुसार विजयनगर, यानी “विजय का शहर”, एक शहर और एक साम्राज्य, दोनों का नाम था (पृष्ठ 170)। फिर पूछिए: जो शहर सत्रहवीं–अठारहवीं शताब्दियों तक पूरी तरह नष्ट हो गया, उसके बारे में हम आज कैसे जानते हैं? बच्चों के जवाब बोर्ड पर लिखिए और ऊपर के छह स्रोतों से मिलाइए। जो स्रोत छूट गए, वे अध्याय में आगे आएँगे।

अध्याय के आँकड़े — तथ्य एक नज़र में

काल-रेखा 1: महत्वपूर्ण राजनीतिक परिवर्तन (पृष्ठ 193)

लगभग कालघटनाएँपृष्ठ
लगभग 1200-1300 ईसवीदिल्ली सल्तनत की स्थापना (1206)193
लगभग 1300-1400 ईसवीविजयनगर साम्राज्य की स्थापना (1336?); बहमनी राज्य की स्थापना (1347); जौनपुर, कश्मीर और मदुरई में सल्तनतें193
लगभग 1400-1500 ईसवीउड़ीसा के गजपति राज्य की स्थापना (1435); गुजरात और मालवा की सल्तनतों की स्थापना; अहमदनगर, बीजापुर तथा बेरार सल्तनतों का उदय (1490)193
लगभग 1500-1600 ईसवीपुर्तगालियों द्वारा गोवा पर विजय (1510); बहमनी राज्य का विनाश; गोलकुंडा की सल्तनत का उदय (1518); बाबर द्वारा मुगल साम्राज्य की स्थापना (1526)193

काल-रेखा 2: विजयनगर की खोज व संरक्षण की मुख्य घटनाएँ (पृष्ठ 193)

वर्षघटनापृष्ठ
1800कॉलिन मैकेन्ज़ी द्वारा विजयनगर की यात्रा193
1856अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने हम्पी के पुरातात्विक अवशेषों के पहले विस्तृत चित्र लिए193
1876पुरास्थल की मंदिर की दीवारों के अभिलेखों का जे.एफ. फ्लीट द्वारा प्रलेखन आरंभ193
1902जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण कार्य आरंभ193
1986हम्पी को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया जाना193

अध्याय के बीच के आँकड़े

आँकड़ाकिसकापृष्ठ
चौदहवीं शताब्दीविजयनगर साम्राज्य की स्थापना170
1336“परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” हरिहर और बुक्का द्वारा साम्राज्य की स्थापना (काल-रेखा 1 में “1336?”)171, 193
1800 ई.मैकेन्ज़ी ने हम्पी के भग्नावशेष प्रकाश में लाए और पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया170
1836 से; 1856 ई. सेअभिलेखकर्ताओं ने कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे किए; छायाचित्रकारों ने भवनों के चित्र संकलित किए170
1754; 1815; 1821मैकेन्ज़ी का जन्म; भारत के पहले सर्वेयर जनरल बने; मृत्यु171
लगभग 1825 ई.चित्र 7.2: थॉमस हिकी के तैलचित्र की प्रतिलिपि (मैकेन्ज़ी और उनके सहायक)171
1498 ई.पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आने लगे172
1485; 1503संगम वंश का नियंत्रण इस वर्ष तक; सुलुवों का शासन इस वर्ष तक173
1509–29कृष्णदेव राय का शासनकाल173
1512; 1514; 1520रायचूर दोआब हासिल; उड़ीसा के शासकों का दमन; बीजापुर के सुल्तान की हार173
1529; 1542कृष्णदेव राय की मृत्यु; केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में173
1565राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) का युद्ध; शहर लूटा गया173
सत्रहवीं शताब्दीकई नायकों ने स्वतंत्र राज्य बनाए; अराविदु वंश इस शताब्दी के अंत तक सत्ता में173, 175
पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षकमलपुरम् जलाशय बना177
सातअब्दुर रज़्ज़ाक के अनुसार दुर्गों की पंक्तियाँ177
9 मील (लगभग 15 किमी) से अधिक; पन्द्रह से बीस हज़ारपेस के अनुसार कृष्णदेव राय के जलाशय तक पाइपों से पानी आने की दूरी; उस जलाशय पर काम करते आदमी177
60 से भी अधिक; लगभग तीसराजकीय केंद्र के मन्दिर; महल के रूप में पहचानी गई संरचनाएँ179
लगभग 11000 वर्ग फीट; 40 फीटमहानवमी डिब्बा का आधार; ऊँचाई180
दस दिन; सितंबर और अक्टूबरशरद मास का दस दिन का हिंदू त्योहार; डिब्बा के अनुष्ठान संभवत: इसके महानवमी के अवसर पर किए जाते थे180
नौकमल महल की मीनारें181
नवीं–दसवीं शताब्दियाँविरुपाक्ष का सबसे प्राचीन मन्दिर186
1976हम्पी राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल188
1980 के दशक का आरंभ; लगभग बीस वर्षप्रलेखन परियोजना की शुरुआत; उसकी अवधि188
25पूरे क्षेत्र के वर्गाकार भाग, हर एक वर्णमाला के एक अक्षर से189

ध्यान दीजिए:

  • काल-रेखा 1 की 1490 वाली पंक्ति: किताब की काल-रेखा में यहाँ ‘अहमदाबाद’ छपा है; पृष्ठ 173 का पाठ अहमदनगर बताता है।
  • काल-रेखा 2 की 1986 वाली पंक्ति: किताब में यहाँ ‘विश्व पुरातत्व स्थल’ छपा है; यूनेस्को की सूची में हम्पी विश्व धरोहर स्थल के रूप में दर्ज है, इसलिए इस पन्ने पर ‘विश्व धरोहर स्थल’ लिखा है।
  • 1336 का प्रश्नचिह्न: काल-रेखा 1 में यह तिथि “1336?” छपी है, यानी अनिश्चित। उत्तर में बच्चे “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” के साथ ही लिखें (पृष्ठ 171)।
  • नक्शे के नाम और पाठ के नाम: चित्र 7.4 के नक्शे पर जिसे “शाही केंद्र” लिखा है, किताब का पाठ ज़्यादातर उसे राजकीय केंद्र कहता है (पृष्ठ 176, 179), पर पृष्ठ 192 और अभ्यास का प्रश्न 6 भी “शाही केंद्र” कहते हैं। दोनों नाम एक ही भाग के हैं।
  • एक युद्ध, दो नाम: राक्षसी–तांगड़ी के युद्ध को तालीकोटा का युद्ध भी कहते हैं (पृष्ठ 173)। दोनों नाम सही हैं।

मुख्य शब्द — किताब की परिभाषाएँ

शब्दकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
हम्पीउजड़े विजयनगर का वह नाम जिससे कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के लोग उसे याद रखते रहे; यह नाम स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से बना170
कर्नाटक साम्राज्यमुविजयनगर साम्राज्य के लिए समकालीन लोगों का नाम; “विजयनगर साम्राज्य” इतिहासकारों का शब्द है171
रायविजयनगर के शासक अपने को इसी नाम से पुकारते थे172
कुदिरई चेट्टीघोड़ों के स्थानीय व्यापारी, जो अरब व्यापारियों के साथ घोड़ों के व्यापार में भाग लेते थे172
गजपतिशाब्दिक अर्थ हाथियों का स्वामी; पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली वंश का नाम172
अश्वपति, नरपतिविजयनगर की लोक परंपराओं में: दक्कन के सुल्तानों के लिए अश्वपति (घोड़ों के स्वामी), रायों के लिए नरपति (लोगों के स्वामी)172
यवनसंस्कृत शब्द, जो यूनानियों और उत्तर-पश्चिम से उपमहाद्वीप में आने वाले दूसरे लोगों के लिए प्रयोग होता था174
नायकविजयनगर साम्राज्य के सेना प्रमुख, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे; ये आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे175
अमर–नायकसैनिक कमांडर, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे; अमर शब्द संस्कृत समर (लड़ाई या युद्ध) से बना माना जाता है175
इक्तादिल्ली सल्तनत की प्रणाली; ऐसा प्रतीत होता है कि अमर–नायक प्रणाली के कई तत्त्व इसी से लिए गए175
हौज़विजयनगर में जल-धाराओं के साथ बाँध बनाकर बनाए गए अलग-अलग आकार के जलाशय177
इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी)कला-इतिहासकारों का नाम उस शैली के लिए जो अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से विकसित हुई; मेहराब और गुंबद इसके तत्त्व माने जाते हैं178
राजकीय केंद्रविजयनगर बस्ती का दक्षिण-पश्चिमी भाग, जिसमें लगभग तीस महल और 60 से भी अधिक मन्दिर थे179
महानवमी डिब्बाराजकीय केंद्र में शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना विशाल मंच; नाम महानवमी (महान नवाँ दिवस) के त्योहार से180
खड़ा रेखाचित्रकिसी वस्तु या संरचना का ऊर्ध्व अवलोकन, जो वे अभिलक्षण भी दिखाता है जो छाया-चित्र में नहीं दिखते181
नक्शाकिसी संरचना का समस्तरी (ऊपर से देखा) अवलोकन182
धार्मिक केंद्रविजयनगर शहर का तुंगभद्रा नदी के किनारे वाला चट्टानी उत्तरी भाग184
हिन्दू सूरतराणाविजयनगर के शासकों की उपाधि: अरबी शब्द सुल्तान (राजा) का संस्कृत रूपांतरण, शाब्दिक अर्थ हिंदू सुलतान184
राय गोपुरम्मन्दिर का राजकीय प्रवेशद्वार, जो अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना कर देता था और दूर से मन्दिर का संकेत देता था185
मण्डपमन्दिर के देवस्थलों के चारों ओर बने सभागार: कुछ में संगीत, नृत्य और नाटक, कुछ में देवताओं के विवाह, कुछ में देवताओं को झूला झुलाना186, 187
रथ गलीमन्दिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में जाने वाली, पत्थर के फर्श वाली गली, जिसके दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डपों में व्यापारी दुकानें लगाते थे188

आगे की कक्षाओं और दूसरे विषयों से जोड़

  • पिछले अध्यायों से: हमारी ओर से: इस अध्याय में विदेशी यात्रियों के वृत्तांत बार-बार आते हैं (पृष्ठ 176 का बॉक्स, और स्रोत 3, 4 और 5)। अध्याय “यात्रियों के नज़रिए” के रिवीजन नोट्स बच्चों से एक बार दोहरवा लीजिए, ताकि वे यात्री के वृत्तांत को स्रोत की तरह पढ़ें: यात्री कहाँ से आया और उसने क्या अपनी आँखों से देखा।
  • भूगोल: प्रश्न 10 मानचित्र कार्य है: विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस (पृष्ठ 195)। एटलस पर ये देश ढूँढ़ने का अभ्यास पहले से करा दीजिए।
  • गणित: हमारी ओर से: चित्र 7.4 (पृष्ठ 176) और चित्र 7.27 (पृष्ठ 189) की पैमाना पट्टी से बच्चे दो जगहों के बीच की दूरी नापें।

किताब की प्रश्नावली के उत्तर

चर्चा कीजिए — पृष्ठ 175 से 188 तक के चार बॉक्स

किताब ने अध्याय के बीच चार “चर्चा कीजिए” बॉक्स रखे हैं। ये प्रश्नावली में नहीं हैं, पर चारों अगले भाग की ओर ले जाते हैं, इसलिए हर एक के लिए कक्षा में पाँच-सात मिनट रखिए।

पृष्ठ 175 — “मानचित्र 1 पर चन्द्रगिरी, मदुरई, इक्केरी, तंजावुर तथा मैसूर को चिह्नित कीजिए, ये सभी नायक शक्ति के केंद्र थे। यह भी चर्चा कीजिए कि नदियों और पहाड़ों ने किन मायनों में विजयनगर के साथ संचार को सरल अथवा बाधित किया।”

नमूना उत्तर — पहला भाग मानचित्र पर अंकन का है; दूसरा भाग चर्चा का, जिसका उत्तर किताब सीधे नहीं देती।

  • अंकन: पाँचों केंद्र मानचित्र 1 (पृष्ठ 174) पर ढूँढकर अंकित कीजिए, और देखिए कि हर एक विजयनगर से किस दिशा में है।
  • नदियाँ: मानचित्र 1 पर बहती नदियाँ देखिए। नदी के साथ-साथ चलना आसान रहा होगा, पर उसे पार करना कठिन।
  • पहाड़: पृष्ठ 178 बताता है कि विजयनगर की सड़कें पहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से होकर जाती थीं; इससे सोचिए कि पहाड़ कहाँ रास्ता रोकते होंगे।

हमारी ओर से: मानचित्र 1 पर “इक्केरी” की जगह “केरी” छपा है; बच्चों को बता दीजिए कि दोनों एक ही जगह हैं।

पृष्ठ 179 — “विजयनगर की रूपरेखा की तुलना अपने नगर या गाँव की रूपरेखा से कीजिए।”

नमूना उत्तर — यह अपने इलाके की तुलना है। पहले बोर्ड पर विजयनगर के भाग लिखिए, फिर बच्चे अपने नगर या गाँव के भाग बताएँ:

  • विजयनगर: बाहरी दीवार, धार्मिक केंद्र, शहरी केंद्र, राजकीय केंद्र, दीवारों के भीतर खेत, नहरें और जलाशय, घाटियों से होकर जाती सड़कें, और मन्दिरों के प्रवेशद्वारों से निकलती बाज़ार वाली सड़कें।
  • अपना नगर या गाँव: पानी कहाँ से आता है, बाज़ार कहाँ है, पूजा स्थल कहाँ हैं, खेत बस्ती के भीतर हैं या बाहर, और सरकारी दफ़्तर कहाँ हैं।

दोनों का एक सादा नक्शा बनवाकर दो समानताएँ और दो अंतर लिखवाइए।

पृष्ठ 183 — “नायकों ने विजयनगर के शासकों की भवन निर्माण परंपराओं को जारी क्यों रखा?”

नमूना उत्तर — किताब बताती है कि शहर पर आक्रमण के बाद भी नायकों ने महलनुमा संरचनाएँ बनाने की परंपरा जारी रखी, और “कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरमों का निर्माण भी स्थानीय नायकों द्वारा किया गया था” (पृष्ठ 188)। कारणों के लिए किताब की ये बातें जोड़िए:

  • नए शासक: नायक पहले विजयनगर के अधीन सेना प्रमुख थे, और सत्रहवीं शताब्दी में कई ने अपने स्वतंत्र राज्य बना लिए; उन्हें अपनी सत्ता दिखानी थी।
  • मान्यता: शासकों के लिए मन्दिरों का निर्माण, मरम्मत और रख-रखाव अपनी सत्ता, संपत्ति और निष्ठा के लिए समर्थन और मान्यता पाने के महत्त्वपूर्ण माध्यम थे।
  • ताकत की याद: ऊँचे गोपुरम् संभवत: शासकों की उस ताकत की याद दिलाते थे जो इतनी ऊँची मीनारें बनाने के साधन, तकनीक और कौशल जुटा सकती थी।

पृष्ठ 188 — “आनुष्ठानिक स्थापत्य की पूर्ववर्ती परंपराओं को विजयनगर के शासकों ने कैसे और क्यों अपनाया तथा रूपान्तरित किया?”

नमूना उत्तर — इस चर्चा के दो भाग हैं, और दोनों भाग 5 से आते हैं:

  • कैसे: पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाने वाली मन्दिर परंपरा अपनाई; उसमें विशाल राय गोपुरम्, लंबे स्तंभों वाले गलियारे, अलग-अलग कामों के मण्डप और रथ गलियाँ जोड़ीं; राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित होने लगीं।
  • क्यों: शासक मन्दिर निर्माण से अपने को ईश्वर से जोड़ते थे और भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे; मन्दिर धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र थे।
  • एक संस्कृति: महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विट्ठल की पूजा कर्नाटक में आरंभ करना दिखाता है कि शासकों ने “एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण के लिए” अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात किया।

यह बॉक्स प्रश्न 8 की सीधी तैयारी है (नीचे प्रश्न 8)।

1 से 5 तक के प्रश्न — उत्तर के मुख्य बिंदु

ये प्रश्न लगभग 100 से 150 शब्दों में उत्तर माँगते हैं (पृष्ठ 194)। हर प्रश्न के नीचे पहले वे बिंदु हैं जो उत्तर में होने चाहिए, फिर जाँचने की एक बात, फिर एक नमूना उत्तर। यही उत्तर रिवीजन नोट्स में भी हैं, ताकि बच्चे और आप एक ही बात पढ़ें।

प्रश्न 1 — हम्पी के अध्ययन की पद्धतियाँ और पुरोहितों की जानकारी (पृष्ठ 170, 188–189, 193)

  1. 1800 ई. में कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेष प्रकाश में लाए और पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया (पृष्ठ 170)।
  2. उनकी शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी (पृष्ठ 170)।
  3. 1856 ई. से छायाचित्र, 1836 से अभिलेख इकट्ठे हुए; 1876 में जे.एफ. फ्लीट ने मंदिरों की दीवारों के अभिलेखों का प्रलेखन शुरू किया (पृष्ठ 170, 193)।
  4. इन स्रोतों का मिलान विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य से हुआ (पृष्ठ 170)।
  5. 1902 से जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण; 1980 के दशक के आरंभ से लगभग बीस वर्ष तक पूरे क्षेत्र का वर्गों में बाँटकर प्रलेखन (पृष्ठ 188–189, 193)।

जाँचते समय: प्रश्न के दो हिस्से हैं: पद्धतियाँ कौन-सी थीं, और वे पुरोहितों की जानकारी की पूरक कैसे बनीं। केवल पद्धतियों की सूची लिखने वाला उत्तर आधा है।

नमूना उत्तर — 1800 से आज तक हम्पी के खंडहर कई पद्धतियों से पढ़े गए, और हर पद्धति ने पुरोहितों की स्मृति को परखा और आगे बढ़ाया।

  • सर्वेक्षण मानचित्र: 1800 ई. में कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेष प्रकाश में लाए और इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया।
  • अभिलेख: 1836 से अभिलेखकर्ताओं ने कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे किए; 1876 में जे.एफ. फ्लीट ने मंदिरों की दीवारों के अभिलेखों का प्रलेखन शुरू किया।
  • छायाचित्र: 1856 ई. से भवनों के चित्र संकलित हुए; अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने अवशेषों के पहले विस्तृत चित्र लिए।
  • मिलान: इतिहासकारों ने इन स्रोतों का विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य से मिलान किया।
  • संरक्षण और अंकन: 1902 से जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण हुआ; 1980 के दशक के आरंभ से लगभग बीस वर्ष तक पूरे क्षेत्र को 25 वर्गों और फिर छोटी इकाइयों में बाँटकर हज़ारों संरचनाओं का प्रलेखन हुआ।

पूरक कैसे (हमारी ओर से; किताब यह हिस्सा “आपके अनुसार” कहकर पूछती है):

  • स्मृति से शुरुआत: मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी (पृष्ठ 170)।
  • लिखित साक्ष्य: अभिलेख और यात्रियों के वृत्तांत इन स्मृतियों के साथ लिखित सबूत रखते हैं।
  • भौतिक साक्ष्य: छायाचित्र, सर्वेक्षण मानचित्र और भवनों के अवशेष दिखाते हैं कि भवन कैसे थे और कहाँ थे।
  • मिलान: बच्चा अपने शब्दों में बताए कि एक स्रोत की बात दूसरे से कैसे पक्की या पूरी होती है।

प्रश्न 2 — विजयनगर की जल-आवश्यकताएँ (पृष्ठ 177, 179)

  1. विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में था (पृष्ठ 177)।
  2. तुंगभद्रा का प्राकृतिक कुण्ड; ग्रेनाइट पहाड़ियों से आती धाराओं पर बाँध बनाकर हौज़ (पृष्ठ 177)।
  3. कमलपुरम् जलाशय, पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में; खेतों की सिंचाई और राजकीय केंद्र तक नहर (पृष्ठ 177)।
  4. हिरिया नहर, जिसे संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाया (पृष्ठ 177)।
  5. सामान्य लोगों के लिए कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय (पृष्ठ 179)।

जाँचते समय: “संभवत:” दोनों जगह बना रहे: हिरिया नहर किसने बनवाई, और आम लोग पानी कहाँ से लेते थे। किताब इन दोनों को पक्का नहीं कहती।

नमूना उत्तर — विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में था, इसलिए पानी इकट्ठा करने और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध किए गए।

  • नदी और पहाड़ियाँ: तुंगभद्रा नदी ने यहाँ एक प्राकृतिक कुण्ड बनाया; चारों ओर की ग्रेनाइट पहाड़ियों से कई जल-धाराएँ नदी में मिलती थीं।
  • हौज़: लगभग सभी धाराओं के साथ बाँध बनाकर अलग-अलग आकार के हौज़ बनाए गए।
  • कमलपुरम् जलाशय: पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में बना; इससे आस-पास के खेत सींचे जाते थे और एक नहर से पानी राजकीय केंद्र तक जाता था।
  • हिरिया नहर: तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाकर धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी सींचती थी; संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाई।
  • कृष्णदेव राय का जलाशय (स्रोत 4): पेस के अनुसार इसमें पानी 9 मील (लगभग 15 किमी) से भी अधिक दूरी से पाइपों से आता था।
  • आम लोगों के लिए: कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: सामान्य नगर निवासियों के लिए पानी के स्रोत थे।

प्रश्न 3 — क़िलेबंद क्षेत्र में खेती: फ़ायदे और नुकसान (पृष्ठ 173, 177–178)

  1. क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा था: अब्दुर रज़्ज़ाक के अनुसार “पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं” (पृष्ठ 177–178)।
  2. घेराबंदी का उद्देश्य खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था; भीतर खेत होने से भोजन मिलता रहता (पृष्ठ 178)।
  3. यह कृषि क्षेत्र तुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहर प्रणाली से सींचा जाता था (पृष्ठ 178)।
  4. दूसरे शासक अन्नागार बनवाते थे; किताब विजयनगर की नीति को “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” कहती है (पृष्ठ 178)।

जाँचते समय: किताब फ़ायदे खुद बताती है, नुकसान नहीं। नुकसान वाले हिस्से में बच्चे अपना तर्क लिखेंगे; उसमें खर्च वाली बात किताब के “मँहगी” शब्द से जुड़ती है, और 1565 की लूट वाली बात पृष्ठ 173 से। दोनों हिस्से हों, तभी पूरा उत्तर है।

नमूना उत्तर — विजयनगर की क़िलेबंदी ने शहर के साथ खेतों को भी घेरा था। अब्दुर रज़्ज़ाक के अनुसार “पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं”।

  • फ़ायदा, घेराबंदी में भोजन: मध्यकालीन घेराबंदियाँ महीनों या वर्षों चल सकती थीं और उनका मुख्य उद्देश्य शहर को भोजन से वंचित करना होता था; भीतर खेत होने से शहर भूखा नहीं रहता।
  • फ़ायदा, भीतर ही पानी: यह कृषि क्षेत्र नहर प्रणाली से सींचा जाता था, इसलिए घेरे में भी फ़सल उग सकती थी।
  • फ़ायदा, अन्नागार से आगे: आम तौर पर शासक क़िलेबंद क्षेत्रों के भीतर विशाल अन्नागार बनवाते थे; विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को बचाने की नीति अपनाई।
  • नुकसान, भारी खर्च: किताब इसे “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” कहती है; इतनी लंबी दीवारें बनाना और सँभालना महँगा था।
  • नुकसान, बचाव कठिन (हमारी ओर से): पहाड़ियों, खेतों और जंगलों तक फैले इतने बड़े घेरे की रक्षा के लिए बहुत सैनिक चाहिए होते।
  • नुकसान, फिर भी नहीं बचा (हमारी ओर से): 1565 में सेना की हार के बाद शहर लूटा गया; दीवारें और भीतर के खेत शहर को नहीं बचा सके।

प्रश्न 4 — महानवमी डिब्बा के अनुष्ठानों का महत्त्व (पृष्ठ 180–181)

  1. अनुष्ठान संभवत: सितंबर और अक्टूबर के दस दिन के हिंदू त्योहार के महानवमी (महान नवाँ दिवस) के अवसर पर किए जाते थे (पृष्ठ 180–181)।
  2. शासक अपने “रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य” का प्रदर्शन करते थे (पृष्ठ 181)।
  3. मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा, भैंसों और दूसरे जानवरों की बलि; नृत्य, कुश्ती, शोभायात्रा; नायकों की भेंट (पृष्ठ 181)।
  4. अंतिम दिन राजा अपनी और अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था; नायक भेंट और नियत कर लाते थे (पृष्ठ 181)।
  5. किताब: “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।” (पृष्ठ 181)

जाँचते समय: “महत्त्व” पूछा है, केवल अनुष्ठानों की सूची नहीं। हर अनुष्ठान के आगे यह लिखा हो कि उससे राजा को क्या मिलता था: ताक़त का प्रदर्शन, नायकों की निष्ठा, सेना पर नज़र। “संभवत:” और “पहेली” वाली सावधानी भी रहे।

नमूना उत्तर — महानवमी डिब्बा से जुड़े अनुष्ठान संभवत: सितंबर-अक्टूबर के दस दिन के हिंदू त्योहार के महानवमी पर होते थे, और किताब कहती है कि “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।”

  • ताक़त का प्रदर्शन: इस अवसर पर विजयनगर शासक अपने “रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य” का प्रदर्शन करते थे।
  • धर्म से जुड़ाव: मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा और भैंसों तथा अन्य जानवरों की बलि से राजसत्ता धार्मिक अनुष्ठान के साथ जुड़ी दिखती थी।
  • नायकों की निष्ठा: प्रमुख नायक और अधीनस्थ राजा, राजा और उसके अतिथियों को औपचारिक भेंट देते थे; अंतिम दिन नायक बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर भी लाते थे।
  • सेना का निरीक्षण: त्योहार के अंतिम दिन राजा खुले मैदान में भव्य समारोह में अपनी और अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था।
  • उत्सव: नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा और साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा।

विद्वानों के अनुसार आज की संरचना के चारों ओर का स्थान इतनी बड़ी शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था, इसलिए किताब इसे “एक पहेली” कहती है।

प्रश्न 5 — चित्र 7.33: विरुपाक्ष मन्दिर का एक स्तंभ (पृष्ठ 185–186, 194)

  1. उत्तर चित्र 7.33 को देखकर लिखना है: फूल, जानवर, मानव आकृतियाँ (पृष्ठ 194)।
  2. किताब इस चित्र का अलग वर्णन नहीं देती; पृष्ठ 186 का चित्र 7.23 भी मूर्तियों वाले स्तंभ का रेखाचित्र है।
  3. “क्यों” के लिए किताब का आधार: कृष्णदेव राय का मण्डप सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजा था; किताब के अनुसार विशाल स्तर पर बनी संरचनाएँ राजकीय सत्ता की द्योतक थीं, जिनका सबसे अच्छा उदाहरण राय गोपुरम् है (पृष्ठ 185–186)।

जाँचते समय: यहाँ कोई एक सही सूची नहीं है। अंक इस पर दीजिए कि बच्चे ने चित्र में सचमुच देखी चीज़ें लिखीं, हर आकृति के बारे में खड़ी है या बैठी, हाथ में क्या है, ऐसी बात लिखी, और “क्यों” वाले हिस्से में अपना तर्क दिया। चित्र में जो न दिखे, वह न लिखा हो।

नमूना उत्तर — चित्र 7.33 का रेखाचित्र ध्यान से देखिए और फूल, जानवर और मानव आकृतियाँ उसी से पहचानकर लिखिए। लिखते समय ये बातें काम आएँगी:

  • सजे हुए स्तंभ: विरुपाक्ष मन्दिर के मुख्य मन्दिर के सामने कृष्णदेव राय का बनवाया मण्डप सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजाया गया था।
  • फूल: स्तंभ के हर भाग में फूल, कली या पत्तियों जैसे आकार खोजिए और लिखिए कि वे कहाँ हैं।
  • जानवर क्यों: अपने विचार में लिखिए। किताब के अनुसार विशाल स्तर पर बनी संरचनाएँ, जैसे राय गोपुरम्, राजकीय सत्ता की द्योतक थीं; हमारी ओर से: स्तंभों की सजावट भी शासक की शान दिखा सकती थी।
  • मानव आकृतियाँ: हर आकृति के लिए लिखिए कि वह खड़ी है या बैठी, उसके हाथ में क्या है और वह क्या करती दिखती है।

6 से 9 तक के प्रश्न — लघु निबंध के मुख्य बिंदु

ये लघु निबंध लगभग 250-300 शब्दों में माँगे गए हैं (पृष्ठ 194)। निबंध में भूमिका, तीन-चार हिस्से और निष्कर्ष हों; हर हिस्से में किताब का कम से कम एक उदाहरण।

प्रश्न 6 — क्या “शाही केंद्र” नाम सही वर्णन है (पृष्ठ 176, 179–183)

जाँचते समय: प्रश्न “क्या” पूछता है, इसलिए हाँ और नहीं, दोनों पक्ष चाहिए। सबसे ज़रूरी तथ्य है “60 से भी अधिक मन्दिर”; जिस निबंध में यह न हो, वह प्रश्न का केंद्र छोड़ देता है।

नमूना उत्तर — भूमिका: चित्र 7.4 के नक्शे पर जिसे “शाही केंद्र” लिखा है, किताब का पाठ उसे राजकीय केंद्र कहता है। यह नाम आधा ही सही है: यहाँ राजसत्ता के भवन थे, पर धर्म के भी।

  • नाम के पक्ष में: यह बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में था और तीसरी क़िलेबंदी इसी को घेरती थी। “लगभग तीस संरचनाओं” की पहचान महलों के रूप में हुई है, जो आनुष्ठानिक कार्यों से नहीं जुड़ी थीं। सभा मंडप और महानवमी डिब्बा यहीं हैं, और कमलपुरम् जलाशय से एक नहर इस केंद्र तक पानी लाती थी।
  • नाम के विरुद्ध: इसमें “60 से भी अधिक मन्दिर” थे; इनमें हज़ार राम मन्दिर का प्रयोग संभवत: केवल राजा और उनके परिवार द्वारा होता था। “राजा का भवन” के राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं है, और सभा मंडप का प्रयोजन स्पष्ट नहीं।
  • पहेलियाँ: कमल महल का काम निश्चित नहीं, और उसका नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। महानवमी डिब्बा के बारे में किताब कहती है: “राजकीय केंद्र में स्थित कई और संरचनाओं की तरह यह भी एक पहेली बना हुआ है।”
  • धर्म और राजसत्ता साथ-साथ: मन्दिरों और संप्रदायों को संरक्षण देना उन शासकों के लिए ज़रूरी था जो देवी-देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने का प्रयास कर रहे थे।

निष्कर्ष: “शाही केंद्र” बताता है कि यहाँ राजसत्ता रहती और दिखाई जाती थी, पर यह पूरा वर्णन नहीं है। मन्दिरों की बड़ी संख्या दिखाती है कि राजसत्ता धर्म के सहारे खड़ी थी, और कई भवनों का असली काम आज भी अनिश्चित है।

प्रश्न 7 — कमल महल और हाथियों का अस्तबल: शासकों के बारे में क्या बताते हैं (पृष्ठ 172, 175, 178, 181–182, 185)

जाँचते समय: दोनों भवनों का वर्णन और फिर शासकों के बारे में निष्कर्ष, दोनों चाहिए। जो बच्चा इन भवनों का काम पक्का मानकर लिखे (जैसे, यहाँ हाथी बँधते थे), उसे याद दिलाइए कि किताब यह नाम उद्धरण-चिह्नों में देती है।

नमूना उत्तर — भूमिका: दोनों भवन राजकीय केंद्र में हैं, और इनका स्थापत्य बताता है कि विजयनगर के शासक दूसरी शैलियाँ अपनाने वाले, भव्यता चाहने वाले और अपनी ताक़त दिखाने वाले थे।

  • कमल महल: राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में से एक। “कमल महल में नौ मीनारें थीं– बीच में एक ऊँची, तथा आठ उसकी भुजाओं के साथ–साथ।” चित्र 7.13 के नीचे किताब लिखती है कि मेहराबें “संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों से प्रभावित थीं।” मैकेन्ज़ी के मानचित्र से मिले सुझाव के अनुसार यह परिषदीय सदन था।
  • “हाथियों का अस्तबल”: कमल महल के समीप; चित्र 7.16(क) में इसका खड़ा रेखाचित्र, 7.16(ख) में नक्शा और 7.17 में तसवीर है। इसकी मेहराबें चित्र 7.6 के प्रवेशद्वार की मेहराब और गुंबद से मिलाकर देखिए।
  • शैलियाँ अपनाईं: मेहराब और गुंबद तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित स्थापत्य के तत्त्व माने जाते हैं; दक्कन के सुलतानों और गजपतियों से संपर्क में विजयनगर के शासकों ने अवधारणाएँ और भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं।
  • सैनिक शक्ति: युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी और अमर-नायक घोड़ों और हाथियों के दल रखते थे; यदि ये सचमुच अस्तबल थे, तो यह भवन उसी शक्ति को दिखाता है।
  • साधन और कौशल: ऊँचे गोपुरमों के बारे में किताब कहती है कि वे शासकों की उस ताकत की याद दिलाते थे जो साधन, तकनीक और कौशल जुटा सकती थी; बड़े और सजे महलों पर भी यह बात लागू होती है।

निष्कर्ष: ये भवन ऐसे शासकों के हैं जो अलग-अलग परंपराओं को मिलाकर अपनी शक्ति और वैभव दिखाना चाहते थे। इनका काम अनिश्चित है, इसलिए यह निष्कर्ष स्थापत्य पर टिका है।

प्रश्न 8 — स्थापत्य की परंपराएँ और विजयनगर के बदलाव (पृष्ठ 171–172, 178, 181, 184–188)

जाँचते समय: दो हिस्से हैं: कौन-सी परंपराएँ, और क्या बदलाव। दोनों ओर कम से कम दो उदाहरण हों। इंडो–इस्लामिक तत्त्व भी उन्हीं परंपराओं में गिने जाएँ जिनसे विजयनगर ने सीखा, किसी टकराव की तरह नहीं।

नमूना उत्तर — भूमिका: विजयनगर के वास्तुविदों ने दक्षिण भारत की पुरानी मन्दिर परंपरा और सुल्तानों की इंडो–इस्लामिक शैली, दोनों से सीखा, और उन्हें राजकीय सत्ता दिखाने के लिए नए रूप दिए।

  • पुराने दक्षिणी राज्य: तमिलनाडु में चोलों और कर्नाटक में होयसालों के शासक वर्ग ने तंजावुर के बृहदेश्वर और बेलूर के चन्नकेशव जैसे विशाल मन्दिरों को संरक्षण दिया; विजयनगर के राय इन परंपराओं को “नयी ऊँचाइयों तक” ले गए। इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण का इतिहास पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाता है।
  • सुल्तानों से संपर्क: दक्कन के सुलतानों और उड़ीसा के गजपतियों से संपर्क में विचारों का आदान-प्रदान हुआ, विशेषकर स्थापत्य में; क़िलेबंद बस्ती के प्रवेशद्वारों पर मेहराब और गुंबद बने।
  • विशाल पैमाना: राय गोपुरम् इतने ऊँचे बने कि वे अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना कर देते थे और दूर से मन्दिर का संकेत देते थे।
  • मण्डप, गलियारे और रथ गलियाँ: स्तंभों वाले लंबे गलियारे; संगीत, नृत्य, नाटक, देवताओं के विवाह और झूले के लिए सभागार; गोपुरम् से सीधी रेखा में पत्थर के फर्श वाली रथ गलियाँ। विट्ठल मन्दिर में रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर है।
  • राजा मन्दिर में: राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित होने लगीं, और राजा की मन्दिर यात्राएँ महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर बन गईं।

निष्कर्ष: किताब के शब्दों में, विट्ठल की पूजा कर्नाटक में आरंभ करना दिखाता है कि शासकों ने “एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण के लिए” अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात किया। बाद में नायकों ने भी ये परंपराएँ जारी रखीं, और “कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरमों का निर्माण भी स्थानीय नायकों द्वारा किया गया था”।

प्रश्न 9 — सामान्य लोगों के जीवन की छवि (पृष्ठ 175, 177–179, 191–192)

जाँचते समय: अच्छा निबंध आख़िर में यह भी कहता है कि यह छवि ज़्यादातर बाहर से आए यात्रियों की आँखों से बनी है, और भाग 7 के उन प्रश्नों को छूता है जिनके उत्तर इमारतें नहीं देतीं।

नमूना उत्तर — भूमिका: अध्याय के विवरण, खासकर विदेशी यात्रियों के वृत्तांत, सामान्य लोगों के जीवन की कुछ झलक देते हैं; पर किताब साफ़ कहती है कि बहुत-सी बातें हम नहीं जानते।

  • घर और मुहल्ले: शहरी केंद्र में सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य हैं। बरबोसा के अनुसार लोगों के घर छप्पर के थे, पर सुदृढ़, और व्यवसाय के आधार पर लंबी गलियों में बसे थे। उत्तर-पूर्वी कोने में परिष्कृत चीनी मिट्टी मिली, जहाँ संभवत: अमीर व्यापारी रहते थे।
  • पानी, खेती और पूजा: कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: नगर निवासियों के पानी के स्रोत थे। दीवारों के बीच खेत और बग़ीचे थे। बहुत से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर विविध संप्रदायों की ओर संकेत करते हैं।
  • बाज़ार और भोजन: पेस (स्रोत 5) एक चौड़ी गली का वर्णन करता है जहाँ माणिक्य, हीरे, मोती और वस्त्र बिकते थे, और हर शाम मेला लगता था। पेस और नूनिज़ दोनों अनाज और फलों को सस्ता और भरपूर बताते हैं; बाज़ारों में मांस भी बड़ी मात्रा में बिकता था।
  • श्रम और कर: स्रोत 4 में पेस ने कृष्णदेव राय के जलाशय पर “पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी” काम करते देखे। अमर-नायक किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू-राजस्व और अन्य कर वसूलते थे।
  • जो हम नहीं जानते: सामान्य लोग इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे, क्या वे शाही या धार्मिक केंद्र में जा सकते थे, और राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आते थे: इमारतें देखकर इनके उत्तर नहीं मिलते।

निष्कर्ष: छवि एक भरे-पूरे व्यापारिक शहर की है, जहाँ सस्ता भोजन, कई संप्रदाय और भारी श्रम करने वाले लोग थे। पर यह छवि ज़्यादातर बाहर से आए यात्रियों की आँखों से बनी है, सामान्य लोगों की अपनी आवाज़ में नहीं।

10 से 12 तक के प्रश्न — मानचित्र और परियोजना

प्रश्न 10 — मानचित्र कार्य (पृष्ठ 195)

प्रश्न विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस अंकित करवाता है, और पृष्ठ 176 के यात्रियों के मार्ग पहचानने को कहता है।

नमूना उत्तर — पहले एटलस की मदद से चारों देश अंकित कीजिए, फिर पृष्ठ 176 के यात्रियों को उनके देश से जोड़िए:

  • इटली: निकोलो दे कॉन्ती, इतालवी व्यापारी, पंद्रहवीं शताब्दी।
  • ईरान: अब्दुर रज़्ज़ाक, फ़ारस के राजा का दूत, पंद्रहवीं शताब्दी; पृष्ठ 177 के अनुसार उसे कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा गया था।
  • रूस: अफ़ानासी निकितिन, रूस का व्यापारी, पंद्रहवीं शताब्दी।
  • पुर्तगाल: दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस और फर्नाओ नूनिज़, सोलहवीं शताब्दी।

हमारी ओर से — जाँचते समय: किताब इन यात्रियों के मार्ग नहीं बताती, इसलिए मार्ग वाले हिस्से में बच्चे एटलस से काम लेंगे; जो बच्चा मार्ग बनाए, उससे पूछिए कि उसने जानकारी कहाँ से ली। किताब से इतना जोड़ा जा सकता है कि पुर्तगाली 1498 ई. से उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आने लगे थे (पृष्ठ 172), और मानचित्र 1 (पृष्ठ 174) पर कालीकट और गोवा दिखते हैं। अंक देशों के सही अंकन और यात्रियों को सही देश से जोड़ने पर दीजिए।

प्रश्न 11 — चौदहवीं–सत्रहवीं शताब्दियों के किसी शहर पर परियोजना (पृष्ठ 195)

हमारी ओर से — तरीक़ा:

  • बच्चे 11 और 12 में से कोई एक परियोजना करें; किताब यही कहती है।
  • शहर चुनने के बाद विजयनगर के अध्याय को ढाँचा बनवाइए: दीवारें और प्रवेशद्वार, पानी के प्रबंध, राजकीय भवन, धार्मिक भवन, बाज़ार और सड़कें।
  • प्रश्न के तीनों हिस्सों के उत्तर अलग-अलग: राजनीतिक केंद्र होने के लक्षण, आनुष्ठानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भवन, और शहरी भाग को आस-पास से अलग करने वाले लक्षण।
  • हर बात के आगे उसका स्रोत लिखवाइए: यात्रियों के वृत्तांत, अभिलेख, नक्शे या तसवीरें, जैसे इस अध्याय ने किया।
  • प्रस्तुति: एक सादा नक्शा, विजयनगर से तुलना की एक तालिका, और अंत में दो-तीन वाक्य कि दोनों शहर कहाँ मिलते हैं और कहाँ अलग हैं।

प्रश्न 12 — आस-पास के किसी धार्मिक भवन का अध्ययन (पृष्ठ 195)

हमारी ओर से — तरीक़ा:

  • बच्चा कोई भी पास का धार्मिक भवन चुन सकता है; परियोजना भवन की बनावट की है, पूजा या किसी अनुष्ठान में भाग लेने की नहीं।
  • सादे रेखाचित्र पर छत, स्तंभ, मेहराबें (यदि हों), गलियारे, रास्ते, सभागार, प्रवेशद्वार और पानी का प्रबंध अंकित हो।
  • विरुपाक्ष मन्दिर से तुलना की तालिका: ऊँचा गोपुरम्, कृष्णदेव राय का बनवाया मण्डप और पूर्वी गोपुरम्, स्तंभों वाले सभागार और गलियारे, और पूरे परिसर में छोटा-सा केंद्रीय देवालय (चित्र 7.20, 7.21)।
  • हर भाग का प्रयोग और भवन का इतिहास वहाँ के प्रबंधक या बुज़ुर्गों से पूछकर, या कोई शिलालेख हो तो उसे पढ़कर।
  • किसी बच्चे से उसके अपने धर्म या जाति के बारे में बताने को मत कहिए। जो बच्चा अपनी इच्छा से कुछ बताए, उसे सुनिए।

कक्षा में

बच्चे कहाँ भटकते हैं — दस भूलें जिनसे बचाना है

1. भूल: “विजयनगर साम्राज्य” उस समय का नाम था। सही बात: यह इतिहासकारों का शब्द है; विजयनगर के समकालीन लोग इसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहते थे (पृष्ठ 171)।

2. भूल: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की तिथि 1336 पक्की है। सही बात: किताब का पाठ कहता है कि “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” हरिहर और बुक्का ने 1336 में साम्राज्य की स्थापना की; काल-रेखा 1 में यह तिथि “1336?” छपी है, यानी अनिश्चित (पृष्ठ 171, 193)।

3. भूल: हम्पी की सारी जानकारी कॉलिन मैकेन्ज़ी की अपनी खोज थी। सही बात: मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी (पृष्ठ 170)।

4. भूल: सुलुव विजयनगर के संगम वंश की ही एक शाखा थे। सही बात: सुलुव सैनिक कमांडर थे; उन्होंने संगम वंश को उखाड़ फेंका और 1503 तक शासन किया (पृष्ठ 173)।

5. भूल: 1565 में रामराय विजयनगर के राजा थे। सही बात: रामराय प्रधानमंत्री थे; राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) के युद्ध में विजयनगर की सेना उनके नेतृत्व में बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं से हारी (पृष्ठ 173)।

6. भूल: विजयनगर और दक्कन के सुलतानों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण रहे। सही बात: किताब के अनुसार ये संबंध “धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे”। कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया, और उनकी मृत्यु के बाद बीजापुर के सुल्तान ने विजयनगर के उत्तराधिकार विवाद सुलझाने में हस्तक्षेप किया (पृष्ठ 174)।

7. भूल: अमर–नायक प्रणाली पूरी तरह विजयनगर की अपनी नई चीज़ थी। सही बात: किताब इसे विजयनगर साम्राज्य की “एक प्रमुख राजनीतिक खोज” कहती है, और साथ में यह भी कि “ऐसा प्रतीत होता है” कि इसके कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए थे (पृष्ठ 175)।

8. भूल: विजयनगर के खेत शहर की दीवारों के बाहर थे। सही बात: क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा था; अब्दुर रज़्ज़ाक के अनुसार “पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं” (पृष्ठ 177–178)।

9. भूल: विजयनगर के राजकीय केंद्र में केवल महल थे, और हर इमारत का काम पक्का पता है। सही बात: वहाँ 60 से भी अधिक मन्दिर थे, और लगभग तीस संरचनाएँ महलों के रूप में पहचानी गई हैं। “राजा का भवन”, महानवमी डिब्बा और कमल महल जैसी कई संरचनाओं का प्रयोजन निश्चित नहीं है, और “कमल महल” नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों का दिया हुआ है (पृष्ठ 179–181)।

10. भूल: विजयनगर के विट्ठल मन्दिर के देवता विट्ठल शिव का रूप हैं। सही बात: विट्ठल विष्णु का एक रूप हैं, जो सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते हैं (पृष्ठ 187)।

किताब की पंक्तियाँ जो उत्तर में काम आती हैं

बच्चे इन्हें उद्धरण-चिह्नों में, पृष्ठ के साथ लिखना सीखें। एक सही उद्धरण पूरे उत्तर को किताब से जोड़ देता है।

पंक्तिपृष्ठकहाँ काम आती है
“जहाँ इतिहासकार विजयनगर साम्राज्य शब्द का प्रयोग करते हैं वहीं समकालीन लोगों ने उसे कर्नाटक साम्राज्यमु की संज्ञा दी।”171साम्राज्य के नाम पर कोई भी प्रश्न
“अतुलनीय शांति और समृद्धि की स्थितियों में फला–फूला”173कृष्णदेव राय के शासन पर कोई भी प्रश्न
“धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे।”174सुलतानों से संबंधों पर कोई भी प्रश्न
“यह रामराय की जोखिम भरी नीति थी”1741565 के युद्ध पर कोई भी प्रश्न
“अमर–नायक प्रणाली विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी।”175अमर–नायकों पर कोई भी प्रश्न
“प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक”177प्रश्न 2
“पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं”177–178प्रश्न 3
“एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति”178प्रश्न 3
“कला–इतिहासकार इस शैली को इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) कहते हैं क्योंकि इसका विकास विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य की परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ।”178प्रश्न 8
“जो संभवत: विभिन्न समुदायों द्वारा संरक्षित थे”179प्रश्न 9
“इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।”181प्रश्न 4
“राजकीय केंद्र में स्थित कई और संरचनाओं की तरह यह भी एक पहेली बना हुआ है।”181प्रश्न 6, प्रश्न 7
“संभवत: इसका प्रयोग केवल राजा और उनके परिवार द्वारा ही किया जाता था।”183प्रश्न 6 (हज़ार राम मन्दिर)
“यह संभव है कि विजयनगर के स्थान का चयन वहाँ विरुपाक्ष तथा पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था।”184प्रश्न 8
“एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण के लिए”188प्रश्न 8
“संभवत: अन्य स्त्रोतों के प्रयोग से जारी शोध कुछ और संकेत दे सकें।”192प्रश्न 9

बच्चे ये सवाल पूछेंगे — किताब के अपने सवाल

ये उन्नीस सवाल किताब के पन्नों के किनारे छपे हैं। पढ़ाते समय बच्चे इन्हीं पर अटकते हैं, इसलिए हर एक का उत्तर यहाँ है, पृष्ठ के क्रम में।

पृष्ठ 171 — “मैकेन्ज़ी और उनके देशज सूचनादाताओं को चित्रकार ने किस प्रकार चित्रित किया है? उनके तथा उनके सूचनादाताओं के विषय में दर्शकों पर किस प्रकार के विचार डालने का प्रयास किया गया है?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.2 ध्यान से देखिए और अपनी राय लिखिए। किताब से ये बातें काम आएँगी:

  • चित्र में कौन: मैकेन्ज़ी के बायीं ओर दूरबीन थामे उनका चपरासी, और दायीं ओर उनके ब्राह्मण सहायक: एक जैन पंडित और उनके पीछे तेलुगु ब्राह्मण कावलेरी वेन्तक लच्छमैया।

  • क्या देखें: किसे बीच में और प्रमुख दिखाया गया है, और सूचनादाता किस मुद्रा में खड़े हैं।

  • मैकेन्ज़ी का नज़रिया: स्रोत 1 में वे कहते हैं कि ब्रिटिश प्रशासन से पहले दक्षिण भारत “खराब प्रबंधन की दुर्गति” से जूझता रहा। सोचिए कि क्या चित्र भी यही संदेश देता है कि ज्ञान का श्रेय अंग्रेज़ अधिकारी का है और भारतीय जानकार केवल सहायक हैं।

पृष्ठ 173 — “आपके विचार में राजा व्यापार को प्रोत्साहित करने का इच्छुक क्यों था? इन विनिमयों से किन समूहों को लाभ पहुँचा होगा?”

नमूना उत्तर — स्रोत 2 (कृष्णदेव राय की अमुक्तमल्यद) और भाग 2.1 से:

  • क्यों: युद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए अरब और मध्य एशिया के घोड़े ज़रूरी थे; व्यापार प्रतिष्ठा का मानक था; व्यापार का राजस्व राज्य की समृद्धि बढ़ाता था; और व्यापारियों को अपने साथ जोड़ने से, कृष्णदेव राय के शब्दों में, “ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी।”

  • किन्हें लाभ: राजा और राज्य (घोड़े, हाथी, राजस्व); दूर देशों के व्यापारी (तोहफ़े और उचित मुनाफ़ा); अरब व्यापारी और कुदिरई चेट्टी; विदेशी नाविक, जिनकी देखभाल का प्रबंध होना था; और समृद्ध जनता, जो मँहगी विदेशी वस्तुएँ, विशेषकर रत्न और आभूषण चाहती थी।

पृष्ठ 174 — “उन आधुनिक राज्यों को चिह्नित कीजिए जो विजयनगर साम्राज्य का भाग थे।”

नमूना उत्तर — किताब आधुनिक राज्यों की सूची नहीं देती; भारत के आज के राजनीतिक मानचित्र को मानचित्र 1 के साथ रखकर स्वयं पहचानिए।

  • मदद के लिए: अपने चरमोत्कर्ष पर साम्राज्य उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था, और अध्याय में तमिलनाडु (चोल) और कर्नाटक (होयसाल) के नाम आते हैं।

  • मानचित्र 1 पर विजयनगर, चन्द्रगिरी, तंजावुर, मदुरई और मैसूर ढूँढिए और पता कीजिए कि ये आज किन राज्यों में हैं।

पृष्ठ 176 — “नक्शे पर बने तीन अंचलों को पहचानिए। मध्यभाग को ध्यान से देखिए। क्या आप नदियों से जुड़ती हुई नहरों को देख सकते हैं? आप कितनी किलेबन्द दीवारों को देख सकते हैं। क्या धार्मिक केंद्र किलेबन्द था?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.4 (विजयनगर का नक्शा) पर देखिए:

  • तीन अंचल: नक्शे पर “पवित्र केंद्र” (हम्पी के पास), “शाही केंद्र” और “केंद्रीय भाग” लिखे हैं।

  • नहरें: मध्यभाग में नदी से निकलती नहरें खोजिए। पाठ के अनुसार हिरिया नहर तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाती थी, और कमलपुरम् जलाशय से एक नहर राजकीय केंद्र तक जाती थी।

  • दीवारें: नक्शे पर दीवारें गिनिए। पाठ तीन क़िलेबंदियों का वर्णन करता है: सबसे बाहरी, नगरीय केंद्र के चारों ओर, और राजकीय केंद्र के चारों ओर; अब्दुर रज़्ज़ाक ने दुर्गों की सात पंक्तियाँ बताई थीं।

  • धार्मिक केंद्र: पाठ दूसरी क़िलेबंदी को नगरीय केंद्र और तीसरी को राजकीय केंद्र के चारों ओर बताता है, धार्मिक केंद्र के लिए अलग दीवार नहीं बताता; नक्शे पर स्वयं जाँचकर उत्तर दीजिए।

पृष्ठ 176 — “क्या आप आज किसी शहर में ये अभिलक्षण देख सकते हैं? आपके विचार में पेस ने उद्यानों तथा जल–स्रोतों को विशेष–उल्लेख के लिए क्यों चुना?”

नमूना उत्तर — पहला भाग आपके अपने अनुभव से है: अपने या किसी जाने-पहचाने शहर में उपवन, बगीचे, नहरें या झीलें खोजिए।

  • दूसरे भाग के लिए: विजयनगर प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक में था, इसलिए वहाँ इतने उपवन, बगीचे, पानी की नालियाँ और झीलें देखना एक यात्री को उल्लेख के लायक लगा होगा; ये शहर की समृद्धि और जल-प्रबंध दिखाते थे। (पृष्ठ 176–177)

पृष्ठ 178 — “इन दो प्रवेश–द्वारों के बीच समानताओं तथा विभिन्नताओं का वर्णन कीजिए। आपके विचार में विजयनगर के शासकों ने इण्डो–इस्लामी स्थापत्य के तत्त्वों को क्यों अपनाया?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.6 (क़िलेबंद दीवार में बना एक प्रवेशद्वार) और चित्र 7.7 (एक गोपुरम्) मिलाकर देखिए।

  • तुलना: दोनों प्रवेश को नियंत्रित करते हैं और विशिष्ट स्थापत्य के नमूने हैं; किताब के अनुसार 7.6 में मेहराब और ऊपर गुंबद है, जबकि 7.7 मन्दिर का गोपुरम् है। अंतर के लिए दोनों के ऊपरी भाग का आकार, ऊँचाई और सजावट मिलाइए।

  • क्यों अपनाए: दक्कन के सुलतानों और गजपतियों से संपर्क में विजयनगर के शासकों ने अवधारणाएँ और भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं और उन्हें आगे विकसित किया; इंडो–इस्लामिक शैली स्थानीय परंपराओं के साथ संपर्क से ही विकसित हुई थी। अपने विचार में जोड़िए कि नई तकनीकें मज़बूत और प्रभावशाली प्रवेशद्वार बनाने में काम आती होंगी।

पृष्ठ 179 — “आपके विचार में ये टुकड़े मूलत: किस प्रकार के बर्तनों का हिस्सा थे?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.9 (चीनी मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े) देखकर अपना अनुमान लिखिए, जैसे प्याले, कटोरे या थालियाँ।

  • किताब इतना बताती है कि शहरी केंद्र के उत्तर-पूर्वी कोने जैसे स्थानों में परिष्कृत चीनी मिट्टी मिली, जिससे पुरातत्त्वविद मानते हैं कि हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों; यानी ये मँहगे बर्तन रहे होंगे। (पृष्ठ 179)

पृष्ठ 179 — “क्या इस मस्जिद में इण्डो–इस्लामी स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व विद्यमान हैं?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.10 (विजयनगर में एक मस्जिद) में मेहराब और गुंबद खोजिए, जिन्हें किताब तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व मानती है।

  • साथ ही याद रखिए कि किताब के अनुसार शहरी केंद्र के मक़बरों और मस्ज़िदों का स्थापत्य हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों से मिलता-जुलता है; देखिए कि यह मस्जिद स्तंभों वाले मण्डप जैसी तो नहीं लगती। (पृष्ठ 178–179)

पृष्ठ 180 — “क्या आप इन चित्रों के विषयों को पहचान सकते हैं?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.12 (महानवमी डिब्बा पर उत्कीर्णित चित्र) ध्यान से देखिए और हर पट्टी में दिखते लोग, जानवर और काम लिखिए।

  • मदद के लिए: महानवमी के अवसर के आकर्षण थे नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा, साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा, और राजा को दी जाने वाली भेंट; देखिए इनमें से कौन-से दृश्य उत्कीर्णन में दिखते हैं। (पृष्ठ 180–181)

पृष्ठ 181 — “चित्र 7.13 तथा 7.15 की तुलना कीजिए तथा उन अभिलक्षणों की सूची बनाइये जो दोनों में हैं, और साथ ही उनकी भी जो इनमें से केवल एक में ही देखे जा सकते हैं। चित्र 7.14 में बनी मेहराब की तुलना चित्र 7.6 में बनी मेहराब से कीजिए। कमल महल में नौ मीनारें थीं– बीच में एक ऊँची, तथा आठ उसकी भुजाओं के साथ–साथ। छाया–चित्र तथा खड़े रेखाचित्र में आप कितनी–कितनी मीनारें देख पाते हैं। यदि आप कमल महल का फिर से नामकरण करते तो इसे क्या कहते?”

नमूना उत्तर — यह चित्रों को ध्यान से देखने का अभ्यास है:

  • 7.13 और 7.15: दो सूचियाँ बनाइए: जो दोनों में दिखे (मेहराबें, मीनारें, मंज़िलें) और जो केवल एक में। याद रखिए, खड़ा रेखाचित्र ऊर्ध्व अवलोकन है और वे अभिलक्षण भी दिखाता है जो छाया-चित्र में नहीं दिखते।

  • मेहराबें: चित्र 7.14 की मेहराब को चित्र 7.6 के प्रवेशद्वार की मेहराब से मिलाइए; किताब के अनुसार कमल महल की मेहराबें संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों से प्रभावित थीं।

  • मीनारें: कुल नौ थीं; गिनिए कि छाया-चित्र और खड़े रेखाचित्र में कितनी-कितनी दिखती हैं, और सोचिए कि किसी कोने से ली गई तसवीर में कुछ मीनारें क्यों छिप जाती हैं।

  • नया नाम: अपना नाम सुझाइए और कारण लिखिए। ध्यान रखिए कि “कमल महल” नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने दिया था, और एक सुझाव के अनुसार यह परिषदीय सदन था।

पृष्ठ 182 — “चित्र 7.16(क) तथा 7.16(ख) की तुलना चित्र 7.17 से कीजिए। प्रत्येक में दिखाई देने वाले अभिलक्षणों की सूची बनाइए। क्या आपको लगता है कि ये वास्तव में हाथियों के अस्तबल थे?”

नमूना उत्तर — तीनों चित्र एक ही भवन को तीन तरह से दिखाते हैं:

  • सूची: चित्र 7.16(क) खड़ा रेखाचित्र है, 7.16(ख) नक्शा, जो किताब के अनुसार “एक संरचना का समस्तरी अवलोकन देता है”, और 7.17 आज की तसवीर; हर एक में दिखते कमरे, दरवाज़े, मेहराबें और छत लिखिए।

  • हाथी आ-जा सकते थे? नक्शे में कमरों की संख्या और आकार, और रेखाचित्र में दरवाज़ों की ऊँचाई देखिए।

  • अपनी राय: किताब यह नाम उद्धरण-चिह्नों में देती है और निश्चित उत्तर नहीं देती। सोचने के लिए: विजयनगर की सेना में घोड़ों और हाथियों के दल थे, और यह भवन राजकीय केंद्र में कमल महल के समीप है। (पृष्ठ 175, 182)

पृष्ठ 183 — “क्या आप नृत्य के दृश्यांशों को पहचान सकते हैं। आपके विचार में हाथियों और घोड़ों को पटलों पर क्यों चित्रित किया गया था?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.18 (हज़ार राम मन्दिर की दीवारों पर मूर्तिकला) में नाचती आकृतियों की पंक्तियाँ खोजिए।

  • दूसरे भाग के लिए अपना विचार लिखिए और किताब से जोड़िए: युद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी, अमर-नायक घोड़ों और हाथियों के दल रखते थे, और महानवमी पर साज़ लगे घोड़ों और हाथियों की शोभायात्रा निकलती थी।

  • यह मन्दिर संभवत: केवल राजा और उनके परिवार के प्रयोग के लिए था, इसलिए ये पटल राजा की शक्ति और वैभव दिखाते होंगे। (पृष्ठ 172, 175, 181, 183)

पृष्ठ 185 — “नक्शे में दिए गए स्केल का प्रयोग कर मुख्य गोपुरम् से केंद्रीय देवालय की दूरी नापिए। जलाशय से देवालय तक जाने के लिए सबसे आसान मार्ग कौन सा रहा होगा?”

नमूना उत्तर — यह चित्र 7.21 (विरुपाक्ष मन्दिर का नक्शा) पर नापने का अभ्यास है:

  • दूरी: नक्शे पर 30m वाली स्केल पट्टी की लंबाई रूलर से नापिए; फिर मुख्य गोपुरम् (काले रंग से भरे दो प्रमुख प्रवेशद्वारों में से) से “देवालय” लिखे केंद्रीय देवालय तक की दूरी नापिए, और अनुपात से मीटर निकालिए: (नापी गई दूरी ÷ स्केल पट्टी की लंबाई) × 30 मीटर।

  • मार्ग: “जलाशय” से देवालय तक नक्शे पर उँगली से चलकर देखिए कि रास्ते में कौन-से प्रवेशद्वार और स्तंभों वाले सभागार (बिंदुओं की पंक्तियाँ) आते हैं, और सबसे कम रुकावट वाला मार्ग चुनिए।

पृष्ठ 186 — “स्तंभ पर आप जो देख रहे हैं उसका वर्णन कीजिए।”

नमूना उत्तर — चित्र 7.23 (मूर्तियों वाले स्तंभ का एक रेखाचित्र) ऊपर से नीचे तक पढ़िए और हर पटल में दिखती आकृति लिखिए: मनुष्य, जानवर या फूल-पत्ती, और वह क्या कर रही है।

  • किताब के अनुसार विरुपाक्ष मन्दिर में कृष्णदेव राय का मण्डप सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजाया गया था। (पृष्ठ 186)

पृष्ठ 187 — “क्या आपको लगता है कि वास्तव में इस प्रकार के रथ बनाए जाते होंगे?”

नमूना उत्तर — अपनी राय दीजिए।

  • चित्र 7.24 (विट्ठल मन्दिर का रथ) को किताब “रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर” कहती है, यानी यह एक मन्दिर है।

  • सोचने के लिए: मन्दिर परिसरों में रथ गलियाँ होती थीं, जो गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती थीं; इन गलियों के नाम से अनुमान लगाइए कि मन्दिरों से जुड़े रथ वास्तव में बनते होंगे या नहीं। (पृष्ठ 187–188)

पृष्ठ 189 — “अंग्रेजी वर्णमाला का कौन सा अक्षर प्रयोग नहीं किया गया था? मानचित्र में दिए गए पैमाने का प्रयोग करते हुए किसी एक छोटे वर्ग की लंबाई नापिए।”

नमूना उत्तर — चित्र 7.27 (विजयनगर स्थल का विस्तृत मानचित्र) में:

  • अक्षर: पूरा क्षेत्र 25 वर्गों में बँटा है, और अंग्रेज़ी वर्णमाला में 26 अक्षर हैं; वर्गों पर A से Z तक के अक्षर पढ़िए: I नहीं लगाया गया है।

  • लंबाई: मानचित्र के नीचे की स्केल पट्टी (0 से 5 कि.मी.) रूलर से नापिए, फिर एक वर्ग की भुजा नापिए और अनुपात से किलोमीटर निकालिए।

पृष्ठ 189 — “इस मानचित्र में कौन सा पैमाना प्रयोग किया गया है?”

नमूना उत्तर — चित्र 7.28 (चित्र 7.27 का वर्ग N) की स्केल पट्टी पर 0, 500 मी. और 1 कि.मी. लिखे हैं। चित्र 7.27 की पट्टी 0 से 5 कि.मी. की थी; यानी 7.28 एक छोटे क्षेत्र को ज़्यादा विस्तार से दिखाता है। (पृष्ठ 189)

पृष्ठ 190 — “किसी एक मन्दिर को पहचानिए। दीवारों, एक केंद्रीय देवालय, तथा मन्दिर तक जाने वाले रास्तों के अवशेषों को खोजिए। मानचित्र पर उन वर्गों को नाम दीजिए जिनमें मन्दिर का नक्शा स्थित है।”

नमूना उत्तर — चित्र 7.29 (चित्र 7.28 का वर्ग NM) में दीवार से घिरा कोई मन्दिर खोजिए: चारों ओर की दीवार, बीच में केंद्रीय देवालय, और उस तक आने वाले रास्ते।

  • फिर नक्शे के छोटे वर्गों के अक्षरों (a, b, c …) से उन वर्गों के नाम लिखिए जिनमें यह मन्दिर फैला है।

  • चित्र 7.30 में “चित्र 7.29 के मन्दिर का नक्शा” बड़ा करके दिया गया है; उससे मिलाकर देखिए।

पृष्ठ 190 — “गोपुरम्, सभागारों, स्तंभावलियों तथा केंद्रीय देवालय को पहचानिए। बाहरी प्रवेशद्वार से केंद्रीय देवालय तक पहुँचने के लिए आप किन भागों से होकर गुज़रेंगे।”

नमूना उत्तर — चित्र 7.30 (चित्र 7.29 के मन्दिर का नक्शा) में भाग A से M तक के अक्षरों से दिखाए गए हैं।

  • पहचानने में चित्र 7.21 के नीचे की व्याख्या मदद करती है: वहाँ प्रमुख प्रवेशद्वार काले रंग से भरे हैं और हर छोटा बिंदु एक स्तंभ है।

  • केंद्रीय देवालय पहचानिए, फिर बाहरी प्रवेशद्वार से भीतर चलते हुए जिन अक्षरों वाले भागों से गुज़रें, उनकी क्रम से सूची बनाइए। (पृष्ठ 185, 190)

जाँचते समय: किताब अक्षरों का कोई अर्थ नहीं देती, इसलिए एक ही सही रास्ता नहीं है। अंक इस पर दीजिए कि बच्चे का रास्ता किसी बाहरी प्रवेशद्वार से केंद्रीय देवालय तक बिना दीवार लाँघे जाता हो, और रास्ते के गोपुरम्, सभागार और स्तंभावलियाँ पहचानी गई हों।

सावधानी

  • युद्ध, राजनीति की तरह: किताब विजयनगर और दक्कन की सल्तनतों के संघर्ष को राजनीति की तरह पढ़ाती है: होड़ उपजाऊ नदी घाटियों और विदेशी व्यापार से होने वाली समृद्धि के लिए थी, गठबंधन बदलते रहे, और 1565 की हार को किताब “रामराय की जोखिम भरी नीति” से जोड़ती है (पृष्ठ 171–174)। इसे धर्मों की लड़ाई मत बनाइए, और किसी शासक, धर्म या समुदाय को दोषी मत ठहराइए।
  • मस्जिद, शैली और उपाधि, किताब के शब्दों में: शहरी केंद्र के उत्तर-पूर्वी कोने के मक़बरों और मस्ज़िदों का स्थापत्य हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों से मिलता-जुलता है (पृष्ठ 179); “हिन्दू सूरतराणा” अरबी शब्द सुल्तान का संस्कृत रूपांतरण है (पृष्ठ 184)। ये बातें किताब के शब्दों और भूतकाल में पढ़ाइए, आज की किसी घटना से मत जोड़िए।
  • धर्म और जाति पर सवाल नहीं: किसी धर्म, शासक या समुदाय को दूसरे से ऊँचा या नीचा मत ठहराइए। किसी बच्चे से उसका धर्म या उसकी जाति मत पूछिए। पृष्ठ 179 के चर्चा बॉक्स में नगर या गाँव से तुलना और प्रश्न 11–12 की परियोजनाएँ सार्वजनिक जगहों और इमारतों के बारे में हों; समूह मिले-जुले रखिए।
  • मन्दिर, इमारत और स्रोत की तरह: विरुपाक्ष और विट्ठल मन्दिर, गोपुरम् और मण्डप स्थापत्य और इतिहास के स्रोत की तरह पढ़ाइए। कक्षा में कोई पूजा, प्रार्थना या अनुष्ठान मत करवाइए, और महानवमी के अनुष्ठान केवल किताब के वर्णन से पढ़ाइए।
  • अनुमान वाली बातें: किताब के “संभवत:”, “लगभग”, “ऐसा प्रतीत होता है” बच्चों के उत्तर में भी बने रहें। हिरिया नहर संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाई (पृष्ठ 177); राजकीय केंद्र की कई संरचनाओं का प्रयोजन आज भी पहेली है (पृष्ठ 181)।
  • काल-रेखा की छपाई: काल-रेखा 1 और 2 की दो पंक्तियों के बारे में ऊपर अध्याय के आँकड़े में लिखा है। काल-रेखा पढ़ाने से पहले वह हिस्सा देख लीजिए।
  • हमारी ओर से — बोर्ड और चार्ट: बोर्ड दूसरी कक्षाओं के साथ साझा है, इसलिए जो चीज़ पूरे अध्याय में चाहिए (शहर के भागों की तालिका, काल-रेखा), उसे चार्ट पेपर पर बनाइए। प्रोजेक्टर न हो तो नक्शे और चित्र किताब में ही खुलवाइए: चित्र 7.4 (पृष्ठ 176) और चित्र 7.27 से 7.30 (पृष्ठ 189–190)।

समय कम हो तो — छह बातें जो हर बच्चे तक पहुँचें

  1. खोज और स्रोत: 1800 में कॉलिन मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण मानचित्र; फिर अभिलेख, छाया चित्र, विदेशी यात्रियों के वृत्तांत और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत का साहित्य (पृष्ठ 170)।
  2. राजनीति: चार राजवंश (संगम, सुलुव, तुलुव, अराविदु), कृष्णदेव राय (1509–29), 1565 का राक्षसी–तांगड़ी युद्ध, और सुलतानों से बदलते संबंध (पृष्ठ 173–174)।
  3. अमर–नायक: राय से प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र, कर वसूली, घोड़ों और हाथियों का दल, और राजा को वर्ष में एक बार भेंट (पृष्ठ 175)।
  4. पानी और दीवारें: तुंगभद्रा का प्राकृतिक कुण्ड, कमलपुरम् जलाशय, हिरिया नहर; और दीवारों के भीतर खेत (पृष्ठ 177–178)।
  5. राजकीय केंद्र: महानवमी डिब्बा और महानवमी के अनुष्ठान, कमल महल, हाथियों का अस्तबल और हज़ार राम मन्दिर (पृष्ठ 179–183)।
  6. धार्मिक केंद्र और अंकन: विरुपाक्ष और पम्पादेवी, राय गोपुरम्, मण्डप और विट्ठल मन्दिर; और पूरे क्षेत्र को 25 वर्गों में बाँटकर किया गया प्रलेखन (पृष्ठ 184–190)।

अभ्यास के लिए: प्रश्न बैंक, फ़्लैशकार्ड और क्विज़।