Chapter 7एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7

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प्रयोग: दाईं ओर हाथ रखकर पढ़िए, उत्तर बोलिए, फिर हाथ हटाइए। कुल 164 कार्ड। हर उत्तर के साथ किताब का पृष्ठ लिखा है; शक हो तो किताब का वही पृष्ठ खोलकर देख लीजिए। पृष्ठ संख्याएँ NCERT भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12) के 2026-27 में छपे संस्करण की हैं।

निशानों का मतलब: ★★इस टॉपिक पर किताब की प्रश्नावली (पृष्ठ 194–195) में सीधे प्रश्न है · ★उन प्रश्नों के उत्तर में काम आता है · बिना निशान वाले कार्ड पृष्ठभूमि की जानकारी हैं · ! वाले कार्डों में अक्सर गलती होती है, इन्हें ध्यान से पढ़िए।


सेट 1 — नाम और खोज: हम्पी, मैकेन्ज़ी, अभिलेख और छाया चित्र (कार्ड 1–13)

#प्रश्नउत्तर
★★1विजयनगर साम्राज्य (लगभग चौदहवीं से सोलहवीं सदी तक) की राजधानी के खंडहर आज किस नाम से जाने जाते हैं, और यह नाम कहाँ से बना?हम्पी। कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के लोगों की स्मृतियों में यह शहर इसी नाम से जीवित रहा, जो स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से बना। (पृष्ठ 170)
2किताब के अनुसार “विजयनगर” नाम किन-किन के लिए इस्तेमाल होता था?“विजय का शहर” के अर्थ वाला यह नाम एक शहर और एक साम्राज्य, दोनों के लिए इस्तेमाल होता था। (पृष्ठ 170)
★3विजयनगर साम्राज्य कब स्थापित हुआ, और अपने चरमोत्कर्ष पर यह कहाँ से कहाँ तक फैला था?चौदहवीं शताब्दी में स्थापित हुआ; चरमोत्कर्ष पर उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था। (पृष्ठ 170)
★41565 में विजयनगर की राजधानी के साथ क्या हुआ, और आगे चलकर उसका क्या हाल हुआ?उस पर आक्रमण हुआ और उसे लूटा गया; बाद में वह उजड़ गई, और सत्रहवीं–अठारहवीं शताब्दियों तक पूरी तरह नष्ट हो गई। (पृष्ठ 170)
★★5हम्पी के भग्नावशेष किसने और कब प्रकाश में लाए, और उन्होंने क्या बनाया?1800 ई. में ईस्ट इण्डिया कंपनी में कार्यरत अभियंता और पुराविद कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी ने; उन्होंने इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया। (पृष्ठ 170)
★★6! मैकेन्ज़ी को हम्पी की शुरुआती जानकारी किन लोगों की स्मृतियों से मिली?विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों से। (पृष्ठ 170)
★★7हम्पी में 1836 ई. से अभिलेखकर्ताओं ने क्या किया?उन्होंने यहाँ से कई दर्जन अभिलेख इकट्ठे किए। (पृष्ठ 170)
★★81856 ई. से छायाचित्रकारों ने हम्पी में क्या शुरू किया?उन्होंने यहाँ के भवनों के चित्र संकलित करने शुरू किए। (पृष्ठ 170)
★★9इतिहासकारों ने विजयनगर शहर और साम्राज्य का इतिहास कैसे जोड़ा?भवनों, अभिलेखों और छाया चित्रों जैसे स्रोतों का विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य से मिलान करके। (पृष्ठ 170)
★10किताब के अनुसार किन स्रोतों ने विद्वानों को विजयनगर साम्राज्य को फिर से खोजने में मदद की?मौखिक परंपराओं, पुरातात्विक खोजों, स्थापत्य के नमूनों, अभिलेखों और दूसरे दस्तावेज़ों ने। (पृष्ठ 170)
★11कॉलिन मैकेन्ज़ी कौन थे, और 1815 में उन्हें कौन-सा पद मिला?1754 ई. में जन्मे अभियंता, सर्वेक्षक और मानचित्रकार। 1815 में उन्हें “भारत का पहला सर्वेयर जनरल” बनाया गया, और 1821 में अपनी मृत्यु तक वे इसी पद पर रहे। (पृष्ठ 171)
★12मैकेन्ज़ी ने स्थानीय इतिहास और परंपराएँ किस उद्देश्य से इकट्ठी कीं?“भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए”। (पृष्ठ 171)
13! विजयनगर साम्राज्य को उसके समकालीन लोग क्या कहते थे, और इतिहासकार क्या कहते हैं?समकालीन लोगों ने उसे कर्नाटक साम्राज्यमु की संज्ञा दी; “विजयनगर साम्राज्य” शब्द इतिहासकार प्रयोग करते हैं। (पृष्ठ 171)

सेट 2 — स्थापना, पड़ोसी और व्यापार (कार्ड 14–26)

#प्रश्नउत्तर
★14! परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने और कब की?1336 में दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने। (पृष्ठ 171)
15विजयनगर साम्राज्य में कैसे लोग रहते थे, और उसकी सीमाएँ कैसी थीं?इस साम्राज्य की अस्थिर सीमाओं में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले तथा अलग-अलग धार्मिक परंपराओं को मानने वाले लोग रहते थे। (पृष्ठ 171)
★16विजयनगर के शासकों की होड़ उत्तरी सीमा पर किनसे थी, और किस बात के लिए?दक्कन के सुलतानों और उड़ीसा के गजपति शासकों से, उर्वर नदी घाटियों तथा लाभकारी विदेशी व्यापार से उत्पन्न संपदा पर अधिकार के लिए। (पृष्ठ 171)
★17विजयनगर के शासकों ने पड़ोसी राज्यों से संपर्क में क्या सीखा?विचारों का आदान-प्रदान हुआ, “विशेष रूप से स्थापत्य के क्षेत्र में”; उन्होंने अवधारणाएँ और भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं और उन्हें आगे विकसित किया। (पृष्ठ 171)
18विजयनगर से पहले तमिलनाडु और कर्नाटक में कौन-से राज्य थे, और उनके शासक वर्ग ने किन मंदिरों को संरक्षण दिया था?तमिलनाडु में चोल और कर्नाटक में होयसाल। उनके शासक वर्ग ने विशाल मंदिरों, जैसे तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर तथा बेलूर के चन्नकेशव मंदिर, को संरक्षण प्रदान किया था। (पृष्ठ 171, 172)
19विजयनगर के शासक अपने को क्या कहते थे, और उन्होंने चोल और होयसाल राज्यों की परंपराओं का क्या किया?अपने को राय कहते थे; वे इन परंपराओं को आगे ले गए और उन्हें “नयी ऊँचाइयों तक पहुँचाया”। (पृष्ठ 171, 172)
★20उस काल के प्रतिस्पर्धी राज्यों के लिए, जिनमें विजयनगर भी था, अरब और मध्य एशिया से घोड़ों का आयात इतना महत्त्वपूर्ण क्यों था?उस समय की युद्धकला प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित थी। (पृष्ठ 172)
★21अरब और मध्य एशिया से घोड़ों के आयात में अरब व्यापारियों के साथ कौन-से स्थानीय व्यापारी भी भाग लेते थे?स्थानीय व्यापारी, जिन्हें कुदिरई चेट्टी (घोड़ों के व्यापारी) कहा जाता था। आरंभिक चरणों में यह व्यापार अरब व्यापारियों द्वारा नियंत्रित था। (पृष्ठ 172)
★221498 ई. से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर क्या करने लगे, और किस चीज़ ने उनकी मदद की?वे वहाँ आए और व्यापारिक तथा सामरिक केंद्र स्थापित करने का प्रयास करने लगे; उनकी बेहतर सामरिक तकनीक, विशेष रूप से बंदूकों के प्रयोग, ने उन्हें इस काल की उलझी हुई राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरने में सहायता की। (पृष्ठ 172)
23विजयनगर किन चीज़ों के बाज़ारों के लिए जाना जाता था?मसालों, वस्त्रों और रत्नों के बाज़ारों के लिए। (पृष्ठ 172)
★24विजयनगर जैसे शहरों के लिए व्यापार प्रतिष्ठा का मानक माना जाता था; वहाँ की जनता क्या माँगती थी, और राज्य को व्यापार से क्या मिलता था?यहाँ की समृद्ध जनता मँहगी विदेशी वस्तुओं की माँग करती थी, विशेष रूप से रत्नों और आभूषणों की; और व्यापार से प्राप्त राजस्व राज्य की समृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान देता था। (पृष्ठ 172)
25गजपति का शाब्दिक अर्थ क्या है, और यह किसका नाम था?“गजपति का शाब्दिक अर्थ हाथियों का स्वामी होता है।” यह पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली वंश का नाम था। (पृष्ठ 172)
26विजयनगर की लोक परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को और रायों को क्या कहा गया?सुल्तानों को अश्वपति (घोड़ों के स्वामी) और रायों को नरपति (लोगों के स्वामी)। (पृष्ठ 172)

सेट 3 — राजवंश, कृष्णदेव राय, 1565 और सुलतानों से संबंध (कार्ड 27–45)

#प्रश्नउत्तर
★★27विजयनगर के चार राजवंश किस क्रम में आए?संगम (1485 तक नियंत्रण), सुलुव (1503 तक शासन), तुलुव, अराविदु। (पृष्ठ 173)
★28! विजयनगर में सत्ता के दावेदार कौन थे, और संगम वंश को किसने उखाड़ फेंका?सत्ता के दावेदारों में शासक वंश के सदस्य और सैनिक कमांडर, दोनों थे। संगम वंश को सैनिक कमांडर सुलुवों ने उखाड़ फेंका। (पृष्ठ 173)
★29विजयनगर का अराविदु वंश कब केंद्र पर नियंत्रण में आया, और कब तक सत्ता में रहा?1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में चला गया; वह सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक सत्ता में रहा। (पृष्ठ 173)
★★30तुलुव वंश के कृष्णदेव राय का शासनकाल कब था, और किताब उसे किन शब्दों में बताती है?1509–29। उनका शासन “विस्तार और दृढ़ीकरण” का था। (पृष्ठ 173)
★★31कृष्णदेव राय के शासन (1509–29) की तीन बड़ी सैनिक सफलताएँ कौन-सी थीं?1512 में तुंगभद्रा और कृष्णा के बीच का रायचूर दोआब हासिल हुआ; 1514 में उड़ीसा के शासकों का दमन हुआ; 1520 में बीजापुर के सुल्तान को बुरी तरह पराजित किया गया। (पृष्ठ 173)
★32सैनिक रूप से तैयार रहने वाला कृष्णदेव राय का राज्य किन स्थितियों में फला–फूला?“अतुलनीय शांति और समृद्धि की स्थितियों में”। (पृष्ठ 173)
★33कृष्णदेव राय को किन निर्माणों का श्रेय दिया जाता है, और उपनगर नगलपुरम् किसने किसके नाम पर बसाया?उन्हें कुछ बेहतरीन मंदिरों के निर्माण और कई महत्त्वपूर्ण दक्षिण भारतीय मंदिरों में भव्य गोपुरमों को जोड़ने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप ही नगलपुरम् नामक उपनगर की स्थापना की थी। (पृष्ठ 173)
34विजयनगर के सबसे विस्तृत विवरण किस काल के हैं?कृष्णदेव राय के या उनके तुरंत बाद के काल के। (पृष्ठ 173)
★351529 में कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर में क्या हुआ?राजकीय ढाँचे में तनाव बढ़ा और उनके उत्तराधिकारियों को विद्रोही नायकों या सेनापतियों से चुनौती मिली; 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण अराविदु वंश के हाथ में चला गया। (पृष्ठ 173)
★36कृष्णदेव राय ने शासनकला पर तेलुगु में कौन-सी रचना लिखी?अमुक्तमल्यद। (पृष्ठ 173)
★37अमुक्तमल्यद के अनुसार दूर देशों से हाथी और अच्छे घोड़े लाने वाले व्यापारियों के साथ क्या करना चाहिए, और क्यों?उन्हें रोज़ बैठक में बुलाकर तोहफ़े देने चाहिए और उचित मुनाफ़ा कमाने देना चाहिए; “ऐसा करने पर ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी।” (पृष्ठ 173)
★★38! 1565 में विजयनगर की सेना किस युद्ध में हारी, और किसके नेतृत्व में?राक्षसी–तांगड़ी (जिसे तालीकोटा भी कहते हैं) के युद्ध में, प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में; सामने बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाएँ थीं। (पृष्ठ 173)
★391565 के युद्ध से पहले दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर के विरुद्ध क्या किया, और हार के बाद शहर का क्या हुआ?सल्तनतों ने मैत्री–समझौता किया। विजयी सेनाओं ने शहर लूटा, और कुछ ही वर्षों में शहर पूरी तरह उजड़ गया। (पृष्ठ 173)
★401565 के बाद विजयनगर साम्राज्य का केंद्र किस ओर चला गया, और अराविदु वंश ने कहाँ से शासन किया?केंद्र पूर्व की ओर चला गया; अराविदु वंश ने पेनुकोण्डा से और बाद में चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप) से शासन किया। (पृष्ठ 173)
★★41! सुलतानों की सेनाओं ने विजयनगर नष्ट किया, फिर भी किताब दोनों के संबंधों के बारे में क्या कहती है?संबंध “धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे।” (पृष्ठ 174)
★42कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में क्या किया, और कौन-सा विरुद धारण करके गौरव महसूस किया?उन्होंने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद धारण करके गौरव महसूस किया। (पृष्ठ 174)
★43कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर के उत्तराधिकार विवाद सुलझाने में किसने हस्तक्षेप किया?बीजापुर के सुलतान ने; विजयनगर शासक और सल्तनतें दोनों ही एक-दूसरे के स्थायित्व को निश्चित करने की इच्छुक थीं। (पृष्ठ 174)
★★44किताब रामराय की किस नीति को “जोखिम भरी” कहती है, और उसका क्या नतीजा निकला?उन्होंने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की, किंतु सुलतान एक हो गए और उन्होंने उन्हें निर्णायक रूप से पराजित कर दिया। (पृष्ठ 174)
45यवन शब्द क्या है, और किनके लिए प्रयोग होता था?यह संस्कृत भाषा का शब्द है, जो यूनानियों तथा उत्तर–पश्चिम से उपमहाद्वीप में आनेवाले अन्य लोगों के लिए प्रयोग होता था। (पृष्ठ 174)

सेट 4 — नायक और अमर–नायक प्रणाली (कार्ड 46–56)

#प्रश्नउत्तर
★★46विजयनगर साम्राज्य में नायक कौन थे?सेना प्रमुख, जो आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे; ये आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे। (पृष्ठ 175)
47विजयनगर के नायक एक जगह से दूसरी जगह जाते रहते थे; उनके साथ कौन चलता था?कई बार बसने के लिए उपजाऊ भूमि की तलाश में किसान भी उनका साथ देते थे। (पृष्ठ 175)
★48कई नायकों ने विजयनगर की अधीनता मानी; वे उसके साथ कैसा व्यवहार करते थे?वे अक्सर विद्रोह कर देते थे और इन्हें सैनिक कार्रवाई के माध्यम से ही वश में किया जाता था। (पृष्ठ 175)
★★49! किताब अमर–नायक प्रणाली को क्या कहती है, और इसके कई तत्त्व कहाँ से लिए गए प्रतीत होते हैं?“विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज”; इसके कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए प्रतीत होते हैं। (पृष्ठ 175)
★★50विजयनगर में अमर–नायक कौन थे, और राय उन्हें क्या देते थे?सैनिक कमांडर; राय उन्हें प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र देते थे। (पृष्ठ 175)
★★51अमर–नायक किनसे क्या वसूलते थे?किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू राजस्व और दूसरे कर। (पृष्ठ 175)
★★52अमर–नायक के वसूले राजस्व के हिस्सों का किन तीन कामों में उपयोग होता था?व्यक्तिगत उपयोग; घोड़ों और हाथियों का निर्धारित दल रखना; मन्दिरों और सिंचाई के साधनों का रख-रखाव। (पृष्ठ 175)
★★53अमर–नायक प्रणाली से राय को क्या मिला?प्रभावी सैनिक शक्ति, जिससे राय पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप को अपने नियंत्रण में ला सके। (पृष्ठ 175)
★54अमर–नायक राजा के प्रति निष्ठा कैसे दिखाते थे, और राजा अपना नियंत्रण कैसे जताता था?वर्ष में एक बार राजा को भेंट भेजते और उपहारों के साथ राजकीय दरबार में उपस्थित होते थे; राजा कभी–कभी उन्हें एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर अपना नियंत्रण दर्शाता था। (पृष्ठ 175)
★55सत्रहवीं शताब्दी में विजयनगर के नायकों ने क्या किया, और उसका क्या असर पड़ा?कई नायकों ने अपने स्वतंत्र राज्य बना लिए, इस कारण केंद्रीय राजकीय ढाँचे का विघटन तेज़ी से होने लगा। (पृष्ठ 175)
56अमर शब्द किससे बना माना जाता है?संस्कृत समर (लड़ाई या युद्ध) से बना माना जाता है; यह फ़ारसी अमीर (ऊँचे पद का कुलीन व्यक्ति) से भी मिलता-जुलता है। (पृष्ठ 175)

सेट 5 — शहर, पानी और यात्री (कार्ड 57–70)

#प्रश्नउत्तर
★57विजयनगर अपने समय में कैसा शहर माना जाता था?अपने समय के सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक; ज़्यादातर राजधानियों की तरह इसकी भी एक ख़ास भौतिक रूपरेखा और भवन निर्माण की शैली थी। (पृष्ठ 176)
★★58यात्री डोमिंगो पेस ने एक पहाड़ पर चढ़कर विजयनगर को देखा और उसकी तुलना किस शहर से की?रोम से: “वहाँ से मैंने जो देखा वह मुझे रोम जितना विशाल प्रतीत हुआ, और देखने में अत्यंत सुन्दर”। (पृष्ठ 176)
★59डोमिंगो पेस विजयनगर को पूरा क्यों नहीं देख सका, और उसने वहाँ क्या-क्या देखा?शहर कई पर्वत शृंखलाओं के बीच बसा है। पेस ने पेड़ों के उपवन, बगीचे, पानी की कई नालियाँ और झीलें देखीं, और राजा के महल के पास खजूर के पेड़ों का बगीचा तथा अन्य फल प्रदान करने वाले वृक्ष भी। (पृष्ठ 176)
★★60पंद्रहवीं शताब्दी में विजयनगर आए तीन यात्री कौन थे?निकोलो दे कॉन्ती (इतालवी व्यापारी), अब्दुर रज़्ज़ाक (फ़ारस के राजा का दूत) और अफ़ानासी निकितिन (रूस का एक व्यापारी)। (पृष्ठ 176)
★★61सोलहवीं शताब्दी में विजयनगर आए तीन यात्री कौन थे?दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस और पुर्तगाल का फर्नाओ नूनिज़। (पृष्ठ 176)
62राजाओं और नायकों के अभिलेख विजयनगर के बारे में क्या दर्ज करते हैं?मंदिरों को दिए गए दान और महत्त्वपूर्ण घटनाएँ। (पृष्ठ 176)
★★63विजयनगर की भौगोलिक स्थिति की सबसे चौंकाने वाली बात क्या है?“तुंगभद्रा नदी द्वारा यहाँ निर्मित एक प्राकृतिक कुण्ड”; नदी उत्तर–पूर्व दिशा में बहती है। (पृष्ठ 177)
★64विजयनगर के चारों ओर की पहाड़ियाँ कैसी दिखती हैं, और उनसे क्या आता है?ग्रेनाइट की ये पहाड़ियाँ शहर के चारों ओर करधनी का निर्माण करती-सी प्रतीत होती हैं; इनसे कई जल-धाराएँ आकर नदी में मिलती हैं। (पृष्ठ 177)
★★65विजयनगर में लगभग सभी धाराओं के साथ बाँध बनाकर हौज़ क्यों बनाए गए?विजयनगर “प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक” में था, इसलिए पानी इकट्ठा करने और उसे शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध ज़रूरी थे। (पृष्ठ 177)
★★66कमलपुरम् जलाशय कब बना, और उसका पानी कहाँ-कहाँ जाता था?“पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में” बना। आस-पास के खेत सींचे जाते थे, और एक नहर से पानी राजकीय केंद्र तक ले जाया जाता था। (पृष्ठ 177)
★★67! हिरिया नहर क्या काम करती थी, और उसे किसने बनवाया माना जाता है?तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाकर धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी को सींचती थी। इसे संभवत: संगम वंश के राजाओं ने बनवाया था। (पृष्ठ 177)
★68पेस के वर्णन (स्रोत 4) के अनुसार कृष्णदेव राय के बनवाए जलाशय में पानी कहाँ से आता था?एक झील से, “9 मील (लगभग 15 किमी) से भी अधिक की दूरी से पाइपों से”। जलाशय दो पहाड़ियों के मुख–विबर पर बनाया गया, जिससे दोनों में से किसी पहाड़ी से आने वाला सारा जल वहाँ इकट्ठा हो। (पृष्ठ 177)
★69पेस के वर्णन (स्रोत 4) के अनुसार जलाशय बनाने के लिए राजा ने क्या करवाया?एक पूरी पहाड़ी तुड़वा दी; वहाँ “पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी थे, चीटियों की तरह”। (पृष्ठ 177)
70पेस के वर्णन (स्रोत 4) के जलाशय में “तीन विशाल स्तंभ” किसलिए थे?उनसे जुड़े पाइप बगीचों और धान के खेतों को सींचने के लिए पानी ले जाते थे। (पृष्ठ 177)

सेट 6 — क़िलेबंदी, सड़कें और शहरी केंद्र (कार्ड 71–84)

#प्रश्नउत्तर
★★71फ़ारस के शासक ने अब्दुर रज़्ज़ाक को कहाँ भेजा था, और विजयनगर की क़िलेबंदी के बारे में उसने क्या लिखा?पंद्रहवीं शताब्दी में उसे कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा गया था। वह विजयनगर की क़िलेबंदी से बहुत प्रभावित हुआ और “दुर्गों की सात पंक्तियों” का उल्लेख किया। (पृष्ठ 177)
★★72! विजयनगर की क़िलेबंदी की सबसे ख़ास बात क्या थी?इन दीवारों से शहर ही नहीं, आस-पास का कृषि क्षेत्र और जंगल भी घिरे थे; सबसे बाहरी दीवार शहर के चारों ओर की पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी। (पृष्ठ 177)
★73विजयनगर की क़िलेबंदी की दीवार कैसे बनी थी?थोड़ी शुण्डाकार (ऊपर पतली होती); गारे या जोड़ने के लिए किसी भी वस्तु का प्रयोग नहीं, पत्थर के फानाकार (कील जैसे) टुकड़े अपनी जगह टिके थे; दीवारों के अंदर का भाग मिट्टी और मलवे से भरा; बाहर वर्गाकार और आयताकार बुर्ज़। (पृष्ठ 177)
★★74अब्दुर रज़्ज़ाक के अनुसार विजयनगर की पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच क्या था?“पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं”। (पृष्ठ 177, 178)
★75आज के पुरातत्त्वविदों को धार्मिक केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच क्या साक्ष्य मिले हैं?एक कृषि क्षेत्र के साक्ष्य, जिसे तुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहरों की व्यापक व्यवस्था सींचती थी। (पृष्ठ 178)
★★76मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य क्या था, और विजयनगर के शासकों ने क्या अलग किया?घेराबंदी का उद्देश्य विरोधी को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था; आम तौर पर शासक विशाल अन्नागार बनवाते थे, पर विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को बचाने के लिए “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” अपनाई। (पृष्ठ 178)
★77विजयनगर की दूसरी और तीसरी क़िलेबंदी किसके चारों ओर बनी थी?दूसरी नगरीय केंद्र के भीतरी भाग के चारों ओर, और तीसरी राजकीय केंद्र के चारों ओर; राजकीय केंद्र में महत्त्वपूर्ण इमारतों के हर समूह को अपनी ऊँची दीवारों से घेरा गया था। (पृष्ठ 178)
★★78विजयनगर के क़िलेबंद प्रवेशद्वारों की मेहराब और गुंबद किस शैली के तत्त्व माने जाते हैं, और इस शैली का नाम क्या है?ये तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व माने जाते हैं। कला-इतिहासकार इसे इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) कहते हैं, क्योंकि इसका विकास अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के संपर्क से हुआ। (पृष्ठ 178)
★79पुरातत्त्वविदों ने विजयनगर की सड़कों की पहचान कैसे की, और वे आम तौर पर कहाँ से होकर जाती थीं?प्रवेशद्वारों से होकर जाने वाले रास्तों के अनुरेखण तथा फर्श वाली सड़कों की खोजों से। सड़कें सामान्यत: पहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से होकर ही इधर-उधर घूमती थीं। (पृष्ठ 178)
80विजयनगर के शहरी केंद्र में सामान्य लोगों के आवासों के साक्ष्य कैसे मिले हैं?अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं। (पृष्ठ 178)
★81विजयनगर के शहरी केंद्र के उत्तर-पूर्वी कोने से क्या मिला, और पुरातत्त्वविदों का क्या सुझाव है?शहरी केंद्र के कुछ स्थानों में, जिनमें उत्तर-पूर्वी कोना भी शामिल है, परिष्कृत चीनी मिट्टी के बर्तन मिले; पुरातत्त्वविदों का सुझाव है कि हो सकता है इन स्थानों में अमीर व्यापारी रहते हों। किताब के अनुसार यह कोना मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला भी था। (पृष्ठ 179)
82विजयनगर के शहरी केंद्र के मक़बरों और मस्ज़िदों का स्थापत्य किससे मिलता-जुलता है?हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों से। (पृष्ठ 179)
★83बरबोसा ने विजयनगर में सामान्य लोगों के आवासों के बारे में क्या लिखा?“लोगों के अन्य आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृढ़ हैं”; वे व्यवसाय के आधार पर कई खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में व्यवस्थित हैं। (पृष्ठ 179)
84विजयनगर के क्षेत्र सर्वेक्षणों में पूजा स्थलों के बारे में क्या मिला, और सामान्य नगर निवासियों के लिए पानी के स्रोत संभवत: क्या थे?बहुत से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर मिले, जो विविध संप्रदायों की ओर संकेत करते हैं। पानी के स्रोत संभवत: कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय थे। (पृष्ठ 179)

सेट 7 — राजकीय केंद्र: महानवमी डिब्बा, कमल महल, हज़ार राम मन्दिर (कार्ड 85–108)

#प्रश्नउत्तर
85विजयनगर बस्ती में राजकीय केंद्र किस भाग में था?बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में। (पृष्ठ 179)
★★86! विजयनगर के राजकीय केंद्र में क्या केवल महल थे?नहीं। इसमें 60 से भी अधिक मन्दिर थे, और महलों के रूप में लगभग तीस संरचनाओं की पहचान हुई है। (पृष्ठ 179)
★87विजयनगर के शासकों के लिए मन्दिरों और संप्रदायों को संरक्षण देना ज़रूरी क्यों था?वे देवी-देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने का प्रयास कर रहे थे। (पृष्ठ 179)
★88राजकीय केंद्र में महलों के रूप में पहचानी गई संरचनाएँ कैसी हैं?अपेक्षाकृत बड़ी संरचनाएँ, जो आनुष्ठानिक कार्यों से नहीं जुड़ी थीं। (पृष्ठ 179)
★89विजयनगर के मन्दिरों और धर्मेतर भवनों की निर्माण-सामग्री में क्या अंतर था?मन्दिर पूरी तरह राजगिरी (चिनाई) से बने थे; धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी (नष्ट हो जाने वाली) वस्तुओं से बनी थी। (पृष्ठ 180)
★★90! क्या राजकीय केंद्र की सबसे बड़ी संरचना “राजा का भवन” पक्के तौर पर राजा का निवास थी?नहीं। यह घेरे की सबसे बड़ी संरचना है, पर इसके राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं है। (पृष्ठ 180)
★★91“राजा का भवन” के दो सबसे प्रभावशाली मंच कौन-से हैं, और वे किससे घिरे हैं?सभा मंडप और महानवमी डिब्बा। पूरा क्षेत्र ऊँची दोहरी दीवारों से घिरा है, जिनके बीच एक गली है। (पृष्ठ 180)
★92सभा मंडप के बारे में इतिहासकार क्या कहते हैं?यह एक ऊँचा मंच है, जिसमें पास-पास और निश्चित दूरी पर लकड़ी के स्तंभों के लिए छेद हैं। स्तंभ एक-दूसरे से बहुत पास-पास थे, इसलिए बहुत कम खुला स्थान बचता था; यह किस काम आता था, यह स्पष्ट नहीं है। (पृष्ठ 180)
★★93महानवमी डिब्बा क्या है, और कितना बड़ा है?शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना विशालकाय मंच, जो लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊँचाई तक जाता है। इस पर लकड़ी की संरचना के साक्ष्य मिले हैं। (पृष्ठ 180)
★★94महानवमी डिब्बा से जुड़े अनुष्ठान संभवत: किस त्यौहार के अवसर पर किए जाते थे, और वह त्यौहार अलग-अलग जगह किस नाम से जाना जाता है?संभवत: सितंबर तथा अक्टूबर के शरद मासों में मनाए जाने वाले दस दिन के हिंदू त्यौहार के महानवमी (शाब्दिक अर्थ, महान नवाँ दिवस) के अवसर पर। उत्तर भारत में उसे दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा और प्रायद्वीपीय भारत में नवरात्री या महानवमी कहते हैं। (पृष्ठ 180, 181)
★★95महानवमी के अवसर पर विजयनगर के शासक क्या प्रदर्शित करते थे?“अपने रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन” करते थे। (पृष्ठ 181)
★★96महानवमी डिब्बा से जुड़े उत्सवों में कौन-से अनुष्ठान और आयोजन होते थे?मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा और भैंसों व दूसरे जानवरों की बलि; नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा और साज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों व सैनिकों की शोभायात्रा; प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं की औपचारिक भेंट। (पृष्ठ 181)
★97महानवमी के त्योहार के अंतिम दिन राजा क्या करता था, और नायक क्या लाते थे?राजा खुले मैदान में आयोजित भव्य समारोह में अपनी और अपने नायकों की सेना का निरीक्षण करता था; नायक इस अवसर पर बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर भी लाते थे। (पृष्ठ 181)
★★98! क्या महानवमी डिब्बा या सभा मंडप जैसी राजकीय केंद्र की संरचनाओं का काम पूरी तरह तय है?नहीं। विद्वानों का मानना है कि आज की संरचना के चारों ओर का स्थान सशस्त्र पुरुषों, स्त्रियों और बड़ी संख्या में जानवरों की शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था; “राजकीय केंद्र में स्थित कई और संरचनाओं की तरह यह भी एक पहेली बना हुआ है।” (पृष्ठ 180, 181)
99पेस ने सभा मंडप और महानवमी डिब्बा को मिलाकर क्या नाम दिया?“विजय का भवन”। उसके वर्णन में एक के ऊपर एक दो मंच हैं। (पृष्ठ 180)
★★100! विजयनगर के राजकीय केंद्र के “कमल महल” को यह नाम किसने दिया?यह नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस काम के लिए बना था। (पृष्ठ 181)
★★101कमल महल में कितनी मीनारें थीं, और वे कैसे लगी थीं?“कमल महल में नौ मीनारें थीं– बीच में एक ऊँची, तथा आठ उसकी भुजाओं के साथ–साथ।” (पृष्ठ 181)
★★102कमल महल के बारे में मैकेन्ज़ी के बनाए मानचित्र से क्या सुझाव मिला?यह एक परिषदीय सदन था, जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। (पृष्ठ 181, 182)
★★103कमल महल की मेहराबों के बारे में किताब क्या कहती है?“संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों से प्रभावित थीं।” (पृष्ठ 181)
★104खड़ा रेखाचित्र और नक्शे में क्या अंतर है?खड़ा रेखाचित्र संरचना का ऊर्ध्व अवलोकन होता है, जो वे अभिलक्षण भी दिखाता है जो छाया–चित्र में नहीं देखे जा सकते; नक्शा संरचना का समस्तरी अवलोकन देता है। (पृष्ठ 181, 182)
★★105कमल महल के समीप स्थित “हाथियों का अस्तबल” किताब में किन रूपों में दिखाया गया है?खड़े रेखाचित्र, नक्शे और तसवीर, तीनों में। (पृष्ठ 182)
★106राजकीय केंद्र के हज़ार राम मन्दिर के बारे में किताब क्या कहती है?“संभवत: इसका प्रयोग केवल राजा और उनके परिवार द्वारा ही किया जाता था।” ज़्यादातर मन्दिर धार्मिक केंद्र में थे, पर राजकीय केंद्र में भी कई थे। (पृष्ठ 182, 183)
★107हज़ार राम मन्दिर की दीवारों पर क्या उत्कीर्णित है?केंद्रीय देवालय की मूर्तियाँ अब नहीं हैं, पर दीवारों पर पटल बचे हैं; इनमें मन्दिर की आंतरिक दीवारों पर उत्कीर्णित रामायण से लिए गए कुछ दृश्यांश हैं। (पृष्ठ 182, 183)
★1081565 में विजयनगर पर आक्रमण हुआ। उसके बाद नायकों ने भवन निर्माण की कौन-सी परंपरा जारी रखी?आक्रमण के बाद विजयनगर की कई संरचनाएँ नष्ट हो गई थीं, पर नायकों ने महलनुमा संरचनाओं के निर्माण की परंपरा जारी रखी। इनमें से कई भवन आज भी हैं। (पृष्ठ 173, 183)

सेट 8 — धार्मिक केंद्र: विरुपाक्ष, विट्ठल, गोपुरम् और मण्डप (कार्ड 109–130)

#प्रश्नउत्तर
★109विजयनगर शहर का धार्मिक केंद्र कहाँ है?शहर का तुंगभद्रा नदी के तट से लगा चट्टानी उत्तरी भाग। (पृष्ठ 184)
★★110धार्मिक केंद्र की पहाड़ियों के बारे में स्थानीय मान्यता क्या है, जो रामायण से जुड़ी है?ये पहाड़ियाँ “रामायण में उल्लिखित बाली और सुग्रीव के वानर राज्य की रक्षा करती थीं”। (पृष्ठ 184)
★★111धार्मिक केंद्र की पहाड़ियों के बारे में पम्पादेवी और विरुपाक्ष से जुड़ी मान्यता क्या है?स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी ने इन पहाड़ियों में विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप किया था। विरुपाक्ष राज्य के संरक्षक देवता और शिव का एक रूप माने जाते हैं; आज तक यह विवाह विरुपाक्ष मन्दिर में हर वर्ष धूम–धाम से आयोजित किया जाता है। (पृष्ठ 184)
★112धार्मिक केंद्र की पहाड़ियों में विजयनगर साम्राज्य से पहले का क्या मिला है, और इससे क्या पता चलता है?जैन मन्दिर मिले हैं, यानी यह क्षेत्र कई धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा था। (पृष्ठ 184)
113किताब के अनुसार, जिस क्षेत्र में विजयनगर का धार्मिक केंद्र था, वहाँ मन्दिर निर्माण का लंबा इतिहास किन वंशों तक जाता है?पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक। (पृष्ठ 184)
★114शासक मन्दिर निर्माण को बढ़ावा क्यों देते थे, और मन्दिर किन चीज़ों के केंद्र बन गए?शासक अपने को ईश्वर से जोड़ने के लिए। मन्दिर शिक्षा के केंद्र भी थे; शासक और दूसरे लोग मन्दिरों के रख-रखाव के लिए भूमि या संपत्ति देते थे, इसलिए वे धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र बन गए। (पृष्ठ 184)
★★115किताब के अनुसार विजयनगर के स्थान का चयन किससे प्रेरित हो सकता है?“यह संभव है कि विजयनगर के स्थान का चयन वहाँ विरुपाक्ष तथा पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था।” (पृष्ठ 184)
★★116विजयनगर के शासक किसकी ओर से शासन करने का दावा करते थे, और राजकीय आदेशों पर क्या अंकित होता था?भगवान विरुपाक्ष की ओर से। राजकीय आदेशों पर सामान्यतया कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” अंकित होता था। (पृष्ठ 184)
117हिन्दू सूरतराणा विरुद का क्या अर्थ है?यह अरबी भाषा के शब्द सुल्तान, जिसका अर्थ है राजा, का संस्कृत अनुवाद था; शाब्दिक रूप में इसका अर्थ था हिंदू सुलतान। विजयनगर के शासक यह विरुद भी प्रयोग करते थे। (पृष्ठ 184)
★118विजयनगर के शासकों ने मन्दिरों में राजकीय सत्ता के संबंध में कौन-सी नई बातें शुरू कीं?राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित होने लगीं, और राजा की मन्दिर यात्राएँ महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर बन गईं, जिनमें साम्राज्य के महत्त्वपूर्ण नायक भी साथ जाते थे। (पृष्ठ 184)
★★119राय गोपुरम् क्या है, और वह क्या करता था?मन्दिर का राजकीय प्रवेशद्वार। वह अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराता था और दूर से ही मन्दिर का संकेत देता था। (पृष्ठ 185, 186)
★120किताब के अनुसार राय गोपुरम् जैसी ऊँची मीनारें शासकों की किस बात की याद दिलाती थीं?संभवत: उनकी ताकत की, क्योंकि वे इतनी ऊँची मीनारें बनाने के लिए ज़रूरी साधन, तकनीक और कौशल जुटा सकते थे। (पृष्ठ 186)
★121राय गोपुरम् के अलावा विजयनगर के मन्दिर परिसरों के अन्य विशिष्ट अभिलक्षण क्या थे?मण्डप और देवस्थलों के चारों ओर बने लंबे, स्तंभों वाले गलियारे। (पृष्ठ 186)
★★122विरुपाक्ष मन्दिर का सबसे प्राचीन मन्दिर किस काल का था, और विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद उसका क्या हुआ?अभिलेखों के अनुसार नवीं–दसवीं शताब्दियों का; विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे कहीं अधिक बड़ा किया गया। (पृष्ठ 186)
★★123कृष्णदेव राय ने विरुपाक्ष मन्दिर में क्या बनवाया?मुख्य मन्दिर के सामने का मण्डप, अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में, जिसे सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तंभों से सजाया गया। पूर्वी गोपुरम् के निर्माण का श्रेय भी उन्हीं को दिया जाता है। (पृष्ठ 186)
★124मुख्य मन्दिर के सामने के मण्डप और पूर्वी गोपुरम् जैसे परिवर्धनों से विरुपाक्ष मन्दिर के केंद्रीय देवालय पर क्या असर पड़ा?केंद्रीय देवालय पूरे परिसर के एक छोटे भाग तक सीमित रह गया। (पृष्ठ 186)
★★125विजयनगर के मन्दिरों के सभागार किन कामों के लिए थे?कुछ में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रम देखने के लिए रखी जाती थीं; कुछ में देवताओं के विवाह के उत्सव होते थे; और कुछ देवताओं को झूला झुलाने के लिए थे। (पृष्ठ 187)
★★126! विजयनगर के विट्ठल मन्दिर के प्रमुख देवता कौन हैं: क्या वे शिव का रूप हैं?नहीं। विट्ठल विष्णु का एक रूप हैं, जो सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते हैं। (पृष्ठ 187)
★★127कर्नाटक में विट्ठल की पूजा शुरू करना क्या दिखाता है?विजयनगर के शासकों ने एक साम्राज्यिक संस्कृति बनाने के लिए अलग-अलग परंपराओं को कैसे आत्मसात किया। (पृष्ठ 187, 188)
★128विट्ठल मन्दिर में सभागारों के अलावा कौन-सी अनूठी संरचना है?रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर। (पृष्ठ 187, 188)
★129मन्दिर परिसरों की रथ गलियाँ कैसी थीं?गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती थीं; फर्श पत्थर के टुकड़ों से बना था, और दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डप थे, जिनमें व्यापारी दुकानें लगाते थे। (पृष्ठ 188)
★130विजयनगर के नायकों ने क़िलेबंदी और मन्दिर निर्माण की परंपराओं का क्या किया?उन्हें जारी रखा और और व्यापक बनाया। “कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरमों का निर्माण भी स्थानीय नायकों द्वारा किया गया था”। (पृष्ठ 188)

सेट 9 — हम्पी का अंकन, बाज़ार और स्रोत 5 (कार्ड 131–143)

#प्रश्नउत्तर
★★131विजयनगर के बारे में जानकारी किन साधनों से मिलती है, और मैकेन्ज़ी के शुरुआती सर्वेक्षणों के बाद क्या जोड़ा गया?फोटोग्राफ, नक्शे, संरचनाओं के खड़े रेखाचित्र तथा मूर्तियाँ इन साधनों से। मैकेन्ज़ी द्वारा किए गए आरंभिक सर्वेक्षणों के बाद यात्रा वृत्तांतों और अभिलेखों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़ा गया। (पृष्ठ 188)
★★132बीसवीं शताब्दी में हम्पी का संरक्षण किन संस्थाओं ने किया, और 1976 में इसे क्या मान्यता मिली?भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण और कर्नाटक पुरातात्विक एवं संग्रहालय विभाग ने। 1976 में हम्पी को “राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में” मान्यता मिली। (पृष्ठ 188)
★★1331980 के दशक के आरंभ में हम्पी में कौन-सी बड़ी परियोजना शुरू हुई?भौतिक अवशेषों के सूक्ष्मता से प्रलेखन की; यह विविध प्रकार के अभिलेखन प्रयोग से और व्यापक तथा गहन सर्वेक्षणों के माध्यम से हुआ। “लगभग बीस वर्षों” में पूरे विश्व के दर्जनों विद्वानों ने इस जानकारी को इकट्ठा और संरक्षित करने का कार्य किया। (पृष्ठ 188)
★★134प्रलेखन परियोजना में पूरे क्षेत्र को कितने भागों में बाँटा गया, और हर भाग की पहचान कैसे हुई?25 वर्गाकार भागों में; हर वर्ग को वर्णमाला के एक अक्षर से इंगित किया गया। फिर इन्हें छोटे वर्गों के समूहों में, और उन्हें और छोटी इकाइयों में बाँटा गया। (पृष्ठ 188, 189)
★★135प्रलेखन परियोजना में क्या खोजा और प्रलेखित किया गया?छोटे देवस्थलों और घरों से लेकर विशाल मन्दिरों तक हज़ारों संरचनाओं के अवशेष। सड़कों, रास्तों और बाज़ारों के अवशेष भी मिले, जिनकी जगह स्तंभों के आधारों और मंचों से पहचानी गई। (पृष्ठ 189)
136किताब बाज़ारों के अवशेषों के बारे में क्या लिखती है?“एक समय जो बाज़ार, जीवंत थे, उनका बस अब यही कुछ बचा है”। (पृष्ठ 189)
★★137विजयनगर के स्मारकों पर काम करने वाले विद्वानों को किस चीज़ की कल्पना करनी पड़ती है?“नष्ट हो चुकी लकड़ी की वस्तुओं” की: स्तंभ, ब्रेकेट, धरन, भीतरी छत, लटकते छज्जों के अंदरूनी भाग और मीनारें, जो प्लास्टर से सजाए और संभवत: चटकीले रंगों से चित्रित थे। यह जॉन एम. फ्रिट्ज़, जॉर्ज मिशेल और एम. एस. नागराज राव की राय है। (पृष्ठ 190)
★138लकड़ी की संरचनाएँ नष्ट हो गईं और केवल पत्थर बचा, फिर भी हम उस समय के जीवन के बारे में कैसे जान पाते हैं?यात्रियों द्वारा पीछे छोड़े गए विवरण उस समय के स्पंदन से पूर्ण जीवन के कुछ आयामों को पुनर्निर्मित करने में सहायक होते हैं। (पृष्ठ 190)
★★139पेस ने विजयनगर की किस गली का वर्णन किया, और वहाँ क्या मिलता था?एक चौड़ी और सुंदर गली, जिसमें बहुत से व्यापारी थे। वहाँ “सभी प्रकार के माणिक्य, और हीरे, और पन्ने, और मोती, और छोटे मोती, और वस्त्र, और पृथ्वी पर होने वाली हर वस्तु” मिलती थी। (पृष्ठ 191)
★140पेस के अनुसार उस गली में हर शाम क्या होता था?एक मेला लगता था, जहाँ कई सामान्य घोड़े और टट्टू, तुरंज, नींबू, संतरे, अंगूर, उद्यान में उगने वाली हर प्रकार की वस्तुएँ और लकड़ी मिलती थी। (पृष्ठ 191)
★★141पेस ने विजयनगर को किस तरह का शहर बताया?“विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर”; उसके अनुसार बाज़ार चावल, गेहूँ, अनाज और दालों जैसे खाद्य पदार्थों से भरे रहते थे, और ये सब सस्ते दामों पर तथा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे। (पृष्ठ 191)
★142फर्नाओ नूनिज़ के अनुसार विजयनगर के बाज़ारों में फल कैसे मिलते थे?बाज़ार “प्रचुर मात्रा में फलों, अंगूरों और संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से भरे रहते थे और सभी बहुत सस्ते।” (पृष्ठ 191)
★143फर्नाओ नूनिज़ ने विजयनगर को किस नाम से लिखा, और वहाँ के बाज़ारों में मांस के बारे में क्या बताया?नूनिज़ ने उसे बिसनग (विजयनगर) लिखा। उसके अनुसार वहाँ बाज़ारों में मांस बड़ी मात्रा में बिकता था: भेड़–बकरी, सूअर, मृगमांस, तीतर, खरगोश, कबूतर और बटेर समेत कई तरह का। (पृष्ठ 191)

सेट 10 — इमारतें क्या बताती हैं और क्या नहीं (कार्ड 144–151)

#प्रश्नउत्तर
★★144बची हुई इमारतें हमें किन बातों की जानकारी देती हैं?स्थानों को किन तरीकों से व्यवस्थित किया गया और उन्हें प्रयोग में लाया गया; और किन वस्तुओं और तकनीकों से उनका निर्माण किया गया। (पृष्ठ 191)
★145किसी शहर की क़िलेबंदी के अध्ययन से क्या पता चलता है?उसकी प्रतिरक्षण आवश्यकताओं और सामरिक तैयारी का। (पृष्ठ 191)
★146दूसरी जगहों की इमारतों से तुलना करने पर इतिहासकार क्या जान पाते हैं?विचारों के फैलाव और सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में। (पृष्ठ 191)
★147इमारतों में छिपे प्रतीकों को समझने के लिए किन दूसरे स्रोतों की मदद ली जाती है?“साहित्य, अभिलेखों तथा लोकप्रचलित परंपराओं” से मिली जानकारी की। (पृष्ठ 191)
★148कृष्णदेव राय की मूर्ति कहाँ है, और पेस ने उन्हें कैसा बताया?तमिलनाडु के चिदम्बरम मन्दिर के गोपुरम् में। पेस के अनुसार “मझला कद, गोरा रंग और अच्छी काठी, कुछ मोटा, राजा के चेहरे पर चेचक के दाग़ हैं।” (पृष्ठ 192)
★★149किताब के अनुसार इमारतें शहर के सामान्य लोगों और उन्हें बनाने वालों के बारे में कौन-सी बातें नहीं बतातीं?सामान्य पुरुष, महिलाएँ और बच्चे इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे • क्या वे शाही या धार्मिक केंद्र के किसी भी भाग में पहुँच सकते थे • क्या वे मूर्ति के सामने से तेज़ी से निकल जाते या रुककर उसके प्रतीक चित्रण को समझने की कोशिश करते • और निर्माण पर काम करने वाले इन उद्यमों के बारे में क्या सोचते थे। (पृष्ठ 192)
★★150इमारतों को बनाने वालों के बारे में कौन-से प्रश्न इमारतें देखकर नहीं सुलझते?विशाल उद्यमों के लिए विशिष्ट ज्ञान किसके पास था • भवनों के नक्शे कौन बनाता था • राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आते थे; क्या उन्हें युद्ध के दौरान पड़ोसी क्षेत्रों से बंदी बनाया जाता था • उन्हें किस प्रकार का वेतन मिलता था • निर्माण का अधीक्षण कौन करता था • कच्चा माल कैसे और कहाँ से लाया जाता था। (पृष्ठ 192)
★151विजयनगर की इमारतों के बारे में जिन प्रश्नों के उत्तर भवन या उनके अवशेष देखकर नहीं मिलते, उनके लिए किताब क्या रास्ता बताती है?अन्य स्रोतों के प्रयोग से जारी शोध संभवत: कुछ और संकेत दे सकता है। (पृष्ठ 192)

सेट 11 — साल और काल-रेखाएँ (कार्ड 152–164)

#प्रश्नउत्तर
★★152! किताब की काल-रेखा 1 में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की तिथि कैसे छपी है, और इसका क्या मतलब है?“1336?” यानी प्रश्नचिह्न के साथ; जिस तिथि के साथ प्रश्नचिह्न लगा है, वह अनिश्चित है। (पृष्ठ 193)
★153काल-रेखा 1 के अनुसार दिल्ली सल्तनत की स्थापना कब हुई?1206, लगभग 1200–1300 ईसवी की अवधि में। (पृष्ठ 193)
★154काल-रेखा 1 में लगभग 1300–1400 ईसवी की अवधि में बहमनी राज्य की स्थापना किस वर्ष दर्ज है?1347। (पृष्ठ 193)
★155काल-रेखा 1 में उड़ीसा के गजपति राज्य की स्थापना किस वर्ष दर्ज है?1435। (पृष्ठ 193)
★156काल-रेखा 1 में किन सल्तनतों का उदय 1490 के सामने दर्ज है?अहमदनगर, बीजापुर तथा बेरार सल्तनतों का। (पृष्ठ 193)
★157काल-रेखा 1 में पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर विजय किस वर्ष दर्ज है?1510। (पृष्ठ 193)
★158काल-रेखा 1 में गोलकुंडा की सल्तनत का उदय किस वर्ष दर्ज है?1518। (पृष्ठ 193)
★159काल-रेखा 1 में बाबर द्वारा मुगल साम्राज्य की स्थापना किस वर्ष दर्ज है?1526। (पृष्ठ 193)
★★160काल-रेखा 2 में 1800 की घटना क्या है?कॉलिन मैकेन्ज़ी द्वारा विजयनगर की यात्रा। (पृष्ठ 193)
★★161काल-रेखा 2 के अनुसार 1856 में क्या हुआ?अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने हम्पी के पुरातात्विक अवशेषों के पहले विस्तृत चित्र लिए। (पृष्ठ 193)
★★162काल-रेखा 2 के अनुसार 1876 में क्या शुरू हुआ?पुरास्थल की मंदिर की दीवारों के अभिलेखों का जे.एफ. फ्लीट द्वारा प्रलेखन। (पृष्ठ 193)
★★163काल-रेखा 2 के अनुसार 1902 में क्या शुरू हुआ?जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण कार्य। (पृष्ठ 193)
★★164काल-रेखा 2 के अनुसार 1986 में हम्पी के साथ क्या हुआ?हम्पी को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया। (पृष्ठ 193)

अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए

नाम और खोज: विजयनगर नाम “विजय का शहर”; लोग इसे हम्पी (पम्पादेवी से) के नाम से याद रखते रहे। 1800 में कॉलिन मैकेन्ज़ी ने पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया; 1836 से अभिलेख, 1856 से छाया चित्र, 1876 में फ्लीट का प्रलेखन, 1902 में मार्शल का संरक्षण। (पृष्ठ 170, 193)

राजवंश और 1565: संगम (1485 तक), सुलुव (1503 तक), तुलुव (कृष्णदेव राय, 1509–29), अराविदु (1542 से केंद्र पर नियंत्रण)। 1565 में रामराय के नेतृत्व में राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) की हार; शहर लूटा गया और कुछ ही वर्षों में उजड़ गया। (पृष्ठ 173)

नायक: सेना प्रमुख, आम तौर पर क़िलों पर नियंत्रण। अमर–नायक सैनिक कमांडर थे, जिन्हें राय राज्य-क्षेत्र देते थे; वे भू राजस्व और कर वसूलते, घोड़ों-हाथियों का दल रखते और मन्दिरों व सिंचाई के साधनों का रख-रखाव करते थे। इसके कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए प्रतीत होते हैं। (पृष्ठ 175)

पानी और क़िलेबंदी: तुंगभद्रा का प्राकृतिक कुण्ड, हौज़, कमलपुरम् जलाशय और हिरिया नहर। अब्दुर रज़्ज़ाक का “दुर्गों की सात पंक्तियों” में उल्लेख; क़िलेबंदी ने खेतों को भी घेरा, और विजयनगर के शासकों ने “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” अपनाई। (पृष्ठ 177, 178)

राजकीय केंद्र: दक्षिण-पश्चिमी भाग में 60 से भी अधिक मन्दिर और लगभग तीस महल। महानवमी डिब्बा लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट ऊँचा है; इसके अनुष्ठान संभवत: शरद मास के दस दिन के त्योहार के अवसर पर किए जाते थे। कमल महल में नौ मीनारें थीं और उसका नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। (पृष्ठ 179, 180, 181)

धार्मिक केंद्र: तुंगभद्रा के किनारे का चट्टानी उत्तरी भाग; पम्पादेवी–विरुपाक्ष की मान्यता; शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन का दावा करते थे। राय गोपुरम्, मण्डप और रथ गलियाँ; विट्ठल विष्णु का रूप हैं। (पृष्ठ 184, 185, 187, 188)

अंकन और स्रोत: 1980 के दशक के आरंभ से लगभग बीस वर्ष की प्रलेखन परियोजना; 25 वर्गाकार भाग। पेस और नूनिज़ के वृत्तांतों से बाज़ारों का जीवन जुड़ता है; इमारतें यह नहीं बतातीं कि सामान्य लोग उनके बारे में क्या सोचते थे। (पृष्ठ 188, 189, 191, 192)