Chapter 7एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग II (कक्षा 12), विषय 7

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कक्षा — 12 · विषय — इतिहास (भारतीय इतिहास के कुछ विषय, भाग 2) · पृष्ठ — 170 से 195 · कालांश — 11 (10 पढ़ाने के, 1 मूल्यांकन का), हर एक 40–45 मिनट

इस्तेमाल कैसे करें — हर कालांश की पूरी तैयारी उसके अपने कार्ड में है: किताब के पृष्ठ, स्लाइड, इंटरैक्टिव अध्याय, प्रश्न बैंक और फ़्लैशकार्ड। पहले एक नज़र में वाला चित्र और तालिका देखिए, फिर आज के कालांश का कार्ड खोलिए। कार्ड के हिस्से और शब्द, जैसे निकास-पर्ची, तैयारी वाली तालिका में समझाए गए हैं।

अध्याय का बड़ा विचार — किताब पृष्ठ 170 पर बताती है कि 1565 में लुटा और उजड़ा यह शहर कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के लोगों की स्मृतियों में हम्पी नाम से जीवित रहा, और “इन मौखिक परंपराओं के साथ–साथ पुरातात्विक खोजों, स्थापत्य के नमूनों, अभिलेखों तथा अन्य दस्तावेज़ों ने विजयनगर साम्राज्य को पुन: खोजने में विद्वानों की सहायता की।” पूरा अध्याय यही दिखाता है कि ये स्रोत मिलकर एक उजड़े शहर को कैसे फिर से पढ़ते हैं, और कहाँ चुप रह जाते हैं।

हमारी ओर से पूरे अध्याय के लिए एक सवाल: खंडहर, अभिलेख और यात्रियों के वृत्तांत मिलकर विजयनगर के बारे में क्या-क्या बताते हैं, और क्या नहीं बताते? पहले दिन बच्चे इस पर दो पंक्तियाँ पर्ची पर लिखेंगे और पर्चियाँ आपके पास रहेंगी; कालांश 10 में, पूरा अध्याय पढ़ने के बाद, वही पर्चियाँ लौटाकर परखी जाएँगी।


एक नज़र में — ग्यारह कालांश और उनकी सामग्री

हर तीर पर लिखा है कि अगला कालांश पिछले से क्यों निकलता है।

ग्यारह कालांश, एक कहानी

कालांश 1शुरुआत और हम्पी की खोजनाम, स्मृति और मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण (पृष्ठ 170–171)
कालांश 2राय और व्यापारीस्थापना, पड़ोसी, घोड़े और व्यापार (पृष्ठ 171–172)
कालांश 3चरमोत्कर्ष, पतन और नायककृष्णदेव राय, 1565, सुलतानों से संबंध, अमर–नायक, मानचित्र 1 (पृष्ठ 173–175)
कालांश 4पानी और दीवारेंजल–संपदा, यात्री, क़िलेबंदियाँ और उनके भीतर खेत (पृष्ठ 176–178)
कालांश 5शहरी केंद्र और राजकीय केंद्रप्रवेशद्वार, सड़कें, आम लोगों के घर, राजकीय केंद्र की बनावट (पृष्ठ 178–180)
कालांश 6महानवमी डिब्बा और दूसरे भवनअनुष्ठान, कमल महल, हाथियों का अस्तबल, हज़ार राम मन्दिर (पृष्ठ 180–183)
कालांश 7धार्मिक केंद्रराजधानी का चयन, विरुपाक्ष, गोपुरम् और मण्डप (पृष्ठ 184–188)
कालांश 8अंकनहम्पी का नक्शा कैसे बना (पृष्ठ 188–190)
कालांश 9उत्तरों की खोज में प्रश्नबाज़ार का स्रोत 5, इमारतें क्या बताती हैं और क्या नहीं (पृष्ठ 191–192)
कालांश 10काल-रेखा और मानचित्रकाल-रेखा 1 और 2, प्रश्न 10, पहले दिन की पर्चियाँ (पृष्ठ 193–195)
कालांश 11मूल्यांकनअभ्यास के 12 प्रश्न (पृष्ठ 194–195)
हर कालांश के पृष्ठ, स्लाइड और बाक़ी सामग्री नीचे की तालिका में।

सामग्री के पन्ने: स्लाइड का पाठ · स्लाइड शो · प्रश्न बैंक · फ़्लैशकार्ड · इंटरैक्टिव अध्याय · रिवीजन नोट्स · क्विज़

कालांश और टॉपिकपृष्ठस्लाइडइंटरैक्टिवप्रश्न बैंकफ़्लैशकार्ड
1 शुरुआत; 1. हम्पी की खोज170–171शुरू की तीन स्लाइड, फिर भाग 1शुरुआत · 1. हम्पी की खोजक1 · क2 · क3 · ख1 · ख2 · ख31–13
2 2. राय, नायक तथा सुलतान: 2.1 शासक और व्यापारी171–172भाग 22. राय, नायक तथा सुलतानक4 · क5 · क6 · ख4 · ख5 · घ1 · घ214–26
3 2.2 राज्य का चरमोत्कर्ष तथा पतन; 2.3 राय तथा नायक; मानचित्र 1173–175भाग 32. राय, नायक तथा सुलतानक7 से क13 · ख6 · ग1 · ग2 · घ3 · च1 · छ127–56
4 3. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश: 3.1 जल–संपदा; 3.2 क़िलेबंदियाँ तथा सड़कें176–178भाग 43. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेशक14 · क15 · ख7 · ग3 · ग4 · ग5 · ङ1 · ङ2 · ङ3 · च5 · छ2 · छ357–77
5 3.3 शहरी केंद्र; 4. राजकीय केंद्र178–180भाग 53. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश · 4. राजकीय केंद्रख8 · ग6 · घ4 · ङ578–88
6 4.1 महानवमी डिब्बा; 4.2 राजकीय केंद्र में स्थित अन्य भवन180–183भाग 64. राजकीय केंद्रक16 · क17 · क18 · ख9 · ग8 · ङ4 · च389–108
7 5. धार्मिक केंद्र: 5.1 राजधानी का चयन; 5.2 गोपुरम् और मण्डप184–188भाग 75. धार्मिक केंद्रक19 · क20 · ग7 · घ5 · घ6 · च4109–130
8 6. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन188–190भाग 86. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकनख10 · च2131–138
9 7. उत्तरों की खोज में प्रश्न191–192भाग 97. उत्तरों की खोज में प्रश्नच6 · छ4139–151
10 काल-रेखा 1 और 2; मानचित्र कार्य (प्रश्न 10)193–195भाग 10सार और काल-रेखा · मानचित्र कार्यनमूना पत्र 1152–164
11 मूल्यांकन: अभ्यास के 12 प्रश्न194–195आख़िरी भागहर पड़ाव के अंत में उसके प्रश्ननमूना पत्र 2 और 3पूरा सेट

प्रश्न बैंक के कोड ऐसे पढ़िए: क1 मतलब खंड क (वस्तुनिष्ठ प्रश्न) का प्रश्न 1। ख रिक्त स्थान है, ग सही/ग़लत, घ अति लघूत्तरीय (2 अंक), ङ लघूत्तरीय (3 अंक), च दीर्घ उत्तरीय (5 अंक) और छ स्रोत पर आधारित प्रश्न (4 अंक)। फ़्लैशकार्ड के अंक कार्ड के नंबर हैं।

पढ़ाने से पहले

तैयारी — कार्ड में क्या-क्या है और उसे कैसे तैयार करें

हर कालांश का कार्ड इसी क्रम में चलता है। पहली बार पढ़ा रहे हैं तो यह तालिका एक बार पढ़ लीजिए।

हिस्सा या औज़ारयह क्या हैकैसे तैयार करें
किताबकार्ड के सबसे ऊपर लिखे पृष्ठ; बच्चे इन्हीं से पढ़ेंगेपृष्ठ एक दिन पहले पढ़िए, ख़ासकर स्रोत वाले बॉक्स और किनारे के प्रश्न
स्लाइडस्लाइड का पाठ का वह भाग जो इस कालांश का हैस्लाइड शो एक बार चलाकर देखिए; प्रोजेक्टर न हो तो स्लाइड का पाठ ही काफ़ी है
इंटरैक्टिव अध्यायकिताब के हर हिस्से का एक पड़ाव, जिसे बच्चे फ़ोन या कंप्यूटर पर ख़ुद पढ़ सकते हैंकार्ड में दिया पड़ाव खोलकर देखिए कि उसमें क्या है
लक्ष्यकालांश के अंत तक हर बच्चा क्या कर सकेनिकास-पर्ची इसी लक्ष्य को जाँचती है; दोनों साथ पढ़िए
साथ ले जाइएकिताब के अलावा जो चीज़ें कक्षा में चाहिएएक दिन पहले जुटा लीजिए; चार्ट पेपर पर चित्र पहले से बना लीजिए
40 मिनटकालांश के छह चरण, मिनट के हिसाब सेपहला चरण हमेशा पिछली पर्चियाँ है, आख़िरी हमेशा निकास-पर्ची; बीच के चरण किताब के क्रम में
चित्रउस कालांश का एक आरेख, किताब के एक पृष्ठ सेकॉपी में एक बार बना लीजिए, फिर बोर्ड पर बच्चों के जवाबों से बनवाइए
बोर्ड-कार्यकालांश के अंत तक बोर्ड पर बनने वाली तालिका, जिसे बच्चे कॉपी में उतारेंहर पंक्ति के साथ पृष्ठ लिखा है; बच्चे भी पृष्ठ लिखें
यहाँ बच्चे अटकेंगेवे बातें जहाँ बच्चे अक्सर भूल करते हैं, और कमज़ोर और तेज़ विद्यार्थी के लिए एक-एक कामकालांश से पहले पढ़ लीजिए, ताकि भूल होते ही रोक सकें
निकास-पर्चीआख़िरी कुछ मिनट में दो छोटे प्रश्न, जिनके उत्तर बच्चे काग़ज़ की पर्ची पर लिखकर देते हैंनमूना उत्तर कार्ड में हैं; पर्चियाँ अगले कालांश के पहले चरण में काम आती हैं
प्रश्न बैंकगृहकार्य के प्रश्न, कोड सेकोड ऊपर की तालिका के नीचे समझाए गए हैं
फ़्लैशकार्डदोहराने के लिए छोटे कार्ड, नंबर सेबच्चों को बता दीजिए कि आज कौन-से नंबर दोहराने हैं

हर कालांश से पहले:

  1. कार्ड के पृष्ठ किताब में पढ़िए, ख़ासकर स्रोत वाला बॉक्स।
  2. पिछली निकास-पर्चियाँ छाँटिए: कितनों ने सही लिखा, सबसे ज़्यादा कौन-सी भूल हुई।
  3. “चित्र” वाला आरेख कॉपी में एक बार बनाइए।
  4. गृहकार्य के कोड प्रश्न बैंक में खोलकर देख लीजिए कि उत्तर कितने लंबे हैं।

पढ़ाने का क्रम: पहले राज्य, फिर उसका शहर, फिर शहर को पढ़ने का तरीका

किताब पहले बताती है कि हम्पी के खंडहर कैसे सामने आए (भाग 1), फिर यह कि साम्राज्य किसने बनाया और वह किन पड़ोसियों से लड़ता और लेन-देन करता रहा (भाग 2)। इसके बाद वह शहर को हिस्सों में खोलती है: पानी और दीवारें, शहरी केंद्र, राजकीय केंद्र और धार्मिक केंद्र (भाग 3 से 5)। आख़िर में वह बताती है कि इस शहर का नक्शा कैसे बना, और इमारतें हमें क्या नहीं बता पातीं (भाग 6 और 7)। कालांश इसी क्रम में चलते हैं।

यह क्रम इसलिए ज़रूरी है कि शहर की हर इमारत भाग 2 की राजनीति से अर्थ पाती है। जो बच्चा जानता है कि राज्य घोड़ों, व्यापार और नायकों पर टिका था, और सल्तनतों से उसका संघर्ष चलता रहता था, वही समझेगा कि शहर के चारों ओर इतनी क़िलेबंदी क्यों थी, महानवमी डिब्बा पर राजा क्या दिखाना चाहता था, और गोपुरम् किसकी शक्ति के प्रतीक थे। और जो बच्चा भाग 6 में देखता है कि नक्शा कितनी मेहनत से बना, वही भाग 7 का यह सवाल ठीक से पूछ पाएगा कि इमारतें क्या नहीं बतातीं। इस क्रम को मत तोड़िए।

सामग्री — यह जुटा लीजिए

#क्याकिस कालांश में
1चार्ट पेपर, दस शीट, और मोटे स्केच पेनहर कालांश का चित्र (कालांश 1 से 10)
2भारत का मानचित्र या एटलस3 (मानचित्र 1 और चर्चा), 4 (यात्रियों के देश)
3विश्व का सीमारेखा मानचित्र, हर बच्चे के लिए एक10 (प्रश्न 10)
4पर्चियों के लिए काग़ज़, और एक लिफ़ाफ़ाहर कालांश; लिफ़ाफ़ा 1 और 10 में
5प्रश्न बैंक का नमूना पत्र 2, हर बच्चे के लिए एक प्रति11
6प्रोजेक्टर, हो तोस्लाइड और इंटरैक्टिव अध्याय के लिए; न हो तो चार्ट पेपर और बोर्ड काफ़ी हैं

कक्षा-व्यवस्था

  • जोड़ियाँ स्रोत पढ़ने के कामों के लिए: स्रोत 1 (कालांश 1), स्रोत 2 (कालांश 3), स्रोत 3 और 4 (कालांश 4), और स्रोत 5 (कालांश 9)। किनारे के बाक़ी बॉक्स आप ज़ोर से पढ़िए।
  • चार्ट पेपर कक्षा की दीवार पर एक जगह लगाइए। कालांश 10 और 11 में सब फिर काम आएँगे।
  • युद्ध राजनीति की तरह पढ़ाइए, जैसे किताब पढ़ाती है। पृष्ठ 171 के अनुसार विजयनगर के शासकों का दक्कन के सुलतानों और गजपति शासकों से संघर्ष “उर्वर नदी घाटियों तथा लाभकारी विदेशी व्यापार से उत्पन्न संपदा पर अधिकार के लिए” था, और पृष्ठ 174 कहता है कि सुलतानों और रायों के संबंध “धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे।” कक्षा में इन युद्धों को धर्मों की लड़ाई मत बनने दीजिए।
  • धर्म और जाति इतिहास की तरह: मन्दिरों, मस्जिदों और महानवमी के अनुष्ठानों को वैसे ही पढ़ाइए जैसे किताब बताती है। किसी बच्चे से उसका धर्म या जाति मत पूछिए, और कक्षा में किसी पूजा या अनुष्ठान का अभिनय मत करवाइए।
  • कौन बेहतर, यह बहस नहीं। कक्षा में यह बहस मत करवाइए कि कौन-सी परंपरा या कौन-सी स्थापत्य शैली बेहतर थी; बहस बस इतनी हो कि किताब का प्रमाण क्या है।
  • बिना प्रोजेक्टर भी हर कालांश चल जाता है: हर कार्ड का चित्र बोर्ड पर बन सकता है, और बच्चे अपनी किताब में चित्र, नक्शे और काल-रेखा देखते हैं।

अधिगम प्रतिफल

#प्रतिफलकालांशजाँच
1विजयनगर और हम्पी नामों का अर्थ, और खंडहरों की खोज के स्रोत (मैकेन्ज़ी, अभिलेख, छाया चित्र) बताता है1निकास-पर्ची; अभ्यास का प्रश्न 1
2साम्राज्य की स्थापना, पड़ोसी राज्यों से संघर्ष के कारण और घोड़ों के व्यापार का महत्त्व समझाता है2निकास-पर्ची; अभ्यास का प्रश्न 8
3राजवंशों का क्रम, कृष्णदेव राय का शासन, 1565 का युद्ध, सुलतानों से संबंध और अमर–नायक प्रणाली लिखता है3निकास-पर्ची; स्रोत 2 के प्रश्न
4शहर की जल–व्यवस्था, क़िलेबंदी और उसके भीतर खेतों के होने का कारण बताता है4निकास-पर्ची; अभ्यास के प्रश्न 2 और 3
5शहरी केंद्र में आम लोगों के जीवन के प्रमाण, और राजकीय केंद्र की बनावट बताता है5निकास-पर्ची; अभ्यास के प्रश्न 6 और 9
6महानवमी डिब्बा के अनुष्ठानों का महत्त्व, और कमल महल, हाथियों के अस्तबल और हज़ार राम मन्दिर की बातें बताता है6निकास-पर्ची; अभ्यास के प्रश्न 4 और 7
7राजधानी के चयन का कारण, और गोपुरम्, मण्डप और रथ मन्दिर की विशेषताएँ समझाता है7निकास-पर्ची; अभ्यास के प्रश्न 5 और 8
8हम्पी के अंकन के चरण क्रम से बताता है8निकास-पर्ची; अभ्यास का प्रश्न 1
9स्रोत 5 से बाज़ारों का वर्णन करता है, और बताता है कि इमारतें क्या बताती हैं और क्या नहीं9निकास-पर्ची; अभ्यास का प्रश्न 9
10दोनों काल-रेखाएँ पढ़ता है और प्रश्न 10 के चार देश विश्व मानचित्र पर दिखाता है10मानचित्र; अभ्यास का प्रश्न 10
11पूरे अध्याय के सवाल का उत्तर किताब के उदाहरणों से देता है1, 10पहले दिन की पर्ची, और कालांश 10 में उसका नया उत्तर

कालांश-दर-कालांश

कालांश 1 — शुरुआत; 1. हम्पी की खोज

किताब — पृष्ठ 170–171 · स्लाइड — शुरू की तीन स्लाइड, फिर भाग 1 · इंटरैक्टिव — शुरुआत और 1. हम्पी की खोज

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी “विजयनगर” और “हम्पी” नामों का अर्थ बता सके, हम्पी के खंडहरों को पढ़ने के पृष्ठ 170 पर गिनाए पाँच तरह के स्रोत गिना सके, और मैकेन्ज़ी के सर्वेक्षण के दो उद्देश्य लिख सके।

साथ ले जाइए — किताब, पहले दिन की पर्चियों के लिए काग़ज़ और एक लिफ़ाफ़ा, और मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण: किसलिए वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पहले दिन की पर्ची। बोर्ड पर पूरे अध्याय का सवाल लिखिए: खंडहर, अभिलेख और यात्रियों के वृत्तांत मिलकर विजयनगर के बारे में क्या-क्या बताते हैं, और क्या नहीं बताते? हर बच्चा दो पंक्तियाँ और अपना नाम लिखे। पर्चियाँ लिफ़ाफ़े में रखिए; कालांश 10 में ये लौटेंगी। यह सवाल हमारी ओर से है।

  2. 5–12 मिनट · नाम, फैलाव और स्मृति। पृष्ठ 170 का पहला अनुच्छेद पढ़िए। बोर्ड पर लिखवाइए: विजयनगर अथवा “विजय का शहर” एक शहर और एक साम्राज्य, दोनों का नाम था। साम्राज्य की स्थापना चौदहवीं शताब्दी में हुई, और अपने चरमोत्कर्ष पर यह उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला था। 1565 में इस पर आक्रमण हुआ, इसे लूटा गया और बाद में यह उजड़ गया। सत्रहवीं–अठारहवीं शताब्दियों तक यह पूरी तरह विनष्ट हो गया, फिर भी कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के निवासियों ने इसे हम्पी नाम से याद रखा; यह नाम यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से आया। चित्र 7.1 दिखाइए: शहर के चारों ओर बनी पत्थर की दीवार का एक भाग।

  3. 12–22 मिनट · खंडहर कैसे सामने आए। पृष्ठ 170 का भाग 1 पढ़िए। 1800 में अभियंता और पुराविद कर्नल कॉलिन मैकेन्ज़ी, जो ईस्ट इण्डिया कंपनी में काम करते थे, हम्पी के भग्नावशेष प्रकाश में लाए और इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया। उनकी शुरुआती जानकारी विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थी। 1836 से अभिलेखकर्ता यहाँ और हम्पी के दूसरे मंदिरों से कई दर्जन अभिलेख इकट्ठा करने लगे, और 1856 से छाया चित्रकार भवनों के चित्र। इतिहासकारों ने इन स्रोतों का मिलान विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों से और तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे साहित्य से किया। फिर पूछिए: इतिहासकारों ने पुरोहितों की बताई बातों पर ही भरोसा क्यों नहीं किया, उनका मिलान दूसरे स्रोतों से क्यों किया? यह सवाल हमारी ओर से है। नमूना उत्तर — क्योंकि हर स्रोत अधूरा है, और कई स्रोत मिलकर ही पक्की तस्वीर बनाते हैं।

    • स्मृति: मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारियाँ विरुपाक्ष मन्दिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं (पृष्ठ 170)।
    • दूसरे स्रोत: अभिलेख, भवनों के छाया चित्र, विदेशी यात्रियों के वृत्तांत, और चार भाषाओं का साहित्य; हर एक कुछ ऐसा बताता है जो बाक़ी नहीं बताते।

    यही बात अभ्यास के प्रश्न 1 में पूछी गई है; उसका पूरा उत्तर कालांश 8 में बनेगा।

  4. 22–30 मिनट · स्रोत 1: मैकेन्ज़ी कौन थे। जोड़ियों में पृष्ठ 171 का स्रोत 1 पढ़वाइए। 1754 में जन्मे मैकेन्ज़ी अभियंता, सर्वेक्षक और मानचित्रकार के रूप में प्रसिद्ध हुए। 1815 में उन्हें “भारत का पहला सर्वेयर जनरल” बनाया गया, और 1821 में अपनी मृत्यु तक वे इसी पद पर रहे। उन्होंने स्थानीय परंपराओं का संकलन और ऐतिहासिक स्थलों का सर्वेक्षण “भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझने और उपनिवेश के प्रशासन को आसान बनाने के लिए” शुरू किया। उनका अपना मत भी स्रोत में है: “ब्रिटिश प्रशासन के सुप्रभाव में आने से पहले दक्षिण भारत खराब प्रबंधन की दुर्गति से लंबे समय तक जूझता रहा।” नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए। फिर पूछिए: मैकेन्ज़ी यह जानकारी केवल इतिहास जानने के लिए इकट्ठा कर रहे थे? यह सवाल हमारी ओर से है। नमूना उत्तर — नहीं, उनके दो उद्देश्य थे, और दूसरा शासन से जुड़ा था।

    • अतीत समझना: स्रोत 1 का पहला उद्देश्य भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझना है।
    • प्रशासन: दूसरा उद्देश्य उपनिवेश का प्रशासन आसान बनाना है। विजयनगर के अध्ययन से उन्हें विश्वास हो गया कि कंपनी उन संस्थाओं, कानूनों और रीति-रिवाज़ों के बारे में जानकारी पा सकती है जो लोगों को “अब भी प्रभावित करने वाले” थे।

    इसलिए स्रोत पढ़ते समय यह भी देखिए कि लिखने वाला कौन है और किसके लिए काम कर रहा है।

  5. 30–36 मिनट · चित्र 7.2 और किनारे का प्रश्न। चित्र 7.2 दिखाइए: यह थॉमस हिकी के बनाए तैलचित्र का किसी अज्ञात चित्रकार का बनाया प्रतिरूप है, लगभग 1825 का। कैप्शन पढ़िए: मैकेन्ज़ी के बायीं ओर दूरबीन थामे उनका चपरासी, और दायीं ओर उनके ब्राह्मण सहायक, एक जैन पंडित और उनके पीछे तेलुगु ब्राह्मण कावलेरी वेन्तक लच्छमैया। फिर पृष्ठ 171 के किनारे का प्रश्न पूछिए: चित्रकार ने मैकेन्ज़ी और उनके सूचनादाताओं को कैसे दिखाया है, और दर्शकों के मन में उनके बारे में कैसा विचार बैठाना चाहा है? नमूना उत्तर — बच्चे चित्र 7.2 ध्यान से देखकर अपनी राय लिखें; किताब से ये बातें काम आएँगी।

    • चित्र में कौन: मैकेन्ज़ी, उनके बायीं ओर दूरबीन थामे उनका चपरासी, और दायीं ओर जैन पंडित और तेलुगु ब्राह्मण कावलेरी वेन्तक लच्छमैया।
    • क्या देखें: किसे बीच में और प्रमुख दिखाया गया है, और सूचनादाता किस मुद्रा में खड़े हैं।
    • मैकेन्ज़ी का नज़रिया: स्रोत 1 में वे ब्रिटिश प्रशासन से पहले के दक्षिण भारत को “खराब प्रबंधन की दुर्गति” में बताते हैं। हमारी ओर से: सोचिए कि क्या चित्र भी यही संदेश देता है कि ज्ञान का श्रेय अंग्रेज़ अधिकारी का है और भारतीय जानकार केवल सहायक हैं।

    हर राय ठीक है, अगर वह चित्र या स्रोत 1 की किसी बात से जुड़ी हो।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) “हम्पी” नाम कहाँ से आया? (2) मैकेन्ज़ी के सर्वेक्षण के दो उद्देश्य लिखिए।

मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण: किसलिए (चरण 4)

मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण: किसलिए

1815भारत का पहला सर्वेयर जनरल1821 में मृत्यु तक इसी पद पर
पहलाभारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझनास्थानीय परंपराओं का संकलन
दूसराउपनिवेश का प्रशासन आसान बनानालोगों को अब भी प्रभावित करने वाले कानून और रीति-रिवाज़
1800पहला सर्वेक्षण मानचित्रशुरुआती जानकारी पुरोहितों की स्मृतियों से
NCERT, पृष्ठ 170–171

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
विजयनगर“विजय का शहर”; एक शहर और एक साम्राज्य, दोनों का नाम170
फैलावचरमोत्कर्ष पर उत्तर में कृष्णा नदी से प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक170
1565आक्रमण, लूट, फिर शहर उजड़ गया170
हम्पीलोगों की स्मृति में बचा नाम; स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी से170
1800मैकेन्ज़ी ने भग्नावशेष प्रकाश में लाए; पहला सर्वेक्षण मानचित्र170
पहली जानकारीविरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियाँ170
1836 और 18561836 से अभिलेखकर्ता अभिलेख इकट्ठा करने लगे; 1856 से छाया चित्रकार भवनों के चित्र170
मिलानविदेशी यात्रियों के वृत्तांत; तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत साहित्य170
मैकेन्ज़ी1754 में जन्म; 1815 में भारत के पहले सर्वेयर जनरल; 1821 में मृत्यु171

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “मैकेन्ज़ी से पहले विजयनगर को कोई नहीं जानता था।” ऐसा नहीं है। पृष्ठ 170 के अनुसार यह शहर कृष्णा–तुंगभद्रा दोआब के निवासियों की स्मृतियों में जीवित रहा, और मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी भी पुरोहितों की स्मृतियों से आई। मैकेन्ज़ी ने 1800 में भग्नावशेष प्रकाश में लाए और पहला सर्वेक्षण मानचित्र बनाया।
  • 1836 और 1856 की अदला-बदली। 1836 से अभिलेख इकट्ठा हुए, 1856 से छाया चित्र बने। बोर्ड पर दोनों साल उनके काम के साथ लिखवाइए, अकेले नहीं।
  • विजयनगर शहर था या साम्राज्य? दोनों। आगे जहाँ यह नाम आए, बच्चे देखें कि बात शहर की है या साम्राज्य की।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 1. हम्पी की खोज खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: मैकेन्ज़ी की शुरुआती जानकारी किनसे मिली थी? (विरुपाक्ष मंदिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों से।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: इतिहासकारों ने स्रोतों का मिलान चार भाषाओं के साहित्य से किया। इससे विजयनगर के लोगों के बारे में क्या संकेत मिलता है? (कि यहाँ अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोग थे; पृष्ठ 171 भी यही कहता है कि साम्राज्य में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोग रहते थे।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से। (2) भारत के अतीत को बेहतर ढंग से समझना, और उपनिवेश का प्रशासन आसान बनाना।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क1, क2, क3 और ख1, ख2, ख3; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 1 के लिए पृष्ठ 170 के पाँच स्रोत कॉपी में नोट कर लें।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 1–13।

कालांश 2 — 2. राय, नायक तथा सुलतान: 2.1 शासक और व्यापारी

किताब — पृष्ठ 171–172 · स्लाइड — भाग 2 · इंटरैक्टिव — 2. राय, नायक तथा सुलतान

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी साम्राज्य की स्थापना संस्थापकों और साल के साथ बता सके, पड़ोसी राज्यों से संघर्ष के दो कारण लिख सके, और समझा सके कि घोड़ों का व्यापार इतना ज़रूरी क्यों था।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और घोड़े, व्यापारी और राजा वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: हम्पी नाम पम्पादेवी से; मैकेन्ज़ी के दो उद्देश्य, अतीत समझना और प्रशासन आसान बनाना। जिन्होंने केवल पहला उद्देश्य लिखा, उन्हें स्रोत 1 का वाक्य फिर पढ़वाइए।

  2. 5–12 मिनट · स्थापना और लोग। पृष्ठ 171 का भाग 2 पढ़िए। “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” साम्राज्य की स्थापना दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने 1336 में की। इसकी अस्थिर सीमाओं में अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले और अलग-अलग धार्मिक परंपराएँ मानने वाले लोग रहते थे। पृष्ठ 171 का नीला बॉक्स भी पढ़िए: इतिहासकार “विजयनगर साम्राज्य” कहते हैं, पर समकालीन लोगों ने उसे कर्नाटक साम्राज्यमु कहा। फिर पूछिए: किताब “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” क्यों लिखती है, सीधे “1336 में” क्यों नहीं? यह सवाल हमारी ओर से है। नमूना उत्तर — क्योंकि किताब बताना चाहती है कि यह बात किन स्रोतों से पता चली।

    • परंपरा: लोगों में चली आती बात, जैसे विरुपाक्ष मन्दिर और पम्पादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियाँ (पृष्ठ 170)।
    • अभिलेखीय साक्ष्य: अभिलेख, जिन्हें 1836 से इकट्ठा किया जाने लगा था।

    इतिहास में स्रोत बताना उतना ही ज़रूरी है जितना साल बताना।

  3. 12–20 मिनट · पड़ोसी, संघर्ष और पुरानी परंपराएँ। पृष्ठ 171–172 पढ़िए। उत्तरी सीमाओं पर विजयनगर के शासकों का संघर्ष दक्कन के सुलतानों और उड़ीसा के गजपति शासकों से था, और यह संघर्ष “उर्वर नदी घाटियों तथा लाभकारी विदेशी व्यापार से उत्पन्न संपदा पर अधिकार के लिए” था। साथ ही इन राज्यों के संपर्क से विचारों का आदान-प्रदान हुआ, “विशेष रूप से स्थापत्य के क्षेत्र में”। विजयनगर के शासकों ने भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण कीं और उन्हें आगे विकसित किया। साम्राज्य के कई भागों ने पहले तमिलनाडु में चोलों और कर्नाटक में होयसालों के राज्य देखे थे, जिन्होंने तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर और बेलूर के चन्नकेशव मंदिर को संरक्षण दिया। विजयनगर के शासक, जो अपने आप को राय कहते थे, इन परंपराओं को “नयी ऊँचाइयों तक” ले गए। चित्र 7.3 दिखाइए: तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर का गोपुरम्।

  4. 20–28 मिनट · घोड़े और व्यापारी। पृष्ठ 172 का 2.1 पढ़िए। चौदहवीं से सोलहवीं सदी में युद्धकला “प्रभावशाली अश्वसेना पर आधारित” थी, इसलिए अरब और मध्य एशिया से घोड़ों का आयात बहुत ज़रूरी था। आरंभ में यह व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था; स्थानीय व्यापारियों के समूह, कुदिरई चेट्टी अथवा घोड़ों के व्यापारी, भी इसमें भाग लेते थे। 1498 से पुर्तगाली उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आए और व्यापारिक और सामरिक केंद्र बनाने लगे; उनकी बेहतर सामरिक तकनीक, विशेषकर बंदूकों ने, उन्हें 1498 के बाद की उलझी हुई राजनीति में एक बड़ी शक्ति बना दिया। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए।

  5. 28–36 मिनट · बाज़ार, और तीन स्वामी। पृष्ठ 172 पढ़िए। विजयनगर मसालों, वस्त्रों और रत्नों के बाज़ारों के लिए प्रसिद्ध था; ऐसे शहरों के लिए व्यापार “एक प्रतिष्ठा का मानक” था। समृद्ध जनता मँहगी विदेशी वस्तुएँ चाहती थी, विशेषकर रत्न और आभूषण, और व्यापार का राजस्व राज्य की समृद्धि बढ़ाता था। फिर पृष्ठ 172 का बॉक्स “हाथी, घोड़े और लोग” पढ़िए। फिर पूछिए: इन तीन नामों में हर शासक को किस चीज़ का स्वामी कहा गया है? यह सवाल हमारी ओर से है। नमूना उत्तर — हर नाम शासक को एक चीज़ का स्वामी बताता है।

    • गजपति: हाथियों का स्वामी; पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली शासक वंश का नाम।
    • अश्वपति: घोड़ों का स्वामी; दक्कन के सुल्तानों के लिए।
    • नरपति: लोगों का स्वामी; विजयनगर के रायों के लिए।

    गजपति का अर्थ हाथियों का स्वामी है, और पंद्रहवीं शताब्दी में उड़ीसा के एक शक्तिशाली शासक वंश का यही नाम था। विजयनगर की लोक प्रचलित परंपराओं में दक्कन के सुल्तानों को अश्वपति (घोड़ों के स्वामी) और रायों को नरपति (लोगों के स्वामी) कहा गया है।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विजयनगर साम्राज्य की स्थापना किसने और कब की? (2) कुदिरई चेट्टी कौन थे, और 1498 से कौन-से नए लोग व्यापार में आए?

घोड़े, व्यापारी और राजा (चरण 4)

घोड़े, व्यापारी और राजा

अरब और मध्य एशियाघोड़ों का आयातयुद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी
कुदिरई चेट्टीघोड़ों के व्यापारीव्यापारियों के स्थानीय समूह
1498 सेपुर्तगालीपश्चिमी तट पर व्यापारिक और सामरिक केंद्र; बंदूकें
विजयनगरव्यापार प्रतिष्ठा का मानकव्यापार का राजस्व राज्य की समृद्धि बढ़ाता था
NCERT, पृष्ठ 172

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
स्थापनापरंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार हरिहर और बुक्का, 1336171
लोगअस्थिर सीमाओं में अलग-अलग भाषाएँ और धार्मिक परंपराएँ171
पड़ोसीदक्कन के सुलतान और उड़ीसा के गजपति171
संघर्ष किस परउर्वर नदी घाटियाँ और विदेशी व्यापार से उत्पन्न संपदा171
पुरानी परंपराएँतमिलनाडु में चोल, कर्नाटक में होयसाल; बृहदेश्वर (तंजावुर), चन्नकेशव (बेलूर)171–172
नामशासक स्वयं को राय कहते थे; समकालीन लोगों के लिए कर्नाटक साम्राज्यमु171–172
घोड़ेअरब और मध्य एशिया से; स्थानीय व्यापारी कुदिरई चेट्टी172
1498पुर्तगाली पश्चिमी तट पर; बंदूकें172
तीन स्वामीगजपति हाथियों के, अश्वपति घोड़ों के, नरपति लोगों के172

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “1336 और हरिहर-बुक्का पक्की बात है।” किताब यह बात “परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार” लिखती है। उत्तर में भी यही शब्द लिखवाइए।
  • कुदिरई चेट्टी को विदेशी व्यापारी समझना। वे व्यापारियों के स्थानीय समूह थे; आरंभ में घोड़ों का व्यापार अरब व्यापारियों के हाथ में था।
  • गजपति को विजयनगर का राजा समझना। गजपति उड़ीसा का शासक वंश था; विजयनगर के राय नरपति कहे गए, और दक्कन के सुल्तान अश्वपति।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 2. राय, नायक तथा सुलतान खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: विजयनगर और उसके पड़ोसियों का संघर्ष किन चीज़ों के लिए था? (उर्वर नदी घाटियों और विदेशी व्यापार से उत्पन्न संपदा के लिए।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पड़ोसियों से लड़ाई चलती रही, फिर भी विजयनगर ने उनसे क्या सीखा? (भवन निर्माण की अवधारणाएँ और तकनीकें, जिन्हें विजयनगर के शासकों ने आगे विकसित किया; किताब कहती है कि विचारों का आदान-प्रदान “विशेष रूप से स्थापत्य के क्षेत्र में” हुआ।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) परंपरा और अभिलेखीय साक्ष्यों के अनुसार दो भाइयों, हरिहर और बुक्का, ने 1336 में। (2) घोड़ों के व्यापार में भाग लेने वाले स्थानीय व्यापारियों के समूह; 1498 से पुर्तगाली।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क4, क5, क6, ख4, ख5, घ1 और घ2; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 8 के लिए चोल और होयसाल परंपरा वाली बात कॉपी में नोट कर लें।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 14–26।

कालांश 3 — 2.2 राज्य का चरमोत्कर्ष तथा पतन; 2.3 राय तथा नायक; मानचित्र 1

किताब — पृष्ठ 173–175 · स्लाइड — भाग 3 · इंटरैक्टिव — 2. राय, नायक तथा सुलतान

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी राजवंशों का क्रम, कृष्णदेव राय के शासन की तीन घटनाएँ साल के साथ और 1565 का युद्ध बता सके; सुलतानों और रायों के संबंधों के बारे में किताब की बात लिख सके; और अमर–नायक प्रणाली समझा सके।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, भारत का मानचित्र या एटलस, और सुलतान और राय: हमेशा शत्रु नहीं वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: हरिहर और बुक्का, 1336, परंपरा और अभिलेखों के अनुसार; कुदिरई चेट्टी स्थानीय घोड़ा व्यापारी; 1498 से पुर्तगाली। जिन्होंने कुदिरई चेट्टी को विदेशी लिखा, उन्हें पृष्ठ 172 की वह पंक्ति फिर पढ़वाइए।

  2. 5–12 मिनट · राजवंश और कृष्णदेव राय। पृष्ठ 173 पढ़िए। पहला राजवंश संगम वंश था, जिसने 1485 तक नियंत्रण रखा; उसे सुलुवों ने उखाड़ फेंका, जो सैनिक कमांडर थे और 1503 तक सत्ता में रहे; फिर तुलुव आए, और कृष्णदेव राय इसी वंश के थे। उनके शासन की विशेषता “विस्तार और दृढ़ीकरण” थी: 1512 में तुंगभद्रा और कृष्णा के बीच का रायचूर दोआब हासिल हुआ, 1514 में उड़ीसा के शासकों का दमन हुआ, और 1520 में बीजापुर के सुल्तान की करारी हार हुई। राज्य हमेशा सामरिक रूप से तैयार रहता था, फिर भी यह “अतुलनीय शांति और समृद्धि की स्थितियों में फला–फूला”। कई दक्षिण भारतीय मंदिरों में भव्य गोपुरम जोड़ने का श्रेय कृष्णदेव को जाता है, और उन्होंने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के पास नगलपुरम् नाम का उपनगर बसाया।

  3. 12–20 मिनट · स्रोत 2: राजा और व्यापारी। जोड़ियों में पृष्ठ 173 का स्रोत 2 पढ़वाइए। कृष्णदेव राय (शासनकाल 1509–29) ने शासनकला पर तेलुगु में अमुक्तमल्यद लिखी। उसका पहला वाक्य बोर्ड पर लिखिए: “एक राजा को अपने बन्दरगाहों को सुधारना चाहिए और वाणिज्य को इस प्रकार प्रोत्साहित करना चाहिए कि घोड़ों, हाथियों, रत्नों, चंदन, मोती तथा अन्य वस्तुओं का खुले तौर पर आयात किया जा सके…” फिर पृष्ठ 173 के किनारे का प्रश्न पूछिए: “आपके विचार में राजा व्यापार को प्रोत्साहित करने का इच्छुक क्यों था? इन विनिमयों से किन समूहों को लाभ पहुँचा होगा?” नमूना उत्तर — राजा को घोड़े, हाथी और राजस्व चाहिए थे, और वह नहीं चाहता था कि ये चीज़ें उसके दुश्मनों तक पहुँचें।

    • क्यों: युद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी; व्यापार प्रतिष्ठा का मानक था और उसका राजस्व राज्य की समृद्धि बढ़ाता था; और व्यापारियों को अपने साथ जोड़ने पर, कृष्णदेव राय के शब्दों में, “ऐसा करने पर ये वस्तुएँ कभी भी तुम्हारे दुश्मनों तक नहीं पहुँचेंगी।”
    • किन्हें लाभ: राजा और राज्य को घोड़े, हाथी और राजस्व; दूर देशों के व्यापारियों को तोहफ़े और उचित मुनाफ़ा; विदेशी नाविकों को देखभाल; और समृद्ध जनता को रत्न और आभूषण जैसी विदेशी वस्तुएँ।

    यह स्रोत पृष्ठ 172 की घोड़ों के आयात वाली बात को राजा के अपने शब्दों में कहता है।

  4. 20–28 मिनट · 1529 से 1565 तक, और सुलतानों से संबंध। पृष्ठ 173 का आख़िरी अनुच्छेद पढ़िए। 1529 में कृष्णदेव की मृत्यु के बाद राजकीय ढाँचे में तनाव आया और उत्तराधिकारियों को विद्रोही नायकों या सेनापतियों की चुनौती मिली। 1542 तक केंद्र पर अराविदु वंश का नियंत्रण हो गया, जो सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक रहा। सामरिक महत्त्वाकांक्षाओं के चलते समीकरण बदलते रहे, और आख़िर में दक्कन की सल्तनतों ने विजयनगर के विरुद्ध मैत्री–समझौता किया। 1565 में प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व में विजयनगर की सेना राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा) के युद्ध में बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाओं से हारी। विजयी सेनाओं ने शहर लूटा, और कुछ ही वर्षों में शहर पूरी तरह उजड़ गया। साम्राज्य का केंद्र पूर्व की ओर चला गया: पहले पेनुकोण्डा, फिर चन्द्रगिरी (तिरुपति के समीप)। अब पृष्ठ 174 पढ़िए। विजयनगर का विध्वंस सुल्तानों की सेनाओं ने किया, फिर भी सुलतानों और रायों के संबंध “धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे।” कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और “यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद धारण किया। बीजापुर के सुल्तान ने कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर में उत्तराधिकार का विवाद सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया। पृष्ठ 173 के अनुसार अंतत: दक्कन सल्तनतों के बीच विजयनगर के विरुद्ध मैत्री–समझौता हुआ, और पृष्ठ 174 के अनुसार “यह रामराय की जोखिम भरी नीति थी”: उसने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की, पर सुल्तान एक हो गए। पृष्ठ 174 का गुलाबी बॉक्स पढ़िए: यवन संस्कृत का शब्द है, जो यूनानियों और उत्तर–पश्चिम से उपमहाद्वीप में आने वाले दूसरे लोगों के लिए प्रयोग होता था। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए।

  5. 28–36 मिनट · नायक और अमर–नायक, मानचित्र 1। पृष्ठ 175 का 2.3 पढ़िए। नायक सेना प्रमुख थे, जो आम तौर पर किलों पर नियंत्रण रखते थे और जिनके पास सशस्त्र समर्थक होते थे; वे एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते थे, और कई बार उपजाऊ भूमि की तलाश में किसान भी उनके साथ चलते थे। वे आम तौर पर तेलुगु या कन्नड़ बोलते थे और अक्सर विद्रोह कर देते थे। फिर बोर्ड पर लिखिए: “अमर–नायक प्रणाली विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी।” इसके कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से लिए गए लगते हैं। अमर–नायक सैनिक कमांडर थे, जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य–क्षेत्र देते थे। वे किसानों, शिल्पकर्मियों और व्यापारियों से भू राजस्व और दूसरे कर वसूलते थे; कुछ भाग अपने उपयोग और घोड़ों-हाथियों के दल के लिए रखते थे, और कुछ भाग मन्दिरों और सिंचाई के साधनों पर ख़र्च होता था। वे राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे और उपहारों के साथ दरबार में ख़ुद आते थे; राजा उन्हें एक जगह से दूसरी जगह भेजकर अपना नियंत्रण दिखाता था। सत्रहवीं शताब्दी में इनमें से कई ने अपने स्वतंत्र राज्य बना लिए। गुलाबी बॉक्स से: अमर संस्कृत के समर (लड़ाई या युद्ध) से आया माना जाता है, और फ़ारसी अमीर (ऊँचे पद का कुलीन व्यक्ति) से मिलता–जुलता है। आख़िर में पृष्ठ 175 की चर्चा का पहला काम करवाइए: मानचित्र 1 पर चन्द्रगिरी, मदुरई, इक्केरी, तंजावुर और मैसूर, जो नायक शक्ति के केंद्र थे, ढूँढिए और देखिए कि हर एक विजयनगर से किस दिशा में है।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) कृष्णदेव राय के शासन की तीन घटनाएँ साल के साथ लिखिए। (2) अमर–नायक वसूले गए राजस्व का क्या करते थे?

सुलतान और राय: हमेशा शत्रु नहीं (चरण 4)

सुलतान और राय: हमेशा शत्रु नहीं

कृष्णदेव रायसल्तनतों में दावेदारों का समर्थन"यवन राज्य की स्थापना करने वाला" विरुद
बीजापुर का सुल्तानउत्तराधिकार के विवाद में हस्तक्षेपकृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद
रामरायएक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिशकिताब के शब्दों में, जोखिम भरी नीति
1565राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा)बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाएँ; शहर लूटा गया
NCERT, पृष्ठ 173–174

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
संगम वंशपहला राजवंश, 1485 तक173
सुलुवसैनिक कमांडर, 1503 तक173
तुलुवकृष्णदेव राय इसी वंश के; शासनकाल 1509–29173
कृष्णदेव राय1512 रायचूर दोआब, 1514 उड़ीसा, 1520 बीजापुर; नगलपुरम् उपनगर173
अराविदु1542 तक केंद्र पर नियंत्रण; सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक173
1565राक्षसी–तांगड़ी (तालीकोटा): बीजापुर, अहमदनगर और गोलकुण्डा की संयुक्त सेनाएँ; रामराय की हार173
संबंधधार्मिक भिन्नताओं के बावजूद हमेशा शत्रुता नहीं; रामराय की जोखिम भरी नीति174
अमर–नायकराय से राज्य–क्षेत्र; राजस्व से सेना, मन्दिर और सिंचाई; वर्ष में एक बार भेंट175
इक्ताअमर–नायक प्रणाली के कई तत्त्व दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से175

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • 1565 को धर्मों की लड़ाई समझना। पृष्ठ 173 इसे सामरिक महत्त्वाकांक्षाओं और बदलते समीकरणों की कहानी बताता है, और पृष्ठ 174 कहता है कि संबंध “हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं” थे। उत्तर में किताब के यही उदाहरण लिखवाइए: कृष्णदेव राय का दावेदारों को समर्थन, और बीजापुर के सुल्तान का हस्तक्षेप।
  • सुलुव और तुलुव की अदला-बदली। क्रम बोर्ड पर एक पंक्ति में रखिए: संगम, सुलुव, तुलुव, अराविदु। कृष्णदेव राय तुलुव थे।
  • नायक और अमर–नायक को एक मान लेना। नायक सेना प्रमुख थे जो किलों पर नियंत्रण रखते और अक्सर विद्रोह करते थे; अमर–नायक वे सैनिक कमांडर थे जिन्हें राय प्रशासन के लिए राज्य–क्षेत्र देते थे।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 2. राय, नायक तथा सुलतान खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: 1565 के बाद साम्राज्य का केंद्र कहाँ गया? (पूर्व की ओर, पहले पेनुकोण्डा, फिर चन्द्रगिरी।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पृष्ठ 175 की चर्चा का दूसरा भाग करवाइए: नदियों और पहाड़ों ने विजयनगर के साथ संचार को कहाँ सरल और कहाँ कठिन बनाया होगा? (मानचित्र 1 पर कृष्णा, तुंगभद्रा, पेन्नार, कावेरी और वैगाई देखिए: नदी के साथ-साथ चलना आसान रहा होगा, पर उसे पार करना कठिन। पहाड़ों के लिए एटलस का भौतिक मानचित्र देखिए; पृष्ठ 178 बताता है कि विजयनगर की सड़कें पहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से होकर जाती थीं।) इस प्रश्न का उत्तर किताब सीधे नहीं देती, इसलिए हर तर्क मानचित्र से जुड़ा हो।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) 1512 में रायचूर दोआब हासिल किया, 1514 में उड़ीसा के शासकों का दमन किया, और 1520 में बीजापुर के सुल्तान को बुरी तरह हराया। (2) कुछ भाग अपने उपयोग और घोड़ों-हाथियों के दल के रख–रखाव के लिए रखते थे, और कुछ भाग मन्दिरों और सिंचाई के साधनों पर ख़र्च होता था; राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क7 से क13, ख6, ग1, ग2, घ3, च1 और छ1; जो आगे हैं, वे पृष्ठ 174 का किनारे का प्रश्न भी करें: “उन आधुनिक राज्यों को चिह्नित कीजिए जो विजयनगर साम्राज्य का भाग थे।” एटलस के आज के राजनीतिक मानचित्र पर कृष्णा नदी से सुदूर दक्षिण तक देखिए (पृष्ठ 170), और मानचित्र 1 के शहर (विजयनगर, चन्द्रगिरी, तंजावुर, मदुरई, मैसूर) मिलाइए।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 27–56।

कालांश 4 — 3. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश: 3.1 जल–संपदा; 3.2 क़िलेबंदियाँ तथा सड़कें

किताब — पृष्ठ 176–178 · स्लाइड — भाग 4 · इंटरैक्टिव — 3. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी शहर के पानी के तीन प्रबंध (प्राकृतिक कुण्ड, हौज़ और नहरें) बता सके, पृष्ठ 176 के छह यात्रियों के नाम और सदियाँ गिना सके (देश चार के लिखे हैं), और समझा सके कि खेतों को क़िलेबंदी के भीतर क्यों रखा गया।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, भारत का मानचित्र या एटलस, और पानी: पहाड़ियों से खेतों और महलों तक वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: 1512 रायचूर दोआब, 1514 उड़ीसा, 1520 बीजापुर; अमर–नायक राजस्व से सेना रखते थे, मन्दिरों और सिंचाई पर ख़र्च करते थे, और राजा को वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे। आज से हम साम्राज्य से उसकी राजधानी पर आते हैं।

  2. 5–12 मिनट · शहर का नक्शा (चित्र 7.4)। पृष्ठ 176 पढ़िए: अधिकांश राजधानियों की तरह विजयनगर भी “एक विशिष्ट भौतिक रूपरेखा तथा स्थापत्य शैली से अभिलक्षित” था। चित्र 7.4 पर बच्चे नक्शे पर छपे तीन नाम ढूँढें: पवित्र केंद्र, शाही केंद्र और केंद्रीय भाग। फिर पृष्ठ 176 के किनारे का पहला प्रश्न पूछिए: नक्शे के तीन अंचल कौन-से हैं, क्या नदियों से जुड़ती नहरें दिखती हैं, कितनी किलेबन्द दीवारें दिखती हैं, और क्या धार्मिक केंद्र किलेबन्द था?

    नमूना उत्तर — नक्शा देखकर, और किताब के अगले दो पृष्ठों की मदद से।

    • तीन अंचल: पवित्र केंद्र, शाही केंद्र और केंद्रीय भाग। पाठ में पवित्र केंद्र को धार्मिक केंद्र और शाही केंद्र को राजकीय केंद्र भी कहा गया है।
    • नहरें: पृष्ठ 177 पर कमलपुरम् जलाशय से राजकीय केंद्र तक जाती नहर, और तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाने वाली हिरिया नहर।
    • दीवारें: अब्दुर रज़्ज़ाक ने “दुर्गों की सात पंक्तियों” का उल्लेख किया (पृष्ठ 177); पृष्ठ 178 के अनुसार दूसरी क़िलेबंदी नगरीय केंद्र के आंतरिक भाग के चारों ओर थी और तीसरी शासकीय केंद्र के चारों ओर।
    • धार्मिक केंद्र: बच्चे नक्शे में देखकर बताएँ कि उसके चारों ओर कोई दीवार दिखती है या नहीं।

    हर संख्या नक्शे या पाठ की किसी पंक्ति से जुड़ी हो।

  3. 12–18 मिनट · यात्री और स्रोत 3। पृष्ठ 176 का बॉक्स पढ़िए: पंद्रहवीं शताब्दी में इतालवी व्यापारी निकोलो दे कॉन्ती, फ़ारस के राजा का दूत अब्दुर रज़्ज़ाक और रूस का व्यापारी अफ़ानासी निकितिन शहर आए; सोलहवीं शताब्दी में दुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस और पुर्तगाल का फर्नाओ नूनिज़। बोर्ड पर छह नाम दो सदियों में बाँटकर लिखवाइए; बच्चे यह सूची कॉपी में उतारें; यही कालांश 10 के मानचित्र कार्य में काम आएगी। फिर जोड़ियों में स्रोत 3 पढ़वाइए। पेस लिखता है: “वहाँ से मैंने जो देखा वह मुझे रोम जितना विशाल प्रतीत हुआ, और देखने में अत्यंत सुन्दर”। उसने पेड़ों के उपवन, आवासों के बगीचे, पानी की नालियाँ, झीलें और राजा के महल के समीप खजूर के पेड़ों का बगीचा देखा। फिर पृष्ठ 176 के किनारे का दूसरा प्रश्न पूछिए: आपके विचार में पेस ने उद्यानों और जल–स्रोतों को विशेष उल्लेख के लिए क्यों चुना?

    नमूना उत्तर — क्योंकि सूखे इलाक़े में इतनी हरियाली और पानी देखने वाले को चौंकाता है।

    • सूखा इलाक़ा: पृष्ठ 177 के अनुसार यह “प्रायद्वीप के सबसे शुष्क क्षेत्रों में से एक” था।
    • मेहनत का नतीजा: पानी इकट्ठा करने और शहर तक ले जाने के व्यापक प्रबंध करने पड़े; पेस को बगीचे इसी मेहनत की निशानी लगे होंगे, यह हमारी ओर से है।

    प्रश्न का पहला हिस्सा (क्या आज किसी शहर में ये बातें दिखती हैं) बच्चे अपने शहर या गाँव से जोड़कर बताएँ; हर उत्तर ठीक है, अगर वह एक बात पेस के वर्णन से मिलाए।

  4. 18–28 मिनट · जल–संपदा (3.1) और स्रोत 4। पृष्ठ 177 पढ़िए। सबसे चौंकाने वाला तथ्य तुंगभद्रा नदी का बनाया एक प्राकृतिक कुण्ड है; नदी उत्तर–पूर्व दिशा में बहती है, और ग्रेनाइट की पहाड़ियाँ शहर के चारों ओर करधनी-सी लगती हैं। इन पहाड़ियों से कई जल–धाराएँ नदी से मिलती हैं, और लगभग सभी धाराओं पर बाँध बनाकर अलग–अलग आकारों के हौज़ बनाए गए। पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में बना एक बड़ा हौज़ आज कमलपुरम् जलाशय कहलाता है; इसके पानी से आस–पास के खेत सींचे जाते थे, और एक नहर इसे “राजकीय केंद्र” तक ले जाती थी। हिरिया नहर तुंगभद्रा पर बने बाँध से पानी लाती थी और “धार्मिक केंद्र” से “शहरी केंद्र” को अलग करने वाली घाटी को सींचती थी; किताब कहती है कि संभवत: इसे संगम वंश के राजाओं ने बनवाया था। फिर जोड़ियों में स्रोत 4 पढ़वाइए: कृष्णदेव राय के बनवाए जलाशय के बारे में पेस लिखता है कि यह दो पहाड़ियों के बीच था, पानी 9 मील (लगभग 15 किमी) से भी अधिक दूरी से पाइपों से आता था, और वहाँ उसने “पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी” काम करते देखे, “चीटियों की तरह”। चित्र 7.5 दिखाइए: राजकीय केंद्र की ओर जाती एक कृत्रिम जल प्रणाली। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए।

  5. 28–36 मिनट · क़िलेबंदी और उसके भीतर खेत (3.2)। पृष्ठ 177 पढ़िए। पंद्रहवीं शताब्दी में फ़ारस के शासक का कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा दूत अब्दुर रज़्ज़ाक क़िलेबंदी से बहुत प्रभावित हुआ। इन दुर्गों से शहर ही नहीं, खेती के आसपास के क्षेत्र और जंगल भी घेरे गए थे। सबसे बाहरी दीवार पहाड़ियों को आपस में जोड़ती थी; निर्माण में गारे का कहीं प्रयोग नहीं हुआ, पत्थर के फानाकार टुकड़े अपनी जगह टिके रहते थे, दीवारों का भीतरी भाग मिट्टी और मलबे से भरा था, और वर्गाकार और आयताकार बुर्ज़ बाहर निकले हुए थे। सबसे ज़रूरी बात: इस क़िलेबंदी से खेतों को भी घेरा गया था। रज़्ज़ाक के अनुसार पहली, दूसरी और तीसरी दीवारों के बीच “जुते हुए खेत, बग़ीचे तथा आवास हैं”। अब पृष्ठ 178 पढ़िए और पूछिए: खेतों को क़िलेबंद भूभाग के भीतर क्यों रखा गया?

    नमूना उत्तर — घेराबंदी में शहर भूखा न रहे, इसलिए।

    • घेराबंदी का उद्देश्य: मध्यकालीन घेराबंदियों का मुख्य उद्देश्य प्रतिपक्ष को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था, और ये महीनों, कभी वर्षों तक चल सकती थीं।
    • आम तरीका: शासक क़िलेबंद क्षेत्रों के भीतर विशाल अन्नागार बनवाते थे।
    • विजयनगर का तरीका: उन्होंने पूरे कृषि भूभाग को बचाने के लिए “एक अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति” अपनाई।

    आज के पुरातत्त्वविदों ने धार्मिक केंद्र और नगरीय केंद्र के बीच एक कृषि क्षेत्र के साक्ष्य पाए हैं, जो तुंगभद्रा से पानी लाने वाली नहर प्रणाली से सींचा जाता था। यही अभ्यास के प्रश्न 3 का आधार है; उस प्रश्न में फ़ायदे के साथ नुकसान भी पूछे गए हैं। नुकसान का एक तर्क किताब के ही शब्द से बनता है: यह नीति “मँहगी” थी, यानी इतनी लंबी दीवारें बनाने में बहुत ख़र्च और श्रम लगा होगा। यह तर्क हमारी ओर से है।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) कमलपुरम् जलाशय का पानी कहाँ-कहाँ जाता था? (2) विजयनगर के शासकों ने खेतों को क़िलेबंदी के भीतर क्यों रखा?

पानी: पहाड़ियों से खेतों और महलों तक (चरण 4)

पानी: पहाड़ियों से खेतों और महलों तक

तुंगभद्राप्राकृतिक कुण्डनदी उत्तर–पूर्व दिशा में बहती है; पहाड़ियों से धाराएँ आकर मिलती हैं
हौज़अलग–अलग आकारों केसूखे इलाक़े में पानी जमा करने के लिए
कमलपुरम् जलाशयपंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्षआस–पास के खेत, और नहर से राजकीय केंद्र तक
हिरिया नहरतुंगभद्रा के बाँध सेधार्मिक केंद्र और शहरी केंद्र के बीच की घाटी; संभवत: संगम वंश
NCERT, पृष्ठ 177

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
नक्शे के अंचलपवित्र केंद्र, शाही केंद्र, केंद्रीय भाग176
पंद्रहवीं शताब्दी के यात्रीनिकोलो दे कॉन्ती (इटली), अब्दुर रज़्ज़ाक (फ़ारस), अफ़ानासी निकितिन (रूस)176
सोलहवीं शताब्दी के यात्रीदुआर्ते बरबोसा, डोमिंगो पेस, और पुर्तगाल का फर्नाओ नूनिज़176
पेस (स्रोत 3)शहर रोम जितना विशाल; उपवन, बगीचे, नालियाँ, झीलें176
प्राकृतिक कुण्डतुंगभद्रा का बनाया; ग्रेनाइट की पहाड़ियाँ करधनी जैसी177
कमलपुरम् जलाशयपंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्ष; खेत, और नहर से राजकीय केंद्र177
हिरिया नहरतुंगभद्रा के बाँध से; संभवत: संगम वंश ने बनवाई177
क़िलेबंदीरज़्ज़ाक: दुर्गों की सात पंक्तियाँ; बिना गारे के, फानाकार पत्थर177
खेत भीतर क्योंघेराबंदी में खाद्य सामग्री न रुके; अधिक मँहगी तथा व्यापक नीति178

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • एक ही जगह के दो नाम। नक्शे पर “पवित्र केंद्र” और “शाही केंद्र” छपा है, पाठ में “धार्मिक केंद्र” और “राजकीय केंद्र”। बच्चों को बताइए कि बात एक ही जगह की है।
  • “विजयनगर में सात दीवारें थीं।” किताब कहती है कि अब्दुर रज़्ज़ाक ने “दुर्गों की सात पंक्तियों” का उल्लेख किया। उत्तर में बात रज़्ज़ाक के नाम से लिखवाइए।
  • 9 मील और 15 किमी। स्रोत 4 की संख्याएँ वैसी ही लिखवाइए जैसी किताब में छपी हैं: “9 मील (लगभग 15 किमी)”। हिसाब बदलकर नई संख्या मत बनवाइए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 3. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: हिरिया नहर किस घाटी को सींचती थी? (धार्मिक केंद्र से शहरी केंद्र को अलग करने वाली घाटी को।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: स्रोत 4 में पेस ने जलाशय पर पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी काम करते देखे। इससे राजा के बारे में क्या पता चलता है? (कि वह बहुत बड़ी संख्या में लोगों से काम करवा सकता था।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) आस–पास के खेतों की सिंचाई में, और एक नहर से “राजकीय केंद्र” तक। (2) घेराबंदी में दुश्मन शहर को खाद्य सामग्री से वंचित करके समर्पण के लिए मजबूर करता था; इसलिए उन्होंने पूरे कृषि भूभाग को क़िलेबंदी से घेर लिया।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क14, क15, ख7, ग3, ग4, ग5, ङ1, ङ2, ङ3, च5, छ2 और छ3; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 2 का उत्तर 100–150 शब्दों में लिखें।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 57–77।

कालांश 5 — 3.3 शहरी केंद्र; 4. राजकीय केंद्र

किताब — पृष्ठ 178–180 · स्लाइड — भाग 5 · इंटरैक्टिव — 3. विजयनगर : राजधानी तथा उसके परिप्रदेश और 4. राजकीय केंद्र

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी प्रवेशद्वारों की इंडो–इस्लामिक शैली का अर्थ बता सके, शहरी केंद्र में आम लोगों के जीवन के चार सुराग गिना सके, और लिख सके कि राजकीय केंद्र में महलों के साथ मन्दिर भी थे।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और आम लोगों के जीवन के सुराग वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: कमलपुरम् जलाशय से खेत और राजकीय केंद्र; खेत भीतर, ताकि घेराबंदी में अन्न न रुके। जिन्होंने केवल “सुरक्षा के लिए” लिखा, उनसे पूछिए: किस चीज़ की सुरक्षा, और किससे?

  2. 5–13 मिनट · प्रवेशद्वार। पृष्ठ 178 पढ़िए। दुर्ग में प्रवेश के लिए अच्छी तरह सुरक्षित प्रवेशद्वार थे, जो शहर को मुख्य सड़कों से जोड़ते थे; ये “विशिष्ट स्थापत्य के नमूने” थे। चित्र 7.6 दिखाइए: प्रवेशद्वार पर बनी मेहराब और द्वार के ऊपर बनी गुंबद तुर्की सुलतानों के लाए स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व माने जाते हैं। कला–इतिहासकार इस शैली को इंडो–इस्लामिक (हिंद–इस्लामी) कहते हैं, क्योंकि इसका विकास अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ। फिर पृष्ठ 178 के किनारे का प्रश्न पूछिए: चित्र 7.6 और चित्र 7.7 के प्रवेशद्वारों में क्या समान है और क्या अलग, और विजयनगर के शासकों ने इण्डो–इस्लामी स्थापत्य के तत्त्व क्यों अपनाए?

    नमूना उत्तर — दोनों प्रवेशद्वार हैं, पर उनकी बनावट अलग है; और विजयनगर ने पड़ोसियों से स्थापत्य के विचार लिए।

    • समान: दोनों प्रवेश को नियंत्रित करते हैं, और दोनों विशिष्ट स्थापत्य के नमूने हैं।
    • अलग: चित्र 7.6 में मेहराब और गुंबद है; चित्र 7.7 एक गोपुरम् है, ऊँची मीनार वाला मन्दिर का प्रवेशद्वार, जो पृष्ठ 185–186 के अनुसार लंबी दूरी से मन्दिर के होने का संकेत देता था।
    • क्यों अपनाए: पृष्ठ 171 बताता है कि पड़ोसी राज्यों के साथ विचारों का आदान-प्रदान “विशेष रूप से स्थापत्य के क्षेत्र में” हुआ, और विजयनगर के शासकों ने भवन निर्माण की तकनीकें ग्रहण करके आगे विकसित कीं।

    बच्चे अपने तर्क में इन्हीं पृष्ठों की बात लिखें।

  3. 13–18 मिनट · सड़कें। पृष्ठ 178 पढ़िए। पुरातत्त्वविदों ने सड़कों की पहचान प्रवेशद्वारों से होकर जाने वाले रास्तों के अनुरेखण और फर्श वाली सड़कों की खोज से की (चित्र 7.8)। सड़कें सामान्यत: पहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से होकर जाती थीं। सबसे महत्त्वपूर्ण सड़कों में से कई मन्दिर के प्रवेशद्वारों से आगे बढ़ी हुई थीं, और इनके दोनों ओर बाज़ार थे।

  4. 18–28 मिनट · शहरी केंद्र (3.3)। पृष्ठ 178–179 पढ़िए। सामान्य लोगों के आवासों के अपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य हैं। कुछ स्थानों पर, जिनमें शहरी केंद्र का उत्तर–पूर्वी कोना भी है, परिष्कृत चीनी मिट्टी मिली है (चित्र 7.9), और पुरातत्त्वविदों का सुझाव है कि हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों। किताब कहती है: “यह मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला भी था।” यहाँ के मक़बरों और मस्ज़िदों के विशिष्ट कार्य हैं, फिर भी उनका स्थापत्य हम्पी के मन्दिरों के मण्डपों से मिलता जुलता है (चित्र 7.10)। सोलहवीं शताब्दी का पुर्तगाली यात्री बरबोसा लिखता है: “लोगों के अन्य आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृढ़ हैं, और व्यवसाय के आधार पर कई खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में व्यवस्थित हैं।” क्षेत्र–सर्वेक्षण बताते हैं कि यहाँ बहुत-से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर थे, जो संभवत: अलग-अलग समुदायों के संरक्षण में चलने वाले कई संप्रदायों की ओर संकेत करते हैं; और कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: आम नगरवासियों के पानी के स्रोत थे। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए। फिर पृष्ठ 179 के किनारे के दोनों प्रश्न पूछिए: चित्र 7.9 के टुकड़े किस तरह के बर्तनों के रहे होंगे, और क्या चित्र 7.10 की मस्जिद में इण्डो–इस्लामी स्थापत्य के चारित्रिक तत्त्व हैं?

    नमूना उत्तर — दोनों प्रश्न चित्र देखकर हल होंगे; किताब इतना बताती है।

    • टुकड़े: किताब इन्हें परिष्कृत चीनी मिट्टी कहती है, और पुरातत्त्वविदों का सुझाव है कि हो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों; बर्तन किस प्रकार के थे, यह किताब नहीं बताती, इसलिए बच्चे टुकड़ों के आकार और रंग से अनुमान लगाएँ।
    • मस्जिद: पृष्ठ 178 के चारित्रिक तत्त्व मेहराब और गुंबद हैं; बच्चे चित्र 7.10 में इन्हें ढूँढें, और पृष्ठ 179 की यह बात भी जोड़ें कि मस्जिदों का स्थापत्य मन्दिरों के मण्डपों से मिलता जुलता है।

    अनुमान को अनुमान की तरह लिखवाइए: “लगता है कि…”।

  5. 28–36 मिनट · राजकीय केंद्र (4)। पृष्ठ 179–180 पढ़िए। राजकीय केंद्र बस्ती के दक्षिण–पश्चिमी भाग में था। “हालाँकि इसे राजकीय केंद्र की संज्ञा दी गई है, पर इसमें 60 से भी अधिक मन्दिर सम्मिलित थे।” मन्दिरों और संप्रदायों को प्रश्रय देना शासकों के लिए ज़रूरी था, क्योंकि वे देवी–देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने का प्रयास कर रहे थे। “लगभग तीस संरचनाओं” की पहचान महलों के रूप में हुई है; ये अपेक्षाकृत बड़ी संरचनाएँ हैं, जो आनुष्ठानिक कार्यों से नहीं जुड़ी थीं। पृष्ठ 180 पर एक अंतर: मन्दिर पूरी तरह राजगिरी से बने थे, जबकि धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी वस्तुओं से बनी थी। फिर पूछिए: अभ्यास का प्रश्न 6 पूछता है कि “शाही केंद्र” नाम शहर के उस भाग का कितना सही वर्णन है। आज की पढ़ाई से इसका पहला तर्क क्या बनता है?

    नमूना उत्तर — नाम पूरी तरह सही नहीं बैठता, क्योंकि उस भाग में केवल राजा के भवन नहीं थे।

    • महल: लगभग तीस संरचनाएँ महल पहचानी गई हैं।
    • मन्दिर भी: उसी भाग में 60 से भी अधिक मन्दिर थे, और किताब ख़ुद “हालाँकि” कहकर यह बात रखती है।

    कालांश 6 में “राजा का भवन” और कमल महल के बारे में किताब की अनिश्चितता इस उत्तर को पूरा करेगी।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) बरबोसा ने आम लोगों के आवासों के बारे में क्या लिखा? (2) राजकीय केंद्र में कितने से अधिक मन्दिर थे, और लगभग कितनी संरचनाएँ महल पहचानी गईं?

आम लोगों के जीवन के सुराग (चरण 4)

आम लोगों के जीवन के सुराग

चीनी मिट्टीउत्तर–पूर्वी कोनाहो सकता है वहाँ अमीर व्यापारी रहते हों
बरबोसाछप्पर के, पर सुदृढ़ आवासव्यवसाय के आधार पर लंबी गलियों में
क्षेत्र–सर्वेक्षणपूजा स्थल और छोटे मन्दिरकई संप्रदाय, संभवत: अलग-अलग समुदायों के
पानीकुएँ और जलाशयसंभवत: आम नगरवासियों के पानी के स्रोत
सीमाआम लोगों के आवासों के साक्ष्यअपेक्षाकृत कम पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं
NCERT, पृष्ठ 178–179

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
प्रवेशद्वारमेहराब और गुंबद; तुर्की सुलतानों के स्थापत्य के तत्त्व178
इंडो–इस्लामिकस्थानीय स्थापत्य परंपराओं के साथ संपर्क से विकसित शैली178
सड़केंपहाड़ी भूभाग से बचकर घाटियों से; मन्दिर के प्रवेशद्वारों से बाज़ार वाली सड़कें178
चीनी मिट्टीउत्तर–पूर्वी कोना; हो सकता है अमीर व्यापारी रहते हों179
मुस्लिम रिहायशी मुहल्लामक़बरों और मस्ज़िदों का स्थापत्य मन्दिरों के मण्डपों से मिलता जुलता179
बरबोसाछप्पर के पर सुदृढ़ आवास; व्यवसाय के आधार पर लंबी गलियाँ179
पानी के स्रोतकुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय, मन्दिरों के जलाशय179
राजकीय केंद्रदक्षिण–पश्चिमी भाग; 60 से भी अधिक मन्दिर; लगभग तीस महल179
राजगिरीमन्दिर पूरी तरह राजगिरी से; धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी वस्तुओं से180

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “इंडो–इस्लामिक मतलब बाहर से लाई गई शैली।” किताब कहती है कि इसका विकास स्थानीय स्थापत्य की परंपराओं के साथ संपर्क से हुआ। उत्तर में “संपर्क से” शब्द ज़रूर आए।
  • “राजकीय केंद्र में बस महल थे।” उसमें 60 से भी अधिक मन्दिर थे। यही बात प्रश्न 6 के उत्तर की नींव है।
  • शहरी केंद्र और राजकीय केंद्र को एक मान लेना। शहरी केंद्र में आम लोगों के आवास, शायद अमीर व्यापारियों का इलाक़ा और मुस्लिम रिहायशी मुहल्ला था; राजकीय केंद्र बस्ती के दक्षिण–पश्चिमी भाग में था।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 4. राजकीय केंद्र खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: शासकों के लिए मन्दिरों को प्रश्रय देना क्यों ज़रूरी था? (देवी–देवताओं से संबंध के माध्यम से अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैधता देने के लिए।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पृष्ठ 180 के अनुसार मन्दिर राजगिरी से बने थे और धर्मेतर भवनों की अधिरचना विकारी वस्तुओं से। आज खंडहरों में मन्दिर ज़्यादा पूरे क्यों दिखते होंगे? (क्योंकि पत्थर टिका रहा और विकारी वस्तुएँ नष्ट हो गईं; पृष्ठ 190 पर विद्वान भी कहते हैं कि उन्हें नष्ट हो चुकी लकड़ी की वस्तुओं की कल्पना करनी पड़ती है।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) कि लोगों के आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृढ़ हैं, और व्यवसाय के आधार पर कई खुले स्थानों वाली लंबी गलियों में बने हैं। (2) 60 से भी अधिक मन्दिर; लगभग तीस संरचनाएँ महल पहचानी गईं।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के ख8, ग6, घ4 और ङ5; जो आगे हैं, वे पृष्ठ 179 की चर्चा करें: विजयनगर की रूपरेखा की तुलना अपने नगर या गाँव की रूपरेखा से कीजिए। तुलना के लिए आज की पढ़ाई की ये बातें काम आएँगी: क़िलेबंदी और प्रवेशद्वार, घाटियों से जाती सड़कें, बाज़ार वाली गलियाँ, पानी के स्रोत, और अलग-अलग केंद्र।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 78–88।

कालांश 6 — 4.1 महानवमी डिब्बा; 4.2 राजकीय केंद्र में स्थित अन्य भवन

किताब — पृष्ठ 180–183 · स्लाइड — भाग 6 · इंटरैक्टिव — 4. राजकीय केंद्र

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी महानवमी डिब्बा का माप और उससे जुड़े अनुष्ठान बता सके, समझा सके कि ये अनुष्ठान राजा के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण थे, और कमल महल, हाथियों के अस्तबल और हज़ार राम मन्दिर की एक-एक बात लिख सके।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और महानवमी: राजा क्या दिखाता था वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: बरबोसा, छप्पर के पर सुदृढ़ आवास; राजकीय केंद्र में 60 से भी अधिक मन्दिर, लगभग तीस महल। आज हम राजकीय केंद्र की इमारतें एक-एक करके देखेंगे।

  2. 5–12 मिनट · इमारतों के नाम, और दो मंच। पृष्ठ 180 पढ़िए। इस क्षेत्र की कुछ संरचनाओं के नाम उनके आकार और कार्यों के आधार पर रखे गए हैं। “राजा का भवन” अंत:क्षेत्र में सबसे विशाल है, “परंतु इसके राजकीय आवास होने का कोई निश्चित साक्ष्य नहीं मिला है।” इसके दो सबसे प्रभावशाली मंच हैं, सभा मंडप और महानवमी डिब्बा। सभा मंडप एक ऊँचा मंच है, जिसमें लकड़ी के स्तंभों के लिए पास–पास छेद बने हैं; स्तंभ इतने पास थे कि बहुत कम खुला स्थान बचता होगा, इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि यह किस प्रयोजन के लिए बना था। महानवमी डिब्बा शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर बना विशालकाय मंच है, जो “लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार से 40 फीट की ऊँचाई तक जाता है।” इस पर लकड़ी की एक संरचना बनी थी, और इसका आधार उभारदार उत्कीर्णन से पटा है (चित्र 7.11 और 7.12)। पृष्ठ 180 का बॉक्स “विजय का एक भवन?” पढ़िए, जिसमें पेस का वर्णन है।

  3. 12–24 मिनट · महानवमी के अनुष्ठान। पृष्ठ 180–181 पढ़िए। इस संरचना से जुड़े अनुष्ठान संभवत: सितंबर और अक्टूबर के शरद मासों में मनाए जाने वाले दस दिन के हिंदू त्यौहार के महानवमी के अवसर पर होते थे। इस त्यौहार को दशहरा (उत्तर भारत), दुर्गा पूजा (बंगाल में) और नवरात्री या महानवमी (प्रायद्वीपीय भारत में) कहा जाता है। इस अवसर पर विजयनगर के शासक “अपने रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन करते थे।” नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए और किताब की बातें उसमें भरवाइए। ये बातें किताब के अनुसार इतिहास की तरह पढ़ाइए; कक्षा में किसी अनुष्ठान का अभिनय मत करवाइए। फिर अभ्यास का प्रश्न 4 पूछिए: आपके विचार में महानवमी डिब्बा से जुड़े अनुष्ठानों का क्या महत्त्व था?

    नमूना उत्तर — ये अनुष्ठान राजा की शक्ति को सबके सामने दिखाने का अवसर थे।

    • प्रदर्शन: किताब के अनुसार शासक इस अवसर पर अपने रुतबे, ताक़त और अधिराज्य का प्रदर्शन करते थे, और “इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे।”
    • सेना: त्यौहार के अंतिम दिन राजा अपनी और अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में भव्य समारोह में निरीक्षण करता था।
    • नायकों की भेंट: प्रमुख नायक और अधीनस्थ राजा राजा और उसके अतिथियों को औपचारिक भेंट देते थे, और नायक बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर भी लाते थे।

    अमर–नायक वाली बात (कालांश 3) यहाँ फिर जोड़िए: वहाँ भी नायक वर्ष में एक बार भेंट भेजते थे।

  4. 24–28 मिनट · एक पहेली। पृष्ठ 181 पढ़िए: क्या आज का महानवमी डिब्बा ही इस अनुष्ठान का केंद्र था? विद्वानों का मानना है कि संरचना के चारों ओर का स्थान सशस्त्र आदमियों, औरतों और बड़ी संख्या में जानवरों की शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं था। “राजकीय केंद्र में स्थित कई और संरचनाओं की तरह यह भी एक पहेली बना हुआ है।” पृष्ठ 180 के किनारे का प्रश्न भी पूछिए: क्या आप चित्र 7.12 के चित्रों के विषय पहचान सकते हैं? बच्चे पृष्ठ 181 की सूची (नृत्य, कुश्ती, घोड़े, हाथी, रथ और सैनिक) से मिलाकर देखें कि कौन-सी चीज़ें पत्थर पर दिखती हैं।

  5. 28–36 मिनट · कमल महल, हाथियों का अस्तबल, हज़ार राम मन्दिर। पृष्ठ 181–183 पढ़िए। कमल महल राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में एक है, जिसका यह नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने रखा। इतिहासकार निश्चित नहीं हैं कि यह किस कार्य के लिए बना था; मैकेन्ज़ी के बनाए मानचित्र से एक सुझाव मिलता है कि यह परिषदीय सदन था, जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। पृष्ठ 181 के अनुसार “खड़ा रेखाचित्र किसी वस्तु अथवा संरचना का ऊर्ध्व अवलोकन होता है।” किनारे का प्रश्न करवाइए: “कमल महल में नौ मीनारें थीं– बीच में एक ऊँची, तथा आठ उसकी भुजाओं के साथ–साथ।” बच्चे चित्र 7.13 और 7.15 में मीनारें गिनें। फिर पृष्ठ 182 के चित्र 7.16(क), 7.16(ख) और 7.17 दिखाइए: “हाथियों के अस्तबल” का खड़ा रेखाचित्र, नक्शा और तसवीर। किताब के अनुसार “नक्शा एक संरचना का समस्तरी अवलोकन देता है।” पृष्ठ 182 का किनारे का प्रश्न पूछता है कि तीनों चित्रों में दिखने वाले अभिलक्षणों की सूची बनाइए, और क्या ये सचमुच हाथियों के अस्तबल थे; बच्चे अपनी राय सूची की किसी बात से जोड़कर दें। आख़िर में हज़ार राम मन्दिर: यह राजकीय केंद्र में है, और संभवत: इसका प्रयोग केवल राजा और उसके परिवार द्वारा होता था। बीच के देवस्थल की मूर्तियाँ अब नहीं हैं, पर दीवारों की पटल मूर्तियाँ सुरक्षित हैं, जिनमें मन्दिर की आंतरिक दीवारों पर रामायण के कुछ दृश्यांश हैं (चित्र 7.18)। चित्र 7.18 के नीचे का किनारे का प्रश्न भी पूछिए: क्या आप नृत्य के दृश्यांश पहचान सकते हैं, और आपके विचार में हाथियों और घोड़ों को पटलों पर क्यों चित्रित किया गया था?

    नमूना उत्तर — कालांश के पहले हिस्से से एक तर्क बनता है।

    • महानवमी से जोड़: पृष्ठ 181 के अनुसार महानवमी पर साज़ लगे घोड़ों और हाथियों की शोभायात्रा राजा की ताक़त दिखाती थी।
    • तर्क: इसलिए पत्थर पर घोड़े और हाथी भी शायद राजा की शक्ति और सेना की याद दिलाते होंगे। यह तर्क हमारी ओर से है।

    शहर पर आक्रमण के बाद कई संरचनाएँ नष्ट हो गईं, पर नायकों ने महलनुमा संरचनाओं के निर्माण की परंपरा जारी रखी, और इनमें से कई भवन आज भी हैं। पृष्ठ 183 का चित्र 7.19 भी दिखाइए, जिसका कैप्शन है “मदुरई के सभा मण्डप का आंतरिक भाग”।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) महानवमी के अवसर के दो धर्मानुष्ठान और दो आकर्षण लिखिए। (2) “कमल महल” नाम किसने रखा, और मैकेन्ज़ी के मानचित्र से इसके बारे में क्या सुझाव मिलता है?

महानवमी: राजा क्या दिखाता था (चरण 3)

महानवमी: राजा क्या दिखाता था

धर्मानुष्ठानमूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजाभैंसों और अन्य जानवरों की बलि
आकर्षणनृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धासाज़ लगे घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा
भेंटप्रमुख नायक और अधीनस्थ राजाराजा और उसके अतिथियों को औपचारिक भेंट
निरीक्षणराजा और उसके नायकों की सेनानायक बड़ी मात्रा में भेंट और नियत कर लाते थे
प्रदर्शनरुतबा, ताक़त तथा अधिराज्यइन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे
NCERT, पृष्ठ 180–181

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
राजा का भवनअंत:क्षेत्र में सबसे विशाल; राजकीय आवास होने का निश्चित साक्ष्य नहीं180
सभा मंडपलकड़ी के स्तंभों के छेद; प्रयोजन स्पष्ट नहीं180
महानवमी डिब्बालगभग 11000 वर्ग फीट का आधार, 40 फीट ऊँचा; उभारदार उत्कीर्णन180
महानवमीरुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन; अंतिम दिन सेना का निरीक्षण181
पहेलीआसपास का स्थान शोभायात्रा के लिए पर्याप्त नहीं, ऐसा विद्वानों का मानना181
कमल महलनाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों का; नौ मीनारें; शायद परिषदीय सदन181–182
हाथियों का अस्तबलखड़ा रेखाचित्र, नक्शा और तसवीर; सचमुच अस्तबल थे, यह प्रश्न खुला182
हज़ार राम मन्दिरसंभवत: केवल राजा और उसका परिवार; रामायण के दृश्यांश182–183
नायकमहलनुमा संरचनाओं के निर्माण की परंपरा जारी रखी183

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “महानवमी डिब्बा राजा का महल था।” यह एक विशालकाय मंच है। “राजा का भवन” अलग संरचना है, और उसके भी राजकीय आवास होने का निश्चित साक्ष्य नहीं मिला है।
  • हर नाम को पक्की बात मान लेना। “कमल महल” नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों का रखा है, और “हाथियों का अस्तबल” किताब में उद्धरण-चिह्नों में छपा है। प्रश्न 7 के उत्तर में यह अनिश्चितता ज़रूर लिखवाइए।
  • खड़ा रेखाचित्र और नक्शा। खड़ा रेखाचित्र ऊर्ध्व अवलोकन है (सामने से), नक्शा समस्तरी अवलोकन (ऊपर से)। चित्र 7.16(क) और 7.16(ख) साथ रखकर दिखाइए।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 4. राजकीय केंद्र खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: महानवमी के अंतिम दिन राजा क्या करता था? (अपनी और अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में निरीक्षण।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पृष्ठ 183 की चर्चा करवाइए: नायकों ने विजयनगर के शासकों की भवन निर्माण परंपराएँ क्यों जारी रखीं? (किताब कारण नहीं लिखती, पर पृष्ठ 188 बताता है कि नायकों ने मन्दिर निर्माण की परंपराएँ भी जारी रखीं और उन्हें और व्यापक बनाया, और पृष्ठ 185 कहता है कि ऊँचे गोपुरम् शासकों की ताकत की याद दिलाते थे। इससे यह तर्क बनता है कि नायक भी भवनों से अपनी शक्ति दिखाना चाहते थे।) यह तर्क हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) धर्मानुष्ठान: मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा, भैंसों और अन्य जानवरों की बलि (कोई दो)। आकर्षण: नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा, घोड़ों, हाथियों, रथों और सैनिकों की शोभायात्रा, नायकों की औपचारिक भेंट (कोई दो)। (2) उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों ने; मैकेन्ज़ी के मानचित्र से सुझाव मिलता है कि यह परिषदीय सदन था, जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क16, क17, क18, ख9, ग8, ङ4 और च3; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 7 का खाका बनाएँ: कमल महल और हाथियों के अस्तबल की बनावट शासकों के बारे में क्या बताती है।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 89–108।

कालांश 7 — 5. धार्मिक केंद्र: 5.1 राजधानी का चयन; 5.2 गोपुरम् और मण्डप

किताब — पृष्ठ 184–188 · स्लाइड — भाग 7 · इंटरैक्टिव — 5. धार्मिक केंद्र

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी बता सके कि राजधानी के लिए यह स्थान क्यों चुना गया होगा, शासक मन्दिरों से अपना संबंध कैसे दिखाते थे, और गोपुरम्, मण्डप और रथ गलियों की एक-एक विशेषता लिख सके।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और गोपुरम् और मण्डप: मन्दिर में राजा वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: महानवमी, रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन; कमल महल नाम अंग्रेज़ यात्रियों का, शायद परिषदीय सदन। आज हम धार्मिक केंद्र पर आते हैं।

  2. 5–14 मिनट · राजधानी का चयन (5.1)। पृष्ठ 184 पढ़िए: तुंगभद्रा के तट से लगा शहर का चट्टानी उत्तरी भाग। किताब दो मान्यताएँ बताती है: “स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ये पहाड़ियाँ रामायण में उल्लिखित बाली और सुग्रीव के वानर राज्य की रक्षा करती थीं।” अन्य मान्यताओं के अनुसार स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी ने इन पहाड़ियों में विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप किया, जो राज्य के संरक्षक देवता और शिव का एक रूप माने जाते हैं; यह विवाह आज तक विरुपाक्ष मन्दिर में हर वर्ष मनाया जाता है। इन पहाड़ियों में विजयनगर साम्राज्य से पहले के जैन मन्दिर भी मिले हैं, यानी यह क्षेत्र कई धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा था। इस क्षेत्र में मन्दिर निर्माण का इतिहास पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाता है; मन्दिर शिक्षा के केंद्र भी थे, और शासक और दूसरे लोग उनके रख–रखाव के लिए भूमि और संपदा दान देते थे। बोर्ड पर लिखवाइए: “यह संभव है कि विजयनगर के स्थान का चयन वहाँ विरुपाक्ष तथा पम्पादेवी के मन्दिरों के अस्तित्व से प्रेरित था।” दोनों मान्यताएँ किताब के शब्दों में पढ़ाइए, “मान्यताओं के अनुसार” के साथ।

  3. 14–20 मिनट · शासक और देवता। पृष्ठ 184 पढ़िए। विजयनगर के शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे, और सभी राजकीय आदेशों पर सामान्यतया कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” शब्द अंकित होता था। शासक “हिन्दू सूरतराणा” विरुद का भी प्रयोग करते थे; किताब के अनुसार यह अरबी भाषा के शब्द सुल्तान (अर्थ राजा) का संस्कृत अनुवाद था, और शाब्दिक रूप में इसका अर्थ था हिंदू सुलतान। राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मन्दिरों में प्रदर्शित की जाने लगीं, और राजा की मन्दिर-यात्राएँ महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर बन गईं, जिनमें साम्राज्य के महत्त्वपूर्ण नायक भी उसके साथ जाते थे। बच्चे केवल यह लिखें कि किताब इस विरुद का अर्थ क्या बताती है।

  4. 20–30 मिनट · गोपुरम् और मण्डप (5.2)। पृष्ठ 185–187 पढ़िए। विजयनगर के समय तक मन्दिर स्थापत्य में कई नए तत्व प्रकाश में आते हैं, जैसे विशाल स्तर पर बनी संरचनाएँ, जो राजकीय सत्ता की द्योतक थीं। सबसे अच्छा उदाहरण राय गोपुरम् या राजकीय प्रवेशद्वार हैं (चित्र 7.7), जो अकसर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे और लंबी दूरी से मन्दिर के होने का संकेत देते थे; ये संभवत: शासकों की ताकत की याद भी दिलाते थे, जो इतनी ऊँची मीनारों के लिए साधन, तकनीक और कौशल जुटा सकते थे। दूसरे अभिलक्षण: मण्डप और लंबे स्तंभों वाले गलियारे। विरुपाक्ष मन्दिर कई शताब्दियों में बना; अभिलेखों के अनुसार सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था, और साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे बहुत बड़ा किया गया। मुख्य मन्दिर के सामने का मण्डप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया, और पूर्वी गोपुरम् का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। मन्दिर के सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटक देखने के लिए रखी जाती थीं, कुछ में देवी–देवताओं के विवाह का उत्सव होता था, और कुछ में उन्हें झूला झुलाया जाता था (चित्र 7.22 और 7.25)। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए। पृष्ठ 185 के किनारे का प्रश्न भी करवाइए: चित्र 7.21 (विरुपाक्ष मन्दिर का नक्शा) के स्केल से मुख्य गोपुरम् से केंद्रीय देवालय की दूरी नापिए, और जलाशय से देवालय तक जाने का सबसे आसान मार्ग बताइए। किताब यह दूरी नहीं देती, इसलिए हर बच्चा अपनी नाप और उसका तरीका लिखे। पृष्ठ 186 के किनारे का प्रश्न (स्तंभ पर आप जो देख रहे हैं उसका वर्णन कीजिए) चित्र 7.23 पर करवाइए; उत्तर बच्चे के अपने देखे पर टिका होगा।

  5. 30–36 मिनट · विट्ठल मन्दिर, रथ गलियाँ और नायक। पृष्ठ 187–188 पढ़िए। विट्ठल मन्दिर के प्रमुख देवता विट्ठल थे, जो सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु के एक रूप हैं। कर्नाटक में इनकी पूजा आरंभ करना दिखाता है कि एक साम्राज्यिक संस्कृति बनाने के लिए विजयनगर के शासकों ने अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात किया। इस मन्दिर में कई सभागार और “रथ के आकार का एक अनूठा मन्दिर” है (चित्र 7.24)। पृष्ठ 187 के किनारे का प्रश्न पूछिए: क्या आपको लगता है कि वास्तव में इस प्रकार के रथ बनाए जाते होंगे? (हर राय ठीक है, अगर उसका कारण चित्र या पाठ से दिया जाए; किताब इसका उत्तर नहीं देती।) मन्दिर परिसरों की एक चारित्रिक विशेषता रथ गलियाँ हैं, जो गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती थीं; इनका फर्श पत्थर के टुकड़ों से बना था, और दोनों ओर स्तंभ वाले मण्डपों में व्यापारी दुकानें लगाते थे। नायकों ने क़िलेबन्दी की तरह मन्दिर निर्माण की परंपराओं को भी जारी रखा तथा और अधिक व्यापक बनाया; कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरम् स्थानीय नायकों ने बनवाए (चित्र 7.26)। फिर अभ्यास का प्रश्न 8 पूछिए: स्थापत्य की कौन-सी परंपराओं ने विजयनगर के वास्तुविदों को प्रेरित किया, और उन्होंने इनमें कैसे बदलाव किए? (यही पृष्ठ 188 की चर्चा का विषय भी है।)

    नमूना उत्तर — उन्होंने पुरानी परंपराएँ अपनाईं, पड़ोसियों से तत्व लिए, और उन्हें राजकीय सत्ता के हिसाब से बड़ा किया।

    • पुरानी परंपराएँ: पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल वंशों तक जाता मन्दिर निर्माण (पृष्ठ 184)।
    • पड़ोसियों से: प्रवेशद्वारों की मेहराब और गुंबद, तुर्की सुल्तानों द्वारा प्रवर्तित, इंडो–इस्लामिक शैली (पृष्ठ 178)।
    • बदलाव: विशाल राय गोपुरम्, जो केंद्रीय देवालयों को बौना प्रतीत कराते थे; मण्डप और लंबे स्तंभों वाले गलियारे; रथ गलियाँ; और मन्दिरों में राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ।

    पूरा उत्तर इन्हीं तीन हिस्सों में बाँटकर लिखवाइए।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) विजयनगर के शासक विरुपाक्ष से अपना संबंध कैसे दिखाते थे? दो बातें लिखिए। (2) राय गोपुरम् की एक विशेषता और रथ गलियों की एक विशेषता लिखिए।

गोपुरम् और मण्डप: मन्दिर में राजा (चरण 4)

गोपुरम् और मण्डप: मन्दिर में राजा

राय गोपुरम्राजकीय प्रवेशद्वारकेंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे
मण्डपसभागार और स्तंभों वाले गलियारेसंगीत, नृत्य, नाटक, देवी–देवताओं का विवाह, झूला
कृष्णदेव रायमुख्य मन्दिर के सामने का मण्डपराज्यारोहण के उपलक्ष्य में; पूर्वी गोपुरम् का श्रेय भी
रथ गलियाँगोपुरम् से सीधी रेखा मेंदोनों ओर स्तंभ वाले मण्डपों में व्यापारियों की दुकानें
NCERT, पृष्ठ 185–188

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
स्थानीय मान्यताएँबाली और सुग्रीव का वानर राज्य; पम्पादेवी का विरुपाक्ष से विवाह के लिए तप184
जैन मन्दिरविजयनगर साम्राज्य से पहले के जैन मन्दिर भी मिले184
स्थान का चयनसंभवत: विरुपाक्ष और पम्पादेवी के मन्दिरों से प्रेरित184
श्री विरुपाक्षराजकीय आदेशों पर कन्नड़ लिपि में184
हिन्दू सूरतराणाअरबी शब्द सुल्तान का संस्कृत अनुवाद; शाब्दिक अर्थ हिंदू सुलतान184
राय गोपुरम्केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे185
विरुपाक्ष मन्दिरसबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का; कृष्णदेव राय का मण्डप186
विट्ठल मन्दिरमहाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु के रूप; रथ के आकार का मन्दिर187–188
रथ गलियाँगोपुरम् से सीधी रेखा में; दोनों ओर व्यापारियों की दुकानें188

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “हिन्दू सूरतराणा” का अर्थ अपने मन से बताना। किताब का अर्थ ही लिखवाइए: अरबी शब्द सुल्तान (अर्थ राजा) का संस्कृत अनुवाद, जिसका शाब्दिक अर्थ हिंदू सुलतान है।
  • मान्यता को इतिहास की घटना बना देना। बाली-सुग्रीव और पम्पादेवी वाली बातें किताब “मान्यताओं के अनुसार” कहती है। उत्तर में भी यही शब्द आएँ।
  • विट्ठल को कर्नाटक का ही देवता मान लेना। किताब कहती है कि विट्ठल सामान्यत: महाराष्ट्र में पूजे जाते थे, और कर्नाटक में उनकी पूजा आरंभ करना अलग-अलग परंपराओं को आत्मसात करने का उदाहरण है।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 5. धार्मिक केंद्र खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: रथ गलियों के दोनों ओर के मण्डपों में क्या होता था? (व्यापारी अपनी दुकानें लगाते थे।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से अभ्यास का प्रश्न 5 करवाइए: चित्र 7.33 विरुपाक्ष मन्दिर के एक अन्य स्तंभ का रेखाचित्र है; उसमें पुष्प-विषयक रूपांकन, जानवर और मानव आकृतियाँ ढूँढिए, और सोचिए कि उन्हें क्यों बनाया गया। (किताब इस चित्र का कोई कैप्शन नहीं देती, इसलिए उत्तर बच्चे के अपने देखे पर टिका होगा; चित्र 7.23 तुलना के लिए साथ रखिए। “क्यों” का एक तर्क: भव्य और सजे हुए मन्दिर बनवाना शासकों की ताकत दिखाता था, जैसा पृष्ठ 185 गोपुरम् के बारे में कहता है।) यह संकेत हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) वे भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे, और राजकीय आदेशों पर कन्नड़ लिपि में “श्री विरुपाक्ष” अंकित होता था। (2) राय गोपुरम् केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत कराते थे और दूर से मन्दिर का संकेत देते थे; रथ गलियाँ गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती थीं, और उनके दोनों ओर व्यापारियों की दुकानें थीं।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के क19, क20, ग7, घ5, घ6 और च4; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 8 का पूरा उत्तर 250–300 शब्दों में लिखें।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 109–130।

कालांश 8 — 6. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन

किताब — पृष्ठ 188–190 · स्लाइड — भाग 8 · इंटरैक्टिव — 6. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी हम्पी के संरक्षण और प्रलेखन के तीन चरण बता सके, नक्शा बनाने का वर्ग के भीतर वर्ग वाला तरीका समझा सके, और बता सके कि खंडहर देखकर विद्वानों को किन चीज़ों की कल्पना करनी पड़ती है।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, एक रूलर, और नक्शा कैसे बना: वर्ग के भीतर वर्ग वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: शासक विरुपाक्ष की ओर से शासन का दावा करते थे, आदेशों पर “श्री विरुपाक्ष”; राय गोपुरम् केंद्रीय देवालय को बौना कर देते थे। अब पूछिए: ये सब बातें विद्वानों को पता कैसे चलीं? आज उसका उत्तर।

  2. 5–12 मिनट · संरक्षण के चरण। पृष्ठ 188 पढ़िए। मैकेन्ज़ी के आरंभिक सर्वेक्षणों के बाद यात्रा वृत्तांतों और अभिलेखों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़ा गया। बीसवीं शताब्दी में इस स्थान का संरक्षण भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण और कर्नाटक पुरातात्विक एवं संग्रहालय विभाग ने किया। बोर्ड पर लिखवाइए: “1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली।” फिर 1980 के दशक के आरंभ में एक महत्त्वपूर्ण परियोजना शुरू हुई: व्यापक और गहन सर्वेक्षणों से विजयनगर के भौतिक अवशेषों का सूक्ष्मता से प्रलेखन। किताब के अनुसार “लगभग बीस वर्षों के काल में पूरे विश्व के दर्जनों विद्वानों ने इस जानकारी को इकट्ठा और संरक्षित करने का कार्य किया।”

  3. 12–22 मिनट · नक्शा कैसे बना। पृष्ठ 188–189 पढ़िए और चित्र 7.27 और 7.28 साथ खोलिए। पहले पूरे क्षेत्र को 25 वर्गाकार भागों में बाँटा गया, और हर वर्ग को अंग्रेज़ी वर्णमाला के एक अक्षर का नाम दिया गया। फिर हर वर्ग को और छोटे वर्गों में बाँटा गया, और उन छोटे वर्गों को भी और छोटी इकाइयों में। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए। फिर पृष्ठ 189 के दोनों किनारे के प्रश्न करवाइए: चित्र 7.27 में अंग्रेज़ी वर्णमाला का कौन-सा अक्षर इस्तेमाल नहीं हुआ, और पैमाने से एक छोटे वर्ग की लंबाई कितनी निकलती है? चित्र 7.28 में कौन-सा पैमाना है?

    नमूना उत्तर — ये उत्तर चित्र पढ़कर निकलते हैं।

    • छूटा अक्षर: क्षेत्र 25 वर्गों में बँटा है और अंग्रेज़ी वर्णमाला में 26 अक्षर हैं; वर्गों के अक्षर क्रम से पढ़िए: अक्षर ‘आई’ नहीं लगाया गया।
    • पैमाना: चित्र 7.28 की पट्टी पर 0, 500 मी. और 1 कि.मी. लिखे हैं; चित्र 7.27 की पट्टी 0 से 5 कि.मी. की है। यानी चित्र 7.28 छोटे क्षेत्र को ज़्यादा विस्तार से दिखाता है।
    • नाप: रूलर से एक वर्ग की चौड़ाई नापिए, फिर स्केल की पट्टी से मिलाकर उसे किलोमीटर या मीटर में बदलिए। जिस चित्र का वर्ग नापा, उसी की पट्टी से मिलाइए।

    हर बच्चा अपना हिसाब लिखे, सिर्फ़ उत्तर नहीं।

  4. 22–30 मिनट · हज़ारों संरचनाएँ, और जो बचा नहीं। पृष्ठ 189–190 पढ़िए। इन गहन सर्वेक्षणों से हज़ारों संरचनाओं के अंश फिर से उजागर हुए और उनका प्रलेखन हुआ, छोटे देवस्थलों और आवासों से लेकर विशाल मन्दिरों तक; सड़कों, रास्तों और बाज़ारों की जगह स्तंभ आधारों और मंचों से पहचानी गई। चित्र 7.29 और 7.30 दिखाइए, और पृष्ठ 190 के किनारे के प्रश्न करवाइए: चित्र 7.29 में किसी मन्दिर को पहचानिए (दीवारें, केंद्रीय देवालय, मन्दिर तक जाने वाले रास्ते) और बताइए कि वह किन वर्गों में है; फिर चित्र 7.30 में गोपुरम्, सभागार, स्तंभावलियाँ और केंद्रीय देवालय ढूँढिए, और बताइए कि बाहरी प्रवेशद्वार से केंद्रीय देवालय तक आप किन भागों से होकर जाएँगे। उत्तर चित्र पढ़कर ही बनेगा: बच्चे उँगली से दीवारें, देवालय और रास्ता दिखाएँ, और वर्गों के नाम चित्र से पढ़कर बोलें। रास्ते का क्रम मोटे तौर पर यह निकलेगा: बाहरी प्रवेशद्वार (गोपुरम्), फिर स्तंभावलियाँ और सभागार, और अंत में केंद्रीय देवालय। फिर पृष्ठ 190 का उद्धरण पढ़िए: जॉन एम. फ्रिट्ज़, जॉर्ज मिशेल और एम. एस. नागराज राव लिखते हैं कि उन्हें “नष्ट हो चुकी लकड़ी की वस्तुओं” की एक पूरी श्रेणी की कल्पना करनी पड़ती है, जो प्लास्टर से सजी और संभवत: चटकीले रंगों से चित्रित थीं। किताब आगे कहती है कि लकड़ी की संरचनाएँ अब नहीं हैं, पर यात्रियों के छोड़े विवरण उस समय के जीवन के कुछ आयामों को फिर से बनाने में मदद करते हैं।

  5. 30–36 मिनट · जोड़ियों में सवाल। पूछिए: नक्शा, सर्वेक्षण और यात्रियों के वृत्तांत, तीनों को साथ क्यों रखना पड़ता है? यह सवाल हमारी ओर से है।

    नमूना उत्तर — क्योंकि हर स्रोत अकेले अधूरा है।

    • नक्शा और सर्वेक्षण: बताते हैं कि कौन-सी संरचना कहाँ थी, जैसे हज़ारों संरचनाओं के निशान और सड़कों, बाज़ारों की जगह।
    • जो नष्ट हो गया: लकड़ी के स्तंभ, टेक, धरन और छज्जे अब नहीं हैं; विद्वान उनकी कल्पना करते हैं।
    • यात्रियों के वृत्तांत: उस जीवन के कुछ पहलुओं को फिर से बनाने में मदद करते हैं, जो खंडहरों में नहीं दिखता।

    यही बात कालांश 9 के चित्र इमारतें क्या बताती हैं, क्या नहीं में आगे बढ़ेगी।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) 1976 में हम्पी को क्या मान्यता मिली, और 1980 के दशक की परियोजना ने क्या किया? (2) नक्शा बनाने के लिए क्षेत्र को पहले कितने वर्गों में बाँटा गया, और फिर क्या किया गया?

नक्शा कैसे बना: वर्ग के भीतर वर्ग (चरण 3)

नक्शा कैसे बना: वर्ग के भीतर वर्ग

पहला चरणपूरा क्षेत्र 25 वर्गों मेंहर वर्ग को एक अक्षर का नाम (चित्र 7.27)
दूसरा चरणछोटे वर्गों के समूहचित्र 7.28: वर्ग N
तीसरा चरणऔर छोटी इकाइयाँचित्र 7.29: वर्ग NM
प्रलेखनहज़ारों संरचनाओं के अंशसड़कें, रास्ते और बाज़ार स्तंभ आधारों और मंचों से पहचाने गए
NCERT, पृष्ठ 188–190

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
मैकेन्ज़ी के बादयात्रा वृत्तांतों और अभिलेखों की जानकारी एक साथ जोड़ी गई188
बीसवीं शताब्दीभारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण, और कर्नाटक पुरातात्विक एवं संग्रहालय विभाग188
1976हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता188
1980 के दशक का आरंभभौतिक अवशेषों के सूक्ष्म प्रलेखन की परियोजना188
लगभग बीस वर्षदुनिया भर के दर्जनों विद्वानों का काम188
25 वर्गहर वर्ग एक अक्षर; फिर छोटे वर्ग; फिर छोटी इकाइयाँ188–189
हज़ारों संरचनाएँसड़कें और बाज़ार स्तंभ आधारों और मंचों से पहचाने गए189
लकड़ी की वस्तुएँनष्ट हो चुकीं; विद्वानों को कल्पना करनी पड़ती है; यात्रियों के विवरण मदद करते हैं190

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “1976 में हम्पी विश्व धरोहर बना।” 1976 में उसे राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता मिली। विश्व धरोहर स्थल वाली बात काल-रेखा 2 में 1986 की है (कालांश 10)।
  • नक्शे की संख्याएँ रटना। चित्र 7.29 और 7.30 में छपी संख्याएँ और अक्षर बस संरचनाओं की पहचान के निशान हैं। याद तरीका रखना है: वर्ग, छोटे वर्ग, छोटी इकाइयाँ (पृष्ठ 188–189)।
  • “खंडहर जैसे आज हैं, वैसे ही पहले थे।” पृष्ठ 190 का उद्धरण बताता है कि लकड़ी की चीज़ें, प्लास्टर और रंग नष्ट हो चुके हैं।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 6. महलों, मन्दिरों तथा बाज़ारों का अंकन खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: सड़कों और बाज़ारों की जगह कैसे पहचानी गई? (स्तंभ आधारों और मंचों से।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: पृष्ठ 190 के उद्धरण में नष्ट हो चुकी कौन-कौन सी लकड़ी की वस्तुएँ गिनाई गई हैं? (स्तंभ, टेक, धरन, भीतरी छत, लटकते हुए छज्जों के अंदरूनी भाग और मीनारें।) अब कमल महल (कालांश 6) को फिर देखिए: उसमें कौन-सी चीज़ें शायद लकड़ी की रही होंगी? यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में मान्यता; 1980 के दशक की परियोजना ने व्यापक और गहन सर्वेक्षणों से विजयनगर के भौतिक अवशेषों का सूक्ष्मता से प्रलेखन किया। (2) 25 वर्गों में, हर वर्ग को एक अक्षर का नाम देकर; फिर हर वर्ग को छोटे वर्गों में, और उन्हें और छोटी इकाइयों में बाँटा गया।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के ख10 और च2; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 1 का पहला हिस्सा लिखें: पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के अध्ययन में कौन-सी पद्धतियाँ अपनाई गईं (कालांश 1 का मैकेन्ज़ी और कालांश 8 का अंकन साथ रखकर)।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 131–138।

कालांश 9 — 7. उत्तरों की खोज में प्रश्न

किताब — पृष्ठ 191–192 · स्लाइड — भाग 9 · इंटरैक्टिव — 7. उत्तरों की खोज में प्रश्न

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी स्रोत 5 से बाज़ार की तीन बातें बता सके, लिख सके कि इमारतें हमें क्या-क्या बताती हैं, और कम से कम दो ऐसे प्रश्न गिना सके जिनका उत्तर इमारतें नहीं देतीं।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और इमारतें क्या बताती हैं, क्या नहीं वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: 1976 राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल; 25 वर्ग, फिर छोटे वर्ग, फिर छोटी इकाइयाँ। जिसने “1976 में विश्व धरोहर” लिखा, उसे काल-रेखा 2 की ओर भेजिए (कालांश 10)।

  2. 5–15 मिनट · स्रोत 5: बाज़ार। पृष्ठ 191 पर स्रोत 5 जोड़ियों में पढ़वाइए। पेस एक चौड़ी और सुंदर गली का वर्णन करता है, जिसमें कई व्यापारी रहते हैं और जहाँ माणिक्य, हीरे, पन्ने और मोती से लेकर वस्त्र तक, हर वस्तु मिलती है। वह शहर को “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” के रूप में बताता है, जहाँ बाज़ार अनाज और दालों से भरे रहते थे; इनमें काला चना भी गिनाया गया है। नूनिज़ लिखता है कि बाज़ार “प्रचुर मात्रा में फलों, अंगूरों और संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से भरे रहते थे और सभी बहुत सस्ते।” स्रोत के अनुसार बाज़ारों में मांस भी बड़ी मात्रा में बिकता था। पूछिए: इस स्रोत से शहर के आम लोगों के जीवन के बारे में क्या पता चलता है? यह सवाल हमारी ओर से है।

    नमूना उत्तर — कि शहर के बाज़ार भरे-पूरे थे और खाने-पीने की चीज़ें आसानी से मिलती थीं।

    • भरपूर सामान: पेस शहर का वर्णन “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” के रूप में करता है (पृष्ठ 191)।
    • सस्ते फल: नूनिज़ के अनुसार फल बहुत सस्ते थे।
    • सीमा: यह दो यात्रियों का वर्णन है; बाज़ार में ख़रीदने वाले आम लोग ख़ुद क्या सोचते थे, यह स्रोत नहीं बताता।

    आख़िरी बात अगले चरणों तक ले जाइए।

  3. 15–22 मिनट · इमारतें क्या बताती हैं (7)। पृष्ठ 191 पढ़िए। किताब के अनुसार बचे हुए भवन बताते हैं कि स्थानों को कैसे व्यवस्थित किया गया और कैसे प्रयोग में लाया गया, और किन वस्तुओं और तकनीकों से उनका निर्माण हुआ। किसी शहर की क़िलेबंदी से उसकी प्रतिरक्षण आवश्यकताएँ और सामरिक तैयारी समझ में आती हैं; दूसरी जगहों के भवनों से तुलना करें तो विचारों के फैलाव और सांस्कृतिक प्रभावों का पता चलता है। भवन वे विचार ज़ाहिर करते हैं जो निर्माणकर्ता या प्रश्रयदाता व्यक्त करना चाहते थे, और उन्हें हम तब समझ पाते हैं जब साहित्य, अभिलेखों और लोकप्रचलित परंपराओं से मिली जानकारी को साथ जोड़ें। नीचे के चित्र का ऊपरी हिस्सा चार्ट पेपर पर बनाइए।

  4. 22–28 मिनट · शासक अपने को कैसे दिखाना चाहता था। पृष्ठ 192 का बॉक्स पढ़िए और चित्र 7.31 दिखाइए: चिदम्बरम के गोपुरम् में कृष्णदेव राय की एक मूर्ति। किताब कहती है: “स्वाभाविक है कि शासक इसी रूप में अपने आप को प्रस्तुत करना चाहता था।” फिर पेस का वर्णन पढ़िए: “मझला कद, गोरा रंग और अच्छी काठी, कुछ मोटा, राजा के चेहरे पर चेचक के दाग़ हैं।” पूछिए: मूर्ति और पेस का वर्णन, दोनों से क्या सीख मिलती है? यह सवाल हमारी ओर से है।

    नमूना उत्तर — कि एक ही व्यक्ति को अलग-अलग स्रोत अलग ढंग से दिखाते हैं।

    • मूर्ति: वह रूप दिखाती है जिसमें शासक ख़ुद को प्रस्तुत करना चाहता था।
    • पेस: एक देखने वाले का वर्णन है, जिसमें चेचक के दाग़ जैसी बात भी है।

    इतिहासकार दोनों को साथ रखकर पढ़ता है; किसी एक को पूरी तस्वीर नहीं मानता।

  5. 28–36 मिनट · जो इमारतें नहीं बतातीं। पृष्ठ 192 पढ़िए। किताब कई प्रश्न गिनाती है जिनका उत्तर भवन नहीं देते: शहर और उसके आसपास रहने वाले सामान्य पुरुष, महिलाएँ और बच्चे इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे; क्या शाही केंद्र या धार्मिक केंद्र के किसी भाग तक उनकी पहुँच थी; जिन्होंने इन निर्माणों पर श्रम किया, वे क्या सोचते थे; भवनों के नक्शे कौन बनाता था; राजगीर, पत्थर काटने वाले और मूर्तिकार कहाँ से आते थे, और “क्या उन्हें युद्ध के दौरान पड़ोसी क्षेत्रों से बंदी बनाया जाता था?”; उन्हें किस प्रकार के वेतन मिलते थे; निर्माण की देखरेख कौन करता था; और कच्चा माल कैसे और कहाँ से आता था। किताब कहती है कि संभवत: अन्य स्रोतों के प्रयोग से जारी शोध कुछ और संकेत दे सकें। नीचे के चित्र का निचला हिस्सा पूरा कीजिए। फिर अभ्यास का प्रश्न 9 पूछिए: अध्याय के अलग-अलग विवरणों से आपको विजयनगर के आम लोगों के जीवन की क्या छवि मिलती है?

    नमूना उत्तर — छवि अधूरी है, पर अध्याय में कई सुराग बिखरे हैं।

    • घर और गलियाँ: बरबोसा के अनुसार आवास छप्पर के पर सुदृढ़, व्यवसाय के आधार पर लंबी गलियों में (पृष्ठ 179)।
    • पानी और पूजा: कुएँ और जलाशय, बहुत-से पूजा स्थल और छोटे मन्दिर (पृष्ठ 179)।
    • बाज़ार: भरपूर और सस्ते फल, अनाज और मांस (स्रोत 5, पृष्ठ 191)।
    • श्रम: स्रोत 4 में जलाशय पर पन्द्रह से बीस हज़ार आदमी (पृष्ठ 177)।
    • सीमा: आम लोगों के आवासों के साक्ष्य कम हैं, और वे क्या सोचते थे, यह इमारतें नहीं बतातीं (पृष्ठ 178, 192)।

    250–300 शब्दों का उत्तर इन्हीं पाँच हिस्सों में बँट सकता है।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) इमारतें हमें कौन-सी दो बातें बताती हैं? (2) ऐसे दो प्रश्न लिखिए जिनका उत्तर इमारतें नहीं देतीं।

इमारतें क्या बताती हैं, क्या नहीं (चरण 3 और 5)

इमारतें क्या बताती हैं, क्या नहीं

बनावटस्थान कैसे व्यवस्थित थेकिन वस्तुओं और तकनीकों से बने
क़िलेबंदीप्रतिरक्षण और सामरिक तैयारीतुलना से विचारों का फैलाव
विचारनिर्माणकर्ता या प्रश्रयदाता केसाहित्य, अभिलेख और लोकप्रचलित परंपराएँ साथ जोड़कर
आम लोग और कारीगरवे क्या सोचते थे; नक्शे कौन बनाता था, वेतन, देखरेख, कच्चा मालइमारतें नहीं बतातीं
आगे का शोधअन्य स्रोतसंभवत: कुछ और संकेत दे सकें
NCERT, पृष्ठ 191–192

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
स्रोत 5, पेसचौड़ी और सुंदर गली; विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाला शहर191
स्रोत 5, नूनिज़फलों से भरे बाज़ार, सभी बहुत सस्ते191
भवन बताते हैंस्थानों की व्यवस्था, वस्तुएँ और तकनीकें, प्रतिरक्षण आवश्यकताएँ191
समझने के लिएसाहित्य, अभिलेख और लोकप्रचलित परंपराएँ191
चित्र 7.31चिदम्बरम के गोपुरम् में कृष्णदेव राय की मूर्ति192
पेस का वर्णनमझला कद, गोरा रंग, चेहरे पर चेचक के दाग़192
अनुत्तरित प्रश्नआम लोग क्या सोचते थे; नक्शे कौन बनाता था; वेतन; कच्चा माल192

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • “पेस ने लिखा, तो सब ऐसा ही था।” स्रोत 5 दो यात्रियों का वर्णन है। उत्तर में पेस के अनुसार या नूनिज़ के अनुसार लिखवाइए।
  • मूर्ति को राजा का सही चेहरा मान लेना। किताब कहती है कि शासक इसी रूप में अपने को प्रस्तुत करना चाहता था। पेस का वर्णन अलग है।
  • “इमारतें सब बता देती हैं।” पृष्ठ 192 के प्रश्न दिखाते हैं कि बनाने वाले कारीगर और आम लोग इमारतों में लगभग अदृश्य हैं।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो 7. उत्तरों की खोज में प्रश्न खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: इमारतों के विचार समझने के लिए किन चीज़ों को साथ जोड़ना पड़ता है? (साहित्य, अभिलेख और लोकप्रचलित परंपराएँ।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से अभ्यास का प्रश्न 1 पूरा करवाइए: पिछली दो शताब्दियों की पद्धतियाँ (मैकेन्ज़ी का सर्वेक्षण, 1856 से छाया-चित्र, अभिलेखों का संकलन, संरक्षण, 1980 के दशक का प्रलेखन) विरुपाक्ष मन्दिर के पुरोहितों की दी जानकारी का किस प्रकार पूरक रहीं? (पुरोहितों से मौखिक परंपराएँ मिलीं; सर्वेक्षण, छाया-चित्र और अभिलेख उन्हें खंडहरों और लिखित प्रमाण से जोड़ते थे। पृष्ठ 170 कहता है कि इन मौखिक परंपराओं के साथ-साथ पुरातात्विक खोजों, स्थापत्य के नमूनों, अभिलेखों और अन्य दस्तावेज़ों ने साम्राज्य को फिर से खोजने में मदद की।)

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) स्थानों को कैसे व्यवस्थित किया और प्रयोग में लाया गया; किन वस्तुओं और तकनीकों से निर्माण हुआ; शहर की प्रतिरक्षण आवश्यकताएँ; विचारों का फैलाव (कोई दो)। (2) सामान्य लोग इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे; क्या शाही या धार्मिक केंद्र तक उनकी पहुँच थी; भवनों के नक्शे कौन बनाता था; कारीगरों को किस प्रकार के वेतन मिलते थे; कच्चा माल कहाँ से आता था (कोई दो)।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक के च6 और छ4; जो आगे हैं, वे अभ्यास के प्रश्न 9 का पूरा उत्तर 250–300 शब्दों में लिखें।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 139–151।

कालांश 10 — काल-रेखा 1 और 2; मानचित्र कार्य (प्रश्न 10)

किताब — पृष्ठ 193–195 · स्लाइड — भाग 10 · इंटरैक्टिव — सार और काल-रेखा और मानचित्र

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी दोनों काल-रेखाओं से पाँच-पाँच तिथियाँ क्रम से लिख सके, विश्व के रेखा-मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान और रूस अंकित कर सके, और पहले दिन के सवाल का उत्तर अपने शब्दों में दे सके।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, पहले दिन की पर्चियों वाला लिफ़ाफ़ा, विश्व का रेखा-मानचित्र (हर बच्चे के लिए एक), और दो काल-रेखाएँ, एक कहानी वाले चित्र के लिए एक चार्ट पेपर।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: भवन बताते हैं कि स्थान कैसे व्यवस्थित थे, किन वस्तुओं और तकनीकों से बने, और शहर की प्रतिरक्षण आवश्यकताएँ क्या थीं; आम लोग उनके बारे में क्या सोचते थे, यह नहीं बताते।

  2. 5–15 मिनट · काल-रेखा 1: राजनीति। पृष्ठ 193 की पहली काल-रेखा जोड़ियों में पढ़वाइए और बोर्ड पर सदी के हिसाब से लिखवाइए:

    • लगभग 1200–1300 ईसवी: दिल्ली सल्तनत की स्थापना (1206)।
    • लगभग 1300–1400 ईसवी: विजयनगर साम्राज्य की स्थापना (1336?), बहमनी राज्य की स्थापना (1347); जौनपुर, कश्मीर और मदुरई में सल्तनतें।
    • लगभग 1400–1500 ईसवी: उड़ीसा के गजपति राज्य की स्थापना (1435); गुजरात और मालवा की सल्तनतों की स्थापना; अहमदनगर, बीजापुर और बेरार सल्तनतों का उदय (1490)।
    • लगभग 1500–1600 ईसवी: पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर विजय (1510); बहमनी राज्य का विनाश; गोलकुंडा की सल्तनत का उदय (1518); बाबर द्वारा मुग़ल साम्राज्य की स्थापना (1526)।

    किताब का नोट भी पढ़िए: “प्रश्नचिह्न अनिश्चित तिथि की ओर संकेत करता है।” यानी 1336 पक्की तिथि नहीं है। किताब की काल-रेखा में यहाँ ‘अहमदाबाद’ छपा है; पृष्ठ 173 का पाठ अहमदनगर बताता है।

  3. 15–22 मिनट · काल-रेखा 2: खोज और संरक्षण। पृष्ठ 193 की दूसरी काल-रेखा पढ़िए:

    • 1800: कॉलिन मैकेन्ज़ी विजयनगर आए।
    • 1856: अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने हम्पी के पुरातात्विक अवशेषों की पहली विस्तृत तसवीरें लीं।
    • 1876: जे.एफ. फ्लीट ने पुरास्थल के मन्दिरों की दीवारों के अभिलेखों का प्रलेखन शुरू किया।
    • 1902: जॉन मार्शल के अधीन संरक्षण कार्य आरंभ हुआ।
    • 1986: यूनेस्को ने हम्पी को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।

    किताब में यहाँ ‘विश्व पुरातत्व स्थल’ छपा है; यूनेस्को की सूची में हम्पी विश्व धरोहर स्थल के रूप में दर्ज है। नीचे का चित्र चार्ट पेपर पर बनाइए: दोनों काल-रेखाएँ एक के नीचे एक।

  4. 22–32 मिनट · मानचित्र कार्य (प्रश्न 10)। अभ्यास का प्रश्न 10 पढ़िए: विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली, पुर्तगाल, ईरान तथा रूस को सन्निकटता से अंकित कीजिए, और उन मार्गों को पहचानिए जिनसे पृष्ठ 176 के यात्री विजयनगर पहुँचे। बच्चे अपने मानचित्र पर चारों देश अंकित करें और हर देश के पास कालांश 4 की सूची से उसके यात्री का नाम लिखें: इटली के पास निकोलो दे कॉन्ती (इतालवी व्यापारी), ईरान (किताब में फ़ारस) के पास अब्दुर रज़्ज़ाक, रूस के पास अफ़ानासी निकितिन, और पुर्तगाल के पास फर्नाओ नूनिज़ और दुआर्ते बरबोसा (पृष्ठ 179 बरबोसा को पुर्तगाली यात्री कहता है)। डोमिंगो पेस भी सोलहवीं शताब्दी में आया; उसका नाम मानचित्र के हाशिये पर लिखिए। फिर विजयनगर अंकित करवाइए।

    नमूना उत्तर — देश अंकित करना किताब से हो जाएगा; मार्ग वाले हिस्से के लिए किताब कुछ बातें देती है, पूरा मार्ग नहीं।

    • किताब क्या देती है: अब्दुर रज़्ज़ाक फ़ारस के शासक का कालीकट (कोज़ीकोड) भेजा दूत था (पृष्ठ 177); पृष्ठ 193 की काल-रेखा में पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर विजय 1510 में है।
    • क्या नहीं देती: यात्रियों के पूरे मार्ग किताब में नहीं हैं। बच्चे एटलस देखकर समुद्र और ज़मीन के संभावित रास्ते पेंसिल की बिंदु-रेखा से बनाएँ, और नीचे लिखें कि यह अनुमानित मार्ग है।

    बिंदु-रेखा और अनुमानित शब्द, दोनों ज़रूरी हैं।

  5. 32–36 मिनट · पहले दिन की पर्चियाँ। लिफ़ाफ़ा खोलिए। पहले दिन का सवाल था: खंडहर, अभिलेख और यात्रियों के वृत्तांत मिलकर विजयनगर के बारे में क्या-क्या बताते हैं, और क्या नहीं बताते? पाँच-छह पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए, और पूछिए कि आज वे क्या जोड़ेंगे।

    पहले दिन के सवाल का नमूना उत्तर — तीनों मिलकर शहर की काफ़ी साफ़ तस्वीर देते हैं, पर उसमें आम लोगों की आवाज़ कम है।

    • खंडहर और सर्वेक्षण: पानी के प्रबंध, क़िलेबंदी, राजकीय केंद्र, मन्दिर, गोपुरम् और मण्डप; हज़ारों संरचनाओं के अंश।
    • अभिलेख: मन्दिरों को दिए जाने वाले दान और महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विवरण; यह भी कि विरुपाक्ष का सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं–दसवीं शताब्दियों का था।
    • यात्रियों के वृत्तांत: क़िलेबंदी (अब्दुर रज़्ज़ाक), आम लोगों के घर (बरबोसा), बाज़ार और गलियाँ (पेस और नूनिज़)।
    • जो नहीं बताते: आम लोग इन भवनों के बारे में क्या सोचते थे, भवनों के नक्शे कौन बनाता था, कारीगरों को किस प्रकार के वेतन मिलते थे।

    यह सवाल हमारी ओर से है।

  6. 36–40 मिनट · निकास-पर्ची। (1) काल-रेखा 1 से विजयनगर से पहले की एक और बाद की एक घटना तिथि के साथ लिखिए। (2) 1856 और 1986 में क्या हुआ?

दो काल-रेखाएँ, एक कहानी (चरण 3)

दो काल-रेखाएँ, एक कहानी

काल-रेखा 1राज्यों का उदय1336? विजयनगर, 1347 बहमनी, 1510 गोवा पर पुर्तगाली विजय; प्रश्नचिह्न मतलब तिथि अनिश्चित
1800मैकेन्ज़ीविजयनगर की यात्रा
1856ग्रीनलॉपहली विस्तृत तसवीरें
1876फ्लीटअभिलेखों का प्रलेखन
1902जॉन मार्शलसंरक्षण कार्य आरंभ
1986हम्पीविश्व धरोहर स्थल
NCERT, पृष्ठ 193

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

बातकिताब क्या कहती हैपृष्ठ
1206दिल्ली सल्तनत की स्थापना193
1336?विजयनगर साम्राज्य की स्थापना; प्रश्नचिह्न का अर्थ अनिश्चित तिथि193
1347बहमनी राज्य की स्थापना193
1490अहमदनगर, बीजापुर और बेरार सल्तनतों का उदय173, 193
1510पुर्तगालियों द्वारा गोवा पर विजय193
1800कॉलिन मैकेन्ज़ी विजयनगर आए193
1856अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ की पहली विस्तृत तसवीरें193
1986हम्पी विश्व धरोहर स्थल193
प्रश्न 10इटली, पुर्तगाल, ईरान, रूस; मार्ग अनुमानित176, 195

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • 1336 को पक्की तिथि लिखना। किताब में “1336?” छपा है, और प्रश्नचिह्न का अर्थ अनिश्चित तिथि है। उत्तर में भी लगभग या प्रश्नचिह्न रखिए।
  • फ़ारस और ईरान। किताब के पाठ में “फ़ारस” है और प्रश्न 10 में “ईरान”। मानचित्र पर ईरान अंकित कीजिए, और साथ में लिखिए कि रज़्ज़ाक फ़ारस के शासक का दूत था।
  • 1976 और 1986 को मिलाना। 1976 में राष्ट्रीय महत्त्व का स्थल (पृष्ठ 188), 1986 में विश्व धरोहर स्थल (पृष्ठ 193)।
  • इंटरैक्टिव अध्याय पर्दे पर चला रहे हैं तो मानचित्र खोलिए, और पढ़ते हुए रुककर पूछिए: पंद्रहवीं शताब्दी के तीन यात्री किन देशों से आए? (इटली, फ़ारस और रूस।)
  • कमज़ोर विद्यार्थी के लिए बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ काफ़ी हैं।
  • तेज़ विद्यार्थी से पूछिए: काल-रेखा 1 में 1300 से 1600 के बीच कितने नए राज्य और सल्तनतें गिनाए गए हैं? इससे पृष्ठ 172 की यह बात कैसे समझ आती है कि “प्रतिस्पर्धी राज्यों” के लिए घोड़ों का आयात बहुत महत्त्वपूर्ण था? (विजयनगर, बहमनी, जौनपुर, कश्मीर, मदुरई, गजपति, गुजरात, मालवा, अहमदनगर, बीजापुर, बेरार और गोलकुंडा: कई राज्य साथ-साथ थे, और पृष्ठ 172 के अनुसार युद्धकला अश्वसेना पर आधारित थी, इसलिए हर राज्य को घोड़े चाहिए थे।) यह सवाल हमारी ओर से है।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • निकास-पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न।
  • निकास-पर्ची के नमूना उत्तर — (1) पहले: दिल्ली सल्तनत की स्थापना (1206); बाद: बहमनी राज्य की स्थापना (1347) या कोई और सही घटना। (2) 1856 में अलेक्ज़ैंडर ग्रीनलॉ ने हम्पी के पुरातात्विक अवशेषों की पहली विस्तृत तसवीरें लीं; 1986 में यूनेस्को ने हम्पी को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।
  • गृहकार्य: प्रश्न बैंक का नमूना पत्र 1; जो आगे हैं, वे मानचित्र पूरा करके उस पर पाँच-पाँच पंक्तियों में हर यात्री का परिचय लिखें (पृष्ठ 176 के बॉक्स से)।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड 152–164।

कालांश 11 — मूल्यांकन: अभ्यास के 12 प्रश्न

किताब — पृष्ठ 194–195 · स्लाइड — आख़िरी भाग · इंटरैक्टिव — हर पड़ाव के अंत में उसके प्रश्न

लक्ष्य — कालांश के अंत तक हर विद्यार्थी एक लिखित परख दे चुका हो, जोड़ी में उसकी जाँच कर चुका हो, और जान ले कि अभ्यास का हर प्रश्न किस कालांश में पढ़ा गया।

साथ ले जाइए — किताब, पिछली निकास-पर्चियाँ, और प्रश्न बैंक के नमूना पत्र 2 की प्रतियाँ (या बोर्ड पर लिखे प्रश्न)।

40 मिनट

  1. 0–5 मिनट · पिछली पर्चियाँ। दो पर्चियाँ पढ़कर सुनाइए। बोर्ड पर लिखिए: 1206, 1336?, 1347, 1510; 1800, 1856, 1876, 1902, 1986।

  2. 5–12 मिनट · एक प्रश्न बोर्ड पर। अभ्यास का प्रश्न 2 बोर्ड पर लिखिए: विजयनगर की जल-आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा किया जाता था? पूरी कक्षा मिलकर उत्तर का ढाँचा बनाए।

    नमूना उत्तर — प्राकृतिक कुण्ड, हौज़ और नहरों से।

    • प्राकृतिक कुण्ड: तुंगभद्रा नदी का बनाया; पहाड़ियों से आती धाराएँ।
    • हौज़: लगभग सभी धाराओं पर बाँध बनाकर; सबसे महत्त्वपूर्ण हौज़ों में से एक, कमलपुरम् जलाशय (पंद्रहवीं शताब्दी के आरंभिक वर्ष), जिसके पानी से आसपास के खेत सींचे जाते थे और जो नहर से राजकीय केंद्र तक जाता था।
    • हिरिया नहर: तुंगभद्रा पर बने बाँध से; धार्मिक केंद्र को शहरी केंद्र से अलग करने वाली घाटी की सिंचाई।
    • आम लोग: सर्वेक्षणों के अनुसार कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय और मन्दिरों के जलाशय संभवत: उनके पानी के स्रोत थे (पृष्ठ 179)।

    100–150 शब्दों में यही चार हिस्से काफ़ी हैं।

  3. 12–32 मिनट · लिखित परख। प्रश्न बैंक का नमूना पत्र 2 दीजिए (20 अंक)। बच्चे अकेले लिखें, किताब बंद।

  4. 32–36 मिनट · जोड़ियों में जाँच। बच्चे कॉपियाँ बदलें और नीचे अंक कैसे कटेंगे वाले तीन नियमों से एक-दूसरे का उत्तर जाँचें। हर कटे अंक के पास कारण लिखें।

  5. 36–38 मिनट · अभ्यास के 12 प्रश्न। बोर्ड-कार्य की तालिका दिखाइए: हर प्रश्न कब पढ़ा गया और उसके उत्तर की मुख्य बात क्या है।

  6. 38–40 मिनट · आख़िरी पर्ची। (1) इस अध्याय की कौन-सी बात आपको सबसे ज़्यादा याद रहेगी, और क्यों? (2) कौन-सा प्रश्न अब भी कठिन लगता है?

बोर्ड-कार्य

कालांश के अंत तक बोर्ड पर यह तालिका बने, और बच्चे इसे कॉपी में उतारें।

प्रश्नकब दियाउत्तर की मुख्य बात
1. हम्पी के अध्ययन की पद्धतियाँ, पुरोहितों की जानकारी की पूरककालांश 1, 8 और 9सर्वेक्षण, छाया-चित्र, अभिलेख, संरक्षण, प्रलेखन; मौखिक परंपराओं के साथ
2. जल-आवश्यकताएँकालांश 4 और 11प्राकृतिक कुण्ड, हौज़, कमलपुरम् जलाशय, हिरिया नहर
3. क़िलेबंद क्षेत्र में खेत: फ़ायदे और नुकसानकालांश 4घेराबंदी में अन्न; “मँहगी तथा व्यापक नीति”
4. महानवमी डिब्बा के अनुष्ठानों का महत्त्वकालांश 6रुतबे, ताक़त तथा अधिराज्य का प्रदर्शन; सेना का निरीक्षण; नायकों की भेंट
5. चित्र 7.33 का स्तंभकालांश 7पुष्प-विषयक रूपांकन, जानवर, मानव आकृतियाँ; चित्र देखकर
6. “शाही केंद्र” नाम कितना सहीकालांश 5 और 6लगभग तीस महल, पर 60 से भी अधिक मन्दिर; कई भवनों का प्रयोजन अनिश्चित
7. कमल महल और हाथियों का अस्तबलकालांश 6मेहराबों पर संभवत: इण्डो–इस्लामी तकनीकों का प्रभाव; कमल महल नाम उन्नीसवीं शताब्दी के अंग्रेज़ यात्रियों का, प्रयोजन अनिश्चित
8. स्थापत्य की परंपराएँ और उनमें बदलावकालांश 2, 5 और 7पल्लव, चालुक्य, होयसाल और चोल की मन्दिर परंपरा, इंडो–इस्लामिक तत्व; राय गोपुरम्, मण्डप, रथ गलियाँ
9. आम लोगों के जीवन की छविकालांश 5 और 9छप्पर के घर, पानी, बाज़ार, श्रम; साक्ष्य कम
10. विश्व मानचित्र और यात्रियों के मार्गकालांश 10इटली, पुर्तगाल, ईरान, रूस; मार्ग अनुमानित
11. परियोजना: लगभग चौदहवीं से सत्रहवीं शताब्दी का कोई प्रमुख शहरघर परस्थापत्य, राजनीतिक केंद्र के लक्षण, आनुष्ठानिक भवन, शहरी भाग को आसपास से अलग करने वाले लक्षण
12. परियोजना: आसपास का कोई धार्मिक भवनघर परछत, स्तंभ, मेहराब, गलियारे, रास्ते, सभागार, प्रवेशद्वार, जलआपूर्ति; विरुपाक्ष से तुलना

यहाँ बच्चे अटकेंगे

  • लंबे उत्तर में एक ही बात दोहराना। 250–300 शब्दों के प्रश्नों (6 से 9) में हर अनुच्छेद एक नई बात रखे: बोर्ड-कार्य की “मुख्य बात” वाला खाना ही ढाँचा है।
  • राय को तथ्य की तरह लिखना। प्रश्न 3, 6 और 7 “आपके विचार में” पूछते हैं। राय लिखिए, पर हर राय के साथ किताब का एक तथ्य।
  • प्रश्न 5 में चित्र के बाहर की बातें लिखना। जो चित्र 7.33 में दिखता है, वही लिखिए।
  • कमज़ोर विद्यार्थी को परख में पहले खंड के वस्तुनिष्ठ प्रश्न पहले करने दीजिए।
  • तेज़ विद्यार्थी को परियोजना (प्रश्न 11 या 12) का खाका इसी हफ़्ते बनाने दीजिए।

निकास-पर्ची और गृहकार्य

  • आख़िरी पर्ची (चरण 6): ऊपर के दो प्रश्न; इनका कोई एक सही उत्तर नहीं है। पर्चियाँ पढ़कर अगली दोहराई तय कीजिए।
  • गृहकार्य: क्विज़ के 20 प्रश्न; प्रश्न बैंक का नमूना पत्र 3; और परख से अपनी तैयारी जाँचिए।
  • घर के लिए: अभिभावकों के लिए पन्ना घर भेजिए, ताकि घर पर भी इस अध्याय की बात हो सके।
  • दोहराने के लिए: फ़्लैशकार्ड का पूरा सेट।

पूरे अध्याय के लिए

अलग-अलग बच्चों के लिए

किसके लिएक्या कीजिए
जो पढ़ने में धीमे हैंहर कालांश के बोर्ड-कार्य की पहली चार पंक्तियाँ और फ़्लैशकार्ड; लंबे उत्तर की जगह पहले तालिका भरवाइए।
जो आगे हैंअभ्यास के 250–300 शब्दों वाले प्रश्न (6 से 9) और कालांश कार्डों के तेज़ विद्यार्थी वाले प्रश्न।
जिन्हें लिखने में कठिनाई हैउत्तर बोलकर दें; चार्ट पेपर के चित्र और काल-रेखा बनाने का काम दीजिए।
धर्म और आस्था से जुड़े हिस्सेमहानवमी, मन्दिर, मस्जिद और मान्यताएँ किताब के शब्दों में इतिहास की तरह पढ़ाइए; किसी बच्चे से उसका धर्म या जाति मत पूछिए, और किसी आस्था को किसी दूसरी से ऊँचा-नीचा मत ठहराइए।

सतत मूल्यांकन

साधनकबक्या देखिए
निकास-पर्चीहर कालांश के अंत मेंदोनों उत्तरों में किताब की कोई ठोस बात (नाम, तिथि, पृष्ठ) है या नहीं
बोर्ड-कार्य की कॉपीहफ़्ते में एक बारतालिका पूरी है, और पृष्ठ लिखे हैं
चार्ट पेपर के चित्रकालांश 4 से 10बच्चा चित्र देखकर एक कड़ी समझा सकता है
मानचित्रकालांश 10चारों देश सही जगह; मार्ग बिंदु-रेखा में और “अनुमानित” लिखा
लिखित परखकालांश 11नीचे के ढाँचे और अंक काटने के नियम के अनुसार

लिखित मूल्यांकन

अपनी इकाई-परीक्षा के लिए एक सुझाया हुआ ढाँचा; प्रश्न प्रश्न बैंक से चुनिए। कुल 30 अंक।

प्रकारअंकक्या पूछें
वस्तुनिष्ठ (खंड क, ख, ग)6 × 1 = 6तिथियाँ, नाम, यात्री, भवनों के नाम
अति लघूत्तरीय (खंड घ)2 × 2 = 4हिन्दू सूरतराणा, अमर–नायक, कमलपुरम् जलाशय जैसी एक-एक बात
लघूत्तरीय (खंड ङ)2 × 3 = 6पानी के प्रबंध, खेत क़िलेबंदी के भीतर क्यों
दीर्घ उत्तरीय (खंड च)1 × 5 = 5महानवमी डिब्बा, या आम लोगों के जीवन की छवि
स्रोत पर आधारित (खंड छ)1 × 4 = 4स्रोत 3, 4 या 5
मानचित्र1 × 5 = 5प्रश्न 10: चार देश और विजयनगर

अंक कैसे कटेंगे, यह पहले ही बता दीजिए

  1. बिना स्रोत की बात। पेस के अनुसार या किताब के अनुसार जैसा आधार न हो, तो राय वाले प्रश्नों में आधा अंक कटेगा।
  2. तिथि या नाम ग़लत। 1336 को पक्का लिखना, 1976 और 1986 को मिलाना, या यात्री का देश बदल देना: उस बिंदु का अंक कटेगा।
  3. अनिश्चित को निश्चित लिखना। “कमल महल परिषदीय सदन था” या “हाथियों का अस्तबल था” बिना शायद के: उस बिंदु का आधा अंक कटेगा।

प्रोजेक्ट और गतिविधि

#प्रोजेक्टकैसे
1अभ्यास का प्रश्न 11: भारतीय उपमहाद्वीप का कोई प्रमुख शहर जो लगभग चौदहवीं से सत्रहवीं शताब्दी में फला-फूलाउस शहर के स्थापत्य, राजनीतिक केंद्र के लक्षणों, आनुष्ठानिक भवनों और शहरी भाग को आसपास से अलग करने वाले लक्षणों पर रिपोर्ट; विजयनगर से तुलना की एक तालिका।
2अभ्यास का प्रश्न 12: आसपास का कोई धार्मिक भवनछत, स्तंभ, मेहराब, गलियारे, रास्ते, सभागार, प्रवेशद्वार और पानी के प्रबंध का रेखाचित्र; विरुपाक्ष मन्दिर से तुलना, भवन का प्रयोग और इतिहास।
3कक्षा का चार्ट: विजयनगर के तीन केंद्रकालांश 4 से 7 के चार्ट पेपर जोड़कर एक दीवार-चार्ट: धार्मिक केंद्र, शहरी केंद्र, राजकीय केंद्र, और उनके बीच पानी के रास्ते।
4काल-रेखा चार्टकालांश 10 की दोनों काल-रेखाएँ एक लंबी पट्टी पर, ऊपर राजनीति और नीचे खोज और संरक्षण।

शिक्षक के लिए पाँच सावधानियाँ

  1. किताब के बाहर का इतिहास मत जोड़िए। राजाओं की लंबी सूचियाँ, शहर या सेना के आकार की संख्याएँ और आज की ख़बरें इस अध्याय के पन्नों में नहीं हैं।
  2. युद्धों को राजनीति की तरह पढ़ाइए। पृष्ठ 174 के अनुसार धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी सुलतानों और रायों के संबंध हमेशा शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे: कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया, और बीजापुर के सुल्तान ने कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर में उत्तराधिकार का विवाद सुलझाने के लिए हस्तक्षेप किया।
  3. धर्म से जुड़े हिस्से किताब के शब्दों में। मस्जिद, इंडो–इस्लामिक शैली, हिन्दू सूरतराणा, महानवमी और मान्यताएँ इतिहास की बातें हैं; किसी अनुष्ठान का अभिनय मत करवाइए।
  4. अनिश्चितता बनाए रखिए। “शायद”, “संभवत:”, “विद्वानों का मानना है” किताब के शब्द हैं; कमल महल, हाथियों का अस्तबल और 1336 पर बच्चे भी यही शब्द लिखें।
  5. बिना प्रोजेक्टर भी पूरा पाठ चलेगा। हर कालांश का चित्र चार्ट पेपर पर बनता है और हर बोर्ड-कार्य बोर्ड पर; इंटरैक्टिव अध्याय और स्लाइड केवल सहारा हैं।