कक्षा — 10 · विषय — अर्थशास्त्र · पृष्ठ — 74 से 89
यह पन्ना किसलिए — किताब के उदाहरण और आँकड़े जहाँ रुकते हैं, उसके आगे का हाल कक्षा तक लाने के लिए: नया क़ानून और प्राधिकरण, उपभोक्ता इंटरनेशनल, पैकेट पर लिखी जानकारी, सूचना का अधिकार, ऑनलाइन बाज़ार के नियम, शिकायत के आयोग, हेल्पलाइन, मानक चिह्न, उपभोक्ता दिवस और राजस्थान। हर हिस्से में पहले यह है कि किताब कहाँ रुकती है, फिर आज क्या है (तारीख़ और स्रोत के साथ), और फिर कक्षा में पूछने के सवाल, उनके उत्तर के साथ।
परीक्षा में बच्चे किताब वाले आँकड़े और बातें ही लिखें। यहाँ की नई बातें यह समझाने के लिए हैं कि आज हाल क्या है। इस अध्याय में यह और भी ज़रूरी है, क्योंकि हेल्पलाइन का नंबर या गहने का हॉलमार्क बच्चे कल ही काम में ले सकते हैं। नंबर और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए पढ़ाने से पहले स्रोत का लिंक एक बार खोलकर देख लीजिए।
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क़ानून और प्राधिकरण: 1986 से 2020 तक
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 78 पर किताब बताती है कि 1986 में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम बना, “जो COPRA के नाम से प्रसिद्ध है। इस अधिनियम का संशोधन 2019 में किया गया।” पृष्ठ 87 पर वह जोड़ती है कि 2019 के बदलाव में इंटरनेट से ख़रीद भी शामिल है। नया क़ानून कब से लागू हुआ और उसके साथ कौन-सी नई संस्था बनी, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- 2019 का क़ानून: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019) को 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। यह 2019 का अधिनियम संख्या 35 है। स्रोत: इंडिया कोड, भारत सरकार का क़ानूनों का संग्रह (अंग्रेज़ी में; “Consumer Protection Act, 2019” खोजिए)
- कब से लागू: 2019 का नया क़ानून 20 जुलाई 2020 से लागू हुआ। स्रोत: PIB, 20 जुलाई 2020 (अंग्रेज़ी में)
- केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA): 24 जुलाई 2020 से बना। यह असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस मँगवाने (recall) का आदेश दे सकता है, अनुचित व्यापार और भ्रामक विज्ञापन बंद करवाने का आदेश दे सकता है, और भ्रामक विज्ञापन के निर्माताओं, उनका प्रचार करने वालों (endorsers) और उन्हें छापने या दिखाने वालों (publishers) पर जुर्माना लगा सकता है। स्रोत: PIB विज्ञप्ति (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: 1986, 2019 और 2020: इन तीन सालों में उपभोक्ता क़ानून के साथ क्या हुआ?
उत्तर: 1986 में COPRA बना (पृष्ठ 78)। 2019 में नया क़ानून बना, जिसे किताब “संशोधन” कहती है; उसे 9 अगस्त 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली। और वह 20 जुलाई 2020 से लागू हुआ। बच्चों को यह फ़र्क़ दिखाइए कि क़ानून का बनना और लागू होना दो अलग तारीख़ें हैं। परीक्षा में किताब वाली बात ही लिखवाइए: 1986 का अधिनियम, 2019 में संशोधन।
सवाल: किताब (पृष्ठ 76–77) में शिशुओं के दूध के पाउडर वाली कंपनी से झूठा दावा मनवाने में कई वर्ष लगे। आज CCPA के कौन-से अधिकार ऐसे मामले में काम आ सकते हैं?
उत्तर: CCPA भ्रामक विज्ञापन बंद करवाने का आदेश दे सकता है, और भ्रामक विज्ञापन के निर्माता, प्रचार करने वाले और छापने वाले पर जुर्माना लगा सकता है। किताब के समय यह लड़ाई उपभोक्ताओं को “कई वर्षों के लगातार संघर्ष” से लड़नी पड़ी थी; आज एक सरकारी प्राधिकरण के पास ये अधिकार हैं। पर अधिकार होना और हर मामले में कार्रवाई होना दो अलग बातें हैं।
उपभोक्ता इंटरनेशनल: आज के सदस्य
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 78 के बॉक्स में किताब बताती है कि 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने उपभोक्ता सुरक्षा के लिए दिशा-निर्देश अपनाए, जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपभोक्ता आंदोलन का आधार बने, और “आज उपभोक्ता इंटरनेशनल 100 से भी अधिक देशों के 200 संस्थाओं का एक संरक्षक संस्था बन गया है।”
आज क्या है
- सदस्य: उपभोक्ता इंटरनेशनल (Consumers International) की वेबसाइट के अनुसार वह 100 से ज़्यादा देशों के 190 से ज़्यादा संगठनों को साथ लाता है। स्रोत: Consumers International, Who we are (अंग्रेज़ी में)
- ध्यान रखिए: किताब का 200 और आज का “190 से ज़्यादा” दो अलग समय की दो गिनतियाँ हैं। इनसे यह मत निकालिए कि सदस्य घटे या बढ़े। परीक्षा में किताब वाली संख्या ही लिखवाइए।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब के अनुसार उपभोक्ता इंटरनेशनल किस तरह की संस्था है, और पृष्ठ 87 के अभ्यास 12 में उसका मिलान किससे होगा?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 78) उसे 100 से भी अधिक देशों की संस्थाओं की “संरक्षक संस्था” कहती है, यानी कई देशों के उपभोक्ता संगठनों को जोड़ने वाली संस्था। अभ्यास 12 में “उपभोक्ता इंटरनेशनल” का मिलान “(घ) उपभोक्ता कल्याण संगठनों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था” से होगा।
सवाल: एक बच्चा कहता है, “किताब में 200 थे, अब 190 हैं, यानी 10 संस्थाएँ निकल गईं।” उसे क्या समझाएँगे?
उत्तर: आज की गिनती “190 से ज़्यादा” है, ठीक 190 नहीं; और दोनों संख्याएँ अलग समय पर, अलग जगह छपी हैं। ऐसी दो संख्याओं को घटाकर कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता। दो आँकड़ों की तुलना से पहले यह पूछने की आदत डालिए कि दोनों किसे, कब और कैसे गिनते हैं।
पैकेट पर जानकारी और MRP
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 80 पर किताब बताती है कि पैकेट पर वस्तु के अवयव, मूल्य, बैच संख्या, निर्माण की तारीख़, ख़राब होने की अंतिम तिथि और बनाने वाले का पता होता है, और कोई मुद्रित मूल्य से ज़्यादा ले तो उसकी शिकायत की जा सकती है; यह मूल्य अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) होता है। पृष्ठ 81 पर बच्चे डिब्बाबंद वस्तुओं के पैकेट जाँचते हैं और सोचते हैं कि कौन-सी जानकारी और होनी चाहिए।
आज क्या है
- लीगल मेट्रोलॉजी (Legal Metrology) के नियम: अब पहले से पैक की गई वस्तुओं (pre-packed goods) पर इकाई बिक्री मूल्य (unit sale price), भारतीय मुद्रा में सब करों समेत MRP, और बनने का महीना और साल लिखना ज़रूरी है। स्रोत: PIB, 8 नवंबर 2021 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब पृष्ठ 80 पर पैकेट की जो जानकारियाँ गिनाती है, उनके अलावा आज के नियम में क्या लिखना ज़रूरी है?
उत्तर: किताब मूल्य और निर्माण की तारीख़ गिनाती है। आज के नियम में इकाई बिक्री मूल्य भी लिखना ज़रूरी है, और MRP भारतीय मुद्रा में, सब करों समेत। यह पृष्ठ 81 की गतिविधि का अच्छा उत्तर है: बच्चे घर से दो-तीन पैकेट लाकर ये बातें ढूँढें।
सवाल: पृष्ठ 82 पर एक विज्ञापन है: “प्रत्येक 500 ग्राम के पैक पर 15 ग्राम की अतिरिक्त छूट।” अलग-अलग वज़न के पैकेटों की तुलना करते समय इकाई बिक्री मूल्य किस काम आता है?
उत्तर: जब पैकेटों का वज़न और दाम दोनों अलग हों, तो एक इकाई के दाम से ही असली तुलना होती है; “अतिरिक्त” वाले विज्ञापन से नहीं। यह किताब के सूचना पाने के अधिकार (पृष्ठ 80) से जुड़ता है: सही जानकारी हो, तभी ख़रीदार सोच-समझकर चुन सकता है।
सूचना का अधिकार (RTI): 2025 का एक बदलाव
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 80 पर: “सन् 2005 के अक्टूबर में भारत सरकार ने एक कानून लागू किया जो RTI (राइट टू इनफॉरमेशन) या सूचना पाने का अधिकार के नाम से जाना जाता है”, जो नागरिकों को सरकारी विभागों के कार्य-कलापों की सूचनाएँ पाने का अधिकार देता है। अमृता का उदाहरण (पृष्ठ 80) और पृष्ठ 81 का सवाल इसी से जुड़े हैं।
आज क्या है
- धारा 8(1)(j) बदली: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act, 2023) की धारा 44 से RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) 13 नवंबर 2025 से बदल दी गई। अब यह धारा “information which relates to personal information”, यानी व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी जानकारी, को छूट वाली जानकारी में रखती है। धारा 8(2) का जनहित वाला प्रावधान बना हुआ है, जिसमें जनहित भारी हो तो छूट वाली जानकारी भी दी जा सकती है। स्रोत: RTI अधिनियम, केंद्रीय सूचना आयोग की प्रति (अंग्रेज़ी में); अधिसूचना G.S.R. 843(E) (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब के अनुसार RTI किसके बारे में सूचना पाने का अधिकार देता है, और अमृता ने इससे क्या जाना?
उत्तर: सरकारी विभागों के कार्य-कलापों के बारे में (पृष्ठ 80)। अमृता ने प्रार्थना-पत्र देकर अपने परिणाम में देरी के कारण जाने, और उसे नियुक्ति के लिए बुलावे का पत्र भी मिल गया। 2025 का बदलाव शिक्षक की समझ के लिए है; परीक्षा में किताब वाली बात ही लिखवाइए।
ऑनलाइन बाज़ार और CCPA के दिशा-निर्देश
किताब कहाँ रुकती है। किताब के शोषण के उदाहरण दुकान और विज्ञापन के हैं: पहले न बताए गए शुल्क जोड़ देना (पृष्ठ 76), दूध के पाउडर का झूठा दावा (पृष्ठ 76–77), दंतमंजन के साथ ब्रश ख़रीदने का दबाव (पृष्ठ 81) और लुभाने वाले विज्ञापन (पृष्ठ 82)। पृष्ठ 87 पर किताब बताती है कि 2019 के संशोधन में इंटरनेट से ख़रीद भी शामिल है, पर ऑनलाइन बाज़ार के नियम नहीं देती।
आज क्या है
- डार्क पैटर्न के दिशा-निर्देश: CCPA ने 30 नवंबर 2023 को “Guidelines for Prevention and Regulation of Dark Patterns, 2023” जारी किए, जिनमें ई-कॉमर्स में पहचाने गए 13 तय डार्क पैटर्न गिनाए गए हैं। स्रोत: लोकसभा, अतारांकित प्रश्न 550 का उत्तर, 22 जुलाई 2026 (अंग्रेज़ी में)
- ख़ुद जाँच की सलाह: जून 2025 में सभी ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को सलाह दी गई कि सलाह जारी होने के 3 महीने के भीतर वे ख़ुद जाँच (self-audit) करके अपने यहाँ के डार्क पैटर्न पहचानें। यह सलाह थी; इससे यह मत मानिए कि सबने जाँच पूरी कर ली। स्रोत: PIB विज्ञप्ति (अंग्रेज़ी में)
- CCPA के कुछ और दिशा-निर्देश: लोकसभा के उसी उत्तर में गिनाए गए दिशा-निर्देशों में ये शामिल हैं: भ्रामक विज्ञापन और उनका प्रचार (endorsement), 2022; होटल और रेस्तराँ सेवा शुल्क (service charge) न लें; डार्क पैटर्न, 2023; ग्रीनवॉशिंग (greenwashing), 2024; कोचिंग के क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापन, 2024; और ई-कॉमर्स पर वॉकी-टॉकी समेत रेडियो उपकरणों की ग़ैरक़ानूनी लिस्टिंग और बिक्री, 2025। स्रोत: लोकसभा, अतारांकित प्रश्न 550 का उत्तर, 22 जुलाई 2026 (अंग्रेज़ी में)
- CCPA के आदेश: CCPA के आदेश उपभोक्ता मामले विभाग के पोर्टल “जागो ग्राहक जागो” पर सबके लिए खुले हैं। उनमें कोचिंग संस्थानों के परीक्षा-परिणाम वाले विज्ञापन, रेस्तराँ का सेवा शुल्क, डार्क पैटर्न और ऑनलाइन बाज़ार में बढ़े हुए दाम जैसे मामले हैं। स्रोत: CCPA के आदेश, जागो ग्राहक जागो पोर्टल (अंग्रेज़ी में)
- कक्षा में दिखाने के लिए: उपभोक्ता मामले विभाग के दो छोटे वीडियो, हिंदी में: “What are Dark Patterns?” (डेढ़ मिनट) और “Misleading Advertisements by Coaching Institutes” (साढ़े तीन मिनट)।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: ऑनलाइन ख़रीदारी में आपने कौन-सी ऐसी चाल देखी है जो किताब के दुकान वाले किसी उदाहरण जैसी लगे?
उत्तर: बच्चों के उत्तर अलग-अलग होंगे; उन्हें किताब के उदाहरणों से मिलवाइए। आख़िरी क़दम पर जुड़ने वाला कोई शुल्क, जो पहले नहीं बताया गया था, पृष्ठ 76 की बात है: व्यापारी “उन शुल्कों को जोड़ देते हैं, जिनका वर्णन पहले न किया गया हो”। कोई चीज़ जो आपने चुनी नहीं पर साथ जुड़ गई, पृष्ठ 81 के दंतमंजन और ब्रश जैसी है। जगह दुकान से मोबाइल पर आ गई है, पर किताब का सवाल वही है: क्या ख़रीदार को पूरी जानकारी और चुनने का मौक़ा मिला?
सवाल: अबिरामी ने कोचिंग संस्थान में दो साल की फ़ीस एक साथ जमा की थी (पृष्ठ 81)। CCPA का कौन-सा दिशा-निर्देश कोचिंग से जुड़ा है, और क्या वह अबिरामी वाली समस्या के बारे में है?
उत्तर: 2024 का दिशा-निर्देश कोचिंग के क्षेत्र में भ्रामक विज्ञापनों के बारे में है। अबिरामी की समस्या अलग थी: पढ़ाई ठीक न लगने पर पाठ्यक्रम छोड़ा तो एक साल का पैसा लौटाने से मना कर दिया गया, और आयोग ने कहा कि छात्रा को चुनने का अधिकार है। दोनों में साझा बात यह है कि कोचिंग भी एक सेवा है और छात्र उसके उपभोक्ता।
शिकायत कहाँ करें: तीन स्तर के आयोग
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 84 पर किताब त्रिस्तरीय तंत्र बताती है: जिला आयोग “1 करोड़ तक के दावों से संबंधित मुकदमों” पर विचार करता है, राज्य आयोग 1 करोड़ से 10 करोड़ तक के, और राष्ट्रीय आयोग 10 करोड़ से ऊपर की दावेदारी के मुकदमे देखता है। पृष्ठ 82 पर किताब ख़ुद कहती है कि आजकल शिकायत “शारीरिक रूप में अथवा इंटरनेट के माध्यम से” दर्ज हो सकती है और कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो सकती है, पर किसी पोर्टल का नाम नहीं देती। पृष्ठ 86 पर वह मानती है कि निवारण की प्रक्रिया “जटिल, खर्चीली और समय साध्य” साबित हो रही है।
आज क्या है
- आयोगों की सीमाएँ बदल गई हैं: दिसंबर 2021 के नियमों से आज जिला आयोग में वे शिकायतें जाती हैं जिनमें वस्तु या सेवा के बदले चुकाई गई क़ीमत 50 लाख रुपए तक हो; राज्य आयोग में 50 लाख से ज़्यादा और 2 करोड़ रुपए तक; और राष्ट्रीय आयोग में 2 करोड़ रुपए से ज़्यादा। स्रोत: PIB, 30 दिसंबर 2021 (अंग्रेज़ी में)
- कसौटी चुकाई गई क़ीमत है: आयोग इससे तय होता है कि वस्तु या सेवा के बदले कितना चुकाया गया, इससे नहीं कि मुआवज़ा कितना माँगा गया। किताब “दावों” की बात करती है; आज का नियम चुकाई गई क़ीमत देखता है।
- परीक्षा में: किताब वाली सीमाएँ ही लिखवाइए: 1 करोड़ तक, 1 से 10 करोड़, 10 करोड़ से ऊपर। नई सीमाएँ आपकी समझ के लिए और किसी असली शिकायत के लिए हैं।
- फ़ीस: जिस शिकायत में चुकाई गई क़ीमत 5 लाख रुपए तक हो, उस पर कोई फ़ीस नहीं लगती। 17 अगस्त 2023 की फ़ीस-तालिका में भी “पांच लाख रुपये तक” के आगे “शून्य” लिखा है। स्रोत: PIB, 20 जुलाई 2020 (अंग्रेज़ी में); राजपत्र में फ़ीस-तालिका, 17 अगस्त 2023
- ई-जागृति (e-Jagriti) पोर्टल: उपभोक्ता मामले विभाग ने इसे 1 जनवरी 2025 को शुरू किया। यह पहले से चल रहे अलग-अलग ऐप्लिकेशन (OCMS, e-Daakhil, NCDRC CMS, CONFONET) को एक ही मंच पर ले आता है। स्रोत: लोकसभा, अतारांकित प्रश्न 550 का उत्तर, 22 जुलाई 2026 (अंग्रेज़ी में)
- 2025 के मामले: संसद में सरकार के जवाब (22 जुलाई 2026) के अनुसार 2025 में 1,62,474 मामले दर्ज हुए और 1,50,197 निपटाए गए, और निपटारे की दर 2024 से बेहतर रही। जवाब यह नहीं बताता कि ये आँकड़े किन आयोगों के हैं, इसलिए इन्हें “देश भर के सभी आयोगों” के आँकड़े मत कहिए। स्रोत: लोकसभा, अतारांकित प्रश्न 550 का उत्तर (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: प्रकाश के फ़ॉर्म (पृष्ठ 83) पर “Value Rs. 4000/-” लिखा है। आज के नियमों में उनकी शिकायत किस आयोग में जाती, और क्या फ़ीस लगती?
उत्तर: जिला आयोग में। इस मामले में जो भी चुकाया गया, वह 50 लाख रुपए से बहुत कम है; और 5 लाख रुपए तक की शिकायत पर फ़ीस नहीं लगती। किताब की सीमाओं से भी यह जिला आयोग का ही मामला है (1 करोड़ तक)। परीक्षा में सीमाएँ किताब वाली ही लिखवाइए।
सवाल: रेजी के पिता ने 5,00,000 के मुआवज़े का दावा किया था (पृष्ठ 79)। आज ऐसा मामला किस आयोग में जाएगा, यह जानने के लिए कौन-सी रक़म देखनी होगी?
उत्तर: इलाज के बदले अस्पताल को चुकाई गई रक़म, माँगा गया मुआवज़ा नहीं। किताब में यह रक़म नहीं दी गई, इसलिए यहाँ आयोग का नाम तय नहीं किया जा सकता। बच्चों के लिए सीख यही है: आज आयोग चुकाई गई क़ीमत से तय होता है।
सवाल: 2025 में 1,62,474 मामले दर्ज हुए और 1,50,197 निपटाए गए। क्या इन्हें घटाकर बता सकते हैं कि कितने मामले अटके पड़े हैं?
उत्तर: नहीं। 2025 में निपटाए गए मामलों में पिछले सालों में दर्ज मामले भी हो सकते हैं, और जवाब यह भी नहीं बताता कि गिनती किन आयोगों की है। दोनों संख्याएँ अलग-अलग पढ़िए: एक बताती है कितने मामले आए, दूसरी कितने निपटे।
हेल्पलाइन: 1915 और 1800-11-4000
किताब कहाँ रुकती है। किताब के मुख्य पाठ में हेल्पलाइन का कोई नंबर नहीं है। पृष्ठ 84 और 85 के पोस्टरों पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का नंबर 1800-11-4000 और वेबसाइट www.core.nic.in छपे हैं; पृष्ठ 84 के पोस्टर पर समय “Monday to Saturday 9:30 am to 5:30 pm” लिखा है। आज हेल्पलाइन की वेबसाइट पर यही 1800-11-4000 और छोटा नंबर 1915, दोनों दिए हैं; पोस्टर की वेबसाइट और समय बदल चुके हैं।
आज क्या है
- राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline): निःशुल्क नंबर 1915 या 1800-11-4000; हिंदी और अंग्रेज़ी समेत 17 भाषाओं में; व्हाट्सऐप (WhatsApp) नंबर 8800001915। 22 जुलाई 2026 के उत्तर के अनुसार 1,853 कंपनियाँ अपनी मर्ज़ी से हेल्पलाइन की साझेदार बनी हैं (“Convergence” कार्यक्रम)। स्रोत: लोकसभा, अतारांकित प्रश्न 550 का उत्तर, 22 जुलाई 2026 (अंग्रेज़ी में); राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन, संपर्क (अंग्रेज़ी में)
- समय: सुबह 8 से रात 8 बजे तक, हफ़्ते के सातों दिन, राष्ट्रीय अवकाश के दिनों को छोड़कर। स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग का वर्ष के अंत का दस्तावेज़, जनवरी 2026 (अंग्रेज़ी में)
- राजस्थान की राज्य हेल्पलाइन अलग है; उसका नंबर नीचे राजस्थान वाले हिस्से में है।
- कक्षा में दिखाने के लिए: उपभोक्ता मामले विभाग का वीडियो, हिंदी में: “जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता: NCH 1915 & e-Jagriti Portal से पाएं समाधान” (लगभग 2 मिनट)।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: पृष्ठ 84 के पोस्टर पर हेल्पलाइन का नंबर और समय छपा है। आज की राष्ट्रीय हेल्पलाइन का नंबर, समय और दिन क्या हैं?
उत्तर: पोस्टर पर 1800-11-4000 है, सोमवार से शनिवार, सुबह 9:30 से शाम 5:30 तक। आज यही नंबर और छोटा नंबर 1915, दोनों चलते हैं; समय सुबह 8 से रात 8 बजे तक, सातों दिन (राष्ट्रीय अवकाश छोड़कर), और व्हाट्सऐप नंबर 8800001915 भी है। किताब के पोस्टर से यह सीख निकलती है कि छपी हुई जानकारी (यहाँ समय और वेबसाइट) बदल सकती है, इसलिए हमेशा सरकारी वेबसाइट से मिलाइए।
सवाल: प्रकाश ने पहले पोस्ट-ऑफ़िस से पूछताछ की, फिर क्षेत्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद् में सलाह लेने गए (पृष्ठ 83)। आज किसी उपभोक्ता के पास कौन-सा नंबर है, जिस पर वह अपनी भाषा में बात कर सके?
उत्तर: राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915, जो हिंदी और अंग्रेज़ी समेत 17 भाषाओं में है; व्हाट्सऐप पर 8800001915। राजस्थान में राज्य की हेल्पलाइन 1800-180-6030 भी है।
मानक चिह्न: ISI, एगमार्क, हॉलमार्क और +F
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 85 के बॉक्स “आई.एस.आई और एगमार्क” में किताब बताती है कि आई.एस.आई, एगमार्क और हॉलमार्क जैसे चिह्न अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद करते हैं, और एल.पी.जी. सिलिंडर, खाद्य रंग, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल जैसे कुछ उत्पादों के लिए प्रमाण लेना अनिवार्य है। उसी बॉक्स में +F का चिह्न भी छपा है, और पृष्ठ 87 के अभ्यास 12 में “फूड फोर्टिफिकेशन” का मिलान “खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना” से होता है। पृष्ठ 88 के सही-ग़लत वाले अभ्यास में कथन है: “हॉलमार्क, आभूषणों की गुणवत्ता बनाए रखनेवाला प्रमाण है।” गहने का हॉलमार्क कैसे जाँचें, यह किताब नहीं बताती।
आज क्या है
- HUID: हॉलमार्किंग की अनोखी पहचान (Hallmark Unique ID, HUID) 6 अक्षरों-अंकों का एक कोड है, जो सोने के हर गहने पर लगाया जाता है। 1 अप्रैल 2023 से BIS में पंजीकृत जौहरी केवल HUID वाले हॉलमार्क गहने ही बेच सकते हैं। स्रोत: PIB विज्ञप्ति (अंग्रेज़ी में)
- जाँच कैसे करें: ख़रीदार BIS CARE ऐप में “Verify HUID” से HUID जाँच सकता है। 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 तक 60 करोड़ से ज़्यादा सोने की वस्तुओं पर HUID लग चुका था। स्रोत: PIB, 13 मार्च 2026 (अंग्रेज़ी में)
- कितने ज़िलों में अनिवार्य: 3 अगस्त 2026 के आदेश (आठवाँ चरण, 7 ज़िले) के बाद सोने के गहनों की अनिवार्य हॉलमार्किंग 392 ज़िलों में है। स्रोत: BIS, चरणवार ज़िलों की सूची (अंग्रेज़ी में); BIS, आठवें चरण की अधिसूचना (अंग्रेज़ी में)
- फ़ोर्टिफ़ाइड खाद्य: FSSAI की फ़ोर्टिफ़िकेशन वेबसाइट पाँच फ़ोर्टिफ़ाइड मुख्य खाद्य गिनाती है: डबल फ़ोर्टिफ़ाइड नमक, दूध, खाने का तेल, चावल और गेहूँ का आटा। वेबसाइट पर “+F Logo Endorsement” नाम का एक हिस्सा भी है। स्रोत: FSSAI फ़ोर्टिफ़िकेशन वेबसाइट (अंग्रेज़ी में)
- कक्षा में दिखाने के लिए: उपभोक्ता मामले विभाग का वीडियो, हिंदी में: “Buying Gold Jewellery? Check Hallmark, Purity & HUID Code” (1 मिनट से कम)।
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: किताब (पृष्ठ 85) कहती है कि हॉलमार्क जैसे चिह्न अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। आज सोने का गहना ख़रीदते समय चिह्न के अलावा और क्या देखेंगे?
उत्तर: गहने पर लगा 6 अक्षरों-अंकों का HUID, और फिर उसे BIS CARE ऐप में “Verify HUID” से जाँचना। 1 अप्रैल 2023 से BIS में पंजीकृत जौहरी केवल HUID वाले हॉलमार्क गहने ही बेच सकते हैं। यह बात बच्चे घर पर भी बता सकते हैं।
सवाल: पृष्ठ 86 का अभ्यास 5 पूछता है कि बाज़ार में बहुत-सी वस्तुएँ बिना आई.एस.आई. या एगमार्क के क्यों हैं। किताब इसका उत्तर कहाँ देती है?
उत्तर: पृष्ठ 85 के बॉक्स में। संगठन बहुत से उत्पादों के लिए मानदंड बनाते हैं, “लेकिन सभी उत्पादकों का इन मानदण्डों का पालन करना जरूरी नहीं होता”। प्रमाण केवल उन कुछ उत्पादों के लिए अनिवार्य है जो सुरक्षा और स्वास्थ्य पर असर डालते हैं या बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, जैसे एल.पी.जी. सिलिंडर, सीमेंट और बोतलबंद पेयजल। गहनों की अनिवार्य हॉलमार्किंग भी आज 392 ज़िलों में है; आपका ज़िला उसमें है या नहीं, यह BIS की सूची में देखिए।
सवाल: किताब के अनुसार फूड फोर्टिफिकेशन क्या है, और FSSAI किन मुख्य खाद्यों को फ़ोर्टिफ़ाइड गिनाता है?
उत्तर: किताब (पृष्ठ 87) के अनुसार “खाद्य पदार्थ में मुख्य पोषक तत्वों को मिलाना”। FSSAI की वेबसाइट पाँच फ़ोर्टिफ़ाइड मुख्य खाद्य गिनाती है: डबल फ़ोर्टिफ़ाइड नमक, दूध, खाने का तेल, चावल और गेहूँ का आटा।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस और विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 86 पर: “24 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है। 1986 में इसी दिन भारतीय संसद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पारित किया था।” हर साल का विषय (theme), और 15 मार्च के विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस की बात, किताब नहीं करती।
आज क्या है
- राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस, 2025: PIB के अनुसार 24 दिसंबर का दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के बनने की याद में मनाया जाता है। 2025 का विषय था “Efficient and Speedy Disposal through Digital Justice”, यानी डिजिटल न्याय से कुशल और तेज़ निपटारा। स्रोत: PIB, 24 दिसंबर 2025 (अंग्रेज़ी में)
- विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस (World Consumer Rights Day): 15 मार्च 2026 के लिए उपभोक्ता इंटरनेशनल का विषय था “Safe Products, Confident Consumers”, मोटे तौर पर: सुरक्षित उत्पाद, भरोसे से ख़रीदने वाले उपभोक्ता। स्रोत: Consumers International, विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2026 (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: 2025 के राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस का विषय तेज़ निपटारे के बारे में था। किताब की कौन-सी बात इससे जुड़ती है?
उत्तर: पृष्ठ 86 पर किताब कहती है कि उपभोक्ता निवारण प्रक्रिया “जटिल, खर्चीली और समय साध्य” साबित हो रही है, और मुकदमे आयोग की कार्यवाहियों में काफ़ी समय लेते हैं। पृष्ठ 82 पर किताब इंटरनेट से शिकायत और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की बात भी करती है; आज का ई-जागृति पोर्टल (ऊपर आयोगों वाला हिस्सा देखिए) इसी डिजिटल रास्ते से जुड़ता है।
सवाल: 2026 के विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का विषय सुरक्षित उत्पादों पर था। किताब में सुरक्षा के अधिकार के कौन-से उदाहरण हैं?
उत्तर: रेजी का कष्ट (पृष्ठ 79), और प्रेशर कूकर का सेफ़्टी वॉल्व, जिसकी उच्च गुणवत्ता उसके निर्माता को सुनिश्चित करनी चाहिए। उसी पृष्ठ की गतिविधि में एल.पी.जी. सिलेंडर, सिनेमा थिएटर, सर्कस, दवाइयाँ और खाद्य तेल जैसे उदाहरण भी हैं।
राजस्थान की कड़ी: CUTS, राज्य हेल्पलाइन और आयोग
किताब कहाँ रुकती है। पृष्ठ 74 के शिक्षक-निर्देश में किताब दो वेबसाइटें सुझाती है; दूसरी www.cuts-international.org है, जो “भारत में लगभग चालीस वर्षों से अधिक समय से काम कर रही उपभोक्ता संगठन की वेबसाइट है।” यह संगठन कहाँ से शुरू हुआ, यह किताब नहीं बताती। पृष्ठ 86 का अभ्यास 2 कहता है: “अपने क्षेत्र के निकटतम उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का पता करें।”
आज क्या है
- CUTS की शुरुआत: CUTS International की वेबसाइट के अनुसार उसका सफ़र 1983 में राजस्थान में ग्रामीण विकास के संचार के एक प्रयास से शुरू हुआ: एक दीवार-अख़बार, Gram Gadar (Village Revolution), यानी “ग्राम गदर”। जयपुर में उसका पता है: डी-217, भास्कर मार्ग, बनी पार्क, जयपुर 302016। स्रोत: CUTS International (अंग्रेज़ी में); CUTS, संपर्क (अंग्रेज़ी में)
- राज्य उपभोक्ता हेल्पलाइन: निःशुल्क नंबर 1800-180-6030, व्हाट्सऐप नंबर 7230086030; समय सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 5 बजे तक। स्रोत: उपभोक्ता मामले विभाग, राजस्थान सरकार
- राज्य और ज़िला आयोग: राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग जयपुर में है, और अजमेर, भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर में उसकी सर्किट बेंच (circuit bench) हैं। ज़िला आयोग 37 हैं; सरकारी सूची में जयपुर के 1 से 4 और जोधपुर के 1 और 2 आयोग अलग-अलग गिने गए हैं। स्रोत: राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, राजस्थान
- हॉलमार्किंग में राजस्थान: BIS की सूची के अनुसार छठे चरण (2 मार्च 2026) में ब्यावर और सातवें चरण (28 अप्रैल 2026) में कोटपूतली-बहरोड़ भी अनिवार्य हॉलमार्किंग में जुड़े। स्रोत: BIS, चरणवार ज़िलों की सूची (अंग्रेज़ी में)
कक्षा में कैसे पूछें
सवाल: पृष्ठ 86 का अभ्यास 2 कहता है कि अपने क्षेत्र का निकटतम उपभोक्ता आयोग पता करें। राजस्थान में यह कैसे करवाएँगे?
उत्तर: राज्य आयोग की वेबसाइट पर ज़िला आयोगों की सूची में बच्चे अपना ज़िला ढूँढें और कक्षा में बताएँ। ध्यान दिलाइए कि जयपुर और जोधपुर में एक से ज़्यादा ज़िला आयोग हैं (जयपुर 1 से 4, जोधपुर 1 और 2), इसीलिए गिनती 37 है।
सवाल: CUTS की शुरुआत एक दीवार-अख़बार से हुई। किताब के अनुसार उपभोक्ता आंदोलन किस बात से प्रभावी होता है?
उत्तर: पृष्ठ 87 पर किताब कहती है कि “उपभोक्ताओं की सक्रिय भागीदारी से ही उपभोक्ता आंदोलन प्रभावी हो सकता है”, और इसके लिए स्वैच्छिक प्रयास और सबकी साझेदारी चाहिए। गाँव की दीवार पर लगा एक अख़बार ऐसे ही स्वैच्छिक प्रयास का उदाहरण है। पृष्ठ 88 की परियोजना 3 भी विद्यालय में उपभोक्ता क्लब बनाने को कहती है।
सवाल: राजस्थान की राज्य हेल्पलाइन और राष्ट्रीय हेल्पलाइन, दोनों के नंबर और समय क्या हैं?
उत्तर: राज्य हेल्पलाइन: 1800-180-6030 (व्हाट्सऐप 7230086030), सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 5 बजे तक। राष्ट्रीय हेल्पलाइन: 1915 (व्हाट्सऐप 8800001915), सुबह 8 से रात 8 बजे तक, सातों दिन, राष्ट्रीय अवकाश छोड़कर।