अध्याय 3बंधुत्व, जाति तथा वर्ग

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NCERT, भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग I (कक्षा 12), विषय 3

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सेट 1 — महाभारत और उसका समालोचनात्मक संस्करण (कार्ड 1–12)

#प्रश्नउत्तर
★1NCERT कक्षा 12 इतिहास के “बंधुत्व, जाति तथा वर्ग” अध्याय (आरंभिक समाज) में उपमहाद्वीप के किस काल का अध्ययन किया जाता है?लगभग 600 ई.पू. से 600 ईसवी तक (पृष्ठ 53)
★2इतिहासकार किसी ग्रंथ (या अभिलेख) को समाज के इतिहास के लिए स्रोत बनाते हैं, तो अध्याय के अनुसार उन्हें कौन-सी तीन बातें याद रखनी ज़रूरी हैं?ग्रंथ किसने लिखा, क्या लिखा गया और किनके लिए उसकी रचना हुई। साथ ही यह भी देखना है कि किस भाषा का प्रयोग हुआ और प्रचार-प्रसार किस तरह हुआ (पृष्ठ 53)
★★3महाभारत अपने वर्तमान रूप में कितने श्लोकों से अधिक का महाकाव्य है, और इसकी रचना कितने समय तक होती रही?एक लाख श्लोकों से अधिक का; रचना एक हज़ार वर्ष तक होती रही (लगभग 500 ई.पू. से) (पृष्ठ 53)
4महाभारत की मुख्य कथा किसका चित्रण है, और इस ग्रंथ के कुछ भाग क्या तय करते हैं?मुख्य कथा दो परिवारों के बीच युद्ध का चित्रण है; कुछ भाग विभिन्न सामाजिक समुदायों के आचार-व्यवहार के मानदंड तय करते हैं (पृष्ठ 53)
★★5महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने की परियोजना किस वर्ष शुरू हुई और उसका नेतृत्व किस विद्वान ने किया?1919 में, प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान वी.एस. सुकथांकर के नेतृत्व में (पृष्ठ 54)
6समालोचनात्मक संस्करण की परियोजना में विद्वानों ने आरंभ में सबसे पहले कौन-सा काम किया?देश के विभिन्न भागों से विभिन्न लिपियों में लिखी गई महाभारत की संस्कृत पांडुलिपियाँ एकत्रित कीं (पृष्ठ 54)
★7समालोचनात्मक संस्करण के विद्वानों ने सभी पांडुलिपियों के श्लोकों की तुलना करके किन श्लोकों का चयन करके उन्हें प्रकाशित किया?उन श्लोकों का जो लगभग सभी पांडुलिपियों में पाए गए थे (पृष्ठ 54)
★★8समालोचनात्मक संस्करण कितने पृष्ठों में फैले ग्रंथ खंडों में छपा, और परियोजना को पूरा करने में कितने वर्ष लगे?13,000 पृष्ठों में फैले अनेक ग्रंथ खंडों में; सैंतालीस वर्ष लगे (पृष्ठ 54)
★9समालोचनात्मक संस्करण की तैयारी में पांडुलिपियों की जाँच से पहली बात क्या उभरी, और यह समानता कहाँ से कहाँ तक की पांडुलिपियों में दिखी?संस्कृत के कई पाठों के अनेक अंशों में समानता थी; उत्तर में कश्मीर और नेपाल से दक्षिण में केरल और तमिलनाडु तक सभी पांडुलिपियों में (पृष्ठ 54)
★10! समालोचनात्मक संस्करण में महाभारत के क्षेत्रीय प्रभेदों का संकलन किस रूप में किया गया, और 13,000 पृष्ठों में से कितने पृष्ठ इन प्रभेदों का ब्योरा देते हैं?मुख्य पाठ की पादटिप्पणियों और परिशिष्टों के रूप में; 13,000 पृष्ठों में से आधे से भी अधिक पृष्ठ प्रभेदों का ब्योरा देते हैं (पृष्ठ 54)
11सामाजिक इतिहास की हमारी समझ मुख्यत: किन ग्रंथों पर आधारित है, और वे किसने तथा किनके लिए लिखे?संस्कृत के उन ग्रंथों पर जो ब्राह्मणों द्वारा उन्हीं के लिए लिखे गए (पृष्ठ 54)
★12पालि, प्राकृत और तमिल ग्रंथों के अध्ययन से आदर्शमूलक संस्कृत ग्रंथों के बारे में इतिहासकारों को क्या स्पष्ट हुआ?ये संस्कृत ग्रंथ आमतौर से आधिकारिक माने जाते थे, किंतु इन आदर्शों को प्रश्नवाचक दृष्टि से भी देखा जाता था और कभी-कभी इनकी अवहेलना भी की जाती थी (पृष्ठ 54)

सेट 2 — बंधुता और पितृवंशिकता (कार्ड 13–25)

#प्रश्नउत्तर
★13आरंभिक समाजों के इतिहास में इतिहासकारों को किस तरह के परिवारों की जानकारी आसानी से मिल जाती है, और किसे पुनर्निर्मित करना मुश्किल होता है?विशिष्ट परिवारों की जानकारी आसानी से मिल जाती है; सामान्य लोगों के पारिवारिक संबंधों को पुनर्निर्मित करना मुश्किल हो जाता है (पृष्ठ 55)
★14संस्कृत ग्रंथों में परिवार के लिए कौन-सा शब्द इस्तेमाल होता है, और बांधवों के बड़े समूह के लिए कौन-सा?परिवार के लिए कुल, बांधवों के बड़े समूह के लिए ज्ञाति (हिंदी किताब के बॉक्स में यहाँ ‘जाति’ छपा है; यह ज्ञाति है, वर्ण व्यवस्था वाली जाति नहीं)। पीढ़ी-दर-पीढ़ी किसी कुल के पूर्वज इकट्ठे रूप में एक ही वंश के माने जाते हैं (पृष्ठ 55)
★15पितृवंशिकता और मातृवंशिकता का क्या अर्थ है?पितृवंशिकता: वह वंश परंपरा जो पिता के पुत्र, फिर पौत्र, प्रपौत्र आदि से चलती है। मातृवंशिकता: जहाँ वंश परंपरा माँ से जुड़ी होती है (पृष्ठ 55)
★★16महाभारत में भूमि और सत्ता के लिए किन दो दलों में संघर्ष हुआ, वे किस वंश से थे, और युद्ध में कौन विजयी हुए?कौरव और पांडव (बांधवों के दो दल); दोनों कुरु वंश से थे, जिसका एक जनपद पर शासन था; युद्ध में पांडव विजयी हुए (पृष्ठ 55)
★17! क्या पितृवंशिकता का आदर्श महाभारत की रचना से शुरू हुआ? किताब क्या कहती है?नहीं। पितृवंशिकता महाकाव्य की रचना से पहले भी मौजूद थी; महाभारत की मुख्य कथावस्तु ने इस आदर्श को और सुदृढ़ किया (पृष्ठ 55)
18पितृवंशिकता में पिता की मृत्यु के बाद पुत्र किन चीज़ों पर अधिकार जमा सकते थे?पिता के संसाधनों पर, और राजाओं के संदर्भ में सिंहासन पर भी (पृष्ठ 55)
★19लगभग किस समय से अधिकतर राजवंश पितृवंशिकता का अनुसरण करते थे, और पुत्र के न होने पर क्या होता था?लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से; पुत्र के न होने पर कभी एक भाई दूसरे का उत्तराधिकारी हो जाता था, तो कभी बंधु-बांधव सिंहासन पर अपना अधिकार जमाते थे (पृष्ठ 55, 56)
20पितृवंशिकता के बीच भी कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में सत्ता का उपभोग करने वाली स्त्री का कौन-सा उदाहरण किताब देती है?प्रभावती गुप्त (जिनके बारे में अध्याय 2 में पढ़ा गया) (पृष्ठ 56)
★★21ऋग्वेद का वह मंत्र (स्रोत 1) जो विवाह संस्कार में पुरोहित पढ़ता था, संभवत: लगभग किस समय इस ग्रंथ में जोड़ा गया था?संभवत: लगभग 1000 ई.पू. में जोड़ा गया; आज भी अनेक हिंदू विवाह संस्कारों में इसका प्रयोग होता है (पृष्ठ 56)
★22ऋग्वेद के विवाह-मंत्र (स्रोत 1) में वधू के लिए क्या कामना की गई है, और मंत्र में ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ से क्या तात्पर्य है?इंद्र के अनुग्रह से उसके उत्तम पुत्र हों और पति के प्रेम का सौभाग्य उसे प्राप्त हो; ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ से तात्पर्य पिता और पति के गृह से है (पृष्ठ 56)
★23महाभारत के आदिपर्वन् (स्रोत 2) के अनुसार नेत्रहीन धृतराष्ट्र के होते हुए हस्तिनापुर के सिंहासन पर पहले कौन बैठा, और पांडु की असामयिक मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र राजा क्यों बने?पहले उनके अनुज पांडु सिंहासन पर आसीन हुए; पांडु की मृत्यु के बाद धृतराष्ट्र राजा बने, क्योंकि सभी राजकुमार अल्पवयस्क थे (पृष्ठ 57)
★★24आदिपर्वन् (स्रोत 2) में दुर्योधन ने पिता धृतराष्ट्र से क्या कहा, यानी पांडवों को पांडु से विरासत मिलने पर उसे किस बात का डर था?कि पांडव विरासत पाएँगे तो उनके पुत्र, पौत्र और प्रपौत्र इस पैतृक संपत्ति के अधिकारी हो जाएँगे, और कौरव तथा उनके पुत्र राज्य के उत्तराधिकार से बेदखल होकर संसार में क्षुद्र समझे जाएँगे (पृष्ठ 57)
25महाभारत के आदिपर्वन् के ऐसे उद्धरण (जैसे स्रोत 2) अक्षरश: सत्य न भी हों, तो भी किताब के अनुसार उनसे इतिहासकार को क्या पता चलता है?कि जिन लोगों ने महाभारत लिखा वे क्या सोचते थे; और कभी-कभी प्रकरणों में परस्पर विरोधी विचार भी मिलते हैं (पृष्ठ 57)

सेट 3 — विवाह के नियम और ब्राह्मणीय आचार संहिताएँ (कार्ड 26–39)

#प्रश्नउत्तर
★26पितृवंश में पुत्र महत्वपूर्ण थे; ऐसी व्यवस्था में पुत्रियों के विवाह के बारे में क्या अपेक्षित था, और इस प्रथा को क्या कहते हैं?अपने गोत्र से बाहर उनका विवाह कर देना अपेक्षित था; इस प्रथा को बहिर्विवाह पद्धति कहते हैं (पृष्ठ 57)
27बहिर्विवाह पद्धति में ऊँची प्रतिष्ठा वाले परिवारों की कम उम्र की कन्याओं और स्त्रियों का जीवन कैसे नियमित किया जाता था, और किसलिए?बहुत सावधानी से, जिससे ‘उचित’ समय और ‘उचित’ व्यक्ति से उनका विवाह किया जा सके (पृष्ठ 57)
★28पितृवंश में कन्यादान का क्या अर्थ है, और इसे किसका कर्तव्य माना गया?कन्यादान अर्थात् विवाह में कन्या की भेंट; इसे पिता का महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य माना गया (पृष्ठ 57)
★★29! अंतर्विवाह और बहिर्विवाह में क्या अंतर है?अंतर्विवाह: वैवाहिक संबंध समूह के मध्य ही होते हैं (समूह एक गोत्र कुल अथवा जाति या एक ही स्थान पर बसने वालों का हो सकता है)। बहिर्विवाह: गोत्र से बाहर विवाह (पृष्ठ 57)
30बहुपत्नी प्रथा और बहुपति प्रथा में क्या अंतर है?बहुपत्नी प्रथा: एक पुरुष की अनेक पत्नियाँ होने की सामाजिक परिपाटी। बहुपति प्रथा: एक स्त्री के अनेक पति होने की पद्धति (पृष्ठ 57)
★31नए नगरों में निकट और दूर से आकर लोग मिलते थे और विचारों का भी आदान-प्रदान होता था; इस चुनौती के जवाब में ब्राह्मणों ने समाज के लिए क्या तैयार किया?विस्तृत आचार संहिताएँ। ब्राह्मणों को इनका विशेष पालन करना होता था, किंतु बाकी समाज को भी इनका अनुसरण करना पड़ता था (पृष्ठ 57, 58)
★★32ब्राह्मणीय मानदंडों का संकलन लगभग 500 ई.पू. से किन संस्कृत ग्रंथों में हुआ, और इनमें सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ कौन-सा था?धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र में; सबसे महत्वपूर्ण मनुस्मृति थी, जिसका संकलन लगभग 200 ई.पू. से 200 ईसवी के बीच हुआ (पृष्ठ 58)
★33धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र के ब्राह्मण लेखक अपना दृष्टिकोण सार्वभौमिक मानते थे; फिर उपमहाद्वीप में ब्राह्मणों का प्रभाव सार्वभौमिक क्यों नहीं था?उपमहाद्वीप में फैली क्षेत्रीय विभिन्नता और संचार की बाधाओं की वजह से; वास्तविक सामाजिक संबंध कहीं अधिक जटिल थे (पृष्ठ 58)
★★34धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र विवाह के कितने प्रकारों को स्वीकृति देते हैं, और उनमें से कौन-से ‘उत्तम’ माने जाते थे?आठ प्रकारों को; इनमें से पहले चार ‘उत्तम’ माने जाते थे और बाकियों को निंदित माना गया (पृष्ठ 58)
35धर्मसूत्र और धर्मशास्त्र में विवाह के जिन प्रकारों को निंदित माना गया, उनके बारे में किताब क्या अनुमान लगाती है?संभव है कि ये विवाह पद्धतियाँ उन लोगों में प्रचलित थीं जो ब्राह्मणीय नियमों को अस्वीकार करते थे (पृष्ठ 58)
36मनुस्मृति के स्रोत 3 के अनुसार विवाह की पहली पद्धति में कन्या का दान कैसे किया जाता है?कन्या को बहुमूल्य वस्त्रों और अलंकारों से विभूषित कर उसे वेदज्ञ वर को दान दिया जाए, जिसे पिता ने स्वयं आमंत्रित किया हो (पृष्ठ 58)
37मनुस्मृति के स्रोत 3 की विवाह की चौथी पद्धति में पिता वर-वधू युगल को क्या कहकर संबोधित करता है?“तुम साथ मिलकर अपने दायित्वों का पालन करो।” इसके बाद वह वर का सम्मान कर उसे कन्या का दान करता है (पृष्ठ 58)
38मनुस्मृति के स्रोत 3 की विवाह की पाँचवीं पद्धति में वर को वधू की प्राप्ति कब होती है?जब वह अपनी क्षमता व इच्छानुसार वधू के बांधवों को और स्वयं वधू को यथेष्ट धन प्रदान करता है (पृष्ठ 58)
39मनुस्मृति के स्रोत 3 की विवाह की छठी पद्धति में विवाह का आधार क्या बताया गया है?स्त्री और पुरुष के बीच अपनी इच्छा से संयोग, जिसकी उत्पत्ति काम से है (पृष्ठ 58)

सेट 4 — गोत्र और सातवाहन (कार्ड 40–52)

#प्रश्नउत्तर
★40लगभग 1000 ई.पू. के बाद प्रचलन में आई ब्राह्मणीय पद्धति में लोगों (खासतौर से ब्राह्मणों) को किसमें वर्गीकृत किया जाता था, और प्रत्येक के नाम का आधार क्या था?गोत्रों में; प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था और उस गोत्र के सदस्य ऋषि के वंशज माने जाते थे (पृष्ठ 58)
★★41गोत्रों के दो महत्वपूर्ण नियम कौन-से थे?(1) विवाह के पश्चात स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति के गोत्र का माना जाता था; (2) एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे (पृष्ठ 58)
★42सातवाहन राजा किन क्षेत्रों पर और लगभग किस काल में शासन करते थे, और इतिहासकारों ने उनके पारिवारिक तथा वैवाहिक रिश्तों का खाका किसके आधार पर तैयार किया?पश्चिमी भारत और दक्कन के कुछ भागों पर, लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. से दूसरी शताब्दी ईसवी तक; खाका सातवाहनों के कई अभिलेखों के आधार पर तैयार हुआ (पृष्ठ 58)
★43अभिलेखों से मिले सातवाहन राजाओं के नामों में ‘राजा’ के बाद एक शब्द आता है जिसका अंत ‘पुत्त’ से होता है। यह शब्द किस भाषा का है और उसका अर्थ क्या है?यह एक प्राकृत शब्द है जिसका अर्थ ‘पुत्र’ है; गोतमी–पुत्त का अर्थ है ‘गोतमी का पुत्र’ (पृष्ठ 59)
44स्रोत 4 के सातवाहन नामों में गोतमी और वसिथि क्या हैं?स्त्रीवाची नाम, गौतम और वशिष्ठ के; ये दोनों वैदिक ऋषि थे जिनके नाम से गोत्र हैं (पृष्ठ 59)
45बृहदारण्यक उपनिषद (आरंभिक उपनिषदों में से एक) में आचार्यों और शिष्यों की पीढ़ियों की सूची में कई लोगों को किस तरह निर्दिष्ट किया गया है?उनके मातृनामों से (पृष्ठ 59)
★46सातवाहन राजाओं को किस प्रकार के नाम से चिह्नित किया जाता था?मातृनाम से, यानी माता के नाम से उद्भूत नाम से (पृष्ठ 60)
★★47! ब्राह्मणीय व्यवस्था में विवाह के बाद स्त्री से कौन-सा गोत्र अपनाने की अपेक्षा थी, और सातवाहन राजाओं की रानियों ने क्या किया?अपेक्षा थी पति कुल का गोत्र ग्रहण करने की; रानियों के नाम गौतम तथा वसिष्ठ गोत्रों से उद्भूत थे, जो उनके पिता के गोत्र थे, यानी उन्होंने पिता का गोत्र नाम ही कायम रखा (पृष्ठ 60)
★48कुछ सातवाहन राजा बहुपत्नी प्रथा को मानते थे; उनकी कुछ रानियाँ एक ही गोत्र से थीं। यह तथ्य किस नियम के विरुद्ध था, और किस वैकल्पिक प्रथा को दर्शाता है?बहिर्विवाह के नियमों के विरुद्ध था; यह अंतर्विवाह (बंधुओं में विवाह संबंध) को दर्शाता है, जिसका प्रचलन दक्षिण भारत के कई समुदायों में भी है (पृष्ठ 60)
49दक्षिण भारत के कई समुदायों में बांधवों (ममेरे, चचेरे इत्यादि भाई–बहन) के साथ जोड़े गए विवाह संबंधों से क्या लाभ होता था?इनकी वजह से एक सुगठित समुदाय उभर पाता था (पृष्ठ 60)
★★50! सातवाहन राजाओं को मातृनाम से चिह्नित किया जाता था। क्या इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि उनका सिंहासन माता के वंश से चलता था?नहीं। मातृनाम से लगता है कि माताएँ महत्वपूर्ण थीं, किंतु निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले सावधानी ज़रूरी है: सातवाहन राजाओं के संदर्भ में सिंहासन का उत्तराधिकार पितृवंशिक होता था (पृष्ठ 60)
51चित्र 3.4 (एक युद्ध का दृश्य) किस चीज़ के सबसे प्राचीन मूर्ति चित्रणों में से एक है, यह कहाँ मिला और लगभग किस काल का है?महाभारत के दृश्यों के सबसे प्राचीन मूर्ति चित्रणों में से एक; मिट्टी की यह मूर्ति अहिच्छत्र (उत्तर प्रदेश) के एक मंदिर की दीवार पर उत्कीर्ण है, लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी की (पृष्ठ 60)
★52महाभारत में कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध अवश्यंभावी होने पर गांधारी ने दुर्योधन से क्या विनती की (स्रोत 5), और दुर्योधन ने क्या किया?युद्ध न करने की विनती की; उन्होंने कहा कि “युद्ध में कुछ भी शुभ नहीं होता”। दुर्योधन ने माँ की सलाह नहीं मानी, वह युद्ध में लड़ा और हार गया (पृष्ठ 60)

सेट 5 — वर्ण और ‘उचित’ जीविका (कार्ड 53–62)

#प्रश्नउत्तर
★53धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में वर्णों को किस आधार पर निर्धारित किया गया था?उनकी योग्यता, कार्य तथा व्यवसाय के आधार पर, उनकी क्षमताओं और रुचियों के अनुसार (पृष्ठ 61)
★★54धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों के अनुसार ब्राह्मणों का मुख्य कर्तव्य क्या था?वेदों तथा अन्य शास्त्रों का अध्ययन और अध्यापन, यज्ञ करना और कराना, तथा दान देना और ग्रहण करना (पृष्ठ 61)
★55धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में क्षत्रियों का प्रमुख कार्य क्या बताया गया है?युद्ध करना, लोगों की रक्षा करना और न्याय संचालन करना; साथ ही वेदों और शास्त्रों का अध्ययन, यज्ञ कराना, दान देना और सामाजिक व्यवस्था को बनाए रखना (पृष्ठ 61)
★56धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में वैश्यों की जीविका क्या बताई गई है?कृषि, पशुपालन और व्यापार; इसके अतिरिक्त वे वेदों और अन्य शास्त्रों का अध्ययन करते, यज्ञ करते और कराते तथा दान देते थे (पृष्ठ 61)
★57धर्मसूत्रों और धर्मशास्त्रों में शूद्रों से क्या अपेक्षा की जाती थी?कि वे समाज के सुचारु संचालन में अन्य तीन वर्णों की सहायता करें (पृष्ठ 61)
★★58श्रीमद्भगवद् गीता जैसे ग्रंथ चार वर्णों की व्यवस्था के बारे में क्या संकेत करते हैं? ऐसे उल्लेख और कहाँ मिलते हैं?संकेत है कि यह व्यवस्था गुण (विशेषताएँ) और कर्म (कार्य) पर आधारित थी, न कि जन्म से निर्धारित किसी कठोर सामाजिक व्यवस्था पर; ऐसे उल्लेख बौद्ध परंपराओं में भी मिलते हैं (पृष्ठ 61)
★59ऋग्वेद के एक सूक्त (स्रोत 6) में वक्ता अपने परिवार के व्यवसायों के बारे में क्या कहता है, और इससे आरंभिक वैदिक समाज के बारे में क्या लगता है? बाद में क्या बदला?वक्ता स्वयं कवि है, उसके पिता वैद्य हैं और माता अन्न पीसने का कार्य करती हैं; इससे आरंभिक वैदिक समाज में व्यवसायों के संदर्भ में लचीलापन और गतिशीलता प्रतीत होती है (पृष्ठ 61)। बाद में ब्राह्मण स्वयं को “ब्रह्मा के मुख से जन्मे” बताकर श्रेष्ठता का दावा करने लगे (स्रोत 13, पृष्ठ 70), और बौद्धों ने जन्म के आधार पर सामाजिक प्रतिष्ठा को अस्वीकार किया (पृष्ठ 69)
★60महाभारत की कथा (स्रोत 7) में एकलव्य कौन था, और जब वह कुरु राजकुमारों के गुरु द्रोण के पास आया तो द्रोण ने क्या किया?एकलव्य वनवासी निषाद (शिकारी समुदाय) था; द्रोण ने उसे शिष्य के रूप में स्वीकार करने से मना कर दिया (पृष्ठ 62)
61महाभारत के आदिपर्वन् की कथा में द्रोण के मना करने पर एकलव्य ने क्या किया, और उसने अपनी तीरंदाज़ी का कौन-सा कमाल दिखाया?वन में लौटकर मिट्टी से द्रोण की प्रतिमा बनाई, उसे अपना गुरु मानकर स्वयं अभ्यास किया; क्रोधित होकर उसने एक साथ सात तीर चलाकर भौंकते कुत्ते का मुँह बंद कर दिया (पृष्ठ 62)
★62महाभारत के आदिपर्वन् की कथा में द्रोण ने गुरु दक्षिणा के रूप में एकलव्य से क्या माँगा, और इसका क्या परिणाम हुआ?उसके दाहिने हाथ का अँगूठा; एकलव्य ने फ़ौरन काटकर दे दिया और अब तीर चलाने में उतना तेज़ नहीं रहा। इस तरह द्रोण ने अर्जुन को दिया वचन निभाया: कोई भी अर्जुन से बेहतर धनुर्धारी नहीं रहा (पृष्ठ 62)

सेट 6 — अक्षत्रिय राजा (कार्ड 63–71)

#प्रश्नउत्तर
★63शास्त्रों के अनुसार कौन राजा हो सकते थे, और किताब के अनुसार अनेक महत्वपूर्ण राजवंशों की उत्पत्ति कहाँ से हुई थी?शास्त्रों के अनुसार केवल क्षत्रिय; किंतु अनेक महत्वपूर्ण राजवंशों की उत्पत्ति अन्य वर्णों से भी हुई थी (पृष्ठ 62)
★64मौर्य वंश के उद्भव को बाद के बौद्ध ग्रंथ और ब्राह्मणीय शास्त्र किस रूप में देखते हैं?बाद के बौद्ध ग्रंथों में संकेत है कि वे क्षत्रिय थे; ब्राह्मणीय शास्त्र उन्हें ‘निम्न’ कुल का मानते हैं। इस उद्भव पर गर्मजोशी से बहस होती रही है (पृष्ठ 62)
★65मौर्यों के उत्तराधिकारी शुंग और कण्व किस वर्ण के थे?ब्राह्मण (पृष्ठ 62)
★★66किताब के अनुसार राजनीतिक सत्ता का उपभोग कौन कर सकता था, और राजत्व किस पर निर्भर करता था?हर वह व्यक्ति जो समर्थन और संसाधन जुटा सके; राजत्व क्षत्रिय कुल में जन्म लेने पर शायद ही निर्भर करता था (पृष्ठ 62)
★67मध्य एशिया से भारत आए शक शासकों को ब्राह्मण क्या मानते थे?मलेच्छ, बर्बर अथवा अन्यदेशीय (पृष्ठ 62)
★68शक राजा रुद्रदामन (लगभग दूसरी शताब्दी ईसवी) के किस कार्य का वर्णन संस्कृत के संभवत: आरंभिक अभिलेखों में से एक में मिलता है, और इससे क्या ज्ञात होता है?सुदर्शन सरोवर के जीर्णोद्धार का; इससे ज्ञात होता है कि शक्तिशाली मलेच्छ संस्कृत की परिपाटी से अवगत थे (पृष्ठ 62, 63)
★★69सातवाहन कुल के सबसे प्रसिद्ध शासक गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि ने स्वयं को क्या बताया, और चार वर्णों के बीच विवाह संबंध के बारे में क्या दावा किया?स्वयं को अनूठा ब्राह्मण और साथ ही क्षत्रियों के दर्प का हनन करने वाला बताया; दावा किया कि चार वर्णों के बीच विवाह संबंध होने पर उसने रोक लगाई (पृष्ठ 63)
★★70सातवाहन शासक गोतमी-पुत्त सिरी-सातकनि ने चार वर्णों के बीच विवाह संबंध रोकने का दावा किया था। इसके बावजूद उसने किस परिवार से विवाह संबंध स्थापित किए?शक राजा रुद्रदामन के परिवार से (पृष्ठ 63)
★71! सातवाहन स्वयं को किस वर्ण का बताते थे, जबकि ब्राह्मणीय शास्त्र के अनुसार राजा को कौन-सा वर्ण होना चाहिए?सातवाहन स्वयं को ब्राह्मण वर्ण का बताते थे; शास्त्र के अनुसार राजा को क्षत्रिय होना चाहिए (पृष्ठ 63)

सेट 7 — जाति, श्रेणी और वणिक (कार्ड 72–80)

#प्रश्नउत्तर
★★72! समाज के वर्गीकरण के लिए शास्त्रों में आने वाले दो शब्द वर्ण और जाति में संख्या के हिसाब से क्या अंतर था, और जातियों की संख्या क्यों बढ़ती रही?वर्ण मात्र चार थे, जबकि जातियों की कोई निश्चित संख्या नहीं थी; समाज के नए सामाजिक समूहों और नए व्यवसायों से संपर्क में आने के साथ-साथ जातियों की संख्या निरंतर बढ़ती रही (पृष्ठ 63)
★73एक ही जीविका अथवा व्यवसाय से जुड़ी जातियों को कभी-कभी किसमें संगठित किया जाता था?श्रेणियों में (पृष्ठ 63)
★74मंदसौर (मध्य प्रदेश) से मिले लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी के अभिलेख में किन लोगों का वर्णन है, और वे मूलतः कहाँ के निवासी थे?रेशम के बुनकरों की एक श्रेणी का; वे मूलतः लाट (गुजरात) प्रदेश के निवासी थे और वहाँ से मंदसौर चले गए, जिसे उस समय दशपुर के नाम से जाना जाता था (पृष्ठ 63)
75मंदसौर के लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी के अभिलेख के अनुसार रेशम के बुनकर लाट से दशपुर क्यों गए, और यह कठिन यात्रा उन्होंने किनके साथ की?उन्होंने दशपुर के राजा की महानता के बारे में सुना था, इसलिए वे उसके राज्य में बसना चाहते थे; यात्रा अपने बच्चों और बांधवों के साथ की (पृष्ठ 63, 64)
★76मंदसौर के अभिलेख से रेशम बुनकरों की श्रेणी की सदस्यता के बारे में क्या पता चलता है?सदस्यता शिल्प में विशेषज्ञता पर निर्भर थी, पर कुछ सदस्य अन्य जीविका भी अपना लेते थे; सदस्य एक व्यवसाय के अतिरिक्त और चीज़ों में भी सहभागी होते थे (पृष्ठ 64)
★77मंदसौर के रेशम बुनकरों की श्रेणी ने शिल्पकर्म से अर्जित धन सामूहिक रूप से किस काम पर खर्च किया?सूर्य देवता के सम्मान में मंदिर बनवाने पर (पृष्ठ 64)
78मंदसौर के रेशम बुनकरों से जुड़े संस्कृत अभिलेख के अंश (स्रोत 8) में लोगों की किन-किन रुचियों और कुशलताओं का वर्णन है?कुछ को संगीत से अत्यंत प्रेम है; कुछ को सैकड़ों उत्तम जीवनियों (के रचयिता होने) का गर्व है; कुछ उत्तम धार्मिक व्याख्यानों में तल्लीन हैं; कुछ अपने धार्मिक अनुष्ठानों में श्रेष्ठ हैं; कुछ (वैदिक) खगोल शास्त्र में पारंगत हैं; अन्य युद्ध में शूरवीर हैं (पृष्ठ 64)
★79संस्कृत के ग्रंथों और अभिलेखों में व्यापारियों के लिए कौन-सा शब्द इस्तेमाल होता है, और शास्त्र व्यापार को किसकी जीविका बताते हैं?वणिक शब्द; शास्त्रों में व्यापार वैश्यों की जीविका बताया जाता है, पर अन्य स्रोतों में अधिक जटिल परिस्थिति देखने को मिलती है (पृष्ठ 64)
★80शूद्रक के नाटक मृच्छकटिकम् (लगभग चौथी शताब्दी ईसवी) में चारुदत्त को क्या बताया गया है, और पाँचवीं शताब्दी ईसवी के एक अभिलेख में दो भाइयों को क्या कहा गया है?चारुदत्त को ब्राह्मण–वणिक; अभिलेख में दो भाइयों को क्षत्रिय–वणिक कहा गया है, जिन्होंने एक मंदिर के निर्माण के लिए धन दिया (पृष्ठ 64)

सेट 8 — चार वर्णों के परे: एकीकरण (कार्ड 81–87)

#प्रश्नउत्तर
★81संस्कृत साहित्य में ब्राह्मणीय विचारों से अछूते समुदायों का उल्लेख आने पर उन्हें कई बार कैसा चित्रित किया जाता है, और किताब इसके उदाहरण के रूप में किन्हें रखती है?विचित्र, असभ्य और पशुवत; उदाहरण वन प्रांतर में बसने वाले लोग, जिनके लिए शिकार और कंद-मूल संग्रह जीवन-निर्वाह का महत्वपूर्ण साधन था, और निषाद वर्ग, जिससे एकलव्य जुड़ा माना जाता था (पृष्ठ 64)
82यायावर पशुपालकों के समुदाय को शंका की दृष्टि से क्यों देखा जाता था?क्योंकि उन्हें आसानी से बसे हुए कृषिकर्मियों के साँचे के अनुरूप नहीं ढाला जा सकता था (पृष्ठ 64)
★83असंस्कृत भाषा बोलने वाले लोगों को कभी-कभी क्या कहकर हेय दृष्टि से देखा जाता था?मलेच्छ कहकर (पृष्ठ 64, 65)
84ब्राह्मणीय समाज से अछूते समुदायों के लोगों के बीच विचारों और मतों के साथ क्या होता था, और उनके संबंधों के स्वरूप की जानकारी किताब के अनुसार कहाँ से मिलती है?विचारों और मतों का आदान-प्रदान होता था; उनके संबंधों के स्वरूप की जानकारी महाभारत की कथाओं से मिलती है (पृष्ठ 65)
★85महाभारत के आदिपर्वन् की कथा (स्रोत 9) में हिडिम्बा कौन थी, और उसने भीम के सामने क्या प्रस्ताव रखा?एक नरभक्षी राक्षस की बहन, जिसने उसे पांडवों को पकड़कर लाने भेजा था; वह भीम को देखकर मोहित हो गई और सुंदर स्त्री के वेष में उसने भीम से विवाह का प्रस्ताव किया, जिसे भीम ने अस्वीकार कर दिया (पृष्ठ 65)
★86भीम द्वारा हिडिम्बा के भाई का वध किए जाने के बाद युधिष्ठिर किस शर्त पर भीम और हिडिम्बा के विवाह के लिए तैयार हुए, और उनके पुत्र का नाम क्या था?शर्त यह थी कि भीम दिनभर हिडिम्बा के साथ रहकर रात्रि में पांडवों के पास आ जाएँगे; पुत्र का नाम घटोत्कच था, जिसने प्रण किया कि जब भी पांडवों को उसकी ज़रूरत होगी वह उपस्थित हो जाएगा (पृष्ठ 65)
★87कुछ इतिहासकारों के मत में राक्षस किन लोगों को कहा जाता था?उन लोगों को जिनके आचार-व्यवहार उन मानदंडों से भिन्न थे जिनका चित्रण ब्राह्मणीय ग्रंथों में हुआ था (पृष्ठ 65)

सेट 9 — अधीनता और संघर्ष: अस्पृश्य, चाण्डाल और मातंग जातक (कार्ड 88–97)

#प्रश्नउत्तर
★★88वर्ण व्यवस्था के बाहर माने गए कुछ वर्गों को किस रूप में वर्गीकृत किया गया, और अपने को पवित्र मानने वाले लोग उनके साथ क्या करते थे?‘अस्पृश्य’ के रूप में, जिससे सामाजिक भेदभाव और अधिक गहरा हो गया; अनुष्ठानों के संपादन से जुड़े कर्म पुनीत और ‘पवित्र’ माने जाते थे, इसलिए अपने को पवित्र मानने वाले लोग अस्पृश्यों से भोजन नहीं स्वीकार करते थे (पृष्ठ 65, 66)
★★89किन्हें चाण्डाल कहा जाता था, और वर्ण व्यवस्था वाले समाज में उन्हें कहाँ रखा जाता था?शवों की अंत्येष्टि और मृत पशुओं को छूने वालों को; उन्हें सबसे निम्न कोटि में रखा जाता था, और जो स्वयं को सामाजिक क्रम में सबसे ऊपर मानते थे वे उनका स्पर्श, यहाँ तक कि उन्हें देखना भी, अपवित्रकारी मानते थे (पृष्ठ 66)
★90मनुस्मृति में चाण्डालों के ‘कर्तव्यों’ की सूची में क्या-क्या था?गाँव के बाहर रहना; फेंके हुए बर्तनों का इस्तेमाल; मरे हुए लोगों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनना; रात्रि में गाँव और नगरों में चल-फिर नहीं सकना; संबंधियों से विहीन मृतकों की अंत्येष्टि करना और वधिक के रूप में कार्य करना (पृष्ठ 66)
★91चीन से आए बौद्ध भिक्षु फा-शिएन (लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी) के अनुसार अस्पृश्यों को सड़क पर चलते हुए क्या करना पड़ता था, और क्यों?करताल बजाकर अपने होने की सूचना देनी पड़ती थी, जिससे अन्य जन उन्हें देखने के दोष से बच जाएँ (पृष्ठ 66)
92चीनी तीर्थयात्री श्वैन-त्सांग (लगभग सातवीं शताब्दी ईसवी) के अनुसार वधिक और सफ़ाई करने वालों को कहाँ रहना पड़ता था?नगर से बाहर (पृष्ठ 66)
★93अब्राह्मणीय ग्रंथों में चित्रित चाण्डालों के जीवन का विश्लेषण करके इतिहासकार क्या जानना चाहते थे, और इन ग्रंथों का चित्रण ब्राह्मणीय ग्रंथों से कैसा मिला?यह जानना कि क्या चाण्डालों ने शास्त्रों में निर्धारित अपने हीन जीवन को स्वीकार कर लिया था; कभी-कभी दोनों चित्रणों में समानता है, तो कभी एक भिन्न सामाजिक वास्तविकता का भी संकेत मिलता है (पृष्ठ 66)
★94पालि में लिखी मातंग जातक में बोधिसत्त (पूर्वजन्म में बुद्ध) किस रूप में चित्रित हैं, और उनका जन्म कहाँ हुआ बताया गया है?एक चाण्डाल के रूप में; उन्होंने बनारस नगर के बाहर एक चाण्डाल के पुत्र के रूप में जन्म लिया, नाम मातंग था (पृष्ठ 67)
95मातंग जातक में व्यापारी की पुत्री दिथ्थ मांगलिक ने बनारस नगर में मातंग को देखकर क्या कहा, और मातंग ने विरोध में क्या किया?वह चिल्लाई “मैंने कुछ अशुभ देख लिया है।” और अपनी आँखें धोईं; विरोध में मातंग व्यापारी के घर के दरवाज़े के बाहर जाकर लेट गए, और सातवें रोज़ घर के लोगों ने दिथ्थ को उन्हें सौंप दिया (पृष्ठ 67)
96मातंग और दिथ्थ के पुत्र माण्डव्यकुमार ने बड़े होने पर क्या किया, और जब मातंग उसके दरवाज़े पर भोजन माँगने आए तो उसने क्या कहा?उसने तीन वेदों का अध्ययन किया और प्रत्येक दिन 16,000 ब्राह्मणों को भोजन कराता था; मातंग से कहा कि वे एक पतित आदमी प्रतीत होते हैं, इसलिए भिक्षा के योग्य नहीं, भोजन ब्राह्मणों के लिए है (पृष्ठ 67)
★97माण्डव्यकुमार के भिक्षा देने से मना करने पर मातंग ने क्या उत्तर दिया, और इसके बाद क्या हुआ?“जिन्हें अपने जन्म पर गर्व है पर अज्ञानी हैं वे भेंट के पात्र नहीं हैं। इसके विपरीत जो लोग दोषमुक्त हैं वे भेंट के योग्य हैं।” माण्डव्य ने क्रोधित होकर सेवकों से मातंग को घर से बाहर निकालने को कहा, और मातंग आकाश में जाकर अदृश्य हो गए (पृष्ठ 67)

सेट 10 — संपत्ति पर स्त्री और पुरुष के अधिकार (कार्ड 98–107)

#प्रश्नउत्तर
★98दास, भूमिहीन खेतिहर मज़दूर, शिकारी, मछुआरे, पशुपालक, किसान, ग्राममुखिया, शिल्पकार, वणिक और राजा के सामाजिक स्थान किस बात पर निर्भर करते थे?इस बात पर कि आर्थिक संसाधनों पर उनका कितना नियंत्रण है (पृष्ठ 68)
★99महाभारत के द्यूत प्रकरण में दुर्योधन ने किसे द्यूत क्रीड़ा के लिए आमंत्रित किया, और धोखा दिए जाने पर वे क्या-क्या दाँव पर लगाकर हार गए?युधिष्ठिर को; वे स्वर्ण, हस्ति, रथ, दास, सेना, कोष, राज्य तथा अपनी प्रजा की संपत्ति, अनुजों और फिर स्वयं को गँवा बैठे; इसके बाद उन्होंने पांडवों की सहपत्नी द्रौपदी को भी दाँव पर लगाया और उसे भी हार गए (पृष्ठ 68)
★★100धर्मसूत्र और धर्मशास्त्रों की स्मृति परंपरा के अनुसार माता-पिता की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति कैसे बाँटी जाती थी?संतानों के बीच समान रूप से विभाजित की जाती थी, जिसमें ज्येष्ठ पुत्र विशेष भाग का अधिकारी था (पृष्ठ 68)
★★101धर्मसूत्र और धर्मशास्त्रों में विवाह के समय स्त्री को मिले उपहारों पर उसका स्वामित्व माना जाता था। इस संपत्ति को क्या कहा जाता था, और उस पर किसका अधिकार नहीं होता था?स्त्रीधन (अर्थात् स्त्री का धन); उसे उनकी संतान विरासत के रूप में प्राप्त कर सकती थी और उस पर उनके पति का कोई अधिकार नहीं होता था (पृष्ठ 68)
★102स्त्रीधन पर पति का अधिकार न होने के बावजूद मनुस्मृति स्त्रियों को किस बात के विरुद्ध चेतावनी देती है?पति की आज्ञा के विरुद्ध पारिवारिक संपत्ति अथवा स्वयं अपने बहुमूल्य धन के गुप्त संचय के विरुद्ध (पृष्ठ 68)
★★103आरंभिक भारत में संपत्ति के बारे में अधिकतर साक्ष्य (अभिलेखीय व साहित्यिक) किस ओर इशारा करते हैं, और इससे स्त्री और पुरुष की सामाजिक हैसियत में क्या फ़र्क़ आया?यद्यपि उच्च वर्ग की महिलाएँ (जैसे धनाढ्य वाकाटक महिषी प्रभावती गुप्त) संसाधनों पर अपनी पैठ रखती थीं, सामान्यत: भूमि, पशु और धन पर पुरुषों का ही नियंत्रण था; इसलिए स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक हैसियत की भिन्नता संसाधनों पर उनके नियंत्रण की भिन्नता की वजह से अधिक प्रखर हुई (पृष्ठ 68)
★★104महाभारत के द्यूत प्रकरण के बारे में ऐसा माना जाता है कि द्रौपदी ने युधिष्ठिर से कौन-सा प्रश्न किया था? इसके उत्तर में कौन-से दो मत प्रस्तुत किए गए?प्रश्न था कि युधिष्ठिर उसे दाँव पर लगाने से पहले स्वयं को हार बैठे थे अथवा नहीं। पहला मत: स्वयं को हारने के बाद भी द्रौपदी को दाँव पर लगाना अनुचित नहीं, क्योंकि पत्नी पर पति का नियंत्रण सदैव रहता है। दूसरा मत: दासत्व स्वीकार करने वाला पुरुष (जैसे उस क्षण युधिष्ठिर) किसी और को दाँव पर नहीं लगा सकता (पृष्ठ 68)
★105द्यूत प्रकरण में द्रौपदी के प्रश्न (क्या युधिष्ठिर उसे दाँव पर लगाने से पहले स्वयं को हार बैठे थे) पर दो मत सामने आए। महाभारत में इस विवाद का क्या हुआ, और अंत में धृतराष्ट्र ने क्या किया?इन मुद्दों का कोई निष्कर्ष नहीं निकला; अंतत: धृतराष्ट्र ने सभी पांडवों और द्रौपदी को उनकी निजी स्वतंत्रता पुन: लौटा दी (पृष्ठ 68)
★106मनुस्मृति के अनुसार पुरुषों के लिए धन अर्जित करने के कितने तरीके हैं, और वे क्या हैं?सात: विरासत, खोज, खरीद, विजित करके, निवेश, कार्य द्वारा तथा सज्जनों द्वारा दी गई भेंट को स्वीकार करके (पृष्ठ 69)
★107मनुस्मृति के अनुसार स्त्रियों के लिए संपत्ति अर्जन के कितने तरीके हैं, और वे क्या हैं?छह: वैवाहिक अग्नि के सामने मिली भेंट; वधूगमन के समय मिली भेंट; स्नेह के प्रतीक के रूप में मिला उपहार; भ्राता, माता और पिता द्वारा दिए गए उपहार; परवर्ती काल में मिली भेंट; और वह सब कुछ जो अनुरागी पति से उसे प्राप्त हो (पृष्ठ 69)

सेट 11 — वर्ण, संपत्ति और बौद्ध आलोचना (कार्ड 108–112)

#प्रश्नउत्तर
★108ब्राह्मणीय ग्रंथों के अनुसार संपत्ति पर अधिकार का लैंगिक आधार के अतिरिक्त एक और आधार क्या था, और शूद्रों के लिए एकमात्र ‘जीविका’ क्या थी?वर्ण; शूद्रों के लिए एकमात्र ‘जीविका’ ऐसी सेवा थी जिसमें हमेशा उनकी इच्छा शामिल नहीं होती थी (पृष्ठ 69)
★★109ब्राह्मणीय विधानों को वास्तव में लागू किया जाता तो सबसे धनी कौन होते? यह बात सामाजिक वास्तविकता से कितनी मेल खाती थी?ब्राह्मण और क्षत्रिय; यह तथ्य कुछ हद तक सामाजिक वास्तविकता से मेल खाता था: साहित्यिक परंपरा में राजा अधिकतर धनी चित्रित होते हैं, पुरोहित भी सामान्यत: धनी दर्शाए जाते हैं, पर कभी-कभी निर्धन ब्राह्मण का भी चित्रण मिलता है (पृष्ठ 69)
★★110वर्ण व्यवस्था की सर्वविदित आलोचनाएँ किस परंपरा में और लगभग किस काल से विकसित हुईं? बौद्धों ने सामाजिक विषमता के बारे में क्या कहा?प्रारंभिक बौद्ध धर्म में, लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से; बौद्धों ने माना कि समाज में विषमता मौजूद थी, किंतु यह भेद न तो नैसर्गिक थे और न ही स्थायी; उन्होंने जन्म के आधार पर सामाजिक प्रतिष्ठा को अस्वीकार किया (पृष्ठ 69)
★111पालि भाषा के बौद्ध ग्रंथ मज्झिमनिकाय की कहानी (स्रोत 13) में राजा अवन्तिपुत्र ने बुद्ध के अनुयायी कच्चन से ब्राह्मणों के किस मत के बारे में राय पूछी?कि ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ हैं और अन्य जातियाँ निम्न कोटि की; ब्राह्मण का वर्ण शुभ्र है और अन्य जातियाँ काली; केवल ब्राह्मण पवित्र हैं; ब्राह्मण ब्रह्मा के मुख से जन्मे हैं और ब्रह्मा के पुत्र तथा वंशज हैं। किताब बताती है कि यह कहानी अक्षरश: सत्य नहीं थी, पर यह बौद्धों के वर्ण संबंधी रवैये को दर्शाती है (पृष्ठ 70)
★★112मज्झिमनिकाय की कहानी (स्रोत 13) में कच्चन के प्रश्नों के बाद अवन्तिपुत्र ने चारों वर्णों के बारे में क्या स्वीकार किया, और किस उदाहरण के सहारे?उदाहरण धनी शूद्र का था: यदि शूद्र के पास धन, अनाज, स्वर्ण या रजत हो तो वह दूसरे शूद्र को, और क्षत्रिय, ब्राह्मण या वैश्य को भी, अपना आज्ञावाही सेवक बना सकता था। तब कच्चन ने पूछा कि क्या फिर चारों वर्ण एकदम समान नहीं हैं, और अवन्तिपुत्र ने स्वीकार किया कि इस आधार पर चारों वर्णों में कोई भेद नहीं है (पृष्ठ 70)

सेट 12 — तमिल सरदार और बौद्धों का सामाजिक अनुबंध (कार्ड 113–119)

#प्रश्नउत्तर
★113संपत्ति के आधार पर प्रतिष्ठा के एक वैकल्पिक रूप में, प्राचीन तमिलकम् में किस आदर्श को संजोया जाता था? वहाँ 2000 वर्ष पहले क्या थीं?दानशील आदमी का सम्मान किया जाता था; कृपण व्यक्ति अथवा वह जो स्वयं अपने लिए संपत्ति संग्रह करता था, घृणा का पात्र होता था। 2000 वर्ष पहले वहाँ अनेक सरदारियाँ थीं; सरदार अपनी प्रशंसा गाने वाले चारण और कवियों के आश्रयदाता होते थे (पृष्ठ 70)
★★114तमिल भाषा के संगम साहित्यिक संग्रह से सामाजिक और आर्थिक संबंधों के बारे में क्या संकेत मिलता है?धनी और निर्धन के बीच विषमताएँ थीं, पर जिन लोगों का संसाधनों पर नियंत्रण था उनसे अपेक्षा की जाती थी कि वे मिल-बाँटकर उसका उपयोग करेंगे (पृष्ठ 70, 71)
★115तमिल संगम साहित्य (लगभग प्रथम शताब्दी ईसवी) की पद्यावली पुरनानूरु (किताब में ‘पुरुनारुरू’ छपा है) के अंश (स्रोत 14) में चारण अपने आश्रयदाता का चित्रण कैसे करता है?आश्रयदाता के पास रोज़ दूसरों पर खर्च करने के लिए धन नहीं है, पर वह इतना ओछा भी नहीं कि कुछ न होने की बात कहकर दान देने से मना कर दे; वह इरंतई में रहता है, दानप्रिय है और चारणों की क्षुधा का शत्रु है। चारण प्रार्थना करें और भूख से क्षीण पसलियाँ दिखाएँ, तो वह गाँव के लोहार से युद्ध के लिए लंबा भाला तैयार करने को कहेगा (पृष्ठ 71)
★116बौद्ध ग्रंथ सुत्तपिटक में वर्णित मिथक के अनुसार आरंभ में मानव, वनस्पति जगत और सभी जीवों की स्थिति कैसी थी?मानव पूर्णतया विकसित नहीं थे और वनस्पति जगत भी अविकसित था; सभी जीव शांति के एक निर्बाध लोक में रहते थे और प्रकृति से उतना ही ग्रहण करते थे जितनी एक समय के भोजन की आवश्यकता होती है (पृष्ठ 72)
★117सुत्तपिटक के मिथक में व्यवस्था पतनशील होने पर मनुष्य कैसे हो गए, उन्होंने किसे चुनने का विचार किया, और उसे कौन-सी उपाधि मिलनी थी?मनुष्य अधिकाधिक लालची, प्रतिहिंसक और कपटी हो गए; उन्होंने सोचा कि एक ऐसे मनुष्य का चयन करें जो उचित बात पर क्रोधित हो, जिसे प्रताड़ित किया जाना चाहिए उसे प्रताड़ित करे और जिसे निष्कासित किया जाना हो उसे निष्कासित करे; बदले में उसे चावल का अंश देंगे। सब लोगों द्वारा चुने जाने के कारण उसे महासम्मत्त की उपाधि प्राप्त होगी (पृष्ठ 72)
★★118सुत्तपिटक के मिथक से राजा के पद के बारे में क्या ज्ञात होता है, और ‘कर’ क्या था?राजा का पद लोगों द्वारा चुने जाने पर निर्भर करता था; ‘कर’ वह मूल्य था जो लोग राजा की इस सेवा के बदले उसे देते थे (पृष्ठ 72)
★★119सुत्तपिटक का मिथक आर्थिक और सामाजिक संबंधों के बनने के बारे में क्या दर्शाता है, और भविष्य के बारे में इसका क्या आशय निकलता है?इन संबंधों को बनाने में मानवीय कर्म का बड़ा हाथ था; यदि मनुष्य स्वयं एक प्रणाली को बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार थे तो भविष्य में उसमें परिवर्तन भी ला सकते थे (पृष्ठ 72)

सेट 13 — इतिहासकार महाभारत को कैसे परखते हैं (कार्ड 120–128)

#प्रश्नउत्तर
★★120किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय इतिहासकार किन पहलुओं पर विचार करते हैं?ग्रंथ की भाषा; ग्रंथ का प्रकार; लेखक(कों) के दृष्टिकोण और विचार; श्रोता (क्योंकि लेखकों ने रचना करते समय श्रोताओं की अभिरुचि पर ध्यान दिया होगा); संभावित संकलन/रचना काल और रचनाभूमि। इन सब का जायज़ा लेने के बाद ही वे विषयवस्तु का इतिहास के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल करते हैं (पृष्ठ 72, 73)
★121ग्रंथ की भाषा देखते समय इतिहासकार किन भाषाओं में फ़र्क़ करते हैं?पालि, प्राकृत अथवा तमिल, जो आम लोगों द्वारा बोली जाती थी, और संस्कृत, जो विशिष्ट रूप से पुरोहितों और खास वर्ग द्वारा प्रयोग में लाई जाती थी (पृष्ठ 72)
122ग्रंथ के प्रकार के बारे में इतिहासकार क्या देखते हैं?क्या वे ग्रंथ ‘मंत्र’ थे जो अनुष्ठानकर्ताओं द्वारा पढ़े और उच्चरित किए जाते थे, अथवा ‘कथा’ ग्रंथ थे जिन्हें लोग पढ़ और सुन सकते थे तथा दिलचस्प होने पर दुबारा सुनाया जा सकता था (पृष्ठ 72)
★123किताब में महाभारत का जो पाठ इस्तेमाल हुआ है वह किस भाषा में है? उसकी संस्कृत के बारे में क्या कहा गया है?संस्कृत में (अन्य भाषाओं में भी इसके संस्करण मिलते हैं); महाभारत की संस्कृत वेदों अथवा प्रशस्तियों की संस्कृत से कहीं अधिक सरल है, इसलिए संभव है कि महाभारत को व्यापक स्तर पर समझा जाता था (पृष्ठ 73)
★★124इतिहासकार महाभारत की विषयवस्तु को किन दो मुख्य शीर्षकों के अंतर्गत रखते हैं, और उनमें क्या है?आख्यान, जिसमें कहानियों का संग्रह है, और उपदेशात्मक, जिसमें सामाजिक आचार-विचार के मानदंडों का चित्रण है; यह विभाजन पूरी तरह अलग नहीं है, क्योंकि उपदेशात्मक अंशों में भी कहानियाँ होती हैं और आख्यानों में अकसर समाज के लिए एक सबक निहित रहता है (पृष्ठ 73)
★★125महाभारत के मूल रूप के बारे में अधिकतर इतिहासकार किस बात पर एकमत हैं?कि महाभारत वस्तुत: एक भाग में नाटकीय कथानक था जिसमें उपदेशात्मक अंश बाद में जोड़े गए (पृष्ठ 73)
★126महाभारत का सबसे महत्वपूर्ण उपदेशात्मक अंश कौन-सा है?भगवद्गीता, जहाँ कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हैं (पृष्ठ 73)
★127आरंभिक संस्कृत परंपरा में महाभारत को किस श्रेणी में रखा गया है, और उस शब्द का अर्थ क्या है?‘इतिहास’ की श्रेणी में; इस शब्द का अर्थ है ‘ऐसा ही था’ (पृष्ठ 74)
★★128! क्या महाभारत में सचमुच हुए किसी युद्ध का स्मरण किया जा रहा था? इस बारे में किताब क्या कहती है, और इतिहासकारों के मत क्या हैं?निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि स्वजनों के बीच हुए युद्ध की स्मृति ही महाभारत का मुख्य कथानक है; अन्य इंगित करते हैं कि युद्ध की पुष्टि किसी और साक्ष्य से नहीं होती (पृष्ठ 74)

सेट 14 — महाभारत के रचयिता और रचना के चरण (कार्ड 129–135)

#प्रश्नउत्तर
★129किताब के अनुसार महाभारत की मूल कथा के रचयिता संभवत: कौन थे, और वे क्या करते थे?भाट सारथी, जिन्हें ‘सूत’ कहा जाता था; वे क्षत्रिय योद्धाओं के साथ युद्धक्षेत्र में जाते थे और उनकी विजय व उपलब्धियों के बारे में कविताएँ लिखते थे (पृष्ठ 74)
★130सूतों की रचनाओं का प्रेषण किस रूप में हुआ? पाँचवीं शताब्दी ई.पू. से किसने इस कथा परंपरा पर अधिकार कर लिया, और उस काल में कुरु और पांचाल किस रूप में उभर रहे थे?प्रेषण मौखिक रूप में हुआ; ब्राह्मणों ने इस कथा परंपरा पर अपना अधिकार कर लिया और इसे लिखा। यह वह काल था जब कुरु और पांचाल, जिनके इर्द-गिर्द महाभारत की कथा घूमती है, मात्र सरदारी से राजतंत्र के रूप में उभर रहे थे (पृष्ठ 74)
★131कुरु और पांचाल के सरदारी से राजतंत्र बनने के समय की उथल-पुथल के बारे में किताब क्या संभावना बताती है?यह भी संभव है कि नए राज्यों की स्थापना के समय होने वाली उथल-पुथल के कारण पुराने सामाजिक मूल्यों के स्थान पर नवीन मानदंडों की स्थापना हुई, जिनका महाभारत की कहानी के कुछ भागों में वर्णन मिलता है (पृष्ठ 75)
132परंपरा के अनुसार व्यास ने महाभारत किसे लिखवाया? महाभारत के फारसी अनुवाद (लगभग 1740-50) से लिए गए चित्र 3.9 में उसे किस रूप में दिखाया गया है?श्रीगणेश को; चित्र में उन्हें लिपिक के रूप में दिखाया गया है (पृष्ठ 74)
★★133लगभग 200 ई.पू. से 200 ईसवी के बीच महाभारत के रचनाकाल का कौन-सा चरण दिखता है?विष्णु देवता की आराधना प्रभावी हो रही थी, तथा श्रीकृष्ण को, जो महाकाव्य के महत्वपूर्ण नायकों में से हैं, विष्णु का रूप बताया जा रहा था (पृष्ठ 75)
★134लगभग 200-400 ईसवी के बीच महाभारत में क्या जोड़ा गया?मनुस्मृति से मिलते-जुलते बृहत उपदेशात्मक प्रकरण (पृष्ठ 75)
★★135समय के साथ हुए परिवर्धनों से महाभारत का आकार कितना बढ़ा, और साहित्यिक परंपरा में इसके रचयिता कौन माने जाते हैं?ग्रंथ अपने प्रारंभिक रूप में संभवत: 10,000 श्लोकों से भी कम रहा होगा और बढ़कर एक लाख श्लोकों वाला हो गया; साहित्यिक परंपरा में इसके रचयिता ऋषि व्यास माने जाते हैं (पृष्ठ 75)

सेट 15 — हस्तिनापुर की खोज (कार्ड 136–142)

#प्रश्नउत्तर
★★1361951-52 में पुरातत्ववेत्ता बी.बी. लाल ने कहाँ उत्खनन किया?मेरठ ज़िले (उ.प्र.) के हस्तिनापुर नामक एक गाँव में (पृष्ठ 75)
★★137! बी.बी. लाल ने मेरठ ज़िले के हस्तिनापुर गाँव में उत्खनन किया। क्या यह पक्का हो गया कि यही महाभारत में वर्णित कुरुओं की राजधानी हस्तिनापुर था? किताब क्या कहती है?पक्के तौर पर नहीं। किताब के अनुसार नामों की समानता मात्र एक संयोग हो सकती है; किंतु गंगा के ऊपरी दोआब वाले क्षेत्र में इस पुरास्थल का होना, जहाँ कुरु राज्य भी स्थित था, इस ओर इंगित करता है कि यह पुरास्थल कुरुओं की राजधानी हस्तिनापुर हो सकता है (पृष्ठ 75)
★138बी.बी. लाल को हस्तिनापुर में आबादी के कितने स्तरों के साक्ष्य मिले थे, और किताब के विश्लेषण के लिए कौन-से स्तर महत्वपूर्ण हैं?पाँच स्तरों के; दूसरा और तीसरा स्तर (पृष्ठ 75)
★139हस्तिनापुर के दूसरे स्तर (लगभग बारहवीं से सातवीं शताब्दी ई.पू.) पर मिले घरों के बारे में बी.बी. लाल क्या कहते हैं?सीमित क्षेत्र के उत्खनन में आवास गृहों की कोई निश्चित परियोजना नहीं मिली, किंतु मिट्टी की बनी दीवारें और कच्ची मिट्टी की ईंटें अवश्य मिलीं; सरकंडे की छाप वाले मिट्टी के पलस्तर से लगता है कि कुछ घरों की दीवारें सरकंडों की बनी थीं जिन पर मिट्टी का पलस्तर चढ़ा दिया जाता था (पृष्ठ 75)
★140हस्तिनापुर के तीसरे स्तर (लगभग छठी से तीसरी शताब्दी ई.पू.) के घरों और जल-निकासी के बारे में बी.बी. लाल क्या कहते हैं?घर कच्ची और कुछ पक्की ईंटों के बने थे; शोषक-घट और ईंटों के नाले गंदे पानी के निकास के लिए इस्तेमाल किए जाते थे; वलय-कूपों का इस्तेमाल कुओं और मल की निकासी वाले गर्तों, दोनों रूपों में किया जाता था (पृष्ठ 75)
★141महाभारत के आदिपर्वन् में हस्तिनापुर नगर का चित्रण कैसे मिलता है (स्रोत 15)?नगर समुद्र की भाँति भरा हुआ था और सैकड़ों प्रासादों से संकुलित था; इसके सिंहद्वार, तोरण और कंगूरे सघन बादलों की तरह घुमड़ रहे थे; यह इंद्र की नगरी के समान शोभायमान था (पृष्ठ 76)
★★142महाभारत के आदिपर्वन् में हस्तिनापुर के उस चित्रण (स्रोत 15) के बारे में किताब कौन-सी दो संभावनाएँ रखती है?या तो नगर का चित्रण महाकाव्य के मुख्य कथानक में बाद में (ईसा पूर्व छठी शताब्दी के पश्चात) जोड़ दिया गया, जब इस क्षेत्र में नगरों का विकास हुआ; या यह मात्र कवियों की कल्पना की उड़ान थी, जिसकी अन्य किसी साक्ष्य के साथ तुलना कर उसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता (पृष्ठ 76)

सेट 16 — द्रौपदी का विवाह और बहुपति प्रथा (कार्ड 143–150)

#प्रश्नउत्तर
★★143किताब के अनुसार महाभारत की सबसे चुनौतीपूर्ण उपकथा कौन-सी है, और वह किस तरह के विवाह का उदाहरण है?द्रौपदी से पांडवों के विवाह की; यह बहुपति विवाह का उदाहरण है, जो महाभारत की कथा का अभिन्न अंग है। लेखक(कों) ने विभिन्न तरीकों से इसका स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया है (पृष्ठ 76)
★144महाभारत के स्रोत 16 में पांचाल नरेश द्रुपद के स्वयंवर की शर्त क्या थी, और प्रतियोगिता किसने जीती?शर्त थी कि धनुष की चाप चढ़ाकर निशाने पर तीर मारा जाए; विजेता उनकी पुत्री द्रौपदी से विवाह के लिए चुना जाएगा। अर्जुन ने प्रतियोगिता जीती और द्रौपदी ने उसे वरमाला पहनाई (पृष्ठ 76)
★★145स्रोत 16 के अनुसार द्रौपदी को लेकर पांडव माता कुंती के पास गए तो क्या हुआ, और युधिष्ठिर ने क्या निर्णय लिया?कुंती ने बिना देखे ही उन्हें लाई गई वस्तु को आपस में बाँट लेने को कहा; द्रौपदी को देखकर उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ, किंतु उनकी आज्ञा की अवहेलना नहीं की जा सकती थी; बहुत सोच-विचार के बाद युधिष्ठिर ने निर्णय लिया कि द्रौपदी उन पाँचों की पत्नी होगी (पृष्ठ 76)
★146स्रोत 16 के अनुसार जब द्रुपद को यह निर्णय बताया गया तो उन्होंने क्या किया? ऋषि व्यास ने उन्हें क्या बताया?द्रुपद ने इसका विरोध किया; व्यास ने बताया कि पांडव वास्तव में इंद्र के अवतार थे और उनकी पत्नी ने ही द्रौपदी के रूप में जन्म लिया था; अत: नियति ने ही उन सबका साथ निश्चित कर दिया था (पृष्ठ 76)
★147स्रोत 16 में ऋषि व्यास ने द्रुपद को युवा स्त्री की कौन-सी दूसरी कहानी सुनाई, और द्रुपद ने क्या किया?एक बार एक युवा स्त्री ने पति प्राप्ति के लिए शिव की आराधना की और उत्साह के अतिरेक में एक के बजाय पाँच बार पति प्राप्ति का वर माँग लिया; इसी स्त्री ने द्रौपदी के रूप में जन्म लिया तथा शिव ने उसकी प्रार्थना पूरी की। इन कहानियों से संतुष्ट होकर द्रुपद ने इस विवाह को अपनी सहमति दी (पृष्ठ 76)
★★148महाभारत में बहुपति विवाह के चित्रण और स्रोत 16 के अलग-अलग स्पष्टीकरणों से वर्तमान इतिहासकार क्या अनुमान लगाते हैं?बहुपति विवाह का चित्रण इस ओर इंगित करता है कि संभवत: यह प्रथा शासकों के विशिष्ट वर्ग में मौजूद थी; किंतु विभिन्न स्पष्टीकरण यह भी व्यंजित करते हैं कि समय के साथ बहुपति प्रथा धीरे-धीरे लोगों के बीच अमान्य होती चली गई (पृष्ठ 77)
★149बहुपति प्रथा के बारे में कुछ इतिहासकार और कौन-सी बातें बताते हैं?ब्राह्मणों की दृष्टि में यह प्रथा अमान्य और अवांछित थी, फिर भी यह हिमालय क्षेत्र में प्रचलन में थी (और वहाँ प्रचलित है); यह भी कहा जाता है कि युद्ध के समय स्त्रियों की कमी के कारण इसे अपनाया गया, यानी संकट की स्थिति में (पृष्ठ 77)
★★150कुछ आरंभिक स्रोत पुष्टि करते हैं कि बहुपति प्रथा न तो एकमात्र विवाह पद्धति थी और न सबसे अधिक प्रचलित। फिर भी महाभारत के रचनाकारों ने इसे प्रमुख पात्रों से जोड़ा। इस पर किताब हमें क्या ध्यान रखने को कहती है?कि सृजनात्मक साहित्य की अपनी कथा संबंधी ज़रूरतें होती हैं, जो हमेशा समाज में मौजूद वास्तविकताओं को नहीं दर्शातीं (पृष्ठ 77)

सेट 17 — एक गतिशील ग्रंथ (कार्ड 151–156)

#प्रश्नउत्तर
★★151किताब के अनुसार महाभारत का विकास संस्कृत पाठ के साथ समाप्त नहीं हुआ। शताब्दियों में इस महाकाव्य के साथ क्या-क्या हुआ?इसके अनेक पाठान्तर भिन्न-भिन्न भाषाओं में लिखे गए; अनेक कहानियाँ, जिनका उद्भव एक क्षेत्र विशेष में हुआ था, इसमें समाहित कर ली गईं; मुख्य कथा की अनेक पुनर्व्याख्याएँ की गईं; प्रसंगों को मूर्तिकला और चित्रों में दर्शाया गया; इसने नाटकों और नृत्य कलाओं के लिए विषय-वस्तु प्रदान की (पृष्ठ 77)
★152महाभारत के एक प्रसंग का रूपांतरण किस समसामयिक बांग्ला लेखिका ने किया है, वे किसके लिए प्रसिद्ध हैं, और उनकी लघु कथा का शीर्षक क्या है?महाश्वेता देवी ने, जो शोषण के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाने के लिए प्रसिद्ध हैं; लघु कथा का शीर्षक “कुंती ओ निषादी” है। उन्होंने मुख्य कथावस्तु के लिए अन्य विकल्प खोजे हैं और उन प्रश्नों की ओर ध्यान खींचा है जिन पर संस्कृत पाठ पूर्णतया मूक है (पृष्ठ 77, 78)
★153संस्कृत पाठ में महाभारत के लाक्षागृह के प्रसंग में क्या होता है?दुर्योधन पांडवों को छल से लाक्षागृह में जलाकर मार देना चाहता है; पहले से मिली चेतावनी के कारण पांडव सुरंग खोदकर भाग निकलते हैं। कुंती के भोज में ब्राह्मण आमंत्रित होते हैं, पर एक निषादी भी अपने पाँच पुत्रों के साथ आती है; वे गहरी नींद में सो जाते हैं और पांडवों की लगाई आग में भस्म हो जाते हैं। जले शव मिलने पर लोग सोचते हैं कि पांडव मर गए (पृष्ठ 78)
★154महाश्वेता देवी ने “कुंती ओ निषादी” का कथानक कहाँ से शुरू किया, और कहानी कहाँ घटित होती है?वहाँ से जहाँ महाभारत में लाक्षागृह के प्रसंग का अंत होता है; उन्होंने कहानी का संयोजन एक वनप्रांतर में किया है जहाँ महाभारत के युद्ध के बाद कुंती रहने लगती हैं; कुंती के पास अब अपने अतीत के विषय में सोचने का समय है, और पृथ्वी से बातें करते हुए वह अपनी त्रुटियों को अंगीकार करती हैं (पृष्ठ 78)
★155महाश्वेता देवी की कहानी “कुंती ओ निषादी” में निषादी कुंती से क्या पूछती है और क्या कहती है?वह पूछती है कि क्या उन्हें लाक्षागृह की याद है। कुंती के यह पूछने पर कि क्या वह वही निषादी है, वह बताती है कि मरी हुई निषादी उसकी सास थी, और कहती है कि कुंती को अपने अतीत पर विचार करते समय एक बार भी उन छह निर्दोष लोगों की याद नहीं आई जिन्हें प्राणों से हाथ धोना पड़ा था, क्योंकि वह अपनी और अपने पुत्रों की जान बचाना चाहती थीं (पृष्ठ 78)
★156महाश्वेता देवी की कहानी “कुंती ओ निषादी” का अंत कैसा है?जिस समय कुंती और निषादी बातें कर रही थीं, आग की लपटें करीब आ रही थीं; निषादी तो अपने प्राण बचाकर निकल गई, किंतु कुंती जहाँ खड़ी थी वहीं रह गई (पृष्ठ 78)

सेट 18 — कालरेखाएँ (कार्ड 157–162)

#प्रश्नउत्तर
★★157कालरेखा 1 (प्रमुख साहित्यिक परंपराएँ) के अनुसार रामायण और महाभारत का काल क्या है, और वे किस भाषा में हैं?लगभग 500 ई.पू.-400 ईसवी; संस्कृत में (पृष्ठ 79)
★★158कालरेखा 1 के अनुसार मनुस्मृति का काल क्या है, और उसी पंक्ति में किस और रचना का उल्लेख है?लगभग 200 ई.पू.-200 ईसवी (संस्कृत में); उसी पंक्ति में तमिल संगम साहित्य की रचना और संकलन (पृष्ठ 79)
★159कालरेखा 1 में ‘लगभग 500 ई.पू.’ से शुरू होने वाली चार प्रविष्टियाँ कौन-सी हैं? उनकी भाषाएँ भी बताइए।लगभग 500 ई.पू.: पाणिनि की अष्टाध्यायी, संस्कृत व्याकरण; लगभग 500-200 ई.पू.: प्रमुख धर्मसूत्र (संस्कृत में); लगभग 500-100 ई.पू.: आरंभिक बौद्ध ग्रंथ त्रिपिटक सहित (पालि में); लगभग 500 ई.पू.-400 ईसवी: रामायण और महाभारत (संस्कृत में) (पृष्ठ 79)
★160कालरेखा 1 के अनुसार चरक और सुश्रुत संहिता, पुराणों का संकलन, भरतमुनि का नाट्यशास्त्र और अन्य धर्मशास्त्र लगभग किन-किन कालों के हैं?चरक और सुश्रुत संहिता (आयुर्वेद के ग्रंथ): लगभग 100 ईसवी; पुराणों का संकलन: लगभग 200 ईसवी से; भरतमुनि का नाट्यशास्त्र: लगभग 300 ईसवी; अन्य धर्मशास्त्र: लगभग 300-600 ईसवी; सब संस्कृत में (पृष्ठ 79)
★161कालरेखा 1 में लगभग 400-500 ईसवी की प्रविष्टि में क्या-क्या है?संस्कृत नाटक कालिदास के साहित्य सहित; खगोल व गणित शास्त्र पर आर्यभट्ट और वराहमिहिर के ग्रंथ (संस्कृत में); जैन ग्रंथों का संग्रहण (प्राकृत में) (पृष्ठ 79)
★162कालरेखा 2 (महाभारत के अध्ययन में प्रमुख कीर्तिमान, बीसवीं शताब्दी) में 1919-66 और 1973 की प्रविष्टियाँ क्या हैं?1919-66: महाभारत के समालोचनात्मक संस्करण की परिकल्पना और प्रकाशन; 1973: जे.ए.बी. वैन बियुटेनेन द्वारा समालोचनात्मक संस्करण का अंग्रेज़ी अनुवाद आरंभ (पृष्ठ 79)

अंतिम पाँच मिनट — यही दोहराइए

अध्याय का काल: लगभग 600 ई.पू. से 600 ईसवी · महाभारत एक लाख श्लोकों से अधिक का महाकाव्य, रचना एक हज़ार वर्ष तक (लगभग 500 ई.पू. से) · मुख्य कथा दो परिवारों के बीच युद्ध

समालोचनात्मक संस्करण: 1919 में वी.एस. सुकथांकर के नेतृत्व में शुरू · 13,000 पृष्ठ, सैंतालीस वर्ष · उन श्लोकों का चयन जो लगभग सभी पांडुलिपियों में पाए गए · कालरेखा 2: 1919-66 प्रकाशन, 1973 अंग्रेज़ी अनुवाद आरंभ

बंधुता और विवाह: परिवार के लिए कुल, बांधवों के बड़े समूह के लिए ज्ञाति · पितृवंशिकता लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से · विवाह के आठ प्रकार, पहले चार ‘उत्तम’ · ऋग्वेद का विवाह मंत्र संभवत: लगभग 1000 ई.पू. में जोड़ा गया · गोत्र वैदिक ऋषि के नाम पर

सातवाहन, शक और श्रेणी: सातवाहन लगभग दूसरी शताब्दी ई.पू. से दूसरी शताब्दी ईसवी तक · शक राजा रुद्रदामन (लगभग दूसरी शताब्दी ईसवी) · मंदसौर (मध्य प्रदेश) के लगभग पाँचवीं शताब्दी ईसवी के अभिलेख में रेशम बुनकरों की श्रेणी, जो लाट (गुजरात) से आकर मंदसौर (तब दशपुर) बसे

मातंग जातक: पालि में लिखी कथा; बोधिसत्त बनारस के बाहर चाण्डाल मातंग · व्यापारी की पुत्री दिथ्थ मांगलिक से विवाह · पुत्र माण्डव्यकुमार प्रत्येक दिन 16,000 ब्राह्मणों को भोजन कराता था

संपत्ति और बौद्ध दृष्टि: स्त्रीधन पर पति का अधिकार नहीं · मनुस्मृति: पुरुषों के लिए धन अर्जित करने के सात तरीके, स्त्रियों के लिए छह · बौद्धों ने जन्म के आधार पर प्रतिष्ठा अस्वीकार की (लगभग छठी शताब्दी ई.पू. से) · सुत्तपिटक: महासम्मत्त, ‘कर’ राजा की सेवा का मूल्य

महाभारत की रचना के चरण: सूत भाट सारथी (मौखिक) → पाँचवीं शताब्दी ई.पू. से ब्राह्मण · लगभग 200 ई.पू.-200 ईसवी: विष्णु की आराधना, श्रीकृष्ण को विष्णु का रूप · लगभग 200-400 ईसवी: मनुस्मृति जैसे उपदेशात्मक प्रकरण · 10,000 श्लोकों से कम से एक लाख तक

हस्तिनापुर, द्रौपदी, गतिशील ग्रंथ: बी.बी. लाल 1951-52, मेरठ ज़िले का हस्तिनापुर · दूसरा स्तर लगभग बारहवीं से सातवीं, तीसरा लगभग छठी से तीसरी शताब्दी ई.पू. · बहुपति प्रथा: संभवत: शासकों के विशिष्ट वर्ग में, समय के साथ अमान्य; हिमालय क्षेत्र में · सृजनात्मक साहित्य की कथा संबंधी ज़रूरतें · महाश्वेता देवी, “कुंती ओ निषादी”